Meri mummy ki chudai sex story: मेरी माँ का नाम सविता है। वह 40 साल की है। दिखने में बहुत ही सुंदर है। पर मुझे नहीं पता था कि उसे सेक्स की बहुत ज़रूरत है। यह बात मेरे को कभी पता नहीं चलती पर एक दिन जब मैं मेरे दोस्त रोहन के घर मिलने गया तब रोहन अपने दोस्तों के साथ मेरी माँ के बारे में बात कर रहे थे।
उनमें से अकरम कहता है, “यार विशाल की माँ तो बहुत ही खूबसूरत है। उसके बोब्स, उसकी गांड क्या लगती है।” उसके पापा को भी वो बहुत अच्छी लगती है। होली वाले दिन उसके पापा ने उस रांड के बोब्स को खूब दबाया था। “यार क्या करूं मैं उसे चोदना चाहता हूं यार। यदि वो मेरी माँ होती तो रोज़ मैं उसे चोदता।”
उनमें से एक दोस्त कहता है, “यार मैं तो रोज़ रात को सविता आंटी के बारे में सोच कर मूठ मारता हूं यार।” जब भी मैं विशाल के घर रात को जाता हूं तो उसकी माँ नाईटी में बहुत ही सेक्सी दिखती है यार। मेरा तो मन करता है कि उसे वहीं पर पकड़ लूं और उसे चोद दूं। दोस्तों रोहन मेरा सबसे अच्छा दोस्त है। वह बोल रहा था कि मेरे को तो लगता है कि सच में उसे सेक्स की ज़रूरत है क्योंकि विशाल के पापा तो घर में रहते ही नहीं हैं। तभी तो वो लड़कों को उत्तेजित करने के लिए ऐसे कपड़े पहनती है।
मैं गया और रोहन को मारने लगा तो दोस्तों ने आकर छुड़ा दिया। रोहन के दादा क्रिमिनल हैं। वो बोला, “मैं आ रहा हूं तेरे घर तेरी माँ को चोदने के लिए।” मैं भाग कर घर चला गया। दूसरे दिन बाथरूम में नहा रहा था। जब कि मेरी राखी बहन सो रही थी और माँ आराम कर रही थी। दरवाजे पर टक-टक हुआ। “अरे राखी देख ज़रा कौन है दरवाजे पर इस वक्त।” माँ ने राखी को आवाज़ दी।
राखी ने जब दरवाजा खोला तो 8 या 10 लोग उसे दरवाजे से अंदर धकेलते हुए अंदर घुस आए। मैं बाथरूम से देख रहा था। सब से पीछे रोहन था अकरम के साथ। “अरे क्या हुआ रोहन बेटा क्या हुआ।” वो दारू पिया हुआ था। उसे सिर पर सेक्स सवार था। मम्मी और बहन को देखा और उसकी आँखों की चमक और भर गई।
माँ और बहन के पास गया। “क्या मस्त हो तुम दोनों।” रोहन मम्मी के बोब्स पर हाथ रखा और हल्का सा दबाया। दूसरे हाथ से माँ के लेफ्ट बोब्स को दबा रहा था। अकरम ने आवाज़ दी, “यार मेरे को एक आइडिया आया है। ऐसा करो तीनों को ले चलो।” रोहन की नज़र अब माँ पर अटक गई। रोहन का लंड तन गया था। मम्मी और बहन का हुस्न देख कर अकरम और बाकी के दोस्तों ने हमें पकड़कर के अपने घर ले गए।
अकरम ने रोहन से कहा, “माँ बेटी का क्या करना है यार।” रोहन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अकरम तू भी बेवकूफ़ है यार। औरतों के साथ क्या किया जाता है…” और फिर बोला, “विशाल को मजा भी तो चखना है ना मेरे को हाथ लगाने का।”
उसके बाद उन्होंने मुझे ज़ंजीरों के साथ दीवार के साथ बाँध दिया गया। मेरे हाथ पीछे की तरफ कसकर बंधे हुए थे और पैर भी फैलाकर जकड़ दिए गए थे ताकि मैं हिल भी न सकूं। मम्मी और बहन सिर्फ़ रोती रही मुझको देख कर। उनकी आँखों से आंसू लगातार बह रहे थे और चेहरे पर डर और बेबसी साफ़ दिख रही थी।
अरे अकरम देख ना यार इतनी खूबसूरत आँखों में आंसू अच्छे नहीं लगते। फिर रोहन ने माँ को एक कमरे में ले गया। उसने अलमारी से ऑयल की बोतल निकाली और बेड पर आ गया। उसने बहुत सारा ऑयल अपने लंड पर लगाया। लंड पूरी तरह चमकदार और फिसलने वाला हो गया था। फिर उसने मम्मी की चूत पर भी भरपूर ऑयल लगाया। अपनी उंगलियों से चूत के होंठों को फैलाकर अंदर तक ऑयल मल दिया ताकि हर जगह अच्छे से चिकना हो जाए।
अब रोहन मम्मी की टांगों के बीच आ गया। उसने अपने लंड को मम्मी की चूत के लिप्स पर सटाया। गर्म और सख्त लंड की नोक चूत के नरम और गीले होंठों को दबा रही थी। फिर एक ज़ोर का झटका दिया। मम्मी दर्द के मारे चिल्ला उठीं। “अरे हरामी मेरी चूत फाड़ दी तूने। हे भगवान मुझे बचा ले इस मादरचोद से। ओईईईईईईईई… माँ… मैं मर गई।” रोहन का लंड चार इंच तक मम्मी की चूत को फाड़ता हुआ अंदर चला गया था। मम्मी की चूत बहुत टाइट थी। उसकी दीवारें रोहन के मोटे लंड को कसकर जकड़ रही थीं।
रोहन ने दूसरा झटका दिया। मम्मी की फिर से चीख निकल गई। उनका पूरा शरीर झटके से कांप उठा। चेहरे पर दर्द की लकीरें उभर आईं और आँखें बंद हो गईं। बहन दूसरे कमरे से यह सब कुछ देख रही थी। उसे माँ पर दया आ रही थी। रोहन के लंड का साइज़ देखकर वह डर रही थी। कल को रोहन ने मेरी भी यह हालत कर देनी है। हाए विशाल भैया तुमने हमें कहाँ फंसा दिया है। रोहन का लंड माँ नहीं ले सकती। मैं तो मर ही जाऊंगी।
उसने फिर से होल से देखा। रोहन झटके पर झटके दे रहा था और मम्मी दर्द से चिल्ला रही थीं। साथ ही रोहन को गालियां दे रही थीं। “मादरचोद रंडी का बच्चा।” रोहन ने आखिरी झटका दिया और रोहन का पूरा लंड मम्मी की चूत में चला गया। वो अब भी दर्द से चिल्ला रही थीं। बाहर मैं अपनी माँ की चीखें सुन रहा था और मुझे अंदाज़ा था अंदर कमरे में माँ के साथ क्या हो रहा है।
रोहन का लंड तो मम्मी की चूत में चला गया लेकिन वो दर्द से अब भी चिल्ला रही थीं। “मैं मर गई। मुझे कोई बचाओ इस हरामी से।” रोहन को अपना लंड किसी शिकंजे में कसा हुआ लगता था। उसने मम्मी से कहा, “देख तेरी चूत में मेरा लंड फुल चला गया है।” तभी माँ बोलीं, “हरामी तूने मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया है। कुत्ते हरामी मादरचोद। मैं तेरी माँ जैसी हूं। मुझे छोड़ दे।” पर रोहन कुछ सुन नहीं रहा था। मम्मी की चूत ने खच-खच करते हुए रोहन के लंड को वश में कर लिया था। अब उसका दर्द बहुत कम हो गया था। रोहन ने अब अपना लंड थोड़ा बाहर निकाला और फिर आराम से वापिस उसकी चूत में डाल दिया।
अब मम्मी ने आहह… किया। रोहन ने कई बार अपना मोटा और गर्म लंड पूरी तरह बाहर निकाला। चूत के होंठों को फैलाते हुए उसे फिर से एक गहरी धक्के के साथ मम्मी की चूत में डाल दिया। अब मम्मी रोहन के लंड के साथ मजे करने लगी। अब दर्द नहीं सिर्फ़ उसे मजा मिल रहा था।
उसकी आँखें आधी बंद हो गईं। चेहरे पर लालिमा छा गई थी और होंठों से बार-बार आह्ह… की आवाज़ निकल रही थी। हा.. जोर से.. जोर से.. बोलने लगी। रोहन ने मम्मी को देखा तो उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी। उसके कूल्हे तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगे। हर झटके में उसका पूरा लंड मम्मी की चूत की गहराई तक धंस जाता। चूत के अंदर से खच-खच की आवाज़ आने लगी। मम्मी की चूत का रस अब अच्छे से निकलने लगा था जो रोहन के लंड को और फिसलने वाला बना रहा था।
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हा.. बेटा और तेज़। और तेज़। आ..हह.. बेटा तू मुझे पहले क्यों नहीं मिला। मेरी चूत को आज शांति मिली है। हा… मेरी चूत चोद बेटा। मार इसे। इसने मुझे बड़ा तड़पाया है। इसकी प्यास बुझा दे। आह… मम्मी की आवाज़ में अब दर्द की जगह पूरी लालसा भर गई थी। उनकी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठने लगी थी ताकि रोहन का लंड और गहराई तक जा सके। उनके मोटे बोब्स हर झटके के साथ ऊपर-नीचे उछल रहे थे।
रोहन ने स्पीड बढ़ाकर फुल स्पीड कर दी। अब मम्मी मजे में रोहन को और तेज़ चोदने को बोल रही थी। रोहन ने अपनी चुदाई चालू रखी। अब वो भी झड़ने वाला था। आहह.. माँ.. आआ मैं भी झड़ रहा हूं… मेरी रंडी मैं कहाँ निकालूं। तेरी चूत में निकालूं या तेरे इन मोटे मोटे बोबों पर। आ..हह.. बेटा मेरी चूत में झड़… और रोहन मम्मी की चूत में झड़ गया। उसके लंड ने मम्मी की चूत के अंदर कई जोरदार दबाव के साथ गर्म-गर्म वीर्य का फव्वारा छोड़ा। मम्मी की चूत उस वीर्य से भर गई। कुछ वीर्य चूत के किनारों से बहकर बाहर भी निकल आया।
रोहन ने अपने दोस्तों को बोला, “जाओ इस रंडी माँ को चोदो।” रोहन के चारों दोस्तों ने अपने कपड़े उतार दिए और मम्मी के पास बैठ गए। एक ने मम्मी के चूची को चूसना चालू किया। उसने पूरे बोब को मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से निप्पल को घुमाते हुए काट भी रहा था। दूसरे ने भी एक बोब्स मुंह में ले लिया। वह उसे चबाते हुए चूस रहा था। तीसरे ने मम्मी के मुंह में लंड दे दिया। “साली चूस इसे।” मम्मी ने लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी। लास्ट वाले ने मम्मी की चूत चाटनी चालू की। उसकी जीभ चूत के अंदर-बाहर घुस रही थी और रोहन के वीर्य को चाट-चाट कर साफ़ कर रहा था।
अब मम्मी फिर से मजे में आने लगी और उसने आ..आह… करना चालू कर दिया था। चार आदमी मम्मी को अच्छे से नोच रहे थे जैसा गिद्ध अपने शिकार को नोचता है।
मैं अपनी माँ की आवाज़ सुन रहा था। मेरा लंड खड़ा हो गया था। अब जो उसकी चूत चाट रहा था उसने अपना लंड मम्मी की चूत में डालना चालू किया। वो भी ज़ोर के झटके से। जैसे ही उसने झटका दिया मम्मी की चीख निकल गई। साले रोहन के दोस्त एक एक करके मम्मी को चोद रहे थे और मैं सिर्फ़ देख रहा था।
चारों ने मम्मी को चोद-चोद के बेहाल कर दिया था। उनमें से एक बोला, “कोई इस साली रंडी की चूत या गांड में अपना माल छोड़ेगा। सब इनके बदन पर अपना वीर्य फेंकना।” जो मम्मी की चूत चोद रहा था वो झड़ने वाला था। उसने लंड निकाल कर मम्मी के बदन पर अपना गाढ़ा और गर्म वीर्य छोड़ दिया। सफेद-मोटी धारें मम्मी के पेट, बोब्स और चेहरे पर गिर रही थीं। इसी तरह एक-एक करके सबने उसके बदन को वीर्य से भर दिया। ऐसा लगता था कि मम्मी ने वीर्य से नहा ली हो। उनके पूरे शरीर पर चिपचिपा वीर्य लथपथ था।
रोहन के दोस्तों ने मुझे कहा, “अपनी माँ की शरीर से पूरा वीर्य साफ़ कर।” मैंने अपनी ज़ुबान से चारों का वीर्य चाटने लगा। मैं कभी मम्मी के बोब्स पर से और कभी उसकी चूत पर से वीर्य अपनी ज़ुबान से चाट रहा था। गर्म, नमकीन और चिपचिपा स्वाद मेरे मुंह में भर गया था। 15 मिनट में मैंने सारा वीर्य चाट लिया। वो चारों बोले, “वाह साले ने अपनी माँ के बदन से सारा वीर्य पी लिया है। चल विशाल अब तू अपनी माँ को चोद सकता है।”
मम्मी ने मुझे अपने ऊपर झुका देखा तो उसने मुझे धक्का नहीं दिया बल्कि अपनी बाहें फैला दीं। विशाल तू क्या कर रहा है… मैं तेरी माँ हूं। मैंने कहा, “चुप साली माँ है… अभी तू रंडी की तरह इन सबके लंड से मजे कर रही थी और अब माँ बनती है।” और मैंने अपनी माँ की टांगें खोलीं और अपने लंड को माँ की चूत में डाल दिया और उसे चोदने लगा। मम्मी ने बहुत कोशिश की लेकिन जल्दी ही वो गर्म हो गईं। अब वो मेरा साथ दे रही थीं।
आहह.. राजा तू हरामी है। अपनी माँ को चोद रहा है। साले चोद अपनी माँ को। देख तेरी माँ की चूत कितनी फूल गई है। आज… तेरी माँ को ज़िंदगी का सबसे बड़ा मजा मिला है। आह… मार मेरी चूत। वो तेरे बाप ने मुझे कभी भी इतना मजा नहीं दिया है। मैंने उसके बोब्स को मुंह में लेकर उन्हें चूसने लगा। निप्पल को जीभ से घुमाते हुए जोर-जोर से चबाया।
अब मम्मी झड़ रही थी। वो बोली, “मैं झड़ रही हूं… आहह… और चोद। आ..आआ..उई.. और तेज़। हा… हा… हाहा…” मैं अब भी फुल स्पीड से अपनी मम्मी की चूत चोद रहा था। और वो झड़ गई। और कुछ देर बाद मैं भी झड़ गया। उधर रोहन और उसके दोस्त मेरी बहन को भी चोदा।
Meera naan Madhavi. Very nic story.
Ap milogi
Btao
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