Horny Bahan sex story: नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम शैलजा सिंह है और मैं उत्तर प्रदेश के कानपुर की रहने वाली हूं. मैं एक सेक्सी जवान लड़की हूं और मेरे जिस्म को देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो सकता है. अभी मैं 22 साल की हुई हूं. मेरी गांड एकदम से उठी हुई है जो इतनी मोटी गोल और उभरी हुई है कि जब मैं चलती हूं तो वह लहराती रहती है और टाइट कपड़ों में उसकी पूरी आकृति साफ नजर आती है जिससे किसी भी पुरुष का लंड तुरंत सख्त हो जाए.
मेरे स्तन भरे हुए और नरम हैं जिनकी गुलाबी निप्पल्स हल्की सी हवा या छुअन पर भी खड़ी हो जाती हैं और कपड़े के ऊपर से उभर कर दिखाई देती हैं. मेरी त्वचा चिकनी गोरी और मुलायम है मेरी कमर पतली है और मेरी जांघें मोटी कोमल हैं जो मेरी चूत को और भी आकर्षक बनाती हैं जहां से कभी कभी खुद ही गर्म रस बहने लगता है.
मेरे परिवार में चार सदस्य हैं. माता-पिता के अलावा मेरा एक भाई भी है. वो 21वें साल में है मैं उसके बदन को देख कर कई बार आकर्षित हो जाती हूं. उसके कंधे चौड़े और मजबूत हैं उसकी बाहें मांसल हैं छाती पर हल्के बाल हैं और पेट पर गहरी लकीरें हैं जो उसे और भी पुरुषत्वपूर्ण बनाती हैं.
वो जब बाथरूम से नहा कर निकलता है तो उसके गीले बालों से पानी टपकता है और उसकी त्वचा पर छोटी छोटी बूंदें चमकती रहती हैं जो उसके चौड़े कंधों से बह कर छाती पर रुकती हैं फिर पेट की लकीरों को गीला करती हुई नीचे जाती हैं. मेरा मन करता है कि उसके तौलिए को उतार दूं और उसके जिस्म को नंगा देखूं. उसके नंगे शरीर की हर मांसपेशी पर पानी चमक रहा होता है और तौलिए के नीचे उसका लंड का मोटा उभार साफ दिखाई देता है जो तौलिए को थोड़ा आगे खींच लेता है. अपने भाई से चुदाई करवाऊँ.
मैंने एक बार उसे फ्रेंची में देखा था. उसका लंड अलग से दिखाई दे रहा था. मेरा मन कर रहा था कि मैं उसके लंड को पकड़ लूं. कई बार मैंने उसे अंडरवियर में देखा है. उसका लंड काफी बड़ा दिखाई देता है.
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
मैं कई बार उसको देख कर गर्म हो जाती हूं. मेरा मन करता है कि अपनी चूत में उसका लंड लेकर भाई से चुदाई करवा लूं. वो भी बहुत ठरकी है. मेरे चूचों को घूरता रहता है. ये कहानी मेरे भाई से चुदाई की पहले सेक्स के बारे में है. मेरा भाई चुदाई में बहुत माहिर है. जिस घटना के बारे में आपको बताने जा रही हूं उसको पढ़ कर आपको भी मेरी बात का यकीन हो जाएगा.
यह वाकया आज से करीब एक साल पहले हुआ था. उस दिन मौसी भी आई हुई थी क्योंकि घर पर कथा हो रही थी. मगर वो हमारे दादा दादी के घर पर हो रही थी. आपको बता दूं कि हम लोग मेरे दादा दादी से दूर शहर में रहते हैं क्योंकि मुझे गांव में रहना पसंद नहीं था. जब हम लोग दादी के घर पर जाते थे तो वहीं रहते थे.
वहां पर गांव में केवल एक ही बाथरूम बना हुआ था जो पुराना छोटा और बाहर की तरफ था जिसमें सिर्फ एक शावर और छोटा दरवाजा था. मैं कई बार जल्दी में नहाने के टाइम पर अपनी ब्रा और पैंटी को बाथरूम में ही छोड़ देती थी जो मेरे शरीर से भीगी हुई और मेरी चूत की हल्की मादक खुशबू से महकती रहती थी.
मेरा भाई मेरे बाद नहाने के लिए जाता था. मैंने कई बार देखा था कि मेरा भाई मेरी ब्रा और पैंटी को लेकर छत पर चला जाता था जहां कोई नहीं देख सकता था शायद उन्हें अपनी नाक से सूंघने या अपने लंड पर रगड़ने के लिए.
एक दिन मैंने ध्यान से देखा कि मेरी ब्रा और पैंटी में निशान बने हुए थे जैसे किसी ने उस पर कुछ पदार्थ डाल दिया हो. ब्रा की कप पर सफेद चिपचिपे दाग थे जो सूखने के बाद भी थोड़ी नमी लिए हुए थे और पैंटी के बीच वाले हिस्से में जहां मेरी चूत टच करती है वहां गाढ़े सफेद धब्बे थे जो साफ तौर पर वीर्य के थे. उनकी हल्की मादक गंध अभी भी महक रही थी जो मेरी नाक में घुसकर मेरी चूत को गर्म करने लगी थी.
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
फिर एक दिन मैंने नहाने के तुरंत बाद देखा कि मेरी ब्रा पर मेरे भाई का वीर्य लगा हुआ था. मैंने उसको हाथ लगा कर देखा तो मुझे वो चिपचिपा लगा. मेरी उंगलियां उस गाढ़े सफेद वीर्य में फंस गईं जो खींचने पर लंबी चिपचिपी लकीरें बनाता था और अभी भी हल्का गर्म था जैसे हाल ही में छोड़ा गया हो.
उसकी तीखी मादक गंध मेरे नथुनों में भर गई जिससे मेरी सांसें भारी हो गईं मेरी निप्पल्स एकदम सख्त होकर खड़े हो गए और मेरी चूत के होंठ फड़कने लगे साथ ही गर्म रस मेरी जांघों पर बहने लगा.
मैंने उस दिन अपनी चूत को सहलाया भाई के लंड के बारे में सोचते हुए. मेरी चूत गर्म हो गई थी. मैं भाई के लंड के बारे में सोच कर उत्तेजित हो रही थी.
मगर अपनी चूत में उंगली करके उसको खुश कर लेती थी.
फिर जब हम दोनों कथा के लिए जा रहे थे. रास्ते में बारिश होने लगी. उस दिन मैंने नीचे से ब्रा नहीं पहनी हुई थी. गीली कच्ची सड़क पर चलते हुए मेरे चूचे भाई की गीली पीठ से चिपक रहे थे.
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
बारिश की ठंडी बूंदें तेजी से गिर रही थीं और मेरे पतले ब्लाउज को पूरी तरह भीगोकर पारदर्शी बना रही थीं जिससे मेरे भरे हुए गोल चूचे साफ नजर आ रहे थे. मेरे निप्पल्स सख्त होकर खड़े हो चुके थे और हर बार बाइक के हिचकने पर वे भाई की चौड़ी गीली पीठ से रगड़ खा रहे थे.
उसकी पीठ पर पानी की धार बह रही थी जो मेरे नरम चूचों को और भी चिपकाती जा रही थी. मैं महसूस कर रही थी कि मेरे भारी स्तन उसके मजबूत कंधों और मांसल पीठ की गर्मी से दब रहे हैं और हर हलचल के साथ उनकी नरम मांसलता उसके शरीर में धंस रही है. मेरी चूत पहले ही हल्की गर्मी महसूस कर रही थी और बारिश की ठंडक के साथ-साथ उसकी पीठ की गर्माहट मुझे और उत्तेजित कर रही थी.
उस दिन मैं भाई की गर्म पीठ से लग कर मजा ले रही थी.
मैं जानबूझकर अपने शरीर को उसके करीब रखे हुए थी ताकि मेरे चूचे उसकी पीठ पर पूरी तरह दब सकें. उसकी गर्म त्वचा मेरे निप्पल्स को चुभ रही थी और हर बार बाइक के कंपन से मेरे स्तनों की नरमता उसके शरीर पर फैल रही थी. मैं चुपचाप आनंद ले रही थी कि मेरे भाई की पीठ पर मेरे चूचे कितनी जोर से दब रहे हैं और उसकी मांसपेशियां मेरी नरमाई को महसूस कर रही हैं.
बारिश की मिट्टी की गंध हवा में फैली हुई थी और मेरे गीले बालों से पानी टपककर मेरी गर्दन पर बह रहा था जो मेरी उत्तेजना को और बढ़ा रहा था.
चलते हुए रास्ते में अचानक बाइक के नीचे पत्थर आ गया तो मैं उछल पड़ी. मैंने भाई की जांघ पर हाथ रखा हुआ था. अचानक से मेरा हाथ सरक कर भाई के लंड पर जाकर लगा. भाई का लंड पहले से तना हुआ था. शायद वो भी मेरे चूचों को अपनी पीठ पर महसूस कर रहा था और गर्म हो गया था.
बाइक के अचानक झटके से मेरा पूरा शरीर ऊपर उछला और मेरे हाथ की पकड़ ढीली पड़ गई. मेरा हाथ उसकी जांघ की मोटी मांसपेशी पर फिसलकर सीधा उसके कटे हुए पैंट के ऊपर वाले हिस्से पर जा पड़ा. वहां मैंने महसूस किया कि उसका लंड पहले ही पूरी तरह खड़ा और सख्त हो चुका था. मेरा हाथ उसके मोटे लंड के उभार पर रुक गया जो पैंट के कपड़े को तानकर बाहर निकलने को बेताब था. उसकी गर्मी मेरी हथेली में महसूस हो रही थी और लंड की मोटाई तथा लंबाई को मैं स्पष्ट महसूस कर रही थी जो थोड़ा थोड़ा धड़क रहा था. शायद मेरे चूचों की लगातार रगड़ से वह भी उत्तेजित हो गया था और उसका लंड अब मेरी उंगलियों के नीचे पत्थर की तरह सख्त था.
मैंने भाई के लंड को पकड़ा तो उसे दर्द हुआ और चिल्लाया. वो डांटते हुए बोला- आराम से बैठो.
मेरा हाथ अनजाने में ही उसके लंड को पूरी तरह जकड़ लिया था और मैंने अपनी उंगलियों से उसकी मोटाई को हल्का दबा दिया था. भाई को अचानक तेज दर्द हुआ क्योंकि मेरा पकड़ना काफी जोरदार था और वह चीख उठा. उसकी आवाज में दर्द के साथ थोड़ी सी उत्तेजना भी झलक रही थी लेकिन वह तुरंत डांटते हुए बोला आराम से बैठो. मैंने तुरंत महसूस किया कि मेरी गलती से उसका लंड थोड़ा और सख्त हो गया था लेकिन दर्द की वजह से वह हड़बड़ा गया था.
भाई के लंड से मैंने हाथ वापस पीछे कर लिया.
मैंने तुरंत अपना हाथ हटा लिया और अपनी जांघों को कसकर भींच लिया ताकि मेरी चूत से निकल रही गर्मी छुप जाए. मेरी सांसें तेज हो गई थीं और मेरे चूचे अभी भी उसके पीठ से चिपके हुए थे लेकिन अब मैं थोड़ा सावधानी से बैठ गई थी. बारिश अभी भी हो रही थी और सड़क की गीली मिट्टी की खुशबू हमारे चारों तरफ फैली हुई थी.
उसके बाद हम दोनों दादी के घर में आ गये. फिर रात को कपड़े बदल कर सोने लगे. मेरा भाई भी मेरे साथ ही सो रहा था. मेरी आंख लग गई थी. मगर फिर देर रात को अचानक मुझे महसूस हुआ कि किसी के हाथ मेरे चूचों को छेड़ रहे थे.
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
आंखें बंद रखे हुए ही मैं लेटी रही. अब मैं जाग गई थी लेकिन सोने का नाटक कर रही थी. मेरी गांड मेरे भाई की तरफ थी. वो मेरे चूचों को पीछे से हाथ लाकर दबा रहा था. मुझे भी मजा आने लगा. कुछ देर तक वो मेरी चूचियों को दबाता रहा. उसके बाद उसने मेरे चूचों से हाथ हटा लिया. फिर उसके हाथ मेरी गांड को दबाने लगे.
मुझे मजा आ रहा था. उसने मेरी गांड को दबाया. फिर उसने मेरी लैगी को उतार कर नीचे कर दिया. कमरे में हम दोनों के अलावा कोई नहीं था.
उसने मेरी पैंटी को खींचने की कोशिश की लेकिन मेरी पैंटी मेरी जांघों में फंसी हुई थी.
मैंने हल्का सा उठते हुए उसकी मदद की मगर उसको पता नहीं लगने दिया कि मैं भी उसकी हरकतों का मजा ले रही हूं. उसके बाद भाई ने मेरी पैंटी को उतार दिया.
वो मेरी चूत पर हाथ फिराने लगा. मैं अब गर्म होने लगी थी. मेरी चूत गीली हो रही थी. उसने मेरी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी. शायद मेरी चूत में पानी आने लगा था. मुझे भी अपनी चूत में गीलापन महसूस हो रहा था.
वो मेरी चूत में उंगली से सहला रहा था. मेरी सांसें तेज हो रही थी. उसके बाद उसने मेरी चूत को हथेली रगड़ते हुए अपना लंड मेरी गांड में लगा दिया. मुझे उसका गर्म लंड अपनी गांड पर महसूस होने लगा. मेरी चूत बिल्कुल तर हो गई थी.
शायद भाई को भी पता लग गया था कि मैं जाग रही हूं क्योंकि मेरी गीली चूत ने उसको जता दिया था कि मैं केवल सोने का नाटक कर रही हूं और भाई से चुदाई करवा लूंगी.
उसके बाद उसने अपने लंड को मेरे चूतड़ों पर रगड़ना शुरू किया. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. उसका लंड बहुत गर्म था और मैं चाहती थी कि वो और आगे बढ़े.
मेरे कहने से पहले ही उसने मेरे मुंह को अपनी तरफ घुमा लिया और मेरे होंठों को चूसने लगा.
अब मैंने भी अपनी आंखें खोल दीं और भाई का साथ देने लगी. हम दोनों ही एक दूसरे के होंठों को किस करने लगे. वो मेरे होंठों को इस तरह से चूस रहा था जैसे उनको खा जायेगा. उसका लंड मेरी जांघ पर रगड़ रहा था. मैं भी अपने भाई को बांहों में लेकर उसके होंठों को चूस रही थी. मेरे अंदर की प्यास बुझते हुए मुझे आनंद आ रहा था.
उसके बाद उसने मेरे टॉप को उतार दिया. उसके मजबूत हाथों ने मेरे पतले टॉप को मेरी कमर से पकड़कर ऊपर की ओर खींचा और मेरे सिर के ऊपर से पूरी तरह निकालकर बेड के किनारे फेंक दिया जिससे मेरे भरे हुए गोल चूचे हवा में थोड़ा उछल पड़े और ठंडी रात की हवा से सिहर गए. मेरी गोरी त्वचा अब सिर्फ ब्रा में ढकी हुई थी लेकिन मेरे गुलाबी निप्पल्स पहले ही उत्तेजना से सख्त होकर ब्रा के कपड़े को तान रहे थे. भाई की आंखें मेरे स्तनों पर टिकी हुई थीं और उसकी सांसें भारी हो चुकी थीं जिनकी गर्म हवा मेरी छाती पर महसूस हो रही थी.
मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे दूधों को दबाने लगा. उसके दोनों हाथ ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर से मेरे नरम और भारी चूचों को जोर-जोर से दबाने लगे थे. उसकी उंगलियां मेरी मांसलता में गहरे धंस रही थीं और हर दबाव के साथ मेरे स्तन आकार बदल रहे थे जिससे मेरी निप्पल्स ब्रा के अंदर पिसकर और भी सख्त हो जाती थीं. तीखी खुजली और मीठा दर्द एक साथ मेरी रीढ़ में दौड़ रहा था. मेरी चूत पहले ही हल्के गर्म रस से भीगने लगी थी और मैं अपनी जांघें हल्के से कसकर दबा रही थी ताकि आवाज न निकले.
मैंने अपनी ब्रा खोल कर एक तरफ डाल दी और मेरे भाई ने मेरे चूचों को अपने मुंह में भर लिया. वो मेरे चूचों को बारी बारी से एक एक करके चूसने लगा.
मुझे बहुत ज्यादा मजा आने लगा. उसकी जीभ मेरे चूचों के निप्पलों पर तैर रही थी. मैं हर पल चुदासी होती जा रही थी.
उसने कई मिनट तक मेरे चूचों को पीया और उसके बाद वो मेरी पैंटी की तरफ बढ़ा. उसने मेरी पैंटी को मेरी टांगों से बिल्कुल अलग कर दिया. उसने मेरी टांगों को अलग किया और मेरी चूत में मुंह देकर मेरी चूत को चूसने लगा. मैं तो जैसे पागल सी होने लगी. उसकी गर्म जीभ मेरी चूत में बहुत मजा दे रही थी.
भाई ने मेरी चूत को कई मिनट तक चूसा. उसके बाद उसने मेरी चूत में जीभ अंदर तक घुसा दी. मैं सेक्स के लिए पागल हो उठी. वो तेजी से अपनी जीभ को मेरी चूत में अंदर और बाहर करने लगा. मैंने उसके बालों को पकड़ कर नोंचना शुरू कर दिया. उसका मुंह अपनी चूत पर दबाने लगी. मैं बहुत ज्यादा गर्म हो चुकी थी. फिर मैंने उसको उठाया और उसकी लोअर को खींच कर नीचे करते हुए उसके लंड को अपने मुंह में भर लिया.
भाई का मोटा लंड चूसते हुए मुझे बहुत मजा आने लगा. मैंने उसके लंड को पूरा मुंह में लिया हुआ था और भाई के मुंह से कामुक आवाजें निकल रही थी. मगर हम दोनों बहुत कम आवाज करने की कोशिश कर रहे थे क्योंकि नीचे मौसी और दादा-दादी भी सो रहे थे.
मैंने भाई के लंड को चूसते हुए उसका पानी चखा. उसका पानी नमकीन सा लगा. अब उसके लंड में बहुत ही जोर का कड़ापन आ गया था.
उसने मेरे मुंह से लंड को निकाल लिया. फिर उसने अपने मोटे लंड को मेरी चूत पर रख दिया.
भाई का लंड वाकई में बहुत बड़ा था. मैंने कहा- ये मेरी चूत के अंदर नहीं जा पायेगा.
उसने डांटते हुए चुप करवा दिया और बोला- साली रंडी चुप कर. अब तू मुझे सिखाएगी कि छेद में लौड़ा कैसे जाता है!
वो बोला- इस लंड ने कई छेद खोले हैं. तू चुपचाप लेट कर लंड का मजा ले.
यह कह कर भाई ने मेरी चूत में लंड को धकेलना शुरू कर दिया. मगर लंड का सुपारा बहुत मोटा था और वो अंदर नहीं जा रहा था.
मैंने फिर कहा- भाई ये मेरी चूत में नहीं जा पायेगा. कुछ चिकना पदार्थ लगाना पड़ेगा.
मेरी आवाज थोड़ी कांप रही थी और मेरी छाती तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि मैं उसके मोटे गर्म लंड के सुपारे को अपनी चूत के बाहर वाले होंठों पर दबता हुआ महसूस कर रही थी. मेरी चूत पहले से ही हल्के गर्म रस से भीगी हुई थी लेकिन फिर भी उसकी मोटाई देखकर डर लग रहा था. मेरी जांघें हल्के से कांप रही थीं और मेरी सांसें भारी हो चुकी थीं. भाई की आंखों में शुद्ध भूख और जिद थी जो देखकर मेरी चूत और भी सिकुड़ गई.
मगर वो बोला- मैं तेरी चूत को बिना थूक लगाये ही चोदूंगा.
उसकी आवाज गहरी और रूखी थी जिसमें कोई समझौता नहीं था. उसने मेरी दोनों जांघों को अपने मजबूत हाथों से और ज्यादा फैला दिया ताकि मेरी चूत पूरी तरह खुलकर सामने आ जाए. उसकी उंगलियां मेरी नरम जांघों की मांसपेशियों में गहरे धंस गईं और उसने मेरी गांड को थोड़ा ऊपर उठाकर अपनी तरफ खींच लिया. मैं महसूस कर रही थी कि मेरी चूत की फांके थोड़ी सी फैल रही हैं और उसका गर्म सुपारा उन पर जोर से दबाव डाल रहा है.
उसने मेरी चूत में लंड को धकेलना जारी रखा और बहुत कोशिश करने के बाद मेरी चूत में जैसे ही उसके लंड का सुपारा गया तो मेरी जैसे जान निकल गयी. मैं उसको हटाने लगी. मगर उसने मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया. अपने लंड के टोपे को मेरी चूत में घुसा कर वो मेरे होंठों को पीने लगा तो मुझे आराम मिला.
मेरी चूत के मुंह पर अचानक तेज खिंचाव और जलन हुई जैसे कोई मोटा गर्म लोहा धकेला जा रहा हो. लंड का सुपारा मेरी चूत की तंग दीवारों को जोर से फैलाता हुआ अंदर घुसा और मेरी आंखों के सामने तारे नाच गए. मैंने अपने हाथों से उसके कंधों को जोर से पकड़ लिया और नाखून गड़ा दिए. दर्द इतना तीखा था कि मेरी कमर खुद ब खुद ऊपर उठ गई. लेकिन भाई ने तुरंत अपना मुंह मेरे होंठों पर रख दिया और मेरी निचली होंठ को चूसते हुए अपनी जीभ मेरे मुंह में घुसा दी. उसकी गर्म सांस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी और धीरे धीरे दर्द में थोड़ी सी राहत महसूस होने लगी.
दो मिनट के बाद उसने फिर से लंड को धकेलना शुरू कर दिया.
मुझे दर्द हो रहा था लेकिन भाई कोशिश करते हुए पूरा लंड अंदर घुसेड़ देना चाह रहा था. उसके मोटे गर्म लंड का सुपारा मेरी चूत की तंग फांकों को जबरदस्ती फैलाता हुआ अंदर धंस रहा था. मेरी नरम चूत की दीवारें बुरी तरह खिंच रही थीं और जलन भरा तीखा दर्द मेरी रीढ़ की हड्डी तक दौड़ रहा था. मैं अपने नाखून उसके चौड़े कंधों में गड़ा रही थी और दांत भींचे हुए थी ताकि चीख न निकल जाए. मेरी सांसें तेज और भारी हो चुकी थीं. मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे लेकिन भाई ने रुकने का नाम नहीं लिया. उसकी पकड़ मेरी जांघों पर और मजबूत हो गई थी और वह लगातार धीरे-धीरे लेकिन अटल दबाव डाल रहा था.
उसने धीरे धीरे करके पूरे लंड को मेरी चूत में उतार दिया. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरी चूत में कोई मोटी रॉड फंसा दी हो. उसके बाद वो अपने लंड को मेरी चूत में हिलाने लगा. मुझे हल्का सा मजा आया लेकिन साथ में दर्द भी बहुत हो रहा था.
जब आखिरकार उसका पूरा मोटा लंड मेरी चूत में जड़ तक समा गया तो मेरी चूत पूरी तरह से भर गई थी. उसकी नसों की उभरी हुई आकृति मेरी संवेदनशील दीवारों से दब रही थी और हर छोटी सी हिलन से मेरे शरीर में लहरें दौड़ रही थीं. दर्द अभी भी था लेकिन अब उसमें एक अजीब सी गर्माहट मिलने लगी थी. भाई ने अपना लंड हल्का-हल्का आगे-पीछे करना शुरू कर दिया. मेरी चूत के रस अब धीरे-धीरे उसके लंड को चिकना बनाने लगे थे. मुझे हल्का सा मजा आने लगा था लेकिन दर्द अभी भी मेरी कमर को झकझोर रहा था.
दो मिनट तक वो ऐसे ही मेरी चूत में लंड को धकेलते हुए हिलाता रहा तो मेरी चूत में मजा आने लगा. फिर उसने मेरी चूत को चोदना शुरू कर दिया. उसके मोटे लंड से चुद कर मुझे अब मजा आने लगा था. उसने धक्के तेज कर दिये. अब मैं भी चुदाई में उसका पूरा साथ देने लगी.
दो मिनट बाद मेरी चूत की अंदरूनी दीवारें उसके लंड की हर हलचल के साथ सिकुड़ने-फैलने लगीं. दर्द कम होकर एक मीठी खुजली में बदल गया था. भाई ने अब अपने धक्के तेज कर दिए थे. हर धक्के के साथ उसका मोटा लंड मेरी चूत को जड़ तक चीरता हुआ अंदर बाहर हो रहा था. मैंने अपनी जांघें उसके कमर के चारों ओर लपेट लीं और अपनी गांड ऊपर उठाकर उसके हर झटके का जवाब देने लगी. हम भाई-बहन की चुदाई में मुझे इतना मजा आयेगा मैंने कभी नहीं सोचा था. मेरे भाई का लंड मेरी चूत की प्यास बुझा रहा था.
उसने फिर मेरी टांगों को ऊपर उठा लिया और मेरी चूत को फाड़ने लगा. एकदम से मेरी चूत में तूफान सा उठा और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. उसके लंड से चुद कर मेरी चूत का फव्वारा फट पड़ा था. अब पूरा लंड गीला हो चुका था और चुदाई में पच-पच की आवाज होने लगी थी. कुछ देर तक मैं पड़ी रही और भाई का मोटा लंड मेरी चूत में अंदर बाहर होता रहा.
भाई ने मेरी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख लिया और अपनी कमर को और जोर से हिलाने लगा. हर धक्के के साथ उसके लंड का सुपारा मेरी चूत के सबसे गहरे हिस्से को छू रहा था. अचानक मेरी चूत सिकुड़ी और एक तीव्र लहर उठी. मेरी चूत से गर्म पानी की धार फूट पड़ी जो उसके लंड को पूरी तरह भीगो रही थी. पच-पच… पच-पच… की आवाज कमरे में गूंजने लगी. मैं कराह रही थी लेकिन आवाज दबाने की कोशिश कर रही थी. कुछ देर तक मैं पड़ी रही और भाई का मोटा लंड मेरी चूत में लगातार अंदर बाहर होता रहा.
ऐसे ही चूत चुदवाते हुए मैं दोबारा से गर्म हो गई. मैं फिर से गांड उठा कर भाई का लंड चूत में लेकर मजे लेने लगी. उसके बाद उसने मुझे उठाया और कुतिया बना दिया. उसने पीछे से मेरी चूत में लंड को धकेल दिया और मेरी चूत को फाड़ने लगा.
मैं अब पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी. मैंने अपनी गांड उठाकर भाई के लंड को अपनी चूत में और गहराई तक लेना शुरू कर दिया. भाई ने मुझे दोनों हाथों से पकड़कर कुतिया की मुद्रा में कर दिया. उसने पीछे से मेरी चूत में अपना लंड एक जोरदार झटके से धकेल दिया. मेरी चूत फिर से पूरी तरह फैल गई और भाई ने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए. मेरी मोटी गांड हर धक्के पर लहरा रही थी.
भाई से चुदाई करवा के मुझे गजब का मजा मिल रहा था. भाई के मोटे लंड से चुदते हुए मैं आनंदित हो रही थी. जैसा मैंने सोचा था वैसे ही चुदाई कर रहा था उसका लौड़ा.
मैं दोबारा से झड़ने की कगार पर पहुंच गई थी. फिर एकाएक मेरी चूत से दोबारा पानी निकल गया. मगर भाई अभी भी नहीं रुका. उसके धक्के मेरी चूत में अभी भी जोर से लग रहे थे.
मुझे दर्द होने लगा था. मैं दर्द से चिल्ला उठी. मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा था. लेकिन कुछ देर बाद मुझे फिर से मज़ा आने लगा. मैं गांड हिलाते हुए लंड लेने लगी और मैंने भैया से कहा- मार और जोर से … और तेज मार … फाड़ डाल.
भाई भी जोर से मेरी चुदाई करने लगा.
पांच मिनट बाद उन्होंने अपना लंड निकाला और मेरे मुँह में दे दिया और मैंने लंड चूसना चालू किया.
भाई का गर्म और मोटा लंड मेरी चूत के गाढ़े चिपचिपे रस से पूरी तरह लथपथ था. जब मैंने उसे अपने खुले मुंह के अंदर लिया तो मेरी अपनी चूत की तीखी मादक खुशबू और नमकीन स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया जो मेरी चूत को फिर से गर्म करने लगा. मैंने अपनी नरम जीभ को उसके लंड के बड़े सुपारे के चारों ओर लपेट लिया और जोर से चूसने लगी. मेरे गाल अंदर की तरफ धंस गए और मैं हर बार जितना गहरा ले सकती थी उतना लेने की कोशिश कर रही थी. भाई के लंड पर लगा हुआ मेरी चूत के पानी का स्वाद भी मेरे मुंह में आने लगा था. मैं तेजी से भाई का लंड चूस रही थी. दो मिनट तक मैंने पूरा मन लगा कर भाई का लंड चूसा.
मेरी सांसें तेज हो रही थीं और मेरी लार उसके लंड के साथ मिलकर मेरे होंठों के किनारों से बह रही थी. भाई की उंगलियां मेरे बालों में फंसी हुई थीं और वह हल्के हल्के धक्के दे रहा था ताकि मैं और गहराई तक ले सकूं. मेरी आंखें बंद थीं लेकिन मैं पूरी तरह से उसके लंड की मोटाई और गर्मी को महसूस कर रही थी.
भाई ने पूरा लंड मेरे गले तक उतार दिया. मेरा दम घुटने लगा लेकिन उसने पूरा लंड घुसाये रखा.
उसके मोटे लंड ने मेरे गले की दीवारों को पूरी तरह फैला दिया था. मैं गगलाने लगी आंखों से पानी बहने लगा लेकिन भाई ने मेरे सिर को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ रखा था और अपना लंड गले के अंदर तक धकेले रखा. मेरी नाक उसके पेट की हल्की बालों वाली त्वचा से सट गई थी और सांस लेना बहुत मुश्किल हो गया था फिर भी मैं उसे रोक नहीं पा रही थी.
एकाएक उसके लंड से वीर्य की पिचकारी निकलने लगी और मेरे गले में गिरने लगी. भाई का वीर्य मेरे अंदर मुंह में जाने लगा. मैं उसके वीर्य का स्वाद अपने मुंह में फील कर रही थी. उसने पूरा वीर्य मेरे मुंह में छोड़ दिया, फिर मेरे मुंह में लंड डाल कर लेट गया.
उसके बाद हम दोनों ऐसे ही पड़े रहे. कुछ देर तक उसने लंड को मेरे मुंह में ही रखा.
कुछ देर के बाद उसका लंड मेरे मुंह में फिर से तन गया और उसने एक बार फिर से मेरी चूत फाड़ दी. उस रात को भाई ने तीन बार मेरी चूत की जमकर चुदाई की.
मेरी चूत की प्यास बुझ गई और मुझे भाई के लंड से चुदाई की आदत सी हो गई.
अब हम दोनों भाई-बहन कभी भी चुदाई कर लेते हैं. ऐसा लगता है कि हमारे बीच में भाई-बहन का नहीं बल्कि पति-पत्नी का रिश्ता हो गया है.
मेरी यह भाई से चुदाई की कहानी आपको कैसी लगी इसके बारे में कमेंट करके मुझे बतायें. मुझे आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा.
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए
Related Posts