Namard pati sex story: दोस्तों आज मैं आपको अपनी अंतर्वासना दिल की बात बताने जा रही हूँ। आशा करती हूँ कि आप सभी मेरी भावनाओं को समझेंगे और मुझे मेरी परेशानी हल करने में अपना सहयोग करेंगे।
मेरा नाम प्रिया है। मैं राजस्थान के जयपुर सिटी से हूँ।
मेरा गोरा चमकदार बदन बेहद आकर्षक और आकर्षण से भरा हुआ है। मेरे उभरे हुए तीस छत्तीस साइज के चुचे और बत्तीस इंच की गोल मटोल गांड किसी भी स्वस्थ मर्द के लंड को तुरंत खड़ा कर देने वाली है। पर दोस्तों मैं बचपन से ही बहुत शरीफ और संस्कारी रही थी। शादी से पहले मैंने कभी सेक्स नहीं किया क्योंकि मैं गहरे विश्वास के साथ यह मानती थी कि मेरे शरीर पर सिर्फ और सिर्फ मेरे पति का ही हक है।
पर दोस्तों किस्मत और समय अक्सर इंसान के सोचे हुए से बिल्कुल अलग होते हैं। जो हम सोचते हैं वह अक्सर होता नहीं है। मेरे साथ भी यही हुआ जब मेरी शादी हुई।
शादी की पहली रात थी। मैं एक खूबसूरत दुल्हन की तरह पूरे सोलह श्रृंगार से सजी हुई कमरे में बैठकर अपने पति का बेसब्री से इंतजार कर रही थी। मेरे मन में सेक्स को लेकर बड़ी गहरी और तीव्र आशा थी। मेरी सारी सहेलियों ने मुझे सेक्स के बारे में खुलकर बताया था और कई बार तो मुझे चुदवाने की सलाह भी दी थी पर मेरी सोच हमेशा अलग रही।
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मैं अकेले में अपनी छूत में उंगली डालकर अपनी वासना को शांत करती थी लेकिन मैं सारे असली मजे अपने पति के साथ ही करना चाहती थी। इसीलिए मैं अपने पति का इंतजार बड़े अधीर होकर कर रही थी। मेरे पूरे शरीर में एक अनजानी सी तड़पन महसूस हो रही थी। मेरी सांसें थोड़ी थोड़ी तेज हो रही थीं और मेरी छूत हल्की हल्की गीली होने लगी थी।
रात के ग्यारह बजकर तीस मिनट हो चुके थे। मेरी ननद ने मुझे अब अकेले रूम में छोड़ दिया था। मेरे रोम रोम में सेक्स की तीव्र इच्छा जाग उठी थी और मेरी छूत हल्की हल्की गीली होने लगी थी।
पर अब अपने पति का इंतजार और नहीं सहा जा रहा था। ठीक बारह बज गए। अचानक मुझे अपने रूम के दरवाजे खुलने की आवाज सुनाई दी। मेरे दिल की धड़कन बढ़ गई और मैं खुशी से भर उठी। एक लंबा चौड़ा हट्टा कट्टा और बेहद स्मार्ट दिखने वाला युवक मेरे बेड के सामने खड़ा था। वह कोई और नहीं बल्कि मेरे पति सुनील थे।
दिखने में वे काफी आकर्षक और खूबसूरत नवयुवक लग रहे थे। वे धीरे से मेरे पास आए और बेड पर बैठ गए। उन्होंने बड़े प्यार से मेरा घूंघट उठाया। फिर उन्होंने मेरी खूबसूरती की मुंह खोलकर तारीफ की और धीरे से मुझे किस करने लगे। मैंने भी शर्माते हुए उनका पूरा साथ दिया। हमारा यह गहरा और लंबा किस लगभग दस मिनट तक चला। उनके होंठों की नरमी और गर्मी मेरे पूरे शरीर में करंट की तरह दौड़ रही थी।
फिर हम दोनों धीरे धीरे एक दूसरे के बदन को स्पर्श करने लगे। सुनील ने बड़े प्यार से मेरे सारे गहने एक एक करके उतारे। हर गहने के उतरते ही मेरी त्वचा पर ठंडी हवा का स्पर्श महसूस हो रहा था। उसके बाद उन्होंने मेरी साड़ी की पल्लू खींची और धीरे धीरे पूरी साड़ी उतार दी। मैंने भी उनकी शेरवानी उतारने में मदद की। उनका बदन देखकर मैं हैरान रह गई। उनकी छाती चौड़ी और मजबूत थी। उनसे गले लगते ही मेरे रोम रोम में जैसे बिजली दौड़ गई। मैं उनके मजबूत बदन से चिपक कर रह गई। उनकी गर्मी मेरे बदन में समा रही थी और मेरी सांसें और तेज हो गई थीं।
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और फिर उन्होंने मेरे ब्रा और पेंटी को ऊपर से ही अपने प्यार भरे हाथों से छूना शुरू कर दिया। उनके हाथों की गर्माहट मेरे स्तनों और निचले हिस्से को छूते ही मुझे बेहद अच्छा लग रहा था। मेरी सांसें तेज हो चुकी थीं। मैंने भी अपना हाथ बढ़ाकर उनके लंड पर रख दिया और उसे पजामे के ऊपर से ही सहलाने लगी। लेकिन पजामे के ऊपर से उनका लंड कुछ खास फील नहीं हो रहा था।
मैंने हिम्मत करके अपना हाथ उनके पजामे के अंदर डाला। पहले उनका पजामा नीचे खींचा और फिर उनके कच्चे में हाथ डाल दिया। उनके लंड को छूते ही मुझे अहसास हुआ कि वह काफी छोटा और पूरी तरह नरम था। मुझे लगा कि अभी वह जोश में नहीं आया है। मैंने उसे अपनी नरम हथेली से खूब सहलाया। फिर उसे ऊपर नीचे करके काफी देर तक हिलाती रही। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। वह बिल्कुल भी खड़ा नहीं हो रहा था।
इस दौरान सुनील मेरे भरे हुए चुचों को चूस रहे थे। उन्होंने मेरे एक स्तन को मुंह में लेकर जोर जोर से चूसा और निप्पल को जीभ से घुमाया। उनकी जीभ निप्पल के चारों ओर चक्कर काट रही थी और कभी कभार हल्के से दांतों से काट भी रहे थे। दूसरी तरफ उनकी उंगलियां मेरी छूत के ऊपर घूम रही थीं और धीरे धीरे अंदर की तरफ बढ़ रही थीं। उनकी उंगलियों के स्पर्श से मेरी उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। मेरी छूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी और उसमें से गर्म रस निकलने लगा था। उनकी उंगली मेरी छूत की फाक में धीरे से घुस रही थी और अंदर बाहर हो रही थी जिससे हल्की सी चिकचिक की आवाज आ रही थी। लेकिन उनका लंड अभी भी जंग लड़ने के लिए तैयार नहीं था।
मैंने उन्हें सीधा लिटा दिया। फिर उनके कच्चे को पूरी तरह नीचे खींचकर उनके लंड को बाहर निकाला और मुंह में ले लिया। मैं चाहती थी कि जल्दी से यह खड़ा हो जाए। मेरी सहेलियों ने मुझे यही बताया था कि इससे लंड जल्दी खड़ा होता है।
पहले तो मुझे उनके लंड का स्वाद थोड़ा अजीब और नमकीन लगा। लेकिन धीरे धीरे मैं नॉर्मल हो गई। मैंने लगभग पंद्रह मिनट तक उसे मुंह में लेकर चूसा। मेरी जीभ उसके पूरे लंड पर घुमा रही थी। मैंने उसे गहरे गले तक ले जाने की कोशिश की। मेरे होंठ उसके लंड के चारों ओर कसकर लगे हुए थे और मैं जोर जोर से चूस रही थी। लेकिन उस पर कोई असर नहीं हुआ। वह अभी भी नरम ही था। मैंने फिर से पूरी कोशिश की लेकिन कोई बात नहीं बनी। अब मैं काफी थक चुकी थी।
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मैंने सुनील से कहा आपका हथियार को क्या हुआ है यह तो खड़ा ही नहीं हो रहा है। सुनील मेरी आंखों में देखने से बच रहे थे। उन्होंने कहा कि तुम्हें ठीक से चूसना नहीं आता तो कहां से खड़ा होगा।
मुझे लगा शायद यह मेरी पहली बार होने की वजह से है। इसलिए मैंने दोबारा पूरी मेहनत से ट्राई किया। मैंने उनके पूरे लंड को मुंह में भर लिया और आइस क्रीम की तरह चूसने लगी। मैंने उसे तेजी से हिलाया। फिर अपनी छूत और चुचों को उसके लंड पर रगड़ने लगी।
उस पर अपनी छूत और चुचे रगड़े पर उसे कोई फर्क नहीं पड़ा।
उसको जोश दिलाने के चक्कर में मेरा पूरा जोश फीका पड़ रहा था।
मेरा बदन अभी भी गर्म था। मेरी छूत पूरी तरह गीली और तड़प रही थी पर सुनील का लंड नरम ही पड़ा रहा। मैंने उसे बार बार रगड़ा और चूसा पर कोई नतीजा नहीं निकला। मेरी सांसें तेज थीं और मेरे चुचे भारी होकर दर्द कर रहे थे। मेरा पूरा शरीर अधर में लटका सा महसूस हो रहा था।
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मैंने सुनील को कहा सुनील इसे खड़ा करो हमारी पहली सुहागरात है मैं इसे यादगार बनाना चाहती हूँ।
मैंने सुनील को कहा ऐसा क्या है जो तुम्हारा खड़ा नहीं हो रहा तो सुनील मुझसे अपनी नजरें चुरा रहा था। मैंने कहा क्या बात है बताओ पर वो न जाने क्यों मेरे से अपनी नजरें चुरा रहा था। मुझे कुछ गलत संकेत लग रहे थे।
मैंने कहा तुम्हारा सामान कम भी करता है या नहीं वो कुछ नहीं बोला। कहने लगा मुझे नींद आ रही है सो जाओ अब मुझे कहां नींद आने वाली थी।
मैंने फिर एक बार कोशिश की उनको गरम करने की पर कोई बात नहीं बनी। मुझे गुस्सा आ रहा था। मैंने गुस्से में कह दिया कहीं आप नामर्द तो नहीं हो।
वो कुछ नहीं बोले। मुझे एक गहरा सदमा लगा कि किसी भी लड़के या आदमी के लिए यह शर्मनाक बात होती है कि उसकी पत्नी उसको ऐसा कहे पर उन्हें गुस्सा जरा भी नहीं आया और अपनी मुंह झुकाए रखा।
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फिर मैं थोड़ी देर शांत रही। फिर थोड़े ठंडे दिमाग से पूछा आखिर बात क्या है सुनील बताओ।
मेरे बड़े कहने के बाद उन्होंने कहा कि मैं नामर्द हूँ मेरा लंड खड़ा नहीं होता।
यह सुनने के बाद मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मेरी आंखों से आंसू आने लग गए। मैंने कभी सपने में भी ऐसा नहीं सोचा था कि मेरी किस्मत में यह लिखा होगा। मेरे सारे सपने टूट गए। मेरी आंखों से आंसू निकले जा रहे थे।
वो मुझे चुप करने की बहाने कहते सो जा। मैं निहायत रूम के कोने में बैठकर रो रही थी पर उन्हें कोई भी परवाह नहीं।
दोस्तों यह कहानी जारी रहेगी। अपने अगले भाग में आपको बताऊंगी कि मेरी जिंदगी में कौन कौन से मोड़ आए और मैं कैसे अपनी वासना शांत करवाती हूँ अपने नामर्द पति के साथ।
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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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Hello Priya Babhi,
M jaipur k pass se hi hu agr aapko koi madad chahiye to bta sakte ho. Aapki jaankari full private rhegi.