Sasti chut sex story: बात उन दिनों की है जब मैं बैंक में जॉब कर रहा था और मेरी पोस्टिंग पटना में हुई थी। पटना शहर मुझे काफी अच्छा लगा पर जुगाड़ का कोई ठिकाना नहीं था।
जहाँ मैं रोज चाय पीने जाता था वहाँ एक स्थानीय आदमी की बातें सुनकर मेरे कान खड़े हो गए। वह जोर-जोर से बता रहा था कि पटना चिड़ियाघर यानि जैविक उद्यान में केवल बीस रुपये में चूत मिलती है। मैंने पहले तो सोचा कि यह आदमी बस हवा में फेंक रहा है।
यह कैसे संभव हो सकता है कि इस बढ़ती महंगाई के दौर में चूत इतनी सस्ती मिल रही हो। मेरे मन में शक और उत्सुकता दोनों ही जाग उठे थे। लेकिन यह बात पूरी तरह सच साबित हुई जब मेरे एक सहकर्मी ने खुद मुझे बताया कि उसे भी बीस रुपये में चूत मिली है।
उसने विस्तार से बताया कि जैविक उद्यान के बाहर बैठी बंजारी लड़कियाँ मात्र बीस रुपए लेकर आसानी से चुद जाती हैं। उनकी उम्र जवान होती है, शरीर आकर्षक होता है और वे खुलकर सेवा देने को तैयार रहती हैं। मैंने भी खुद जाकर असलियत पता लगाने की ठानी।
एक दोपहर मैं इसी चक्कर में पटना जैविक उद्यान पहुँच गया और उसके मुख्य गेट के बाहर धीरे-धीरे घूम रहा था। वहाँ कुछ बंजारे परिवार के लोग इधर-उधर बैठे या खड़े थे। मैं मन ही मन सोच रहा था कि अब कैसे पूछूँ कि चुदाई करनी है, चूत दोगी।
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तभी एक दस साल के करीब का बच्चा मेरे पास आया और सीधे पूछ बैठा, “मेरी दीदी को घुमाने ले जाओगे?” मैं हक्का-बक्का रह गया।
मैंने उसकी दीदी की तरफ देखा तो देखता ही रह गया। गोरी सी, पतली कमर वाली, भूरी-भूरी आँखों वाली कोई बीस-बाईस साल की लड़की वहीं पास में खड़ी थी। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी, होंठों पर हल्की मुस्कान और शरीर की बनावट ऐसी कि नजरें अटक ही जाती थीं।
जब मैंने उसे देखा तो वो खुद मेरे पास आ गई। मैंने इधर-उधर देखा कि कोई जान-पहचान का तो नहीं है। फिर मैंने पूछा, “तुम्हारा नाम क्या है?”
उसने बोला, “मेरा नाम कुसुम बंजारन है।” फिर उसने कहा, “आप चिड़ियाघर में घूमने जाना चाहो तो मैं घुमा दूँगी।”
मैंने पूछा, “कितना लोगी?” कुसुम बोली, “अरे साहब, जो दे दो।”
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मैंने सोचा पहले तय कर लिया जाए क्योंकि बाद में कोई लफड़ा न हो। सो वही तय हुआ बीस रुपये में।
मैंने उसका और अपना प्रवेश टिकट कटवाया और हम दोनों अंदर घुस गए। देखा वो कुछ बाहर खड़ी बंजारा औरतों और आदमी को इशारा कर रही थी जैसे दो उंगलियों में एक उंगली घुसा कर।
इशारा चुदाई का था मैं समझ गया। हम दोनों अंदर गए। मयूर रेस्टोरेंट है अंदर वहाँ हम दोनों ने कोल्ड ड्रिंक लिया।
घूमने आए अन्य लोग हमें देख रहे थे क्योंकि मैं शर्ट पैंट में साफ-सुथरा ऑफिस वाला आदमी था और वो लड़की ऊपर एक फीका कुर्ता और नीचे एक लम्बी सी पुरानी स्कर्ट घाघरा पहने हुई थी। कपड़े पुराने थे, मैले सिलवटों वाले, कई जगह धूल और पसीने के निशान लगे हुए थे, फिर भी उसकी गोरी त्वचा और भूरी आँखों का आकर्षण छुप नहीं पा रहा था।
कुसुम बोली साब चलो एक जगह ले कर चलती हूँ आपको। मैं उसके पीछे चल दिया।
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वो एक सुनसान गार्डन में ले आई मुझे। एक बड़ी सी झाड़ी के अंदर हम दोनों घुस गए। झाड़ी के पत्ते हमारे शरीर को छू रहे थे, हल्की सी खरोंच महसूस हो रही थी और चारों तरफ नम मिट्टी तथा हरी पत्तियों की ताज़ी खुशबू फैली हुई थी।
कुसुम बोली साब पहले बीस रुपये वर्ना काम करवाने के बाद कोई झिक झिक नहीं। मैंने झट से बीस रुपये थमा दिए।
कुसुम बोली साब पहले लाण्डिया चुसूँ या फिर सीधा ही। मैं थोड़ा हिचकिचाया।
कुसुम बोली साब कोई नहीं आता यहाँ आराम से चुदैइया कर सकते हो। मैंने डरते हुए अपना लंड पैंट के बाहर निकाल लिया। मेरा लंड पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था, उसकी नसें उभरी हुई थीं और सिरा चमक रहा था।
कुसुम बोली क्या साब आप तो लौण्डिया के माफिक शरमाते हो। यह बोलते हुए उसने अपना गर्म, नम मुँह खोला और मेरे लंड को एक झटके में अंदर ले लिया।
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वो उसे चूसने लगी। पहली बार थी मेरी। मैं मदहोश होने लगा था। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे को चारों तरफ घुमा रही थी, कभी जोर से चूसती तो कभी धीरे-धीरे ऊपर नीचे सरकाती। वो मस्त चूस रही थी और अपनी उँगलियों से मेरे गोल गोल गोलियों को नरम-नरम दबा रही थी, हल्का-हल्का मसल रही थी। उसके मुँह के अंदर की गर्मी, लार की नमी और चूसने की आवाज़ मुझे पागल कर रही थी।
मैं बोला अहह अहह बस। मुँह में ही मुठ लोगी क्या।
कुसुम बोली निकाल दो साब आपने रुपये किस बात के दिए हैं। आपकी हूँ कुछ भी करो मेरे साथ।
मैं बोला चल कपड़े खोल तेरी चुदाई करनी है।
कुसुम बोली नहीं साब सारे कपड़े मत खोलना अगर गारद साब आ गए तो भागना पड़ता है।
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मैं बोला फिर चुदाई कैसे करूँ। कुसुम बोली साब आप लंड बाहर ही रखो मैं अपने कपड़ों को ऊपर उठा लेती हूँ।
मैं बोला और कोई आ गया तो। कभी कोई आया है।
कुसुम बोली हाँ साब एक बार आ गया था एक गारद था।
मैं बोला फिर। कुसुम बोली फिर क्या साब वो जो साब लाये थे वो तो भाग गए लेकिन वो उस गारद ने रात भर मेरी चुदईया किया था।
मैं बोला यार तुम लोग हो कौन और आये कहाँ से हो।
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कुसुम बोली साब हम लोग पहाड़ी लोग हैं बंजारे हैं कोई ठौर ठिकाना नहीं। आज हियाँ कल कहीं और।
मैं बोला और करते क्या हो। कुसुम बोली जो बंजारन जवान है चुदईया से कमाती है और जो बंजारन बूढ़ी है वो बर्तन मांज कर।
मैं बोला और मर्द। कुसुम बोली मर्द लोग साले बच्चे से बड़े सब दल्ले हैं हम लोगों की कमाई पर खाते और दारू पीते हैं।
मैंने सोचा क्या इंटरव्यू लूँ इसका। उसका घाघरा उठाया और अपनी गोद में बैठा लिया।
कुसुम बोली साब अपने कंडोम पहन लिया ना। मैं बोला अरे तुझे तो सब पता है हाँ पहन लिया चल अंदर ले ले।
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कुसुम बोली साब तेरह बरस से चुदवा रही हूँ अब तो सात साल हो गया इस पेशे में। यह कहकर वो मेरी गोद में बैठ गई और लंड सरकते हुए उसके बुर में डाल दिया।
कुसुम बोली आह साब थारा लाण्डिया बड़ा है अहह। आराम से घस्से मारो ना।
उसके लाख मना करने पर भी मैंने उसका कुर्ता उतार दिया। न उसने ब्रा पहनी थी न ही पैंटी। उसके छोटे छोटे नुकीले चूचे मैं चूसने लगा।
कुसुम बोली साब अहह ये मती आह करो अहह। मैं यह भूल गया कि हम दोनों दोपहर में खुले मैदान में चोदम चुदाई कर रहे हैं।
देखते देखते हम दोनों एकदम नंगे गए। मैं उसकी जांघों को फैला कर अपना लंड घुसेड़ने लगा।
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उस बंजारन के शरीर पर कोई बाल नहीं था एकदम चिकनी। लग ही नहीं रहा था कि सिर्फ बीस रुपये की माल है।
मैं घस्से मारे जा रहा था उसके लब चूसने लगा। मैं चरमोत्कर्ष पर ही था तभी देखा दो आदमी आ गए।
पहला आदमी बोला लगे रहो गुरु। दूसरा बोला डरो मत हम भी वही हैं जो तुम हो।
उनके साथ भी एक बंजारन औरत आई थी। कुसुम बोली साब कहा था कपड़े मत खोलो देखा ना।
मैं बोला अरे वो भी चोदने लाये हैं एक बंजारन को।
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आदमी बोला कितने में लाये इसको। मैं बोला बीस रुपये में।
आदमी बोला ठगे गए ऐसी ऐसी दस की भी देती है ये देख तीस की है हम दो जने चोदेंगे इसको।
दूसरा आदमी बोला चल तू लगे रह गुरु। कुसुम बोली अरे माई है मेरी उसका बड़ा सा मोरा है।
बंजारन चिल्लाई अबे रंडी चुदवा ले खामोश रह के जादा बोली तो सोट्टा बड़वा दूंगी छोरे नै कह के।
कुसुम ने भांडा फोड़ दिया था वो कुसुम की माँ को चोदने लाये थे।
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मैं घस्से मारे जा रहा था मजे के साथ बात भी कर रहा था सोच रहा था कि क्या हो रहा है यह एकदम खुल्लम खुल्ला।
दो लोग जो आये थे उन्होंने भी उस बंजारन को नंगी किया और एक ने अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और दूसरे ने उसके बुर में डाला।
बंजारन बोली अरे नंगा न कर। दोनों माँ बेटी थोड़े दूर में चुद रही थीं।
मैंने जोर से कुसुम की गांड को पकड़ा और सारा माल उसकी बुर में निकाल दिया।
मैंने कंडोम उतार कर फेंका और जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। कुसुम अभी भी नंगी थी।
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जो आदमी उस बंजारन की बुर चोद रहा था वो अपना लंड निकाल कर कुसुम के पास आ गया और उसका हाथ पकड़ लिया।
कुसुम बोली मेरा हाथ छोड़। आदमी बोला तेरी बुर छोटी है न तेरी माँ से चल तेरे को ही चोदता हूँ।
कुसुम बोली कल आना आज और नहीं चुदवाना। आदमी बोला तू जानता नहीं मैं कौन हूँ सलीम नाम है पास के थाने में कांस्टेबल हूँ।
बंजारन बोली साब आप मेरे को ही चोदो न उसे जाने दो।
सलीम बोला चुप कर रांड तेरी बेटी को तो मुफ्त में चोदूँगा।
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कुसुम बोली कुसुम मुफ्त में तेरे को बुर क्या गाली भी नहीं देगी मैं।
सलीम ने उसे वही नंगी अवस्था में घुमाया और कुतिया स्टाइल से चोदने लगा। कुसुम बोली अहह माई।
वहीं माई मेरा मतलब उस बंजारन औरत को दूसरा आदमी चोदने लगा।
सलीम बोला साब चलते बनो अब। ये बंजारन की कोई औकात नहीं दो रुपये में भी चुदवा सकती है।
मैंने अभी कुसुम को चोदा था और फिर से चुदवाने बैठ गई। देखा एक जोड़ा फिर आ गया बंजारन थी और एक बूढ़ा।
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सलीम घस्से मारते हुए बोला शाम हो रही है अभी तो चुदाई और चलेगी खूब चोदा है इन बंजारनो को। बहुत लोग आते हैं इनका चूल्हा हमारे पैसों से जलता है।
मैं जल्दी जल्दी वहाँ से भाग निकला। मैंने सोचा भी नहीं था कि यहाँ इतना खुल्लम खुल्ला सेक्स चलता है।
वहीं इतनी महंगाई में इतनी सस्ती चूत। यकीन नहीं आ रहा था। फिर कभी वहाँ जाने की हिम्मत नहीं हुई।
दो बार उस जगह से गुज़रा हूँ एक बार कुसुम को अपने छोटे भाई बहनों से खेलते देखा था दूसरी बार किसी ग्राहक से बात करते।
वाह रे ज़िन्दगी क्या क्या दिखा और क्या क्या सीखा देती है।
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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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