Chacheri behan ki khule khet me chudai: गांव में मेरी दादी के साथ मेरे चाचा-चाची और उनकी बेटी अंजू रहती है। इस बार मैं पूरे एक साल बाद गांव गया था। इसलिए मुझे वहां काफी अच्छा लग रहा था और बहुत उत्साह भी था सबसे मिलने का क्योंकि मुझे सब दिल से चाहते हैं।
गांव आते ही सबसे पहले चाची और अंजू मुझे घर ले जाने के लिए आए। उस वक्त मेरी निगाहें बस अंजू पर ही टिकी हुई थीं। वो काफी बड़ी हो चुकी थी और सुंदर भी लग रही थी। मैं अपने आप को रोकना चाहता था पर उसके स्तनों के उभार ने तो जैसे मेरी नजरों पर ही काबू कर लिया था।
अगली सुबह मैं अंजू के साथ खेत की तरफ घूमने निकल पड़ा। हम दोनों बातें करते-करते घर से बहुत दूर निकल आए थे। फिर कुछ देर के बाद हम दोनों थक कर वहीं एक पेड़ के नीचे बैठ गए। हमारे चारों तरफ खेतों में लंबी-लंबी इंक की फसल होने के कारण हमें कोई चाहकर भी देख नहीं सकता था।
कुछ देर इधर-उधर की बातों में उलझाते हुए मैंने अचानक उससे यौन संबंधित विषय की बातें करना शुरू कर दिया। अंजू एकदम घबरा गई और सहमी-सी आवाज में बोली, “ऐसी बातें करना हमें शोभा नहीं देता!”
तभी मैंने अंजू को प्यार से समझाया। जिस पर वो कुछ देर न-न करती हुई मान गई और हम दोनों एक दूसरे से यौन संबंधित बातें करने लगे। इससे मेरा लंड पैंट के अंदर ही सलामी देने लगा। अंजू 18 साल की हो चुकी थी और हर तरह से देसी माल लग रही थी। मुझे अंजू को बस खुल्ले सांड की तरह चोदने का मन करने लगा।
कुछ देर बातें करने के बाद हम दोनों एक दूसरे के और करीब आकर बैठ गए। फिर एक दूसरे को टकटकी लगाकर देखने लगे। मैंने अपने हाथों से अंजू के खुले बालों को खोलकर सहलाने लगा और धीरे-धीरे उसकी पीठ पर हाथों को फेरने लगा। इससे अंजू ने सहमते हुए धीमी-सी आवाज में कहा, “क्या कर रहे हो?”
मैंने अंजू से कुछ न कहते हुए उसके होठों को चूमने लगा। पहले अंजू ने मेरा हल्का-हल्का विरोध किया पर आखिर अपने तन की गर्मी आगे हार मान ली। मैंने अंजू को समझाया कि “इस तरह के शारीरिक संबंध से कुछ नहीं होता। हम दोनों एक दूसरे के लिए ही बने हैं। यह तन की गर्माहट तो कुदरत की ही देन है!”
मेरे काफी देर समझाने के बाद अंजू आखिरकार मान ही गई और मुझे इजाजत दे दी। मैंने अंजू को उसी वक्त गले लगा लिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा। अपने हाथों से उसकी पीठ को मसलने लगा और फिर धीरे-धीरे उसके मुलायम गालों तक पहुंचकर उसके होठों पर चूमने लगा। अब अंजू के मुंह से भी कामुक आवाजें निकल रही थीं और उसका पूरा शरीर कांप रहा था।
अब मैंने धीरे से अंजू की कुर्ती को उतारा और उसके ब्रा को चाटने लगा। उसने काले रंग का ब्रा पहने हुए था। मैंने अपनी जीभ से ब्रा के ऊपर वाले कपड़े को चाटा जिससे नमकीन पसीने का हल्का स्वाद मेरे मुंह में फैल गया। फिर मैंने उसके ब्रा की हुक खोली और ब्रा को दोनों तरफ से खींचकर पूरी तरह उतार दिया। उसके गोरे-गोरे स्तन अब मेरे सामने पूरी तरह खुले हुए थे। वे नरम और भरे हुए थे जिनकी गुलाबी चूचियां छोटी-छोटी कलियों की तरह सख्त हो चुकी थीं। जिन्हें मैंने चूमते हुए अपने दोनों हाथों से दबाना शुरू कर दिया। मैंने अपनी उंगलियों को उनके नरम मांस में गड़ा दिया और उन्हें जोर से मसलने लगा। फिर मैंने एक चूची को अपने होठों में भरकर जोर से चूसा और दूसरी चूची को अपनी उंगलियों से निचोड़ते हुए उसे भींच लिया।
मेरे ऐसा करने से अंजू का पूरा शरीर झटपटाने लगा। उसकी सांसें तेज और गहरी हो गईं। वह गरम-गरम सिसकारियां भरने लगी जिनमें दर्द और मजा दोनों का मिश्रण था। मैंने उसका हाथ थाम लिया और अपनी हथेली से उसकी हथेली को दबाते हुए उसे शांत करने की कोशिश की। फिर कुछ देर उसके स्तनों को चूसने और दबाने के बाद मैं उसके पीछे चला गया। वहां से मैंने उसकी पीठ को चूमना शुरू कर दिया। मेरी गर्म सांसें उसकी पीठ की नसों पर पड़ रही थीं। मैंने अपनी जीभ से उसकी रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ ऊपर नीचे चाटा। साथ ही अपने हाथ को उसके पेट पर फेरने लगा। मेरी उंगलियां उसके नाभि के आसपास घूम रही थीं जिससे उसकी कमर बार-बार सिकुड़ रही थी। कुछ देर बाद मैंने अपनी जीभ से अंजू की नाभि के इर्द-गिर्द चाटना शुरू किया। मैंने जीभ को गोल-गोल घुमाया और कभी-कभी हल्का-हल्का काट भी लिया।
कुछ देर यह सब करने के बाद मैंने अंजू की सलवार का नाड़ा खोल दिया। मैंने उसे धीरे-धीरे नीचे सरकाया और पूरी तरह उतारकर वहीं मिट्टी की क्यारियों में रख दिया। उसकी जांघें बहुत गोरी-गोरी और मोटी थीं जो पसीने से चमक रही थीं। उसने लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी जिस पर हल्का गीला निशान दिख रहा था। मैंने उसकी जांघों को चूमना शुरू कर दिया। मैंने अपनी गर्म जीभ से उसकी दाहिनी जांघ के अंदरूनी हिस्से को चाटा फिर बाईं जांघ पर भी यही किया। चूमते-चूमते मैं ऊपर की तरफ बढ़ा और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर अपनी जीभ को जोर से रगड़ने लगा। पैंटी के कपड़े के ऊपर से भी उसकी गर्मी और नमी महसूस हो रही थी।
कुछ देर यूँ ही करने के बाद मैंने उसकी पैंटी को दोनों तरफ से पकड़कर नीचे खींच लिया। अब उसकी चिकनी-कुंवारी चूत पूरी तरह मेरे सामने थी। उसकी चूत की लालिमा और छोटी-छोटी बालों की हल्की लाइन साफ दिख रही थी। मैंने अपनी दो उंगलियां उसकी चूत में धीरे से अंदर डालीं और फिर बाहर निकालने लगा। अंजू को बहुत मजा आ रहा था। उसकी आंखें बंद हो गई थीं और मुंह से लगातार हल्की-हल्की कराहें निकल रही थीं। इससे मेरा जोश बढ़ा और मैंने उसे वहीं मिट्टी में पूरी तरह लिटा दिया। मैंने अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रगड़ना शुरू कर दिया। लंड का सिरा उसकी गर्म और गीली चूत की फांकों के बीच फिसल रहा था।
अब मैं अंजू के गोरे बदन पर लेट गया और मस्ती में एक जोरदार झटका लगाया। इससे पहले वो जोर से चिल्लाई। उसकी चूत में हुए तेज दर्द के कारण उसकी आंखों से आंसू बहने लगे और वह रोने लगी। मैंने इसकी परवाह न करते हुए पहले अपनी जीभ से उसकी चूत को अच्छी तरह चाटा। मैंने जीभ को उसके क्लिटोरिस पर घुमाया और फिर पूरी चूत को चाटकर उसका रस पी लिया। फिर जैसे ही उसकी गर्मी चढ़ी और चूत ढीली होने लगी तो मैंने फिर अंजू की चूत में लंबे-लंबे धक्के देना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ उसकी चूत मेरे मोटे लंड को निचोड़ रही थी। जिससे अब वो पूरी तरह कामुकता में डूबकर मेरे हर झटके को लेने लगी। उसकी सिसकारियां अब चीखों में बदल गई थीं और वह अपनी कमर ऊपर उठा-उठाकर मेरा साथ दे रही थी।
मैंने लगभग 45 मिनट तक अंजू की चूत में अपने लंड को रौंदा। बीच-बीच में मैं रुककर उसे चूमता और उसके स्तनों को दबाता रहा। फिर आखिर में जब मेरा जोश चरम पर पहुंचा तो मैंने उसकी चूत को जोर से मसलते हुए अपना सारा घड़ा गर्म वीर्य उसके स्तनों पर ही छोड़ दिया। हम तभी अपने कपड़े पहनकर समय पर घर पहुंच गए। अब अंजू भी मुझसे काफी करीब आ चुकी थी और जब भी मुझे मौका मिलता मैं उसे दबोच लेता।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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