Chudakkad aurat sex story: मैं कामिनी देवी नाम बदल दिया गया है आप सबके सामने अपनी एक और चुदाई की कहानी लिख रही हूँ। मैं एक 33 साल की बहुत ही ज्यादा चुदक्कड़ औरत हूँ। मेरी उम्र 33 साल की है और मेरा शरीर एकदम गोरा है और कसा हुआ है। मेरी चूत गुलाबी कलर की है और मेरी चूत पर कभी भी बाल नहीं होते। तो अब मैं अपनी स्टोरी पर आती हूँ।
ये कहानी आज से करीबन एक महीने पहले की है। एक दिन मैंने सोचा कि मैं कहीं जाकर ऐसे चुदाई करवाऊँ ताकि मैं अपने आप को एक बाजारू औरत के रूप में महसूस कर सकूँ।
और मैं फिर रात को नहा धोकर रेडी हुई। मैंने एक डीप गले वाला ब्लाउज पहना जो कि पुराना था और काफी टाइट था। जिससे मेरे बूब्स ब्लाउज में नहीं समा रहे थे और आधी चुचियाँ बाहर निकल आई थीं। मैंने एक पिंक कलर की साड़ी डाल ली और मेकअप किया। रेड कलर की डार्क लिपस्टिक लगाई और बालों का झूड़ा बनाकर उसमें एक फूल लगाया।
अपने आप को आईने में देखा तो मैं बिलकुल कोठे की रंडी की तरह ही लग रही थी। मन ही मन सोचा कि आज तो एक रंडी की तरह ही चुदवाना है। मैं अपनी कार लेकर निकली घर से। घर से काफी दूर एक सुनसान सड़क पर कार खड़ी की और बाहर निकलकर कार के पास खड़ी रही।
अपने पर्स में से एक सिगरेट जलाई और पीने लगी। मैं आप सबको बता दूँ कि मैं कोई-कभार ही स्मोकिंग करती हूँ और ड्रिंक भी। फिर मैं सड़क पर से आने जाने वाली कारों को देखने लगी।
कुछ देर बाद वहाँ से एक कार निकली और उसने थोड़ी आगे जाकर वापस मुड़ी। अपनी कार मेरे पास आकर खड़ी कर दी। मैंने कार में देखा तो उसमें 24 या 25 साल के तीन जवान और हट्टे-कट्टे लड़के थे जो कि थोड़े अच्छे घर के लग रहे थे।
फिर आगे की खिड़की पर एक लड़का बैठा था जो मेरे सामने मुस्कुराया। मैंने भी उसके सामने स्माइल कर दी। फिर वो कार में से बाहर आया और मेरे पास आकर खड़ा हुआ। बोला चलती है क्या।
मैंने पूछा कहाँ पर तो वो बोला मेरे फार्म हाउस पर कोई नहीं है तो आज तेरे साथ मजे करेंगे हम तीनों। और तू कितने पैसे लेगी एक रात के। ये सब सुनके मुझे कुछ अजीब सा फील हो रहा था।
मैं समझ गई कि मुझे वो एक रंडी समझ रहा है और इसी लिए मुझसे कितने पैसे लेगी ऐसा पूछ रहा था। हाँ मन ही मन मुझे डर भी बहुत लग रहा था। क्योंकि मैंने चुदाई तो काफी बार करवाई थी पर इस तरह एक अनजानी जगह पर और अजनबी लोगों के साथ। वो भी रात के करीब 10 बज गए थे।
वैसे तो मुझे पैसों की कोई जरूरत नहीं थी फिर भी मैंने उसे कहा 5000 रुपये लूँगी नाइट के। तो वो खुश हो गया और शायद मैंने सोचा कि मैंने कुछ कम भाव बोला होगा।
पर खैर यहाँ बात पैसों की नहीं थी। बस अपनी चूत की प्यास बुझाने की थी। तो अब वो बोला ठीक है आओ कार में बैठो। तो मैंने कहा नहीं मेरी कार भी लेनी पड़ेगी साथ में। तो उसने कहा ठीक है।
उसने अपने दोस्त को कहा तुम लोग मेरे फार्म हाउस पर पहुँचो मैं इसके साथ इसकी कार में वहाँ पर मिलता हूँ। फिर वो मेरे साथ मेरी कार में बैठ गया और हम उसके फार्म हाउस के लिए निकल गए।
रास्ते में उसने मुझे अपना नाम पूछा तो मैंने अपना नाम झूठा बताया और मैंने कहा मेरा नाम रानी है। मैंने उसे अपना नाम पूछा उसने अपना नाम मुझे रवि बताया। कुछ देर में हम लोग पहुँच गए।
हम सब अंदर गए और सोफे पर बैठे। वो अंदर गए और उसके साथ में उसका दोस्त जिसका नाम साहिल था। उसका तीसरा दोस्त मेरे बाजू में आकर मेरे पास बैठ गया जिसका नाम मयूर था।
कुछ देर बाद रवि और साहिल बाहर आए तो मैंने देखा कि साहिल के हाथ में एक दारू की बोतल थी और रवि के हाथ में 4 ग्लास और पानी और कुछ खाने का सामान था।
उसने आकर वो टेबल पर रखा तो मैंने कहा कि मैं सोडे के साथ पीती हूँ पानी में शराब मुझे अच्छी नहीं लगती। तो रवि अंदर गया और एक सोडे की बोतल ले आया।
फिर मेरी दूसरी बाजू आके बैठ गया। अब मेरी एक बाजू रवि और दूसरी बाजू मयूर बैठा था और साहिल सामने बैठा था। अब मयूर पेग बनाने लगा और उसने हम चारों के पेग बनाए। हम लोग पीने लगे।
थोड़ी देर में ही हमने दो-दो पेग पी लिए और अब मुझे नशा हो रहा था। मेरे सिर में हल्का चक्कर सा आ रहा था। शरीर गर्म हो चुका था और चेहरे पर लाली छा गई थी।
रवि ने मुझे अपनी ओर खींचा और मेरे कंधों पर से होते हुए उसका हाथ मेरे बूब्स को सहला रहा था। उसकी उँगलियाँ ब्लाउज के ऊपर से ही मेरी निप्पल्स को दबा रही थीं। उधर मयूर मेरी जाँघों को सहला रहा था। उसकी हथेलियाँ धीरे-धीरे ऊपर की तरफ बढ़ रही थीं और मेरी त्वचा पर गर्म साँसें छोड़ रही थीं।
साहिल सामने बैठा ही था। अब तक रवि ने मेरा पल्लू हटा दिया और मेरे ब्लाउज के हुक खोल दिए। मेरा ब्लाउज हटा दिया और मेरी चुचियाँ उसकी आँखों के सामने थीं। वो बोला वाह रे रंडी मेरी रानी तेरी चुचियाँ तो एकदम टाइट और गोरी-गोरी हैं। लगता ही नहीं कि तू एक रंडी है।
वो मेरी चुचियों के साथ खेलने लगा। उसने दोनों हाथों से मेरी मुलायम गोरी चुचियों को जोर से मसलना शुरू कर दिया। उँगलियों से निप्पल्स को पकड़कर खींचा और फिर चूसने लगा। उसकी गर्म जीभ मेरे निप्पल्स के चारों ओर घूम रही थी। बीच-बीच में वो हल्का-हल्का काट भी रहा था जिससे मेरे शरीर में सिहरन दौड़ रही थी।
उधर मयूर ने मेरी साड़ी और पेटीकोट को भी निकाल दिया था और मैं बिलकुल नंगी थी। उसकी आँखें मेरी चूत पर टिकी हुई थीं। मयूर ने मेरी चूत देखकर कहा रानी तेरी चूत भी काफी बिलकुल तेरी तरह ही चिकनी और गुलाबी है। एक भी बाल नहीं है। इसे तो चोदने और चाटने में बहुत मज़ा आएगा।
अब मैं भी थोड़ी गरम हो चुकी थी। मेरी साँसें तेज हो गई थीं और चूत से गर्म रस निकलने लगा था। मैंने अपने हाथ से रवि का शर्ट निकाल दिया। तो रवि खड़ा हुआ और उसने अपने पूरे कपड़े निकाल दिए। मैंने देखा उसका लंड 9 इंच लंबा और काला था पर ज्यादा मोटा नहीं था। उसकी नसें उभरी हुई थीं और सिरा चमक रहा था।
वो वापस बैठकर मेरी चुचियाँ चूसने लगा। उसका मुँह मेरी एक चुची को पूरा निगल रहा था। जीभ से तेजी से चाट रहा था और दूसरे हाथ से दूसरी चुची को मसल रहा था। मयूर मेरी चूत चाट रहा था। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत की फाँकों को अलग करके अंदर तक घुस रही थी। बीच-बीच में वो मेरी चूत के दाने को काट रहा था। हर काट पर मेरी कमर उठ जाती थी।
अब साहिल सामने से खड़ा हुआ और अपने कपड़े निकाल दिए। मैंने उसका लंड देखा तो वो करीब 8 इंच का था और काफी मोटा था। उसका मोटा सिरा लाल हो रहा था। अब उसने अपने लंड को मेरे मुँह के सामने लाकर रख दिया।
मैंने उसके लंड को बिना पकड़े ही चाटना शुरू किया। मेरी जीभ उसकी नसों पर ऊपर से नीचे तक घूम रही थी। नमकीन स्वाद मेरे मुँह में भर गया था। अपने एक हाथ से रवि का लंड सहला रही थी और दूसरे हाथ से मयूर का मुँह मेरी चूत में दबा रही थी।
अब मैंने साहिल का लंड मुँह में लिया और जोर से चूसने लगी। मेरे गाल अंदर-बाहर हो रहे थे। फिर साहिल ने अब मेरे बालों को कसके पकड़ लिया और बोला साली रंडी बहन की लोड़ी आज तेरे मुँह को चोद-चोद के अपने लंड का पानी तेरे मुँह को पिलाऊँगा।
अब उसने एक पेग बनाया और उसमें अपने लंड को डालकर पूरा लंड शराब वाला किया। वो पेग मुझे पिला दिया। फिर मेरे मुँह को कसकर पकड़ लिया और अपना लंड मेरे मुँह में डालकर अपनी कमर हिलाने लगा। मेरे मुँह को चोदने लगा।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। मुझे शराब का और चुदाई का दोनों का नशा चढ़ चुका था। मेरी चूत भी गीली हो गई थी। उधर मयूर भी अब काफी जोर से अपनी जीभ से मेरी बुर को चोद रहा था।
वो कभी मेरी चूत में उँगली डालता तो कभी चाटता। रवि मेरी चुचियों को कभी चूसता तो कभी मसलता तो कभी काटता था। उसने मेरी चुचियों को चूस-चूस कर लाल बना दिया था।
करीबन आधे घंटे के बाद मैं झड़ गई और साहिल भी झड़ गया मेरे मुँह में। उसने अपना सारा पानी गिरा दिया और मैं सब पानी पी गई। उसके लंड को चाट के साफ कर दिया।
मेरा पूरा शरीर झड़ते वक्त काँप रहा था। मेरी चूत सिकुड़-सिकुड़ कर मयूर की जीभ को निचोड़ रही थी और मुँह भर गया था साहिल के गाढ़े, गरम वीर्य से। उसका स्वाद नमकीन और थोड़ा कड़वा था जो मेरे गले से नीचे उतर रहा था। मैंने आँखें बंद करके पूरा निगल लिया और फिर जीभ से उसके लंड के हर हिस्से को चाटकर साफ कर दिया।
फिर साहिल बोला क्यों रंडी कैसा लगा। मेरा पानी तो। मैं उसके सामने हँसी। उधर मयूर मेरी चूत का सारा रस चाट गया और खड़ा हुआ। बोला साली मादरचोद भोसड़ी की रानी तेरा चूत का रस तो बहुत गरम था।
अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो मैंने मयूर को कहा मेरी चूत में अपना लंड डाल दो और चोदो मुझे। अब और सहन नहीं हो रहा है।
मुझसे अब रवि भी खड़ा हुआ और साहिल वहाँ बैठा। मेरी चुचियों को चूसने लगा। रवि ने अपने अंडकोष को मेरे मुँह पर रख दिए। मैं उसे चूसने लगी।
वहाँ पर मयूर ने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा और एक ही झटके में पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया। मेरी चूत गीली थी तो उसका लंड आराम से चला गया पर मुझे थोड़ा दर्द हुआ।
मैं चिल्लाई आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आआह्ह्ह अह्ह्हाह्ह्हा आआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् आआऔऊउ आऊऊउ आआआऔउ ऊऊऊऊफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ ऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ उफ़ुफ़ुफ़्फ़ुफ़ूफ़ उफुफुफुफ्फुफ़ उफुफुफुफुफ्फ़। थोड़ा प्यार से।
फिर रवि ने अपने लंड को मेरे मुँह में धकेल दिया जिससे मैं और चिल्ला ना सकूँ। उधर अब मेरी चूत फाड़ रहा था और कुछ ही देर में उसने अपनी स्पीड काफी तेज कर दी। मेरी चूत को चोदने लगा।
अब मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा था। साहिल भी मेरी चुची को ऐसे चूस रहा था जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पी रहा हो। उधर रवि मेरे मुँह को चूत समझ कर चोद रहा था।
इसकी वजह से मेरी आँखों से पानी निकल रहा था। कुछ देर में ही वो मेरी चूत में खद गया और अपना सारा माल मेरी चूत में डाल दिया। इसके ठीक 7 या 8 मिनट बाद ही रवि भी मेरे मुँह में अपने लंड का पानी गिरा दिया।
मैं भी अब तक झड़ चुकी थी। मेरी चूत मेरे और मयूर के पानी से पूरी भर गई थी। अब हम सब वापस बैठे और पीने लगे।
करीब 15 मिनट बाद मयूर ने तेल लिया और मेरे पास आया। मेरे चूताड़ों को फैलाया और मेरी गांड के छेद को चाटने लगा। रवि आकर मेरे मुँह में लंड डाल दिया। पास में ही साहिल था।
अब मैं दोनों के लंड को बारी-बारी चूसने लगी। उधर मयूर मेरी चूत में थूक डालकर अपनी उँगली डालकर हिला रहा था। थोड़ी देर में रवि और साहिल दोनों के लंड खड़े हो गए।
अब रवि ने मुझे बेड पर ले जाकर खुद लेट गया और मुझे अपने ऊपर बिठाया। मैंने उसके लंड को पकड़कर मेरी चूत के छेद पर रखा। उसने एक ही झटके में अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और चोदने लगा।
अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। अब साहिल पीछे से आया और मेरी गांड के पास अपना लंड लाया। मैंने अपने हाथों से अपने चूताड़ों को फैलाया। साहिल ने मेरी गांड के छेद पर अपना लंड रखा और एक ही झटके में आधा लंड मेरी गांड में घुसा दिया।
मैं जोर से चिल्लाई तो मयूर ने आके मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया। मैं अब चिल्ला भी नहीं पा रही थी। मुझे दर्द भी बहुत हो रहा था।
अब मेरी गांड और चूत एक साथ चुद रहे थे और साथ में मेरे मुँह की भी चुदाई हो रही थी। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैं सातवें आसमान में पहुँच गई थी।
मैं चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी और अपनी गांड और चूत दोनों साथ में बहुत मस्ती से चुदवा रही थी। दोनों ने स्पीड भी काफी तेज कर दी थी। मुझे एक रंडी समझकर जानवरों की तरह चोद रहे थे।
कुछ ही देर में मयूर मेरे मुँह में झड़ गया। उसका गाढ़ा, गरम वीर्य मेरे गले के अंदर फूट पड़ा। मैंने जोर से चूसते हुए पूरा निगल लिया। मेरी आँखों से पानी बह रहा था और गला भरा हुआ महसूस हो रहा था। इस दौरान मैं दो बार झड़ गई थी। मेरी चूत और गांड दोनों सिकुड़-सिकुड़ कर लंड को निचोड़ रहे थे। शरीर में तीव्र झटके लग रहे थे।
फिर रवि भी झड़ गया और साहिल ने भी मेरी गांड में सारा पानी निकाल दिया। दोनों के वीर्य एक साथ मेरे अंदर भर गए। गर्म और चिपचिपा महसूस हो रहा था। मेरी चूत और गांड दोनों से सफेद रस रिस रहा था।
अब मैं काफी थक गई थी और ऐसे ही नंगी लेटी रही। पूरा शरीर पसीने से तर था। साँसें तेज चल रही थीं और कमर अभी भी हल्के-हल्के काँप रही थी। वो तीनों वापस शराब पीने लगे।
थोड़ी देर के बाद मयूर आया और मेरी गांड में लंड घुसा दिया। मेरी गांड मारने लगा। उसका लंड अभी भी सख्त था और मेरी गांड के अंदर जोर-जोर से धक्के दे रहा था।
मैं ऐसे ही उल्टी लेटी थी। मैंने कहा साले मादरचोद अब तो बस कर। वो नहीं माना और मेरी गांड काफी स्पीड में चोदने लगा। तो अब मैं भी मस्ती में आ गई।
उसका साथ देने लगी। कहा चोद साले मार मेरी गांड और फाड़ दे। मेरी गांड को गुफा बना दे। वो जल्द ही झड़ गया। इस बार उसका पानी भी कम निकला।
इसी तरीके से भरे बाजार में मैं चुद गई।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए
Related Posts