टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए

मुंबई बार में मिली प्यासी आंटी

Pyasi aunty sex story: ग्लास में दारु उड़ेल के मैंने जैसे ही जाम को ऊपर उठाया मेरी नजर इस आंटी जी के ऊपर गए बिना नहीं रह पाई।

बदन के भराव के हिसाब से वो करीब चालीस साल की लग रही थी। उसकी नशीली आँखें बार की मद्धिम रोशनी में चमक रही थीं, जैसे शराब के नशे में भी कोई गहरी भूख छिपी हो। चौड़ा और उभरा हुआ सीना ब्लाउज को तना रहा था, हर सांस के साथ हल्का-हल्का ऊपर-नीचे हो रहा था। पीछे की ओर दो मटके जैसे रख दिए हों वैसी मोटी, गोल और निचली गांड उसकी साड़ी के नीचे साफ झलक रही थी। वो बियर के ग्लास को अपने मोटे, गुलाबी होंठों से लगा रही थी और हर घूंट के साथ उसके गले की नस हिल रही थी।

मैं पिया हुआ जरूर था लेकिन मैं उन लोगों में से हूँ जिनके होश पीने के बाद भी पूरी तरह सही रहते हैं। रोज शाम को मैं इसी बार में दारू पीने आता था। बार की हवा में शराब, सिगरेट और हल्की पसीने की महक मिली हुई थी। लेकिन इस आंटी जी को मैंने आज से पहले कभी नहीं देखा था। वैसे भी भारत के अंदर लड़की या औरत का शराब के ठेके पर अकेले आना थोड़ा अजीब होता है। लेकिन क्योंकि यह बार के साथ रेस्टोरेंट भी था, यहाँ कई बार औरतें अपने पति के साथ आती थीं। खाने के बाद पति लोग दारू पैक करवाते थे घर ले जाने के लिए।

दारू के नशे में मैंने अपना परिचय तो आप लोगों को दिया ही नहीं। मेरा नाम राज है और मैं कानपुर, यूपी से बिलंग करता हूँ। जॉब की वजह से मेरी किस्मत मुझे यहाँ मुंबई ले आई है। मैं शादीशुदा होकर भी कुंवारा हूँ। नौकरी छोड़कर बीवी के पास जा नहीं सकता और बीवी को यहाँ लाकर दोनों का खर्च उठाने में मेरी फट जाएगी। इसलिए मैंने बीच का रास्ता निकाला हुआ है। बीवी वहीं कानपुर में बाबूजी और माँ के साथ रहती है। मैं यहाँ अकेला रहकर पैसे बचाता हूँ और उन्हें भेजता हूँ। छठ पूजा पर साल में एक बार जाता हूँ और हफ्ते के अंदर बीवी को इतना चोदता हूँ कि उसके चलने के होश भी नहीं रहते।

अरे आंटी जी की कहानी सुनने आए हो या मेरी दुःखभरी दास्ताँ। आंटी जी बियर पीते हुए मुझे देख रही थी और मैं भी ग्लास की आड़ में बार-बार उसे देख लेता था। मेरे दोस्त मंगेश ने एक बार बताया था कि कभी-कभी औरतें मर्दों के शिकार पर निकलती हैं और फिर उन्हें अपने घर ले जाकर चूत और गांड मरवाती हैं। लेकिन सच में मैं उस वक्त आंटी को लेकर ऐसा कुछ नहीं सोच रहा था।

तभी मेरे टेबल पर बैठा हुआ वो मद्रासी अन्ना उठ खड़ा हुआ और लड़खड़ाते हुए काउंटर की तरफ चला गया। आंटी जी ने एक पल भी व्यर्थ नहीं किया और उसने अपने भारी मटके जैसे नितंबों को टेबल के साथ वाली कुर्सी पर धर दिया। मैं अभी भी व्हिस्की की कड़वाहट को गले में भर रहा था। सिंग के दाने को उठाकर जबान पर रखा ही था कि आंटी जी धीरे स्वर में बोली, “चलोगे?”

मैंने इधर-उधर देखा कि साला आंटी ही बोली या कोई और। फिर वही आवाज आंटी जी की ओर से आई, “चलोगे या नहीं?”

मैंने खात्री कर ली थी कि आंटी ही बुला रही थी मुझे। मैंने उसकी ओर देखा और वो बियर की चुस्की अपने गले में भर रही थी। मैंने धीरे से कहा, “जगह है, और मैं एक फूटी कौड़ी भी नहीं दूंगा तुम्हें।”

आंटी जी ने मुंह बनाया और बोली, “तेरी शक्ल देखकर ही लगता है कि तू छोटी बात करेगा। तू मुझसे ले लेना पैसे जितने चाहिए। जगह इतनी बड़ी नहीं है लेकिन दो लोगों के लिए ठीक है।”

वैसे मुझे भी पता है कि ऐसे समय पैसे की बात नहीं करते हैं लेकिन दोस्तों यह मुंबई है। यहाँ के लोग इतने चालाक होते हैं कि हगते हुए इंसान को भी गांड की हिफाजत करनी पड़ती है। मैं नहीं चाहता था कि वो एक रंडी हो जो मार्केटिंग का नया स्टाइल लेकर बार में आई हो। आंटी जी ने मुझे धीरे से कहा कि पहले वो जाएंगी और फिर मैं बिल देकर उसके पीछे निकलूं। साथ में निकलने से किसी को शक हो सकता था। इतना कहकर आंटी जी उठी और आधा बियर उसने टेबल पर ही छोड़ दिया। वो काउंटर पर गई और मैंने पानी के बचाव के लिए वो आधा बियर एक ही घूंट में पी लिया।

आंटी जी ने पैसे चुकाए और वो बाहर निकली। मैंने व्हिस्की की बोतल की दो आखिरी बूंदें भी पेग में निकालीं और पेग को मुंह से लगाकर सारे पैसे वसूल कर लिए। अभी तक मुझे नहीं पता था कि यह आंटी कौन है और वो मुझे क्यों बुला रही है। लेकिन उसके चाल-चलन से लग रहा था कि वो एक प्यासी आंटी है जो अपनी चूत मरवाने के लिए ही किसी को ढूंढ रही है। ऐसी आंटी जी के एक-दो अनुभव मेरे मुंबई के ही एक-दो दोस्तों को हुए थे जब कोई भाभी और आंटी ने उन्हें घर ले जाकर चुदवाया था। अजीब है लेकिन चूत और पेट सब कुछ करवाता है भाई।

मैंने बाहर आकर देखा कि आंटी जी एक गाड़ी के पास खड़ी थी। गाड़ी की आगे की सीट पर एक ड्राइवर सफेद यूनिफॉर्म में था और आंटी ने अपनी गांड को गाड़ी के दरवाजे के सहारे टिकाया हुआ था। मेरे आते ही आंटी ने पीछे का दरवाजा खोला और वो खुद अंदर जा बैठी। उसने अंदर से मुझे इशारा किया कि मैं भी अंदर आऊं। मैंने हिम्मत की और अंदर घुसा। मेरे अंदर आते ही दरवाजा फट से बंद हुआ और आंटी ने ड्राइवर से कहा, “बहादुर गाड़ी को घर की ओर ले लो। रास्ते में मेडिकल से सामान भी ले आना।”

बहादुर ने गाडी को दे मारा और रस्ते में मेडिकल से उसने कुछ पैकेट लिए और वो पीछे आंटी को दिए।

गाड़ी तेज गति से दौड़ रही थी। इंजन की गुनगुनाहट और बाहर की सड़क की आवाजें अंदर तक आ रही थीं। बहादुर ने रास्ते में एक मेडिकल स्टोर के बाहर गाड़ी रोकी और कुछ ही मिनटों में वापस लौट आया। उसने पीछे की सीट पर आंटी की ओर कुछ पैकेट बढ़ा दिए। मैंने झुककर देखा तो उसमें एक छोटा दवाई का बॉक्स था और साथ में कई कंडोम के पैकेट थे। चमकदार फॉइल पैकेट बार की रोशनी में चमक रहे थे। आंटी जी के इरादे मुझे उतने अच्छे नहीं लग रहे थे। मेरे मन में थोड़ी सी सतर्कता और उत्तेजना दोनों एक साथ उभर आए।

बहादुर ने गाड़ी को महज पांच मिनट में एक बड़े से घर के बाहर लगा दिया। मैंने अंदाजा लगाया कि वो चर्चगेट का एरिया था। आसपास ऊंची-ऊंची इमारतें और शांत रात का माहौल था। आंटी गाड़ी के नीचे उतरी और चलने लगी। उसकी साड़ी की सिलवटें हर कदम के साथ हिल रही थीं और उसकी भारी गांड थोड़ा-थोड़ा हिल रही थी। जब मैं नीचे नहीं उतरा तो उसने मुड़कर मुझे पीछे आने का इशारा किया। मैं समझ गया कि यह आंटी जी आज मेरे वीर्य को अपनी चूत में लेकर ही मानेंगी……!

आंटी की चूत लेने की लालसा में कहीं गांड में डंडा ना पेल दिया जाए, यह डर मुझे था और मुझे यह कहने में जरा भी घमंड नहीं है। लेकिन यह आंटी जी ने वापस आकर जब मेरा हाथ पकड़कर कहा कि घर में मेरी नौ साल की बेटी के अलावा कोई नहीं है तब मेरी जान में जान आई। मैं आंटी के साथ ही घर में घुसा। अंदर घुसते ही एक बड़ा हॉल था जिसमें महंगे पेंटिंग्स और कुछ एंटिक बर्तन शो-केस के अंदर रखे दिखे। हॉल में हल्की महक वाली अगरबत्ती या महंगे परफ्यूम की खुशबू फैली हुई थी।

बहादुर घर के अंदर नहीं आया और जब उसने कार मोड़ी तो टायर की चूऊऊऊ वाली आवाज घर के अंदर आई। आंटी मुझे लेकर एक बेडरूम में गई। बेडरूम काफी बड़ा था जिसमें एक महाराजा बेड था जिसमें मलमली चद्दर और मस्त तकिए सजे हुए थे। कमरे की रोशनी मद्धिम थी जो सब कुछ और भी आकर्षक बना रही थी। आंटी मेरे पास आई और उसने मेरी छाती के ऊपर हाथ फेरा।

आंटी बोली, “मेरा नाम नीता है और मैं एक ब्यूटीशियन हूँ। मुलुंड में मेरा पार्लर है। मेरे पति को गुजरे हुए अब दो साल हो गए हैं और बदन की प्यास की वजह से मैं बार और क्लब से लड़कों को लेकर घर आती हूँ। मैं भी जानती हूँ कि यह गलत है। मैं भी चाहती हूँ कि मैं एक स्टेबल रिलेशन रखूं लेकिन लड़के किसी ना किसी बहाने से पैसे की या ब्लैकमेल वाली बात कर देते हैं और मुझे मजबूरन उन्हें छोड़ना पड़ता है। देखो मैं तुम्हें एक नाइट के दो हजार रुपये दे सकती हूँ लेकिन पूरी रात मैं जैसे कहूँ वैसे करना है और मुझे लालची लोग पसंद नहीं हैं।”

आंटी की चूत लेने को मिल जाए बहुत था। पैसे तो मैं कमा ही लेता था। रंडी की चूत लेकर पैसे देने पड़ते हैं जबकि यह आंटी की चूत तो ऊपर से पैसे देने वाली थी।

मैंने कहा, “आंटी मुझे कुछ लालच नहीं है, आप मुझे प्यार दो और मैं आपको दुगुना प्यार दूंगा।”

आंटी ने मेरी शर्ट के बटन खोले और अपना हाथ मेरी खुली छाती पर फेरा। उसकी नरम, गर्म उंगलियाँ मेरे सीने पर घूम रही थीं। उसकी उंगलियाँ मेरे बालों को छू रही थीं जिससे मेरी उत्तेजना और भी बढ़ रही थी। मेरी सांसें तेज हो चुकी थीं। आंटी ने फिर दूसरा हाथ मेरी पैंट के ऊपर रखा और उसे लंड की ओर ले गई। उसने जैसे ही मेरे लंड को दबाया मेरे मुंह से आह निकल पड़ी। उसने जो सेक्सी अंदाज से लंड को दबाया था कि बस मन किया कि वो ऐसे हाथ से ही मुझे पकड़े रहे।

आंटी थोड़ा आगे बढ़ी और उसने पैंट की जिप खोली। उसकी उंगलियाँ अब अंदर घुसीं और लंड को वो चड्डी के ऊपर से ही दबाने लगी। वाह क्या मजा आ रहा था। साली व्हिस्की तो कब से हवा बनकर उड़ चुकी थी। व्हिस्की का नशा आंटी की चूत के नशे के सामने फीका पड़ गया था। आंटी ने अब पैंट के बटन को खोला और पैंट को नीचे कर दी। उसने मेरी चड्डी को भी हटा दिया। मेरा लंड खड़ा फनफना रहा था जिसे आंटी की चूत और गांड का मजा लेना था। आंटी ने मेरे लंड के सुपाड़े को अपने हाथ में लिया और जैसे लंड को नापतोल करने लगी।

आंटी: काफी मजबूत हैं हथियार तो तुम्हारा।

मैं: बस आंटी आप एक बार लेके देखो, आप सब भूल जाएंगी। मेरी बीवी को साल में एक बार चोदता हूँ लेकिन उसे चलने के काबिल नहीं रखता हूँ।

आंटी हंस पड़ी और उसने अपने पर्स से कंडोम निकाला। मैं चौंक गया। यह क्या साला कोई फोरप्ले नहीं और सीधा लंड और चूत का खेल। आंटी ने कंडोम को मेरे लौड़े पर रोल किया और लंड के ऊपर यह सुरक्षा छतरी पहना दी। उसकी ठंडी उंगलियाँ मेरे गर्म और तना हुए लंड पर फिसल रही थीं। मैं अभी भी हैरत में था और मैंने उसे पूछ ही लिया।

मैं: सीधा सेक्स ही करेंगे क्या आंटी जी। और कुछ नहीं करना है?

आंटी हंस पड़ी और बोली, “आज जो भी करेंगे कंडोम लगा के ही करेंगे। कल तुम्हारा और मेरा मेडिकल चेकअप करवा लेंगे और फिर कंडोम के बिना भी करेंगे। मैं नहीं चाहती कि तुम्हें या मुझे कोई बीमारी लगे। मैं लंड चूसूंगी लेकिन इस कंडोम के साथ ही।”

मैं मनोमन कहा चलो कोई नहीं आंटी की चूत मिलेंगी ना कंडोम के साथ ही सही। आंटी ने अपना पल्लू हटाया और उसके भारी क्लेवेज को देखकर मैं भी उत्तेजित हो उठा। उसके गहरे नाभि तक का उभरा हुआ सीना बार की रोशनी में चमक रहा था। आंटी ने साड़ी को खोला और अब वो केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी। वो मेरे सामने बैठ गई और उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़कर हिलाना शुरू किया।

कंडोम की चिकनाहट की वजह से लंड को बहुत ही मजा आ रहा था। उसकी नरम हथेली ऊपर-नीचे सरक रही थी और हर हिलने पर कंडोम के अंदर मेरा लंड और सख्त होता जा रहा था। लौड़ा ऐसे एक मिनट तक हिलाने के बाद आंटी ने अपना मुंह खोला और लपक से लंड को अपने मुंह में भर लिया। वाह… आंटी ने क्या चूसा लगाया था कंडोम पहने हुए मेरे लौड़े को। उसकी गर्म, नम जुबान कंडोम के ऊपर से भी साफ महसूस हो रही थी। आंटी ने लंड को नीचे के हिस्से से पकड़कर ऊपर किया और वो उसे फिर से हिलाने लगी। और फिर वापस उसने मुंह खोलकर लंड को लपक लिया।

आंटी जब-जब ऐसा करती थी मेरा लंड और भी टाइट होता था और मैं आंटी की चूत लेने के लिए बेताब हो उठता था। उसके होंठ कंडोम के चारों ओर सिकुड़ रहे थे और हर चूसने के साथ हल्की-हल्की चू-चू की आवाज निकल रही थी।

आंटी ने करीब पांच मिनट तक मेरा लंड चूसा और उसे एकदम लाल-लाल कर डाला। अब मैंने आंटी के ब्लाउज के बटन को धीरे से खोल दिए। आंटी ने अंदर लाल रंग की ब्रा पहनी थी जिसे उसने खुद ही पीछे हाथ करके खोल दिया। आंटी के भारी बूब्स हवा में उछल पड़े और मैं उन्हें हैरत भरी नजरों से देखने लगा। ब्रा के अंदर बूब्स की साइज आधी हो गई थी। लेकिन जैसे ही उन्हें बाहर निकाला गया वो किसी छोटे फुटबाल से कम नहीं लग रहे थे। उनके गुलाबी-गुलाबी चुचुक सख्त होकर खड़े थे।

अब मैं आंटी की चूत को भी देखना चाहता था। आंटी उठ खड़ी हुई और मैंने उसके पेटीकोट के नाड़े को पकड़कर खींचा। आंटी का पेटीकोट जमीन पर गिर गया। अंदर पहनी हुई सफेद पैंटी की पट्टी के ऊपर आंटी की दो-तीन झांटें भी दिख रही थीं। मैंने धीरे से पैंटी को खींचा और मेरे सामने थी आंटी की चूत।

आंटी का चूत देखकर मैं जैसे भौचक्का सा गया। आंटी का चूत किसी जवान लड़की की माफिक था। चिकना और साफ चूत देखकर मैं झांटों के बारे में सोचने लगा। अगर आंटी ने चूत को साफ रखा था तो फिर सारे बाल आए कहां से। तभी मेरी नजर आंटी के चूत की साइड में पड़ी। आंटी ने गोरी लड़कियों की तरह वहां बाल का स्टाइल बनाया था। मतलब कि उतने हिस्से के बाल उसने साफ नहीं किए थे और इसमें तो आंटी और भी उत्तेजित लग रही थी। आंटी ने घुटने को मोड़कर पेटीकोट को उतार फेंका।

मेरा हाथ अपने आप ही उसकी चूत के ऊपर खिंच चला गया। मैंने धीरे से आंटी का चूत सहलाया और नीता आंटी की आँखें बंद हुईं और उसके मुंह से सिसकी निकल पड़ी।

आंटी: आह बड़ा मजा आ रहा है जब तुम अपने हाथ को मेरी प्यासी चूत के ऊपर फेर रहे हो। मेरी चूत के अंदर उंगली करके एक बार इसका सारा पानी निकाल डालो।

मुझे तो बस हुक्म सुनने की देरी थी। मैंने उंगली को आंटी की चूत के अंदर डालना शुरू किया और उंगली किसी भी रोकटोक के बिना चूत के अंदर घुस जा रही थी। आंटी का चूत मस्त ढीला था और उसमें कोई घर्षण नहीं था। उसकी गर्म, चिपचिपी दीवारें मेरी उंगली को चारों ओर से दबा रही थीं। मैंने पहले अपनी बड़ी उंगली को चूत के अंदर घुसाया और फिर थोड़ी देर के बाद अपनी दूसरी उंगली को भी काम में ले लिया। मैं अब दो उंगलियों को एक साथ आंटी की चूत में डालकर हिला रहा था।

आंटी भी मोन कर के मुझे और भी जोर-जोर से अपनी चूत में उंगली डालने को कह रही थी।

आंटी: आह बड़ा मजा आ रहा हैं. मेरे चूत के दाने को अपनी ऊँगली के बिच में मसल दो. और मेरी चूत की खाई में अपनी ऊँगली से खलबली कर डालो. आज मैं तुम्हें बेहोश कर के चोदूंगी.

ऊँगली मात्र से ही आंटी सातवें आसमान पे पहुँच गई थी और फिर वो हिल-हिल के अपनी गांड को आगे-पीछे करने लगी। उसकी गर्म, चिपचिपी चूत मेरी उंगलियों को जोर से पकड़ रही थी। मैं समझ गया कि उसका वक्त आ चुका है और वो अब किसी भी वक्त झड़ सकती है। मैंने ऊँगली को और भी जोर से चूत के अंदर हिलाना शुरू कर दिया। मेरी दो उंगलियाँ तेजी से अंदर-बाहर हो रही थीं।

मैंने उसके चूत के दाने को अपनी दो उंगलियों के बीच में दबाने लगा और हल्का-हल्का मसलने लगा। आंटी की आह आह ओह ओह की आवाजें लगातार निकल रही थीं। उसके मुंह से गहरी, भारी सिसकियां छूट रही थीं। दूसरे ही मिनट उसके बदन में एक भारी कंपन आया। उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़कर चूत के अंदर और गहराई तक दबाया। आंटी का चूत अपना रस छोड़ने लगा।

आंटी का गर्म, पारदर्शी पानी मेरी उंगलियों पर बहने लगा। उसकी चूत की दीवारें बार-बार सिकुड़ रही थीं और हर सिकुड़न के साथ ज्यादा रस निकल रहा था। उसके बदन में वो कंपन करीब आधी मिनट तक चलता रहा। फिर आंटी शांत हो गई। उसका चूतड़ और चूत भी कब से हिलना बंद हो गया था। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं और चेहरा संतुष्टि से लाल हो रहा था।

मैंने अपने हाथ से उसके बूब्स दबाएँ और फिर उंगलियों को साफ करने के लिए उन्हें कमीज़ से पोंछने ही वाला था। लेकिन मेरे पोंछने से पहले ही आंटी ने मेरी उंगलियाँ अपने मुंह में ले लीं और उसके ऊपर की सभी नमकीन परत वो चाट गई। शायद वो अपनी चूत का पानी व्यर्थ नहीं करना चाहती थी। उसकी गर्म जुबान मेरी उंगलियों को चाट रही थी, हर बूंद को चूस रही थी। मेरी उंगलियों को पूरी तरह चाटने के बाद आंटी ने मुझे हाथ पकड़कर बेड पर खींच लिया।

अब हम दोनों नंगे बेड पर सोए हुए थे। मेरा लंड कब से कंडोम पहने खड़ा था युद्ध करने के लिए। आंटी ने अपना हाथ लंड पर रखा और वो उसे सहलाने लगी। वो बड़े ही प्यार से जैसे लंड को पुचकार रही थी। उसकी उंगलियाँ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे सरक रही थीं। एक मिनट में ही वो चुदने के मूड में आ चुकी थी। उसने अपनी टांगें फैला दीं और मुझे टांगों के बीच में आने को कहा।

टांगों के बीच में बैठकर मैं आंटी का चूत देख रहा था। आंटी ने मेरे लौड़े को हाथ से पकड़कर अपनी चूत की ओर खींचा और उसे चूत के होंठों के ऊपर मसलने लगी। चूत की चिकनाहट ऊपर से और कंडोम की चिकनाहट अंदर से मेरे लौड़े को अति-उत्तेजित कर रही थी। आंटी ने अब धीरे से लंड को चूत के छेद के ऊपर सेट किया और मुझे आँख मार दी। मैं समझ गया कि चूत प्रवेश का मुहूर्त हो गया है।

एक ही झटके में मैंने जैसे ही अपना लंड आंटी की चूत के अंदर दे मारा उसके मुंह से फिर से आः ओह ओह निकल पड़ा। मेरा आधे से भी ज्यादा लौड़ा मैंने एक ही झटके में पेल दिया था आंटी की चूत के अंदर इसलिए दर्द तो होना ही था। आंटी को स्वस्थ होने में एक मिनट लगा और तब मैंने एक और झटका मारकर लंड को पूरा चूत के अंदर पेल दिया। आंटी के चूत के बाल वाले हिस्से से मेरी अंदर की जांघें रगड़ रही थीं और वो घर्षण बड़ा ही सेक्सी लग रहा था।

आंटी का चूत मेरे लंड को खा गया था जैसे। मैंने अब धीरे-धीरे से अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया और मेरा लंड और आंटी की चूत एक ही ताल में जैसे नाच रहे थे। अपनी उह आह ओह ओह बंद करके आंटी भी अब मुझे पूरा सपोर्ट दे रही थी उसकी चूत की चुदाई के लिए। मैं अपना लंड उसके भोसड़े के ऊपर जोर-जोर से मारकर उसकी चुदाई का रस निकाल रहा था। जी हाँ आंटी का चूत गीला होकर मेरे लंड के ऊपर अपना पानी छोड़ रहा था।

लेकिन ये वो पानी नहीं था जो उत्तेजना के खत्म होने के बाद निकलता है। बल्कि यह वो पानी था जो चुदाई के समय चूत को चिकनी करने के लिए कुदरती तरीके से निकलता है। आंटी का चूत मस्त चिकना हो रहा था और मेरा लंड और भी आसानी से उसकी चूत के अंदर-बाहर हो रहा था। मैं अपनी गांड को जोर-जोर से हिलाकर आंटी की चूत को पेल रहा था और आंटी भी अब अपनी गांड को उठाकर मुझे पूरे मजे दे रही थी। आंटी की चूत से जब लंड निकलकर घुसता था तो मस्त पच-पच की आवाज आ रही थी।

मैं अपना लंड पूरा उसकी चूत की गुफा में डाल के निकाल रहा था।

पसीना हम दोनों को भी होना शुरू हो गया था। कमरे में हमारी सांसों की तेज आवाज और शरीरों की टकराहट की धीमी ध्वनि गूंज रही थी। आंटी अपने कूल्हों का सही उपयोग करके मुझे जोर-जोर से धक्के मार रही थी। उसके ऐसा करने से मेरा लंड उसकी चूत में जोर-जोर से अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर उसके भारी बूब्स ऊपर-नीचे उछल रहे थे। आंटी का सेक्स अनुभव मेरे सही काम लग रहा था।

मैं भी आंटी की बाहों में बाहें डालकर उसे जोर-जोर से ठोकने लगा। मेरी कमर तेज गति से हिल रही थी। आंटी के मुंह से आह आह की आवाजें अभी भी निरंतर आ रही थीं। उसकी आँखें आधी बंद थीं और चेहरा उत्तेजना से लाल हो रहा था। और तभी मेरे लंड ने एक पिचकारी मारी। मेरा वीर्य निकलकर आंटी की चूत के अंदर ही बह गया।

आंटी ने अपनी चूत की ग्रिप मेरे लंड के ऊपर टाइट की और उसने वर्चुअली चूत में वीर्य के झड़ने का मजा लिया। वर्चुअली इसलिए कि लंड का पानी कंडोम की वजह से कभी भी उसकी चूत में आना ही नहीं था। फिर भी वो कंडोम के अंदर मेरे लंड के फड़कने और गरम वीर्य भरने की महसूस कर रही थी। मैंने अपना लंड अब उसकी चूत से निकाला और मैं वहीं बैठ गया। यह सेक्स सेशन छोटा लेकिन थकाने वाला था।

मैं वहीं बैठकर आंटी को देख रहा था। उसके मुंह पर संतृप्ति के भाव थे इस छोटे से सेक्स सेशन के बाद। वो नंगी ही उठ खड़ी हुई और जाकर फ्रिज से कोका कोला के दो टीन ले आई। हमने नंगे ही ड्रिंक ली और ठंडी कोला की मीठी चुस्की ली। फिर आंटी ने मुझे कहा।

आंटी: मैं आज तुमसे अच्छी तरह से चुदना चाहती हूँ। बहादुर मेडिकल से 303 की कैप्सूल लेकर आया है। तुम उसे खा लो और घोड़े की तरह मेरे ऊपर चढ़ जाओ।

मैं हैरत से इस सेक्स की प्यासी आंटी को ही देख रहा था। वो खुद चाहती थी कि उसके जोर-जोर से चुदाई हो फिर मुझे क्या ऐतराज हो सकता था। वैसे मैंने इससे पहले कभी सेक्सवर्धक दवाई नहीं ली थी। आंटी ने मुझे कैप्सूल और पानी दिया। मैं एक ही घूंट में दवाई पी गया। फिर मैं वहीं पर लेट गया।

आंटी अपने हाथ से मेरी जांघें सहला रही थी और फिर उसके हाथ मेरे लंड पर आ गए। कंडोम तो निकाल फेंका था लेकिन फिर भी वीर्य की चिकनाहट से लंड चिकना ही रह गया था। आंटी ने अपने साड़ी के पल्लू से अब मेरे लंड को साफ किया और एक और कंडोम निकालकर फिर से लंड को कैद कर दिया।

कैप्सूल अब अपना काम दिखा रही थी क्योंकि मुझे फिर से उत्तेजना होने लगी थी। और अब की बार तो मेरा लंड जैसे लोहे की माफिक टाइट हुआ था। लंड में ऐसी ताकत इस से पहले कभी भी नहीं आई थी। आंटी ने मेरे सुपाड़े को चूमा और बोली, “क्या तुम तैयार हो सेक्स का और एक अध्याय करने के लिए?”

मैं कुछ नहीं बोला और आंटी के मुंह को लंड के ऊपर दबा दिया। ऐसा करने से मेरा लंड उसके मुंह में ही चला गया। आंटी ने दो चूस्से लगाए और वो उठ खड़ी हुई। आंटी ने उंगली में थोड़ा थूक लिया और उसे अपनी चूत के ऊपर मल दिया। अब वो अपनी चिकनी चूत को मेरे लंड के ऊपर सेट करने लगी। सेक्स का नशा चूत की चिकनाहट में साफ झलक रहा था।

आंटी जैसे ही नीचे बैठी मेरा लंड गच से उसकी चूत में घुस गया और आंटी ने आह निकाल ली।

आंटी: चोदो मुझे जोर-जोर से, इस सेक्स की कीड़े की हवा निकाल डालो। मैं सेक्स की भूखी हूँ मुझे चोद दो आज अपने लौड़े से।

आंटी के ऐसा कहते ही मैं भी ताव में आ गया। मैं नीचे से आंटी की चूत में धक्के देने लगा और मेरे हाथ में उसके बूब्स थे। आंटी जोर-जोर से उछल रही थी और मैं नीचे से उसकी चूत को ठोक रहा था। आंटी के ऊपर चुदाई का नशा ऐसा चढ़ा था कि वो जोर-जोर से उछलकर लंड को तोड़-मरोड़ देने की चेष्टा में लग रही थी। आंटी के ऐसे उछलने से मुझे भी अनहद आनंद आ रहा था।

मैं आंटी के चुंचे दबा रहा था और आंटी अपनी गांड को मेरे लंड पर जोर-जोर से मार रही थी।

आंटी: मार अंदर तक अपने लंड को, आज तेरा लंड मुझे क्या मजा दे रहा है कैसे बताऊँ। फाड़ डाल मेरी चूत को।

अब मैं अपना पोज बदलना चाहता था। मैंने आंटी की चूत से अपना लंड बाहर निकाला। आंटी भी शायद मेरी हरकत को समझ गई। वो अब मेरे सामने उल्टी लेट गई। मैंने आंटी को कुतिया स्टाइल में चोदना शुरू कर दिया। और पीछे से तो उसकी चूत की गहराई तक लंड घुस रहा था। आंटी अपनी गांड को जोर-जोर से हिला रही थी और कुत्ता सेक्स का मजा ले रही थी। मेरे हाथ में आंटी के गोल कुल्हे थे जिसे पकड़कर मैं आंटी की चूत को पेल रहा था।

वातावरण बेहद उत्तेजक था और मेरा स्खलन तो होने से रहा। आंटी की सिसकियाँ अब और भी मादक हो गई थीं। वो मुझे और भी जोर-जोर से चोदने के लिए आह्वान कर रही थी। मैं भी बदन की सारी शक्ति लगाकर आंटी को शयनसुख दे रहा था।

तभी मुझे लगा की शायद आंटी के पीछे देने से और भी मजा आयेंगा।

और यह सोचकर मैंने अपने हाथ पर थोड़ा थूक लिया और आंटी की गांड में लगा दिया। मेरी उंगलियाँ उसके गर्म, सिकुड़े हुए गांड के छेद पर घूम रही थीं। आंटी ने पीछे देखा और हंस पड़ी। उसकी आँखों में शरारत और भूख दोनों झलक रहे थे। मैं समझ गया कि पीछे लेने में इस रंडी आंटी को कोई भी ऐतराज नहीं है। मैंने कंडोम से चिकने हुए अपने लंड को निकाला और आंटी के पीछे के छेद पर उसे सेट कर दिया।

आंटी ने एक हाथ से बेड पर बैलेंस किया और दूसरे हाथ से उसने लंड को सेट किया। फिर उसने हुंकार किया और मैंने एक झटका दिया। एक जोर की आह निकली और मेरा लंड आधे से ज्यादा गांड में घुस गया। गांड सेक्स का यह अनुभव बेहद मजेदार था क्योंकि आंटी की गांड चूत से बहुत टाइट थी। उसके टाइट छेद ने मेरे लंड को जोर से दबाया हुआ था, जैसे हर इंच पर विरोध कर रहा हो लेकिन अंदर खींच भी रहा हो।

मैं अब आंटी की गांड के अंदर धीरे-धीरे से झटके मारने लगा और आंटी जोर-जोर से कूल्हों को हिलाने लगी। मेरा लौड़ा गांड में पूरा घुसकर बाहर आ रहा था। हर बार अंदर घुसते समय आंटी की गांड की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबाती थीं। आंटी का अनुभव सही लग रहा था सेक्स के मामले में क्योंकि वो लंड को बाहर नहीं आने दे रही थी और उसके झटके मुझे बहुत मजे दे रहे थे।

मैंने अब अपने हाथ आगे किए और आंटी के बूब्स को हाथ में ले लिए। मैं बूब्स को जोर-जोर से मसलते हुए आंटी की गांड मारने लगा। आंटी भी उह आह ओह ओह जोर से करो, और जोर से अह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह ऐसा बोल-बोलकर मेरे लंड को लेती रही। उसकी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

303 का नशा काफी देर तक रहा। मैंने आंटी की गांड कम से कम 15 मिनट तक मारी और लंड ने थकने का नाम ही नहीं लिया। रिकॉर्ड की खातिर जान ले कि यह मेरा सबसे लंबा सेक्स था। हर झटके पर आंटी की टाइट गांड मेरे लंड को अलग तरह का सुख दे रही थी। 15 मिनट के बाद जब मैं थककर चूर हो गया तब मेरे लंड से फाइनली पानी निकलकर आंटी की गांड को भरने लगा।

आंटी ने गांड को कसकर उसका पूरा मजा लिया। उसकी गांड की मांसपेशियां बार-बार सिकुड़ रही थीं और मेरे लंड के हर फड़कने को महसूस कर रही थीं। फिर मैंने कंडोम को निकालकर उसे बिन में फेंक दिया। आंटी तृप्त हो गई थी मुझे ऐसा लगा। और मैं इतना थक गया था कि वहीं आँखें बंद करके लेट गया।

लेकिन मुझे पता नहीं था कि यह आंटी तो सेक्स की बड़ी ही भूखी है। उसने आधी घंटे के बाद मुझे फिर से उठाया और चोदने के लिए कहा। पूरी रात वो मुझे एक के बाद एक सेक्स राउंड करने के लिए कहती रही। सुबह हालत यह थी कि मुझसे चला भी नहीं जा रहा था….!

0
0 लोगों को पसंद आया • 0%

Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए