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माँ बेटियों के साथ सामूहिक चुदाई (Long Sex Story)

Gaon ki ladkiyan chudai sex story: मेरा नाम गबरू है. मेरी उम्र लगभग 45 वर्ष की है. यूँ तो मैं एक टैक्सी ड्राइवर हूँ लेकिन मैं रंडियों का दलाल भी हूँ. मैंने अपने संपर्क से कई बेरोजगार लड़कियों को जिस्म फरोशी के धंधे में उतारा. मैंने कभी भी किसी लड़की को जबरदस्ती इस धंधे में आने को मजबूर नहीं किया. मैंने सिर्फ उन लड़कियों को कमाने का एक जरिया दिखाया और सुविधाएं दिलवाईं जिनके पास खाने के भी लाले थे. मैं भी उन लड़कियों को बारी बारी से चोदता हूँ. मेरे लिए मेरी सभी लड़कियों का जिस्म फ्री में उपलब्ध रहता है. क्योंकि मैं ही उन्हें नए नए क्लाइंट खोज कर ला कर देता हूँ. टैक्सी की ड्राइवरी से मुझे नए ग्राहक खोजने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है.

रागिनी इन्हीं मजबूर लड़कियों में एक थी. जिसकी उम्र सिर्फ 19 साल की है जो अब पेशेवर रंडी बन चुकी थी. वो तीन साल पहले इस धंधे में मेरे द्वारा ही लायी गयी थी. हालांकि वो मुझे अंकल कहती है लेकिन मैं भी उसके जिस्म का भोग उठाता हूँ. मुझे उसे चोदने में काफी आनंद आता था. अचानक एक दिन उसके गाँव से उसकी मौसी का फोन आया कि उसके पति यानि रागिनी के मौसा का देहांत हो गया है. और वो लोग काफी मुश्किल में हैं. वो भी अपनी बेटी को रागिनी के साथ उसके धंधे में देना चाहती है ताकि घर का खर्च चल सके. रागिनी ने मुझे सारी बातें बतायी. रागिनी ने अपने धंधे के बारे में अपने मौसी को काफी पहले ही बता दिया था जब दो साल पहले उसकी मौसी अपने पति का इलाज करवाने रागिनी के यहाँ आयी थी.

रागिनी ने अपनी मौसी की समस्या के बारे में मुझे बताया और कहा कि मौसी भी अपनी बेटी को रंडीबाजी के धंधे में उतारना चाहती है. मैं झट से उसे अपने गाँव जा कर उस लड़की को लेते आने को कहा.

रागिनी ने कहा, “गबरू अंकल, आप भी चलिए ना मेरे साथ. एकदम मस्त जगह है मेरा गाँव. पहाड़ों पर है. अगर आप मेरे साथ चलेंगे तो हम दोनों का हनीमून भी हो जाएगा.”

मैंने कहा, “हाँ क्यों नहीं.”

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और हम दोनों ने उसी शाम रागिनी के अल्मोड़ा के लिए बस पकड़ ली. अगली सुबह करीब 9 बजे हम दोनों अल्मोड़ा पहुँच गए. वहीं बस स्टॉप पर ही फ्रेश हो कर हम दोनों ने वहीं नाश्ता किया और फिर करीब दो घंटे हमारे पास थे, क्योंकि उसकी गाँव जाने वाली बस करीब 1 बजे खुलती थी. हम दोनों पास के एक पार्क में चले गए. रागिनी ने अपनी सब आपबीती बताई. उसकी मौसी बहुत गरीब हैं, और मौसा मजदूरी करते थे. उनकी मौत के बाद परिवार दाने दाने का मोहताज है. रागिनी कभी कभार पैसा मनी ऑर्डर कर देती थी. अब मौसी ने उसको अपनी मदद और सलाह के लिए बुलाया था. मौसी की तीन बेटियाँ थीं – 13, 15 और 17 साल की. मौसी गाँव के चौधरी के घर काम करती थी तो रोटी का जुगाड़ हो जाता था. चौधरी उसकी मौसी को कभी कभार साथ में सुलाता भी था. उसके मौसा भी उसके खेत में ही काम करते थे. यह सब बहुत दिन से चल रहा था. मौसा के मरने के बाद चौधरी अब उसकी मौसी के घर पर भी आ कर रात गुजारने लगा था. चौधरी के अलावा उसका मुंशी भी उसकी मौसी के यहाँ रात गुजारने आ जाता था और उसकी जिस्म का मजा लेता था. अब चौधरी रागिनी की मौसी पर दबाव बना रहा था कि वो बड़ी बेटी रीना को उसके साथ सुलावे तभी वो उनको काम पर रखेगा. मौसी नहीं चाहती थी कि उनकी बेटी उसी से चुदे जो उसकी माँ भी चोदा हो, और कोई फायदा भी ना हो. सो वो रागिनी को बुलाई थी कि वो उसको साथ ले जा कर पूरी तरह से रंडी के काम पर लगा दे जिससे कमाई होने लगे.

मैं अब पहली बार रागिनी से उसके घर के बारे में पूछा तो वो बोली, “अब तो सिर्फ मौसी ही हैं. छः महीने हुए माँ कैंसर से मर गई. मेरे बाप ने मुझे और उनको पहले ही निकाल दिया था, क्योंकि माँ की बीमारी लाइलाज थी और उसमें वो पैसा नहीं खर्च करना चाहते थे. मेरे रिश्तेदारों ने हम दोनों से कोई खास संपर्क नहीं रखा, और मेरी माँ भी यहीं अल्मोड़ा में ही मरी.” आज पहली बार रागिनी के बारे में जान कर मुझे सच में दुख हुआ. मेरे चेहरे से रागिनी को भी मेरे दुख का आभास हुआ सो वो मूड बदलने के लिए बोली, “अब छोड़िए भी यह सब अंकल, और बताइए, मेरे साथ हनीमून आज कैसे मनाइएगा?”

मैंने भी अपना मूड बदला, “अब हनीमून तो मुझे एक ही तरह से मनाने आता है, लंड को बूर में पेल कर हिला हिला कर लड़की चोद दी, हो गया अपना हनीमून.”

रागिनी बोली, “अंकल, आप एक बार मेरी मौसी को चोद कर उनको कुछ पैसे दे दीजिए न. चौधरी तो फ्री में उनको चोदता रहा है.”

मैं आश्चर्य से उसको देखा, “तुम्हें पता है कि तुम क्या कह रही हो? जवान रीना को क्यों न चोदूँ जो उसकी बुढ़िया माँ को चोदूँ?”

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रागिनी हँसी, “पक्के हरामी हैं आप अंकल सच में… अरे रीना तो साथ में चल रही है. मौसी वैसी नहीं है जैसी आप सोच रहे हैं. 35 साल से भी कम उम्र होगी. 16 साल की उम्र में तो वो माँ बन गई थी. खूब छरहरे बदन की है, आपको पसंद आएगी. मैंने उनको समझा दिया है कि मैं अपने अंकल को बुला रही हूँ, अगर खूब अच्छे से उनका खातिर हुआ तो वो रीना को जल्दी नौकरी लगवा देंगे।”

मैंने भी सोचा कि क्या हर्ज है, आराम से यहाँ माँ चोद लेता हूँ, फिर लौट कर बेटी की सील तोड़ूँगा। और फिर इस माँ को चोदने का एक और फायदा था कि यहाँ एक के बाद एक करके तीन सीलबंद बूर अगर भगवान ने मदद की तो मुझे खुलने को मिल जाने वाली थी। मैंने भी सोच लिया कि इस मौसी को तो ऐसे चोदना है कि वो आज तक की सारी चुदाई भूल कर बस मेरी चुदाई ही याद रखे।

दिन में हल्का सा एक बार और नाश्ता जैसा ही खा कर हम दोनों बस में बैठ कर गाँव की तरफ चल दिए। करीब 6.30 बजे हम जब रागिनी के मौसी के घर पहुँचे तो पहाड़ों में रात उतरने लगी थी। हल्के अंधेरे और लालटेन की रोशनी में हमारा परिचय हुआ। रागिनी ने मुझे अपनी मौसी बिंदा और उनकी तीनों बेटियों रीना, रूबी और रीता से मिलाया। दो कमरे का छोटा सा घर था वो। मेरे लिए चिकेन और रोटी बना हुआ था। कुछ देर इधर-उधर की बातों के बाद हमने खाना खाया।

रागिनी ने मौसी से कहा, “आज मैं अंकल के साथ ही सो जाती हूँ, तुम लोग दूसरे कमरे में सो जाना।”

सबसे छोटी बेटी रीता ने कहा, “हम आपके पैर दबा दें अंकल?”

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मौसी बोली, “नहीं बेटी, दीदी है न… वो अंकल को आराम से सुला देगी। तुम चिंता मत करो। ले जाओ रागिनी अपने अंकल को…आराम दो उनको. थके होंगे।”

रागिनी मेरे साथ एक कमरे में चल दी। अंदर जाते ही हम दोनों नंगे हो गए। उस रात रागिनी ने मुझे कुछ करने नहीं दिया। आराम से मुझे लिटा दिया और खुद ही मेरा लंड चूसी, उसको खड़ा किया। फिर मेरे ऊपर चढ़ कर अपने चूत में मेरा लंड अपने हाथ से पकड़ कर घुसाई और फिर ऊपर से खूब हुमच हुमच कर चोदी। जल्दी ही वो भी गर्म हो गई और आह आह आह, उउह उउह उउउह करने लगी। बिना इस चिंता के कि बाहर अभी सब जगे हुए हैं और उसके मुँह से निकल रही आवाज वो सब सुन रहे होंगे, उसने मेरे लंड पर अपनी चूत को खूब नचाया, इतना कि अब तो फच फच फच…की आवाज होने लगी थी। वो हाँफ रही थी…आआह आआह आआह और मैं भी हूम्म्म हूम्म्म्म हूऊम कर रहा था। करीब 15 मिनट की हचहच फचफच के बाद मेरे भीतर का लावा छूटा…आआआअह्ह्ह और मैंने अपना पानी उसकी चूत में छोड़ दिया। रागिनी ने भी उसी समय अपना पानी छोड़ा। और फिर अपने सलवार से अपना चूत पोंछते हुए मेरे ऊपर से उतर गई। मुझे प्यास लग गयी थी. मैंने रागिनी को पानी लाने को कहा. उसने कमरे से ही अपनी मौसी को पानी के लिए आवाज लगाई. और अपने आप को एवं मुझे एक चादर से ढँक लिया. उसकी मौसी बिंदा तुरंत ही पानी ले कर आयी और नजरें झुकाए खुकाए हम दोनों की अर्द्धनंगी हालत को देखते हुए पानी का जग टेबल पर रख चली गयी. मैंने तीन गिलास पानी पीया. मैं सच में थक गया था, सो करवट बदल कर सो गया।

अगले दिन खाना खाने के बाद करीब 12 बजे रागिनी और उसकी मौसेरी बहनें मुझे आस-पास की पहाड़ी पर घुमाने ले गईं। हिमालय अपने सुन्दर लहजे में अपना सारा सौन्दर्य बिखेरे था। एकांत देख कर रागिनी ने मुझे बता दिया कि आज रात में बिंदा मेरे साथ सोएगी, मुझे उसको चोद कर सब सेट कर लेना है, वैसे वो सब पहले से सेट कर चुकी थी। करीब 5 बजे हम घर लौटे, तो उसकी मौसी बिंदा हम सब के लिए खाना बना चुकी थी। खाना-वाना खाने के बाद हम सब पास में बैठ कर इधर-उधर की गप्पें करने लगे। पहाड़ी गाँव में लोग जल्दी सो जाते थे सो करीब आठ बजे तक पूरा सन्नाटा हो गया, तो रागिनी बोली, “मौसी, अंकल थक गए होंगे सो तुम उनके पैरों में थोड़ा तेल मालिश कर देना, मैं रीना के साथ उसके बिस्तर पर सो जाऊँगी।” इशारा साफ था कि आज मुझे बिंदा को चोदना था।

बिंदा मुझे देख कर मुस्कुराई और तेल की डिब्बी ले कर मुझे कमरे में चलने का इशारा किया। पाँच चूतवालियों से घिरा मैं अपने किस्मत को सराहता हुआ बिंदा के पीछे चल दिया और फिर कमरे के किवाड़ को खुला ही रहने दिया तथा सिर्फ उसके परदे फैला दिए. उस कमरे के बरामदे पर ही चारपाई पर उसकी सभी बेटियां और रागिनी लेटी हुई थी. बिंदा तब तक अपने बदन से साड़ी उतार चुकी थी और भूरे रंग के साया और सफेद ब्लाउज में मेरा इंतजार कर रही थी। मैं उसे देख कर मुस्कुराया और अपने कपड़े खोलने लगा। वो मुझे देख रही थी और मैं अपने सब कपड़े उतार कर पूरा नंगा हो गया। मेरा लंड अभी ढीला था पर अभी भी उसका आकार करीब 6 इंच था। बिंदा की नजर मेरे लटके हुए लंड पर अटकी हुई थी।

मैंने उसके चेहरे को देखते हुए, अपने हाथ से अपना लंड हिलाते हुए जोर से कहा, “फिक्र मत करो, अभी तैयार हो जाएगा…आओ चूसो इसको।”

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मेरे हिलाने से मेरे लंड में तनाव आना शुरू हो गया था और मेरा सुपाड़ा अब अपनी झलक दिखाने लगा था। बिंदा ने आगे बढ़ कर बिना किसी हिचक या शर्मिंदगी के मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ा और सहलाई। मादा के हाथ में जादू होता है, सो मेरा लंड बिंदा के हाथ के स्पर्श से ही अपना आकार ले लिया। बिंदा ने मुझे बिस्तर पर लिटा कर लंड अपने मुँह में भर लिया।

5-8 बार अंदर-बाहर करके बिंदा बोली- आप सीधा आराम से लेटिए, मैं तेल लगा देती हूँ।

मैंने उसे बाहों में भर कर अपने ऊपर खींच लिया और बोला, “कोई परेशानी की बात नहीं है। मेरी सब थकान खत्म हो जाएगी जब तुम्हारी जैसी मस्त माल की चूत मेरे लंड की मालिश करेगी।” मुझे पता था कि हम दोनों की एक-एक आवाज खुले किवाड़ के द्वारा उन बेटियों के कान में स्पष्ट सुनाई पड़ रहे होंगे.

मैंने बिन्दा के होठों से अपने होठ सटा दिए और वो भी चुमने में मुझे सहयोग करने लगी। मैंने उसके ब्लाउज और पेटीकोट खोल दिए तो उसने खुद से अपने को उन कपड़ों से आजाद कर लिया।

मैंने बिंदा को अपने से थोड़ा अलग करते हुए कहा, “देखूँ तो कैसी दिखती है मेरी जान…”

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बिंदा मेरे इस अंदाज पर फिदा हो गई, उसके गाल लाल हो गए। बिंदा अपनी उम्र से करीब 5 साल छोटी दिख रही थी दुबली होने की वजह से। वैसे भी उसकी उम्र 35 के करीब थी। रंग साफ था, चुचियाँ थोड़ी लटकी थीं, पर साइज में छोटी होने की वजह से मस्त दिख रही थीं। सपाट पेट, गहरी नाभी और उसके नीचे काले घने झाँटों से घिरी चूत की गुलाबी फाँक। काँख में भी उसको खूब सारे बाल थे। मैंने धीरे-धीरे उसके पूरे बदन पर हाथ घुमाने शुरू किए और उसमें गर्मी आने लगी। जल्द ही उसका बदन चुदास से भर गया और तब मैंने उसकी चुचियों और चूत पर हमला बोल दिया, अपने हाथों और मुँह से। उसकी सिसकी पूरे कमरे में गूंजने लगी। करीब आधा घंटा में वो बेदम हो गई तो मैंने उसको सीधा लिटा कर उसके पैरों को फैला कर ऊपर उठा दिया और बिना कोई भूमिका बाँधे, एक ही धक्के में अपने लंड को पूरा उसकी चूत में घुसा दिया।

मुझे पता था कि मेरा लंड उसकी झाँटों को भी भीतर दबा रहा है। मैं चाहता भी यही था, सो मैंने लंड को कुछ इस तरह से आगे-पीछे करके घुसाया कि ज्यादा से ज्यादा झाँट मेरे लंड से दबे और वो झाँटों के खींचने से दर्द महसूस करे। वही हुआ भी…बिंदा तो चीख ही उठी थी, “ओह्ह्ह्ह्ह्ह मेरा बाल खींच रहा है साहब जी”।

मैंने भी कहा, “तो मैं क्या करूँ, तुम्हारा झाँट ही ऐसा शानदार है कि मत पूछो,”

वो अब अपना हाथ अपनी चुद रही चूत के आस-पास घुमा कर अपने झाँटों को मेरे लंड से थोड़ा दूर की, और फिर बोली, “हाँ अब चोदिए, खूब चोदिए मुझे…..आह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह्ह”।

मैंने अब उसकी जबरदस्त चुदाई शुरू कर दी थी। वो भी गांड़ उछाल-उछाल कर ताल मिला रही थी और मैं तो उसकी चुचियों को जोर-जोर से मसल मसल कर चुदाई किए जा रहा था। ये सोच कर कि बाहर उसकी बेटियाँ अपनी माँ की चुदाई की आवाज सुन रही हैं मेरा लंड और टनटना गया था और जोरदार धक्के लगा रहा था। वो झड़ गई थी, थोड़ा शांत हुई थी, पर मैं कहाँ रुकने वाला था। मैंने उसको पलटा और जब तक वो कुछ समझे मैंने पीछे से उसके चूत में लंड पेल दिया। वो थक कर निढाल हो गई थी तो मैं झड़ा उसकी चूत के भीतर। पर मेरा लंड कब एक बार झड़ने से शांत हुआ है जो आज होता।

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मैंने बिंदा से कहा, कि वो अब आराम से पोजीशन ले ले, मैं उसकी गांड़ मारूँगा। वो शायद थकान की वजह से ऐसा चाह नहीं रही थी, पर मैंने उसको तकिया पकड़ा दिया तो वो समझ गई मैं नहीं रुकने वाला। सो वो भी तकिये पर सिर टिका कर अपने घुटने थोड़ा फैला कर सही से बिस्तर पर पलट गई। मैं उसके पीछे थोड़ा खड़ा हो गया और फिर उसकी गांड़ पर ढेर सारा थूक लगा कर अपना लंड छेद से भिड़ा दिया। लेकिन वो जोर से कराह उठी।

बोली – आह..रुकिए साहब जी आपका लंड बहुत मोटा है. मेरी गांड़ में वेसलिन लगा दीजिये तब मेरी गांड़ मारिये.

मैंने कहा – कहाँ है वेसलिन?

उसने आलमारी में से वेसलिन निकाल मुझे दिया. मैंने ढेर सारी वेसलिन उसके गांड़ के छेद में डाली फिर अपना लंड उसके गांड़ में घुसाया. थोड़ी मेहनत करनी पड़ी, पर वो दर्द सह कर अपने गांड़ में मेरा लंड घुसवा ली। मैं भी मस्त हो कर अब उसकी गांड़ मारने लगा। शुरू में दर्द की वजह से वो कराह रही थी, पर जल्द ही उसको भी मजा मिलने लगा और फिर आह्ह्ह्ह आअह्ह आअह्ह ऊऊह्ह्ह्ह उउउम्म्म जैसे सेक्सी बोल कमरे में गूँजने लगे। इस बार थोड़ा थकान मुझे भी लगने लगा था, शायद दिन भर का घुमना अब हावी हो रहा था, सो मैं भी तेजी में धक्के पर धक्के लगाए और जल्द ही बिंदा की गांड़ अपने लंड के रस से भर दिया। वो तो कब की थक कर निढाल थी। अब हम दोनों में से कोई हिलने की हालत में नहीं था सो हम दोनों ऐसे ही नंगे सो गए। बिंदा ने तो अपने चूत और गांड़ को साफ करना भी मुनासिब नहीं समझा।

अगली सुबह मैं जरा देर से तब उठा जब बिंदा मुझे चाय देने आयी. उस समय तक मैं नंगा ही था. मैंने तौलिए को अपने कमर पर लपेटा. तब तक सब चाय पी चुके थे। मैं जब बाहर आया तो देखा कि खूब साफ़ और तेज धूप निकली हुई है। पहाड़ों में वैसे भी धूप की चमक कुछ ज्यादा होती है। रागिनी और उसकी मौसी आंगन में बैठ कर सब्जी काट रहे थे, बड़ी रीना सामने चौके में कुछ कर रही थी। रूबी नहा चुकी थी और वो धुले कपड़ों को सुखने के लिए तार पर डाल रही थी। आंगन के एक कोने में सबसे छोटी बहन रीता नहा रही थी। सब कपड़े उतार कर, बस एक जांघिया था उसके बदन पर। मुझे लग गया कि घर में कोई मर्द तो रहता नहीं था, सो इन्हें इस तरह खुली धूप में नहाने की आदत सी थी। मुश्किल यह थी कि मैं जोरों से पेशाब महसूस कर रहा था, और इसके लिए मुझे उसी तरह जाना होता जिधर रीता नहा रही थी। वो एक तरह से बाथरूम में सामने ही बैठी थी। तभी मौसी चौके की तरफ़ गई तो मैंने अपनी परेशानी रागिनी को बताई।

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उसने कहा, “तो कोई बात नहीं, आप चले जाइए बाथरूम में…”

मैं थोड़ा हिचक कर बोला, “पर रीता?”

अब वो मुस्कुराते हुए बोली, “आपको कब से लड़की से लज्ज लगने लगा” और उसने आँख मार दी।

मेरे लिए वैसे भी पेशाब को रोकना मुश्किल हो रहा था सो निकल गया। एक नजर रीता के बदन पर डाली और बाथरूम में पेशाब करने लगा। पेशाब करने के बाद मैं बाहर जहाँ रीता नहा रही थी वहाँ पहुँच गया, अपना हाथ-मुँह, चेहरा धोने। रीता भी समझ गई कि मैं हाथ-मुँह धोना चाह रहा हूँ। उसने बाल्टी-मग मेरी तरफ़ बढ़ा दिया और खुद अपने हाथों से अपना बदन रगड़ने लगी। अपना चेहरा और हाथ-मुँह धोते हुए अब मैं रीता को घूरने लगा। खूब गोरी झक्क सफ़ेद चमड़ी, हल्का उभार ले रही छाती जिसका फूला हुआ भाग मोटे तौर पर अभी भी चुचक ही था, अभी रीता की छाती को चूची बनने में समय लगना था। पतली-पतली चिकनी टाँग पर सुनहरे रोएँ। मेरी नजर बरबस ही उसके टाँगों के बीच चली गई, पर वहाँ तो एक बैंगनी रंग का जांघिया था, ब्लूमर की तरह का जो असल चीज के साथ-साथ कुछ ज्यादा क्षेत्र को ढँके हुए था। मेरे दिमाग में आया, “काश इस लड़की ने अभी जी-स्ट्रींग पहनी होती…” और तभी रीता अपने दोनों बाहों को ऊपर करके अपने गले के पीछे के हिस्से को रगड़ने लगी। इस तरह से उसकी छाती थोड़ी ऊपर खींच गई और तब मुझे लगा कि हाँ यह भी एक लड़की है, बच्ची नहीं रही अब। इस तरह से हाथ ऊपर करने के बाद उसकी छाती थोड़ा फूली और अपने आकार से बताने लगी कि अब वो चूची बनने लगी है। मेरी नजर उसकी काँख पर गड़ गई। वहाँ के रोएँ अब बाल बनने लगे थे। बाएँ काँख में तो फिर भी कुछ रोआँ ही था, बस चार-पाँच ही अभी काले बाल बने थे, पर दाहिने काँख में लगभग सब रोआँ काला बाल बन चुका था। अब वहाँ काले बालों का एक गुच्छा बन गया था, पर अभी उसको ठीक से उनको मुरना और हल्का घुंघराला होना बाकी था, जैसा कि आम तौर पर जवान लड़कियों में होता है। रीता के काँख में निकले ऐसे बालों को देख कर मैं कल्पना करने लगा कि उसकी बूर पर किस तरह का और कैसा बाल होगा। अब तक वो भी अपना बदन रगड़ चुकी थी सो उसको बाल्टी की जरूरत थी, और मेरे लिए भी अब वहाँ रुकने का कोई बहाना नहीं था।अब तक रीना दोबारा चाय बना चुकी थी, और दुबारा से सब लोग चाय ले कर बीच आंगन में बिछे चटाइयों पर बैठ गए थे।

रागिनी ने अब पूछा, “कब तक आपको छुट्टी है?”

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मैंने पूछा, “क्यों…?”

तो वो बोली, “असल में रीना को तो हम लोगों के साथ ही चलना है तो उसको अपना सामान भी ठीक करना होगा न… दो-तीन दिन तो अभी है कि नहीं?”

मैंने कहा, “अभी तीसरा दिन है, और मैंने एक सप्ताह की छुट्टी ली हुई है, सो अभी तो समय है।”

अब बिंदा (रागिनी की मौसी) बोली, “रीना कर तो लेगी यह सब तुम्हारा वाला काम…. कहीं बेचारी को परेशानी तो न होगी?”

रागिनी ने उनको भरोसा दिलाया, “तुम फिक्र मत करो मौसी, जब पैसा जलने लगेगा तो सब करने लगेगी। मैं भी शुरू-शुरू में हिचकी थी। पहले एक-दो बार तो बहुत खराब लगा फिर अंकल से भेंट हुई और जिस प्यार और इज्जत के साथ अंकल ने मेरे साथ सेक्स किया कि फिर सारा डर चला गया और उसके बाद तो मैं इसी में रम गई। अंकल का साथ मुझे बहुत बल देता है, लगता है कि इस नए जगह में भी कोई अपना है। कल तुमने भी देखा न अंकल का सेक्स का अंदाज? कोई तकलीफ हुई क्या तुझे?”

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बिंदा ने थोड़ा मुस्कुरा कर अपना सर नीचे झुकाया और कहा, “नहीं री. तेरे अंकल तो सच में बहुत प्यार से सेक्स करते हैं।”

मुझे अपने पर रागिनी का ऐसा भरोसा जान कर अच्छा लगा और उस पर खूब सारा प्यार आया, मेरे मुँह से बरबस निकल गया, “तुम हो ही इतनी प्यारी बच्ची….” और मैंने उसका हाथ पकड़ कर चुम लिया।

रागिनी ने अब एक नई बात कह दी, “मौसी मेरे ख्याल से रीना को आज रात में अंकल के साथ सो लेने दो। अंकल इतने प्यार से इसको भी करेंगे कि उसका सारा भय निकल जाएगा।”

मुझे इस बात की उम्मीद नहीं की थी। मैं अब बिंदा के रिएक्शन के इंतजार में था। रीना पास बैठ कर सिर नीचे करके सब सुन रही थी।

बिंदा थोड़ा सोच कर बोली, “कह तो तुम ठीक रही हो बेटा, पर यहाँ घर पर… फिर रीना की छोटी बहनें भी तो हैं घर में…. इसी लिए मैं सोच रही थी कि अगर रीना तुम लोगों के साथ चली जाती और फिर उसके साथ वहीं यह सब होता तो…।”

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मुझे लगा कि ऐसा शानदार मौका हाथ से जा रहा है सो मैं अब बोला, “आप बेकार की बात सब सोच रही हो बिंदा. मेरे हिसाब से रागिनी ठीक कह रही है, अगर रीना अपने घर पर अपने लोगों के बीच रहते हुए पहली बार यहीं चुद ले तो ज्यादा अच्छा होगा। अगर उसको बुरा लगा तो यहाँ आप तो हैं जिससे वह सब साफ-साफ कह सकेगी, नहीं तो वहाँ जाने के बाद तो उसको बुरा लगे या अच्छा, उसको तो वहाँ चुदना ही पड़ेगा।”

जब मैं यह सब कह रहा था तब तक रूबी और रीता भी वहीं आ गईं और इसी लिए जान बूझ कर मैंने चुदाई शब्द का प्रयोग अपनी बात में किया था। रागिनी भी बोली, “हाँ मौसी अंकल बहुत सही बात कह रहे हैं, वहाँ जाने के बाद रीना की मर्जी तो खत्म ही हो जाएगी। वैसे भी पिछले कई दिनों में रूबी और रीता को क्या समझ में नहीं आया होगा कि चौधरी और उसका मुंशी तेरे साथ रात रात भर कमरे में रह कर क्या करता है? एक-एक आह की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है बाहर में. क्यों रूबी और रीता, क्या तुम नहीं जानती कि रात में मैं या तेरी माँ अंकल के साथ क्यों सोते हैं?”

रूबी शर्मा गई और हाँ में सर ऊपर नीचे हिलाया।

मैं बोला, “मेरे ख्याल से तो रात से बेहतर होगा कि रीना अभी ही नहाने से पहले आधा-एक घंटा मेरे साथ कमरे में चली चले, चुदाई कर के उसके बाद नहा धो ले… उसको भी अच्छा लगेगा। रात में अगर चुदेगी तो फिर सारी रात वैसे ही सोना होगा।”

बिंदा के चेहरे से लग गया कि अब वो कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है और सब कुछ रागिनी पर छोड़ दी है। बिंदा ने अपनी छोटी बेटी तो हल्के से झिड़का, “तू यहाँ बैठ कर क्या सुन रही है सब बात… जाओ जा कर सब के लिए एक बार फिर चाय बनाओ।” रीता जाना नहीं चाहती थी सो मुँह बिचकाते हुए उठ गई। मैंने उसको छेड़ दिया, “अरे थोड़े ही दिन की बात है, तुम्हारा भी समय आएगा बेबी… तब जी भर कर चुदवाना। अभी चाय बना कर लाओ।” वो अब शर्माते हुए वहाँ से खिसक ली। चलो अच्छा है दो-दो कप चाय मुझे ठीक से जगा देगा। साँड़ जब जगेगा तभी तो बछिया को गाय बनाएगा।” मेरी इस बात पर रागिनी ने व्यंग्य किया, “साँड़…..ठीक है पर बुढ्ढा साँड़” और खिलखिला कर हँस दी। मैं भी कहाँ चुकने वाला था सो बोला, “अरे तुमको क्या पता…. नया-नया जवान साँड़ सब तो बछिया की नई बूर देख कर ही टनटना जाता है और पेलने लगता है, मेरे जैसा बुढ्ढा साँड़ ही न बछिया को भी मजा देगा। बछिया की नई-नवेली चूत को सूँघेगा, चुमेगा, चुसेगा, चाटेगा, चुभलाएगा…. इतना बछिया को गरम करेगा कि चूत अपने ही पानी से गीली हो जाएगी, तब जा कर इस साँड़ का लंड टनटनाएगा….”

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अब रूबी बोल पड़ी, “छी छी, कितना गंदा बोल रहे हैं आप… अब चुप रहिए।”

मैंने उसके गाल सहला दिए और कहा, “अरे मेरी जान…. यह सब तो घर पर बीवी को भी सुनना पड़ता है और तुम्हारी दीदी को तो रंडी बनने जाना है शहर। मैंने तो कुछ भी नहीं बोला है….. वहाँ तो लोग रंडी को कैसे पेलते हैं रागिनी से पूछो।”

रागिनी भी बोली, “हाँ मौसी, अब यह सब तो सुनने की आदत डालना होगा, और साथ में बोलना भी होगा”।

रीना का गाल लाल हुआ था, बोली, “मैं यह सब नहीं बोलूँगी…।”

मैंने उसकी चुची सहला दी वहीं सब के सामने, वो चौंक गई। मैं हँसते हुए बोला, “अभी चलो न भीतर एक बार जब लंड तुम्हारी बूर को चोदना शुरू करेगा तो अपने आप सब बोलने लगोगी, ऐसा बोलोगी कि तुम्हारे इस रूबी देवी जी का गांड़ फट जाएगा सब सुन कर।”

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रीता अब चाय ले आई, तो मैंने कहा, “वैसे रूबी तुम भी चाहो तो चुदवा सकती हो… बच्ची तो अब रीता भी नहीं है। 14 साल की दो-तीन लड़की तो मैं ही चोद चुका हूँ, और वो भी करीब-करीब इतने की ही है।”

रीता सब सुन रही थी, बोली, “अभी 14 नहीं पूरा हुआ है, करीब पाँच महीना बाकी है।” मैं अब पूरी तरह रंग में था, “ओए कोई बात नहीं, एक बार जब झाँट हो गया तो फिर लड़की को चुदाने में कोई परेशानी नहीं होती। मैं तुम्हारे काँख में बाल देख चुका हूँ, सो झाँट तो पक्का निकल गया होगा अब तक तुम्हारी बूर पर…” रीता को लगा कि मैं उसकी तारीफ कर रहा हूँ सो वो भी चट से बोली, “हाँ, हल्का-हल्का होने लगा है, पर दीदी सब की तरह नहीं है।”

बिंदा ने उसको चुप रहने को कहा, तो मैंने उसको शह दी और कहा, “अरे बिंदा जी, अब यह सब बोलने दीजिए। जितनी कम उम्र में यह सब बोलना सीखेगी उतना ही कम हिचक होगा, वर्ना बड़ी हो जाने पर ऐसे बेशर्मों की तरह बोलना सीखना होता है। अभी देखा न रीना को, किस तरह बेलाग हो कर बोल दी कि मैं नहीं बोलूँगी ऐसे…” सब हँसने लगे और रीना झेंप गई, तो मैंने कहा, “अभी चलो न बिस्तर पर रीना, उसके बाद तो तुम सब बोलोगी। ऐसा बेचैन करके रख दूँगा कि बार-बार चिल्ला कर कहना पड़ेगा मुझसे।”

उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया और मेरी तरफ तिरछी नजर से देखते हुए पूछा, “क्या कहना पड़ेगा?”

मैंने उसको छेड़ा और लड़कियों की तरह आवाज पतली करके बोला, “आओ न, चोदो न मुझे…. जल्दी से चोदो न मेरी चूत अपने लंड से।”

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मेरे इस अभिनय पर सब लोग हँसने लगे। मैं अपने हाथ को लंड पर तौलिए के ऊपर से ही फेरने लगा था। लंड भी एक कुँआरी चूत की आस में ठनकना शुरू कर दिया था। मैंने वहीं सब के सामने अपना लंड बाहर निकाल लिया और उसकी आगे की चमड़ी पीछे करके लाल सुपाड़ा बाहर निकाल कर उसको अपने अँगूठे से पोंछा। मुझे पता था कि अब अगर मेरा अँगूठा सूँघा गया तो लंड की नशीली गंध से वास्ता होगा, सो मैंने अपने अँगूठे को रीना की नाक के पास ले गया, “सूँघ के देखो इसकी खुशबू।”

मैं देख रहा था कि रागिनी के अलावा बाकी सब मेरे लंड को ही देख रहे थे।

रीना हल्के से बिदकी, “छी: मैं नहीं सूँघूगी।”

रीता तड़ाक से बोली, “मुझे सूँघाइए न, देखूँ कैसा महक है।”

मैंने अपना हाथ उसकी तरफ कर दिया, जबकि बिंदा ने हँसते हुए मुझे लंड को ढकने को कहा। मैं अब फिर से लंड को भीतर कर चुका था और रीता मेरे हाथ को सूँघी और बिना कुछ समझे बोली, “कहाँ कुछ खास लग रहा है…?”

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अब रूबी भी बोली, “अरे सब ऐसे ही बोल रहे हैं तुमको बेवकूफ बनाने के लिए और तू है कि बनते जा रही है।”

मैंने अब रूबी को लक्ष्य करके कहा, “सीधा लंड ही सूँघना चाहोगी।”

वो जरा जानकार बनते हुए बोली, “आप, बस दीदी तक ही रहिए…. मेरी फिक्र मत कीजिए, मुझे इस सब बात में कोई दिलचस्पी नहीं है।”

रीता तड़ से बोली, “पर मुझे तो इसमें खूब दिलचस्पी है…।”

अब बिंदा बोली, “ले जाइए न अब रीना को भीतर…. बेकार देर हो रहा है।”

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मैंने भी उठते हुए रूबी को कहा, “दिलचस्पी न हो तो भी चुदना तो होगा ही, हर लड़की की चूत का यही होता है- आज चुदो या कल पर यह तय है।”

और मैंने खड़ा हो कर रीना को साथ आने का इशारा किया। रीना थोड़ा हिचक रही थी, तो रागिनी ने उसको हिम्मत दी, “जाओ रीना डरो मत…. अभी अंकल ने कहा न कि हर लड़की की यही किस्मत है कि वो जवान हो कर जरूर चुदेगी… सो बेहिचक जाओ। मुझे तो अनजान शहर में अकेले पहली बार मर्द के साथ सोना पड़ा था, तुम तो लकी हो कि अपने ही घर में अपने लोगों के बीच रहते हुए पहली बार चुदोगी.. जाओ उठो…।”

रीना को पास और कोई रास्ता तो था नहीं सो वो उठ गई और मैंने उसको बाहों में ले कर वहीं उसके होठ चुमने लगा।

तब बिंदा मुझे रोकी, “यहाँ नहीं, अलग ले जाइए….यहाँ सब के सामने उसको खराब लगेगा।”

मैंने हँसते हुए अब उसको बाहों में उठा लिया और कमरे की तरफ जाते हुए कहा, “पर इसको तो अब सब लाज-शर्म यहीं इसी घर में छोड़ कर जाना होगा मेरे साथ…अगर पैसा कमाना है तो…” और मैं उसको बिस्तर पर ले आया।

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इसके बाद मैंने रीना को प्यार से चुमना शुरू किया। वो अभी तक अकबकाई हुई सी थी। मैं उसको सहज करने की कोशिश में था।

मैंने उसको चुमते के साथ-साथ समझाना भी शुरू किया, “देखो रीना, तुम बिल्कुल भी परेशान न हो। मैं बहुत अच्छे से तुमको तैयार करने के बाद ही चोदूँगा। तुम आराम से मेरे साथ सहयोग करो। अब जब घर पर ही परमिशन मिल गई है तो मजे लो।”

लगातार पुचकारते हुए मैं उसको चुम रहा था। मेरे होंठ उसके नरम, काँपते होंठों को बार-बार चूस रहे थे।

रीना अब थोड़ा सहज होने लगी थी, सो धीमी आवाज में पूछी, “बहुत दर्द होगा न जब आप करेंगे मुझे?”

मैंने उसको समझाते हुए कहा, “ऐसा जरूरी नहीं है, अगर तुम खूब गीली हो जाओगी तो ज्यादा दर्द नहीं करेगा। वैसे भी जो भी दर्द होना है बस आज और अभी ही पहली बार होगा, फिर उसके बाद तो सिर्फ मस्ती चढ़ेगी तुम पर। फिर खूब चुदाना।”

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अब वो बोली, “और अगर बच्चा रह गया तो…?”

मैंने उसको दिलासा दिया, “नहीं रहेगा, अब सब का उपाय है….निश्चिंत हो कर चुदो अब…” और मैंने उसके कपड़े खोलने लगा।

मैं उसके बदन से उसकी कुर्ती उतारना चाह रहा था जब वो बोली, “इसको खोलना जरूरी है क्या। सिर्फ सलवार खोल कर नहीं हो जाएगा?”

मैंने मुस्कुरा कर जवाब दिया, “अब शर्म छोड़ो और अपना बदन दिखाओ। एक जवान नंगी लड़की से ज्यादा सुन्दर चीज मर्दों के लिए और कुछ नहीं है दुनिया में।”

और मैंने उसकी कुर्ती उतार दी। एक सफेद पुरानी ब्रा से दबी चुची अब मेरे सामने थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उन्हें दबाया और फिर जल्दी से उसको खोल कर चुचियों को आजाद कर दिया।

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छोटे से गोरे चुचियों पर गुलाबी निप्पल गजब की दिख रही थी।

मैंने कहा, “बहुत सुन्दर चुची है तुम्हारी मेरी जान…” और मैं उसको चूसने में लग गया।

जल्द ही उसने अपने पहलू बदले ताकि मैं बेहतर तरीके से उसकी चूची को चूस सकूँ। मैं समझ गया कि अब लौंडिया भी जवान होने लगी है।

इसके बाद मैं उसकी सलवार की डोरी को खींचा। वो थोड़ा शर्माई फिर मुस्कुराई, जो मेरे लिए अच्छा शगुन था। लड़की अगर पहली बार चुदाते समय ऐसे सेक्सी मुस्कान दे तो मेरा जोश दूना हो जाता है।

मैंने उसको पैरों से उतार दिया और उसने भी अपने कमर को ऊपर करके फिर टाँगें उठा कर इसमें सहयोग किया।

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मैंने अब उसकी जाँघों को खोला। पतली सुन्दर अनचुदी चूत की गुलाबी फाँक मस्त दिख रही थी। उसके इर्द-गिर्द काले, घने, लगभग सीधे-सीधे बाल थे जो मस्त दिख रहे थे।

उसकी झाँट इतनी मस्त थी कि पूछो मत। कोई तरीके से उसको शेव करने की जरूरत नहीं थी। बाल लंबे भी बहुत ज्यादा नहीं थे और ना ही बहुत चौड़ाई में फैले हुए थे।

पहाड़ की लड़कियों को वैसे भी प्राकृतिक रूप से सुन्दर झाँट मिलता है अपने बदन पर। वैसे उसकी उम्र भी बहुत नहीं थी कि बाल अभी ज्यादा फैले होते।

मैं अब उसकी झाँटों को हल्के-हल्के सहला रहा था और कभी-कभी उसकी भगनाशा (क्लिट) को रगड़ देता था। उसकी आँखें बंद हो चली थीं।

मैं अब झुका और उसकी चूत को चूम लिया। मेरी नाक में वहाँ का पसीना, गीलेपन वाली चिकनाई और पेशाब की मिली जुली गंध गई।

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मैंने अब अपनी जीभ को बाहर निकाला और पूरी चौड़ाई में फैला कर उसकी चूत की फाँक को पूरी तरह से चाटा। मेरी जीभ उसकी गांड़ के छेद की तरफ से चूत को चाटते हुए उसकी झाँटों तक जा रही थी।

जल्द ही चूत की, पसीने और पेशाब की गंध के साथ मेरे थूक की गंध भी मेरे नाक में जाने लगी थी।

रीना अब तक पूरी तरह से खुल गई थी और पूरी तरह से बेशर्म हो कर अब सहयोग कर रही थी।

मैंने उसको बता दिया था कि अगर आज वो पूरी तरह से बेशर्म हो कर चुद गई तो मैं उसको रागिनी से भी ज्यादा टॉप की रंडी बना दूँगा। वो भी अब सोच चुकी थी कि अब उसको इसी काम में टॉप करना है सो वो भी मेरे कहे अनुसार सब करने को तैयार थी।

मैंने कहा, “रीना, अब जरा अपने जाँघ खोलो न जानू… तुम्हारी गुलाबी चूत की भीतर की पुत्ती को चाटना है।”

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यह सुन कर वो आह कर उठी और बोली, “बहुत जोर की पेशाब लग रही है… इइइइस्स्स अब क्या करूँ…।”

मैं समझ गया कि साली को चुदास चढ़ गई है सो मैंने कहा, “तो कर दो ना पेशाब…”

वो अकचकाई, “यहाँ…. कमरे में” और जोर से अपने पैर भींची।

मैंने कहा, “हाँ मेरी रानी, तेरी रागिनी दीदी तो मेरे मुँह में भी पेशाब कर चुकी है, तू भी करेगी क्या मेरे मुँह में?”

मैं उसके पैर खोल कर उसकी चूत को चाटे जा रहा था। मेरी गर्म जीभ उसकी गीली फाँक पर बार-बार लहरा रही थी। वो ताकत लगा कर मेरे चेहरे को दूर करना चाह रही थी। मैं उसको अब छोड़ने के मूड में नहीं था सो बोला, “अरे तो मूत न मेरी जान. तेरे जैसी लौंडिया की मूत भी अमृत है रानी।”

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वो अब खड़ी हो कर अपने कपड़े उठाते हुए बोली, “बस दो मिनट में आई” तो मैंने उसके मूड को देखते हुए कहा, “ऐसे ही चली जा ना नंगी और मूत कर आजा… प्लीज आज अगर तू नंगी चली गई तो मैं तुम्हें 5000 दूँगा अभी के अभी।”

पैसे के नाम पर उसके आँख में चमक उभरी, “सच में” और फिर वो दरवाजे के पास जा कर जोर से बोली, “मम्मी मुझे पेशाब करने जाना है, बहुत जोर की लगी है और अंकल मुझे वैसे ही जाने को कह रहे हैं।”

रागिनी सब समझ गई सो और किसी के कहने के पहले बोली, “आ जाओ रीना, यहाँ तो सब अपने ही हैं, और फिर तुम अब जिस धंधे में जा रही हो उसमें जितना बेशर्म रहेगी उतना मजा मिलेगा और पैसा भी।”

अब मैं बोला, “बिंदा, अपनी बाकी बेटियों को तुम संभालो अब. मैं और रीना नंगे हैं और मैं भी सोच रहा हूँ कि एक बार पेशाब कर लूँ फिर रीना की सील तोड़ूँ”, कहते हुए मैं नंगे ही कमरे से बाहर आ गया और मेरे पीछे रीना भी बाहर निकल आई। मैंने उसकी कमर में अपना हाथ डाल दिया और आँगन की दूसरी तरफ ऐसे चला जैसे कि हम दोनों कैटवॉक कर रहे हों। बिंदा के चेहरे पर अजीब सा असमंजस था, जबकि उसकी दोनों बेटियाँ मुँह बाए हम दोनों के नंगे बदन को देख रही थी। रागिनी सब समझ कर मुस्कुरा रही थी। जल्द ही हम दूसरी तरफ पहुँच गए तो मैंने रीना के सामने ही अपने लंड को हाथ से पकड़ कर मूतना शुरू किया। रीना भी अब पास में बैठ कर मूतने लगी। उसकी चूत चुदास से ऐसी कस गई थी कि उसके मूतते हुए छर्र-छर्र की आवाज हो रही थी। उसका पेशाब पहले बंद हुआ तो वो खड़ी हो कर मुझे मूतते देखने लगी।

मैं बोला, “लेगी अपने मुँह में एक धार…।”

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रीना ने मुँह बिचकाया, “हुँह गंदे….।”

अब मेरा पेशाब खत्म हो गया था। मैंने हँसते हुए अपना हाथ उसकी पेशाब से गीली चूत पर फिराया और फिर अपने हाथ में लगे उसके पेशाब को चाटते हुए बोला, “क्या स्वाद है….? इसमें तुम्हारे जवानी का रस मिला हुआ है मेरी रानी।”

यह सब देख रीता बोली, “आप कैसे गंदे हैं, दीदी का पेशाब चाट रहे हैं।”

मैंने अब अपना हाथ सूँघते हुए कहा, “पेशाब नहीं है, ऐसी मस्त जवान लौंडिया की चूत से पेशाब नहीं अमृत निकलता है मेरी रानी। पास आ तो मैं तेरी चूत के भीतर भी अपनी उँगली घुसा कर तेरा रस भी चाट लूँगा।”

बिंदा अब हड़बड़ा कर बोली, “ठीक है, ठीक है, अब आप दोनों कमरे में जाओ और भाई साहब आप अब जल्दी छोड़ लीजिए रीना को, इसे नहाना धोना भी है फिर उसको मंदिर भी भेजूँगी।”

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मैंने रीना की चूतड़ पर हल्के से चपत लगाई, “चल जल्दी और चुद जा जानू, तेरी माँ बहुत बेकरार है तेरी चूत फड़वाने के लिए…।”

फिर मैंने बिंदा से कहा, “बहुत जल्दी हो तो यहीं पटक कर पेल दूँ साली की चूत के भीतर क्या?”

बिंदा अब गुस्साई, “यहाँ बेशर्मी की हद कर दी… कमरे में जाइए आप दोनों.।”

मैं समझ गया कि अब उसका मूड खराब हो जाएगा सो मैं चुपचाप रीना को कमरे में ले आया। इतनी देर में पेशाब कर लेने के बाद मेरा लंड करीब 40% ढीला हो गया था। मैंने रीना को बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और फिर से उसकी चूत को चाटने लगा। मैं अपने हाथ से अपना लंड भी हिला रहा था कि वो फिर से टनटना जाए। देर लगते देख मैंने रीना को कहा कि वो मेरा लंड मुँह में ले कर जोर-जोर से चूसे।

रीना अब मुँह बना कर बोली, “नहीं, आप पेशाब करने के बाद इसको धोए नहीं थे, मैं देखी हूँ।”

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मैंने उसको समझाया, “और जैसे तुमने अपनी चूत धोई थी… तुम देखी थी न कि मैं तुम्हारे चूत पर लगे पेशाब को कैसे चाट कर तेरी छोटी बहन को दिखाया था… औरत-मर्द जब सेक्स करने को तैयार हों तो ये सब भूल-भाल कर एक दूसरे के लंड और चूत को पूरा इज्जत देना चाहिए। चूसो जरा तो फिर से जल्द कड़ा हो जाएगा। अभी इतना कड़ा नहीं है कि तुम्हारी चूत की सील तोड़ सके। अगर एक झटके में चूत की सील पूरी तरह नहीं टूटी तो तुमको ही परेशानी होगी। इसलिए जरूरी है कि तुम इसको पूरा कड़ा करो।”

इसके बाद मैंने पहली बार रीना को असल स्टाइल में कहा, “चल आ जा अब, नखरे मत कर नहीं तो रगड़ कर साली तेरी चूत को आज ही भोसड़ा बना दूँगा साली रंडी मादरचोद…” और मैंने अपने ताकत का इस्तेमाल करते हुए उसका मुँह खोला और अपना लंड उसकी मुँह में डाल दिया।

वो अनचाहे ही अब समझ गई कि मैं अब जोर जबरदस्ती करने वाला हूँ। वो बेमन से चूसने लगी पर मेरा तो अब तक कड़ा हो गया था। पर मैं अपना मूड बना रहा था, उसकी मुँह में लंड अंदर-बाहर करते हुए कहा, “वाह मेरी जान, क्या मस्त हो कर अपना मुँह मरवा रही हो, मजा आ रहा है मेरी सोनी-मोनी…” और मैं अब उसको प्यार से पुचकार रहा था। वो भी अब थोड़ा सहज हो कर लंड को चूस रही थी।

थोड़ी देर में मैं बोला, “चल अब आराम से सीधा लेटो, अब तुमको लड़की से औरत बना देता हूँ… बिन कोई फिक्र के आराम से पैर फैला कर लेट और अपनी चूत चुदा…. और फिर बन जा मेरी रंडी…।”

मैंने उसको सीधा लिटा दिया और उसकी जाँघों के बीच में आ गया। मेरा लंड एकदम सीधा फनफनाया हुआ था और उसकी चूत में घुसने को बेकरार था। मैंने उसको आराम से अपने नीचे सेट किया और फिर उसकी दोनों टाँगों से अपनी टाँगें लपेट कर ऐसे फँसा दिया कि वो ज्यादा हिला न सके। इसके बाद मैंने अपने दाहिने हाथ को उसके काँख के नीचे से निकाल कर उसके कंधों को जकड़ते हुए उसके ऊपर आधा लेट गया। मेरा लंड अब उसकी चूत के करीब सटा हुआ था। अपने बाएँ हाथ से मैंने उसकी दाहिनी चुची को संभाला और इस तरह से उसके छाती को दबा कर उसको स्थिर रखने का जुगाड़ कर लिया। पक्का कर लिया कि अब साली बिल्कुल भी नहीं हिल सकेगी जब मैं उसकी चूत को फाड़ूँगा। सब कुछ मन मुताबिक करने के बाद मैंने उसको कहा कि अब वो अपने हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत की छेद पर लगा दे। और जैसे ही उसने मेरे लंड को अपनी चूत से लगाया, मैंने जोर से कहा, “अब बोली साली…. कि चोदो मुझे… बोल नहीं तो साली अब तेरा बलात्कार हो जाएगा। लड़की के न्योते के बाद ही मैं उसको चोदता हूँ… मेरा यही नियम है।”

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वो भी अब चुदने को बेकरार थी सो बोली, “चोदो मुझे….”

मैं बोला, “जोर से बोल कि तेरी माँ सुने…. बोल कुतिया…. जल्दी बोल मदरचोद….”

वो भी जोर से बोली, “चोदो मुझे, अब चोदो जल्दी… आह…”. और उसकी आँख बंद हो गयी।

मैंने अब अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे मेरा सुपाड़ा भीतर चला गया और इसके बाद वो दर्द महसूस की। उसका चेहरा बता रहा था कि अब उसको दर्द होने लगा है। मैं उसके चेहरे पर नजर गड़ाए था और लंड भीतर दबाए जा रहा था। मैं रुका तो उसको करार आया वो राहत महसूस की और आँख खोली।

मैं पूछा, “मजा आ रहा था?”

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रीना बोली, “बहुत दर्द हुआ था….।”

मैं बोला, “अभी एक बार और दर्द होगा, अबकी थोड़ा बर्दाश्त करना।”

मैंने अपना लंड हल्का सा बाहर खींचा और फिर एक जोर का नारा लगाया, “मेरी रीना रंडी की कुँआरी चूत की जय…. रीना रंडी जिंदाबाद….” मैंने इतनी जोर से बोला कि बाहर तक आवाज जाए। इस नारे के साथ ही मैंने अपना लंड जोर के धक्के के साथ “घचाक” पूरा भीतर पेल दिया।

रीना दर्द से बिलबिला कर चीखी, “ओ माँ…. मर गई…… इइइइस्स्स्स्स्स्स्स्स अरे बाप रे… अब नहीं रे…. माँ….” वो सच में अपनी माँ को पुकार रही थी।

पर एक कुँआरी लड़की की पहली चुदाई के समय कभी किसी की माँ थोड़े न आती है, सो बिंदा भी सब समझते हुए बाहर ही रही और मैं उसकी बेटी की चूत को चोदने लगा। घचा-घच…. फचा-फच…. घचा-घच…. फचा-फच…..।

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रीना अब भी कराह रही थी और मैं मस्त हो कर उसके चेहरे पर नजर गड़ाए, उसके मासूम चेहरे पर आने वाले तरह-तरह के भावों को देखते हुए उसकी चूत की जोरदार चुदाई में लग गया।

मेरा मोटा, गर्म लंड उसकी टाइट, नई चूत को हर धक्के पर फैला रहा था। हर बार जब मैं पूरा घुसाता, उसकी अंदर की नरम दीवारें मेरे लंड को जकड़ लेतीं और फिर छोड़तीं। रीना की चूत से थोड़ा खून मिला पानी बाहर निकल रहा था जो मेरे लंड को चिकना बना रहा था।

रीना के रोने कराहने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। आज बहुत दिन बाद मुझे कच्ची कली मिली थी, और मेरी नजर तो अब इसके बाद की संभावनाओं पर थी। घर में रीना के बाद भी दो और कच्ची कलियाँ मौजूद थीं। मैं रीना को चोदते हुए मन ही मन रागिनी का शुक्रिया कर रहा था जो वो मुझे यहाँ बुलाई।

करीब दस मिनट की कभी धीरे तो कभी जोर के धक्कमपेल के बाद जब मैं झड़ने के करीब था तो रीना का रोना लगभग बंद हो गया था। मैं रीना को बोला कि अब मैं झड़ने वाला हूँ तो वो घबड़ा कर बोली, “अब बाहर कीजिए, निकालिए बाहर, खींचिए न उसको मेरे अंदर से” और वो उठने लगी।

मगर मैं एक बार फिर उसको अपनी जकड़ में ले चुका था। पहली बार चुद रही थी, सो मैंने भी सोचा कि उसको मर्द के पानी को भी महसूस करा दूँ। मैंने अपनी कमर को जोर से हिलाया और रीना की चूत को अपने गर्म, मोटे पानी से भर दिया।

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वो घबड़ा रही थी, बोली, “बाप रे, अब कुछ हो गया तो कितनी बदनामी होगी।”

मैं अब निश्चिंत हो कर अपना लंड बाहर खींचा, एक फक की आवाज आई। रीना की चूत एकदम टाइट थी, अभी भी मेरे लंड को जकड़े हुए थी।

मैंने रीना को कहा कि अब वो पेशाब कर ले, ताकि जो माल भीतर मैंने गिराया है उसका ज्यादा भाग बाहर निकल जाए, और पेशाब से उसकी चूत भी थोड़ा भीतर तक धुल जाए। “चुदाई के खेल के बाद पेशाब करना बेहतर है, समझ लो इस बात को,” मैंने उसको समझाया।

वो अब कपड़े समेटने लगी तो मैंने कहा, “अब इस बार ऐसे बाहर जाने में क्या प्रॉब्लम है? चुदने के पहले तो नंगी बाहर जा कर मूती थी तुम?”

मैं देख रहा था कि अब वो थोड़ा शांत हो गई थी और उसका मूड भी बेहतर हो गया था।

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मेरे दुबारा पूछने पर बोली, “अब ऐसे जाने में मुझे शर्म आएगी?”

मैं पूछा, “क्यों भला…।”

वो सर नीचे कर के कही, “तब की बात और थी, अब मैं नई हूँ… पहले मैं लड़की थी और अब मैं औरत हूँ तो लाज आएगी न शुरू में सब के सामने जाने में…।”

मुझे शरारत सुझी, सो मैंने सब को नाम ले ले कर आवाज लगाई, “रागिनी… बिंदा…. रूबी…. रीता… सब आओ और देखो, रीना को अब तुम लोगों के सामने आने में लाज लग रहा है… मेरा सब माल अपने चूत में ले कर बैठी है बेवकूफ…, बाहर जाकर धोएगी भी नहीं” कहते हुए मैं हँसने लगा।

मेरी आवाज पर रागिनी सबसे पहले आई और रीना की चूत में से उसकी जाँघों पर बह रहे पानी देख कर मुस्कुराई, “आप अंकल इस बेचारी की कुप्पी पहली ही बार में भर दिए, ऐसे तो कोई सुहागरात को अपनी दुल्हन को भी नहीं भरता है” और वो कपड़े से उसकी चूत साफ करने लगी।

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रीना शर्मा तो रही थी पर चुप थी।

मैं भी बोला, “अरे सुहागरात को तो लड़कों को डर रहता है कि अगर दुल्हन पेट से रह गई तो फिर कैसे चुदाई होगी…. मैं तो हर बार नई सुहागरात मनाता हूँ। वैसे भी इतनी बार मैं निकालता हूँ कि मेरे वीर्य से स्पर्म तो खत्म ही हो गए होंगे, फिक्र मत करो, यह पेट से नहीं रहेगी।”

अब तक मैंने कपड़े बदल लिए और बाहर निकल गया। कुछ समय बाद रागिनी अपने साथ रीना को ले कर बाहर आई। बिंदा ने एक नजर रीना को देखा, और फिर झट से कहा, “जाओ, अब नहा-धो कर साफ-सुथरी हो जाओ, मंदिर चलना है।”

रीना भी चुपचाप चल दी। मैंने देखा रूबी चूल्हे के पास है सो मैंने कहा, “एक कप और चाय पिला दो रूबी डार्लिंग, तुम्हारा अहसान होगा, बहुत थक गया हूँ।”

रूबी ने मुँह बिचकाते हुए कहा, “हूँह, साँड़ भी कहीं थकता है….।”

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मैंने भी तड़ से जड़ दिया, “बछिया को चोदने में थकता है डार्लिंग… और तुम्हारी दीदी तो लाजवाब थी… अंत-अंत तक मेरे धक्के पर कराह रही थी, ऐसी कसी हुई चूत की मालकिन है।”

इस बात को सुन कर बिंदा फिक्रमंद हो गई। मेरे से पूछी, “तब अब आगे कैसे होगा, शहर में तो बेचारी अकेली रह जाएगी, घुट-घुट कर रोएगी…।”

मैंने समझाया, “अरे नहीं बिंदा, ऐसी बात नहीं है, अभी दो-चार बार और कर दूँगा तो सही हो जाएगी, जब पूरा मुँह खुल जाएगा। असल में न उसको आप सब के प्रोत्साहन की जरूरत है। आप उसको सब करने बोल रहे हैं पर खुल कर नहीं, जब सब आपस में बेशर्मी से बात-चीत करेंगे तो उसका दिमाग भी इस सब के लिए तैयार होने लगेगा और फिर बदन भी तैयार हो जाएगा। ऐसे मैं तो उसको 2-3 बार में ढीला कर ही दूँगा। आप तो जान चुकी हैं कि मेरा लंड आम लोगों से मोटा भी है…. सो जब मेरे से बिना दर्द के चुदा लेगी तो बाजार में कुछ खास परेशानी नहीं होगी। अभी तो जितनी टाइट है, अगर मैं ही पैसा वसूल चुदाई कर दूँ जैसा कि कस्टमर आमतौर पर रंडियों की करते हैं तो बेचारी इतना डर जाएगी कि चुदाने के नाम पर उसकी नानी मरेगी।”

रूबी चाय ले आई थी और वहीं खड़े हो कर सब सुन रही थी। मैं कह रहा था, “उसको बहुत प्यार से आराम-आराम से अपने मोटे लंड से चोदा हूँ आज।”

रूबी अब बोली, “आपको अपनी मोटाई पर बहुत नाज है न, खुद से अपनी बड़ाई करते रहते हैं।”

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उसको शायद मैं कुछ खास पसंद नहीं था।

मैंने उसको जवाब दिया, “ऐसी कोई बात नहीं है, मेरे से ज्यादा सॉलिड लंड वाले हैं दुनिया में… पर मेरा कोई खराब नहीं है बल्कि ज्यादातर मर्दों से बहुत-बहुत बेहतर है…. जब तुम बाजार में उतरोगी और कुछ अनुभव मिलेगा तब समझोगी।”

अब मैं दिल में सोच रहा था कि जब इस कुतिया की सील तोड़ने की नौबत आएगी उस दिन वियाग्रा खा कर साली को फाड़ दूँगा, वैसे भी मैं इसको खास पसंद नहीं हूँ तो बेहतर होगा कि साली का बलात्कार ही कर दूँ। इस घर में तो अब मेरे सात खून माफ होंगे।

बिंदा सब सुन कर सर हिलाई, “ठीक है, अब तो यह आपके और रागिनी के ही भरोसे है।”

रीना अब तैयार हो कर आ गई तो बिंदा, रीना और रूबी मंदिर चली गईं। घर पर मेरे साथ रागिनी और रीता थीं। मैं भी अब नहाने धोने के सोच रहा था। जब मैं टट्टी के लिए गया तो रीता आंगन में नल पर नहाने लगी। मैं भी वहीं ब्रश करने लगा। सब दिन की तरह रीता आज भी सिर्फ एक पैंट में नहा रही थी। उसकी छोटी-छोटी चुचियाँ अभी तरीके से चुची बनी भी नहीं थीं… एक उभार था जिसका आधा हिस्सा गुलाबी था, बड़े से एक रुपया के सिक्के जितना और उस पर एक बड़े किशमिश की साइज की निप्पल थी। आज आराम से गौर से उसकी छाती का मुआयना कर रहा था तो लगा कि कल मैंने जिसे चुचक कहा था… वह सही में अब चूची लग रहा है। यह बात अलग है कि अभी उसमें और ऊभार आना बाकी था। मैंने एक तौलिया लपेट रखा था अपनी कमर में।

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रीना को चोदने के बाद से मैं ऐसे ही टौवेल में घूम रहा था। नहाते हुए रीता बोली, “अंकल, क्या दीदी को बहुत तकलीफ हुई थी?”

मैंने उससे ऐसे सवाल की अभी उम्मीद नहीं की थी सो चौंक कर कहा, “किस बात से?”

अब रीता फिर से पूछी, “वही जब आप दीदी को कमरे में ले जाकर उसकी चुदाई कर उसको औरत बनाए तब?”

मैं बोला, “अब थोड़ा बहुत तो हर लड़की को पहली बार में परेशानी होती है कुछ खास नहीं। पर इसमें मजा इतना मिलता है लड़की को कि वो इस काम को बार-बार करती है मर्दों के साथ। अगर सेक्स में मजा नहीं आता तो क्या इतना परिवार बनता, फिर बच्चे कैसे होते और दुनिया कैसे चलती… सोचो।”

रीता कुछ सोची, सब समझी फिर बोली, “तब दीदी इस तरह से कराह-कराह कर रो क्यों रही थी?”

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मैं अब उसको समझाया, “वो रो नहीं रही थी बेटा… ऐसी आवाज जब लड़की को मजा मिलता है तब भी मुँह से निकलता है… आह आह आह। असल में तुम कभी ब्लू-फिल्म तो देखी नहीं होगी सो तुमको कुछ पता नहीं है। वैसे मैंने कमरा बंद नहीं किया हुआ था, तुम चाहती तो आ जाती देखने।”

रीता अब खड़े हो कर बदन तौलिए से पोंछते हुए बोली, “जैसे माँ तो मुझे जाने ही देती… देखते नहीं हैं जब आप लोग बात करते हैं तो कैसे मुझे किसी बहाने वहाँ से हटाने की कोशिश करती है। अभी इतना बात कर पा रही हूँ कि वो अभी 2-3 घंटे नहीं आएगी, मंदिर से बाजार भी जाएगी।”

कल मैं उसको नहाते समय जब देखा तो चूची और काँख का बाल ही देख पाया था और बूर पर कैसे बाल होंगे सोचता रह गया था। आज मुझे भी मौका मिल रहा था कि उसकी बूर पर निकले ताजे बालों को देखूँ।

मैंने अब उसको एक ऑफर दिया, “रीता तुम मेरा एक बात मानो तो मैं तुमको अभी सब दिखा सकता हूँ, रागिनी है न… उसको अभी तुम्हारे सामने चोद दूँगा, फिर तुम सब देख समझ लेना कि कैसे तुम्हारी दीदी को मैंने औरत बनाया था।”

रीता की आँख में अनोखी चमक दिखी, “क्या बात है बोलिए जरूर मानूँगी।”

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मैंने मुस्कुरा कर कहा, “अगर तुम मेरे सामने अपनी पैंट भी खोल कर अपना बदन पोंछो… तो। असल में मैं तुम्हारी बूर पर निकले बालों को देखना चाहता हूँ, कभी तुम्हारी उम्र की लड़की की बूर नहीं देखी है न आज तक।”

मैंने सब साफ कह दिया। वो राजी हो गई और अपना पैंट नीचे सरका दी, फिर झुक कर उसको अपने पैरों से निकाल दिया।

बिंदा की सबसे छोटी बेटी 13 साल की रीता की नंगी बूर मेरे सामने चमक उठी। वो मेरे सामने खड़ी थी। 5 फीट लंबी दुबली पतली, गोरी चिट्टी, गोल चेहरा, काली आँखें… चेहरे से वो सुन्दर थी, पर उसका अधखिला बदन… आह अनोखा था।

एक दम साफ गोरा बदन, छाती पर ऊभार ले रही गोलाईयाँ, जो अभी नींबू से कुछ ही बड़ी हुई होगी जिसमें से ज्यादा तर हिस्सा भूरा-गुलाबी था जिसके बीच में एक किशमिश के दाने बराबर निप्पल, जिसको चाटा जा सकता था पर चूसने में मेहनत करनी पड़ती। अंदर की तरफ हल्के से दबी हुई पेट जिसके बीच में एक गोल गहरी नाभी… और मेरी नजर अब उसकी और नीचे फिसली।

दो पतले-पतली गोरी कसी हुई टाँगें और उसकी जाँघों की मिलन-स्थली का क्या कहना, मेरी नजर वहाँ जाकर अटक गई। थोड़ी फूली हुई थी वह जगह, जैसे एक डबल रोटी हो जिसको किसी पेंसिल से सीधा चीरा लगा दिया गया हो।

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मैंने बोला, “एक बार जरा अपने हाथ से अपनी बूर को खोलो न जरा सा।”

वो तुरंत अपने दोनों हाथों से अपनी बूर की फूली हुई होंठ को फैला दी। मैं भीतर का गुलाबी भाग देख कर मस्त हो गया।

तभी वो अपना कपड़ा उठा ली, “अब चलिए न दिखा दीजिए जल्दी से रागिनी दीदी का… कहीं माँ आ गई तो बस….।”

मेरा लंड वैसे भी गनगनाया हुआ था, सो मैंने रागिनी को पुकारा, “रागिनी….।”

हम लोगों के नाश्ते की तैयारी कर रही थी। वो चौके में से ही पूछा, “क्या चाहिए…?”

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मैंने कह दिया, “तेरी चूत…. आओ जल्दी से।”

रागिनी अब मुस्कुराते हुए आई, “आपका मन अभी भरा नहीं अभी तो रीना को चोदे हैं।”

मैंने मक्खनबाजी की, “अरे रीना तो भविष्य की रंडी है जबकि तू ओरिजिनल है… सो जो बात तुझमें है, वो और किसी में नहीं।”

रागिनी हँस पड़ी, “अरे अभी नाश्ता-पानी कीजिए दस बज रहे हैं।”

मैं अब असल बात बताया, “असल बात यह है रागिनी कि रीता का मन है कि वो एक बार चुदाई देखे और बिंदा के घर पर रहते तो यह संभव है नहीं सो….।”

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अब रागिनी बिदकी, “हत…., वो अभी बच्ची है, उसकी उम्र ही क्या है 13-14…. यह सब दिखा कर उसको क्यों बिगाड़ रहे हैं आप?”

और रागिनी अब रीता पर भड़की, रीता का मुँह बन गया।

मैंने तब बात संभाली, “रागिनी, प्लीज मान जाओ… मेरा भी यही मन है। बेचारी अब ऐसी भी बच्ची थोड़े ना है, और फिर अब जिस माहौल में रह रही है…. यह सब तो जानना ही होगा उसको।”

रागिनी शांत हो कर बोली, “ठीक है… पर एक उम्र होती है इस सब की, और रीता अभी उस हिसाब से कम उम्र की है।”

मैं फिर से रीता की तरफदारी में बोला, “पर रागिनी तुमको भी पता है रीता से कम उम्र की लड़की को भी लोग चोदते हैं, यहाँ तो बेचारी को मैं सिर्फ दिखा रहा हूँ, अगर अभी मैं उसको चोद लूँ तो…? एक बात तो पक्का है कि वो अब तुम्हारे उम्र के होने तक कुँवारी नहीं बचेगी। बिंदा खुद ही उसको चुदाने भेज देगी, जब रीना की कमाई समझ में आएगी। उसके पास तो दो और बेटी है। वैसे अब बहस छोड़ो मेरी बच्ची…. मेरा भी मन है कि मैं उसको सेक्स करके दिखाऊँ। तुम मेरी यह बात नहीं मानोगी मेरी बच्ची….” मेरा स्वर जरा भावुक हो गया था।

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रागिनी तुरन्त मेरे से लिपट गई। “आप ऐसा क्यों कहते हैं अंकल, मुझे याद है कि आपने मुझे पहली बार कितना इज्जत दी थी और मैंने प्रॉमिस किया था कि आपके लिए सब करूँगी।”

फिर वो रीता को बोली, “आ जाओ कमरे में चलते हैं।”

कमरे में पहुँचते ही मैंने रागिनी को बाहों में समेट कर चुमना शुरू किया और वो भी मुझे चुम रही थी। मैंने रागिनी को याद कराया कि उन सब को गए काफी समय बीत गया है सो जल्दी-जल्दी कर लेते हैं, तो वो हटी और अपने कपड़े उतारने लगी। मैंने अपना तौलिया खोला। मैंने रीता को भी पूरी तरह नंगी होने को कहा।

वो बोली, “क्यों?”

मैंने कहा, “चुदाई देखते समय दूसरे को भी नंगा रहना चाहिए।”

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बेचारी रीता ने अपने बदन पर के एकलौते वस्त्र पैंटी को उतार दिया और नंगी खड़ी हो गई।

रागिनी ने रीता को दिखा कर मेरा लंड अपने हाथ में लिया और चूसने लगी। रीता सब देख रही थी। मैंने बताया, “ऐसे जब लंड को चूसा जाता है तो वो कड़ा हो जाता है, जिससे कि लड़की की चूत में उसको घुसाने में आसानी होती है।”

इसके बाद मैंने रागिनी को लिटाकर उसकी क्लिट को सहलाया और फिर मसलने लगा। रागिनी पर मस्ती छाने लगी। मैंने रीता को बताया कि ऐसे करने से लड़की को मजा आता है, तुम अपने से भी यह कर सकती हो, जब मन करे। फिर मैंने रागिनी की चूत में अपनी उँगली घुसा कर उसको बताया कि लड़की कैसे सही तरीके से हस्तमैथुन कर सकती है। मैंने देखा कि रीता की चूत से पानी निकल रहा है। यानी इसे मजा आ रहा है।

इसके बाद मैंने रागिनी की चूत में अपना लंड पेल दिया।

रागिनी के मुँह से एक आह निकली तो मैंने कहा, “इसी ‘आह आह’ को न तुम बोल रही थी कि दीदी रो क्यों रही थी… देख लो जब कोई लड़की चुदती है तो उसके मुँह से आह आह और भी कुछ-कुछ आवाज निकलने लगती है, जब उनको सेक्स का मजा मिलता है। तुम्हारे मुँह से भी अपने आप निकलेगा जब तुम्हें चोदूँगा।”

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यह कहने के बाद मैंने जोरदार धक्कमपेल शुरू कर दिया। हच-हच फच-फच की आवाज होने लगी थी और मैं अपने लंड को एक पिस्टन की तरह रागिनी की चूत में अंदर-बाहर कर रहा था।

रीता पास में खड़ी हो कर सब देख रही थी, और फिर मैं झड़ गया… रागिनी की चूत के भीतर ही…. रागिनी भी अब शांत हो गई थी।

मैं उठा और रीता से पूछा, “अब सीख समझ गई सब?”

उसके “जी” कहने पर मैंने कहा, “फिर चलो अब मुझे गुरु दक्षिणा दो..।”

रीता मुस्कुराते हुए पूछी, “कैसे…?”

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मैंने मुस्कुरा कर कहा, “मेरे लंड को चाट कर साफ कर दो, बस…..।”

और घोर आश्चर्य….. रीता खुशी-खुशी झुकी और मेरे लंड को चाटने लगी। रागिनी सब देख रही थी पर चुप थी। मैंने रीता के मुँह में अपना लंड घुसा दिया और फिर उसका सर पीछे से पकड़ कर उसकी मुँह में लंड अंदर-बाहर करने लगा। एक तरह से अब मैं उस लड़की की मुँह मार रहा था और रीता भी आराम से अपना मुँह मरवा रही थी। तभी बाहर से दरवाजा खटखटाने की आवाज आई। सब लोग आ गए थे।

रीता तुरंत अपनी पैंटी ले कर किचन में भाग गई फिर वहाँ से आवाज दी, “खोल रही हूँ… रुको जरा।”

मैं दो कदम में नल पर पहुँच गया एक तौलिया को लपेट कर। रागिनी कपड़े पहनने लगी। दरवाजा खुला तो सब सामान्य था। मैं नाश्ते के बाद घूमने निकल गया। मैंने रागिनी और रीता को साथ ले लिया क्योंकि रूबी और रीना पहले ही दो घंटे के करीब चल कर थक गए थे।

उस दिन मैंने तय किया कि अब एक बार रीना को सब के सामने चोदा जाए, और फिर इस जुगाड़ में मैंने रागिनी और रीता को भी अपने साथ मिला लिया। रागिनी ने मुझे इसमें सहयोग का वचन दिया।

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घर लौटने के बाद मैंने दोपहर के खाने के समय कहा, “बिंदा, अभी खाने के बाद दो घंटे आराम करके रीना को फिर से चोदूँगा, अभी जाने में दो दिन है तो इसमें 4-5 बार रीना को चोद कर उसको फिट कर देना है ताकि शहर जाकर समय न बेकार हो, और वो जल्दी से जल्दी कमाई कर सके।”

रागिनी भी बोली, “हाँ अंकल, उसकी गांड़ भी तो मारनी है आपको, क्या पता पहला कस्टमर ही गांड़ू मिल गया तो….।”

बिंदा चुप थी, और थोड़ा परेशान भी कि वहाँ उसकी दोनों छोटियाँ भी थीं। रीता अब बोली, “दीदी, अब तो तुम्हारे मजे रहेंगे, खूब पैसा मिलेगा तुम्हें।”

मैं बोला, “हाँ एक रात का कम से कम 5000 तो जरूर मिलेगा रीना का रेट। सप्ताह में 5 दिन भी गई तो 25000 हर सप्ताह, या क्या पता कुछ ज्यादा भी।”

अब पहली बार रूबी कुछ प्रभावित हो कर बोली, “वाह….. 5 दिन काम का महीने का 1 लाख…. यह तो बेजोड़ काम है… हैं न माँ…।”

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मैंने कहा, “हाँ पर उसके लिए मर्द को खुश करने आना चाहिए, तभी इसके बाद टिप भी मिलेगा। यही सब तो रीना को अभी सीखना है शहर जाने से पहले।”

बिंदा चुपचाप वहाँ से उठ गई, मैं उसके जाते जाते उसको सुना दिया, “आज जब दोपहर में तुम्हारी दीदी चुदेगी, तब तुम भी रहना साथ में सीखना…. साल-दो साल बाद तो तुमको भी जाना ही है, पैसा कमाने।”

दोपहर करीब 3 बजे मैंने रीना को अपने कमरे में पुकारा। रागिनी और रीता मेरे साथ थीं। दो बार आवाज देने के बाद रीना आ गई, तो मैंने रूबी को पुकारा, “रूबी आ जाओ देख लो सब, अभी शुरू नहीं हुआ है जल्दी आओ…” और कहते हुए मैंने रीना के कपड़े उतारने शुरू कर दिए। जब रूबी रूम में घुसी उस समय मैं रीना की पैंटी उसकी जाँघों से नीचे सरका रहा था। रूबी पहली बार ऐसे यह सब देख रही थी, सो वो भौंचक रह गई। रीना ने नजर नीचे कर लीं, तब रागिनी ने रूबी को अपने पास बिठा लिया और मुझसे बोली, “अंकल आज इसकी एक बार गांड़ मार दीजिए न पहले, अगर दर्द होगा भी तो बाद में जब उसको चोदिएगा तो उस मजे में सब भूल जाएगी।”

मुझे उसका यह आईडिया पसन्द आया। उसको इस तरह के दर्द और मजे का पूरा अनुभव था। सो मैंने जब रीना को झुकाया तो वो बिदक गई, कि वो अपने पिछवाड़े में नहीं घुसवाएगी। मैं और रागिनी उसको बहुत समझाए पर वो नहीं मानी तो रागिनी बोली, “ठीक है तुम देखो कि मैं कैसे गांड़ मरवाती हूँ अंकल से, इसके बाद तुम भी मराना। अगर शहर में रंडी बनना है तो यह सब तो रोज का काम होगा तुम्हारा।”

कहते हुए वो फटाक से नंगी हो कर झुक गई। मैंने उसकी गांड़ की छेद पर थूका और फिर अपनी उँगली से उसकी गांड़ को खोलने लगा। थूक और मेरे प्रयास ने उसकी गांड़ को जल्दी ही ढीला कर दिया। तब एक बार भरपूर थूक को अपने लंड पर लगा कर मैंने अपने टनटनाए हुए लंड को उसकी गांड़ में दबा दिया। रागिनी तो एक्सपर्ट थी, सो जल्द ही अपने मसल्स को ढीला करते हुए मेरा पूरा 8 इंच लंबा लंड अपने गांड़ के भीतर घुसवा ली।

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रूबी और रागिनी का मुँह यह सब देख कर आश्चर्य से खुला हुआ था। 8-10 धक्के ही दिए थे मैंने कि रागिनी एक झटके से अपने गांड़ को आजाद कर ली और फिर रीना को पकड़ कर कहा कि अब आओ और गांड़ मरवाओ।

रीना भी सकुचाते हुए झुक गई, और एक बार फिर मैं थूक के साथ उसकी गांड़ पर उँगली घुमाने लगा। रागिनी भी कभी उसकी चूत सहलाती तो कभी अपने चूत से निकल रहे गीलेपन से तो कभी अपने थूक से उसकी गांड़ को गीला करने में लग गई थी। जब मुझे लगा कि अब रीना की गांड़ को मेरी उँगली की आदत पड़ गई है तो मैंने उसकी गांड़ में अपना एक फिर दूसरा उँगली घुसा दिया। दर्द तो हुआ था पर रीना बर्दाश्त कर ली।

इसके बाद उसके राजामंदी से मैं ऊपर उठा और अपने लंड को उसकी गांड़ की गुलाबी छेद पर टिका कर दबाना शुरू किया। रागिनी लगातार उसकी चूत में उँगली कर रही थी ताकि मजे के चक्कर में उसको दर्द का पता न चले, और मैं उसकी कमर को अपने अनुभवी हाथों में जकड़ कर उसकी कुँवारी गांड़ का उद्घाटन करने में लगा हुआ था। जल्द ही मैं उसकी गांड़ मार रहा था। अब मैंने रूबी और रीता को देखा, दोनों अपनी बड़ी-बड़ी आँखों से अपनी दीदी की गांड़ मराई देख रही थी।

करीब 7-8 मिनट के बाद मैं उसकी गांड़ में ही झड़ गया और जब लंड बाहर निकला तो उसकी गांड़ से सफेद माल बह चला उसकी चूत की तरफ…. तभी बिना समय गंवाए, मैंने अपना लंड उसकी चूत में ठाँस दिया। लंड अपने साथ मेरा सफेद माल भी भीतर ले कर चला गया।

रूबी अब बोली, “अरे ऐसे तो दीदी को बच्चा हो जाएगा…”

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मैंने जोश में भरकर कहा, “होने दो… होने दो…. होने दो….” और हर “होने दो” के साथ हुम्म्म्म्म करते हुए अपना लंड जोर से भीतर पेल देता। बेचारी की अब चुदाई शुरू थी, जबकि वो चक्कर में थी कि गांड़ मरवा कर आराम करेगी।

वो थक कर कराह उठी…. पर लड़की को चोदते हुए अगर दया दिखाया गया तो वो कभी ऐसे न चुदेगी, यह बात मुझे पता थी। सो मैं अब उसके बदन को मसल कर ऐसे चोद रहा था जैसे मैं उसके बदन से अपना सारा पैसा वसूल कर रहा होऊँ। रीना कराह रही थी…. और मैं उसकी कराह की आवाज के साथ ताल मिला कर उसकी चूत पेल रहा था। मेरा लंड दूसरी बार झड़ गया, उसकी चूत के भीतर ही। इसके बाद मैं भी थक कर निढाल हो एक तरह लेट गया। रागिनी झुक कर मेरे लंड को चूस चाट कर साफ करने लगी।

मैंने उस रात रीना को अपने पास ही सुलाया और रात में एक बार फिर चोदा, पर इस बार प्यार से, और इस बार उसको मजा भी खूब आया। वो इस बार पहली बार मुझे लगा कि सहयोग की और ठीक से बेझिझक चुदी। सुबह जब हम जगे तो सब पहले से जाग गए थे। रीना कमरे से बाहर जाने लगी तो मैंने उसको पास खींच लिया और चुमने लगा।

वो बोली, “ओह अब सुबह में ऐसे नहीं कैसा गंदा महक रहा है बदन… पसीना से।”

मैंने कहा, “अब मर्द के बदन की गंध की आदत डालो, बाजार में सब नहा धो कर नहीं आएँगे चोदने तुम्हें… और तुम भी तो महक रही हो, पर मुझे तो बुरा नहीं लग रहा…. मैं तो अभी तुम्हारी चूत भी चाटूँगा और गांड़ भी।”

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फिर उसके देखते देखते मैं उसकी चूत चूसने चाटने लगा और वो भी गर्म होने लगी। जल्द ही उसकी आह आह कमरे में गूंजने लगी, और शायद आवाज बाहर भी गई, क्योंकि तभी बिंदा बोली, “उठ गई तो बेटी तो जल्दी से नहा धो लो और तैयार हो जाओ आज बाजार जा कर सब जरूरत का सामान ले आओ, कल तुमको रागिनी के साथ शहर जाना है, याद है ना।”

रीना बोली, “हाँ माँ, पर अब ये मुझे छोड़े तब ना… इतना गंदा हैं कि मेरा बदन चाट रहे हैं।”

मैंने जोर से कहा, “बदन नहीं बिंदा, आपकी बेटी की चूत चाट रहा हूँ…. आप चाय बनवा कर यहीं दे दीजिए…. तब तक मैं एक बार इसको चोद लूँ जल्दी से।” यह कह कर मैंने रीना को सीधा लिटा कर उसके घुटने मोड़ कर जाँघों को खोल दिया। और अपना लंड भीतर गाड़ कर उसकी चुदाई शुरू कर दी। आह्ह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह का बाजार गर्म था। और जैसे ही मैं उसकी चूत में ही झड़ा… घोर आश्चर्य…… बिंदा खुद चाय ले कर आ गई।

बिंदा यह देख कर मुस्कुराई… तो मैंने अपना लंड पूरा बाहर खींच लिया… पक की आवाज हुई और रीना की चूत से मेरा सफेदा बह निकला।

बिंदा यह देख कर बोली, “अरे इस तरह इसके भीतर निकालिएगा तब तो यह बर्बाद हो जाएगी”। वो जल्दी-जल्दी अपने साड़ी के आँचल से उसकी चूत साफ करने लगी। रीना भी उठ बैठी तो बिंदा उसकी चूत की फाँक को खोल कर पोंछी। मैं बिना कुछ बोले बाहर निकल गया हाथ में चाय ले कर, और थोड़ी देर में रीना और बिंदा भी आ गई। फिर हम लोग सब जल्दी-जल्दी तैयार हुए। आज बिंदा ने अपने हाथ से सारा खाना बनाना तय किया और रीना और रागिनी को मेरे साथ बाजार जा कर सामान सब खरीद देने को कहा। हमें अगले दिन वहाँ से निकलना था और मैंने तय किया कि आज की रात को रीना की चुदाई जरा पहले से शुरू कर दूँगा, क्योंकि आज मैं उसको वियाग्रा खा कर सबके सामने चोदने वाला था। अब जबकि बिंदा सुबह अपनी बेटी की चूत से मेरे सफेदा को साफ कर ही ली थी तो मैं पक्का था कि आज के शो में वो एक दर्शक जरूर बनेगी। मैंने बाजार में ही रीना को इसका इशारा कर दिया था कि आज की रात मैं उसको रंडियों को जैसे चोदा जाता है वैसे चोदूँगा।

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मैंने उससे कहा, “रीना बेटी, आज की रात तुम्हारी स्पेशल है। आज मैं तुम्हें सब के सामने एक रंडी को जैसे हम मर्द चोदते हैं वैसे चोदूँगा। अभी तक मैं तुम्हें अपनी बेटी की तरह से चोद रहा था और तुम्हें भी मजा मिले इसका ख्याल रख रहा था, पर आज की रात मैं तुम्हारे मजे की बात भूल कर केवल एक मर्द बन कर एक जवान लड़की के बदन को भोगूँगा तो तुम इस बात के लिए तैयार रहना। शहर में लोगों को तुम्हारे खुशी का ख्याल नहीं रहेगा। उन्हें तो सिर्फ तुम्हारे बदन से अपना पैसा वसूल करना रहेगा। करीब 2 बजे हम लोग घर आए और फिर खाना खा कर आराम करने लगे।

रीना अपनी माँ और बहनों के पास थी और रागिनी मेरे पास। हम दोनों अब आगे की बात पर विचार कर रहे थे। मैंने कहा भी कि अब अगले एक सप्ताह तक मुझे काम से छुट्टी नहीं मिलेगी सो आज रात मैं अपना कोटा पूरा कर लूँगा तब रागिनी बोली, “हाँ और नहीं तो क्या… अब वहाँ जाने के बाद सूरी तो रीना की लगातार बुकिंग कर देगा, जब उसको पता चलेगा कि यह शहर सिर्फ कॉल-गर्ल बनने आई है। एक तरह से ठीक ही है आज रात में रीना को जरा जम कर चोद दीजिए कि उसको सब पता चल जाए कि वहाँ हम लोग क्या-क्या झेलते हैं अपने बदन पर।”

मैंने आज शाम की चाय के समय ही सब को कह दिया कि आज रात में मैं रीना को बिल्कुल जैसे एक रंडी को कस्टमर चोदता है वैसे चोदूँगा और आप सब वहाँ देखिएगा और रागिनी मेरे रूम में रीना को वैसे ही लाएगी जैसे रीना को दलाल लोग मर्दों की रूम तक छोड़ कर आएँगे। सबसे पहले सबसे छोटी बहन रीता की मुँह से निकला, “वाह… मजा आएगा आज तो।”

फिर मैंने बिंदा को कहा, “अपनी बेटी की पहली दुकानदारी पर वहाँ रहोगी तो उसका हौसला रहेगा… अगर साथ में घरवाले हों तो।” उसके चेहरे से लगा कि अब वो भी अपना सिद्धांत वगैरह भूल कर, “जो हो रहा है अच्छा हो रहा है”, समझ कर सब स्वीकार करने लगी है। उन सब के आश्वस्त चेहरों को देख मैं मन ही मन खुश हुआ… आजकल मेरी चाँदी है, अब एक बार फिर मैं एक माँ के सामने उसकी बेटी को चोदने वाला था… और ऐसी चुदाई के बारे में सोच-सोच कर ही लंड पलटी खाने लगा था। मैंने करीब 8 बजे खाना खाया हल्का सा और रीना को भी हल्का खाना खाने को कहा। फिर करीब 9 बजे मैंने वियाग्रा की एक गोली खा ली, रागिनी मुझे वियाग्रा खाते देख मुस्कुराई… वो समझ गई थी कि आज कम से कम 7-8 घंटे का शो मैं जरूर दिखाने वाला हूँ उसकी मौसी और मौसेरी बहनों को।

करीब पौने दस बजे मैंने रीना को आवाज लगाई जो अपनी बहनों के साथ अपना सामान पैक कर रही थी। जल्द ही जब सब समेट कर वो आई तो मैंने उसी को जाकर सब को बुला लाने को कहा और फिर खुद सब के लिए नीचे जमीन पर ही दरी बिछाने लगा। कमरे में एक तरफ मैंने बेड को बिछा दिया था। करीब दस मिनट में सब आ गए, सबसे बिस्तर से लगे दरी पर बैठ गए तब रागिनी अपने साथ रीना को लाई।

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रागिनी एकदम सूरी के अंदाज में बोली, “लीजिए सर जी, एक दम नया माल है। आपके लिए ही इसको बुलाया है सर जी, पहाड़न की बेटी है… खूब मजा देगी। रात भर चोदिएगा तब भी सुबह कड़क ही मिलेगी। अभी तो इसकी चुचियाँ भी नहीं खिली हैं देखिए कैसी कसक रही है”…. कह कर उसने रीना की बायीं चुची को जोर से दबा दिया। वहाँ बैठी सभी लोग रागिनी की ऐसी भाषा सुन कर सन्न थे और उसकी अदाकारी का फैन हो रहा था। फिर उसने रीना को मेरी तरफ ठेल दिया जिसे मैंने बिना देर किए अपनी तरफ खींचा। वियाग्रा खाए करीब एक घंटा हो गया था सो मेरा लंड लगभग टनटनाया हुआ था। बिना देर किए मैंने रीना के बदन से कपड़े उतारने शुरू कर दिए। पहले दुपट्टा, फिर कुर्ती इसके बाद सलवार….। रीना को ऐसी उम्मीद न थी सो मेरी फुर्ती पर वो हैरान थी, और बिना देर किए मैंने उसकी पैंटी नीचे सरका दी और जब तक वो समझे मैंने उस पैंटी को उसके टाँगों से निकाल दिया और एक धक्के के साथ उसे नीचे बिछे बिछावन पर लिटा दिया। उसकी दोनों टाँगों को घुटने के पास से पकड़कर खोल दिया और फिर उसकी चूत में अपना टनटनाया हुआ लंड घुसा कर चोदने लगा। बेचारी सही से गीली भी नहीं हुई थी और उसको मेरे लंड पर लगे मेरे थूक के सहारे ही अपनी चूत मरानी पड़ी सो वो कराह उठी। पर लौंडिया नया-नया जवान हुई थी सो 5-6 धक्के के बाद ही गीली होने लगी और मेरा लंड अब खुश हो कर मस्ती करने लगा। रीना की माँ और उसकी दोनों बहनें वहीं बैठ कर सब देख रही थी। करीब 10 मिनट तक लगातार कभी धीरे तो कभी जोर से मैं उसको चोदा और फिर उसकी चूत में झड़ गया। किसी को इसका अंदाजा न था, पर जब मैंने अपना लंड बाहर खींचा तो रीना की चूत में से मेरा सफेद माल बह चला।

मैंने बिना देरी किए रीना के मुँह में अपना लंड घुसा दिया जो इशारा था उसके लिए, जिसको समझ कर वो मेरे लंड को चूस-चाट कर साफ की तो मैंने उसको पलट दिया और फिर उसकी गांड़ मारने लगा। उस दिन लगातार चार बार मैं झड़ा, दो बार उसकी चूत में और एक-एक बार उसकी गांड़ और मुँह में। इसके बाद मैंने पानी माँगा। बेचारी रीना थक कर चूर थी और वो मुँह से न बोल कर इशारे से अपने लिए भी पानी माँगी।

बिंदा हमारे लिए पानी लेने चली गई तो मैंने इशारा किया और रीता मेरे पास आ कर मेरे लंड को चूसने लगी। बिंदा जब पानी ले कर आई तो यह देख सन्न रह गई कि उसकी सबसे लाडली और छोटी बेटी अपने से 31-32 साल बड़े एक मर्द का लंड चूस रही है, वो भी उस मर्द का जो उसकी माँ के साथ अभी-अभी उसके सामने उसकी बड़ी बहन को चोदा था। वो गुस्से से भर कर रीता को मेरे ऊपर से हटाई तो रागिनी मेरे सामने बैठ कर लंड चूसने लगी और जैसे ही बिंदा ने एक थप्पड़ रीता को लगाया रुँआसी हो कर बोल पड़ी, “ये सब देख कर मन हो गया अजीब तो मैं क्या करूँ, तुम तो अंकल से चुदा ली और दीदी को भी चुदा दी और मुझे जो मन में हो रहा है उसका क्या? एक बार अंकल का छू ली तो कौन सा पाप कर दी, कुछ समय के बाद मुझे भी तो ऐसे ही चुदाना होगा तो आज क्यों नहीं?”

अब रीना तो मैं अगले दौर के लिए खींच लिया था और रागिनी उन माँ-बेटी में सुलह कराने के ख्याल से बोली, “रीता अभी तुम छोटी हो, अभी कुछ और बड़ी हो जाओ फिर तो यह सब जिंदगी भी करना ही है। अभी से उतावली होगी तो तुम्हारा समय से पहले ही ढीला हो जाएगा फिर किसी को मजा नहीं आएगा न तुमको और न ही जो तुमको चोदेगा उसको। अभी तो ठीक से झाँट भी नहीं निकला है तुमको।”

मैंने कहा, “देखिए बिंदा जी. आज मैंने वियाग्रा खाया है. मेरा लंड अभी शांत नहीं होगा. आपकी रीना तो अभी ही पस्त हो गई है. अब मैं किसे चोदूँ?”

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बिंदा ने कहा, “आप मुझे चोद लीजिए।”

मैंने कहा, “आईये, कपड़े उतार कर आ कर नीचे लेट जाइये।”

बिंदा ने सिर्फ साड़ी पहन रखी थी. उसने झट अपनी साड़ी उतारी. साड़ी के नीचे उसने ना ब्रा पहनी थी ना ही पैंटी. वो रागिनी और अपनी सभी बेटियों के सामने पूरी तरह नंगी हो कर मेरे लंड को चूसने लगी.

रीना ने लेटे-लेटे ही अपनी चूत में अपनी उँगली डाल कर अपनी माँ को मेरा लंड चूसते हुए देख रही थी. अब मैंने देर करना उचित नहीं समझा. मैंने बिंदा को पटक कर जमीन पर लिटाया और उसकी टाँगों को मोड़ कर अलग कर उसके बुर को फैलाया और अपना विशाल लंड उसके चूत में घचाक से डाल दिया.

कई मर्दों से चुदा चुकी बिंदा को भी मेरे इस मोटे लंड का अहसास नहीं था. वो दर्द के मारे बिलबिला गई. लेकिन वो मेरे झटके को सह गई. अब मैं उसकी चूत को पेलना शुरू कर दिया. उसकी बेटियाँ अपनी माँ की चुदाई काफी मन से देख रही थीं. करीब 15 मिनट की चुदाई में बिंदा ने 3 बार पानी छोड़ा. लेकिन मेरे लंड से 15वें मिनट पर माल निकला जो उसकी चूत में ही समा गया. अब बिंदा भी पस्त हो कर जमीन पर लेट गई थी. लेकिन मैं पस्त नहीं हुआ था. अब रागिनी की बारी थी. वो तो पेशेवर रंडी थी. मैंने सिर्फ उसे इशारा किया और वो बिंदा के बगल में जमीन पर नंगी लेट गई।

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लेकिन मैंने कहा, “रागिनी तेरी गांड़ मारनी है मेरे को.”

रागिनी मुस्कुराई और खड़ी हो कर एक टेबल पकड़ कर नीचे झुक गई. मैंने उसकी कई बार गांड़ मारी थी. इसलिए मेरे लंड को उसके गांड़ के अंदर जाने में कोई परेशानी नहीं हुई. तक़रीबन 200 बार उसके गांड़ में लंड को आगे-पीछे करता रहा. लेकिन वो सिर्फ मुस्कुराते रही. बिंदा और उसकी बेटियाँ मुझे रागिनी की गांड़ मारते हुए देख रही थीं।

मैंने कहा, “देखा बिंदा, इसे कहते हैं गांड़ मरवाना, देखो इसे दर्द हो रहा है?”

रूबी ने कहा, “रागिनी दीदी तो रोज 10-12 बार गांड़ मरवाती हैं तो दर्द क्या होगा?”

मैं रागिनी की गांड़ मारते हुए हंसने लगा. रागिनी ने भी मुस्कुराते हुए रूबी से कहा, “आजा, तू भी गांड़ मरवा के देख ले अंकल से. तुझे भी दर्द नहीं होगा.”

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रूबी ने कहा, “ना बाबा ना. मैं तो सिर्फ चूत चुदवा सकती हूँ आज. गांड़ नहीं.”

यह सुन कर मेरी तो बाँछें खिल गईं. मैंने कहा, “खोल दे अपने कपड़े, आज तेरी भी चूत की काया पलट कर ही दूँ. क्यों बिंदा क्या कहती हो?”

बिंदा ने कहा, “जब चुदाई देख कर रीता की चूत पानी छोड़ने लगी है तो रूबी तो उससे बड़ी ही है. उसकी तमन्ना भी पूरी कर ही दीजिये. लेकिन प्यार से. रूबी, अपने कपड़े उतार कर तू भी हमारी बगल में लेट जा।”

माँ की परमिशन मिलते ही रूबी ने अपनी कुर्ती और सलवार उतार दिया. अंदर उसने सिर्फ पैंटी पहन रखी थी. जो पूरी तरह गीली हो चुकी थी. सीने पर मध्यम आकार के स्तन विकसित हो चुके थे. रूबी पैंटी पहने हुए ही अपनी माँ के बगल में लेट गई. बिंदा ने उसकी पैंटी को सहलाते हुए कहा, “क्यों री, तेरी चूत से इतना पानी निकल रहा है?”

रागिनी ने अपनी गांड़ मरवाते हुए कहा, “क्यों नहीं निकलेगा पानी मौसी? इतनी चुदाई देखने के बाद तो 100 साल की बुढ़िया की चूत भी पानी छोड़ देगी. ये तो 16 साल की जवान है।”

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जवाब सुन कर हम सभी को हँसी आ गई. बिंदा ने रूबी की पैंटी खोल दी. और उसकी चिकनी गीली चूत सहलाने लगी।

बिंदा बोली, “क्यों री रूबी, ये चूत तूने कब शेव किया? दो दिन पहले तक तो बाल थे तेरी चूत पर।”

रूबी बोली, “उस रात को जब अंकल तुम्हें चोद रहे थे ना तब तू अंकल से कह रही थी कि मेरी चूत के बाल फँस गए हैं. तभी मैं सजग हो गई थी. और उसी रात को चूत की शेव की थी मैंने. मुझे पता था कि क्या पता कब मौका लग जाए चुदाने का?”

बिंदा बोली, “अच्छा किया कि तूने चूत की शेव कर ली. नहीं तो तेरे अंकल का लंड इतना मोटा है कि चुदाई में बाल फँस जाते हैं और बहुत दुखता है. अच्छा, मैं जो मोटा वाला मोमबत्ती खरीद कर लायी थी वो इसमें डालती हो कि नहीं आजकल?”

रूबी बोली, “क्या माँ, अब तेरी उस मोमबत्ती से काम नहीं चलने वाला. अब तो पतला वाला बैंगन भी डाल लेती हूँ।”

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बिंदा बोली, “पूरा घुसा लेती हो?”

रूबी बोली, “नहीं, आधा डाल कर ही मुठ मार लेती हूँ।”

बिंदा बोली, “अच्छा ठीक है, आज अपने अंकल का लंड ले कर अपनी प्यास बुझा लो।”

मैंने जितना सोचा था उससे भी कहीं अधिक यह परिवार आगे था. मैंने झटाझट रागिनी की गांड़ मारी और अपना माल उसकी गांड़ में गिराया. अब मेरी वियाग्रा का प्रभाव कम होना शुरू हुआ. मैंने रागिनी के गांड़ में से अपना लंड निकाला और रूबी के बगल में लेट गया. रागिनी भी नंगी ही मेरे बगल में लेट गई. अब बिंदा, उसकी दो बेटियाँ — रूबी और रीना, रागिनी और मैं सभी एक साथ जमीन पर पूरी तरह नंगे पड़े हुए थे. अब मुझे रूबी की चूत का भी सील तोड़ना था।

मैंने रूबी को अपने से सटाया और अपने ऊपर लिटा दिया. उसका होंठ मेरे होंठ के ऊपर था. मैंने उसके सर को अपनी तरफ दबाया और उसका होंठ का रस चूसने लगा. वो भी मेरे होंठ का रस चूसने लगी. उसके हाथ मेरे लंड से खेल रहे थे. मैंने उसे वो सब करने दिया जो उसकी इच्छा हो रही थी. वो मेरे मोटे लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर मसल रही थी. उसकी माँ और बहन उसके बगल में लेट कर हम दोनों का तमाशा देख रही थीं. थोड़ी देर में मैंने उसके होंठों को अपने होंठ से आजाद किया. उसे जमीन पर पीठ के बल लिटाया और उसकी मध्यम आकार की चुचियों से खेलने लगा. रूबी को काफी मजा आ रहा था।

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बिंदा बोली, “अरे भाई, जल्दी कीजिए न? कब से बेचारी तड़प रही है।”

मैंने भी अब देर करना उचित नहीं समझा. मैंने कहा, “क्यों री रूबी, डाल दूँ अपना लंड तेरी चूत में?”

रूबी बोली, “हाँ, डाल दो।”

मैंने कहा, “रोवेगी तो नहीं ना?”

रूबी बोली, “पहाड़न की बेटी हूँ. रोऊँगी क्यों?”

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मैंने उसके दोनों टाँगों को मोड़ा और फैला दिया. उसकी एक टाँग को उसकी माँ बिंदा ने पकड़ा और दूसरी टाँग को रागिनी ने. मैंने अपने लंड को उसकी चूत की छेद के सामने ले गया और घुसाने की कोशिश की. लेकिन रूबी की चूत की छेद छोटी थी और मेरा लंड मोटा. फलस्वरूप उसकी चूत पर चिकनाई की वजह से मेरा लंड उसकी चूत में न घुस कर फिसल गया।

बिंदा ये देख कर हँसी और बोली, “अरे भाई संभल कर. पहली बार चूत में लंड घुसवा रही है. रुक जाइए. मैं डलवाती हूँ।”

उसने एक हाथ की उँगलियों से अपनी बेटी रूबी की चूत चौड़ी करी और एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर उसकी चूत की छेद पर सेट किया. फिर मेरा लंड को कस कर पकड़ लिया ताकि फिर फिसल न जाए. बोली, “हाँ, अब सही है. अब धीरे धीरे.”

मैंने अपना लंड काफी धीरे-धीरे रूबी की चूत में सरकाना शुरू किया. उसकी चूत काफी गीली थी. इसलिए बिना ज्यादा कष्ट के उसने अपने चूत में मेरे लंड को घुस जाने दिया. करीब आधा से ज्यादा लंड मैंने उसके चूत में डाल दिया था, लेकिन रूबी को कोई तकलीफ नहीं हो रही थी।

बिंदा को थोड़ा आश्चर्य हुआ. बोली, “क्यों री, पहले ही चुदवा ली है क्या किसी से?”

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रूबी बोली, “नहीं माँ. इस लंड के इतना मोटा बैंगन तो मैं रोज डालती हूँ ना।”

मैंने कहा, “आप चिंता क्यों करती हो बिंदा जी. अभी टेस्ट कर लेता हूँ।”

मैंने कह कर कस के अपने लंड को उसके चूत में पूरा डाल दिया. रूबी चीख पड़ी, “माँआआ…”

उसकी चूत की झिल्ली फट गई. उसके चूत से हल्का सा खून निकल आया. खून देख कर बिंदा का संतोष हुआ कि रूबी को इससे पहले किसी ने नहीं चोदा था।

मैंने अपना काम तेजी से आरंभ किया. उस दुबली-पतली रूबी पर मैं पहाड़ की तरह चढ़ उसे चोद रहा था. लेकिन वो अपनी इबादी बहन से ज्यादा सहनशील थी. उसने तुरंत ही मेरे मोटे लंड को अपनी चूत में और मेरे भारी-भरकम शरीर के धक्कों को अपने दुबले शरीर पर सहन कर लिया.

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फिर मैंने उसकी 10 मिनट तक दमदार चुदाई की. उसकी माँ इस दौरान अपनी बेटी के बदन को सहलाती रही तथा ढाढस बंधाती रही. 10 मिनट के बाद जब मेरे लंड ने माल निकलने का सिग्नल दिया तो मैंने झट से लंड को उसके चूत से निकाला और रूबी को उठा कर उसके मुँह में अपना लंड डाल दिया. वो समझ गई कि मेरे लंड से माल निकलने वाला है. वो मेरे लंड को चूसने लगी. मेरे लंड ने माल का फव्वारा छोड़ दिया. रूबी ने सारा माल बिना किसी लाग-लपेट के पी गई. और मेरे लंड को चूस-चूस कर साफ करी।

अब मैं फिर एक-एक बार रीना और उसकी माँ बिंदा को चोदा.

रात दो बज गए थे. अंत में हम सभी थक गए. सबसे छोटी रीता हमारी चुदाई का खेल देखते-देखते वहीं सो गई. बिंदा की गांड़ मारने के बाद मैं थक चुका था. हम सभी जमीन पर नंगे ही सो गए. लेकिन एक घंटे के बाद ही मेरी नींद खुली. मेरा लंड कोई चूस रही थी. मैं लगभग नींद में था. अंधेरे में पता ही नहीं था कि उन चार नंगी औरतों में कौन मेरे लंड को चूस रही थी. मेरा लंड खड़ा हो चुका था. वो कौन थी मुझे पता नहीं था. मैंने नींद में ही और अंधेरे में ही उसकी जम के चुदाई की.

इसी दौरान मेरी पीठ पर भी कोई चढ़ चुकी थी. ज्यों ही मैंने नीचे वाली के चूत में माल निकाला त्यों ही मेरी पीठ पर चढ़ी औरत ने मुझे अपने ऊपर लिटाया और अपनी चूत में मेरे लंड को घुसा कर चोदने का इशारा किया. फिर मैं उसे भी चोदने लगा. तभी मुझे अहसास हुआ कि मेरी दोनों तरफ से दो और महिला भी मेरे से सट गई हैं और मेरी चुदाई का आनंद उठा रही हैं. यानी मैं इस वक्त तीन औरतों के कब्जे में था. कोई मेरे होंठों को चूम रही थी तो कोई मेरे अंडों को चूस रही थी. कोई मेरे लंड को अपनी चूत में डलवा रही थी. यह प्रक्रम सुबह होने तक चलता रहा.

जब थोड़ा-थोड़ा उजाला हुआ तो मैंने देखा कि मुझसे बिंदा, रीना और रूबी लिपटी हुई हैं. मेरे लंड इस वक्त बिंदा के चूत में थे. बगल में रागिनी बेसुध सोयी पड़ी थी. मैंने अभी भी इन तीनों के साथ चुदाई करना जारी रखा. सुबह के नौ बज चुके थे. और तीनों माँ-बेटी मुझे अभी तक नहीं छोड़ रही थीं. ठीक नौ बजे सबसे छोटी रीता जग गई. उस वक्त रूबी मुझसे चुदवा रही थी और बिंदा मेरी पीठ पर चढ़ी हुई थी. उधर रीना अपनी माँ की चूत चूस रही थी. जब मैंने रूबी के चूत में माल निकाला तो कुछ भी नहीं निकला, सिर्फ एक बूंद पानी की तरह निकला. इसमें भी मुझे घोर कष्ट हुआ. मजाक है क्या एक रात में 24-25 बार माल निकालना?

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उसके बाद तो मैं उन सब को अपने आप से हटाया और नंगा ही किसी तरह आँगन में जा चारपाई पर गिर पड़ा. शायद तब उन तीनों को समय और अपनी परिस्थिति का ज्ञान हुआ. वे तीनों कपड़े पहन बाहर आईं. रागिनी को भी जगाया. हमारी आज की बस छूट चुकी थी. रागिनी बेहद अफसोस कर रही थी. लेकिन मुझे नंगा चारपाई पर पड़ा देख उसे काफी आश्चर्य हुआ? उसने बिंदा से पूछा, “मौसी, इन्हें क्या हुआ?”

बिंदा बोली, “रात भर हम लोगों ने इस से चुदवाया. अभी-अभी इसको हमने छोड़ा।”

रागिनी बोली, “माई गॉड, इतना तो बेचारा एक महीने में भी नहीं चोदता होगा. और तुम पहाड़नियों माँ-बेटियों ने एक ही रात में इसका भुरता बना दिया. हा हा हा हा… खैर.. इस चारपाई को पकड़ो और इसे अंदर ले चलो. कोई आ गया तो मुसीबत हो जाएगी।”

उन चारों ने मेरी चारपाई को पकड़ा और मुझे अंदर ले गईं. मैं दिन भर नंगा ही पड़ा रहा. शाम को मेरी नींद खुली तो मैंने खाना खाया।

हालांकि हमें अगले दिन ही लौट जाना था लेकिन उन माँ-बेटियों ने हमें जबरदस्ती 10 दिन और रोक लिया. और वो तीनों माँ-बेटी और रागिनी हर रात को पूरी रात मेरा सामूहिक बलात्कार करती थीं।

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जब बिंदा और रूबी का मन पूरी तरह तृप्त हो गया तब उसने मुझे रीना के साथ शहर वापस आने की अनुमति दी. रीना तो पहले से ही रंडी बन चुकी थी. शहर आते ही उसने रंडियों में काफी ऊँचा स्थान बना लिया. छः महीने में ही उसने कार और फ्लैट खरीद कर बिंदा, रूबी और रीता को भी शहर बुला लिया. बिंदा और रूबी भी इस धंधे में कूद पड़ीं।

मुझे आश्चर्य हुआ कि बिंदा की डिमांड भी मार्केट में अच्छी खासी हो गई. अब ये तीनों इस धंधे में काफी कम रही हैं।

हाँ, सबसे छोटी रीता को इस दलदल से दूर रखा है और उसे शहर से दूर बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाया जा रहा है.

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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