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मैं मम्मी और दीदी के साथ नंगा सोता हु

Balcony didi pussy sex story: हाय फ्रेंड्स। मेरी उम्र 19 साल है। यह स्टोरी मेरी बड़ी बहन रीना और माँ के ऊपर है। वो बहुत खूबसूरत है। उसकी उम्र 21 साल है। मेरी फैमिली में हम चार लोग हैं। मैं, मेरे मम्मी पापा और बहन। मैं गरीब परिवार से हूं और मेरे परिवार की स्थिति अच्छी नहीं है। मेरे पापा कुछ काम की वजह से बाहर गए हुए थे।

यह बात करीब 15 दिन पहले की है। मेरी बहन रीना एक दिन घर के आंगन में नहा रही थी। गर्म दोपहर का समय था और वो ठंडे पानी से नहाने के लिए खड़ी थी। उसी समय मैं स्कूल से घर आया। माँ मार्केट गई थी। मैं अंदर गया तो मेरे होश उड़ गए। मैंने देखा कि रीना पूरी तरह नंगी होकर नहा रही थी। पानी की ठंडी और चमकदार धार उसके नंगे शरीर पर लगातार बह रही थी जिससे उसकी गोरी चिकनी त्वचा और भी ज्यादा आकर्षक लग रही थी। पानी की बूंदें उसके कंधों से नीचे सरक रही थीं। उसका चेहरा दूसरी तरफ था इसलिए वो मुझे नहीं देख सकी। मैं तुरंत दूसरे कमरे में चला गया और उस कमरे में बहुत अंधेरा रहता है।

मैं वहां से रीना को नहाते हुए देखने लगा। उसकी मोटी गोल और भरी हुई गांड देखकर मेरा 9 इंच का लंड एकदम खड़ा हो गया और मेरी पैंट में तनाव महसूस होने लगा। पानी उसकी गांड की गहरी दरार के बीच से बहकर नीचे टपक रहा था और उसके दोनों चूतड़ हल्के-हल्के हिल रहे थे। मैंने पहली बार रीना की गांड देखी। मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि रीना दीदी इतनी सुंदर होगी। उसके नंगे शरीर को देखकर मेरे शरीर में गर्म लहर दौड़ गई। मैं अपना लंड बाहर निकाल कर सहलाने लगा। मेरी मुट्ठी में मेरा मोटा लंड जोर-जोर से थरथरा रहा था और उसके सिर से चिपचिपा पारदर्शी पानी रिसने लगा था। तभी रीना सीधी होकर नहाने लगी। उसकी बड़ी-बड़ी भारी चूचियां आगे-आगे लहराने लगीं जिनके गुलाबी निप्पल पानी के कारण सख्त होकर खड़े हो गए थे। उसकी चिकनी और मोटी चूत के दोनों होंठ पानी से भीगकर चमक रहे थे। उसकी बड़ी बड़ी चूची और चूत देखकर मेरे लंड से पानी निकलने लगा।

मैंने कभी भी रीना दीदी को चोदने का नहीं सोचा था लेकिन मैंने आज सोच लिया था कि मैं रीना दीदी के शरीर का मजा जरूर लूंगा। मैंने रीना को पूरा नहाते देखा। उसके हर अंग को अपनी नजरों से छूता हुआ महसूस किया। फिर उन्होंने कपड़े पहन लिए और रीना करने के लिए मंदिर वाले रूम में चली गई। और फिर मैं भी धीरे से बाहर आकर वापस घर में आया।

फिर उसी दिन शाम को दीदी बालकनी में खड़ी थी। हल्की शाम की हवा चल रही थी। मैं भी उसी समय जाकर खड़ा होकर दीदी से बात करने लगा। हमारी बालकनी बहुत छोटी थी। उसमें सिर्फ एक लोग ही खड़ा हो सकता था। दीदी आगे झुक कर खड़ी थी और मैं उनके पीछे खड़ा होकर बात कर रहा था। उनकी पोशाक उनके गोल और मोटे चूतड़ों पर टाइट पड़ रही थी जिससे उनकी गांड का पूरा आकार साफ दिख रहा था। मेरा पूरा ध्यान उनकी गांड पर ही था। मेरा लंड खड़ा हो गया।

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अब मेरा लंड उनकी गांड के बीच में अचानक लग गया। मेरे पूरे शरीर में एक झटका सा लगा। दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। मैं डर गया शायद दीदी समझ न जाए। लेकिन रीना दीदी को पता नहीं चल रहा था। उनकी नरम और गोल गांड की गर्माहट मेरे लंड के सिरे पर साफ महसूस हो रही थी। सलवार का पतला कपड़ा हमारे बीच में था फिर भी उनकी गांड की नरमी और गर्मी मेरे लंड को पूरी तरह छू रही थी। अब मैं अपना लंड उनकी गांड के बीच में जानबूझकर दबाने लगा। मैंने धीरे-धीरे कमर आगे की और अपना मोटा लंड उनकी गांड की दरार में दबाया। मेरा आधा लंड उनके सलवार में घुस गया था लेकिन दीदी मुझसे बातें करती जा रही थी। उनकी आवाज में कोई फर्क नहीं था। वो सामान्य बातें कर रही थीं जैसे कुछ हुआ ही न हो। उनकी गांड के दोनों चूतड़ मेरे लंड को हल्के-हल्के दबा रहे थे। हर दबाव के साथ मेरे लंड से एक-एक बूंद चिपचिपा पानी रिस रहा था जो सलवार के कपड़े को गीला कर रहा था।

वो अचानक और झुक कर अपनी टांगें और फैला दी। उनकी टांगें अब थोड़ी चौड़ी हो गईं। और अब मेरा लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा। लंड का सिरा अब सीधा उनकी चूत की फांक पर दब रहा था। सलवार के ऊपर से भी उनकी चूत की गर्मी और नमी महसूस हो रही थी। मुझे डर भी लग रहा था और मजा भी आ रहा था। मेरा सांस तेज हो गया था। दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर निकल आएगा। हर बार जब मैं कमर हिलाता तो लंड उनकी चूत की दरार पर ऊपर-नीचे रगड़ता। उनकी चूत के होंठ सलवार के कपड़े के नीचे से भी महसूस हो रहे थे। अचानक मम्मी ने दीदी को आवाज दी और दीदी तुरंत मेरे लंड को धक्का देकर नीचे चली गई। दीदी ने एक झटके में अपना शरीर सीधा किया और मेरे लंड को अपनी गांड से अलग कर दिया। आज मेरा लंड पहली बार किसी चूत के ऊपर रगड़ रहा था।

मैंने सोच सोच कर रात में अपना लंड हिलाया। पूरे दिन की घटना बार-बार याद आ रही थी। मैं बिस्तर पर लेटा था और अपनी मुट्ठी में मोटा लंड पकड़कर जोर-जोर से ऊपर-नीचे कर रहा था। हर स्ट्रोक के साथ दीदी की गांड और चूत की याद आ रही थी। लंड से काफी सारा पानी निकल रहा था जो मेरी उंगलियों को चिकना बना रहा था। फिर दूसरे दिन दीदी फिर शाम को बालकनी में खड़ी थी। हल्की हवा चल रही थी और आसमान में बादल छाए हुए थे। मैं नीचे से देखकर ऊपर जाने से पहले अपना अंडरवियर निकाल कर सिर्फ एक तौलिया लगाकर ऊपर गया। मेरे लंड पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था। तो मैं सॉक हो गया क्योंकि रीना दीदी ने आज अपना बहुत पुराना स्कर्ट पहना हुआ था जो कि उनके सिर्फ घुटनों तक ही आता था और वो बालकनी में झुक कर खड़ी थी।

मैंने पीछे से देखा तो उनकी पेंटी भी दिख रही थी। सफेद पतली पेंटी उनके गोरे चूतड़ों पर टाइट पड़ रही थी। मेरा लंड उनकी गोरी गोरी जांघ और पेंटी देखकर एकदम खड़ा हो गया। लंड इतना सख्त हो गया कि तौलिए के नीचे से भी उभरकर दिखने लगा। मैंने सोचा आज कुछ भी हो जाए मैं आज दीदी की पेंटी में अपना लंड का पानी जरूर लगाऊंगा। तभी दीदी ने मेरी तरफ देखा और बोली कि इधर आकर देखो लगता है आज बारिश होगी।

मैं तुरंत उनके पीछे से खड़ा होकर आसमान देखने लगा। मेरा लंड एकदम खड़ा था इसलिए सीधा उनकी गांड में जाकर घुस गया। लंड का सिरा उनकी स्कर्ट और पेंटी के बीच दब गया। मैं एक बार तो डर गया कि दीदी गुस्सा न हो जाए पर दीदी हंसी और बोली तुम अब बड़े हो गए हो। उनकी हंसी में कोई गुस्सा नहीं था। मैं समझ नहीं पाया। मैंने जब दोबारा पूछा तो सिर्फ हंसी और कुछ नहीं बोली और अपनी गांड मेरी तरफ और फैलाकर खड़ी हो गई। अब उनकी गांड मेरे लंड पर पूरी तरह दब गई थी।

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अब मेरा लंड उनकी चूत पर लग रहा था। मैंने सोचा कि दीदी को मेरे लंड का पूरा पता चल रहा होगा फिर भी नहीं बोल रही है। मैंने सोचा कि शायद दीदी को मजा आ रहा होगा। मैंने सोचा कि अब कैसे पता करूं। मैं अपना लंड धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। दीदी कुछ नहीं बोली। मैं समझ गया कि दीदी को मजा आ रहा है।

मैंने अपने तौलिए में से अपना लंड बाहर निकाला और दीदी का स्कर्ट थोड़ा ऊपर करके अपना लंड उनकी पेंटी पर लगा दिया। और मेरा लंड दीदी की गांड की दरार में घुस गया। अब दीदी को मेरा लंड पूरा मजा दे रहा था। उनकी गांड इतनी नरम थी कि जब मैं अपना लंड उनकी गांड पर दबाता तब उनका चूतड़ फैल जाता। लंड की गर्मी और सख्ती उनकी पेंटी के कपड़े को अंदर धकेल रही थी। और कुछ ही देर में दीदी की पेंटी चूत के पास में भीग चुकी थी। उनकी चूत का गर्म और चिपचिपा पानी पेंटी के कपड़े से रिसकर मेरे लंड को गीला कर रहा था।

मेरे लंड और उनकी चूत को एक दूसरे के पानी का मजा मिलने लगा। रीना दीदी मुझसे 5 साल बड़ी थी। मैं बहुत खुश था। अचानक मेरे होश उड़ गए। दीदी ने अपना हाथ पीछे करके मेरे लंड को पकड़ लिया और पीछे मुड़ कर बोली तुम क्या कर रहे हो। मैं अशुद्ध हो जाऊंगी और तुम मेरे छोटे भाई हो और हम भाई बहन में यह सब नहीं होता।

वो मेरे लंड को अपनी पेंटी में से बाहर निकाल कर अपना स्कर्ट नीचे करके वहां से चली गई। दीदी ने मेरे लंड को अपनी गर्म उंगलियों से मजबूती से पकड़ा हुआ था। उन्होंने मेरे मोटे लंड के सिरे को अपनी भीगी पेंटी से धीरे-धीरे बाहर खींचा। लंड पर उनकी चूत का गर्म और चिपचिपा पानी लगा हुआ था जो अब हवा में ठंडा हो रहा था। स्कर्ट को नीचे खींचते समय उनके गोल चूतड़ हल्के से हिले और कपड़ा उनकी जांघों पर फिसल गया। दीदी बिना एक शब्द बोले तेजी से वहां से चली गईं। उनके पैरों की आहट सीढ़ियों पर गूंज रही थी। मैं डर गया कि दीदी मम्मी को न बता दे लेकिन दीदी मम्मी को भी नहीं बोली।

मैंने रात में अपना लंड सहलाते हुए सोच रहा था कि जब मैं दीदी की गांड पर लंड रगड़ रहा था तब तो दीदी को मजा आ रहा था तो उन्हें अचानक क्या हो गया। बिस्तर पर लेटे हुए मैं अपनी मुट्ठी में मोटा 9 इंच का लंड पकड़कर जोर-जोर से ऊपर-नीचे कर रहा था। हर स्ट्रोक के साथ दीदी की नरम गांड और चूत की याद आ रही थी। लंड का सिरा चिपचिपा पानी से भरा हुआ था जो मेरी उंगलियों को गीला कर रहा था। मेरी सांसें तेज हो गई थीं और शरीर पसीने से तर हो रहा था। मैं बार-बार कल की घटना को याद करके लंड को और तेज सहलाता जा रहा था।

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अगले दिन दीदी मॉर्निंग में ही बालकनी में खड़ी थी। सुबह की हल्की धूप उनके चेहरे पर पड़ रही थी। मैं नीचे से देख रहा था और दीदी भी मुझे देख रही थी लेकिन मैं ऊपर बालकनी में नहीं गया और कुछ देर बाद स्कूल चला गया। फिर रात में 10 बजे मैं और मेरी मम्मी सो चुके थे। मम्मी की सांसें गहरी और नियमित थीं। मैं सोने का नाटक कर रहा था। मैंने देखा कि मुझे देखकर दीदी कुछ देर में बालकनी में आकर खड़ी होकर मुझे बहुत प्यार से देख रही थी। उनकी आंखों में नरमी और इच्छा झलक रही थी।

मैं समझ गया दीदी को लंड से मजा लेने का मन कर रहा है। मेरा अपना लंड पैंट के अंदर ही फड़कने लगा। मैं भी अपना अंडरवियर उतार कर ऊपर बालकनी में गया। हवा ठंडी थी लेकिन मेरा शरीर गर्म हो रहा था। मैं दीदी को देख कर हैरान हो गया क्योंकि थोड़ी देर पहले दीदी सलवार और कमीज पहनी थी लेकिन अब सलवार के बदले नीचे स्कर्ट पहनी हुई थी। स्कर्ट उनके घुटनों तक पहुंच रही थी और हवा के झोंके से हल्के से उड़ रही थी। घर में सिर्फ मम्मी थी वो भी सो रही थी।

हम दोनों अकेले थे। मैं पीछे खड़ा था पर उनके पास नहीं जा रहा था। बालकनी का अंधेरा हमें छुपा रहा था। मैं जानता था कि दीदी मेरी वजह से ही बालकनी में स्कर्ट पहन कर खड़ी है लेकिन कल दीदी ने मुझे मना किया था इसलिए मैं वहां नहीं जा रहा था। लेकिन अचानक दीदी पीछे मुड़ी और बोली कि यहां आ और देख बाहर कितना अच्छा मौसम है। उनकी आवाज में मिठास थी।

मैं इसी बात का इंतजार कर रहा था कि दीदी मुझे खुद आगे से बुलाए। बालकनी में अंधेरा था इसलिए मैंने अपना लंड उनके स्कर्ट के ऊपर से उनकी चूत पर रख दिया। लंड का गर्म सिरा स्कर्ट के पतले कपड़े के ऊपर से उनकी चूत की गर्मी महसूस कर रहा था। वो कुछ नहीं बोली और मुझसे बातें करने लगी। उनकी आवाज सामान्य थी लेकिन शरीर थोड़ा सा कांप रहा था। मैं जानता था कि दीदी को लंड चाहिए। मैंने बिना देरी किए अपना तौलिया उतार कर दीदी का स्कर्ट ऊपर करके अपना लंड घुसा दिया। स्कर्ट का कपड़ा उनकी जांघों तक चढ़ गया। मैं अचानक चौंक गया। मेरा लंड एकदम सीधा उनकी चूत के होल के ऊपर आ गया।

मैंने दीदी की गांड पर हाथ डाला और देखा तो दीदी ने पेंटी नहीं पहनी थी। मेरी उंगलियां उनकी नंगी और गर्म गांड की नरम त्वचा पर फिसल रही थीं। मैं समझ गया दीदी आज चुदना चाहती है। उनकी चूत पहले से ही थोड़ी गीली थी। मैं अपने लंड को दीदी की चूत पर रगड़ने लगा। लंड का सिरा उनकी चूत की फांक पर ऊपर-नीचे घिस रहा था। दीदी झुक कर खड़ी थी। उनकी कमर थोड़ी आगे झुकी हुई थी जिससे चूत और खुल गई थी। मैंने अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और दीदी की चूत में अपना लंड घुसाने लगा। थूक की नमी से लंड चिकना हो गया। मेरा आधा लंड दीदी की चूत में घुस गया। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं और गर्मी पूरे लंड में फैल रही थी।

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दीदी मेरा लंड पकड़ कर बोली भाई अपनी बड़ी बहन को आराम से चोदना। उनकी उंगलियां मेरे लंड के आधार पर कस गई थीं। मैं पहली बार चुदवा रही हूं। मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरी चूत को मेरा भाई ही चोदेगा। और वो मेरे लंड को अपनी चूत में से निकाल कर चूसने लगी। दीदी ने घुटनों के बल बैठकर मेरा लंड मुंह में ले लिया। उनकी गर्म और नम जुबान लंड के सिरे को चाट रही थी। उन्होंने पूरी लंबाई मुंह में लेने की कोशिश की और गला थोड़ा सा हिला। मेरे पूरे शरीर में करंट जैसा लग गया। मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरी दीदी मेरा लंड भी चूसेगी। उनकी होंठ मेरे लंड को कसकर चूस रहे थे और हर सक्शन के साथ लंड और सख्त होता जा रहा था।

फिर 15 मिनट के बाद वो बोली मेरे भाई मम्मी सो रही है चलो मैं तुम्हारे कमरे में चलती हूं। आज मैं अपने पूरे शरीर का मजा तुमको देना चाहती हूं। मैं और दीदी दोनों कमरे में जाकर बेड पर सो गए। दीदी नंगी होकर मुझे भी नंगा करने लगी।

और बोली तुम मुझसे बहुत छोटे हो फिर भी मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहती हूं क्योंकि तुम मुझे चोदना चाहते हो और मैं तुम्हारी दीदी हूं कोई और नहीं जो तुम्हें तड़पता छोड़ दूं। दीदी की आवाज थोड़ी कांप रही थी लेकिन उसमें गहरी इच्छा और प्यार भरा हुआ था। उनकी आंखें मेरी आंखों में गहराई से देख रही थीं और उनके गालों पर हल्की लाली छा गई थी। जब तुमने पहली बार बालकनी में मेरी गांड पर अपना लंड रख दिया था हम उसी वक्त हम दोनों भाई बहन नहीं रहे लेकिन तुम किसी से भी हम दोनों के रिश्ते के बारे में कभी नहीं बताओगे। उनकी सांसें तेज हो गई थीं और उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां हर सांस के साथ ऊपर-नीचे हिल रही थीं।

मैं दीदी के होंठ पर किस करते हुए बोला दीदी आप जैसी दीदी सबको मिले। मैंने अपने होंठ उनके नरम और गर्म होंठों पर रख दिए। पहले तो हल्का किस किया लेकिन फिर मेरी जीभ उनके होंठों के बीच घुस गई। दीदी ने भी अपनी जीभ मेरी जीभ से लिपटा दी और हम दोनों के मुंह से हल्की-हल्की चूसने की आवाजें आने लगीं। उनके मुंह का मीठा स्वाद और गर्म सांस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। उसके बाद मैंने दीदी की चूची को दबाने लगा और चूसने लगा। मेरी दोनों हथेलियां उनकी भारी और नरम चूचियों को पूरी तरह से भर ले रही थीं। मैंने उन्हें जोर-जोर से दबाया जिससे उनकी चूचियां मेरी उंगलियों के बीच से फिसल रही थीं। फिर मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दीदी की सांसें और तेज हो गईं और उनके मुंह से हल्की-हल्की आहें निकलने लगीं।

फिर दीदी लेट गई और बोली आज मेरी चूत को अपने लंड से पूरी तरह से खोल डालो। मैं चाहती हूं कि मेरी शादी से पहले मेरा भाई मेरी चूत का मजा ले ले। दीदी ने अपने दोनों पैर थोड़े फैला दिए और अपनी कमर को थोड़ा ऊपर उठा लिया। उनकी चूत पूरी तरह से खुली हुई थी और पहले से ही चिपचिपे पानी से भीग रही थी। मैं दीदी की जांघ उठा कर अपना लंड चूत में डाल कर चोदने लगा। मैंने उनकी एक जांघ को अपने कंधे पर रख लिया और अपना मोटा 9 इंच का लंड उनकी चूत की फांक पर रखा। लंड का सिरा उनकी गर्म और गीली चूत की दरार पर दबाया। फिर मैंने धीरे-धीरे कमर आगे की। लंड का सिरा उनके चूत के होंठों को अलग करते हुए अंदर घुसने लगा।

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दीदी की चूत बहुत टाइट थी। जैसे ही लंड का सिरा अंदर घुसा दीदी के शरीर में एक झटका सा लगा। उनकी आंखें बंद हो गईं और उन्होंने अपनी निचली होंठ को काट लिया। मैंने और थोड़ा जोर लगाया तो अचानक मेरे लंड को एक पतली झिल्ली जैसी बाधा महसूस हुई। दीदी की चूत की सील अब मेरे लंड के सामने थी। मैंने एक गहरी सांस ली और एक तेज धक्का मारा। पॉप की हल्की सी आवाज के साथ दीदी की सील फट गई। तुरंत गर्म खून की कुछ बूंदें मेरे लंड के चारों ओर निकल आईं और दीदी की चूत से बाहर रिसने लगीं। दीदी जोर से चीख पड़ीं। उनकी आंखों में आंसू आ गए और उन्होंने मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए। उनके शरीर में तेज दर्द की लहर दौड़ गई।

दीदी की सांसें बहुत तेज और बेतरतीब हो गई थीं। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को बहुत जोर से जकड़ रही थीं। मैं रुक गया और उनकी चूत को थोड़ा सहलाने लगा ताकि दर्द कम हो। कुछ सेकंड बाद दीदी की चीख धीरे-धीरे आहों में बदल गई। उनके चेहरे पर दर्द की जगह अब मस्ती की लाली छा गई। उन्होंने अपनी कमर हल्के से हिलाई और बोली भाई अब धीरे-धीरे आगे बढ़ाओ। मैंने फिर से कमर हिलाना शुरू किया। अब मेरा पूरा लंड धीरे-धीरे उनकी चूत में घुस रहा था। हर इंच के साथ उनकी चूत की गर्मी और नमी मेरे लंड को लपेट रही थी।

दीदी भी मस्ती से धक्के पर धक्के मार रही थी। उनकी कमर हर बार मेरे धक्के के साथ ऊपर उठ रही थी। मैं दीदी की चूची जोर जोर से दबा दबा कर चोदने लगा। हर धक्के के साथ मेरी हथेलियां उनकी चूचियों को कसकर दबा रही थीं और निप्पल मेरी उंगलियों के बीच सख्त होकर खड़े हो गए थे। उनकी चूत अब पूरी तरह से खुल चुकी थी और खून मिला चिपचिपा पानी मेरे लंड और उनकी जांघों पर फैल रहा था। और वो बोली मेरे भाई अपनी बहन की चूत में अपना वीर्य भी डाल देना। मैं तुम्हारे वीर्य को अपनी चूत में महसूस करना चाहती हूं। दीदी की आवाज में बेसब्री थी। मैंने दीदी को एक घंटे तक चोदा और वीर्य चूत में ही डाल दिया।

दीदी बोली मेरे भाई मैं प्रेग्नेंट तो नहीं हो जाऊंगी ना। उनकी आवाज में हल्की चिंता थी लेकिन उनके चेहरे पर अभी भी संतोष और मस्ती की लाली छाई हुई थी। उनकी चूत अभी भी मेरे ताजा वीर्य से भरी हुई थी और कुछ गर्म बूंदें उनकी जांघों पर रिसकर चादर को गीला कर रही थीं। उनकी सांसें अभी भी तेज थीं और उनकी बड़ी चूचियां हर सांस के साथ हल्के से हिल रही थीं। मैंने कहा नहीं। फिर वो कपड़े पहन कर दूसरे रूम में जा कर मम्मी के बगल में जा कर सो गई।

और दो घंटे बाद फिर मेरा लंड फिर दीदी को चोदना चाहता था। मेरे शरीर में फिर से आग सी दौड़ गई थी। मेरा 9 इंच का लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था और उसके मोटे सिरे से चिपचिपा पारदर्शी पानी लगातार रिस रहा था। मैं कंट्रोल नहीं कर पाया। मैं चुपचाप उठा और दूसरे रूम में गया। मम्मी गहरी नींद में सो रही थीं। मैं दीदी के बगल में लेट गया। दीदी की सांसें धीमी और गहरी थीं। मैंने धीरे से उनका स्कर्ट ऊपर उठाया। उनकी नंगी गोरी गांड मेरे हाथ में आ गई। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनकी गांड की गर्म दरार में रगड़ने लगा। उनकी चूत पहले से ही थोड़ी गीली थी। मैंने लंड का सिरा उनकी चूत की फांक पर रखा और धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। उनकी चूत की गर्म और नरम दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं। दीदी धीरे से कराह उठीं और उनकी कमर हल्के से ऊपर उठ गई।

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मैंने अपना लंड और गहरा घुसाया। दीदी की चूत मेरे पूरे लंड को लपेट रही थी। मैंने धीरे-धीरे तेज धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ उनकी चूत से चिकचिक की आवाज आने लगी। दीदी भी उठ गई और चुदवाने लगी। उनकी आंखें आधी खुली थीं और उन्होंने अपनी कमर को मेरे धक्कों के साथ जोर से हिलाना शुरू कर दिया। उनकी चूत अब पूरी तरह खुल चुकी थी और मेरे लंड पर उनका गर्म पानी लगातार बह रहा था। मैंने उनकी जांघ को पकड़कर और जोर से चोदना शुरू किया। दीदी के मुंह से हल्की-हल्की आहें और कराह निकल रही थीं। उनकी चूचियां हर धक्के के साथ जोर-जोर से हिल रही थीं। मैंने उनकी एक चूची पकड़कर जोर से दबाई और निप्पल को उंगलियों से मसलने लगा।

उस रात मैं दीदी को सुबह तक चोदता रहा। मैंने उन्हें कई बार अलग-अलग तरीके से चोदा। कभी वो मेरे ऊपर सवार होकर अपनी चूत में लंड ले रही थीं तो कभी मैं उन्हें घोड़ी बनाकर उनकी गांड पर हाथ मारते हुए जोर-जोर से पीछे से चोद रहा था। हर बार जब मैं उनके अंदर वीर्य छोड़ता तो दीदी की चूत मेरे लंड को और जोर से जकड़ लेती। दूसरे दिन दीदी ठीक से चल भी नहीं पा रही थी और हम दोनों रोज ऐसे ही सेक्स करते रहे। फिर एक दिन जो हुआ मैंने कभी नहीं सोचा था। एक दिन मैं दूसरे रूम में लगभग 12 बजे गया। रोज की तरह मैंने अपना तौलिया उतारकर मैं दीदी की चादर में घुस गया।

कमरे के अंदर बहुत अंधेरा था। मैं धीरे धीरे स्कर्ट ऊपर करने लगा लेकिन स्कर्ट बहुत सॉफ्ट लग रही थी। मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया और उठा कर गांड पर लंड रगड़ने लगा। दीदी की गांड बहुत बड़ी लग रही थी। मैं गांड दबाने लगा। मुझे मजा आ रहा था। उनकी गांड की नरम और मोटी चूतड़ मेरे हाथों में फिसल रहे थे। मैंने अपना लंड उनकी गांड की दरार में और जोर से दबाया। फिर मैंने अपना लंड दीदी की चूत में डाल दिया। चूत बहुत टाइट लग रही थी। लंड का सिरा उनकी चूत की फांक को अलग करते हुए अंदर घुसा। उनकी चूत की गर्मी मेरे पूरे लंड को लपेट रही थी। मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डाल दिया। चूत की दीवारें मेरे लंड को बहुत जोर से दबा रही थीं।

फिर कुछ देर बाद दीदी भी जाग कर धक्का मारने लगी। उनकी कमर मेरे हर धक्के के साथ ऊपर उठ रही थी। मैं ऊपर जाकर टांग ऊपर करके जोर जोर से चोदने लगा। हर धक्के के साथ उनकी चूत से चिकचिक की तेज आवाज निकल रही थी। मेरे लंड पर उनका गर्म और चिपचिपा पानी लगातार बह रहा था। तभी मैं डर गया। मेरी जांघ पर किसी का हाथ आया और मुझे वो बार बार टच हो रहा था। तभी पीछे से मेरी दीदी मेरे कान में बोली भाई ये क्या कर रहे हो। मैं तो यहां हूं तुम मम्मी को चोद रहे हो। दीदी ये बोलकर सो गई।

मेरा लंड मम्मी की चूत में था और मम्मी अपनी गांड उठा उठा कर चूत चुदवा रही थी। मेरे मोटे 9 इंच के लंड का पूरा सिरा उनकी गर्म और भीगी चूत की गहराई में धंसा हुआ था। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को बहुत जोर से जकड़ रही थीं जैसे कोई गर्म और नरम मुट्ठी उसे दबा रही हो। मम्मी की गांड हर बार ऊपर उठती तो उनकी चूत मेरे लंड को और गहराई तक निगल लेती और जब नीचे गिरती तो उनकी चूत से चिकचिक की तेज आवाज निकलती। उनकी चूत से निकलता गर्म पानी मेरे लंड और अंडकोषों पर बह रहा था। अब मैं लंड भी बाहर नहीं निकाल सकता था। मेरा पूरा शरीर झनझना रहा था। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

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फिर थोड़ी देर बाद मम्मी ने मेरी कमर को पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया और बोली मेरे बेटे तूने तो आज मुझे खुश कर दिया। तेरे पापा ने तो मुझे 2 साल से नहीं चोदा है। आज तूने अपनी माँ की चूत को खुश कर दिया। तुम कब से मुझे चोदना चाहते थे। मम्मी की आवाज में बेसब्री और खुशी दोनों थी। उनकी उंगलियां मेरी कमर पर कस गई थीं। उन्होंने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं और अपनी गांड को जोर से ऊपर उठाकर मेरे लंड को पूरी तरह निचोड़ लिया। उनकी चूत की गर्मी मेरे पूरे लंड में फैल रही थी।

मैं समझ नहीं पा रहा था कि मैं क्या बोलूं। मैं यह नहीं बोल सकता था कि मैं रीना दीदी को चोदने आया था। मैं समझ नहीं पा रहा था। मेरे मुंह से सिर्फ हल्की सांसें निकल रही थीं। मम्मी ने फिर पूछा और अपना ब्लाउज खोलकर बोली बचपन में मेरी चूची पीता था। आज भी मेरी चूची को पीकर मस्त कर दे और जिस चूत में से तुम इस दुनिया में आए हो उसे भी मस्त कर दो। तेरा लंड तो तेरे पापा से भी बड़ा है। तू रोज मेरे साथ इसी रूम में सोया कर। मम्मी ने अपना ब्लाउज पूरी तरह खोल दिया। उनकी बड़ी-बड़ी भारी चूचियां बाहर आ गईं। निप्पल सख्त और गुलाबी होकर खड़े थे। उन्होंने मेरी गर्दन पकड़कर मेरे मुंह को अपनी चूची पर लगा दिया।

मैंने कहा फिर दीदी। मम्मी बोली वो भी यही सो जाएगी। तू मुझे खुश कर दे फिर मैं तुझे तेरी बहन की भी चूत चोदने का मौका बताऊंगी। मैं सुन कर खुश हो गया। मैंने मम्मी को पूरी तरह से नंगा कर दिया और खुद भी पूरा नंगा हो गया। अब मुझे घर में किसी से भी डर नहीं था। मम्मी की नंगी देह मेरे सामने थी। उनकी मोटी जांघें फैली हुई थीं। उनकी चूत से मेरे लंड का पानी और उनका अपना रस मिलकर चमक रहा था। मैं मम्मी को जोर जोर से चोदने लगा और दो घंटे तक चोदता रहा और वीर्य मम्मी की चूत में ही डाल दिया।

मैंने पहले उन्हें घोड़ी बनाकर चोदा। उनकी मोटी गांड मेरे हाथों में थी। हर जोरदार धक्के के साथ उनकी गांड हिल रही थी और चूत से चिकचिक की तेज आवाजें भर रही थीं। फिर मम्मी ऊपर सवार हो गईं। उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत में पूरा उतार लिया और तेजी से ऊपर-नीचे कूदने लगीं। उनकी चूचियां जोर-जोर से उछल रही थीं। मैंने उन्हें पकड़कर जोर से दबाया। मम्मी की सांसें फूल गई थीं। उनके मुंह से लगातार कराह और गंदी बातें निकल रही थीं। “हां बेटा… जोर से चोद अपनी माँ की चूत को… 2 साल से सूखी थी ये… आज भर दे इसे…” मैंने उन्हें कई बार पोजीशन बदल-बदलकर चोदा। कभी उनकी टांगें अपने कंधे पर रखकर गहरा धक्का मारता तो कभी उन्हें किनारे पर लिटाकर खड़े होकर चोदता। हर बार जब मेरा लंड उनकी चूत की सबसे गहरी जगह को छूता तो मम्मी जोर से चीखतीं और उनकी चूत मेरे लंड को और जोर से दबाती। दो घंटे बाद मेरे अंडकोष सिकुड़ गए। मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और आखिरकार गर्म-गर्म वीर्य की मोटी धार मम्मी की चूत के अंदर छोड़ दी। वीर्य इतना ज्यादा था कि उनकी चूत से बाहर निकलकर उनकी जांघों पर बहने लगा।

मम्मी खुश हो गई और बोली मैं तेरे वीर्य से प्रेग्नेंट होना चाहती हूं और तुम्हें भाई और तुम्हारा बेटा देना चाहती हूं। मैंने मम्मी से कहा मैं आपकी चूत से अपना बेटा चाहता हूं। मम्मी खुश होकर बोली मेरे बेटे तूने मुझे खुश कर दिया। अब मैं सो रही हूं। अब से तू हर रोज रात में इसी रूम में सोना और तुम्हारा मुझे या तेरी बहन को चोदने का मन करे तो बिना डर के चोदना। फिर मैंने एक घंटे बाद दीदी को चोदा और सो गया। दूसरे दिन दीदी मुझसे नाराज थी। मैंने जब दीदी से पूछा तो बोली तुम रात में मुझे छोड़कर मम्मी को क्यों चोद रहे थे।

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मैंने कहा कि तुमने अपनी जगह पर मम्मी को क्यों सोने दिया। मेरी आवाज में थोड़ी नाराजगी थी लेकिन मेरे शरीर में अभी भी कल रात की गर्मी महसूस हो रही थी। दीदी बोली मम्मी पहले से ही वहां सो रही थी। उनकी आवाज शांत थी लेकिन उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी जैसे वे जानती हों कि रात क्या हुआ था। मैंने कहा कि मैंने तुमको समझ कर मम्मी को चोदा लेकिन जब मम्मी ने पूछा तब मैं क्या कहता इसलिए मुझे मम्मी को चोदना पड़ा। मैंने उन्हें पूरी घटना विस्तार से बताई कि कैसे अंधेरे में मैं दीदी को चोदने गया था लेकिन गलती से मम्मी की चूत में मेरा लंड चला गया और फिर मम्मी ने खुद मुझे अपनी कमर से पकड़ लिया। दीदी मेरी बात सुनकर कुछ पल चुप रही। उनकी सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं और उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ लिया। फिर दीदी मान गई।

फिर क्या था मैं हर रोज रात में मम्मी और दीदी के साथ नंगा होकर सोता और जिसको मन करता उसको चोदता। हर रात तीनों पूरी तरह नंगे होकर एक ही बेड पर लेट जाते। कमरे में सिर्फ हल्की रोशनी होती तो मैं बीच में लेट जाता। दीदी और मम्मी दोनों मेरे दोनों तरफ लेट जातीं। कभी मैं पहले दीदी को चोदता। मैं उनकी जांघें फैलाकर उनके ऊपर चढ़ जाता। मेरा मोटा 9 इंच का लंड उनकी चूत की फांक पर रखता और धीरे-धीरे पूरा घुसा देता। दीदी की चूत अभी भी टाइट थी। हर धक्के के साथ उनकी चूत से चिकचिक की तेज आवाज निकलती और उनका गर्म पानी मेरे लंड पर बहता। दीदी अपनी कमर उठाकर मेरे साथ धक्के मारतीं। उनकी बड़ी चूचियां जोर-जोर से हिलतीं। मैं उनकी चूचियों को जोर से दबाता और निप्पल चूसता। दीदी के मुंह से लगातार आहें और कराह निकलतीं। फिर मैं मम्मी की तरफ मुड़ जाता। मम्मी घोड़ी बन जातीं। उनकी मोटी गांड मेरे हाथों में आ जाती। मैं उनकी गांड पकड़कर जोर-जोर से पीछे से चोदता। उनकी चूत मेरे लंड को पूरी तरह निगल लेती।

मम्मी जोर से चीखतीं “हां बेटा… और जोर से… माँ की चूत को फाड़ दो…” उनकी चूत से निकलता रस मेरी जांघों तक बह जाता। कभी-कभी मैं दोनों को एक साथ संतुष्ट करता। दीदी को घोड़ी बनाकर चोदता और मम्मी को उनके सामने लिटाकर उनकी चूत में उंगलियां डालकर हिलाता। दोनों की चूतें एक साथ बहतीं। उनका पसीना, चूत का रस और मेरा वीर्य तीनों के शरीर पर चिपचिपा हो जाता। कई रातें मैं दीदी की चूत में वीर्य डालकर तुरंत मम्मी की चूत में घुस जाता। दोनों मुझे अपनी चूतें मांगती रहतीं। मैं उन्हें पूरी रात भरता रहता। कमरे में सेक्स की गंध और उनकी आहों की आवाजें भर जातीं। हम तीनों का शरीर एक दूसरे से चिपका रहता। कभी दीदी मेरे लंड को चूसती तो मम्मी मेरी चूचियां चूसती। कभी मम्मी मुझे सवार होकर चोदती तो दीदी उनके पीछे से उनकी गांड सहलाती। हर रात अलग-अलग पोजीशन में हम तीनों का मजा चलता रहता।

फिर 9 महीने बाद मम्मी को एक बेटी हुई। वो मेरी बहन भी थी और मेरी बेटी भी। तो दोस्तों कैसी लगी मेरी स्टोरी। इसे शेयर जरूर करें।

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