Maa ki chudai sex story, Sardar ji ka lund sex story, Punjabi kamuk aurat sex story: आज मैं आपको अपनी माँ और सरदार जी की पूरी कहानी बताने जा रही हूँ, जिसमें हर छोटी-बड़ी बात शामिल है, वो गर्माहट, वो छुअन और वो आवाजें जो मुझे आज भी याद हैं। हम लोग पहले जालंधर में ही रहते थे, वहाँ का माहौल इतना जीवंत था, बाजारों की रौनक और घर की वो पुरानी दीवारें। इसी सरदार जी के चक्कर में मेरे पापा ने माँ को छोड़ दिया, उसके बाद हम लोग सोनीपत आ गए, जहाँ नई शुरुआत की उम्मीद थी लेकिन पुरानी यादें पीछा नहीं छोड़तीं। क्योंकि माँ और सरदार जी के बीच सेक्स संबंध थे और पापा को ये अच्छा नहीं लगा, वो हर रात की लड़ाई में वो दर्द साफ झलकता था।
उन्होंने पहले माँ को कई बार मना किया, हर बार आवाज ऊँची होती, आँखों में गुस्सा और निराशा, पर जब वो नहीं मानी तो माँ को छोड़ दिया, वो पल जब घर टूटा, वो सन्नाटा आज भी कानों में गूँजता है। मेरी माँ घर की एकलौती बेटी थी, तो नानी के यहाँ सोनीपत ही आ गए, नानी का घर छोटा सा लेकिन प्यार से भरा, जहाँ हवा में फूलों की महक आती थी। मैं उस समय नौ साल की थी, इसलिए ज्यादा पता नहीं था, सिर्फ इतना कि दुनिया बदल गई है। बस इतना पता था कि रोज लड़ाई होती थी और पापा मम्मी को डांट लगाते, मम्मी लड़ाई करती, वो चीखें, वो रोना, सब कुछ धुंधला सा याद है।
मैं और मेरी माँ दोनों सोनीपत आ गए और आज से चार साल पहले ही मेरी नानी का देहांत हो गया, वो अकेलापन जो उसके बाद छाया, घर सूना हो गया, तो मैं और मम्मी अब यहीं बस गए, इस छोटे शहर की गलियों में अपनी जिंदगी बुनते हुए। मम्मी बीच में सरदार जी से बात करना बंद कर दी थी, शायद पछतावा या डर से, पर इधर एक साल से फिर से वो सरदार जी से बात करने लगी, वो छुपी-छुपी मुस्कानें जो उनके चेहरे पर आतीं।
वो रात को बाथरूम में मोबाइल लेकर जाती और दरवाजा बंद करके बात करती, पानी की आवाज के बीच उनकी हँसी की झलक सुनाई देती, वो गर्म साँसें जो दीवारों से टकरातीं। एक दिन मैं कान लगाकर सुनी कि वो क्या-क्या बात करती है, तो पता चला वो व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल करके अपने जिस्म को दिखाती है और उधर सरदार जी मूठ मारते हैं माँ को देख-देखकर, वो आवाजें जो लीक हो जातीं, वो कामुक सिसकारियाँ।
क्योंकि एक बार आके मोबाइल का स्पीकर ऑन रह गया, तो सरदार जी कह रहे थे कि बस अब गिर जाएगा, थोड़ा और अपनी चूत दिखा और अपनी चूचियां दबाती रह, उनकी आवाज में वो हड़बड़ी और लालसा साफ थी। मैं समझ गई क्या हो रहा है अंदर, वो गर्मी जो हवा में फैल गई थी। मैं कुछ नहीं बोली, मुझे लगा कि माँ की अपनी जिंदगी है, जैसे जीएं, मुझे क्या, मुझे छूट मिली हुई है, जो करो अपनी मर्जी, तो मैं खुद ही एक अंकल के प्रेम में हूँ, वो मीठी-मीठी बातें जो दिल को छूती हैं।
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
दोस्तों अब मैं सीधे कहानी पर आती हूँ, वो रात जो मेरी जिंदगी बदल गई। मेरी माँ का नाम मनरीत है, वो नाम जो प्यार से भरा है। मेरा नाम अमनजोत है, जो अब बड़ी हो गई हूँ। मैं 18 की हो गई हूँ और मेरी माँ अभी 36 साल की है, लेकिन लगतीं हैं जैसे 20 की, वो चमकती त्वचा और वो आकर्षण। मेरी माँ हॉट और सेक्सी है, उनकी वो मुस्कान जो किसी को भी दीवाना बना दे। मेरे पापा ज्यादा दमदार इंसान नहीं थे, वो कद में काफी छोटे और कमजोर थे, वो माँ को ना तो सेक्स में खुश कर पाते थे ना कमाई में, वो कमी जो माँ के चेहरे पर साफ दिखती थी।
इसलिए माँ को सरदार जी पर दिल आ गया था, क्योंकि वो मेरी माँ को पेलकर रखते थे, वो ताकत और वो जुनून जो पापा में नहीं था। माँ खुश हो जाती थी जब सरदार जी चुदाई करते थे, उनकी आँखों में वो चमक लौट आती। तो कल की बात है, सरदार जी दिल्ली आ रहे थे, वो उत्साह जो माँ के व्यवहार में दिखा। तो मेरा घर सोनीपत में ही है, करीब ही। तो माँ से बात हो गई। और ये बात मेरी माँ ने मुझे नहीं बताई कि सुखविंदर अंकल आने वाले हैं, वो राज जो वो छुपातीं।
वो जल्दी-जल्दी खाना खाकर मुझे भी बोली आज सो जा जल्दी, उनकी आवाज में वो जल्दबाजी, और वो खुद भी सो गई जल्दी, लेकिन उनकी साँसें तेज थीं। पर मैं जल्दी कहाँ सोने वाली, मेरा मन तो उछल रहा था। मैं रजाई में मुँह ढंककर अपने मोबाइल पर हॉट सेक्सी कहानियाँ पढ़ने लगी, वो शब्द जो मेरे शरीर में आग लगा देते। मम्मी को लगा मैं सो गई, लेकिन मैं जाग रही थी।
तभी मम्मी के मोबाइल पर एक ही बेल बजी कि मम्मी उठा ली, वो कंपन जो हवा में फैला। मम्मी पूछी कित्थे पहुंचे, उनकी आवाज धीमी लेकिन उत्साहित। तो उधर से बोले थल्ले सी। मैं समझ गई कोई है, दिल की धड़कन तेज हो गई। मम्मी बोली तुस्सी चुपचाप ऊपर आ जाओ, वो सावधानी जो उन्होंने बरती। मेरी धड़कन तेज हो गई कि आखिर रात को बारह बजे कौन आया, वो रहस्य जो मुझे खींच रहा था।
मम्मी धीरे से दरवाजा खोली, हवा की ठंडी लहर अंदर आई, मैं आधी बंद आँखों से देखी तो हैरान हो गई। सरदार जी थे, जो मम्मी को चुदाई करते थे, उनकी वो लंबी दाढ़ी और मजबूत कद। मम्मी अंदर बुलाई, दरवाजा लगाई और अंदर वाले कमरे में ले गई, उनके कदमों की हल्की आवाज। दरवाजा अंदर से बंद नहीं की, उन्होंने बस दरवाजे को भेड़ दिया, वो छोटी सी दरार जो रह गई। मैं चुपचाप रही, साँस रोके।
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
करीब आधे घंटे के बाद मेरी मम्मी आह आह आह उह उह उह उह ऑफ ऑफ्फो उफ़ आह आह आह करने लगी, वो आवाजें जो कमरे से निकलकर मेरे कानों तक पहुँचीं, गर्म और कामुक। मैं भागकर दरवाजे के पास गई, दिल जोर से धड़क रहा था। तो हैरान हो गई। मेरी माँ के सारे कपड़े जमीन पर थे, सरदार जी भी नंगे थे, उनकी बॉडी की वो गर्माहट हवा में महसूस हो रही थी। और माँ पलंग पर थी, सरदार जी नीचे थे और दोनों माँ का पैर अपने कंधे पर रखे थे और जोर-जोर से पेल रहे थे, वो धक्कों की आवाज जो थप थप गूँज रही थी।
मैं भी मम्मी के जिस्म को पहली बार देखी, वो नग्नता जो इतनी आकर्षक थी। गोल-गोल चौड़ी गांड, गोल-गोल बड़ी-बड़ी टाइट चूचियाँ, गोल-गोल जांघें, उनकी त्वचा की वो चिकनाई और गंध जो कमरे में फैली हुई थी। ओह्ह क्या बताऊँ दोस्तों, मैं खुद ही हैरान थी इतनी अच्छी बॉडी है माँ की, वो कर्व्स जो किसी को भी मोहित कर दें। और सरदार जी का मोटा करीब 9 इंच का लंड माँ की चूत में अंदर-बाहर कर रहे थे, वो चमक और वो गीलापन जो दिख रहा था।
धीरे-धीरे सरदार जी ने माँ की कमर पकड़ी और अपना लंड और गहराई से धकेलना शुरू किया, माँ की आँखें बंद हो गईं और वो कसकर सरदार जी के कंधों को पकड़ लीं, आह्ह.. सरदार जी.. धीरे करो ना.. इतना जोर से मत पेलो.. पर सरदार जी मुस्कुराते हुए बोले, तेरी चूत इतनी टाइट है मनरीत, मैं रुक ही नहीं पाता, तू तो मेरी जान है, ये लंड सिर्फ तेरे लिए है, उनकी आवाज में वो जुनून। माँ की साँसें तेज हो गईं, वो अपनी गांड ऊपर उठाकर लंड को और अंदर लेने की कोशिश कर रही थीं, उह्ह.. आह्ह.. हाँ जी.. और जोर से.. मुझे तुम्हारा ये मोटा लंड बहुत पसंद है.. पापा कभी ऐसा नहीं कर पाते थे, वो तुलना जो उनके शब्दों में थी।
इससे पहले सरदार जी ने माँ को बाहों में लिया और गहराई से किस करना शुरू किया, उनके होंठ माँ के होंठों से चिपक गए, जीभें आपस में लिपट रही थीं, वो गीली चुम्बन की आवाजें, चुप चुप, और हाथ माँ की पीठ पर फिसलते हुए, वो छुअन जो माँ को सिहरा देती। फिर सरदार जी ने माँ की गर्दन पर किस किया, चूमा, चाटा, माँ की सिसकारी निकली, आह्ह.. उह्ह.. सरदार जी.. वहाँ मत.. टिक्लिश लगता है.. लेकिन सरदार जी रुके नहीं, उनके हाथ माँ की चूचियों पर गए, धीरे-धीरे दबाने लगे, निप्पल्स को उंगलियों से सहलाते हुए, माँ की बॉडी में कंपन हुआ, उनकी साँसें और तेज, वो गर्माहट जो उनके शरीर से निकल रही थी। सरदार जी ने माँ की एक चूची को मुँह में लिया, चूसना शुरू किया, जीभ से घुमाते हुए, माँ ने सरदार जी के सिर को दबाया, उह्ह.. हाँ.. चूसो इन्हें.. कितना अच्छा लग रहा है.. उनकी चूत से रस टपकने लगा, हवा में वो कामुक गंध फैल गई।
सरदार जी ने अब माँ की चूचियों को जोर से दबोचना शुरू किया, उनके निप्पल्स को उंगलियों से मसलते हुए, माँ चीख पड़ी, आऊ.. ऊउइ.. सरदार जी.. मत दबाओ इतना.. दर्द हो रहा है.. पर साथ ही उनकी चूत और गीली हो गई, सरदार जी का लंड फिसलते हुए अंदर-बाहर हो रहा था, धप.. धप.. धप की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं, वो पसीने की गंध मिश्रित होकर और कामुक बना रही थी। सरदार जी ने माँ की जांघों को और चौड़ा किया, अपना लंड बाहर निकाला और फिर से जोरदार धक्का मारा, माँ की पूरी बॉडी हिल गई, इह्ह.. ओह्ह.. हाँ.. ऐसे ही चोदो मुझे.. मैं तुम्हारी हूँ हमेशा, उनकी आँखों में वो समर्पण।
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
फिर सरदार जी ने माँ को घुमाया और अपनी जीभ से माँ की चूत को चाटना शुरू किया, माँ की कमर ऐंठ गई, वो सरदार जी के बालों को पकड़कर दबाने लगीं, आह्ह.. उह्ह.. जीभ अंदर डालो ना.. चाटो मेरी चूत को.. कितना अच्छा लग रहा है, जीभ की वो गर्मी और गीलापन जो माँ को पागल बना रहा था। सरदार जी ने अपनी जीभ को चूत के अंदर-बाहर किया, साथ ही उंगली से क्लिट को रगड़ते हुए, माँ पागल हो गईं, उनकी बॉडी काँपने लगी, ऊऊ.. आऊ.. मैं झड़ने वाली हूँ.. मत रुको.. और जोर से चाटो, उनका रस बहने लगा, सरदार जी ने सब चाट लिया, बोले, तेरा रस कितना मीठा है मनरीत, अब मैं तेरी गांड मारूँगा, उनकी आँखों में वो भूख। फिर सरदार जी ने माँ की जांघों को सहलाया, उंगलियाँ चूत से गांड तक फिसलाईं, थूक लगाकर उंगली अंदर डाली, माँ सिहर उठीं, उइ.. सरदार जी.. धीरे.. वो जगह संवेदनशील है.. लेकिन मजा आने लगा, वो घुमावदार छुअन।
कभी जो माँ की चूचियों को दबोचते तो कभी वो मेरी माँ की गांड में उंगली करते, वो मल्टीटास्किंग जो माँ को और उत्तेजित कर रही थी। मेरी माँ भी पागल हो रही थी, गांड घुमा-घुमाकर लंड को अपनी चूत में ले रही थी और कह रही थी, आपके बिना मर जाऊँगी, मुझे ये लंड हमेशा चाहिए, अपने पति को भी छोड़ दिया इस लंड के चलते, मुझे छोड़कर मत जाना चाहे जमाना कुछ भी करे, आई लव यू, उनके शब्दों में वो भावनाएँ जो गहराई से निकल रही थीं।
और सरदार जी फिर मम्मी को घोड़ी बना दिए और फिर गांड में थूक लगाकर गांड में लंड डालने लगे, वो तैयारी जो दर्द को कम करने के लिए थी। माँ को दर्द होने लगा, तो सरदार जी बोले कि दर्द क्यों हो रहा है, पहले तो आराम से जाता था, उनकी आवाज में चिंता। तो माँ बोली इतने दिन में टाइट हो गया है, दो-चार बार गांड में लंड डालोगे तो फिर से आराम से जाएगा, वो व्यावहारिक बात। और फिर माँ की गांड में उन्होंने पूरा लंड डाल दिया और फिर जोर-जोर से गांड चोदने लगे। सरदार जी ने माँ की कमर पकड़ी और धीरे-धीरे लंड को गांड में सरकाया, माँ ने दांत कस लिए, आह्ह.. उइ.. सरदार जी.. धीरे डालो.. बहुत मोटा है तुम्हारा.. दर्द हो रहा है.. पर सरदार जी ने थोड़ा और थूक लगाया और जोर से धक्का मारा, आधा लंड अंदर चला गया, माँ चीखी, ऊईई.. माँ.. मत करो इतना जोर से.. निकालो इसे, लेकिन सरदार जी ने माँ की पीठ पर हाथ फेरा, शांत किया।
पर सरदार जी रुके नहीं, उन्होंने माँ की चूत में उंगली डालकर रगड़ना शुरू किया ताकि दर्द कम हो, माँ की साँसें तेज हो गईं, उह्ह.. हाँ.. ऐसे ही.. अब थोड़ा अच्छा लग रहा है.. और अंदर डालो, वो मिश्रित भावनाएँ दर्द और मजा की। सरदार जी ने पूरा 9 इंच का लंड गांड में ठूँस दिया, अब जोर-जोर से धक्के मारने लगे, थप.. थप.. थप की आवाजें आ रही थीं, माँ की आँखों से आँसू निकल आए लेकिन साथ ही मजा भी आ रहा था, आह्ह.. ओह्ह.. चोदो मेरी गांड को.. फाड़ दो इसे.. तुम्हारा लंड ही मुझे जिंदा रखता है, उनकी बॉडी का वो कंपन। सरदार जी ने माँ के बाल पकड़े और और तेज धक्के मारे, बोले, तेरी गांड कितनी टाइट है, मैं रोज मारूँगा अब, तू मेरी रंडी है, वो डर्टी टॉक जो और उत्तेजना बढ़ा रही थी। माँ हाँफते हुए बोली, हाँ जी.. मैं तुम्हारी रंडी हूँ.. चोदो मुझे जितना चाहो, उनके शब्दों में वो समर्पण।
दोस्तों मेरी चूत गीली हो गई थी, वो गर्मी जो मेरे शरीर में फैल गई। मैं खुद भी देख-देखकर कामुक हो गई थी, मेरी साँसें तेज। मैं खुद ही अपनी चूचियों को दबाने लगी थी, वो छुअन जो मुझे राहत दे रही थी। उधर मेरी माँ आह आह आह कर रही थी और सरदार जी जोर-जोर से उलटकर पलटकर चोद रहे थे, वो विभिन्न पोजिशन्स जो उन्होंने ट्राई कीं। फिर करीब एक घंटे बाद दोनों शांत हो गए और मैं तुरंत भागकर अपनी रजाई में आ गई, दिल अभी भी धड़क रहा था। दोनों करीब दो घंटे तक बात करते रहे, वो मीठी-मीठी बातें और हँसी। फिर सरदार जी करीब दो बजे रात को निकल गए घर से, बाहर की ठंडी हवा में। दोस्तों माँ को आज मैं बहुत खुश देखी, उनकी आँखों में वो संतुष्टि। पर उन्होंने मुझे चुदाई दिखाकर अच्छा नहीं किया, अब मुझे भी चुदने का मन कर रहा है। मैं खुद ही अब किसी से जरूर चूत मरवाऊँगी, क्या आप चोदेंगे मुझे?
आप यह Family Sex Stories - Incest Sex Story हमारी वेबसाइट फ्री सेक्स कहानी डॉट इन पर पढ़ रहे है।
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए
Haan main chudai karunga teri jawaan choot ki apne mature 35 saal Wale laude se ..jise teri jawaan fuddi ki garmi nikal jayegi