नमस्कार दोस्तों मैं संजय हूं। अभी मैं एक सीनियर डॉक्टर हूं लेकिन यह कहानी थोड़ी पुरानी है। मैं एक प्राइवेट अस्पताल में डॉक्टर हूं। उस समय मेरी उम्र होगी 36 साल। जिस अस्पताल में मैं काम करता हूं वहां मेरे साथ बहुत सारी मलयाली नर्सेस भी काम करती हैं। उनमें से सीनियर नर्सेस शादीशुदा हैं और ज्यादातर उनके पति गल्फ देशों में जॉब करते हैं। वैसे तो मैं शरीफ स्वभाव का हूं पर क्या करूं जवानी का गरम खून और उसके ऊपर आईसीयू में घंटों तक मलयाली सुंदरियों के बीच घिरे रहना। लंड कितने बार खड़ा हो ही जाता है।
वैसे मेरे शक्ल से किसी को अंदाजा भी नहीं लगता होगा कि मेरा लंड खड़ा हो गया है। वैसे मेरे लंड का स्वभाव भी बड़ा विचित्र है। दोस्तों आज तक कभी भी मेरा लंड नर्सेस की चूचियों को देखकर खड़ा नहीं हुआ। मेरा लंड हमेशा से 3 चीजों से खड़ा होता है। पहला तो आंखों में मासूमियत और शरारत दूसरा सेक्सी परफ्यूम की गंध और तीसरा बटॉक्स के कर्व्स। ये 3 चीजें दोस्तों यदि किसी एक सुंदरी में हों तो फिर क्या कहना। फिर तो मेरा दिमाग बंद और लंड खड़ा हो जाता है।
तो दोस्तों मेरे अस्पताल में अभी भी नर्सेस सफेद स्कर्ट ही पहनती हैं। जब भी मरीज का ब्लड टेस्ट लेना हो या मेडिसिन देनी हो तो 4-5 नर्सेस आगे मरीज की तरफ झुककर काम करती हैं और मैं उनके पीछे खड़ा होकर उन्हें डायरेक्शन देता हूं। उस समय सभी नर्सेस की पीठ मेरी तरफ होती है और झुकने से उनके बटॉक्स के शेप टाइट स्कर्ट से दिखते हैं। अक्सर मेरा लंड इस नजारे से 3-4 इंच की दूरी पर रहता है। दोस्तों अक्सर ऐसे मौके पर मैं मन ही मन उनके बटॉक्स यानी मोटी गांड को सहलाता हूं और फैंटेसी में स्कर्ट को ऊपर उठाकर पैंटी खोलकर दोनों चुत्तरों को सहला कर लंड उनकी चूत में डाल देता हूं। पूरा जिस्म यारों गरम हो जाता है। जी में आता है कि काश जमाने का डर नहीं होता तो कमर को पकड़ कर पीछे से खड़े खड़े जमकर चुदाई कर देता सबकी बारी बारी से। लेकिन यारों सारा मामला ख्वाबों तक ही था। लेकिन सब कुछ बदल गया जब रागिनी नाम की नर्स आईसीयू में आई। उसकी आंखें बिल्कुल नटखटी और शराबी थीं।
उसका परफ्यूम बिल्कुल मदहोश कर देता था। लंबे बाल थे। चूचियां बिल्कुल छोटी थीं पर दोनों चुत्तर फूली हुई थीं और टाइट स्कर्ट से शेप एकदम सेक्सी दिखता था। उसकी आदत थी कि कभी सीधी नहीं खड़ी होती थी। हमेशा टेबल पर झुक कर और गांड को टेबल से दूर और पैरों को सीधा करके खड़ी होती थी। यह लगभग हाफ डॉगी पोजिशन होता था। हाल यह हो गया था कि मेरा लंड सिर्फ उसके परफ्यूम और पसीने की गंध से खड़ा हो जाता था। और जब भी मेरा लंड खड़ा होता तो मैं डॉक्टर्स चेयर पर बैठ कर गहरी गहरी सांस लेता था। एक दिन दोस्तों मैंने एक सिंगल रूम के मरीज को दवा देने के लिए नर्स को बुलाया तो रागिनी आ गई। मैं दीवार से सटकर खड़ा था और दवा देने के लिए जब वह आई तो मेरे सामने खड़ी होकर झुकी। फिर वही समां। लंड से 3 इंच आगे उसकी स्कर्ट में कसकसाती हुई गांड। लंड खड़ा हो गया और मैं गहरी सांस लेने लगा। फिर वह जानबूझकर थोड़ा पीछे खिसकी और उसकी गांड बिल्कुल मेरे खड़े लंड को दबाने लगी।
पूरे जिस्म में बिजली कौंध गई। पर मैंने अपने पर काबू रखा। मेरा पूरा लंड धड़क रहा था और उसे भी मेरे लंड की धड़कन अपनी गांड पर फील हुई होगी। करीब 3 मिनट तक ऐसे रहने के बाद वह वहां से हट गई और बिल्कुल एक शरारती मुस्कान फेंक के चली गई। मैं फिर डॉक्टर्स चेयर पर आकर बैठ गया। गहरी सांस ले रहा था। जैसे तैसे अपने को कंट्रोल किया था। रात के 11 बजे थे। सारी नर्सेस अपने अपने मरीज के रूम में थीं। मैं अकेला बीच के हॉल में डॉक्टर चेयर पर बैठा था। तभी रागिनी आकर सामने के टेबल पर झुक कर खड़ी हो गई और मेरी आंखों में घूरने लगी। मैं भी अब बेशर्म होता जा रहा था।
उसकी गंध से ऐसा लगता था जैसे हम दोनों जानवर हैं वह भी गरमाए हुए। मैं भी उसकी आंखों में घूरने लगा और उसकी गंध का मजा लेने लगा। फिर उसने आंखें नीचे कर लीं। मैंने हिम्मत की और अपनी उंगली से उसके होठों को सहलाने लगा। उसने झटके से मुंह खोल कर मेरी उंगली को अंदर ले ली और चूसने लगी। फिर मैं दोनों हाथों से उसके कंधों और गले को और उसके चेहरे को सहलाया। रागिनी फिर सामने से हट कर मेरे बगल में आकर खड़ी हो गई वैसे ही झुक कर। अब हम दोनों टेबल के पीछे थे। वह मेरे सामने खुली किताब को पढ़ने का दिखावा करने लगी। और मैं अपने दाएं हाथ को उसकी पीठ को सहलाने के बाद उसकी गांड पर सहलाने लगा। उसके बाद उसकी जांघ सहलाई और स्कर्ट के अंदर से हाथ ऊपर ले गया। और उसकी पैंटी के ऊपर से उसके फूले फूले चुत्तरों को दबाने लगा। दोनों गहरी गहरी सांस फेंक रहे थे तभी अचानक एक मरीज को पेशाब की ट्यूब डालने की जरूरत आ गई। मैंने झट अपना हाथ पैंटी के अंदर से निकाला और वह तुरंत दूर हट गई।
दोस्तों उस रात ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड दर्द से फट जाएगा। फिर मैं मरीज के लंड को पकड़ कर साफ किया और मरीज के लंड को रागिनी की तरफ घुमाया और फिर उसके चूत की तरफ करके हिलाया। वह शरमा रही थी। दोस्तों हमारे काम की जगह में एक नर्सेस का प्राइवेट कमरा होता है जिसमें फोन होता है और अंदर से लॉक करने की सुविधा होती है और हैंडवॉश के लिए हम लोग कभी कभी उसमें जाते हैं।
मैं यह बता दूं कि अक्सर रात में नर्सेस के पतियों के फोन आते हैं कुवैत से और नर्सेस उस प्राइवेट रूम को बंद करके काफी गरमा गरम बातें करती हैं। तो मैं मरीज की पेशाब नली डालने के बाद नर्सेस के प्राइवेट रूम में आराम से हाथ धोने लगा। तभी रागिनी के पति का फोन आ गया और वह बिना मुझे देखे अंदर आकर दरवाजा बंद करके फोन उठा कर बात करने लगी। आदत के मुताबिक वह हाफ डॉगी स्टाइल में थी। टेबल पर झुकी हुई कमर 90 डिग्री पर मुड़ी हुई पैर एकदम सीधे टेबल से दूर और कुर्सी खाली। दोस्तों मैं बता दूं कि नर्सेस कम से कम 1 घंटे जरूर बात करती हैं अपने पतियों से और तब तक बाकी नर्सेस उनको डिस्टर्ब नहीं करतीं। अब मैं रागिनी के साथ बंद था उस कमरे में और रागिनी फोन पर किस कर रही थी और मलयाली में फटी आवाज में कुछ बात कर रही थी। मैंने खाली चेयर उठाई और उसकी गांड के पीछे रखकर उस पर आराम से बैठ गया।
अब मैं उसकी कमर को पकड़ कर उसके गांड पर स्कर्ट के ऊपर से किस किया। उसने सरप्राइज से मेरी तरफ देखा और उसकी आह निकली। उसके पति ने कुछ नहीं समझा होगा क्योंकि वे लोग फोन सेक्स कर रहे थे। उसने अपनी टांगें सीधी कर लीं और उसकी गांड मेरे चेहरे के सामने आ गई। मैंने अपनी नाक उसके गांड पर सटा कर गंध ली और साथ साथ उसकी दोनों मोटी जांघों को सहलाने लगा।
उसे हल्की गुदगुदी होने लगी और वह खिलखिला कर कसकसाने लगी। मैंने उसकी स्कर्ट को ऊपर कमर पर करके कमर को कस कर पकड़ लिया और पैंटी पर किस करने लगा और उसके दोनों चुत्तरों को दांतों से हल्के हल्के काटने लगा। वह कसकसाते हुए मेरी तरफ देखी और बोली तुम बहुत नटखट हो। ऐसी बेशर्म पत्नी मैंने और नहीं देखी जो मजे से पति को उल्लू बना रही थी। मैंने फिर पास में रखी कैंची से उसकी पैंटी को कमर के पास काटा और फिर चूत के पास। पैंटी से जबरदस्त गंध आ रही थी उसके पसीने और परफ्यूम की। अब उसकी फूली हुई गांड मेरे सामने मक्खन की तरह मुलायम दिख रही थी। दोनों चुत्तरों को हाथ से हटाने के बाद उसके गांड की घाटी गांड का छेद और चूत का छेद साफ दिख रहा था। वह भी मस्त होकर सिसकारी भर भर कर मलयाली में कुछ बातें किए चली जा रही थी।
मैंने भी उसकी दोनों चुत्तरों के बीच में अपनी नाक घुसा दी। अब मेरा पूरा चेहरा उसकी झांटों के बीच था। मेरी नाक उसके गांड के छेद पर और मुंह उसकी चूत पर था और मैंने दोनों हाथों से उसकी दोनों जांघों को कस कर पकड़ रखा था। अब मैं बेतहाशा उसके चूत और गांड को चाटने लगा और बीच में उसके चुत्तरों के बाइट्स भी लेता था। अब मैं डॉक्टर नहीं एक कुत्ता बन चुका था जो एक गरमाई हुई कुत्तिया की चूत को चाट रहा था और तभी रागिनी ने फोन पर कहा चोदो मुझे। फिर क्या था मैंने कुर्सी को पीछे धकेला। उसके पीछे उठ कर खड़ा हुआ और पैंट की चेन खोली लंड को बाहर किया।
उसकी कमर को कस कर ग्रिप में लिया और लंड को उसके गीले चूत पर डाल दिया। फिर मैंने हौले हौले उसके दोनों चुत्तरों को खूब अच्छे से थपथपाया। धीरे धीरे उसकी चूत ढीली हो गई और लंड आराम से फिसलता हुआ उसकी चूत में चला गया। वाह क्या गरम गीला और रेशमी अहसास हो रहा था मेरे लंड को। वाकई मेरा लंड तप कर कुंदन हो रहा था। मैंने पूरी ताकत से लंड को रागिनी की चूत की गहराइयों में उतार दिया और उसकी चूत को दबाए हुए अपने कमर को ऊपर नीचे दाएं बाएं गोल गोल हिला हिला कर नाचने लगा। हम दोनों बिल्कुल कामदेव के गुलाम हो गए।
उसकी टांगें ढीली पड़ने लगीं तो मैंने कमर के नीचे से हाथ लगा कर उसे सहारा दिया और कमर को हिला हिला कर उसकी चुदाई करने लगा। उसके चूत की गरमी मेरे लंड से होते हुए सारे शरीर में फैल रही थी और हम दोनों की आंखें बंद थीं और रागिनी सिर्फ ऊऊह्हह्ह आह्हह्ह ही कर पा रही थी। मैंने उसके क्लिट की मसाज भी की और तभी रागिनी का शरीर ऐंठने लगा और उसकी चूत मेरे लंड पर बिल्कुल टाइट हो कर चिपकने लगी। और फिर उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। लंड भी अब गंगा स्नान कर पवित्र हो चुका था। अब बारी थी चूत के गंगास्नान की। मैंने उसके कमर को पकड़ कर फिक्स किया और चाटा चाट लंड से स्ट्रोक मारने लगा। उसकी आंखें बंद थीं और चूत ढीली और बेहद चिकनी। लंड से धाराधार स्ट्रोक लग रहे थे और तब 5 मिनट बाद लंड ने भी पानी छोड़ दिया। हम दोनों तृप्त हो चुके थे। मैंने उसके चूत से गिरते हुए पानी को पास में रखी एक बोतल में रख लिया। 40 मिनट बीत चुके थे।
रागिनी की मलयाली चूत मेरे लंड की फैन बन चुकी थी। मैं वहीं चेयर पर बैठ गया। रागिनी मेरे तरफ फेस करके मेरी जांघ पर बैठ गई। मैंने अपने सिकुड़े हुए लंड को सावधानी से उसकी चूत में डाल दिया और मैं पीछे की तरफ झुक कर बैठ गया। वह मेरे लंड को अपने चूत में लिए हुए थी। उसकी वन पीस स्कर्ट कमर के ऊपर थी। उसकी छाती मेरी छाती से सटी हुई थी और उसका चेहरा मेरे चेहरे के सामने था और अब वह धीरे धीरे फिर से फोन से बात कर रही थी। मैंने उसको गले लगाया। और अपनी बाहों में कस लिया। फिर उसके दोनों चुत्तरों के ऊपर हाथ फेरने लगा और फिर स्कर्ट के अंदर से हाथ को उसकी नंगी पीठ पर रख कर सहलाने लगा। फिर उसकी ब्रा की हुक खोल दी। उसके पूरे कपड़े को उतार कर अलग कर दिया और अपने कपड़े भी निकाल लिए। फिर से उसे गले लगाए उसकी गले को कंधे को पीठ को दोनों चुत्तरों को दोनों जांघों को खूब सहलाया। साथ ही साथ उसके दोनों कानों को जीभ से चाट चाट कर चूसा। उसके गाल को चूमा।
वह बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह मेरे सीने से चिपकी हुई थी। फिर मैंने उसे अपने सीने से अलग किया और उसके दोनों छोटे छोटे निप्पल्स को चूमा और खूब चूसा और साथ में उसकी दोनों बाहों को सहलाता रहा। तब तक उसके फोन की बातचीत खत्म हो चुकी थी और वह मेरे चेहरे को हाथों में लेकर मेरे होठों को अपने होठों से किस करने लगी। उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और फिर मुझसे चिपक गई और अपनी जांघों को मेरे कमर को कस लिया। मैं उसकी जीभ को चूसने लगा और साथ में उसकी नंगी पीठ को सहला कर उसकी गांड को सहलाने लगा। मैंने अपने हाथों में बोतल से उसकी चूत का पानी निकाल कर उसकी गांड पर मलने लगा। क्या कहूं दोस्तों मैं किस कदर मस्त हो रहा था ऊपर से मैं फ्रेंच किस चला रहा था छाती पर उसकी चूचियों की गरमी और नरमी कहर ढा रही थी और नीचे उसके चूत के पानी से उसकी गांड की मालिश हो रही थी।
मैंने अपनी उंगली उसके गांड के छेद पर रख कर हल्के से दबाया तो वह टाइट थी। मैंने वही उंगली को रखते रखते हल्के दबाव से मसाज की तो कुछ देर बाद गांड का छेद ढीला होने लगा। मैंने झट वहीं रखी हुई जेली की ट्यूब उसकी गांड से लगा कर जेली अंदर डाल दी। और फिर उसकी गांड को थपथपाने लगा। फिर वहीं रखे टिश्यू पेपर को उंगली पर लपेट कर उसकी गांड के अंदर डाल दी और अच्छे से गांड की सफाई कर दी। फिर जब गांड थपथपाने से उसकी गांड ढीली हो गई तो जेली की 1 पूरी ट्यूब की जेली गांड के अंदर डाल दी। इस दौरान मेरा लंड भी बिल्कुल तन कर चूत के अंदर फड़क रहा था। रागिनी मेरे सीने से चिपकी हुई मेरे कान को काट और चूस रही थी। रागिनी बोली डॉक्टर आप क्या कर रहे हैं नीचे। मैं बोला सिस्टर इसको नीचे नहीं कहते। इसको कहते हैं गांड। तो बोली डॉक्टर आप मेरी गांड को क्लीन क्यों किया। मैं फिर उसे रिक्वेस्ट किया कि आगे से सेक्स का मतलब होता है चोदना वैजाइना का मतलब होता है चूत और ब्रेस्ट्स का मतलब होता है चूची।
फिर उसने नटखट चेहरा बना के बोला मुझे सब मालूम है आप मेरी गांड चोदना चाहते हैं। मैंने पूछा वह कैसे। तो बोली सिंपल चूत तो आप चोद चुके हैं। मैं बोला सिस्टर आप बहुत सेक्सी हो इसलिए आपका गांड भी चोदना चाहता हूं। तो बोली मेरे फ्रेंड का हसबैंड भी उसका गांड चोदता है पर मेरे हसबैंड को यह गंदा लगता है। मैंने बोला यह बताओ मेरी रागिनी को गांड चुदवाने में कैसा लगता है। वह हंस कर बोली वह तो डॉक्टर के चोदने के बाद पता चला। तभी मैंने अपनी 1 उंगली रागिनी के गांड में डाल दी और उंगली से उसकी गांड चोदने लगा। उसकी गांड में उंगली डाल कर मैंने अंदर ही अंदर उसकी चूत में खड़े लंड को भी दबाने लगा। वह सिसकारी भरने लगी और जोर से सीने से चिपक गई। मैंने कहा अब बताओ रागिनी कैसा लग रहा है डबल चुदाई। अच्छा बोल कर उसने मेरे गाल पर 1 पप्पी दी। मैंने बोला रागिनी जब तुम मेरे लंड को अपने गांड में लोगी तो और अच्छा लगेगा। मेरे लिए तुम डॉगी पोजिशन में आओगी। वह बोली ठीक है और फिर टेबल पर डॉगी पोस्चर में आ गई। मैं भी उसके पीछे घुटनों पर टेबल पर उसकी गांड के पीछे आ गया। उसकी पीठ सहलाई। कमर सहलाई और कमर के नीचे से अपनी 2 उंगलियां उसकी चूत में डाल कर उंगली से उसकी चुदाई करनी शुरू कर दी।
डॉक्टर आपका लंड कहां है। मैंने झट लंड उसके गांड के छेद पर रख कर कहा रागिनी अब तुमको मेरा लंड अपने गांड में लेना है। मुंह खोल कर लंबा सांस लो और धीरे धीरे गांड को पीछे धक्का देकर लंड को अंदर ले लो। ओके डॉक्टर कह कर उसने धीरे से पूरा लंड अपनी गांड में ले लिया। अब बिल्कुल बेशरमी से अपने गांड को जैसे चाहो नचाओ मैंने कहा। फिर वह बिल्कुल मस्त होकर आंख बंद कर गांड हिलाने लगी और मैं भी लंड को गांड में डाले हुए धीरे धीरे स्ट्रोक लगाने लगा। 15 मिनट तक गांड चुदाई चलती रही और साथ में मैंने चूत की उंगली चुदाई जारी रखी। उसके बाद मैं रागिनी की गांड में झर गया और वह मेरे हाथों में पानी छोड़ दी। उसकी चूत के पानी को हाथ में लगा कर मैंने उसके चेहरे पर लगा दिया और उसकी पैंटी को रागिनी की यादगार बना कर रख ली। फिर मैं जाकर सो गया। सबेरे उठा तो लंड फिर खड़ा था।
उठ कर नीचे गया तो उसके जाने का वक्त हो गया था और वह डॉक्टर्स रूम के सामने से जा रही थी। मैंने उसे झट अंदर खींचा बिस्तर पर पीठ के बल लिटाया। स्कर्ट उठाया और फटाफट अपने खड़े लंड को चूत में डाल कर पेलना शुरू कर दिया और 5 मिनट में हम लोग खलास हो गए। उसके बाद से कई महीनों तक हम लोग एक दूसरे के साथ मस्ती करते रहे। अक्सर वह साथ ड्यूटी वाले दिन पैंटी नहीं पहनती थी और मैं जब मौका मिलता उसकी स्कर्ट उठाकर उसकी नंगी गांड को कभी सहला कर छोड़ देता। कभी चूत में उंगली डाल देता। कभी गांड में वह उंगली डाल लेती। कभी टॉयलेट में हम रागिनी की चूत चोदते तो कभी गांड। कभी जब वह अकेले दवा देती मरीज को तो हम चेन खोल कर लंड को बाहर निकाल लेते और वह स्कर्ट उठा कर चूत में लंड डाल लेती। बहुत मजे किए मैंने रागिनी के साथ। कभी वह मेरे घर आ जाती वीकेंड पर और हम लोग खूब चुदाई करते।
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