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मौसा की गोद में नंगी भतीजी

मेरा नाम रिया है। आज मेरी उम्र 25 साल है। जब मैं 18 साल की थी तब मेरी मौसी मुझे अपने साथ दिल्ली लेकर आ गई थीं। मेरे घर में पापा अकेले थे। मेरी मम्मी की पिछले साल मृत्यु हो चुकी थी। पापा मुझे अकेले नहीं पाल सकते थे। मौसा मौसी के कोई औलाद नहीं थी।

उस समय मेरा बॉडी फिगर 34 30 36 था। मैं गदराई शरीर की थी। मेरी कमर पतली और कूल्हे गोल भरे हुए थे। चूचियाँ भारी और उभरी हुई थीं जो ब्लाउज के अंदर से भी साफ झलकती थीं। उस उम्र में सारे मर्द मुझे भूखी निगाहों से देखते थे। बाजार में या गली में निकलते ही उनकी निगाहें मेरे जिस्म पर ठहर जाती थीं।

जब मौसी मुझे अपने घर लेकर आईं तो थोड़े दिनों में मैं एडजस्ट हो गई। वे लोग मेरा अपनी बेटी की तरह ख्याल रखते थे। सुबह का नाश्ता से लेकर रात के खाने तक हर छोटी बात का ध्यान रखते थे। मौसा भी मेरे साथ छेड़छाड़ करने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे। कभी कंधे पर हाथ रख देते तो कभी बालों को सहलाते हुए पास खड़े हो जाते।

एक दिन मौसी सुबह से शाम के लिए अपने रिश्तेदार के घर बाजू के गाँव में गई हुई थीं। मैं गसलखाने में कपड़े धो रही थी। बाल्टी में साबुन का पानी था। गाढ़ा झाग ऊपर तैर रहा था और पानी ठंडा लग रहा था। कपड़े धोते हुए मेरा सूट सलवार पूरा पानी से गीला हो गया था।

मौसा गसलखाने में आ गए। उन्होंने अपने कपड़े निकालकर नहाने लगे। कपड़े एक एक करके उतारे और नंगे शरीर पर पानी डालने लगे। अपने जिस्म पर साबुन लगाते समय उन्होंने साबुन मेरे हाथ में देकर बोला चल लगा। मैंने साबुन लिया और उनके सीने पर फेरने लगी। फिर जबरन मेरा हाथ खींचकर अपनी बाहों में ले लिया। उनकी बाँहें मेरी कमर के आसपास कस गईं और मेरा शरीर उनके गीले जिस्म से चिपक गया।

मैं मौसा के शरीर पर साबुन लगाने लगी। मेरे हाथ उनके चौड़े सीने पर फिसल रहे थे। साबुन की चिकनाई से उंगलियाँ आसानी से चल रही थीं। साबुन लगाते लगाते मुझे कुछ अजीब सा लगने लगा। नीचे की ओर जाते हुए मेरे हाथ उनके पेट पर पहुँचे तो एक गरमाहट सी महसूस हुई।

तभी मौसा ने मेरा हाथ पकड़कर अपने अंडरवियर में डाल दिया और साबुन रगड़ने लगे। उनकी उंगलियाँ मेरे हाथ को निर्देश दे रही थीं। इस तरह मौसा का लंबा लंड मेरे हाथ में आ गया। वह गर्म और सख्त था। मेरी हथेली उसके मोटे आकार को महसूस कर रही थी। मेरे पूरे शरीर में सनसनी सी दौड़ गई। रीढ़ की हड्डी में झनझनाहट फैल गई और साँसें तेज हो गईं।

मैंने तुरंत अपना हाथ खींच लिया। मौसा गुस्से में आकर साबुन वाले पानी से भरी बाल्टी मेरे सिर के ऊपर डाल दी। ठंडा पानी मेरे बालों से लेकर पूरे शरीर पर बह गया। मेरा सूट सलवार शरीर से चिपक गया और मेरे अंग दिखने लगे। गीला कपड़ा चूचियों के आकार को साफ उभार रहा था। निपल्स सख्त होकर कपड़े से चिपक गए थे।

फिर मौसा ने मुझे अपनी बाहों में लेकर मेरा सूट उतार दिया। उन्होंने कंधों से कपड़ा नीचे खींचा और मेरी छाती पूरी तरह खुल गई। मेरी सलवार का नाड़ा खींचकर सलवार निकाल दी। नाड़ा खुलते ही सलवार मेरे पैरों से फिसलकर फर्श पर गिर गई। इस तरह मैं मौसा की बाहों में पूरी नंगी हो गई। मेरा गीला नंगा शरीर उनके हाथों में था। पानी की बूंदें मेरी त्वचा पर चमक रही थीं।

मौसा मुझे अपनी गोद में लेकर बैठ गए। उनकी जाँघों पर मेरा नंगा शरीर बैठ गया। मेरी एक चूची अपने मुँह में भरकर चूसने लगे। उनके होंठ निपल को घेरकर खींच रहे थे। जीभ घुमाते हुए चूसने की आवाज आ रही थी। दूसरी चूची को हाथ से मसलने लगे। उनकी उंगलियाँ नरम मांस को दबा दबाकर गूंथ रही थीं। निपल उनकी हथेली में घूम रहा था और मुझे गरमाहट महसूस हो रही थी।

तभी उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों से लगाए और मेरे नीचे वाले होंठ को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। उनके होंठ गर्म और गीले थे। मेरे निचले होंठ को दांतों से हल्के से दबाकर खींच रहे थे। जीभ मेरे होंठ के अंदर घुसकर घूम रही थी। काफी देर तक मेरे होंठ चूसते रहे। चुसने की आवाज चप चप की तरह गूँज रही थी। मेरी साँसें उनकी साँसों में मिल रही थीं।

उन्होंने इतनी जोर से चूसा कि थोड़ी देर में मेरा नीचे वाला होंठ सूजकर मोटा हो गया। होंठ में गर्माहट और हल्की सुन्नता फैल गई। लार की चमक होंठों पर चमक रही थी।

फिर मौसा ने मुझे बाथरूम के फर्श पर लिटा दिया। ठंडी टाइल्स मेरे पीठ से लग गईं। मेरी दोनों जाँघों के बीच अपने पंजों के बल बैठ गए। उनके घुटने फर्श पर टिके थे। अपना लंबा मोटा लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगे। लंड का सिरा मेरे गीले होंठों पर रगड़ खा रहा था। साबुन की चिकनाई से वह आसानी से फिसल रहा था। हर रगड़ पर मेरी चूत में हलचल हो रही थी।

साबुन के पानी से चिकनाई होने के कारण एक ही धक्के में उनका लंड मेरी चूत में सुपाड़ा घुस गया। मोटा अगला हिस्सा अंदर घुसते ही दीवारें फैल गईं। मेरे मुँह से बहुत लंबी चीख निकल गई। उई मां ममम ररर गई आह आह ओह ईईईई। आवाज बाथरूम की दीवारों से टकराकर वापस आई। मेरी आँखों में आँसू निकल आए। पलकों पर पानी की बूंदें चमक रही थीं।

लेकिन मौसा ने इसकी परवाह किए बगैर पूरी ताकत से फिर धक्का मारा। उनके कूल्हे आगे धकेले और लंड और गहराई तक चला गया। उनका लंड मेरी चूत को चीरता हुआ काफी अंदर घुस गया। अंदर की दीवारें जोर से फैल रही थीं। गर्मी और दबाव दोनों एक साथ महसूस हो रहे थे। मम ममी अ आ मर गई उई मां। मेरी आवाज काँप रही थी।

मौसा ने पूरी ताकत से और धक्के मारकर अपना पूरा लंड मेरी चूत में फंसा दिया। जड़ तक अंदर चला गया। अंडकोश मेरी चूत के मुँह से टकरा रहे थे। आह आह उई मां ममम उ इंची। मेरे मुँह से दर्द भरी सिसकियाँ निकलने लगीं। हर साँस के साथ सिसकी निकल रही थी।

थोड़ी देर में मौसा ताबड़तोड़ तेज धक्के लगाने लगे। कूल्हे तेजी से आगे पीछे हो रहे थे। लंड अंदर बाहर हो रहा था। हर धक्के पर चूत की दीवारें खिंच रही थीं। मैं उनके हर धक्के पर दर्द भरी सिसकियाँ निकाल रही थी। आह उई मम की आवाजें लगातार निकल रही थीं।

मौसा ने मुझे अपने नीचे पूरी तरह बाहों में जकड़ रखा था। उनकी बाँहें मेरी पीठ के नीचे से गुजरकर कसी हुई थीं। मैं बिल्कुल हिल नहीं पा रही थी। मेरा शरीर उनके वजन के नीचे दबा हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत में गरम गरम मुसल डाल दिया हो। अंदर की गर्मी और मोटाई दोनों एक साथ दबाव बना रहे थे।

मौसा पर इस बात का कोई असर नहीं था। वे ताबड़तोड़ मुझे चोद रहे थे। उनके कूल्हे तेजी से आगे पीछे हो रहे थे। लंड हर बार गहराई तक जा रहा था और फिर बाहर खिंच रहा था। चूत की दीवारें हर धक्के पर खिंचकर फिर सिकुड़ रही थीं। फर्श पर पानी की चिकनाई से शरीर थोड़ा फिसल रहा था।

कुछ देर बाद मेरे दर्द में कमी हुई और मुझे एक अजीब सा एहसास होने लगा। अंदर की गर्मी अब दबाव के साथ सुखद लगने लगी थी। लंड के रगड़ने से एक मीठी सी हलचल फैल रही थी। मेरी साँसें तेज हो गईं और शरीर में एक नई ऊर्जा भर गई।

इस वजह से मैंने अपने चूतड़ों को उछालना शुरू कर दिया। कूल्हे ऊपर उठकर उनके धक्कों का साथ देने लगे। हर उछाल पर लंड और गहराई तक महसूस हो रहा था। अपनी बाहों का हार बनाकर मौसा के गले में डाल लिया और उन्हें अपनी ओर भींच लिया। मेरी बाँहें उनकी गर्दन के पीछे कस गईं। सीना उनके सीने से चिपक गया। उनकी गर्म साँसें मेरे गाल पर पड़ रही थीं।

मौसा मेरा इशारा समझ गए। उन्होंने मुझे गोद में उठाया। मेरे नंगे शरीर को अपनी मजबूत बाँहों में समेट लिया। लंड अभी भी अंदर था। उठाते समय वह और गहराई तक धंस गया। कमरे में लाकर पलंग पर पटक दिया। नरम गद्दे पर मेरी पीठ बैठी। फिर मेरे ऊपर चढ़ गए। उनका वजन मेरे शरीर पर आ गया।

जोर जोर से धक्के मारकर मेरी चुदाई करने लगे। कूल्हे तेजी से पेल रहे थे। लंड अंदर बाहर की रफ्तार बढ़ गई थी। हर धक्के पर बिस्तर हिल रहा था। अब मस्ती में आकर मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं। आह वी सी सी हम मम ममी। आवाजें लंबी और काँपती हुई निकल रही थीं। मेरे होंठ खुले थे और साँसें तेज चल रही थीं।

मैंने गर्दन उठाकर देखा तो मौसा का लंबा मोटा लंड पूरा मेरी चूत में काफी तेजी से अंदर बाहर हो रहा था। गीला चमकता हुआ लंड बाहर निकलता और फिर जोर से धंस जाता। चूत के होंठ उसके चारों ओर चिपके हुए थे। अब मैं भी मौसा का पूरा साथ दे रही थी। मेरे कूल्हे उनके धक्कों के साथ मिलकर ऊपर उठ रहे थे।

पूरे कमरे में मेरी सिसकारियाँ गूँज रही थीं। आवाजें दीवारों से टकराकर फिर वापस आ रही थीं। मेरे होंठ खुले थे और हर साँस के साथ आवाज निकल रही थी।

मौसा ने मेरी दोनों टाँगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं और ताबड़तोड़ धक्के लगाने लगे। मेरी टाँगें उनकी कंधों पर टिकी हुई थीं। कूल्हे पूरी तरह खुले हुए थे। लंड अब और गहराई तक जा रहा था। हर धक्के पर बिस्तर जोर से हिल रहा था। अब मैं भी एक बीवी की तरह मौसा का साथ दे रही थी। मेरे कूल्हे उनके धक्कों के साथ मिलकर ऊपर उठ रहे थे। चूत उनके लंड को कसकर पकड़ रही थी।

मौसा का लंबा मोटा लंड मेरे बच्चेदानी में जा रहा था। सिरा अंदर की सबसे गहरी जगह को छू रहा था। हर धक्के पर मैं उछल रही थी। शरीर बिस्तर से थोड़ा ऊपर उठ जाता और फिर गिरता। इस दौरान मेरा 2 बार पानी निकल चुका था लेकिन मौसा रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। पहली बार चूत से गर्म तरल फूटा था। दूसरी बार और जोर से निकला था। मेरी जाँघें काँप रही थीं।

मैं हैरान थी कि 55 साल की उम्र में भी मौसा में इतना जोश था। उनके कूल्हे अभी भी तेजी से चल रहे थे। पसीना उनके माथे पर चमक रहा था। मेरी जोर जोर की सिसकारियाँ पूरे कमरे की दीवारों से टकराकर वापस आ रही थीं और मौसा का जोश बढ़ा रही थीं। आह मम उई की आवाजें उनकी रफ्तार बढ़ा रही थीं।

मौसा मेरी ताबड़तोड़ चुदाई में लगे हुए थे। लंड अंदर बाहर की गति और तेज हो गई थी। तभी मेरा शरीर फिर से अकड़ गया। पीठ की हड्डी सीधी हो गई। जाँघें कसी हुई थीं। मैंने जोर से अपने नाखून मौसा की कमर में गड़ा दिए। उनकी त्वचा पर नाखूनों के निशान पड़ गए।

मौसा भी काफी जोर जोर से धक्के मारकर आ करने लगे। उनके कूल्हे अंतिम बार जोर से धकेले। उन्होंने अपने लंड से ढेर सारी पिचकारी मेरी चूत में उड़ेलनी शुरू कर दी। गर्म गाढ़ा वीर्य अंदर फूट फूटकर भर रहा था। हर धक्के के साथ और निकल रहा था। मेरा भी पानी साथ साथ निकल गया। चूत से गर्म तरल उनके लंड के साथ बाहर आ रहा था।

मौसा ने अपना वीर्य मेरी चूत में पूरा भर दिया। अंदर भरा हुआ एहसास भारी लग रहा था। बेड की चादर पर मेरी चूत से वीर्य खून और साबुन का पानी बहकर गिर रहा था। सफेद गाढ़ा वीर्य लाल खून और साबुन के पानी के साथ मिलकर चादर पर फैल रहा था। मेरी सील टूट चुकी थी। पहली बार के खून की धार अभी भी धीरे धीरे निकल रही थी। मौसा ने मुझे कली से फूल बना दिया था।

आज मुझे लड़की से औरत होने का एहसास हो रहा था। शरीर में एक नई थकान और संतुष्टि दोनों एक साथ थीं। मैंने बेड से उठकर बाथरूम जाने की कोशिश की लेकिन शरीर में काफी दर्द होने के कारण उठ नहीं सकी। कूल्हों में भारीपन था। जाँघें काँप रही थीं। पीठ से लेकर नीचे तक सुन्न सा लग रहा था।

फिर मौसा मुझे गोद में उठाकर बाथरूम ले गए। उनकी बाँहें मेरी पीठ और जाँघों के नीचे मजबूत थीं। मुझे चलने में दिक्कत हो रही थी। पैर जमीन पर रखने की कोशिश की तो दर्द बढ़ गया। वापस भी गोद में लेकर ही रूम में बेड पर लिटा दिया। नरम गद्दे पर शरीर फिर से लेट गया।

मौसा ने फिर से मेरी एक चूची मुँह में लेकर चूसने शुरू कर दी। होंठ निपल को घेरकर खींच रहे थे। जीभ गोल गोल घुमा रही थी। दूसरी चूची को हाथ से मसलने लगे। उंगलियाँ नरम मांस को दबाकर गूंथ रही थीं। निपल उनकी हथेली में घूम रहा था। वे मेरे होंठों का लंबा चुंबन ले रहे थे। होंठों को चूसते हुए जीभ अंदर घुमा रहे थे। लार की चमक दोनों के होंठों पर थी।

मौसा का लंड वापस लंबा और मोटा हो गया था। वह सीना से सटा हुआ सख्त खड़ा था। मौसा ने बिना देर किए अपना लंड 2 धक्कों में ही मेरी चूत में जड़ तक उतार दिया। पहला धक्का आधा घुसा। दूसरा धक्का जड़ तक पहुँचा। अंडकोश मेरी चूत से टकरा गए। मेरे मुँह से एक लंबी दर्द भरी सिसकारी निकल गई। आह आह ओह ईईईई। आवाज काँपती हुई निकली।

मौसा ने फिर से जल्दी ही मेरी दोनों टाँगें उठाकर अपने कंधों पर रख लीं। टाँगें उनकी कंधों पर टिक गईं। कूल्हे पूरी तरह खुल गए। इस तरह मौसा का लंड फिर से मेरी चूत में बच्चेदानी तक जा रहा था। सिरा गहरी जगह को छू रहा था। मौसा पूरी ताकत से अपना लंड मेरी चूत में धक्के लगाकर पेल रहे थे। कूल्हे जोर जोर से आगे पीछे हो रहे थे। हर धक्का गहरा और तेज था।

उनकी जाँघें मेरी जाँघों से टकराकर फच फच फच फच की आवाजें गूँज रही थीं। गीली त्वचा की टक्कर की आवाज साफ सुनाई दे रही थी। मेरी दर्द भरी और मस्ती भरी सिसकारियाँ पूरे कमरे में फिर से गूँजने लगीं। आह ओह ईईईई ईईईई ईईईई ऊऊऊऊ हंस हंस मम्मी आईईईईईईई उ ऊचचचचचचच। आवाजें लंबी और टूटी हुई निकल रही थीं।

फिर से मैं 2 बार झड़ गई। पहली बार शरीर अकड़ गया और गर्म तरल फूटा। दूसरी बार और जोर से काँपते हुए निकला। जाँघें काँप रही थीं। 40 मिनट बाद मौसा ने मेरे साथ ही अपना ढेर सारा वीर्य मेरी चूत में भर दिया। गर्म गाढ़ा वीर्य अंदर फूट फूटकर भर रहा था। हर धक्के के साथ और निकल रहा था। काफी देर तक मेरे ऊपर ही लेटे रहे। उनका वजन मेरे शरीर पर दबा हुआ था। साँसें अभी भी तेज चल रही थीं।

फिर अपने कपड़े पहनकर मौसी को फोन करके हँस रहे थे। आवाज में हल्की हँसी थी। फोन की घंटी बजने की आवाज कमरे में गूँजी। मुझे मालूम चला कि मौसी ने प्लानिंग से ही मौसा से मेरी सील तुड़वाई थी और मुझे लड़की से औरत बनाया था। बात सुनकर मेरे मन में कई सवाल उठे लेकिन आवाज में कोई ग्लानि नहीं थी।

तभी उन्हें पहली बार चोदते समय कोई डर नहीं था कि मैं मौसी को बता दूँगी। उनके चेहरे पर आराम का भाव था। मौसी घर आईं तब उन्होंने मुझे समझाया कि जो होता है होने दो। उनकी आवाज शांत और समझाने वाली थी। मैं उनको एक बच्चा दे दूँ। जो होगा वो मौसी सँभाल लेंगी। किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। उनके शब्द धीरे धीरे मेरे कानों में बैठ रहे थे।

मैं उनके एहसान के तले दबी हुई थी। घर का सहारा और देखभाल याद आ रही थी। मौसाजी भी मेरा पूरा ख्याल रखते थे। सुबह शाम का ध्यान और छोटी बड़ी जरूरतें पूरी करते थे। इसलिए मैं राजी हो गई। मन में एक हल्की सी स्वीकृति आ गई।

अब तो मौसा मुझे मौसी के सामने भी चोदने लगे। रात के समय कमरे में रोशनी कम होती तो वे पास आ जाते। हर रात मौसा मुझे बीवी की तरह चोदते थे। बिस्तर पर लेटाकर धीरे धीरे शुरू करते और फिर रफ्तार बढ़ा देते। मेरे शरीर पर उनके हाथ घूमते और लंड अंदर गहराई तक जाता।

इस तरह मैं जल्दी ही पेट से हो गई। प्रेग्नेंट हो गई। पेट में हलकी सी भारीपन महसूस होने लगी। मौसी मेरा खास ख्याल रखने लगीं। खाना समय पर देतीं और आराम करने को कहतीं। मौसा भी। हाथों से पेट सहलाते और पास बैठे रहते।

9 महीने बाद मैंने एक लड़के को जन्म दिया। प्रसव के समय दर्द तेज था लेकिन आखिर में बच्चा गोद में आ गया। शहर में आस पास किसी को कोई लेना देना नहीं होता। पड़ोस में कोई पूछताछ नहीं हुई। कोई दिक्कत नहीं हुई।

मौसी और मौसा बहुत खुश हुए। उनके चेहरों पर मुस्कान थी। मेरे बच्चे को अपना बच्चा समझकर पालने लगे। रात को झुलाते और दूध पिलाने में मदद करते। बच्चे के माता पिता के रूप में अपनी पहचान बताने लगे। बाहर वालों से बात करते समय अपने नाम लेते। उन्होंने सेटिंग करके बर्थ सर्टिफिकेट में भी उन दोनों का नाम लिखवा दिया ताकि मुझे भविष्य में कोई तकलीफ न हो। कागजात में उनके नाम साफ छपे हुए थे।

मौसा मुझे जी भरकर रात दिन चोदते रहते थे। सुबह की रोशनी में भी कभी कभी बिस्तर पर खींच लेते। रात को अंधेरे में धीरे शुरू करके फिर जोरदार धक्के देते। लंड हर बार गहराई तक जाता और मेरी सिसकारियाँ निकलतीं। इस तरह मेरे शरीर के अंग अंग निखरकर झलकने लगे। चूचियाँ और भारी हो गई थीं। कूल्हे गोल और नरम हो गए थे। त्वचा पर एक चमक सी आ गई थी।

मैं बच्चे को अपना दूध पिलाती। गोद में लिटाकर निपल मुँह में देती। बच्चा 3 साल का हो गया। चलने फिरने लगा था और बातें करने लगा था। मौसा ने कोई रात नहीं छोड़ी मुझे चोदने में। हर रात बिस्तर पर लेटाकर टाँगें फैला देते। लंड अंदर डालकर ताबड़तोड़ पेलते। मेरे नाखून उनकी पीठ पर लग जाते।

मौसा ने मुझे चोद चोदकर रसभरी औरत बना दिया। शरीर अब पूरी तरह से भरा हुआ और कामुक लगने लगा था। छूने मात्र से सनसनी दौड़ जाती थी। फिर मौसी मौसा ने मेरी एक पहचान वाले घर में शादी कर दी। शादी के दिन हल्की सी मुस्कान के साथ विदा किया। बच्चे को अपने पास रख लिया। उसे गोद में लेकर अपने कमरे में सुलाया।

मौसा कई बार तो मौका मिलने पर मेरी ससुराल में आकर ही चोदकर चले जाते हैं। चुपके से कमरे में घुसते और दरवाजा बंद कर लेते। जल्दी जल्दी कपड़े हटाकर लंड अंदर डाल देते। कुछ देर जोरदार धक्के मारकर वीर्य भरकर निकल जाते। जब मैं मौसी मौसा के घर जाती हूँ तब मौसा मुझे चोदने का कोई मौका नहीं छोड़ते। बाथरूम में या कमरे में खींच लेते। टाँगें उठाकर गहराई तक पेलते रहते।

आज मेरे पति से मुझे 4 बच्चे हैं। घर में बच्चों की आवाजें गूँजती रहती हैं। लेकिन मुझे पहले बच्चे की बहुत याद आती है। उसकी हँसी और छोटे हाथों का स्पर्श याद आ जाता है। यह मेरी सच्ची कहानी है जो मैंने आप लोगों के साथ शेयर करके अपना दिल हल्का किया है। आपको मेरी कहानी अच्छी लगी हो तो कमेंट करें।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।