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पड़ोसन अल्का ने कुतिया बनकर चुदाई ली

मेरा नाम कुमार सानू है। कद 5 फुट 5 इंच, रंग गोरा और सुडौल बॉडी। तो सीधा आते हैं कहानी पर। ये बात आज से 10 साल पहले की है जब मैं बस जवानी में कदम रख ही रहा था। हमारे पड़ोस में एक लड़की रहती थी, उसका नाम अल्का था, उसकी उम्र उस वक्त कुछ 27 के आसपास रही होगी।

अल्का देखने में काफी माल थी, गेहुआं रंग, 36 के बूब्स, 28 की कमर और 36 की गांड। मेरा अल्का के घर काफी आना जाना था क्योंकि उसका छोटा भाई और मैं साथ में खेला करते थे। एक दिन शाम के 4 बजे मैं अल्का के घर पहुंचा, रोज की तरह उसके घर पर शांति थी।

मैं बाहर थोड़ी देर उसके भाई को ढूंढता रहा पर वो मिला नहीं तो मैं सीधा अंदर चला गया। अंदर जाते ही मेरी तो आंखें खुली की खुली रह गईं। मैंने देखा अल्का सामने बेड पर आधी नंगी बैठी हुई है और अपनी दोनों टांगें फैलाए एक हाथ से अपनी चुत के दाने को मसल रही है, सलवार घुटनों से नीचे है।

और अपने दूसरे हाथ से बूब्स को दबा रही थी, उसका सूट कंधे से ऊपर था। चुत की बात करूं तो उसकी गुलाबी चुत उसकी दोनों टांगों के बीच गजब चमक रही थी, छोटी छोटी झांटें उसकी खूबसूरती को और बढ़ा रही थीं। चुत से बहता हल्का हल्का पानी मानो उसकी चुत की चमक को और बढ़ा रहा था।

उसके छोटे छोटे बालों के बीच छुपी हुई चुत का गुलाबी पन देखकर मैं पागल हुआ जा रहा था, ऐसा मन करता कि उसकी चुत की गुलाबी दुनिया में घुसकर खो जाऊं। उसके बूब्स मस्त गोल मटोल आम जैसे थे, और ठीक बीच में उसका डार्क निप्पल एकदम चॉकलेट जैसा चमक रहा था।

चूचे देखकर तो काट खाने को मन कर रहा था और काट काट के लाल कर दूं। उसकी प्यास तो बुझ रही थी या नहीं पता नहीं चला, मगर मेरी प्यास जरूर बढ़ रही थी। उसकी हल्की से आह आह की आवाजें मानो कानों में गूंजती जा रही जो सीधा मेरे दिमाग में असर कर रही थीं।

और वो अपनी चुत की प्यास बुझाने में इतनी मदहोश थी कि उसे पता ही नहीं चला कि कब से उसके सामने खड़ा उसकी चुत और उसको निहारे जा रहा हूं। मन तो ऐसा कर रहा था अभी उसके सलवार में घुसकर उसकी दोनों टांगों के बीच में सर घुसा दूं और उसकी चुत का सारा पानी चाट चाट कर पी जाऊं।

और ऐसा चाटूं कि उसकी चुत बहना बंद कर दे पर मेरा चाटना न रुके। पर मैंने अभी अपने पर काबू रखा और उसको बस देखे जा रहा था। थोड़ी देर बाद उसने चुत को मसलना बंद किया और सीधा अपनी दो उंगलियां चुत के अंदर घुसा दीं।

उसने उंगली एक झटके में ऐसे घुसाई मानो एक ही बारी में सीधा जड़ तक लगी हो और ये सब देखकर सांस मेरी अटक गई। उसके बाद उसने उंगली अंदर बाहर करना शुरू किया। देखते ही देखते उसकी उंगली की स्पीड बढ़ती गई और वो अब इस स्पीड में पहुंच चुकी थी कि पूरे कमरे में बस उसके चुत रस की आवाजें गूंज रही थीं फुच फुच फुच फुच।

ये सब देखकर और सुनकर ना जाने मुझे क्या हुआ कि मुझे पता ही नहीं चला कि कब मैंने अपना 6 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड अपने पजामे से बाहर निकालकर हिलाना शुरू कर दिया उसी के सामने। थोड़ा होश आया तो पता चला वो भी खोई है और मैं भी।

तब मैंने ध्यान दिया तो पता चला वो अभी आह आह की आवाजें निकाल रही है और उसकी आवाज से ऐसा लग रहा था जैसे उसे शांति ही नहीं मिल रही हो। वो लगी रही अपनी कोशिश में। उसकी आंखें अभी भी बंद थीं मस्ती के सागर में।

उसको देखकर लग रहा था कि काफी समय से उसे लंड नहीं मिल पाया हो और अगर अभी लंड मिल जाए तो वो कच्चा ही चाब जाए। थोड़ी देर बाद उसने अपना हाथ से अपने बगल में पड़े तकिए को पलटा उसके नीचे रखे एक बड़े और मोटे से खीरे को निकाला।

खीरा कम से कम 5 इंच लंबा और 1 इंच मोटा था। उसे उठाते ही उसने अपनी उन्हीं बंद आंखों से उस खीरे पर खूब सारा थूक लगाया और फिर उस गीले खीरे को अपनी चुत के ऊपर रगड़ने लगी। और बहते हुए चुत के रस से उस खीरे को और गीला करने लगी, क्योंकि वो जानती थी कि मोटा खीरा उसकी चुत का भोसड़ा बना सकता है।

थोड़ी देर बाहर से रगड़ने के बाद उसने खीरे का मोटा वाला हिस्सा अपनी चुत के मुंह पर लगाया और एक जोर का झटका मारा। आधा खीरा उसकी चुत के अंदर समा गया। इस झटके से मानो उसकी चुत अच्छे से फट गई हो। उसके मुंह से एक जोर की आवाज निकली और आंखें फटी की फटी रह गईं।

इस झटके के बाद ये तो पता चल गया था कि अल्का को मजा जोरदार झटके में ही आता है। झटके के साथ अल्का की फटी आंखों ने मेरे और मेरे लंड के भी दीदार किए। मेरा लंड देखते ही उसकी आंखों में एक मस्त सी चमक नजर आई लेकिन अचानक वो चमक डर में बदल गई।

शायद उसे मेरे ये सब देखने डर लग रहा हो कि मैंने सब देख लिया। अल्का अब उस कंडीशन में थी कि ना तो खीरा अंदर कर पा रही थी और ना ही बाहर। मानो सब कुछ थम सा गया हो। मैं भी उसके सामने बस अपना खड़ा लंड पकड़े खड़ा था।

कल तक उसके सामने खेलने वाला लड़का आज उसके रूम में उसी की नजरों के सामने अपना खड़ा लंड हिला रहा है और उसकी चुत में खीरा जाते हुए देख रहा है। कमरे में अब सिर्फ चुप्पी थी। ना वो कुछ बोली ना मैं। कुछ 5 मिनट बाद मैं हिला और अपना खड़ा लंड पजामे में डाला और अल्का की तरफ बढ़ा।

अल्का की हालत अभी ऐसी थी कि खीरा आधा चुत के अंदर और आधा बाहर। दोनों हाथ साइड में शॉक के वजह से ढीले पड़े थे। मैंने आगे बढ़ते ही खीरा पकड़ा और पूरा अल्का की चुत में घुसा दिया। इस जोरदार झटके के बाद अल्का होश में आई, उसने कुछ नहीं बोला बस आंखें बंद करके सिचुएशन को एंजॉय करने लगी।

मैंने भी अब खीरा उसकी चुत से निकाल फेंका और अपनी उंगलियों से उसकी चुत मसलने लगा। उसकी चुत से लगा तर रस बहने पर लगा हुआ था, इसी बीच मैंने उसका चूचा अपने मुंह में दबा दिया और निप्पल को जोर जोर से करने लगा। वो और ज्यादा जोश में आने लगी।

उसने भी हां का इशारा करते हुए मेरे खड़े लंड को पजामे के बाहर से ही पकड़ लिया। मैं थोड़ा और आगे बढ़ा और उसका सूट निकाल फेंका। उसके अंदर उसने ब्लू कलर की ब्रा पहनी थी। वो भी मैंने निकाल फेंकी। उसका सलवार निकालने की इतनी जल्दी थी कि वो जल्दी जल्दी में फट गया और उसकी हंसी छूट गई।

अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी पड़ी थी। मस्त गेहुआं बदन और, उसे मैंने अपने सामने खड़ा किया और हर एंगल से निहारा। पहले उसके बूब्स निहारे फिर उसके कमर और फिर उसकी मस्त गांड को निहार कर मजे लिए। इस निहारने में 5 कब बज गए पता ही नहीं चला।

तो वो बोली घरवाले आने वाले आज जल्दी जल्दी में करो। कल फुर्सत में जो चाहे वो कर लेना। मैंने भी कुछ नहीं देखा और उसे बेड के सहारे कुतिया बनाकर और उसकी चुत को फैला कर, बिना लंड को गीला किए उसकी चुत में एक ही झटके में अपना लंड पूरा जड़ तक चुत में उतार दिया।

झटका इतना जोरदार था कि उसकी ना आवाज निकल पाई और ना वो रो पाई। बस अटक सी गई, फिर मैंने जैसे ही लंड बाहर निकाला तो उसे सांस आई। इससे पहले कि वो मुझे गालियां देती मैंने फिर से एक जोरदार झटका मारा और वो चिल्ला पड़ी।

बोली कुत्ते धीरे कर ले, जुगाड़ नहीं हूं जो गुस्सा निकाल रहा।

मैं भी हंस दिया और झटके झटके मारने लगा। अब वो भी साथ देने लगी। झटके मारते मारते उसकी गोल मटोल एप्पल शेप गांड पर नजर पड़ी और एक जोरदार थप्पड़ दे मारा।

वो बोली आज चुत ही मार लो, ये कल मार लेना।

मैं भी जल्दी जल्दी झटके मारे और 15 मिनट की मस्त चुदाई के बाद अपना सारा माल उसकी गांड के ऊपर गिरा दिया और फिर गीला लंड उसके मुंह में दे दिया चाटने को। अगले दिन अल्का का कॉल आया सुबह 11 बजे करीब और उसने बताया कि आज दिन में उसने सभी घरवाले कहीं जा रहे हैं और वो बिल्कुल अकेली है घर पर, और वो मिलना चाहती है फिर से।

मेरे लिए तो मानो खुली तिजोरी लूटने जैसा मौका था। मैंने भी हां कह दी और उसने 2 बजे आने को कहा। बस फिर क्या था मानो वक्त थम सा गया हो कटा ही नहीं पर मैं शुरू हो गया अपनी तैयारी में। नहाने गया और वहां अपनी झांटें साफ करीं और अपने लंड को अच्छे से चमकाने लगा।

फिर तो सुबह के 11 से 2 बजे तक बस मेरे दिमाग में अल्का की गुलाबी चुत ही घूम रही है, लंड भी खड़ा खड़ा परेशान था कि बस खड़ा ही हूं और छेद का कोई अता पता नहीं। फिर दिन में खाना खाते ही मैं 2 बजे अल्का के घर पहुंच गया, और दरवाजा खटखटाया तो सामने से अल्का ने दरवाजा खोला और बोली।

अल्का क्या बात बिल्कुल वक्त पर हो।

सानू हां आता क्यों नहीं, तेरी गर्मी ने तो फन मचा रखा है।

अल्का अच्छा तो क्या है आज का स्पेशल।

सानू बस शुरू तो होने दे, फिर देख कोई भी छेद सूखा नहीं रहने दूंगा तेरा।

बस इतना कहते ही उसने मुझे अंदर खींच कर दरवाजे की कुंडी लगा दी। मैंने भी ना इधर देखा ना उधर सीधा उसके लाल होंठों को चूसना शुरू कर दिया। अल्का के बारे में फिर से बता दूं गेहुआं रंग है, और 36-28-36 के जिस्म की मालकिन है।

मेरी तरह उसने भी पूरी तैयारी कर रखी थी। होंठों पर लाली, आंखों में काजल, ऊपर एक कट स्लीव वाला शॉर्ट टॉप और नीचे जांघ से भी ऊपर तक का शॉर्ट। बिल्कुल किलर लग रही थी मैं भी उसके नशे में उसे चूसने लगा।

होंठों को चूसते चूसते, हल्के हल्के उसके बूब्स को बढ़ाने लगा। कभी उसके होंठों को काटता तो कभी उसकी जीभ को, तो कभी अपनी पूरी जीभ उसके गले तक डाल देता। ऐसे ही करते करते मैंने उसका टॉप निकाल दिया। अंदर उसने एक मस्त ब्लू रंग की ब्रा पहनी थी जिसमें उसके बूब्स बिल्कुल ऐसे फिट थे जैसे मानो अभी फाड़ कर बाहर आ जाएं।

पर अल्का ने उसके बाद मुझे कुछ नहीं करने दिया। मुझे बेड पर धक्का दे कर मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरा लोअर उतार दिया और मेरा अंडरवियर उतारकर फेंक दिया। अब मैं उसके सामने बिल्कुल नंगा लेटा था।

उसने मेरे लंड को थोड़ा हाथ से सहलाया और फिर उसके बाद मेरी टांगें फैला कर मेरी दोनों टांगों के बीच आ गई। 2 मिनट तक लगातार लंड को घूरने के बाद उसे ना जाने क्या हुआ। उसने एक ही झटके में पूरा लंड अपने गले तक उतार दिया।

मेरी तो मानो सांस ही अटक गई थी और उसके भी आंखों से आंसू आने लगे। पर वो रुकी नहीं और लगातार लंड अपने मुंह में अंदर बाहर करती रही। उसके बाद उसे एक एक शरारत सूझी और वो मेरे लंड चूसते चूसते उसने अपनी एक उंगली मेरी गांड के छेद में घुमाने लगी। मेरे लिए थोड़ा नया था पर ठीक लगा।

फिर उसने मेरे लंड हाथ से पकड़ कर हिलाते हुए मेरी गांड के छेद को अपनी जीभ से चाटने लगी। मुझे बहुत अच्छा लगा और उसका साथ देने लगा। वो अपनी जीभ मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगी।

उसके बाद वो ऐसे ही लंड को मुंह में ले कर गांड के साथ खेलती रही। और ऐसे ही थोड़ी देर बाद मेरा होने वाला था तो मैंने उसे बताया तो वो मेरे सामने मुंह खोल कर बैठ गई और मैं खड़ा हो कर उसने मुंह के ऊपर अपना सारा माल झाड़ दिया। जो उसके मुंह में था वो सब पी गई और चेहरा का उसने उंगली से निकाल कर चाटने लगी।

अब बारी थी मेरी, मैंने उसका टॉप निकाला और उसके बूब्स पर टूट पड़ा। कभी बूब्स चूसता कभी निप्पल पर काटता। चूस कर बूब्स पूरे लाल कर दिए। उसके बाद मैंने उसका शॉर्ट्स भी निकाल दिया और अंदर उसने ब्लू कलर की जी स्ट्रिंग पैंटी पहनी थी। जो गीली हो रखी थी छेद पर।

मैं पैंटी के ऊपर से ही उसकी चुत चाटने लगा, और फिर मैंने अपने मुंह से ही उसकी पैंटी उतारी। पैंटी उतारते ही मेरी आंखें फटी रह गईं, उसने अपनी चुत बिल्कुल ऐसे मक्खन जैसे चमका रखी थी। और ऊपर से उसकी चुत का पानी उसे और गुलाबी बना रहा था।

उसकी चुत से जो खुशबू आ रही थी, मानो मैं किसी और दुनिया में पहुंच गया था और उसी वजह से मैं तो उसकी चुत पर ऐसे झपटा जैसे अंदर ही घुस जाऊंगा। मैं अपनी जीभ से चुत के पानी को चाटने लगा और यहां तक कि बबल गम की तरह चुत को चबाने लगा।

उसकी चुत से लगातार पानी आने पर लगा था और मैं चूसने पर लगा था। कभी कभी उसकी गांड के छेद को भी चाट देता था जिस से वो और मचल जाती थी। थोड़ा और माहौल बनाने के लिए मैंने उसकी चुत पर चॉकलेट पिघला कर डाली। उसके बाद तो मानो मैं पागल सा हो गया एक तो चुत की खुशबू और ऊपर से चॉकलेट का टेस्ट।

मैंने इतनी चॉकलेट अपनी लाइफ में कभी एक साथ नहीं खाई, जितनी उसकी चुत के पानी के साथ उस दिन मैं खा गया। मैं तो चुत चूसते चूसते खो ही गया और इस दौरान वो 2 बार झड़ गई। जब उसके चेहरे पर नजर पड़ी तो देखा वो एक कुतिया की तरह हांफ रही थी और मुझे हल्की सी आवाज में बोली।

अल्का कल के लिए भी कुछ छोड़ दे, आज ही सब खा के खत्म कर देगा क्या।

सानू अब इसमें गलती तेरी चुत की है जो इतनी टेस्टी है कि मन ही नहीं भरता, बस चूसते जाओ, चूसते जाओ।

अल्का हां तेरे लिए रस का कुआं है जो बस पीते रहो।

सानू कुआं का तो पता नहीं, पर ऐसे मदहोश चुत को तो मैं पूरी रात भी चाट सकता हूं।

फिर मैंने उसे सीधा लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया, तब तक मेरा लंड फिर से खड़ा हो कर उसकी चुत को सलामी दे रहा था। मैंने अपने लंड से उसकी चुत को बाहर से ही रगड़ने लगा। कुछ देर बाद वो।

अल्का प्लीज और मत तड़पाओ अब और डाल दो।

सानू मैंने कहा क्या डाल दूं।

मुझे हिंदी में सुनने का बहुत शौक है, लंड चुत जैसा बोलना तो मैं उसके मुंह से सुनना चाहता था।

अल्का वो ही जो चुभ रहा है।

सानू क्या चुभ रहा है।

अल्का झल्ला कर लंड डाल भोसड़ीके चुत में, खुजली बढ़े जा रही है।

उसकी ऐसी बात सुन कर मुझे एक ऐसा जोश चढ़ा कि मैंने एक झटके में ही पूरा लंड उसकी चुत में उतार दिया और बस उसके चेहरे को देखता रहा। उसकी आंखें बाहर आने को थीं, जिसे देख मुझे और मजा आया और मैंने और लगातार झटके मारे।

उसको सांस लेने का मौका भी नहीं दिया और 5 मिनट तक जोर जोर से झटके मारता रहा। उसकी सांस ऐसी अटकी कि आवाज भी नहीं आ पाई और मुझे मजा आ रहा था। फिर मैं थोड़ा सा रुका तो वो बिल्कुल तिलमिला कर बोली।

अल्का मादरचोद, देख तो ले झटके मारते टाइम सामने वाले को सांस आ भी रही या नहीं, तूने तो मां ही चोद दी मेरी।

सानू चिढ़ाते हुए मां भी चोद देंगे अगर तू उसकी भी दिला दे तो।

इस बात पर वो भी हंस दी और बोली।

अल्का यार मैं दिला तो दूं पर वो नहीं मानेगी ना।

फिर हम दोनों ही हंस पड़े।

अल्का चल अब शुरू हो जा झटके मारने, बहुत मजा आया तेरे अंदर का ऐसा जानवर देखने में भी, पर तूने चुत का भोसड़ा बना दिया मादरचोद। और अब मैं चाहती हूं कि तू मेरी इस मासूम सी चुत की मां बहन सब चोद दे।

फिर मैं भी उसकी चुत में लगातार झटके मारने लगा। हर झटके के साथ एक ही आवाज थी फुच फुच। लंड अंदर जाते ही उसकी सांस बढ़ जाती और लंड के बाहर आते ही वो एक चैन की सांस लेती। पर उसे मैं मजा आ रहा था और वो पूरे जोश के साथ मुझे आगे पीछे खींच रही थी। कभी तो जैसे ही लंड जड़ तक उसकी चुत में समा जा रहा था वो मुझे वहीं रोक कर एक नए तरह के एहसास का मजा ले रही थी।

ऐसे झटके मारने में ना जाने कब 20 मिनट हो गए पता ही नहीं चला और वो और मैं अपनी चरम सीमा पर पहुंचे और मैंने उसकी चुत में ही अपना सारा माल झाड़ दिया। पिछली बार की तरह मैंने अपना माल में और उसके चुत के रस में भरा लंड उसके मुंह में डाल दिया साफ करने को। वो भी उसे मस्ती में चाट के साफ कर गई।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।