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नथ उतारकर मांग में सिंदूर भरा

हेलो दोस्तों मैं आपकी रिया आज एक नई सच्ची कहानी लेकर आई हूं इसमें नाम बदलकर काल्पनिक कर दिया है।

मेरा नाम आरती है और मेरा फिगर 32 28 34 है। मेरी उम्र 21 साल है। मेरा रंग गोरा है जिसमें हल्की गुलाबी चमक है जो धूप में और भी निखर जाती है। मेरे परिवार में मेरे पापा और मां हैं। हम तीनों एक छोटे से मकान में रहते हैं। मैं कॉलेज में फाइनल ईयर की स्टूडेंट हूं।

मेरी सहेलियां जब अपनी चुदाई की बातें मुझे सुनाती थीं तो मुझे अच्छा लगता था। उनके शब्दों को सुनते ही मेरे शरीर में एक अजीब सी सनसनी दौड़ जाती थी। सीने में हलचल होती थी और जांघों के बीच गर्मपन फैलने लगता था। उनकी बातें सुनकर मेरा दिल भी करता था कि कोई मेरी चुत की सील भी तोड़े।

मेरे पापा अपने दोस्त की फैक्ट्री में काम करते थे। उनके दोस्त जो फैक्ट्री के मालिक थे वह अक्सर हमारे घर आते जाते रहते थे। समय समय पर हमारी मदद भी करते रहते थे। कभी राशन का सामान भेज देते तो कभी पैसे की तंगी में सहयोग कर देते।

एक दिन मैं कॉलेज से लौटी। पेशाब का प्रेशर इतना ज्यादा था कि पेट के निचले हिस्से में जोर का दर्द हो रहा था। घर पहुंचते ही मैं जल्दबाजी में बाथरूम की तरफ भागी। दरवाजा बंद करना पूरी तरह भूल गई। पजामी को जल्दी से नीचे सरकाया और कमोड पर बैठ गई। पेशाब की तेज धार निकलते ही राहत की सांस छूटी। आंखें बंद करके मैं उस हल्के आराम को महसूस कर रही थी।

पेशाब करने के बाद जैसे ही मेरा ध्यान सामने की तरफ गया तो मेरे हाथ कांपने लगे। मैंने देखा कि मेरे पापा के दोस्त अंकल किचन के बाहर खड़े हैं। उनके हाथ में मोबाइल था और कैमरा सीधे मेरी तरफ था। मेरी नंगी जांघें और चुत की पूरी झलक मोबाइल की स्क्रीन पर कैद हो रही थी। मेरा चेहरा सफेद पड़ गया।

मैं झट से उठी। हाथ कांपते हुए पजामी ऊपर खींची। बिना कुछ बोले कमरे की तरफ भाग निकली। दिल जोर जोर से धड़क रहा था। सीने में एक भारीपन सा छा गया था। मन ही मन घबराहट बढ़ती जा रही थी कि अब क्या होगा।

अगले दिन जब मैं कॉलेज से अपनी सहेलियों के साथ बाहर निकल रही थी तो गेट के बाहर उस तरफ नजर पड़ी। अंकल अपनी कार के साथ खड़े थे। उन्होंने मुझे इशारा करके अपनी तरफ बुलाया। मैंने सहेलियों को बाय कहा और धीरे धीरे अंकल के पास चली गई।

मै: अंकल आप यहां कैसे।

अंकल: मैं यहां से जरूरी काम से निकल रहा था सोचा आरती को लेता चलूं।

अंकल: आरती कार में बैठ मुझे तुमसे जरूरी बात करनी है।

मै: ऐसी क्या बात है अंकल।

मेरे कार में बैठते ही अंकल ने कार के शीशे ऊपर चढ़ा लिए। खिड़कियां बंद होते ही अंदर की हवा भारी लगने लगी। तभी उन्होंने अपना गर्म और मोटा हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। उंगलियां धीरे से कपड़े के ऊपर से दबा रही थीं। जांघ की नरम मांसपेशियों पर उनका स्पर्श महसूस होते ही मेरे शरीर में एक हल्की कंपकंपी दौड़ गई।

मैं: अंकल यह क्या बदतमीजी है। मैंने उनका हाथ झटक दिया। मेरी सांसें तेज हो रही थीं और दिल जोर जोर से धड़क रहा था।

अंकल ने कार स्टार्ट की और आगे बढ़ाते हुए एक सुनसान रास्ते पर रोक दी। इंजन की आवाज थम गई। फिर उन्होंने अपना मोबाइल निकाला और स्क्रीन मेरी तरफ घुमा दी। जैसे ही मैंने वीडियो देखी मेरे होश उड़ गए। आंखों के आगे अंधेरा छा गया। पूरे शरीर में ठंडक सी दौड़ गई।

वह वीडियो मेरी बाथरूम में सुसु करते हुए की थी। उसमें मेरी पूरी नंगी जांघें साफ दिख रही थीं। चुत की गुलाबी रेखा और पेशाब की धार साफ कैद हो गई थी। मेरी सांस अटक गई। गले में सूखापन छा गया।

मै: अंकल प्लीज यह वीडियो डिलीट कर दो। जल्दबाजी में मुझे होश नहीं रहा था इसलिए मैं ऐसे बैठ गई थी। प्लीज यह वीडियो डिलीट कर दो। मेरी आवाज कांप रही थी। आंखों में पानी भर आया था।

अंकल: अगर यह वीडियो तेरे कॉलेज में सब के पास पहुंच गई और तेरे पापा के पास पहुंच गई तो फिर क्या होगा। उनकी आवाज धीमी लेकिन भारी थी।

मैं: अंकल नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते। प्लीज यह वीडियो डिलीट कर दो। मैं आपकी बेटी जैसी हूं। मेरी पलकें झपक रही थीं और गालों पर गर्म आंसू बहने लगे थे।

अंकल: आरती कुछ नहीं होगा बस मेरी बात मानती जाओ। तुम्हें रानी बनाकर रखूंगा और तुम्हारे घर की हालत बदल दूंगा। तुम्हारे पापा को मैनेजर बना दूंगा। उनके शब्द कानों में गूंज रहे थे।

तभी अंकल ने दोबारा अपना हाथ मेरी जांघ पर रख दिया। उंगलियां अब और अंदर की तरफ खिसक रही थीं। जांघ की गर्माहट उनके हाथ की गर्माहट से मिल रही थी। कपड़े के ऊपर से भी उनका दबाव साफ महसूस हो रहा था।

मैं: अंकल प्लीज ऐसा मत करो। मेरी आवाज में अनुरोध और घबराहट दोनों थे।

मेरी आंखों में आंसू आ गए। अभी अंकल ने आगे बढ़कर अपना हाथ मेरी चूची पर रख कर दबा दिया। नरम और भरी हुई चूची उनकी हथेली में समा गई। अंगूठे से निप्पल के आसपास हल्के घुमाव दिए। उसी पल उन्होंने मेरे होठों पर अपने होठ लगाकर एक लंबा चुंबन ले लिया। उनके होंठ गर्म और थोड़े नम थे। मेरी सांस उनके मुंह में घुल गई। उन्होंने मेरी आंखों से आंसू पौंछे। फिर दोबारा मेरा नीचे वाला होंठ अपने मुंह में लेकर धीरे धीरे चूसने लगे। जीभ की नोक से होंठ के अंदरूनी हिस्से को छू रहे थे। दूसरे हाथ से मेरी चूची को और जोर से दबाने लगे। निप्पल अब सख्त होने लगा था और कपड़े के अंदर चुभने जैसा अहसास हो रहा था।

मेरे पूरे शरीर में सनसनी दौड़ने लगी। गर्दन से लेकर जांघों तक एक गर्म लहर फैल गई। बीच बीच में उन्होंने अपना हाथ मेरी चुत पर रखकर सहलाने लगे। हथेली कपड़े के ऊपर से धीरे धीरे रगड़ रही थी। चुत की रेखा पर दबाव पड़ते ही अंदर से एक गीलापन सा महसूस होने लगा। मैं उनका विरोध कर रही थी। कंधे हिलाकर दूर होने की कोशिश कर रही थी लेकिन मन ही मन घबरा भी रही थी कि कहीं अंकल यह वीडियो किसी को दिखा न दे।

तभी अंकल ने कार की सीट पीछे को एडजेस्ट कर दी। सीट के पीछे खिसकते ही मेरा शरीर लेट गया। पीठ सीट से सट गई। उन्होंने अपनी सीट भी पीछे एडजस्ट कर ली। अब उनका चेहरा मेरे बहुत करीब था। उनकी सांसें मेरे गालों पर महसूस हो रही थीं।

मैं: अंकल प्लीज ऐसा मत करो। मेरी आवाज अब और भी कांप रही थी। आंसू अभी भी बह रहे थे।

अंकल: आरती मेरी जान मेरी बात मानो। मैं तुम्हें अपने घर की रानी बनाकर रखूंगा। जमीन जायदाद फैक्ट्री बैंक बैलेंस सब तुम्हारे नाम कर दूंगा।

अंकल: आरती जब से तुमने कॉलेज जाना शुरू किया तुम्हारा फिगर देखकर तुम्हें पाने को बेचैन रहने लगा। उनकी आवाज में एक गहरी भूख थी। आंखें मेरी चूचियों और कमर पर टिकी हुई थीं।

मैं: अंकल नहीं प्लीज छोड़ दो मुझे। मेरी सांसें उखड़ रही थीं। शरीर पीछे को धकेलने की कोशिश कर रहा था लेकिन सीट की वजह से जगह नहीं थी।

अंकल: ठीक है मुझे अपने होठों पर किस करने दो और अपनी चूची पीने दो फिर मैं तुम्हें छोड़ दूंगा। उनके हाथ फिर से मेरी जांघ पर आ गए थे। उंगलियां धीरे से ऊपर की तरफ बढ़ रही थीं।

मैं: ठीक है अंकल उसके बाद आप मुझे छोड़ दोगे पक्का ना और मेरी वीडियो भी डिलीट कर दोगे ना। मेरी आवाज कांप रही थी लेकिन अंदर एक अजीब सा उत्साह भी घुल रहा था।

अंकल: हां मेरी जान मैं तुम्हारी वीडियो डिलीट कर दूंगा बस तुम मेरी बात मान लो। उन्होंने सिर हिलाया और करीब आ गए।

तभी अंकल मेरे ऊपर झुक कर मेरे होठों को चूसने लगे। उनके होंठ गर्म और थोड़े नम थे। पहले हल्के से दबाया फिर जोर से चूसा। जीभ की नोक मेरे होंठों के बीच से अंदर घुस आई। मैंने भी अनजाने में मुंह खोला। उनकी सांस मेरी सांस में मिल गई। उसी समय उनके दोनों हाथों ने मेरी चूचियों को पकड़ लिया। कपड़े के ऊपर से ही मसलने लगे। उंगलियां निप्पल के आसपास गोल गोल घूम रही थीं। निप्पल सख्त होकर कपड़े में चुभने लगे।

काफी देर तक मेरे होंठ चूसने के बाद अंकल बोले कि अपने कुर्ती ऊपर कर कर अपने चुचियों को आजाद कर दो। उनकी आवाज भारी हो चुकी थी। उस दिन मैंने पलाजो पहन रखा था। मैंने धीरे से कुर्ती के निचले हिस्से को ऊपर उठाया। कपड़ा छाती से सरकते ही मेरी दोनों चूचियां बाहर उछल आईं। गुलाबी निप्पल हवा में सख्त खड़े थे। चूचियों की नरम गोलाई हल्की सी कांप रही थी।

अंकल मेरी चूचियां देखकर अपने होश खो बैठे। उनकी आंखें चौड़ी हो गईं। लपक कर उन्होंने मेरी एक चूची अपने मुंह में भर ली। गर्म होंठ निप्पल के चारों ओर चिपक गए। जीभ ने निप्पल को घुमाया और जोर से चूसा। दूसरी चूची को उनके हाथ ने पकड़ रखा था। उंगलियां गूंद रही थीं। कभी हल्के से दबातीं तो कभी निप्पल को मोड़तीं। चूसने की आवाज चू चू की तरह गूंज रही थी। मेरी चूची उनके मुंह में गीली हो रही थी।

जैसे जैसे अंकल मेरी चूची को चूस रहे थे वैसे वैसे मुझे एक नशा सा छाने लगा। पूरे शरीर में सनसनी की लहर दौड़ने लगी। पेट के निचले हिस्से में गर्मपन फैल रहा था। जहां मैं पहले अंकल का विरोध कर रही थी वहां अब मेरा पूरा शरीर ढीला पड़ता जा रहा था। कंधे शिथिल हो गए। कमर अपने आप उनकी तरफ उठने लगी। मैंने विरोध करना छोड़ दिया। मुंह से मस्ती भरी सिसकारियां निकलने लगीं। आह। ओह। धीरे धीरे आवाज निकल रही थी।

अंकल अब मेरे होंठों को फिर से चूसने लगे। साथ ही एक हाथ से मेरी चूचियों को मसल रहे थे और दूसरे हाथ से मेरी चुत की तरफ बढ़ गए। प्लाजो के ऊपर से ही हथेली रखकर सहला रहे थे। चुत की रेखा पर दबाव पड़ते ही अंदर से गीलापन महसूस होने लगा। मेरे पूरे शरीर में मस्ती छा रही थी। मुंह से सिसकारियां और तेज निकलने लगी थीं। आह। मम्म। उन्होंने अपना हाथ मेरे पेट पर फेरना शुरू किया। नाभि के आसपास घुमाया फिर नीचे प्लाजो की तरफ ले गए। प्लाजो के ऊपर से ही मेरी चुत को जोर जोर से मसलने लगे। उंगलियां फाड़ने की कोशिश करती हुई रगड़ रही थीं।

तभी अंकल ने मेरे प्लाजो की लास्टिक में हाथ डाल दिया। उंगलियां कमर के अंदर घुस गईं। उन्होंने प्लाजो को नीचे खिसका दिया। कपड़ा जांघों तक सरक आया। मैंने अंकल को रोकने की कोशिश की। हाथ उनके हाथ पर रखा लेकिन नाकामयाब रही। उनकी ताकत ज्यादा थी। प्लाजो और नीचे खिसक गया।

अब मेरी चुत पूरी तरह नंगी हो चुकी थी। अंकल ने तुरंत अपना हाथ मेरी चुत पर रख दिया। उंगलियां गीली पंखुड़ियों पर फिसलने लगीं। बीच की रेखा पर हल्के से दबाव दिया। मस्ती और आनंद में मेरी आंखें बंद हो गईं। मुंह से लंबी सिसकारियां निकलने लगीं। आहहह। ओह। शरीर अपने आप उनकी उंगलियों की तरफ धकेलने लगा।

अंकल अपने मुंह में मेरी एक चूची लेकर जोर जोर से चूस रहे थे। निप्पल उनकी जीभ और होंठों के बीच फंस गया था। चूसने की गीली आवाज साफ सुनाई दे रही थी। दूसरे हाथ से कभी दूसरी चूची को मसल रहे थे। उंगलियां गूंदती हुई निप्पल को मोड़ रही थीं। कभी वही हाथ पेट पर फेरने लगते। नाभि के आसपास गोल घुमाव देते। फिर तुरंत नीचे जाकर मेरी चुत को मसलने लगते। गीली पंखुड़ियों को खोलकर बीच की गांठ पर उंगली फेर रहे थे। इस लगातार स्पर्श की वजह से मैं अपने होश हवास खो बैठी थी। शरीर कांप रहा था। कमर अपने आप ऊपर उठ रही थी।

अंकल: आरती मेरी जान तू तो बहुत जबरदस्त माल है। तेरा अंग अंग देखकर मैं पागल हो गया। उनकी सांसें भारी हो चुकी थीं। आवाज में भूख साफ झलक रही थी।

मैं: अंकल आपने मेरे शरीर में आग लगा दी। आह आह। ओह ईईईई। ईईईई। चूस लो अंकल अच्छे से। आह आह शिशिशि। मममममम। मेरी आवाज टूट टूट कर निकल रही थी। सिसकारियों के बीच शब्द घुल रहे थे।

अंकल पूरी तरह मेरे ऊपर झुके हुए थे। उनके सीने का वजन मेरे शरीर पर महसूस हो रहा था। वे मेरे रस भरे होठों को चूस रहे थे। जीभ अंदर घुसकर घुमा रही थी। फिर नीचे झुककर मेरी चूचियों का रसपान करने लगे। एक चूची मुंह में भरकर जोर से खींचते। निप्पल को दांतों से हल्के से काटते। दूसरी को हाथ से दबाते। धीरे धीरे उन्होंने मेरा प्लाजो मेरी टांगों से निकालकर पूरी तरह अलग कर दिया। कपड़ा फर्श पर गिर गया। अब मैं कमर से नीचे पूरी नंगी थी। उन्होंने मेरी दोनों टांगों को फैला दिया। घुटनों को अलग किया। फिर अपना मुंह सीधा मेरी चुत पर लगा दिया।

मेरे मुंह से एक लंबी सिसकारी निकल गई। आहहहहहह। आहहहहहह। अंकल की गर्म जीभ ने मेरी चुत की पंखुड़ियों को चाटना शुरू किया। पहले बाहर की तरफ हल्के हल्के लेटे। फिर बीच की रेखा पर जोर से रगड़ी। जीभ अंदर घुसते ही मेरे शरीर में एक तूफान सा भर दिया। बिजली जैसी लहर कमर से लेकर सिर तक दौड़ गई।

मैंने अपने चूतड़ों को ऊपर उठाया और दोनों हाथों से अंकल का सर दबा दिया। उनकी जीभ और गहराई तक चली गई। चुत की दीवारों को चाट रही थी। मैं अपने होश हवास पूरी तरह खो बैठी। आहहहह। आहहहहहह। उई उई मां। ममम। ररर। गई।

अंकल अपने दोनों हाथों से मेरी चूचियों को जोर जोर से दबा रहे थे। उंगलियां निप्पल को मरोड़ रही थीं। मुंह से मेरी चुत को चूस चूस कर मेरा हाल बेहाल कर रहे थे। जीभ अंदर बाहर हो रही थी। कभी पंखुड़ियों को चूसते तो कभी बीच की गांठ पर जोर से चोट करते। गीली आवाज चप चप की तरह गूंज रही थी। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह आह ओह। ईईईई। ईईईई। मेरी कमर बार बार उनकी जीभ की तरफ उछल रही थी।

तभी मेरा शरीर अकड़ने लगा। जांघें कड़क हो गईं। मैं अपने चूतड़ों को जोर जोर से उछालने लगी। अचानक मुझे लगा जैसे मेरे अंदर से एक गरम लावा सा फूट पड़ा हो। चुत की दीवारें जोर से सिकुड़ने लगीं। ढेर सारा गर्म और चिपचिपा पानी अंकल के मुंह पर छोड़ दिया। धारा की तरह निकल रहा था। अंकल उस पानी को अपनी जीभ से चाट रहे थे। हर चाट के साथ मेरी चुत और संवेदनशील हो रही थी। वह असीम आनंद मेरे पूरे शरीर में फैल रहा था। सांसें इतनी जोर जोर से चल रही थीं कि मेरी दोनों चूचियां उछल उछल रही थीं। निप्पल हवा में कांप रहे थे।

अंकल: मेरी आरती रानी कैसा लगा। उनकी आवाज में संतुष्टि थी। चेहरा मेरे पानी से चमक रहा था।

मैंने अंकल का मुंह चूम लिया। उनके होठों पर अभी भी मेरी चुत का स्वाद और गीलापन था। लंबा किस किया। जीभ से उनके होंठ साफ किए। फिर धीरे से अपनी कुर्ती नीचे की। चूचियां फिर कपड़े में छिप गईं। प्लाजो को जांघों तक खींचकर पहनने लगी। हाथ अभी भी कांप रहे थे।

मैं: अंकल मुझे घर पहुंचने में देर हो जाएगी। प्लीज मुझे घर छोड़ दो। अब वीडियो डिलीट कर देना। मेरी आवाज अभी भी थोड़ी कांप रही थी। शरीर में सुन्नता और हल्की गर्मी बनी हुई थी।

अंकल: हां मेरी जान बस तुम मिलती रहना। उन्होंने मेरा मोबाइल नंबर ले लिया। अपने फोन से मेरे नंबर पर मिस कॉल मारी। फिर बोले यह मेरा नंबर है। सेव कर लेना। उनकी आंखों में एक संतुष्टि की चमक थी।

फिर अंकल ने अपनी कार से मुझे घर के बाहर उतार दिया। दरवाजा खोलते समय उनका हाथ फिर से मेरी कमर पर फिर गया। बोले आरती सोच लेना। मेरी रानी बनोगी तो जिंदगी के सारे ऐश आराम दूंगा। उनकी आवाज धीमी लेकिन साफ थी।

मैं: प्लीज अंकल ऐसा मत करो। मुझे सोचने का मौका दो। मैंने सिर नीचे किया। गाल अभी भी गर्म थे।

अंकल बोला: अरे आरती घबराती क्यों है। मैंने तेरी माँ को भी कितनी बार चोदा है। और मुझे तुम पसंद हो। ये बात मैंने तुम्हारी माँ को भी बता दी है। उसको कोई प्रॉब्लम नहीं है। उनके शब्द सुनकर मेरी सांस एक पल के लिए रुक गई।

यह सुनकर मुझे अजीब तो लगा। सीने में एक अजीब सी खिचखिच हुई। लेकिन फिर मेरे दिल में ख्याल आया कि अंकल की बात सच तो लगती है। क्योंकि मेरी माँ के पास अंकल तब आते थे जब पापा फैक्ट्री में काम पर होते थे। उन दिनों मम्मी के चेहरे पर एक अलग सी चमक रहती थी। अब वह बात समझ में आ रही थी।

अंकल: ठीक है कल मुझे सोच कर बताना। मैं कल तुम्हें कॉलेज के बाहर मिलूंगा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कार स्टार्ट कर दी।

मैं घर जाकर सीधे कमरे में लेट गई। आज का सारा नजारा आंखों के सामने घूम रहा था। कार की सीट। उनकी जीभ। चुत से निकला पानी। शरीर बार बार अंगड़ाई ले रहा था। जांघों के बीच अभी भी गीलापन और हल्की सनसनी बनी हुई थी। मेरी दोनों चूचियों में मीठा मीठा दर्द हो रहा था। निप्पल अभी भी सख्त थे और कपड़े से रगड़ खा रहे थे। रात को नींद नहीं आई। अंकल के बारे में सोच सोच कर करवटें बदलती रही। आज कितना हसीन आनंद मिला था यह ख्याल बार बार आता। कब आंख लगी मुझे पता ही नहीं चला। सुबह आंख खुली तो काफी देर हो चुकी थी।

जल्दबाजी में कल वाला ही प्लाजो पहनकर तैयार हो गई। कॉलेज के लिए निकली तो रास्ते में एक घंटा लेट हो गई। कॉलेज जाना कैंसिल कर दिया। वहीं पार्क में एक बेंच पर बैठ गई। अंकल के साथ बिताए पल याद आने लगे। उनकी सांस। उनकी जीभ का अहसास। शरीर में फिर से हलचल मच गई। मीठी यादों में पूरी तरह खो गई। क्योंकि यह मेरी जिंदगी का पहला अनुभव था।

मैंने अंकल को फोन मिलाया। गले में हल्की घबराहट थी। बोली मैं कॉलेज के सामने वाले पार्क में बैठी हूं। थोड़ी देर में ही उनकी कार पार्क के गेट पर दिखाई दी। उन्होंने फोन मिलाया और बोले कहां हो मेरी आरती डार्लिंग। कार से उतरते ही मेरे पास आए और दोनों बाहों में भर लिया। उनका सीना गर्म और चौड़ा था। मेरी चूचियां उनके सीने से सट गईं।

मैं: अंकल धीरे से। क्या मार डालोगे। कोई देख लेगा। मेरी आवाज दबी हुई थी लेकिन शरीर उनके स्पर्श से कांप रहा था।

अंकल: मेरी आरती जान पार्क में कोई नहीं है। उन्होंने कहा और मेरे होठों पर लंबा किस दे दिया। उनके होंठ गर्म थे। जीभ हल्के से मेरे होंठों को छू गई। सांसों की गर्माहट गालों पर महसूस हुई। किस इतना गहरा था कि मेरी आंखें अपने आप बंद हो गईं।

अंकल: क्या सोचा मेरी जान। मेरी रानी बनोगी। उनकी आंखें मेरे चेहरे पर टिकी थीं। मैंने जवाब में उनके होठों को फिर से चूम लिया। धीरे से लेकिन साफ रजामंदी दे दी। शरीर उनके करीब और सिमट गया।

अंकल: मेरी आरती जानेमन मैं पूरी जिंदगी तुम्हारा गुलाम रहूंगा। तुम जो बोलोगी मैं वही करूंगा। उन्होंने फिर से मुझे अपनी बाहों में जोर से दबा लिया। इस बार दबाव और ज्यादा था। मेरे दोनों चूचियां उनके मजबूत सीने में दब गईं। निप्पल कपड़े के अंदर सख्त होकर चुभने लगे। उनकी सांस मेरे बालों में महसूस हो रही थी।

अंकल: आज कॉलेज की छुट्टी। हमारे पास पूरा दिन है। उन्होंने मुझे कार में बैठाया। दरवाजा बंद किया और आलीशान मकान की तरफ कार बढ़ा दी। रास्ते भर उनका हाथ मेरी जांघ पर रहता। उंगलियां कभी कभी अंदर की तरफ खिसक जातीं।

मैं: अंकल आपका मकान तो बहुत आलीशान है और बहुत बड़ा भी है। आंखों के सामने ऊंचा गेट और विशाल बंगला दिखाई दिया। दिल जोर जोर से धड़क रहा था।

अंकल: मेरी आरती जानेमन अभी आलीशान मकान की मालकिन तुम बनोगी। उनकी बात सुनकर मैं दिल में फूली नहीं समा रही थी। सीने में एक मीठी खुशी फैल गई।

अंकल के आलीशान मकान के एक कमरे में उनकी बेगम थी जो बीमार रहती थी और बेड पर लेटी रहती थी। उसकी देखरेख के लिए अंकल ने एक नौकरानी रखी हुई थी। अंकल ने नौकरानी को कुछ समझाया। धीमी आवाज में कुछ निर्देश दिए। फिर मुझे हाथ से पकड़कर अपने बेडरूम की तरफ ले गए। अंदर जाते ही दरवाजा बंद कर दिया। कुंडी लगाई। फिर मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरे होठों पर लंबा किस किया। उनकी जीभ इस बार और गहराई तक घुसी। हाथ कमर पर फिसल रहे थे।

मैं: अंकल दरवाजा बंद क्यों किया। मेरी सांसें तेज हो चुकी थीं। कमरे में उनकी अतर की हल्की खुशबू फैली हुई थी।

अंकल: ताकि हमें कोई डिस्टर्ब ना करें और मैं अपनी आरती बेगम को खूब प्यार करूं। उनकी आवाज में गहरी चाहत थी। हाथ पहले से ही मेरी कमर पर थे।

मैं: अंकल मैं आपकी बेगम कैसे हुई। उन्होंने जवाब देते हुए मेरे चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। कपड़े के ऊपर से ही उंगलियां निप्पल दबा रही थीं।

अंकल: मेरी बेगम मुझे अंकल मत बोलो। तुम्हें मेरी कसम। उन्होंने कहा और मुझे अपने आलीशान बेड पर लिटा दिया। शरीर मेरे ऊपर आ गया। रस भरे होठों को चूसने लगे। जीभ अंदर घुसकर घुमा रही थी। होंठों को चूसते हुए गर्दन पर भी चुंबन लगाने लगे। गर्दन की नस पर होंठ रखकर हल्के से चूसा।

मैं पूरी तरह अंकल के नीचे दबी हुई थी। उनके चौड़े और बालों वाले सीने के नीचे मेरी दोनों चूचियां दब गई थीं। वजन का अहसास पूरे शरीर पर था। वे मेरे होंठ चूसते रहे। फिर कुर्ती को ऊपर उठाया। एक चूची को मुंह में भर लिया। गर्म जीभ ने निप्पल को घेरा और जोर से चूसा। दूसरी चूची को हाथ से दबाने लगे। उंगलियां गूंद रही थीं। अचानक उन्होंने निप्पल को दांत से हल्के से काट लिया। मेरे मुंह से दर्द भरी सिसकारी निकल गई। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर।

मैं: दांत से मत काटो प्लीज। दर्द होता है। आवाज में दर्द और मस्ती दोनों थे।

अंकल: मेरी बेगम रानी इस दर्द के पीछे ही असली मजा है। उन्होंने फिर से निप्पल चूसना शुरू कर दिया। दांत और जीभ का खेल जारी रखा।

फिर अंकल ने मेरी कुर्ती पूरी तरह निकाल दी। प्लाजो को भी नीचे खींचकर टांगों से अलग कर दिया। अब मैं बेड पर पूरी नंगी लेटी थी। उन्होंने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारे। कमीज के बटन खोले। पैंट सरकाई। अंदर का कपड़ा भी उतार दिया। नंगे होकर मेरे ऊपर छा गए। मैंने उनका लौड़ा देखा तो घबरा गई। वह काफी लंबा मोटा और फौलादी था। नसें फूली हुई थीं। सिरे पर चमक थी। उन्होंने एक चूची मुंह में भरकर जोर जोर से चूसने लगे। दूसरी को हाथ से दबा रहे थे। चूसने की आवाज गीली और तेज थी।

मैं अंकल के नीचे बुरी तरह दबी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे शेर के नीचे हिरनी दब गई हो। उनका नंगा गर्म शरीर मेरे पूरे शरीर से सटा हुआ था। बालों वाला सीना मेरी चूचियों को रगड़ रहा था। मुझे उनके नंगे शरीर के नीचे दबकर अलग ही मीठा मीठा एहसास हो रहा था। त्वचा की गर्माहट और पसीने की हल्की गंध मिल रही थी।

उनका फौलादी लंड मेरी जांघों के बीच आकर मेरी चुत से टकरा रहा था। हर हलके धक्के के साथ सिरे का गर्म अहसास चुत की पंखुड़ियों पर पड़ रहा था। मीठा असीम आनंद फैल रहा था। मेरी दोनों चूचियां लगातार चूसने के कारण लाल हो गई थीं। जगह जगह दांतों और होंठों के निशान पड़ गए थे। निप्पल सूजे हुए और चमक रहे थे।

अंकल मेरा नंगा जिस्म देखकर अपने होश हवास खोकर पागल ही हो गए थे। आंखें लाल हो चुकी थीं। वे मुझे हर जगह चूमने और चाटने लगे। गर्दन से लेकर कंधों तक। पेट की नमी चाटी। जांघों के अंदरूनी हिस्से को जीभ से चाटा। मेरी मीठी मीठी मस्ती भरी और दर्द भरी सिसकारियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह आह ओह ओह। ईईईई। ईईईई। ऊऊऊऊ। ईईईई ऊऊऊऊ। ईईईई ऊऊऊऊ। ईईईई ऊऊऊऊ। ईईईई। ऊऊऊऊ। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। शरीर हर चाट के साथ कांप रहा था।

फिर अंकल ने अपना लौड़ा मेरी दोनों चूचियों के बीच रख दिया। उन्होंने चूचियों को दोनों तरफ से दबाया और लंड को बीच में रगड़ने लगे। गर्म और कठोर लंड चूचियों की नरम त्वचा पर फिसल रहा था। हर रगड़ के साथ लंड ऊपर की तरफ आता और मेरे मुंह के करीब पहुंच जाता। अंकल के कहने पर मैंने अपना मुंह खोल दिया। उन्होंने लंड का सिरा मेरे होंठों पर रखा। आधा लंड मेरे मुंह में घुस गया। गरम और नमकीन स्वाद जीभ पर फैल गया। फिर वे आगे को हुए और हल्के हल्के धक्के लगाने लगे। लंड मेरे मुंह में अंदर बाहर हो रहा था। मैं भी मस्ती में उसे चूसने लगी। होंठ गोल करके खींच रही थी। जीभ नीचे की नस पर फेर रही थी।

मैं: मममममम। हहहहह। उउउउउ। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। आवाज लंड के इर्द गिर्द दबकर निकल रही थी।

अंकल: बेगम रानी चूसो मेरा लौड़ा। बहुत मजा दे रही हो। मेरी बेगम तुम आसमान से उतरी हुई अप्सरा हो। उनकी सांसें उखड़ी हुई थीं। कुछ देर बाद उन्होंने लंड निकाला और नीचे सरक गए। मेरी चुत पर फिर से मुंह लगा दिया। जीभ ने पंखुड़ियों को फैलाया और अंदर तक चाटना शुरू कर दिया। मेरी जोर जोर से सिसकारियां फूटने लगीं। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह।

उई मां। ममम। ररर। गई। आह आह ओह। ईईईई। मैं अपने चूतड़ों को जोर जोर से उछालने लगी। कमर बेड से उठ रही थी। अचानक मेरी चुत ने ढेर सारा पानी अंकल के मुंह पर छोड़ दिया। गर्म धारा उनकी जीभ और ठोड़ी पर फैल गई। शरीर अकड़कर कांपने लगा।

अंकल का लौड़ा बहुत ही विकराल रूप ले चुका था। नसें फूली हुई थीं। सिरा चमक रहा था। उन्होंने अपना लौड़ा मेरी चुत पर रगड़ना शुरू किया। गीली पंखुड़ियों पर ऊपर नीचे फिसलाया। फिर लंड का सिरा चुत के मुंह पर लगा दिया। उनका तना हुआ लंड चुदाई के लिए तैयार खड़ा था। मैंने आज तक कभी इतने करीब से लंड नहीं देखा था। दिल में एक तेज सनसनी उठी। उनका लंड लंबा मोटा और फौलादी था। चारों तरफ काले बाल घने थे। उसके गोटे बड़े बड़े और गोल थे। भारी लग रहे थे।

मेरी चुत अभी भी पानी छोड़कर पूरी गीली हो गई थी। मुंह से मीठी मीठी सिसकारियां निकलने लगीं। मस्ती में मेरी आंखें बंद हो गईं। उन्होंने मेरी टांगें और चौड़ी कर दीं। घुटनों को अलग किया। फिर अपना लंड मेरी चुत पर लगाया। एक धीमा झटका दिया। लंड का सिरा अंदर घुसने की कोशिश करता हुआ फिसल गया।

अंकल ने अबकी बार लंड को हाथ से पकड़ा। सही जगह पर टिकाया और जोर से धक्का मारा। आधे से ज्यादा लंड मेरी चुत में घुस गया। अचानक तेज जलन और दर्द हुआ। मैं जोर जोर से चीख पड़ी। तभी उन्होंने और जोर से दबाया। दोनों हाथों से मेरे कूल्हों को पकड़कर धक्के लगाए। पूरा लंबा मोटा फौलादी लौड़ा जड़ तक मेरी चुत में फंस गया। मैंने महसूस किया जैसे कुछ फट गया हो। चुत से गर्म खून की पतली धारा निकल पड़ी। लंड पर खून की परत चढ़ गई।

मैं अपना सर जोर से इधर उधर मारने लगी। दर्द भरी चीखें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। आंखों में आंसू आ गए। ऊंईईईईई। मां मर गई। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह आह ओह। ईईईई। चुत की दीवारें लंड की मोटाई से बुरी तरह फैल गई थीं। जलन तेज थी।

मैं: निकाल लो लोड़ा मेरी चुत से। बहुत दर्द हो रहा है। आवाज रोने जैसी हो गई थी। हाथ उनके सीने पर धकेलने की कोशिश कर रहे थे।

अंकल: बेगम बस थोड़ा दर्द होगा। यह पहली बार होता है। थोड़ी देर में तुम्हें आराम आ जाएगा और बहुत मजा आएगा। उनका लंड मेरी चुत को अंदर से हिला रहा था। हर छोटी हलचल पर दर्द बढ़ रहा था। मैंने उनके नीचे से निकलने की काफी कोशिश की। कंधे हिलाए। कमर घुमाई। लेकिन उन्होंने मुझे बुरी तरह दबोच रखा था। उनके वजन और ताकत के आगे मैं टस से मस नहीं हो पा रही थी।

आहहहहहह। उई मां। ममम। अंकल ने मुझे और कसकर दबोचा। फिर ताबड़तोड़ ताकत से धक्के लगाने शुरू कर दिए। लंड पूरा अंदर बाहर होने लगा। हर धक्के के साथ चुत की दीवारें खिंच रही थीं। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह आह। फच फच फच फच फच फच फच फच फच फच फच फच। गीली और खून मिली आवाज कमरे में गूंज रही थी। जांघें उनकी जांघों से टकरा रही थीं।

कमरे में मेरी दर्द भरी सिसकारियां और अंकल की जांघों के टकराने की आवाज फटाफट फटाफट फटाफट गूंज रही थी। फच फच फच फच। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। हर धक्के के साथ मेरा शरीर ऊपर उठ रहा था। बेड की चादर मुट्ठियों में भींच ली थी।

अंकल: अरे बहनचोद तू तो कुँवारी है मेरी बेगम रानी। पहले बताती ना। उनकी आवाज में हैरानी और जोश दोनों थे। उनका फौलादी लंड मेरी चुत में बच्चेदानी तक जा रहा था। हर गहरे धक्के के साथ गर्भाशय के मुंह पर टकरा रहा था। लंड ने मेरी चुत की दीवारों को बुरी तरह फैला दिया था। अंदर की मांसपेशियां खिंचकर कांप रही थीं। ईईईई। ऊऊऊऊ। ईईईई। आ। उई। मां। ममम। ररर। गई। शीईईईईईईई। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। उई।

अंकल ने अपनी पूरी ताकत समेटकर एक और जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड जड़ तक मेरी चुत में गाड़ दिया। बालों वाला हिस्सा मेरी चुत से सट गया। बच्चेदानी तक दबाव महसूस हुआ। ईईईई। ऊऊऊऊ। ईईईई। ऊऊऊऊ। मममममम। हहहहह। उउउउउ। ईईईईईई। आंखों के आगे अंधेरा छा गया।

मै: प्लीज अपना लंड बाहर निकालो। मुझे बहुत दर्द हो रहा है। आवाज टूटी हुई थी। आंसू गालों पर बह रहे थे।

अंकल: बस मेरी बेगम रानी। बस थोड़ी देर में तुम्हें मजा आएगा मेरी जान। बस थोड़ा सा दर्द बर्दाश्त कर ले। फिर तू मेरा लंड मस्ती में लेगी। उन्होंने धीरे से कहा लेकिन धक्के नहीं रोके।

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चुत में किसी ने गरम गरम मुसल डाल दिया हो। अंदर की दीवारें जल रही थीं और फैल रही थीं। अंकल अब काफी जोर जोर से धक्के मार रहे थे। लंड हर बार बच्चेदानी तक जा रहा था। मैं हर धक्के पर उछल रही थी। दर्द के कारण आंखों में आंसू लगातार आ रहे थे। अंकल कभी मेरे आंसू पोंछकर आंखों को चूम रहे थे। कभी मेरे होठों को चूस रहे थे।

दोनों हाथों से मेरी चूचियों को मसल रहे थे। निप्पल को उंगलियों के बीच दबा रहे थे। तभी मेरी चुत ने फिर से पानी छोड़ दिया। इस बार दर्द के साथ आराम और मस्ती की लहर भी आने लगी। जलन कम होने लगी। इसलिए मैंने अपनी दोनों बाहों का हार बनाकर अंकल के गले में डाल लिया। उसे अपने सीने की तरफ और जोर से भींच लिया। शरीर अब उनके धक्कों के साथ खुद हिलने लगा।

और मेरे मुंह से अब मस्ती भरी सिसकारियां गूंज रही थीं। उनमें हल्के हल्के दर्द की सिसकारियां अभी भी मिली हुई थीं। कमरे में फच फच फच फच की गीली आवाजें साफ गूंज रही थीं। लंड के अंदर बाहर होने की आवाज तेज हो गई थी।

अब मैं अंकल से उनकी बेगम की तरह पेश आने लगी थी। शरीर उनके नीचे पूरी तरह खुल गया था। अंकल ने मेरी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख दीं। इस पोजीशन में लंड और गहराई तक घुसने लगा। वे ताबड़तोड़ मेरी चुदाई करने लगे। हर धक्का बच्चेदानी तक पहुंच रहा था।

मेरी दर्द और मस्ती मिली सिसकारियां जोर जोर से कमरे में गूंज रही थीं। आहहहहहह। मेरे। था। राजा। उहहहहह। मममममम। हहहहह। उउउउउ। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। उई। मां। ममम। ररर। गई। आह आह। ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ईईईई ऊऊऊऊ। ईईईई ऊऊऊऊ। ईईईई। ऊऊऊऊ। ईईईई। टांगें उनके कंधों पर कांप रही थीं। चूतड़ों के नीचे चादर गीली हो चुकी थी।

अब तक मेरा पानी दो बार निकल चुका था। लेकिन अंकल रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। वे ताबड़तोड़ धक्के लगाकर मेरी चुत का सत्यानाश कर रहे थे। लंड की मोटाई हर बार दीवारों को और फैला रही थी। छछछ। मममममम। आहहहहहह। उई। मां। ममम। ररर। गई। आह आह आह ओह। ईईईई। ईईईई। फच फच फच। फच फच फच फच। फच फच फच फच फच फच फच फच फच। आवाज और तेज हो गई थी।

मेरा तीसरी बार शरीर अकड़ने लगा। जांघें कड़क हो गईं। कमर बेड से उठ गई। अंकल भी जोर जोर से धक्के लगा रहे थे। सांसें उखड़ी हुई थीं। तभी उन्होंने अपना लंड जड़ तक धक्का मारकर चुत में फंसा लिया। पूरा अंदर गाड़कर ढेर सारा गरम गरम वीर्य उड़ेल दिया। मोटी धारें अंदर फूट रही थीं। साथ ही साथ मेरी चुत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया। दोनों के तरल मिलकर बाहर की तरफ रिसने लगे। शरीर कांपते हुए उनके नीचे ढीला पड़ गया।

उनका लंड अभी भी अंदर था। चुत की दीवारों को जोर जोर से ठोक रहा था। हर छोटी हलचल पर असीम सुख की लहर दौड़ रही थी। मुझसे अब चुदाई का सुख जैसे झेला नहीं जा रहा था। मैंने अंकल की पीठ पर नाखून गड़ा दिए। खुद अपनी गांड हिला हिलाकर उनके लंड को और अंदर लेने लगी। अंकल के लंड ने मेरी चुत को पूरा भिगो दिया था। वीर्य और मेरा पानी मिलकर जांघों तक बह रहा था।

उसकी सांसें फूल गई थीं। वह थक सा गया था। उसने मेरी तरफ प्यार से देखा और बोला: बेगम रानी अब तो तू ही मेरे दिल और महल की मालकिन बनेगी। आंखों में एक अलग सी चमक थी।

मैं: मेरे राजा अब यह बेगम आपकी और आप मेरे शौहर। मेरी आवाज अभी भी कांप रही थी लेकिन खुशी से भरी थी।

अंकल: जो हुक्म बेगम रानी। आज से आपका यह शौहर आपकी खिदमत में आपका गुलाम बनकर रहेगा। उन्होंने कहा। फिर मैंने अपने शौहर को होठों पर लंबा किस दिया। जीभ से उनके होंठ चाटे। बाथरूम जाने के लिए उठने की कोशिश की तो पूरे शरीर और चुत में तेज दर्द हुआ। कमर में जलन थी। मैं उठ नहीं सकी।

मैं: सुनो जी मुझे बाथरूम जाना है। आवाज में कमजोरी थी।

फिर मेरे शौहर ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया। बाहों में भरकर बाथरूम ले गए। दर्द की वजह से मैं खुद खड़ी नहीं हो पा रही थी। वापस भी गोद में ही लाकर बेड पर लिटा दिया। फिर मेरे ऊपर छा गए। रस भरे होठों को चूसने लगे। चूचियों को मुंह में लेकर जोर जोर से चूसा। निप्पल को जीभ से घुमाया। फिर से अपना फौलादी लंड मेरी चुत के मुंह पर लगाया और एक धक्के में अंदर घुसा दिया। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। चुत अभी भी संवेदनशील थी। लंड के घुसते ही फिर से फैल गई।

मैं: सुनो जी धीरे धीरे से करो ना। आपका लोड़ा बहुत लंबा मोटा है। अंदर बच्चेदानी को ठोकर मारता है। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। मेरे शौहर ताबड़तोड़ ताकत से धक्के मार मार कर मेरी चुत का सत्यानाश फिर से कर रहे थे। हर धक्का गहरा और जोरदार था। जांघें उनकी कमर से टकरा रही थीं। फच फच की आवाज दोबारा गूंजने लगी।

मैं फिर से दो बार झड़ गई। शरीर हर बार अकड़कर कांप उठता। तीसरी बार अपने शौहर के साथ साथ झड़ गई। उन्होंने भी उसी पल अपना ढेर सारा गरम गरम लावा मेरी चुत में भर दिया। मोटी धारें अंदर फूट रही थीं। लंड अभी भी धड़क रहा था। फिर मैं और मेरे शौहर अंकल एक दूसरे की बाहों में नंगे ही लेट गए। पसीने से लथपथ शरीर सटे हुए थे। काफी देर बाद अंकल ने मुझे प्रेग्नेंट रोकने की टेबलेट और पेन किलर दी। गर्म पानी से मेरी चुत की सिकाई करने लगे। नरम कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर धीरे धीरे सहलाया। जिससे मुझे काफी आराम आने लगा। जलन कुछ कम हुई।

लेकिन मेरी चुत का बहुत ही बुरा हाल था। सूज कर फूल गई थी। छूने पर भी दर्द होता था। मुझे चलने में दिक्कत हो रही थी। टांगें चौड़ी करके चल रही थी। ऐसे लग रहा था जैसे मेरी चुत में अभी भी लौड़ा अंदर ही हो। थोड़ी देर बाद अंकल ने एक और पेन किलर खिलाई। मैं उनकी गोद में बैठ गई। अपनी बाहों का हार बनाकर उनके गले में डाल दिया। फिर मस्ती भरा बहुत लंबा किस उनके होठों पर दिया। जीभ से उनके होंठ चाटे।

अंकल: मैं प्लानिंग करके तुम्हारी मां को बोलकर तुम्हें चार पांच दिन अपने पास लेकर आऊंगा। नौकरानी को छुट्टी पर भेज कर बहाना बनाकर तुम्हें आंटी की देखभाल करने के लिए। उनकी उंगलियां मेरे बालों में फेर रही थीं।

मैं: अगर आपने एक दिन में मेरी ऐसी हालत खराब कर दी तो चार पांच दिन में आप मुझे मार ही डालोगे। आवाज में हल्की शिकायत और मस्ती दोनों थी।

अंकल: नहीं बेगम। तुम्हें शादी का जोड़ा पहना कर प्यार से सुहागरात मना लूंगा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।

फिर अंकल ने मुझे घर छोड़ दिया। पापा को फैक्ट्री का मैनेजर बना दिया। मेरी मम्मी को एक लाख रुपये देकर बोले घर में जरूरत का सामान ले आना। जब मैं बाथरूम जाने लगी तो अभी भी टांगें चौड़ी करके चल रही थी। चाल में अकड़न साफ थी। मम्मी मेरी चाल देखकर समझ गईं। पहले गुस्सा किया फिर प्यार से सिर सहलाया। गर्म पानी से मेरी सिकाई करने लगीं। धीरे धीरे कपड़े से सहलाती रहीं। आंखों में एक अजीब सी समझ थी।

फिर अंकल मुझे कॉलेज छोड़ने आने लगे और शाम को वापस लेकर भी आने लगे। कॉलेज में मेरी चाल देखकर मेरी सहेलियां मुझे छेड़ने लगीं। अब मेरी चाल बदल गई थी। थोड़ी टांगें चौड़ी करके चलने लगी थी। जांघों के बीच हल्की जलन अभी भी रहती। चार दिनों के बाद अंकल घर पर आए। मम्मी से बोले कि मैं फैक्टरी और मकान आरती के नाम कर दूंगा। फिर मम्मी से कहा कि नौकरानी सात दिनों की छुट्टी लेकर चली गई है। बेगम की देखरेख के लिए आरती को साथ भेज दें। मम्मी ने सहमति दे दी। अंकल मुझे अपने साथ ले गए।

अंकल के आलीशान मकान पर पहुंचकर मैंने देखा नौकरानी तो घर पर ही थी। वह मुस्कुरा रही थी। मैंने अपनी बाहों का हार उनके गले में पहनाया और लंबा चुंबन दिया। होठों पर उनका स्वाद फिर से महसूस हुआ।

अंकल: बेगम रानी मैं तुम्हारे लिए ब्यूटीशियन को बुलाता हूं जो तुम्हें दुल्हन की तरह तैयार करेगी। आंखों में एक योजना की चमक थी।

मैं: मेरे राजा शौहर क्या इरादा है। शरारत भरी हंसी के साथ मैंने उनके गाल पर हल्के से काट लिया। तभी अंकल ने मुझे अपनी बाहों में जोर से भर लिया। मेरे गोरे गाल पर दांत से काटा और शरीर को अपनी बाहों में जोर से मसल दिया। मेरे मुंह से दर्द भरी सिसकारी निकल गई।

आह। ओह। ईईईई। गाल में हल्की जलन फैल गई। तभी नौकरानी कुछ कपड़े लेकर आई। उसने हमें इस हालत में देख लिया। आंखें झुकाए बिना मुस्कुरा दी।

नौकरानी: साहब शादी का जोड़ा और दुल्हन का सामान। हाथों में लाल जोड़ा और जेवर की डिब्बी थी।

अंकल: हां बेड पर रख दो। नौकरानी ने सामान बेड पर रखा और मुस्कुराती हुई चली गई। कमरे से बाहर जाते समय एक बार पीछे मुड़कर देखी।

मैं: सुनो जी मैं नहा लेती हूं। नौकरानी को बोल दो बाथरूम में गीजर ऑन करके बाथटब में पानी भर दे। शरीर अभी भी थका हुआ था।

अंकल: बेगम रानी अब आप इस घर की मालकिन हो। नौकरानी पर हुकुम चलाना सीख लो। उसको बुलाकर खुद आदेश दो। उन्होंने कहा।

मैंने नौकरानी को बुलाया और खुद आदेश दिया। नौकरानी: जी मेम साहब आप आ जाइए बाथरूम में। मैं आपके नहाने का पूरा इंतजाम करती हूं।

मैं: तुम चलो मैं आती हूं। बाथरूम में टब में गर्म पानी भर चुका था। मैं टब में बैठ गई। गर्म पानी से चुत की सूजन को आराम मिलने लगा। नौकरानी मेरी कमर पर साबुन लगाते हुए बातें करने लगी। उसने बताया कि कुछ दिन पहले आपकी चीखें बाहर तक आ रही थीं।

मैं: तुम सुन रही थी क्या सब कुछ। पानी में हाथ फेरते हुए पूछा।

नौकरानी: जी मैडम मैंने आपकी चीखें और आपकी हालत देखी थी। मैंने तो आपकी मम्मी की भी कई बार चीखें सुनी थी। नौकरानी की आवाज में एक पुरानी कहानी का बोझ था। उसने बताया कि अंकल ने उसकी भी सील तोड़ी थी। उसकी चीखें भी इस आलीशान मकान में गूंजी थीं। नौकरानी की उम्र बत्तीस साल थी। वह जब अठारह साल की थी तब से इस घर में नौकरानी है। और चौदह साल से अंकल उसकी चुदाई कर रहे थे।

इस दौरान वह कई बार प्रेग्नेंट हुई थी। अंकल ने हर बार उसकी सफाई करवा दी थी। पेट साफ कराने के बाद भी वह वापस काम पर लग जाती। नौकरानी ने यह भी बताया कि वह अंकल से शादी करना चाहती थी। लेकिन अंकल उसे इंकार करके बोलते थे कि इस घर की मालकिन जवान हो रही है। उनकी आवाज में एक हल्की सी जलन थी।

नौकरानी ने बताया कि वह यह सब मेरे बारे में बोलते थे। इसका मतलब अंकल मेरा जवान होने का इंतजार कर रहे थे। सालों से। और मेरी मम्मी को भी चोदते समय बोलते थे कि तुम्हारी लड़की आरती ही मेरी बेगम और इस घर की मालकिन बनेगी। शब्दों को सुनकर मेरे सीने में एक अजीब सा एहसास हुआ। पानी अभी भी गुनगुना था लेकिन मन भारी हो गया था।

मैं नहा कर बेडरूम में आ गई। वहां देखा तो ब्यूटीशियन मेरा इंतजार कर रही थी। उसने मेरी फुल बॉडी वैक्सिंग की। हर बाल को ध्यान से निकाला। जांघों के अंदर। चुत के आसपास। बगल। फिर काफी कुछ और किया। क्रीम लगाई। मालिश की। उसके बाद मुझे दोबारा स्नान कराया। गर्म पानी से सारे रसायन धुल गए।

ब्यूटीशियन ने मुझे दुल्हन की तरह तैयार कर दिया। लाल जोड़ा पहनाया। मांग में सिंदूर की जगह खुली रखी। गले में हार। हाथों में चूड़ियां। तैयार होते होते शाम हो गई। अंधेरा छाने लगा था। खिड़की से बाहर आसमान गहरा हो चुका था। ब्यूटीशियन अंकल से पैसे लेकर चली गई। अंकल अब बेडरूम में मेरे पास आ गए। उन्होंने व्हिस्की पी रखी थी। सांसों में शराब की हल्की महक थी। शायद जब ब्यूटीशियन मुझे दुल्हन की तरह तैयार कर रही थी तब अंकल बाहर बैठकर व्हिस्की पी रहे होंगे। आंखों में एक अलग नशा था।

अंकल ने नौकरानी को बुलाकर कुछ समझाया। धीमी आवाज में निर्देश दिए। फिर वह चली गई। अंकल बेड पर मेरे पास आ गए। मेरे घूंघट को धीरे से उठाया और बोले।

अंकल: मेरी बेगम आज तो आसमान से उतरी हुई अप्सरा लग रही हो। इस दिन का मैं कितनी बेसब्री से इंतजार कर रहा था। उनकी आवाज में सालों पुरानी चाहत झलक रही थी। उन्होंने अपना हाथ मेरी नथ उतारने के लिए बढ़ाया। मैंने उनके हाथ को पकड़कर रोक दिया।

अंकल: बेगम रानी क्या हुआ। आंखें मेरे चेहरे पर टिकी थीं।

मैं: सुनो जी मेरी नथ उतारने से पहले आपको मुझे वचन देना होगा। आज के बाद नौकरानी और किसी भी पराई लड़की या औरत को हाथ नहीं लगाओगे। मेरी आवाज साफ और दृढ़ थी।

अंकल: बेगम रानी इतने सालों से मैंने तुम्हारी जवानी का इंतजार किया। आज से मैं तुम्हारा गुलाम हूं और तुम्हारा ही रहूंगा। शौहर अंकल की बात सुनकर मैंने खुशी के मारे उनके होंठ चुम लिए। लंबा और गहरा किस।

मैं: सुनो मेरे देवता आज से मैं तुम्हारी हूं। मेरे तन मन और शरीर पर तुम्हारा अधिकार है। मेरी बात सुनकर मेरे शौहर अंकल ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया। अपने होठों को मेरे रस भरे होठों से लगाकर मेरा नीचे वाला होंठ अपने मुंह में भरकर चूसने लगे। जीभ की नोक से होंठ के अंदर को छू रहे थे।

नथ बीच में आने के कारण उनको थोड़ी परेशानी हो रही थी। धातु का छल्ला उनके होंठों को छू रहा था।

अंकल: बेगम आपकी इजाजत हो तो नथ उतार दूं। आवाज में पूछने का अंदाज था।

मैं: मेरे देवता मेरी हर चीज पर आपका अधिकार है। आप जो चाहो कर सकते हो। फिर मेरे शौहर अंकल ने मेरी नथ धीरे से उतारी। ठंडी धातु का अहसास गायब हो गया। उसके बाद उन्होंने मेरी मांग में सिंदूर भर दिया। लाल पाउडर उंगलियों से सही जगह लगाया।

अब मैं उनसे उनकी बीवी बेगम की तरह पेश आने लगी। मैंने आगे बढ़कर उनके चरण स्पर्श किए। सिर उनके पैरों के पास झुका। तभी मेरे शौहर अंकल ने मुझे अपने हाथों से उठा लिया। अपने सीने से लगाकर बाहों में भर लिया। फिर मुझे अपनी गोद में उठाकर बेड पर लिटा दिया। मेरे रस भरे होठों का रसपान करने लगे। उनके मुंह से व्हिस्की की सुगंध आ रही थी। वह महक मुझे भी मदहोश करने लगी थी। सिर हल्का हो रहा था। शरीर उनके स्पर्श से कांप रहा था।

हाथों से मेरी दोनों चूचियों को दबाने लगे। जोरदार लेकिन प्यार भरा दबाव। फिर मेरे शौहर अंकल ने मेरी चोली की डोरी खोली। डोरी खुलते ही दोनों चूचियां आजाद हो गईं। उन्होंने एक चूची मुंह में भर ली और जोर जोर से चूसने लगे। दूसरी को हाथ से मसलने लगे। मेरे सुडोल टाइट सख्त और मुलायम चूचियों को जितना चूसते उतनी ही वे और सख्त व सुडोल होती जा रही थीं। निप्पल मुंह में कठोर हो रहे थे। मेरे मुंह से मीठी मीठी सीत्कार निकलने लगी।

आह। ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई मां। ममम।

मैं: आ मेरे प्राणनाथ धीरे धीरे से। काटो मत। आह आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। शौहर अंकल ने मेरे शरीर का एक एक अंग चूमना शुरू किया। गर्दन। कंधे। पेट। फिर उन्होंने मेरी चोली और लहंगा पूरी तरह उतार दिया। मैं पूरी नंगी हो गई। उन्होंने अपने कपड़े भी उतारकर नंगे हो गए। मुझे अपनी बाहों में भर लिया। पूरे शरीर को चूमने और चाटने लगे। दोनों जांघों को। पिंडलियों को। चूचियों को। पेट को। चूतड़ों को। पैरों के तलवों को। और अंगुलियों को। जीभ की नोक हर जगह फिर रही थी।

कभी वे मेरे ऊपर होते तो कभी मैं उनके ऊपर। पूरे बेड पर ऊपर नीचे पलटी ले रहे थे। मेरी फुल बॉडी वैक्सिंग की वजह से त्वचा चिकनी थी। मैं उनके हाथों से फिसल रही थी। मेरा रूप सौंदर्य देखकर वे अपने होश हवास खोकर पागल हो रहे थे। आंखें लाल थीं। सांसें तेज।

मेरे अंदर एक आग सी लावा बनकर भरने लगी। चुत पूरी तरह गीली हो चुकी थी। पंखुड़ियां सूजी हुई और चमक रही थीं। मैं जोर जोर से सिसकारियां ले रही थी। आहहहहहह। उई। उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच।

मैं: मेरे राजा आप पैंतालीस उम्र के होकर भी मेरी हालत खराब कर मेरी चीखें निकलवा देते हो। आवाज में शिकायत और मस्ती दोनों थी।

अंकल: बेगम रानी तुम्हें देख देख कर बहुत मुठ मारी है। जब से तुमने कॉलेज जाना शुरू किया तुम्हारी जवानी और तुम्हारा फिगर देखकर तुम्हें अपनी बेगम बनाने की सोच लिया था। उनकी आवाज भारी थी।

मैं: मेरे राजा मेरी सील तोड़ कर तुमने जो मेरी हालत खराब की वह मैं ही जानती हूं। चार पांच दिन तक तो मैं ठीक से चल नहीं पाई। इस उम्र में भी आप इक्कीस साल की लड़की की हालत खराब कर दी।

मेरी बातें सुनकर मेरे शौहर अंकल ने जोश में आकर मेरे नीचे वाले होंठ पर जोर से काट लिया। मेरे मुंह से दर्द भरी चीख निकल गई। आह। उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। होंठ में हल्की जलन फैल गई।

मैंने अपने शौहर अंकल की पीठ पर अपनी चूड़ियों से भरे हाथों से मारना शुरू कर दिया। चूड़ियों की आवाज खनक रही थी। तो मेरे शौहर अंकल ने मेरे दोनों हाथों को पकड़कर मेरे सिर के ऊपर उठा लिया। फिर मेरे होठों को अपने मुंह में भरकर चूसने लगे। बीच बीच में दांत से काट लेते थे। जिससे मेरी चीखें और सिसकारियां उनके मुंह में चली जाती थीं। गुउउउउउ। हहहहह। मममममम। आहहहहहह। शरीर उनके नीचे पूरी तरह कैद था।

इस दौरान उनका लंड मेरी दोनों जांघों के बीच में चुत पर जोर जोर से टकरा रहा था। इसलिए मैंने अपनी दोनों टांगें खोलकर ऊपर उठा लीं। इससे उनका लंबा मोटा फौलादी लंड चुदाई की सही पोजीशन में आ गया। चुत के मुंह पर ठोकरे मारने लगा। शौहर अंकल भी अपने फौलादी लंड को हाथ से उठा उठाकर मेरी चुत पर रगड़ रहे थे। ठोकर मार रहे थे। इस दौरान उनका लौड़ा कई बार चुत के मुंह पर घुसने की कोशिश करता हुआ फिसल गया। जिस कारण मैं कई बार जोर से उछल जाती थी। लेकिन अपने शौहर अंकल की मजबूत गिरफ्त से निकल नहीं पाती थी। हाथ सिर के ऊपर जकड़े हुए थे।

तभी मेरे शौहर अंकल ने अपना लंड पकड़ा। चुत के मुंह पर सही जगह रखा। दबाकर जोर से धक्का मार दिया। लंड सुपाड़े की तरह चुत को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया। मेरी जोर से दर्द भरी चीख निकल गई।

आह। ऊं। उई मां। ममम। ररर। गई। आह। ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। थोड़ा रुककर शौहर अंकल ने ताकत से फिर धक्का लगाया। इस बार लंड चुत को चीरता हुआ काफी अंदर तक घुस गया। मैं दर्द के कारण चीखती हुई उनके नीचे दबी बिलख रही थी। आहहहहहह। उई उई मां। ममम। ररर। गई। आह। ओह। ईईईई।

तभी अंकल ने दो और धक्के लगाए। पूरा लंबा मोटा फौलादी लौड़ा जड़ तक मेरी चुत में बच्चेदानी तक गाड़ दिया। बालों वाला हिस्सा चुत से सट गया। गर्भाशय के मुंह पर दबाव महसूस हुआ।

मैं: ऊं। उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। मैं दर्द के मारे बिलख रही थी। दर्द भरी चीखें और सिसकारियां जोर जोर से निकल रही थीं। आहहहहहह। उई उई मां। ममम। ररर। गई। आह आह। ओह। ईईईई। आंखों से आंसू बह रहे थे।

मेरे शौहर अंकल ने मेरे होठों को अपने मुंह में भर लिया। ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए। जिससे मेरी चीखें और सिसकारियां उनके मुंह में जा रही थीं। गगडडड। मममममम। हहहहह। उउउउउ। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। उनका फौलादी लौड़ा जड़ तक मेरी चुत में बच्चेदानी तक अंदर बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ दीवारें फैल रही थीं।

खा खा। मममममम। आहहहहहह। उई उई। उई उई। आह आह ओह। ईईईई। फच फच फच फच। फच फच फच फच। कमरे में आवाजें गूंज रही थीं। आहहहहहह। उई उई उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। फच फच। फच फच। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। फच फच फच फच। फच फच। जांघें उनकी कमर से जोर जोर से टकरा रही थीं। बेड चरमरा रहा था।

तभी मेरी चुत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया। लंड फच फच फच फच करते हुए अंदर बाहर हो रहा था। मैंने अपने चूड़ियों से भरे हाथों को हार बनाकर शौहर अंकल के गले में डाल लिया। प्यार से उनके मुंह को चूमने लगी। मस्ती भरी सिसकारियां निकल रही थीं। आहहहहहह। चोद मुझे मेरे शौहर। हहहहह। मममममम।

अपनी बेगम रानी को चोद कर रसभरी औरत बना दो। आमममम। उउउउउ। ईईईईईई। मममममम। आहहहहहह। उई उई उई उई। उई मां। ममम। आह ओह ओह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। मेरी चुत ने झड़कर फिर से दूसरी बार ढेर सारा पानी छोड़ दिया। मैं अपने चूतड़ों को नीचे से जोर जोर से उछाल रही थी। आहहहहहह। उई। उई उई। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। शरीर कांप रहा था।

मगर मेरे शौहर रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। ताबड़तोड़ जोर जोर से धक्के लगाकर मेरी चुदाई कर रहे थे। फिर उन्होंने मेरी दोनों टांगें उठाकर अपने कंधों पर रख दीं। इस पोजीशन में ताबड़तोड़ अपने लंड को मेरी चुत में बच्चेदानी तक पेल रहे थे। हममयययय। आह ओह। ईईईई। फच फच। फच फच फच फच फच फच। फच फच फच फच। बेडरूम में जोर जोर से आवाजें और सिसकारियां गूंज रही थीं। आहहहहहह। उई उई उई मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई उई। मां। ममम। ररर। गई। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई उई मां। ममम। ररर। गई। आह। आह ओह ओह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह।

मैं तीसरी बार झड़ने के लिए अकड़ने लगी। जांघें कड़क हो गईं। इसलिए मैंने अपने नाखून उनकी पीठ पर गड़ा दिए। तभी शौहर अंकल ने अपने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी। जोर जोर से अकड़कर अपना लौड़ा जड़ तक मेरी चुत में फंसा लिया। ढेर सारी गरम गरम वीर्य की पिचकारी से मेरी चुत भर दी। मोटी धारें अंदर फूट रही थीं। आहहहहहह। उई उई मां। आहहहहहह। शरीर कांपते हुए ढीला पड़ गया। फिर काफी देर तक इसी अवस्था में मेरे ऊपर लेटे रहे। सांसें दोनों की उखड़ी हुई थीं। लंड अभी भी अंदर धड़क रहा था।

फिर मेरे शौहर ने नौकरानी को फोन पर कुछ खाने के लिए मंगवाया। थोड़ी देर में नौकरानी मेरे लिए छुआरे बादाम का गरम दूध और उनके लिए व्हिस्की की बोतल व नमकीन काजू लेकर आई। मैंने चादर खींचकर अपने नंगे शरीर पर डाल ली थी। नौकरानी ने मेरी और बेड की हालत देखी। चादर पर गीले निशान। मेरे गले और चूचियों पर दांतों के निशान। वह मंद मंद मुस्कुरा रही थी।

मेरे शौहर ने अपने हाथों से मुझे दूध पिलाया। गिलास मेरे होठों पर लगाया। मैंने अपने चूड़ियों से भरे हाथों से व्हिस्की के पैग बनाकर उन्हें पिलाए। कुछ देर आराम करने के बाद मेरे शौहर फिर मेरे ऊपर चढ़ गए। लंड दोबारा अंदर घुसा दिया। काफी देर तक चोदते रहे। उसके बाद उन्होंने फिर से मेरे लिए दूध मंगवाया और खुद व्हिस्की पीते रहे।

इस तरह हमारी इस सुहागरात वाली पूरी रात मुझे चार बार जमकर चोदा। हर बार शरीर अकड़ता। हर बार चुत पानी छोड़ती। सुबह होते होते जांघें कांप रही थीं। हम सात दिनों तक इसी तरह रहे। रोज ब्यूटीशियन मुझे दुल्हन की तरह तैयार करने आती। नौकरानी और ब्यूटीशियन मुझे नहलातीं। तैयार करते समय मेरे शरीर पर निशान देखकर और मेरी चलने की हालत देखकर मंद मंद मुस्कुराती रहतीं। जांघों के अंदर बैंगनी निशान। चूचियों पर दांतों के निशान। चुत की हल्की सूजन।

शौहर अंकल मुझे सात दिनों तक बीवी बेगम की तरह रात दिन ताबड़तोड़ अपने लंबे मोटे फौलादी लंड से चोदते रहे। सुबह। दोपहर। रात। सात दिनों में मेरा बॉडी फिगर बत्तीस अट्ठाईस चौंतीस से निखरकर चौंतीस तीस छत्तीस हो गया। चूचियां भारी हो गईं। कमर और गहरी। जांघें भरी हुई।

उसके बाद ये मुझे कॉलेज से घर पर लाकर जमकर चोदते। मेरा बॉडी फिगर लड़की से भरपूर रसभरी औरत की तरह होता जा रहा था। कुछ दिनों के बाद इनकी पहली बेगम जो बीमार होकर बेड पर लेटी रहती थी उसका देहांत हो गया। जो नौकरानी उनकी देखभाल करती थी उसे घर के कामकाज के लिए रख लिया।

फिर शौहर अंकल ने मेरे साथ कानूनी तौर पर शादी कर ली। अपनी करोड़ों की जायदाद मेरे नाम कर मुझे मालकिन बना दिया। और मुझे दिन रात चोद चोद कर तीन बच्चों की मम्मी बना दिया। आज मेरा बॉडी फिगर चालीस चौंतीस छियालीस है। और हमारा जीवन हंसी खुशी बीत रहा है।

आपकी रिया।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।