मेरा नाम साहिल है और मैं दिल्ली में रहता हूँ। वैसे तो मेरा बिजनेस कुछ और है मगर मैं दिन में चार-पाँच घंटे के लिए कुछ ऐसा काम भी करता हूँ जिससे मुझे अतिरिक्त इनकम होती है क्योंकि बड़ी सिटी में रहना इतना आसान नहीं है और वह भी इस मंदी के दौर में।
कुछ समय पहले मुझे मेरी दोस्त प्रिया मिली। जो कि मेरी पुरानी दोस्त है मगर काफी समय से मुलाकात नहीं हो पाई थी। हम लोगों ने साथ में कॉफी ली और खूब सारी बातें कीं। उसने बताया कि उसका फैशन डिजाइनिंग का काम है इसलिए पूरे दिन बिजी रहती हूँ।
बातों-बातों में उसने बताया कि हमारी शॉप पर बहुत सुंदर-सुंदर भाभियाँ आती हैं। और कई तो मुझसे चिपकने लग जाती हैं। मजाक-मजाक में कहती हैं कि काश तू लड़का होती तो सारी रात तेरे साथ रुक जाती। मैंने कहा मैं चला जाता हूँ।
पहले तो उसने मजाक समझा मगर जब मैंने इसे सीरियसली लेने को कहा तो वह बोली तुम कहना क्या चाहते हो। मैंने कहा कुछ नहीं सीधी-सीधी बात है। अगर कोई मुझे इसके लिए पे करे तो मैं चला जाता हूँ। वह कुछ देर शांत रही।
फिर बोली क्या यह तुम पहले कर चुके हो। मैंने कहा हाँ। मगर दो बार। उसके बाद वह दोनों दिल्ली के बाहर चली गई थीं। प्रिया बोली कि मेरी दो फ्रेंड्स हैं जो मेरी शॉप पर अक्सर आती हैं और उन्हें इसी टाइप का एक लड़का चाहिए जो दिन में जाकर उन्हें सेक्स के मजे दे सके।
मैंने कहा क्यों नहीं। तुम उन्हें मेरे मोबाइल नंबर दे दो और मेरी रेट बता दो। प्रिया बोली कितना बताऊँ। मैंने कहा मिनिमम चार हजार दिन ओनली और आठ हजार पूरी रात के। जिसमें मैं सिर्फ दो बार ही सेक्स करूँगा। और एक औरत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अगर मुझे दिल्ली से बाहर ले जाना चाहती है तो आठ हजार प्रति दिन के हिसाब से बात कर लो।
प्रिया बोली ओके अभी मैं जाती हूँ। अगर उससे बात हुई तो तुम्हें कॉल कर दूँगी। मैंने जाते-जाते उससे कहा कि यह भी ध्यान रखना कि मैं दिल्ली में सिर्फ होम सर्विस ही देता हूँ अगर होटल में हो तो मना कर देना क्योंकि वहाँ रिस्क रहता है। इसके बाद वह चली गई मैं भी मेरे ऑफिस आ गया।
अगले दिन शाम को करीब साढ़े पाँच बजे प्रिया का फोन आया। प्रिया ने बताया कि उसकी फ्रेंड शिल्पी है उसकी फरीदाबाद में गवर्नमेंट ड्यूटी लगी है और वह तुम्हें फरीदाबाद ले कर जाना चाहती है। मैंने कहा पेमेंट की बात कर ली। उसने कहा ओके मैंने दस हजार प्रति दिन की बात करी है।
टाइम फिक्स हुआ और मैं ठीक आठ बजे तैयार हो कर सोडाला थाने के सामने मेन रोड पर आ गया। मैंने अपने कपड़ों का रंग शिल्पी को बता दिया था। वह ठीक आठ बजकर दस मिनट पर वहाँ स्विफ्ट गाड़ी ले कर पहुँची मेरे कपड़ों का रंग देख के उसने गाड़ी मेरे पास रोक दी।
नजरों-नजरों में हम दोनों समझ गए कि यह वही है जिसके साथ हमें फरीदाबाद का सफर करना है। शिल्पी ही ड्राइव कर रही थी। वह अट्ठाईस-तीस साल की मैरिड वुमन थी रंग साफ और फिरोजी रंग की साड़ी पहन रखी थी। गाड़ी मेरे पास रुकी। उसने पूछा साहिल। मैंने हाँ में सिर हिला दिया।
जैसे ही मैं बैठने लगा उसने पूछा तुम्हें गाड़ी चलानी आती है। मैंने कहा हाँ क्यों। तो वह गाड़ी से उतर गई और बोली तुम गाड़ी चलाओ मैं उधर बैठूँगी। मैंने कहा ओके कोई प्रॉब्लम नहीं है।
हम लोग रवाना हुए। रास्ते में बातें होती रहीं जैसे ही बदरपुर बॉर्डर पार किया उसने अपना हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया। मुझे हँसी आ गई। शिल्पी बोली क्या हुआ हँसी क्यों आई। मैंने कहा अब समझ में आया तुम ड्राइव क्यों नहीं करना चाहती थी। वरना तुम्हारे दोनों हाथ बिजी हो जाते। वह भी जोर से हँस पड़ी।
मैंने कहा थोड़ा रुको तुम्हारे लिए आसानी कर देता हूँ। फिर मैंने गाड़ी साइड में रोकी और अपना बैग खोला और उसमें से अपना बर्मूडा निकाला और साइड में आके पैंट उतार कर उसे पहन लिया। वह मुस्कुराने लगी। मैं वापस गाड़ी में बैठ के ड्राइव करने लगा।
जैसे ही गाड़ी रवाना हुई उसने अपना सीट बेल्ट खोल दिया और अपना एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया। और मुझे तिरछी नजरों से देखते हुए सहलाने लगी। अब मेरा अंडरवियर छोटा पड़ने लग गया था। मतलब मेरा लंड खड़ा होने लगा। उसने अपना हाथ मेरे बर्मूडे के अंदर डालना चाहा तो मैंने चलती गाड़ी में ही अपना बर्मूडा नीचे खिसका दिया। अब शिल्पी के लिए आसानी हो गई। उसने मेरा लंड हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। मेरा लंड पूरी जवानी पर था।
शिल्पी बोली वाह कितना सुंदर लंड है तुम्हारा। तभी वह झुक कर मेरी जाँघों के पास आ गई और मेरे लंड को चूम लिया। मैंने कहा गाड़ी में ही चालू हो गई आप तो। अभी फरीदाबाद आने वाला है मैम। शिल्पी बोली मुझे हर पल का आनंद उठाना अच्छा लगता है। और मैं इस टाइम को यूँ ही नहीं जाने दूँगी। मैंने कहा कि मैम अभी तक मैं बुक नहीं हुआ हूँ। वह मेरा इशारा समझ गई। उसने पीछे पड़े अपने बैग में से मुझे बीस हजार निकाल के दिए। मैंने कहा अब मैं आपका हुआ।
उसने झट से अपना मुँह मेरे लंड पर रख दिया और सुपड़ा मुँह में ले लिया। वाह मजा आ गया। मैंने एक हाथ से शिल्पी की पीठ सहलानी शुरू की। ओह माय गॉड उसका बदन जल रहा था। मैंने कहा कि तुम तो जल रही हो। फिर उसने बताया कि वह अपने पति से संतुष्ट नहीं हो पाती इसलिए ही तुम्हें साथ ले कर आई हूँ। वह तो बीस-पच्चीस धक्कों में ही झड़ जाता है काश तुम मुझे पहले मिले होते तो इतने दिन तड़फना नहीं पड़ता।
अब मैं लगातार उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था और वह मेरा लंड मुँह में डाले-डाले चूस रही थी। गाड़ी चलने की वजह से शिल्पी से दाँत चुभने का डर लग रहा था इसलिए मेरा लंड पूरे ताव में नहीं आ रहा था। और शिल्पी रुकने का नाम नहीं ले रही थी चूसते-चूसते उसका मुँह दुखने लगा था।
मैं अपना हाथ पीठ से सरकाते हुए उसके कुल्हों तक ले गया और उसकी साड़ी ऊपर की तरफ खींचने लगा। उसने अपनी गाँड थोड़ी सी ऊपर की और साड़ी उसकी कमर पर आ गई। वह पहले से ही प्लान बना कर आई थी इसलिए पैंटी भी नहीं पहनी थी मैं गाड़ी चलाते-चलाते थोड़ा तिरछा हो कर अपना हाथ उसकी गाँड से होते हुए नीचे ले गया।
उसकी चूत गीली हो चुकी थी और पानी छोड़ रही थी। वह अभी भी मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। मैं धीरे-धीरे अपनी एक उँगली उसकी चूत में डालने लगा और अंदर-बाहर करने लगा। शिल्पी ने अपनी टाँगें खोल दीं और मेरे और पास आ गई। अब मैंने दो उँगलियाँ उसकी चूत में डालनी शुरू कर दीं। उसने अचानक अपने मुँह से मेरा लंड निकाला और सिसकारियाँ भरने लगी।
मैंने तुरंत गाड़ी हाईवे से साइड में ले कर रोकी। और बंद कर दी। चारों तरफ अंधेरा था। हाईवे के ट्रैफिक के कारण अंदर भी रोशनी आ रही थी। मैंने शिल्पी की सीट सीधी कर दी और उसकी साड़ी ऊपर करके उसके सामने उसकी तरफ मुँह करके बैठ गया।
वह बोली कि तुम वाकई फीलिंग समझते हो मैं भी यही चाहती थी। हालाँकि गाड़ी में सेक्स बड़ा मुश्किल होता है मगर हमने मैनेज किया। मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधे पर रखीं और उस पर लेट के उसे किस करने लगा। उसने मेरे होठों को जोर-जोर से चूसना शुरू कर दिया और ऊूँऊूँऊूँन…… आआआह…… आआआह्ह्ह्ह…… करने लगी। मैंने कपड़ों के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए। उसने अपने ही हाथों से एक-एक करके हुक खोले और बूब्स बाहर निकाल के बोली इन्हें चूसो प्लीज……।
मैंने जैसे ही चूसना शुरू किया वह फिर से आआआह्ह्ह्ह…… ओओओह्ह्ह्ह्ह। प्लीज…… सक मी सक मी…… चिल्लाने लगी। उस पर लेटे होने के कारण मेरा लंड उसकी चूत से रगड़ खा रहा था और वह बार-बार मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत में घुसाने की कोशिश कर रही थी।
मैंने मौके की नजाकत को समझते हुए अपना लंड उसकी गीली चूत के ऊपर रख कर हल्का सा दबाव बनाया। मेरा लंड शिल्पी की चूत में थोड़ा सा सरक गया। बस इतने में तो वह नीचे से चूतड़ उछालने लगी…… ओह्ह्ह्ह्ह हाँ साहिल पूरा डाल दो न प्लीज…… ओह्ह्ह्ह…… मैं मर जाऊँगी इसके बिना…… चोदो…… डालो। उसकी चूत एकदम गरम हो गई थी। सच बताऊँ तो इतनी सेक्सी भाभी शिल्पी और इतनी गरम और चिकनी चूत के कारण मेरी हालत भी खराब हो गई थी।
इतने में शिल्पी ने नीचे से एक जोरदार का उछाल लिया और मेरा आधा लंड शिल्पी की चूत में घुस गया। एक बच्चे की माँ होने के बाद भी उसकी चूत कमाल की थी। जैसे ही आधा लंड उसकी चूत में घुसा वह सिसकारियाँ लेती हुई मुझसे चिपक गई। बोली साहिल मजा आ गया……। मैंने कहा मजा तो फरीदाबाद में आएगा जब मैं आपकी चूत चाटूँगा और अपनी जीभ आपकी चूत में डाल-डाल के आपको मजा दूँगा।
यह सुनते ही उसमें और जोश आ गया। उसने मेरी गाँड पर अपने दोनों हाथ रखे और जोर से नीचे धकेल दिया और खुद की गाँड को ऊपर उछाल दिया। ऐसा करते ही मेरा पूरा लंड शिल्पी की चूत में घुस गया। वह बोली साहिल मजा आ गया। अब बैठ के धीरे-धीरे धक्के मारो।
मैं सीधा उकड़ू बैठ के धीरे-धीरे धक्के मारने लगा और वह ओओओह्ह्ह्ह…… माय गॉड…… फक मी…… फक मी…… चोदो साहिल चोदो…… आआह्ह्ह्ह…… आआह्ह्ह्ह…… करने लगी। मैं साथ-साथ उसके बूब्स भी मसलते जा रहा था। मैंने कहा शिल्पी कैसी लगी मेरी सर्विस। वह बोली अभी तो बस चोदो काम बोलो मत आआह्ह्ह्ह। ओह्ह्ह्ह……।
चूत मारते-मारते मैंने अपनी एक उँगली थूक से गीली की और उसके चूत के दाने को सहलाने लगा। वह और जोर-जोर से ऊूँऊूँन…… आआआह्ह्ह्ह…… करके अपनी गाँड उछालने लगी। तभी वह बोली साहिल मैं आने वाली हूँ ओओओह्ह्ह्ह…… मैं झड़ने वाली हूँ प्लीज…… मुझे कस के पकड़ लो……। मैंने उसके बूब्स को कस के पकड़ लिया और उसने मेरी बाजुओं को कस के पकड़ लिया। मैं भी झड़ने वाला था मैंने जोर-जोर से झटके मारने शुरू कर दिए।
पूरी गाड़ी में एकदम गर्मी हो गई थी तभी। मानो जैसे शिल्पी की चूत में से लावा फूटा हो। वह पानी छोड़ने लगी। इतना सोचते ही मेरा भी अपने आप से कंट्रोल नहीं रहा और मैं जोर-जोर से बोलने लगा ओ शिल्पी आई एम कमिंग आई एम कमिंग…… आआह्ह्ह्ह…… ओह्ह्ह…… मेरी जान मजा आ गया…… मुझे अपने सीने से चिपका लो जान…… य्य्याआआआ……। मैंने भी सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया। मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई। और मैं शिल्पी से कस के चिपक गया।
शिल्पी ने मुझे अपने नंगे सीने से चिपका लिया और बाहों में कस लिया और मेरे बालों में हाथ फेरने लगी। उसकी ठंडी हुई साँसें हल्के पसीने आए हुए गर्दन और कानों पर पड़ रही थीं। जिससे मेरे बदन में और सिहरन आ रही थी। कुछ देर बाद हम एक-दूसरे से अलग हुए। मैंने अपने कपड़े पहने और शिल्पी ने भी अपने कपड़े सही किए।
शिल्पी बोली काम दिल्ली में जब मैं तुम्हें बुलाऊँ तुम्हें आना होगा। मैंने कहा मैम मैं पैसे के लिए यह सब करता हूँ। मगर हाँ जब मैं सेक्स करता हूँ तो यह अहसास नहीं होने देता कि आप गैर मर्द के साथ हैं। आप जब बुलाओगे मैं आ जाऊँगा। आप प्रिया की दोस्त हैं इसलिए पैसे की बात आप प्रिया से कर लेना।
शिल्पी बोली कि दिल्ली में मेरी दो और सहेलियाँ हैं जिन्हें तुम्हारी जरूरत पड़ेगी। मैंने कहा ओके। नो प्रॉब्लम्स। इसके बाद हम फरीदाबाद के लिए रवाना हो गए।
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