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कुँवारी सेक्रेटरी प्रेग्नेंट हो गई

हेलो दोस्तों। आपकी रिया एक बार फिर से एक सच्ची कहानी लेकर आई है जो कि मेरी खास सहेली की है। आज मैं वह सच्ची कहानी आपसे शेयर कर रही हूँ।

मेरी सहेली का नाम टीना है। वह एक मल्टी कंपनी में पर्सनल सेक्रेटरी की पोस्ट पर नौकरी करती है। उसकी उम्र 24 साल और बॉडी फिगर 34-30-36 है। वह बहुत ही खूबसूरत, गोरी चिट्टी और सेक्सी है। उसके गोल मम्मे ब्लाउज या टॉप के अंदर कसकर भरे रहते थे। कमर पतली और चूतड़ गोल मोटे थे जो स्कर्ट या साड़ी में भी साफ दिखते थे। वह पीजी में रहती है। अब आगे की कहानी उसी की जुबानी।

मैं एक कंपनी में अपनी पर्सनल सेक्रेटरी हूँ और सुबह शाम सिटी बस से ही ऑफिस आती जाती थी। सुबह शाम सिटी बस में काफी खचाखच भीड़ होती थी जिस कारण मैं बस के गेट के साथ ही पीछे के हिस्से में सीटें नहीं पाती थी।

बस में स्टैंडिंग जगह थी। गेट से चढ़ते ही राइट हैंड पर एक छोटा पार्टीशन था जिसमें 4-5 लोग खड़े हो सकते थे और बाकी ओपन स्टैंडिंग था। भीड़ के कारण मैं अक्सर उस पार्टीशन वाले हिस्से में ही घुस कर खड़ी हो जाती थी। शरीर इधर उधर दबता रहता था। साँस लेना भी मुश्किल हो जाता था।

इस दौरान खचाखच भीड़ में काफी लोग मेरी चुचियों और चूतड़ों पर हाथ साफ कर दिया करते थे। कोई हथेली मेरे मम्मों के गोल आकार पर धीरे से रगड़ती तो कोई उँगलियाँ चूतड़ों की नर्म मांसपेशियों में दबा देती। कपड़ों के ऊपर से ही उन हाथों की गर्माहट और दबाव साफ महसूस होता। लेकिन बस में खचाखच भीड़ होने के कारण मैं चुप रहती। मैं कई दिनों से नोटिस कर रही थी कि एक 55 साल के आसपास उम्र का आदमी हमेशा मेरे साथ ही टच होकर अपना लंड मेरे चूतड़ों की दरार में सटा कर खड़ा होता था।

उसका मोटा और गर्म लंड पैंट के अंदर से मेरी गाँड की बीच वाली नरम दरार में ठीक से फँस जाता। हर झटके के साथ वह आगे पीछे हिलता और मेरी चूतड़ों की नमी और गर्माहट को महसूस करता। शुरू शुरू में मैं उसको गुस्से से देखती थी लेकिन धीरे धीरे उसकी हरकतों से मुझे अजीब सा आनंद आने लगा था। चूतड़ों की दरार में उसका दबाव और लंड की कठोरता से शरीर के अंदर हल्की सी सनसनी फैलने लगी थी।

और इस दौरान हमारी आपस में बातचीत शुरू हो गई। उसने बताया कि उसका नाम शिशुपाल है। वह सरकारी दफ्तर में एक इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर था। इसलिए मैं बस में आते जाते उससे खुलकर बातें करने लगी थी और वह भी अक्सर मेरे पीछे खड़ा होकर अपने लंड से मेरे चूतड़ों में ठोकर मारता रहता था। पैंट के अंदर से उसका फौलादी लंड मेरी गाँड की नरम मांस पर जोर से दस्तक देता। हर बस के झटके के साथ वह गर्म कठोर हिस्सा मेरी दरार में और गहराई तक दबता। मौका देखकर मेरी चुचियों को भी दबा दिया करता था। उसकी मोटी उँगलियाँ मेरे मम्मों के गोल हिस्से को कसकर पकड़तीं और निप्पल के आसपास घुमातीं। कपड़ों के नीचे से ही चुचियों में गरमाहट और सिहरन दौड़ जाती। जिसमें मुझे आनंद आने लगा था।

अब वह खचाखच भीड़ में मनचलों लोगों से मेरी हिफाजत भी करने लगा था इसलिए मैं उसकी तरफ आकर्षित होती चली गई। हमने अपने फोन नंबर भी आपस में एक्सचेंज कर लिए थे और कई बार ऑफिस में काम ज्यादा होने की वजह से लेट हो जाती थी तो वह मुझे फोन पर पूछ कर मेरे साथ ही आता था इसलिए मुझे अंधेरा होने पर भी उसका साथ मिल जाता था।

इस टाइम बस में भीड़ कम होती थी और हम बस में पीछे वाले हिस्से में ही खड़े होते थे। उस टाइम उस हिस्से में कोई और नहीं होता था और इसका फायदा उठाकर शिशुपाल मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरे होठों पर लंबा चुंबन ले लिया करता था। उसके मोटे होंठ मेरे नरम होठों को धीरे से चूसते। जीभ की नोक मेरे होंठों के बीच घुसकर अंदर की गर्माहट छूती। मेरी साँसें तेज हो जातीं। मस्ती में आकर मैं भी उसे सहयोग करने लगी थी। अपने होंठ उसके होठों पर दबाकर जवाब देती। मैं ऑफिस में पर्सनल सेक्रेटरी होने के कारण अक्सर साड़ी और स्कर्ट पहनती थी जिस कारण मेरा रूप सौंदर्य और खिलकर लोगों की आँखों में हवस की आग भर देता था।

एक दिन लेट होने के कारण हम दोनों बस के पिछले हिस्से में थे। सर्दी का दिन था तो काफी अँधेरा हो गया था और सवारियाँ भी बहुत कम थीं।

उस दिन मैंने स्कर्ट पहनी हुई थी जिसमें आगे की तरफ एक लंबा कट था। उस दिन शिशुपाल ने मुझे अपनी बाहों में भींच कर मेरे रस भरे होठों को चूस रहा था। उसके मजबूत हाथ मेरी कमर पर कस गए। होंठों पर गीली गर्माहट फैल गई। मेरे टॉप में अपना हाथ डाल कर मेरे चुचियों को मसल रहा था। उसकी उँगलियाँ ब्लाउज के अंदर घुसकर नंगे मम्मों को पकड़तीं। निप्पल को हल्के से पिंच करतीं तो बिजली सी दौड़ जाती। मेरे अंदर चिंगारी भर कर लावा फूटने लगा था तभी शिशुपाल ने अपनी पैंट की जिप खोलकर अपना लंबा मोटा लंड निकाल मेरे हाथ में दे दिया।

मैं हैरान होकर उसके लंबे मोटे फौलादी लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी थी। वह गर्म और कठोर था। नसों की उभरी लकीरें हथेली के नीचे साफ महसूस होतीं। आगे का मुलायम सिरा पहले से ही थोड़ा गीला था। मैं धीरे धीरे ऊपर नीचे घुमाती। हैरान थी इस उम्र में भी उसका लंड इतना फौलादी था। शिशुपाल अपने हाथ से मेरी गाँड और मेरी चुत को सहला रहा था। उसकी मोटी हथेली चूतड़ों की नरम गोलाई पर फिरती। उँगलियाँ चुत की दरार तक पहुँचकर हल्के दबाव से रगड़तीं।

फिर उसने मेरी स्कर्ट ऊपर को उठानी चाही तो मैंने उसे रोककर अपनी स्कर्ट को घुमा कर आगे वाला लंबा कट पीछे कर दिया जिससे मेरे स्कर्ट बिना उठाए आधे से ज्यादा मेरे चूतड़ नंगे हो गए। ठंडी हवा नंगी त्वचा पर लगने लगी। और शिशुपाल ने अपना लौड़ा मेरे चूतड़ों के बीच में देकर हल्के हल्के से धक्के लगाने लगा। उसका गर्म कठोर लंड मेरी गाँड की नरम दरार में फँसकर आगे पीछे सरकने लगा। हर धक्के के साथ मांसपेशियाँ थोड़ी सी खिंचतीं और गर्माहट फैलती।

मेरी चुत पानी छोड़ कर काफी गीली हो चुकी थी। अंदर की दीवारें पहले से ही चिकनी और गर्म हो रही थीं। गीलापन जाँघों के अंदर तक फैलने लगा था। मैंने मौके की नजाकत को देखकर अपनी टाँगें चौड़ी कर ली और आगे को झुक गई। कमर थोड़ी सी झुकी तो चूत का मुँह पीछे की ओर खुलकर और साफ हो गया।

अब शिशुपाल का लंड मेरी चुत के मुँह पर ठोकर मार रहा था। उसका गर्म सिरा गीली पंखुड़ियों पर बार बार टकराता। शिशुपाल अपने लंड को हाथ से पकड़ कर मेरी चुत के मुँह पर सेट कर मुझे इशारा किया तो मैं अपने दाँत भींच कर आने वाले दर्द को सोच कर तैयार थी। साँस अंदर रोक ली। शरीर में तनाव आ गया। तभी शिशुपाल ने अपने लंड को जोर का धक्का दिया। लंड मेरी चुत के मुँह पर जोर से ठोकर मार कर फिसल गया। टाइट मुँह ने उसे अंदर जाने नहीं दिया। और मेरे मुँह से आह निकल कर मैं आगे को खिसक गई। दर्द की हल्की लहर कमर तक पहुँची।

फिर शिशुपाल ने मेरे हाथ में अपना लंड देकर इशारा किया तो मैंने शिशुपाल का लंड पकड़ कर अपने चूतड़ों के नीचे से अपनी चुत के मुँह पर लगा कर शिशुपाल को उसका लौड़ा दबाकर इशारा किया। मेरी उँगलियों में उसका गर्म कठोरपन साफ महसूस हो रहा था। शिशुपाल ने फिर से तगड़ा धक्का दिया। इस बार भी शिशुपाल का लंड मेरी चुत के मुँह पर चोट मारता हुआ फिसल गया। गीला सिरा पंखुड़ियों को चीरने की कोशिश करता पर टाइट छेद उसे बाहर धकेल देता।

इस तरह से मैंने और शिशुपाल ने 6-7 बार कोशिश की लेकिन शिशुपाल का फौलादी मोटा लंबा लंड हर बार मेरी चुत के मुँह पर जोर से चोट मारकर फिसल जाता। हर धक्के के साथ चुत का मुँह और दुखने लगता। लालिमा और जलन फैलने लगी। इस तरह मेरी चुत दुखने लगी थी। मेरी चुत कुँवारी और टाइट होने के कारण शिशुपाल का लौड़ा घुस नहीं पा रहा था।

अब हमारा आधा घंटे बाद स्टॉप भी आने वाला था इसलिए हमने अपने कपड़े ठीक कर के अपने आप को संभाला। स्कर्ट को सही जगह घुमाया। जिप बंद की। साँसें अभी भी तेज थीं। चुत के मुँह पर हल्की जलन और गीलापन बाकी रह गया था। सारी रात में शिशुपाल के फौलादी लंड के बारे में सोचती रही। उसकी नसें, उसकी गर्माहट, उसका मोटा आकार बार बार याद आता। शरीर में हल्की सी सिहरन दौड़ती। और मीठे मीठे सपनों में सो गई।

मैं यह भी सोच रही थी कि अगर शिशुपाल का फौलादी लंड बस में मेरी चुत में घुस जाता तो मेरी चीखें निकलने के कारण बस वालों को पता चल जाता। दर्द की तीव्रता और चीख की कल्पना से ही दिल जोर से धड़कने लगता। यह बात मैंने अगले दिन फोन पर शिशुपाल को बताई तो शिशुपाल को पता चला कि मैं कुँवारी हूँ। फोन पर उसकी आवाज थोड़ी भारी हो गई थी।

शिशुपाल ने फोन करके बताया कि 3 हॉलीडे एक साथ पड़ रहे हैं और वह 3 दिन की और छुट्टी लेकर पूरा सप्ताह मुझे अपने फार्म हाउस पर प्रोग्राम बनाया। मैं शिशुपाल को मना नहीं कर पाई। उसके लंड की याद और शरीर की बाकी जलन ने इनकार की हिम्मत नहीं दी। और मैं भी 3 दिन की और छुट्टी लेकर पूरा सप्ताह उसके फार्म हाउस पर जाने के लिए पार्लर से वैक्सिंग फेशियल वगैरह काम करा कर तैयार हो गई। गर्म मोम की परत जाँघों और चुत के आसपास चिपकती। बाल खिंचने पर हल्की चुभन होती। त्वचा साफ और चिकनी हो जाती। फेशियल की ठंडी क्रीम चेहरे पर फैलती। उस दिन शिशुपाल ने स्पेशल मुझे साड़ी पहनने के लिए बोला था।

तय समय पर मैं पहुँची तो शिशुपाल अपनी कार लेकर मेरा इंतजार कर रहा था। और मुझे इस रूप में देखकर वह खुशी से फूला नहीं समा रहा था। उसकी आँखें मेरे पूरे शरीर पर घूम रही थीं। मैंने उस दिन ऑरेंज साड़ी, ऑरेंज ब्लाउज और ऑरेंज चूड़ियों का सेट और मैचिंग हेयर स्टाइल फुल मेकअप में थी। साड़ी की चमकदार चमक धूप में और बढ़ गई थी। ब्लाउज चुचियों को कसकर पकड़े हुए था।

मेरे कार में बैठते ही शिशुपाल ने आगे बढ़कर मेरे होठों पर एक किस किया। उसके मोटे होंठ मेरे नरम होठों पर दबे। हल्की गर्माहट और गीलापन फैल गया। फिर शिशुपाल ने कार चला कर आगे मार्केट में एक किनारे रोक कर वह कुछ सामान लेने चला गया। वापस आया तो उसके हाथ में 3 रम दारू की बोतल और खाने पीने का ढेर सारा सामान था। बोतलों की ठंडी सतह उसके हाथों में चमक रही थी।

फिर 5 घंटे की ड्राइव कर कर हम शिशुपाल के फार्म हाउस पर पहुँच गए। वह एक छोटा लेकिन बहुत ही अच्छा फार्म हाउस था। उसमें बीचो बीच 3 बेडरूम सेट बना हुआ था और फार्म हाउस के बीचों बीच एक स्विमिंग पूल भी था। पानी की हल्की लहरें धूप में चमक रही थीं।

फार्म हाउस का मेन गेट बंद करने के बाद शिशुपाल ने मुझे मेरी साड़ी खींचकर अपनी बाहों में भर लिया। उसकी मजबूत बाँहें मेरी कमर के चारों ओर कस गईं। इस कारण मेरी दोनों चुचियाँ शिशुपाल के सीने में दब गईं। ब्लाउज के ऊपर से मम्मों की नरम गोलाई उसके सीने की कठोरता से दबकर चपटी हो गई। और अपने होंठ मेरे होठों से लगाकर एक लंबा किस ले लिया। उसकी जीभ मेरे होठों के बीच घुसकर अंदर की गर्माहट छूने लगी। मैंने भी अपने बाहों का हार बना कर उसके गले में डाल उसको सहयोग करने लगी। अपनी उँगलियाँ उसकी गर्दन की नसों पर फेरती रहीं।

काफी देर तक मेरे होंठ चूसने के बाद उसने मुझे अपनी बाहों में उठा कर बेडरूम में बेड पर लिटा कर मेरे ऊपर आ गया। उसका पूरा वजन मेरे शरीर पर आ गया। वह लगातार मेरे होठों को चूस कर और अपने हाथों से मेरे चुचियों को दबाने लगा। उसकी मोटी हथेलियाँ ब्लाउज के ऊपर से मम्मों को कसकर मसल रही थीं। निप्पल कपड़े के अंदर से कठोर होकर उँगलियों के दबाव में दब रहे थे। जिस कारण मेरे होठों से सिसकारियाँ निकलने लगीं। हल्की आहें और सिसकियाँ कमरे में गूँजने लगीं। फिर उसने मेरे ब्लाउज की डोरियाँ खींचकर ब्लाउज अलग कर दिया। डोरियाँ खुलते ही ब्लाउज ढीला पड़ गया और उसने उसे खींचकर अलग कर फेंक दिया। साथ ही साथ मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच कर उतार दिया। नाड़ा खुलते ही पेटीकोट सरक कर नीचे गिर गया। अब मैं शिशुपाल की बाहों में ब्रा पैंटी में रह गई थी।

शिशुपाल लगातार मेरे होठों को चूस रहा था जैसे कि वह मेरे जिस्म को देखकर अपने होशो हवास को खोकर पागल सा हो गया था। उसके होंठ जोर से दबते। जीभ अंदर घुसकर मेरी जीभ से लड़ती। उसने जल्दी ही अपने कपड़े उतार कर नंगा हो गया। शर्ट के बटन खोलकर फेंक दिए। पैंट और अंडरवियर एक साथ खींचकर नीचे गिरा दिए। उसका लंबा मोटा लंड सीधा खड़ा हो गया। फिर मेरी ब्रा पैंटी भी उतार दी। ब्रा के हुक खोले। कप आगे खींचकर हटा दिए। पैंटी को जाँघों से नीचे सरका कर निकाल फेंका। अब हम दोनों बेड पर एक दूसरे की बाहों में नंगे थे। उसका गर्म शरीर मेरे पूरे जिस्म से चिपक गया। शिशुपाल एक चुची मेरे मुँह में लेकर चूस रहा था। उसके होंठ निप्पल को पूरा मुँह में लेकर खींचते। दाँत हल्के से काटते। दूसरी चुची को अपने हाथों से मसल रहा था। उँगलियाँ गोल मम्मों को दबातीं। निप्पल को घुमातीं। मेरे अंदर एक लावा सा भर गया था जिस कारण मेरी चुत काफी गीली हो चुकी थी। अंदर की दीवारें चिकनी और गर्म हो रही थीं। गीलापन जाँघों तक बहने लगा था।

मैं मन ही मन डर रही थी कि शिशुपाल का लंबा मोटा लंड मेरी चुत में कैसे घुस पाएगा। उसकी मोटाई और लंबाई देखकर दिल जोर से धड़क रहा था। शिशुपाल ने मेरी दोनों चुचियों पर लाल लाल निशान डाल दिए थे और अपने दाँतों से काटने का भी। दाँतों के निशान गोल गोल लाल हो गए थे। लेकिन शिशुपाल बारी बारी से मेरे होठों को और मेरी दोनों चुचियों को जमकर चूस रहा था। एक चुची छोड़कर दूसरी पर मुँह लगाता। होंठों को फिर चूसता। मैं शिशुपाल के नीचे दबी हुई थी। उसका वजन मेरे सीने पर दबाव बना रहा था। शिशुपाल मेरे ऊपर होने के कारण शिशुपाल का लंबा मोटा फौलादी लंड मेरी जाँघों के बीच में मेरी चुत पर ठोकर मार रहा था। उसका गर्म सिरा गीली पंखुड़ियों पर बार बार रगड़ता। कमरे में मेरी जोर जोर से सिसकारियाँ गूँज रही थीं।

आहहहहहह। उई उई माँ ममम ररर। आह ओह ईईईई। ऊऊऊऊ ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई माँ ममम ररर। आह ओह ईईईई। ऊऊऊऊ ऊचचचचचचच।

अब मैं भी अपने चूतड़ को उछालने लगी थी। कमर ऊपर उठती। चुत उसके लंड के सिरा से और जोर से रगड़ती। तभी शिशुपाल ने मेरी दोनों टाँगें चौड़ी करके अपना लंड मेरी चुत पर रगड़ने लगा जिससे मुझे अजीब सा आनंद आ रहा था। उसका कठोर लंड गीली दरार पर ऊपर नीचे सरकता। पंखुड़ियाँ खुलतीं और बंद होतीं। फिर शिशुपाल ने अपना मुँह मेरी चुत पर लगा कर चूसने लगा। उसकी जीभ पंखुड़ियों के बीच घुसकर अंदर की गर्माहट चाटती। चुत के मुँह को होंठों से खींचता। मैं अपने होशो हवास खो बैठी थी और मैंने अपने हाथों से शिशुपाल का सर अपनी चुत पर जोर से दबा लिया और चूतड़ को उछालने लगी। उसकी जीभ और गहराई तक पहुँचती।

आह ओह ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई माँ। ममम ररर। आह ओह। ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह।

तभी शिशुपाल ने अपना लंड मेरी चुत के मुँह पर लगाकर एक जोर का धक्का मारा। उसका मोटा सिरा टाइट मुँह पर दबाव डालने लगा। मेरे मुँह से एक लंबी दर्द भरी चीख निकल गई। आह ओह ईईईई ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। ऊं उई माँ। ममम ररर गई।

आह ओह ईईईई। ऊऊऊऊ। शिशुपाल का लंड मेरी चुत को फाड़ता हुआ अंदर घुस चुका था। टाइट दीवारें उसके मोटे आकार से फैलती गईं। लेकिन शिशुपाल ने मेरी चीखों पर ध्यान न दे कर ताबड़तोड़ तगड़े धक्के लगाकर अपना लंबा मोटा फौलादी लंड मेरी चुत में जड़ तक पहुँचा दिया। हर धक्के के साथ और गहराई तक उतरता। जड़ तक पहुँचते ही उसकी जाँघें मेरी जाँघों से टकराईं। जिससे मेरी आँखों में आँसू आ गए दर्द के कारण।

मेरी चुत से खून के फुहारे छूट रहे थे। गर्म खून लंड के साथ बाहर निकलकर जाँघों पर बहने लगा। दर्द के मारे मैं अपना सर इधर उधर पटकने लगी थी। तकिया गंदला हो रहा था। मेरी जोर जोर से दर्द भरी चीखें निकल रही थीं। आहहहहहह। उई माँ। ममम ररर गई। आह ओह ईईईई। ऊऊऊऊ। ऊचचचचचचच। उममममम। आहहहहहह। उई माँ। ममम। ररर गई। आह ओह ओह ईईईई। ऊऊऊऊ ऊचचचचचचच। उममममम।

शिशुपाल ताबड़तोड़ धक्के मार मार कर मेरी चुत के चीथड़े उड़ा रहा था। उसका मोटा लंड हर बार अंदर तक धँसता और बाहर खिंचता। दीवारें उसके आकार से फैलती और सिकुड़तीं। शिशुपाल का लौड़ा हर धक्के पर मेरी बच्चेदानी में जा रहा था। गहराई में टकराहट की तीव्र अनुभूति होती। मैंने अपना एक हाथ अपनी चुत पर लगा कर देखा तो शिशुपाल का पूरा लंड मेरी चुत में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था। उँगलियों के नीचे उसका गीला और खून से सना शरीर महसूस हो रहा था। मैंने शिशुपाल के लंड पर उंगलियाँ लगाईं तो मेरे हाथ पर काफी सारा खून लग गया था। गर्म और चिपचिपा खून हथेली पर फैल गया।

मैं समझ गई शिशुपाल ने अपने लंबे मोटे फौलादी लंड से मेरी सील तोड़ दी इस कारण मेरी चुत से काफी खून निकल रहा था। अंदर की दीवारें अब उसके लंड को पूरी तरह स्वीकार करने लगी थीं। तभी मेरी चुत ने पानी छोड़ दिया। अचानक गर्म तरल और जोर से बाहर निकला। और मुझे अब दर्द के बजाए आनंद आने लगा था। हर धक्के के साथ मीठी लहरें कमर से ऊपर तक दौड़ने लगीं।

अब मेरी दर्द भरी के साथ साथ मस्ती की भरी सिसकारियाँ भी गूँजने लगीं। आहें और सिसकियाँ एक साथ निकल रही थीं। और मैंने अपनी बाहों में शिशुपाल को जकड़ कर अपने चूतड़ ऊपर उछालने लगी। कमर जोर से ऊपर उठती। चुत उसके लंड को और गहराई तक निगलती। इस कारण शिशुपाल की जाँघ मेरी जाँघों से जोरों से टकराकर पट्ट पट। फच फच फच फच। फच फच फच फच। फच फच फच फच। की आवाजें हो रही थीं। गीले शरीर के टकराने से चिपचिपी आवाजें पूरे कमरे में फैल रही थीं। शिशुपाल काफी ताकत से मुझे ताबड़तोड़ चोद रहा था। उसके धक्के इतने जोर के थे कि बेड की चर्र चर्र भी सुनाई देने लगी।

मैं अब तक 2 बार झड़ चुकी थी। शरीर में सिहरन दौड़ती। चुत बार बार ऐंठती। लेकिन शिशुपाल रुकने का नाम नहीं ले रहा था। उसका लंड लगातार अंदर बाहर हो रहा था। 45 मिनट चोदने के बाद शिशुपाल ने मेरी दोनों टाँगें उठा कर अपने कंधों पर रख लीं। जाँघें उसके कंधों पर टिक गईं। चुत और खुल गई। और ताबड़तोड़ अपना लंड मेरी चुत में पेलने लगा। इस पोजीशन में हर धक्का और गहराई तक पहुँच रहा था।

शिशुपाल का लौड़ा मेरी बच्चेदानी को हर बार ठोकर मार रहा था जिस कारण मैं बार बार उछल रही थी। गहराई में तेज टकराहट से शरीर कांप उठता। हर 15-16 धक्कों पर मेरी चुत पानी छोड़ कर झड़ रही थी। गर्म तरल जोर से बाहर निकलता। और मेरे 4 बार झड़ने पर शिशुपाल ने ताबड़तोड़ धक्के लगाकर अपना लौड़ा मेरी चुत में जड़ तक पहुँचा कर अपना वीर्य मेरी चुत में उड़ेल कर मेरी पूरी चुत अपने वीर्य से भर दी। उसका लंड जड़ तक धँसा रहा। गर्म गाढ़ा वीर्य अंदर छूटने लगा। मुझे शिशुपाल का गरम गरम वीर्य अपनी चुत में महसूस हो रहा था और वीर्य की गर्माहट चुत के अंदर काफी अच्छा सुकून दे रहा था। अंदर भरता हुआ गर्म तरल दीवारों को सहला रहा था। इस कारण मेरी दोनों आँखें बंद होकर मैंने अपने होठों को शिशुपाल के होठों से बढ़ा दिया था। होंठों पर लंबा और गहरा चुंबन ले लिया।

शिशुपाल मेरे ऊपर ही इसी हालत में लेट गया। अभी भी शिशुपाल का लौड़ा मेरी चुत के अंदर था। उसका वजन मेरे शरीर पर आराम से पड़ा था। और मेरी चुत का पानी और शिशुपाल का वीर्य दोनों मिलकर मेरी चुत से बह रहे थे। गर्म मिश्रण जाँघों के बीच से रिसकर नीचे बहने लगा। और कुछ देर लेटने के बाद शिशुपाल अलग हुआ तो उसका लंड भी उछलकर मेरी चुत से बाहर हो गया। खाली हुई चुत से ढेर सारा वीर्य और मेरी चुत का पानी बेड की चादर पर गिरने लगा। चादर पर बड़ा सा गीला धब्बा फैल गया।

शिशुपाल ने पूरे सप्ताह दारू पीकर रात दिन मुझे चोद चोद कर लड़की से औरत बना दिया। हर रात और दिन उसके लंबे मोटे लंड की गर्माहट और धक्के शरीर में गहरे उतरते रहे। अब मुझे भी अपने अंदर एक भरपूर औरत होने का एहसास होने लगा था। चुत अब आसानी से उसका आकार ले लेती। और मेरी दोनों चुचियाँ और दोनों चूतड़ साइज बढ़ गया था। मम्मे पहले से ज्यादा भारी और संवेदनशील हो गए थे। चूतड़ और गोल तथा नर्म पड़ गए थे। इस पूरे सप्ताह में शिशुपाल ने मुझे तकरीबन 45 बार जमकर चोदा। हर बार वीर्य अंदर भरता। हर बार शरीर थक कर भी और माँगता।

फिर एक दिन ऑफिस में मुझे उल्टियाँ हुईं। सुबह की मिचली और कमजोरी साफ थी। और महीने पर पीरियड न आने के कारण मुझे प्रेग्नेंट होने का पता चला तो घबराकर मेरी जान निकल गई। दिल जोर से धड़कने लगा। हाथ कांपने लगे। यह बात मैंने शिशुपाल को फोन पर बताई तो शिशुपाल ने अपने एक विश्वास के डॉक्टर से संपर्क कर मेरी प्रेग्नेंसी गिराकर रुकवा दी। डॉक्टर के पास जाना। दवाइयाँ और आराम। इस दौरान मुझे 3 दिन ऑफिस से छुट्टी लेकर कंप्लीट आराम करना पड़ा। शरीर धीरे धीरे सामान्य होने लगा।

यह थी मेरी सच्ची घटना जो मैंने आप लोगों के साथ शेयर कर अपना दिल हल्का किया।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।