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दोस्त की माँ की संतुष्ट चुदाई

मेरा नाम राहुल है, मेरी उम्र 25 साल है और कद 5’8″ है। मैं दिखने में सुन्दर हूँ और बिहार से हूँ। मैं एक अच्छे अमीर परिवार से सम्बन्ध रखता हूँ। मैं जहाँ रहता हूँ वो क्षेत्र पॉश एरिया है। मेरे परिवार में सिर्फ मैं और मेरे माता-पिता हैं।

यह दो महीने पहले की बात है। मेरे घर के सामने एक नया परिवार रहने आया था। वे केवल तीन ही लोग थे। पति-पत्नी और उनका लड़का विक्की जो मुझसे सिर्फ दो साल छोटा है। तो उस लड़के से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई।

उसके पिता एक दवा कंपनी में बिक्री विभाग में काम करते हैं। और मम्मी घरेलू महिला हैं। विक्की की मम्मी शोभा आंटी थोड़ी मोटी हैं लेकिन अभी भी काफी गर्म माल लगती हैं। पर मैंने कभी उन्हें गलत निगाह से नहीं देखा था। मैं हमेशा उनसे आंटी कहकर ही बात करता था।

कुछ दिन बाद विक्की होटल मैनेजमेंट का कोर्स करने बाहर चला गया। तो मेरा उनके घर जाना भी कम हो गया। एक दिन शोभा आंटी मुझे रास्ते में मिलीं। और बोलीं- विक्की क्या गया, तुमने तो आना ही छोड़ दिया?

मैंने कहा- आंटी जरा व्यस्त हूँ, आज शाम को जरूर आऊँगा। शाम को मैं शोभा आंटी के घर गया। वो साड़ी में थीं। मुझे देखते ही उनका चेहरा खुशी से खिल उठा। और बोलीं- आओ राहुल, मैं भी अकेली बोर हो रही थी।

मैंने पूछा- अंकल कहाँ हैं? वो बोलीं- तेरे अंकल ज्यादातर टूर पर ही रहते हैं। फिर वो चाय बना कर लाईं। थोड़ी देर बाद बातों-बातों में आंटी ने पूछा- कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?

मैंने कहा- शोभा आंटी, अभी ब्रेकअप हुआ है। आंटी मुस्कुराते हुए बोलीं- तुम जवान लड़के लड़कियों को परेशान करते होंगे तो ही तो वो भाग गई? मैंने कहा- परेशान? वो कैसे? आंटी बोलीं- आजकल गंदी-गंदी फिल्में देखकर वैसी ही डिमांड करते होंगे? और आंटी हंसने लगीं।

यह सुनकर मैं धक्क से रह गया। मेरा लंड भी एकदम खड़ा हो गया। अब पहली बार मेरे मन में आंटी के लिए गलत ख्याल आने लगे थे। इतने में आंटी का फोन आ गया और मैं वापस आ गया।

उस रात मुझे नींद नहीं आई और मैंने तीन बार आंटी को सोचकर मुठ मारी।

कुछ दिन बाद मेरे मम्मी-पापा शादी में बाहर चले गए। तो मैं घर पर पूरी तरह अकेला रह गया। मैं पूरा दिन सिर्फ अश्लील फिल्में देखता रहा। शाम को शोभा आंटी मिलीं तो मैंने हेलो किया। बातों में मैंने बताया कि मैं घर पर अकेला हूँ। उन्होंने कहा कि उनके पति भी बाहर गए हैं।

रात ठीक नौ बजे मेरे घर की घंटी बजी। मैं बाहर गया तो शोभा आंटी खड़ी थीं। बोलीं- दही चाहिए, थोड़ी सी है। मैंने कहा- अंदर आ जाओ आंटी। और वो अंदर आकर मेरे कमरे में बैठ गईं। मैं दही लेकर आया और आंटी मुझसे बात करने लगीं।

आंटी ने काले रंग का गाउन पहन रखा था। उनके बड़े-बड़े चूचे गाउन के अंदर से उभरे हुए नजर आ रहे थे। और उनकी बड़ी गांड बहुत सेक्सी दिख रही थी। शायद आंटी ने मुझे उनके बदन को चोरी-चोरी देखते हुए देख लिया था। मैंने नेकर पहन रखी थी। मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया था और कपड़े के अंदर तनाव महसूस हो रहा था।

आंटी बार-बार मुझसे झुककर बात कर रही थीं। ताकि मैं उनके गहरे वक्ष साफ देख सकूँ। उनकी सांसों की गर्माहट और हल्की खुशबू मेरे नाक तक पहुंच रही थी। आंटी बोलीं- अभी तो तुम अकेले हो। कोई गलत काम तो नहीं कर रहे हो न? मैंने कहा- आंटी, गलत? मतलब?

आंटी बोलीं- कोई गंदी फिल्म तो नहीं देख रहे हो न? और हंसने लगीं। मेरे पूरे बदन में करंट सा फैल गया। इतने में आंटी ने मेरी नेकर की जिप देखकर कहा- यह इतना मोटा बाहर क्या दिख रहा है? क्योंकि मेरा लंड पूरा खड़ा था तो जिप उठी हुई दिख रही थी।

अब मैं भी मूड में आ गया, मैंने कहा- आंटी, आप ही देख लीजिए। और उनके पास जाकर खड़ा हो गया।

आंटी मेरे बिस्तर पर आराम से बैठी थीं। जैसे ही मैं उनके पास गया, उन्होंने अपना नाजुक हाथ बढ़ाया। और मेरे लंड को नेकर के ऊपर से पकड़ लिया। बोलीं- हाय, इतना मोटा है तुम्हारा राहुल? मेरा लंड साइज 8.5 इंच लंबा और 4 इंच मोटा था। उन्होंने उसे जोर से पकड़कर दबाने लगीं। मुझे गर्म सनसनी पूरे शरीर में दौड़ गई।

मैंने कहा- आंटी, अब खोलकर देखो। उन्होंने मेरी जिप धीरे-धीरे खोली। और मेरा बड़ा मोटा लंड अपने नर्म हाथों में ले लिया। मुझे लगा कि मुझे जीवन की सारी खुशियाँ एक साथ मिल गई हैं। आंटी अपने नाजुक नर्म-मुलायम हाथों से मेरा लंड पकड़कर ऊपर-नीचे सहला रही थीं। उनकी उंगलियों की गर्मी और हल्का दबाव मेरे लंड को और भी सख्त बना रहा था।

मैंने भी आगे बढ़कर आंटी की चूचियों को दोनों हाथों से दबा दिया। बहुत बड़ी और मुलायम थीं आंटी की चूचियाँ। उनके निप्पल मेरी हथेलियों में सख्त होकर उभर आए थे। अब आंटी और मैं पूरे मूड में आ चुके थे। आंटी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए थे। मैं पूरा नंगा खड़ा था।

आंटी मेरा लंड अपने मुँह में लेकर जोर-जोर से चूस रही थीं। उन्होंने पहले अपने गर्म होंठों से लंड के सिरे को चूमा। फिर धीरे से मुंह खोलकर ऊपर का हिस्सा अंदर लिया। उनकी जीभ लंड के चारों तरफ घूम रही थी। नरम और गीली जीभ के स्पर्श से मैं सिहर उठा। आंटी ने धीरे-धीरे और गहराई तक मुंह में लिया। जोर से चूसने लगीं। उनके मुंह की गर्मी और नमी मेरे पूरे लंड को घेर रही थी। सलिवा उनके होंठों से बहकर लंड पर गिर रहा था। वे ऊपर-नीचे सिर हिलाती हुई तेजी से चूस रही थीं।

कभी-कभी गले तक ले जातीं और हल्की गड़गड़ाहट की आवाज निकल रही थी।

उनकी आँखें ऊपर की ओर देख रही थीं। जैसे मेरी प्रतिक्रिया का मजा ले रही हों। मेरा लंड उनके मुंह में और भी फूलकर सख्त हो गया था।

फिर मैंने आंटी को खड़ा किया। और उनका गाउन उतारने लगा। तो आंटी हंसकर बोलीं- अपनी आंटी को नंगा कर रहा है? तुझे शर्म नहीं आती? और मुझसे चिपक गईं। मेरा लंड और ज्यादा खड़ा हो गया।

मैंने आंटी का गाउन उतारा। तो उन्होंने काली ब्रा और काली पैंटी पहन रखी थी। मैं ब्रा उतारकर उनके बड़े-बड़े स्तनों को दोनों हाथों में भर लिया। और चूसने लगा। वो बार-बार कहने लगीं- जोर से चूस मेरे बच्चे, और जोर से। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था।

मैंने अपना एक हाथ आंटी की कच्छी में डाल दिया। और उनकी चूत के घने बालों में हाथ फिराने लगा। आंटी पूरी गर्म हो चुकी थीं। और उनकी चूत भी गीली हो रही थी।

उन्होंने खुद ही अपनी पैंटी उतार दी। और बोलीं- इसे चाट ना। मैंने शोभा बेबी की चूत को बीस मिनट तक पूरी तरह चाटा। मेरी जीभ उनकी फूली हुई चूत की फाक पर घूम रही थी। कभी-कभी चूसता तो कभी अंदर डालकर हिलाता। आंटी मेरा लंड पकड़कर सहलाने लगीं। उनकी चूत पर बाल थे पर गोरी थी उनकी तरह।

आंटी जोर-जोर से सिसकारियाँ भर रही थीं। और गर्म साँसें छोड़ रही थीं। फिर मैं आंटी के ऊपर आ गया। और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा।

आंटी ने कहा- देखो, हमें कोई देख लेगा तो क्या कहेगा? हम दोनों नंगे हैं।

और मेरे चूतड़ दबाने लगीं।

आंटी इतनी सेक्सी बातें कर रही थीं कि मुझे भी मजा आ रहा था। आंटी बोलीं- राहुल, अपनी आंटी को धीरे-धीरे करना, वरना दर्द होगा। राहुल, इतना बड़ा लंड है तेरा। धीरे से डाल। देख तूने आंटी को नंगा कर दिया। तू मेरे बेटे की उम्र का है। तुझे शर्म नहीं आती अपने दोस्त की मम्मी को नंगा देखते हुए?

और मेरे कूल्हे जोर से दबाने लगीं।

फिर बोलीं- अब अंदर डाल राहुल। धीरे-धीरे मैंने अपना लंड अंदर डाल दिया। उनकी गर्म और गीली चूत मेरे मोटे लंड को निचोड़ रही थी। मैं आगे-पीछे होने लगा। आंटी आहें भर रही थीं। और मुझे तो जिंदगी के सारे सुख मिल गए।

थोड़ी देर बाद आंटी झड़ गईं। और रुकने के लिए बोलीं।

मैंने कहा- आंटी, अभी मेरा बाकी है। आंटी हंसकर बोलीं- इतनी कम उम्र है और इतना टाइम लगता है? बहुत परेशान कर रहा है तू अपनी नंगी आंटी को।

फिर वो लंड को बाहर निकलने की जिद करने लगीं- अब मत कर, मुझे दर्द हो रहा है।

मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया। मैंने कहा- मैं अभी झड़ा नहीं हूँ।

आंटी हंसकर मेरे लंड को अपने मुलायम हाथों में पकड़कर बोलीं- इसका पानी तो मैं निकालती हूँ। बहुत बड़ा और शरारती हो गया है यह। और मेरा लंड जोर-जोर से सहलाने लगीं।

थोड़ी देर में आंटी के हाथ में मेरा पानी निकल गया। तो आंटी हंसकर बोलीं- कितना ज्यादा पानी फेंकता है। कितने दिन से बचा कर रखा था? और कितना गाढ़ा है। और आंटी जोर-जोर से हंसने लगीं।

आंटी बाथरूम में चली गईं और हाथ धोकर वापस आ गईं। मैं तब भी नंगा ही था और आंटी भी नंगी थी।

आंटी बोलीं- अब अपनी आंटी को नंगा किया है तो कपड़े भी पहना। मैंने कहा- आप ऐसे ही अच्छी लग रही हो। आंटी बोलीं- बहुत बड़े गुंडे हो तुम। अपनी आंटी को पूरा गंदा कर दिया। और जोर से हंसने लगीं।

मैंने कहा- यहीं पर रुक जाओ आज रात। तो आंटी बोलीं- ठीक है।

फिर आंटी मेरे घर पर सुबह 4 बजे तक रही। और हम दोनों ने 4 बार चुदाई की। आंटी और मैं रात भर नंगे रहे और पोर्न फिल्म देखते रहे।

अब भी आंटी और मैं जब भी मौका मिलता है सेक्स करते हैं। लेकिन उससे ज्यादा हम फोन पर सेक्सी बातें करते हैं। कुछ दिन पहले मैंने आंटी से कहा- अपनी किसी सहेली को भी मुझसे मिलवा दो। तो पहले तो वो नाराज हो गईं पर मैंने बाद में उन्हें मना लिया। अब मैं उस दिन का इंतजार कर रहा हूँ जब आंटी अपनी सहेली से मुझे मिलाएँगी।

आपको यह सच्ची सेक्स घटना कैसी लगी?

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।