एक ऐसी कहानी है जो आज भी याद आती है तो नींद नहीं आती। मेरा नाम अफाक है। मेरे घर में अम्मी, मैं और मेरी बहन मसीरा रहती हैं। मेरे डैडी सऊदी में हैं। हम लोग मलाड में एक छोटी सी बस्ती में रहते हैं। एक बड़ा रूम है हमलोगों का बारह बाई सत्रह का। एक कोने में लेफ्ट साइड किचन टेबल है जिस पर खाना बनता है। दूसरे कोने में बाथरूम है। फ्रिज, टीवी, पलंग सब कुछ है घर में।
मेरी बहन मेरे से दो साल छोटी है पर दिखती मेरे से बड़ी है। गोरी तो वह है ही। ये कहानी शुरू हुई थी जब मसीरा कॉलेज के पहले साल में थी और मैं भी कॉलेज में कंप्यूटर डिप्लोमा कर रहा था। ये जुलाई के पहले हफ्ते की बात है। उस दिन सुबह से बारिश हो रही थी। हम लोग भी घर में ही थे।
रात करीब एक बजे के आसपास चावल में पानी भर गया। फिर आहिस्ता-आहिस्ता घर में भी पानी भर गया। हमारा एक ही रूम था। न कोई माला न कोई दूसरा रूम। घर में एक फीट से ज्यादा पानी भर गया था। घर में सिर्फ एक पलंग था जिस पर हम तीनों बैठ गए। अलमारी से कुछ कपड़े थे जो नीचे के खाने में थे वह भी पलंग पर रख दिए थे।
कपड़े रखने में उठाने में मसीरा का पैर फिसल गया। वह पानी में गिर गई और भीग गई। जल्दी से मैंने उसको उठाया। वह पूरी भीगी थी। अम्मी ने मेरे को कहा दरवाजे के बाहर जाके खड़े रहो मसीरा को चेंज करना है। मैं बाहर चला गया। थोड़ी देर के बाद अम्मी ने मेरे को आवाज दी। मैं घर के अंदर आ गया। देखा मसीरा मैक्सी पहनी थी अंदर कुछ नहीं पहनी थी।
अम्मी को हम लोग जगह बना के दे दिए। वह सो गईं। मैं और मसीरा जाग रहे थे। करीब रात तीन बज रहे थे। अम्मी गहरी नींद में थीं। मसीरा को भी नींद आ रही थी मगर जगह नहीं थी लेटने की। मैं थोड़े कोने में बैठ गया और मसीरा को बोला तू मेरे पैर पर रखकर लेट जा। मसीरा मेरे पैर पर सिर रखकर लेट गई। पता नहीं उसकी कब आँख लग गई।
मेरे को मसीरा के बोब्स दिखाई दे रहे थे। थोड़े भरे थे और गोरे-गोरे थे। मेरे से रहा नहीं गया। मैंने आहिस्ते से मसीरा के बोब्स पर हाथ रख दिया। देखा कोई हरकत नहीं मसीरा की तो मैं बोब्स आहिस्ता-आहिस्ता दबाने लगा। अब उसकी आँख खुल गई। बोली ये क्या कर रहा है। मैं बोला कुछ नहीं। मेरे को अच्छा लगा तो हाथ लगा दिया। वह मेरे को घूर के देखी और चुप सो गई।
मैं रात भर टेंशन में था कि अब सुबह अम्मी को बोलेगी और मेरी धुलाई होगी। सुबह बारिश रुक चुकी थी। मैं घर में जमा पानी निकाल रहा था। अम्मी और मसीरा भी उठ चुके थे। बाथरूम से भी पानी निकल चुका था। अम्मी-मसीरा फ्रेश हुए। मैं भी ब्रश करके फ्रेश हो चुका था। मेरे दिल में यही डर था कि मसीरा अम्मी को बोलेंगी।
घर में जमा पानी निकालने के बाद जमीन धोने का था। अम्मी बोलीं कि मैं खाना बना लेती हूँ। जब तक तुम दोनों जमीन धो लो। मैं और मसीरा जमीन धोने लगे। मसीरा वही रात वाली मैक्सी पहनी थी। हम दोनों जमीन धोने लगे। मैं साबुन लगा के घिसता और मसीरा झाड़ू से धोती। झाड़ू से धोते वक्त कई बार मसीरा के अंदर यानी चूत तक दिखता। मैं नजर बचा-बचा के देख रहा था।
मसीरा ने मेरे को अपने नीचे देखते हुए देख लिया और बोली क्या देख रहा है। मैंने कहा कुछ नहीं। वह बोली रात को तू जो कर रहा था अच्छा लग रहा था। बाद में क्यों नहीं किया। मेरे को बहुत मजा आ रहा था जब तू दबा रहा था। मसीरा की बात सुनके मेरी जान में जान आई। मैंने कहा मेरे को लगा तेरे को बुरा लगा इसलिए तूने मेरे को घूर के देखी। मसीरा बोली कि नहीं मैं नींद में थी इसलिए तेरे को ऐसा लगा। मेरे को अच्छा लगा था। बदन में गुड-गुड्डी हो रही थी।
ये सुनके मेरा लंड खड़ा हो गया था। मैंने अपने आप पर काबू रखकर मसीरा से कहा कि अब कब दबाऊँ। मसीरा बोली जब अम्मी घर में नहीं रहेगी। दो दिन के बाद की बात है। बाहर बहुत बारिश हो रही थी। घर में मैं और अम्मी थे। दोपहर के तीन बज रहे थे कि मसीरा का फोन आया कि मैं बस स्टॉप पर खड़ी हूँ। छाता ले के किसी को भेजो।
अम्मी ने मेरे से कहा कि तू जाके मसीरा को ले आ और मेरे को पड़ोस में बिलकिस खाला के यहाँ छोड़ दे। गोदना सीना है वहाँ। जब बारिश रुकेगी तो मैं आ जाऊँगी। मैं अम्मी को पीछे की गली में बिलकिस खाला के यहाँ छोड़ के मसीरा को लाने चला गया। बस स्टॉप पर मसीरा खड़ी थी। आधी भीगी थी। मैंने उसको छाते में साथ लिया और आहिस्ता-आहिस्ता चलने लगा।
हम दोनों साथ-साथ चल रहे थे। बारिश बहुत जोरों से थी। मसीरा थोड़ा मेरे से चिपक कर चल रही थी। मैंने अपना सीधा हाथ पीछे ले लिया। मसीरा और थोड़ा अंदर सरकी। अब मेरा हाथ मसीरा की गांड के बिल्कुल बीच में टच हो रहा था। मसीरा भी मेरे हाथ को अपनी गांड पर महसूस कर रही थी। हम दोनों घर में आ गए। मसीरा पूरी भीगी हुई थी। उसके छोटे-छोटे बोब्स चिपके हुए कपड़े पे से साफ दिखाई दे रहे थे।
मसीरा सीधे बाथरूम में गई और फ्रेश हो के कपड़े चेंज कर के आई। आते ही अम्मी कहाँ है पूछी। मैंने कहा अम्मी बिलकिस खाला के यहाँ गई हैं। छह बजे तक आएंगी। बाहर बहुत बारिश हो रही थी। मेरे अंदर सेक्स की आग भड़क रही थी। मसीरा के खाना खाने के बाद मसीरा दरवाजे में खड़े हो के बाहर पानी कितना भरा है देख रही थी। मैं उसके पीछे जाके खड़ा हो गया और बाहर देखने लगा।
मेरा लंड मसीरा की गांड के बीच में टच था। मसीरा थोड़ा आगे हुई पर लंड टच ही था। फिर मेरे से रहा नहीं गया। मैंने मसीरा से कहा कि आज अम्मी नहीं हैं। मैं तेरा ये दबाऊँ क्या। बोब्स की तरफ इशारा करते हुए। आज बहुत दिल हो रहा है। वह दरवाजे से अंदर आ गई और बिलकिस खाला को फोन लगा के अम्मी को बोली कि कब आओगी। अम्मी ने कहा कि बारिश रुकेगी तब या छह बजे तक।
मसीरा ने मेरी तरफ देखा और कहा कि दरवाजा बंद कर। मैंने जल्दी दरवाजा बंद कर दिया। वह पलंग पर लेटी थी। मैं उसके सिरहाने बैठ गया। मेरे को देखी और बोली अब दबा ना खड़ा क्यों है। मैं झट से पलंग पर बैठ गया और कपड़े के ऊपर से मसीरा के बोब्स दबाने लगा। मसीरा ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। मैं बोब्स दबा रहा था। वह आँख बंद करके सिसकियाँ ले रही थी।
काफी देर हो गई दबाते-दबाते। अब मसीरा ने मेरा हाथ लेके अपने कमीज के अंदर डाल लिया। मैं अब और जोर-जोर से पंपिंग करने लगा। अचानक मसीरा ने दोनों हाथों से मेरे को अपने ऊपर झुका लिया और मेरे होठों को किस करने लगी। मेरे को बहुत तीखे पकड़ी थी। मैं भी मसीरा को किस करने लगा। एक हाथ से उसके बोब्स दबा रहा था। करीब दस मिनट तक यही चलता रहा। उसके बाद वह ठंडी पड़ गई। मैं समझ गया उसका पानी निकल गया।
जब वह सीधे लेट गई तो मैं जानबूझकर वहाँ से हट गया। थोड़ी देर के बाद मसीरा उठी और मेरे से बोली सॉरी। मेरे को पता नहीं क्या हो गया था। अम्मी को मत बताना प्लीज। मैंने कहा नहीं बताऊँगा मगर मेरे को रोज दबाने देना। वह बोली ठीक है। अब मैं रोज जब मौका मिलता बोब्स दबाता। वह भी मेरे को किस करती। मैं भी किस करता।
वह शनिवार की रात थी। घर में मैं अम्मी और मसीरा ही थे। जी टीवी पर हॉरर शो चल रहा था। मैं पलंग पर था और अम्मी मसीरा नीचे बैठे थे। शो के दौरान अम्मी सो गईं। मसीरा डर के मेरे पास आ के बैठ गई। मैंने मसीरा के बोब्स दबाना शुरू किया। बीच-बीच में किस भी कर रहा था। फिर अचानक मैंने मसीरा की चूत पर हाथ फेरना शुरू किया। बीच की उंगली चूत के अंदर डालके घुमाने लगा। मसीरा अपने आप को ढीला करने लगी।
काफी देर ये सब करने के बाद मसीरा का पानी निकल गया जो मैं अपनी उंगली पर महसूस कर रहा था। सुबह करीब छह बजे थे। मैं गहरी नींद में था। अचानक लगा मेरे पे कोई है। आँख खोली देखा तो मसीरा मेरे ऊपर थी। जैसे ही मसीरा ने देखा मैंने आँख खोल दी। मसीरा मेरे होठों पे अपने होठ रखकर किसिंग करने लगी। उसको पता नहीं क्या हो गया था। थोड़ी दूर पे अम्मी सोई हुई थीं इसका भी डर नहीं था।
वह मेरे पे चढ़ कर ऐसे कर रही थी जैसे रगड़ रही हो। अपनी चूत मेरे लंड पे रगड़ रही थी। बेतहाशा किसिंग कर रही थी। तीन-चार मिनट ऐसा करने के बाद मेरे ऊपर लेट गई। ऐसा लग रहा था उसका पानी निकल गया और वह ठंडी पड़ गई। अच्छा हुआ कि ये सब के बीच अम्मी की आँख नहीं खुली।
सुबह में मसीरा मेरे पास आई और कहा कि सॉरी मैं बहक गई थी। मैंने झट से कहा तू अपना तो सब कर लेती है मेरे को ऐसे ही छोड़ देती है। मसीरा मेरे को देख कर कहने लगी तेरे को जो करना है कर। मैं नहीं रोकूँगी। बस मैं जो करूँगी वह करने दे। मैंने उसको देखा और कहा मैं तेरे को बिना कपड़े में देखना चाहता हूँ। तेरे साथ सेक्स करना चाहता हूँ। मसीरा बोली ठीक है। हम दोनों सब करेंगे।
अब हम दोनों वक्त का इंतजार करने लगे। उस दिन अम्मी घर में खाना बना रही थीं। मैं टीवी देख रहा था। मसीरा बाथरूम में कपड़े धो के निकली और मेरे को बोली कि जब मैं आवाज दूँ तो आ जाना। मैंने हाँ में सर हिलाया। वह फिर बाथरूम में चली गई। पहले मसीरा ने अम्मी को आवाज दी और कुछ माँगी। फिर थोड़ी देर के बाद अम्मी को आवाज दी फिर कुछ माँगी। उसके बाद पाँच मिनट के बाद फिर अम्मी को आवाज दी कि कपड़े का साबुन दे दो।
अम्मी ने मेरे को कहा कि जरा मसीरा को साबुन दे दे। मैं साबुन लेके बाथरूम में गया तो देखते ही रह गया। मसीरा पूरी नंगी थी। मेरे को देख के खड़ी हो गई। बोली तू बोला था ना मेरे को बिना कपड़े के देखने दे। अब देख। मैंने उसके बोब्स दबाए। गांड पे हाथ फेरा और वहाँ से हट गया। अब जब भी मौका मिलता वह मेरे को अपने जिस्म का हिस्सा दिखाते रहती।
उस दिन घर में मैं मसीरा और अम्मी थे। अम्मी सिर में मेहंदी लगाई थी। सो वह नहाने चली गईं। मैं पलंग पे बैठ टीवी देख रहा था। मसीरा पहले दरवाजा बंद की और मेरे पास आके मेरे को किस करने लगी। किस करके हटी और मेरे लंड को पकड़ ली और बोली मेरे को ये दिखाना कैसा लगता है तेरा। प्लीज दिखाना। मैंने मसीरा को बोला मुंह में लेगी क्या। बोल तो ही दिखाऊँगा। मसीरा बोली नहीं पहले तू दिखा। उतने में अम्मी ने मसीरा को आवाज दी और तौलिया माँगा। बस बात वहीं खत्म हो गई।
करीब दस दिन के बाद की बात है। डैडी का दोस्त सऊदी से आया था। डैडी ने उसके हाथ से कुछ सामान और पैसे भेजे थे। सो अम्मी डैडी के दोस्त के यहाँ गई थीं। अम्मी ने करीब सात बजे फोन करके बताया कि मैं रात दस बजे तक आऊँगी क्योंकि डैडी का दोस्त कहीं बाहर गया है। वह साढ़े आठ तक आएगा। मैं यहाँ करीब में मेरी फूफीजात बहन के जा रही हूँ। जब तेरे डैडी के दोस्त आ जाएँगे तो उनसे मिल के सामान लेके आती हूँ।
अब घर में मेरे और मसीरा के सिवा कोई नहीं था। मसीरा को मैंने कहा कि आज मेरे को सब करने दे। मसीरा ने हाँ में सर हिलाया। फिर क्या था। मैंने फटाफट दरवाजा खिड़की बंद की और मसीरा को अपनी बाहों में लेके किस करने लगा। मसीरा मेरे खड़े लंड पे हाथ रखकर बोली अब तो दिखा। मैंने कहा कि वही शर्त है मुंह में लेने की। मसीरा बोली तो मानेगा। ला दिखा। मुंह में लेती हूँ।
मैं झट से अपने पूरे कपड़े निकाल दिए और पलंग पे पैर लटका के बैठ गया। मसीरा घुटनों के बल बैठ के मेरा लंड हाथ में ले हिलाने लगी। हिलाते-हिलाते मुंह में ले के चूसने लगी। मेरा तो जैसे सपना पूरा हो गया था। आहिस्ता-आहिस्ता मैंने मसीरा को कपड़े से आजाद किया। अब वह भी नंगी मैं भी नंगा। लगे दोनों सेक्स करने।
मैंने पहले उसको किस किया फिर उसके बोब्स पे जबान फिराने लगा। मसीरा के मुंह से अजीब सी आवाजें आने लगीं। अब मैंने मसीरा को पलंग पे लिटा दिया। नीचे धोने वाली चादर रख दी और देर ना करते हुए लंड पे अच्छे से तेल लगा के चूत के होल पे रखकर झटके से डाल दिया। मेरा लंड चूत में जाते ही मसीरा की चीख निकल पड़ी। अम्मी… मैं मर गई। बोल के आँख से आँसू निकल गए।
मैं आहिस्ता-आहिस्ता आगे-पीछे होने लगा। अब मसीरा को दर्द कम होने लगा। मैं भी जल्दी-जल्दी करके हल्का हो गया। सब कुछ होने के बाद नीचे की चादर लाल हो गई थी। आधे घंटे लेटने के बाद हिम्मत करके मसीरा उठी। सब साफ-सफाई की। चादर हाथ से धोई। फिर रात तक नॉर्मल हो गई।
अब मसीरा मेरे से दूर-दूर रहने लगी। दो महीना हो गया पर कुछ नहीं हो सका। मसीरा मेरे से दूर रहने लगी। मैं काफी परेशान था कि क्या करूँ क्या ना करूँ। फिर एक दिन ऐसा हुआ कि अम्मी और मामी दोनों मार्केट चले गए शाम करीब छह बजे और बोल के गए कि हमलोग रात को लेट आएंगे। मामा के लड़के की शादी करीब थी इसलिए मामी अम्मी को लेके शॉपिंग करने गई थीं।
अम्मी और मामी के जाने के बाद मैं और मसीरा घर में अकेले थे। मसीरा बाथरूम में गई। मैंने जल्दी से बाहर का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। मसीरा बाथरूम से निकली। मैंने मसीरा को अपनी बाहों में ले लिया और किसिंग करने लगा। वह पूरी ताकत लगा रही थी अपने आप को छुड़ाने की मगर कामयाब नहीं हुई। मैंने उसको पलंग पे लिटा दिया और सलवार उतार दी। वह अब चुप लेटी थी।
मैंने कमीज ऊपर की। चूत गीली थी। शायद बाथरूम से पेशाब करके आई थी। चूत पे मीडियम काले बाल थे। मैंने कपड़े से चूत को अच्छी तरह पोछा और चूत पे हाथ फिराने लगा। हाथ फिराते-फिराते दोनों हाथों से चूत को खोला और अपनी जबान उसमें टच कर दी। मसीरा कसमसाने लगी। बोली मत कर प्लीज ऐसा मत कर। मगर मेरे पे तो सेक्स सवार था। मैंने चूत में जबान फेरने शुरू की। जैसे-जैसे जबान फेरता वह आह… ओह… बस कर बोलती। अपने हाथ मेरे सिर पे रखकर सिर को हटाती। बीच-बीच में मैं बोब्स भी दबा रहा था।
अब मसीरा पूरी तरह सेक्स में आ गई थी। मैंने मसीरा का कमीज भी उतार दिया और अपना लंड उसके मुंह में दे दिया। लंड चूसने के बाद मैं लेट गया। मसीरा मेरे ऊपर लेट गई। मेरे लंड को अपनी दोनों जांघों के बीच में डाल के आगे-पीछे होने लगी। साथ-साथ किस भी कर रही थी। तीन-चार मिनट के बाद जब उसकी चूत चिकनी हो गई तो मेरे पे से हट के साइड में लेट गई।
मैं मसीरा के ऊपर चढ़ कर बोब्स चूसने लगा। गांड में उंगली डालता कभी दबाता। अब मैंने मसीरा को इशारा किया कि दोनों टाँग फैला दे। मसीरा ने दोनों टाँगें ऊपर करके फैला दीं। अब मसीरा की चूत एकदम क्लियर नजर आ रही थी। चूत का होल भी खुला था। मैंने देर ना करते हुए अपना पूरा लंड मसीरा की चूत में डाल दिया। आज मगर मसीरा को दर्द नहीं हुआ। मैं जोर-जोर से धक्का दे रहा था। मसीरा बोल रही थी और जोर-जोर से कर। और जोर-जोर से कर।
थोड़ी देर करने के बाद मैं ठंडा पड़ गया। मेरी थोड़ी मनी चूत के अंदर और बाकी बाहर गिरा दी। दो घंटे बाद फिर एक बार बाथरूम में झुका के चोदा मसीरा को। अब जब भी मौका मिलता जब मसीरा को चोदता हूँ। मसीरा को जब भी मौका मिलता है मेरे पे आ के अपना सेक्स पूरा करती है। मसीरा मेरा लंड पकड़ के कितनी बार मेरा पानी निकाल चुकी है। मैं मसीरा की चूत में उंगली डालता हूँ। वह मेरा लंड पकड़ के हिलाती। इस दौरान मैं उसके बोब्स भी दबाता हूँ। कभी मेरा पानी जल्दी निकल जाता है कभी मसीरा का।
हम लोग ये सब अम्मी से बच कर करते हैं। मसीरा लंड मुंह में लेने से कतराती है। हाँ हिलाती बहुत अच्छा है। अक्सर रात को अम्मी जल्दी सो जाती हैं। हम दोनों पलंग पे टीवी देखते-देखते ये सब करते हैं। मसीरा को चोदना सबसे अच्छा लगता है। हम लोग सेक्स करने में कंडोम का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। काश भाई-बहन की शादी जायज होती।
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