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दीदी की पैंटी में हाथ डाला

Didi bhai sex story, Sister brother sex story, Mastram sex story: हैलो सब रीडर्स, मेरा नाम करन जायसवाल है और मैं संबलपुर का रहने वाला हूं. ये मेरी सच्ची कहानी है. मेरी उम्र 28 साल है, मेरी दीदी मधु मुझसे 2 साल बड़ी है. ये घटना उस समय की है जब मैं कॉलेज के पहले साल में पढ़ता था, दीदी तीसरे साल में पढ़ती थी. हमारे घर में केवल तीन सदस्य थे, मैं, दीदी और पापा. मेरी मां गांव में रहती थी. मैं और दीदी हमेशा साथ रहते थे. मेरी दीदी बहुत सेक्सी थी, उसका रंग सांवला था. उसके बूब्स उस समय 32 के थे, अब 36 के हो गए हैं. उसका फिगर 32-28-36 है.

दीदी कभी-कभी मेरे सामने ही ड्रेस चेंज करती. दीदी को ड्रेस चेंज करते हुए देख मेरा लंड खड़ा हो जाता था. मैंने मस्तराम की कहानियां पढ़ी थीं जिनमें भाई और बहन सेक्स करते हैं. मुझे लगा कि दीदी जानबूझकर मेरे सामने ड्रेस चेंज करती है. जो भी हो, मुझे बहुत मजा आता था. कुछ दिनों तक ऐसा ही चला. अब मैं दीदी को किसी न किसी बहाने टच करने की कोशिश करता था.

एक दिन मैंने दीदी के बैग में मस्तराम की किताब देखी. किताब देखकर मुझे पक्का यकीन आ गया कि दीदी जानबूझकर मेरे सामने कपड़े चेंज करती है ताकि मैं उन्हें देखकर गर्म हो जाऊं. मुझे यकीन हो गया कि दीदी मुझसे चुदवाना चाहती है मगर डर के मारे ओपन नहीं हो रही है. मैंने सोचा कि मुझे ही शुरुआत करनी चाहिए. एक दिन पापा ने दीदी के लिए 4 ड्रेस लाए.

मैं जब कॉलेज से घर आया तो दीदी बहुत खुश थी. मैं- क्या बात है आज बहुत खुश दिख रही हो. दीदी- मेरी नई ड्रेस आई है ले देख. मैं- ऐसे क्या देखूं, पहन के दिखाओ. दीदी- मैं चेंज करके आती हूं. मैं- यहीं कर लो ना, रोज तो सामने ही ड्रेस चेंज करती हो. दीदी- मैंने अंदर समीज नहीं पहना हुआ है. दीदी हमेशा कपड़ों के अंदर समीज पहनती थी. जब भी वो ड्रेस चेंज करती मैं उसे समीज में ही देखता था. दीदी को मैंने ब्रा और पैंटी में कभी नहीं देखा था. मैं- तो क्या हुआ, ब्रा और पैंटी तो पहनी है ना. दीदी- ओके.

दीदी ने एक सेक्सी स्माइल देकर कहा और अपनी नाइटी को उतार दिया. वाह क्या नजारा था, दीदी एक व्हाइट ब्रा और रेड पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी. वाह, मैं पलक झपकना भूल गया. दीदी एकदम अप्सरा लग रही थी. मेरा लंड खड़ा हो गया, गला सूख गया. दीदी के 32 के बूब्स, गदराया बदन, मस्त जांघें, मुझे लगा मेरा पैंट में ही लीक हो जाएगा. फिर दीदी ने नया ड्रेस पहन लिया और बोला, दीदी- कैसे लग रही हूं. मैं- ब्यूटीफुल. दीदी- सच. और दीदी ने आगे-पीछे घूमकर हर पोज में मुझे अपना ड्रेस दिखाया. मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था. दीदी ने फिर नया ड्रेस उतारकर नाइटी पहन ली. मैंने आज फाइनल कर लिया कि दीदी को चोदकर ही रहूंगा.

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फिर मैं ट्यूशन चला गया. ट्यूशन में भी मेरा दिमाग दीदी पर ही लगा रहा. मेरी आंखों के सामने बार-बार दीदी आ रही थी ब्रा और पैंटी में. मैंने दीदी को चोदने के लिए प्लान बनाया. मुझे मालूम था कि दीदी भी मुझसे चुदवाना चाहती है इसलिए मैंने प्लान का पहला स्टेज बनाया कि दीदी को अब बिना शर्म और डर के देखूंगा. जब दीदी झाड़ू लगाने आती तो झुक-झुककर अपने बूब्स दिखाती, पहले मैं चोरी से दीदी के बूब्स देखता था लेकिन अब ओपनली देखना लगा. दीदी भी अपने बूब्स जानबूझकर दिखाती थी. एक दिन पापा को अचानक गांव जाना पड़ गया 15 दिनों के लिए. मैंने सोचा यही मौका है.

मैं और दीदी रात में एक साथ सोते हैं, रात में दीदी नाइटी पहनकर सोती थी. जब मुझे रात में यकीन हो गया कि दीदी सो गई है तब मैंने जानबूझकर करवट बदली और अपना पैर दीदी के पैरों पर चढ़ा दिया. वाह क्या मजा आ रहा था, दीदी के सॉफ्ट गदराए हुए जांघों को महसूस करके मेरा लंड खड़ा हो गया.

फिर मैंने धीरे-धीरे दीदी की नाइटी को ऊपर उठाना शुरू किया. मैंने नाइटी को दीदी के कुल्हों तक उठा दिया. दीदी के गदराए हुए सेक्सी जांघ अब मेरे सामने थे. दीदी ने काली पैंटी पहनी हुई थी. वाह क्या मस्त माल लग रही थी. मैंने दीदी के जांघों को सहलाने लगा. क्या सॉफ्ट जांघें थीं. मैंने दीदी की पैंटी को उतारने की सोची पर मेरी हिम्मत नहीं हुई. फिर मैंने अपनी लुंगी खोल दी और दीदी के ऊपर आ गया. क्या मजा आ रहा था. तभी दीदी उठ गई. मैं सोने की एक्टिंग करने लगा. दीदी ने मुझे अपने ऊपर से हटाया, अपने कपड़े ठीक किए और बाथरूम चली गई.

फिर मैं भी मुठ मारकर सो गया. 2-3 दिन ऐसे ही चलता रहा. मैं रोज रात को दीदी की नाइटी ऊपर उठाकर उनके नंगे बदन को निहारता, उनकी जांघें सहलाता और दीदी जागती तो मैं आंखें बंद कर लेता. मैं अब हर समय दीदी को चोदने के बारे में सोचता. घर में दीदी के आगे-पीछे घूमता, उन्हें बुरी नीयत से घूरता रहता था. कभी मुझे लगता कि दीदी मेरा इरादा समझ रही है और उनका भी मन है, कभी लगता कि दीदी को कुछ मालूम नहीं है.

एक दिन मैं पलंग पर बैठा हुआ टीवी देख रहा था और दीदी झाड़ू मार रही थी, उसके मस्त बूब्स आधे से ज्यादा दिख रहे थे. मैंने टीवी को बंद कर दिया और दीदी के बूब्स देखने लगा. अचानक दीदी और मेरी नजरें मिलीं लेकिन मैंने नजरें नहीं हटाईं.

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दीदी- क्या देख रहे हो.

मैं- कुछ नहीं, मैंने दीदी के बूब्स देखते हुए कहा.

दीदी- मुझे सब पता है कि तू क्या देख रहा है, दीदी गुस्से से बोली.

मैं- ज्यादा चिल्ला मत, मैं पापा को बता दूंगा कि तू मस्तराम की कहानियां पढ़ती है. ये सुनकर दीदी चौंक गई.

दीदी- पापा की धमकी देता है, आने दे पापा को गांव से, तेरी रात की हरकतों के बारे में बताती हूं. तुझे लगता है कि रात को मुझे पता नहीं लगता तेरी हरकतों का. दीदी को मालूम है ये सोचकर मैं डर गया और दीदी से माफी मांगने लगा. फाइनली दीदी मान गई.

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दीदी- ओके नहीं बताऊंगी लेकिन आगे से ऐसा कुछ नहीं करना, मैं तेरी सगी दीदी हूं, रिमेंबर. दीदी ने एक सेक्सी सी स्माइल देते हुए कहा और नहाने चली गई. दीदी को स्माइल देते देख मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

दीदी ने आज ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी थी. मैं पहली बार दीदी को इतनी ट्रांसपेरेंट कपड़ों में देख रहा था. दीदी की ब्लैक ब्रा और ब्लैक पैंटी क्लियर दिख रही थी. इस सेक्सी नाइटी में दीदी पूरी सेक्स बॉम्ब लग रही थी. वाह क्या फिगर था मेरी दीदी का. दीदी भी मेरे साथ बेड पर बैठ गई. दीदी को महसूस हो गया कि मैं उसे देख रहा हूं. मैं डर गया कि दीदी फिर गुस्सा होगी.

दीदी- तुझे कैसे पता कि मैं मस्तराम की कहानियां पढ़ती हूं, दीदी ने मस्त स्माइल देते हुए पूछा.

मैं- तुम्हारे बैग में देखा था. दीदी- तू मेरा बैग क्यों चेक कर रहा था.

मैं- छोड़ो ना दीदी, वो बात अब खत्म हो गई है. मैं- दीदी आप बहुत सुंदर हो.

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दीदी- मस्का मत मार, तू भी तो मस्तराम की कहानियां पढ़ता है, मैंने भी तेरे बैग में देखा था.

मैं- मेरे पास 3 किताबें हैं. मैंने सोचा जब दीदी नहीं शर्मा रही है तो मैं क्यों शर्माऊं.

दीदी- मुझे दे, मैं भी पढ़ूंगी, दीदी ने मुझे देखते हुए कहा.

मैं- दूंगा लेकिन मेरी एक शर्त है.

दीदी- क्या.

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मैं- मैं ब्लू फिल्म लाकर देखूंगा, तुम पापा से नहीं कहोगी.

दीदी- ओके.

मैंने दीदी को मस्तराम की किताबें दे दीं और खुद मार्केट आ गया ब्लू फिल्म की सीडी लेने. मैंने दीदी को जो बुक्स दिए थे उनमें भाई-बहन की सेक्स की कहानियां थीं. मुझे मालूम था कि उन्हें दीदी पढ़कर आज रात को मुझे अपनी चूत दे देंगी और दीदी को चोदने के सपने देख रहा था. मैं बीएफ की सीडी लेकर घर आ गया. मैं बहुत एक्साइटेड था. दीदी बेड पर लेटी हुई थी. उनकी नाइटी कमर तक उटी हुई थी. वाह क्या सीन था. दीदी ने मुझे देखकर भी उठाने की कोशिश नहीं की और ना ही नाइटी नीचे की.

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मैं- लो दीदी, गोलगप्पे खाओ. मैं मार्केट से गोलगप्पे ले आया था. मैं और दीदी गोलगप्पे खाने लगे. मैं खाते वक्त भी दीदी को घूरे जा रहा था.

मैं- कैसे लगी मस्तराम की स्टोरी.

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दीदी- तू बीएफ ले आया.

मैं- हां, देखोगी क्या.

दीदी- नहीं मैं सोने जा रही हूं और दीदी अपनी कमर को जानबूझकर हिलाते हुए दूसरे रूम में चली गई. मैं उसके दोनों गांड देख रहा था कि अचानक पलटी और मुझे देखकर जोर से हंसी और फिर चली गई. फिर मैंने भी बीएफ नहीं देखा और दीदी के रूम में सोने चला गया. दीदी बेड पर लेटी हुई थी, मैं भी उनके बगल में आकर लेट गया.

दीदी- देख लिया ब्लू फिल्म.

मैं- नहीं. दीदी- क्यों.

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मैं- क्योंकि बीएफ से ज्यादा तुम्हें देखने का मन कर रहा है, कहते हुए मैंने दीदी के पैर पर पैर रख दिया.

मैं- तुम्हें कौन सी कहानी सबसे अच्छी लगी, मस्तराम की.

दीदी- भाई-बहन वाली. मैं- दीदी आप बहुत सुंदर हो, कहते-कहते मैंने अपना हाथ दीदी के बूब्स पर रख दिया. दीदी ने कुछ नहीं कहा. बहुत सॉफ्ट बूब्स थे दीदी के. फिर मैं धीरे-धीरे दीदी का राइट बूब्स दबाने लगा.

दीदी- उफ्फ क्या कर रहे हो. फिर मैंने दूसरे हाथ से दीदी की नाइटी को उठा दिया और उनके नर्म जांघों को सहलाने लगा. दीदी सिसकारियां भर रही थी, आह… ह्ह्ह… इह्ह… फिर मैं अपना एक हाथ उनकी पैंटी के अंदर डालने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया.

दीदी- ज्यादा आगे मत बढ़ो.

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मैं- प्लीज.

दीदी- नहीं, बस हो गया हटो और दीदी ने मुझे धक्का देकर अपने से दूर कर दिया. और दीदी उठकर बाथरूम में चली गई. मैं समझ गया कि वो बाथरूम में उंगली करने गई. मेरा भी लुंगी में ही लीक हो गया था. दीदी बाथरूम से बाहर आई और चेयर पर बैठ गई.

मैं- दीदी पलंग पर आओ.

दीदी- नहीं तू फिर बदमाशी करेगा.

तो बी कंटिन्यूड.

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