प्रणाम पाठको, मेरे आशिको, लो आप की तम्मना दिल खोल कर पूरी कर रहा हूँ, सब शिकायत दूर कर दे रहा हूँ, बस आप सब मुझे ईमेल करते रहना, जिनको मेरी गांड चाहिए, वो लोग अपने जगह, उम्र, लंड का आकार लिख कर मेल करें। पंजाब में रहने वालों को पहल के आधार पर गांड दूंगा।
मेरी पिछली चुदाई वकील मिश्रा से हुई थी। बुड्ढे मिश्रा की शक्ति मेरी गांड ने अच्छी तरह महसूस कर ली थी। लेकिन उससे चुदवाते चुदवाते अचानक मेरी नजर मुंशी हरिराम के खड़े लंड पर पड़ गई। बस मैं उसी पर मर मिटा। उसका लुल्ला था, न कि कोई छोटी लुल्ली। वह मोटा, लंबा और पूरी तरह उभरा हुआ था।
बस क्या था कि मैं बहाने से नंगा होकर बाहर चला गया। मुंशी हरिराम ने मुझे झपटकर अपनी मजबूत बाहों में दबोच लिया और जोर से मसलने लगा। उसकी उंगलियां मेरी नंगी कमर और नितंबों को कसकर पकड़ रही थीं। फिर दुबारा उसने मुझे अपनी ओर खींच लिया। वह मुझे वहीं चोदना चाहता था। उसने सोचा कि वकील मिश्रा थककर सो गया होगा।
उसने मुझे दुबारा अपने कपड़े खोलने को कहा ही था। अभी हम कुछ करने वाले थे कि बुड्ढे की आवाज सुनकर हम दोनों अलग हो गए। मैंने जल्दी से उसे अपना नंबर दे दिया और उसका नंबर ले लिया। फिर वहां से निकल आया। घर पहुंचकर मुझे बार बार हरी का वह मोटा लंड बार बार याद आने लगा था। क्या खूबसूरत और मोटा लंड पाया था उसने।
शाम को उसका फोन आ गया। उसने मुझे पूछा, “तुम कहां रहते हो? अभी आता हूं कार लेकर। उसमें कुछ मस्ती करेंगे।”
वो आ भी गया। हम एक सुनसान खाली सड़क पर पहुंच गए। मैंने झुककर उसके पैंट का बटन खोला और जिपर नीचे खींची। उसका मोटा, गर्म लंड बाहर निकल आया। मैंने उसे दोनों हाथों से थामा और मुंह में ले लिया। जमकर चूसा, जीभ से उसकी पूरी लंबाई चाटी। ऊपर नीचे मुंह हिलाते हुए उसका रस निकाल दिया। वो गदगद हो उठा, सांसें तेज हो गईं और पूरी तरह तड़पने लगा।
वो मुझे चोदने को बेचैन हो रहा था। मैंने दुबारा उसे खड़ा करने की कोशिश ही की थी कि कार के शीशे से उसने दूर से आ रही पेट्रोलिंग गाड़ी देख ली। हम तुरंत अलग हो गए। उसने कार तेजी से भगा दी और मैंने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। मिलन अधूरा रह गया था।
अगली सुबह उसने कॉल करके कहा- बुड्ढा आज शहर में नहीं है, मैं अकेला रहूँगा चैंबर में ! तुम ग्यारह बजे आ जाना !
मैं ठीक समय पर वहाँ पहुँच गया। उसने तुरंत दरवाजा लॉक कर दिया और मुझे पिछले कमरे में ले जाकर बिस्तर पर जोर से पटक दिया। एक-एक करके उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मैं पूरी तरह नंगा हो गया। उसने मेरे निप्पलों को मुंह में लेकर जमकर चूसा, उन्हें लाल कर दिया। दांतों से हल्का काटकर निशान बना दिए जो निशानी के तौर पर मुझे गिफ्ट हो गए। फिर उसने मेरी नाभि को जीभ से चूम लिया और मेरे रसीले होंठों को गहरी चुम्बन से भर दिया।
मैंने उसे झटका देकर पीछे हटाया। अपनी जगह उसे लिटा दिया और उसके सारे कपड़े उतार दिए। अंडरवियर भी नीचे खींचकर उसके मोटे सुपारे को अपने होंठों में छुपा लिया। धीरे-धीरे चूसने लगा लेकिन उसका लंड पूरा मुंह में लेना मुश्किल हो रहा था। वह पूरे आकार में आ चुका था, सख्त और नसों से भरा हुआ।
उसने कहा, “आज तेरी गांड फाड़ दूंगा !”
मैंने कहा, “है तो काफी मोटा ! तेरे लिए दर्द सह लूंगी लेकिन इसको मैं हैंडल करूंगी !”
मैंने ढेर सारा थूक उसके लंड पर थूका। उंगलियों से फैलाकर अपने छेद पर भी लगाया। एक उंगली अंदर घुसाकर अच्छे से चिकना कर दिया। फिर दोनों टांगें चौड़ी करके उसके सुपारे को सही जगह पर रखा और धीरे से नीचे बैठने लगा। घुसते वक्त तेज दर्द हुआ लेकिन उसे बहुत मजा आ रहा था। धीरे-धीरे करके मैंने उसका पूरा मोटा लंड अंदर ले लिया। कुछ देर रुककर मैं ऊपर-नीचे हिलने लगी। अब उसका लंड मजे से अंदर-बाहर घुस-निकल रहा था। कोई दर्द नहीं रह गया था।
“बोल साली, अब मुझे हैंडल करने दे ! स्टेयरिंग तो मेरा है !” उसने मुझे पलटकर नीचे लिटा दिया। लड़की की तरह मेरी चूतड़ों के नीचे तकिया लगा दिया और लंड को छेद पर रख दिया। मैंने नाग की तरह अपनी टांगों को उसकी कमर पर लपेट लिया। उसने एक जोरदार झटके से लंड पेल दिया। जोर-जोर से चोदने लगा। “हाय !” मैं सिसकारियां भरकर चिल्लाई, “हाय राजा ! बहुत अच्छा ! और करो ! फाड़ दो !” बोलकर मैं चुदने लगी।
उसका जोश बढ़ने लगा। करीब दस मिनट बाद उसने मेरी गांड को अपना गर्म रस से भर दिया। ऊपर ही चित्त होकर हांफने लगा। कुछ देर बाद उसका लंड फिर खड़ा होने लगा। मैंने मुंह में लेकर उसे पूरा सख्त कर दिया। अबकी बार उसने मुझे घोड़ी बनाया और लंड पेलने लग गया। उसकी जांघें जब चूतड़ों से टकराती तो एक मधुर आवाज पैदा होती जो मुझे और गर्म कर रही थी।
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काफी देर इस तरह चोदने के बाद उसने मुझे उल्टा बिस्तर पर लिटा दिया। मेरी टांगें फैलाकर लंड को फिर से छेद पर रखा और धीरे से अंदर डालने लगा। इस मुद्रा में मेरी गांड बहुत कसी हुई थी। मुझे तेज तकलीफ हुई लेकिन हरामी ने नहीं छोड़ा। वह जोर-जोर से पेलने लगा। उसका मोटा लंड पूरी गहराई तक धंस रहा था। हर झटके के साथ मेरी सिसकारियां निकल रही थीं।
कुछ देर बाद उसने मुझे खड़ा किया। दीवार से दोनों हाथ लगाकर गांड को पीछे की ओर झुकाने को कहा। मैंने वैसा ही किया। करीब बीस-पच्चीस मिनट तक उसने मुझे इस मुद्रा में मजे से चोदा। उसके लंड के हर धक्के से पूरे शरीर में कंपन हो रहा था। हम दोनों पूरी तरह खुश और संतुष्ट होकर एक-दूसरे को चूमते हुए अलग हो गए। दुबारा मिलने का वादा करके हम अलग हुए।
मैं कपड़े पहनकर बाहर निकला कि सामने चैंबर वाला मुझे देख घूर रहा था।
मैंने उसकी आँखों में आंखें डाल दी।
वो मुस्कुराने लगा।
“क्या घूर रहे हो? मैं कोई लड़की हूँ?”
“साली एक घंटा अंदर लगा कर आई है। वो भी आज मिश्रा नहीं है!”
“आज नहीं, फिर कभी!”
उसने नंबर थमा दिया और मैं वहाँ से निकला।
यह थी मिश्रा के बाद उसके मुंशी के साथ मेरी गाण्ड-गाथा !
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