Pyasi Bhabhi sex story, Bhabhi ki chudai sex kahani: मेरा नाम राजन है। मैं लुधियाना (पंजाब) का रहने वाला हूँ। मेरी आयु तेईस साल है। मैं पहली बार अपने साथ बीती को पाठकों के सामने पेश करना चाहता हूँ।
यह तब की बात है जब मेरी उम्र 19 साल थी, नवंबर का महीना था। हमारे घर के ठीक पड़ोस में एक भाभी रहती थीं, जिनसे मेरी बहुत अच्छी बनती-बनती थी। उसी मोहल्ले में एक बेहद खूबसूरत लड़की कोमल भी रहती थी। वह ठीक जवानी की शुरुआत में थी, उसकी उम्र शायद 18-19 के आस-पास रही होगी।
जब भी मैं उसे देखता, उसकी संतरे जैसी गोल, उभरी हुई चूचियाँ मेरी नज़रों में चढ़ जाती थीं। मन में बस एक ही ख्याल आता — अभी जाकर इन दोनों को मसल-मसलकर उनका पूरा रस निचोड़ लूँ और एक-एक बूँद पी जाऊँ। जब वह स्कर्ट पहनकर चलती, तो उसकी पतली कमर और मोटी, गोरी जाँघें इतनी आकर्षक लगतीं कि मुँह में पानी भर आता। उसके होंठ बिना किसी लिपस्टिक के भी गहरे गुलाबी थे, हमेशा हल्के से भीगे-से रहते। हर बार उन्हें देखकर दिल करता कि अभी जाकर चूस लूँ, काट लूँ, जीभ से चाट-चाटकर लाल कर दूँ।
कोमल भाभी के घर बहुत आती-जाती रहती थी। मुझे वह बहुत प्यारी लगने लगी थी। धीरे-धीरे हमारी बातचीत शुरू हुई। पहले हल्की-फुल्की बातें, फिर हँसी-मज़ाक, और फिर वह मेरे साथ खुलकर बात करने लगी। हम दोनों में अच्छी दोस्ती हो गई।
एक दिन मैंने भाभी से कहा कि कोमल से मेरी अच्छी दोस्ती करवा दो। पहले भाभी ने थोड़ा मना किया, आनाकानी की, लेकिन फिर कुछ सोचकर बोलीं, “ठीक है, मैं पूछ लूँगी।”
अगले दिन जब मैं भाभी के पास गया तो उत्सुकता से पूछा, “भाभी, आपने कोमल से बात की?”
भाभी ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं क्यों करूँ? मेरा क्या फायदा?”
मैंने हाथ जोड़कर कहा, “आप मेरी भाभी हो! आप मेरी मदद नहीं करोगी तो कौन करेगा?”
भाभी ने आँख मारते हुए पूछा, “तो बताओ, मुझे क्या मिलेगा?”
मैंने तुरंत कहा, “आप जो माँगोगी, मैं दूँगा।”
“पक्का?” भाभी ने पूछा।
“हाँ, बिल्कुल पक्का!” मैंने वादा किया।
भाभी ने हँसते हुए कहा, “ठीक है, उसने हाँ कर दी है।”
मैं अंदर से झूम उठा, मन ही मन बहुत खुश हुआ।
फिर मैंने तुरंत कहा, “भाभी, उसे अभी बुला दो! मुझे उससे बात करनी है।”
भाभी मेरी बेचैनी और उत्सुकता अच्छे से समझ गई थीं। उन्होंने कोमल को बुला भेजा।
कोमल कुछ ही देर में आ गई। उसने गुलाबी रंग का सलवार-सूट पहन रखा था, जो उसके गोरे बदन पर इतना फिट था कि वह और भी खूबसूरत लग रही थी। सूट की कसी हुई कमर, उभरी चूचियाँ और हल्की-हल्की झलकती जाँघें — सब कुछ देखकर मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
वह आई, मेरे सामने बैठ गई और हम दोनों ने खूब बातें कीं। हँसी-मज़ाक चल रहा था।
तभी भाभी बोलीं, “तुम दोनों यहीं बैठो, बातें करो। मैं पास की दुकान से दूध लेकर आती हूँ।”
भाभी को जाने-आने में लगभग बीस मिनट लगने वाले थे। जैसे ही भाभी दरवाज़े से बाहर निकलीं, कोमल धीरे-धीरे मेरे और पास सरक आई। उसकी आँखों में शरम और उत्सुकता दोनों थीं।
मैंने हल्की आवाज़ में कहा, “कोमल, मुझे तुम्हें जफ्फी में भरना है।”
उसने बिना कुछ कहे फ़ौरन अपनी बाहों को मेरे चारों ओर लपेट दिया। मैंने भी उसे कसकर अपनी छाती से लगा लिया। उसकी मुलायम चूचियाँ मेरी छाती से दब गईं। मैंने उसके हाथों को पकड़ा, उन्हें अपने होंठों से छुआ और फिर धीरे-धीरे हर उँगली पर चुंबन करने लगा। उसके बाद मैंने अपना मुँह ऊपर उठाया और उसके गुलाबी, नरम, गर्म होंठों को अपने होंठों से चिपका दिया। जैसे ही होंठ मिले, मैंने उसकी तेज़, गरम साँसों को महसूस किया। उसकी साँसें इतनी उत्तेजित थीं कि मेरे पूरे बदन में currents दौड़ गए।
मुझे भी जोश चढ़ गया। मैंने उसके निचले होंठ को अपने होंठों के बीच हल्के से दबाया और चूसना शुरू कर दिया। फिर धीरे-धीरे अपनी जीभ उसके होंठों के बीच सरकाई और उसके मुंह में डाल दी। उसने भी तुरंत जवाब दिया — अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली और मेरी जीभ से लिपट गई। हम दोनों की जीभें एक-दूसरे के चारों ओर लिपटती रहीं, एक-दूसरे को चाटती रहीं, गहराई तक जाती रहीं।
मैं उसके होंठों को लगातार दस मिनट तक चूसता रहा — कभी ऊपरी होंठ को पूरी तरह मुंह में लेकर चूसता, कभी निचले को काटते हुए चाटता, कभी दोनों होंठों को एक साथ दबाकर चूमता। बीच-बीच में हमारी साँसें तेज़ होकर एक-दूसरे के मुँह में मिल जाती थीं।
फिर मेरे हाथ धीरे-धीरे उसके बालों से होते हुए नीचे आए और उसकी दोनों चूचियों पर रुक गए। मैंने पहले कपड़े के ऊपर से ही उन्हें सहलाया, उनकी गोलाई और नरमी महसूस की। फिर मैंने हल्के से दबाया। जैसे ही ज़ोर लगा, कोमल के मुँह से एक मधुर सिसकारी निकली, “नहीं राजन… आज नहीं… आज मुझे बहुत डर लग रहा है।”
मैं रुका नहीं। मैंने धीरे-धीरे उसके सलवार का नाड़ा खोला और सलवार को नीचे सरकाकर उतार दिया। फिर उसके कुरते को ऊपर उठाकर सिर से निकाल दिया। अब उसके बदन पर सिर्फ़ पतली लेस वाली पैंटी और छोटी, टाइट ब्रा बची थी। मैं उसके पीछे गया, ब्रा के हुक एक-एक करके खोले और फिर ब्रा को आगे से खींचकर पूरी तरह उतार फेंका।
वाह! क्या अद्भुत नज़ारा था। उसके दोनों गोरे, गोल, भरे-भरे स्तन मेरे सामने पूरी तरह नंगे थे। गुलाबी चुचूक पहले से ही सख्त हो चुके थे और हल्के से उठे हुए थे। वह शर्म से सिर झुकाए खड़ी थी, उसके गाल लाल हो गए थे, साँसें तेज़ चल रही थीं।
मैंने आगे बढ़कर दोनों स्तनों को अपने हाथों में भर लिया। मैंने उन्हें धीरे-धीरे मसलना शुरू किया — कभी हल्के से दबाया, कभी ऊपर-नीचे सहलाया, कभी अँगूठे से चुचूकों को रगड़ा। कोमल की सिसकारियाँ निकलने लगीं, “सी… सी…”। मैंने अपना मुँह नीचे किया, एक चुचूक को जीभ से छुआ, पहले सिर्फ़ टिप से चाटा, फिर पूरी तरह मुंह में लेकर चूसने लगा। मैंने हल्के से दाँतों से काटा भी, लेकिन बहुत नरमी से। फिर दूसरी चूची पर भी यही किया। दोनों को बारी-बारी से चाटता, चूसता रहा। उसका बदन अब काँप रहा था, सिसकारियाँ और तेज़ हो गई थीं। मैं समझ गया कि वह पूरी तरह उत्तेजित हो चुकी है।
अचानक मैंने महसूस किया कि उसका हाथ मेरे पैंट के ऊपर से मेरे लंड पर आ गया था। वह उसे धीरे-धीरे सहला रही थी, ऊपर-नीचे कर रही थी। मैंने फटाफट अपनी पैंट की बटन और ज़िप खोली, अंडरवियर नीचे सरकाया। मेरा आठ इंच लंबा, मोटा, नसों से भरा, पूरी तरह खड़ा लंड बाहर आ गया। कोमल ने उसे अपने नरम हाथ में पकड़ा और धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगी। उसकी उँगलियाँ मेरे लंड की पूरी लंबाई पर सरक रही थीं, कभी सुपारे को हल्के से निचोड़तीं, कभी जड़ तक जातीं।
मैं उसके स्तनों को बारी-बारी से चाटता रहा। मैंने पहले उसके दाएँ स्तन को दोनों हाथों से हल्के से दबाया, उसकी नरम, गर्म त्वचा को महसूस किया, फिर जीभ की नोक से उसके गुलाबी निप्पल को धीरे-धीरे घेरते हुए चाटा। निप्पल तुरंत सख्त होकर खड़ा हो गया। मैंने उसे होंठों के बीच लिया और हल्के से चूसा, जिससे कोमल के मुँह से एक गहरी, दबी हुई सिसकारी निकली। फिर मैंने बायाँ स्तन लिया, उसी तरह जीभ से चारों ओर घुमाया, कभी हल्के से काटते हुए, कभी पूरी जीभ से लार छोड़ते हुए चाटा। उसके स्तन मेरे मुँह में पूरी तरह भर जाते थे और मैं उन्हें बार-बार चूसता रहा, जिससे उसकी साँसें तेज और अनियमित हो गईं।
फिर मैंने उसे धीरे से घुटनों पर बैठा दिया। मैंने कहा, “इसे चाटो।” पहले उसने शरमाते हुए मना किया, उसका चेहरा लाल हो गया और उसने नजरें नीचे कर लीं। लेकिन जब मैंने थोड़ा और जोर दिया, अपनी आवाज में थोड़ी सख्ती लाकर कहा, “कोमल, कर ना… बस एक बार,” तो उसने धीरे-धीरे अपना चेहरा मेरे लंड के पास लाया। पहले उसने सिर्फ़ होंठों से सुपारे को छुआ, हल्के से स्पर्श किया, जैसे परीक्षा ले रही हो। उसकी गर्म साँस मेरे सुपारे पर लगी और मैं सिहर उठा। फिर धीरे-धीरे उसने अपना मुंह खोला और मेरे लंड का सिरा अपने गर्म, गीले होंठों के बीच ले लिया। उसने जीभ की नोक से सुपारे के चारों ओर छोटे-छोटे घेरे बनाए, लार से उसे पूरी तरह गीला किया।
फिर उसने धीरे-धीरे पूरा सिर मुंह में लिया और चूसना शुरू कर दिया। उसका जीभ मेरे सुपारे के नीचे की नस को बार-बार दबाती, फिर ऊपर की ओर लपेटती। उसका मुंह इतना गर्म, गीला और नरम था कि मुझे लगा जैसे मैं किसी स्वर्ग में पहुँच गया हूँ। वह धीरे-धीरे मेरे लंड को मुंह में अंदर-बाहर करने लगी, हर बार थोड़ा और गहराई तक ले जाती, फिर बाहर निकालकर सुपारे को जीभ से तेजी से चाटती। पहली बार किसी लड़की का मुंह मेरे लंड पर था। मैं एक अजीब-सी, नशे भरी दुनिया में खो गया था। मेरे हाथ उसके सिर पर थे, हल्के से बालों को सहलाते हुए, लेकिन मैं उसे जबरदस्ती नहीं दबा रहा था।
धीरे-धीरे उसकी स्पीड बढ़ रही थी। अब वह तेजी से सिर आगे-पीछे करने लगी थी, मुंह में लंड को गहराई तक ले जाती, फिर बाहर निकालकर होंठों से चूमती। कभी-कभी वह पूरी लंबाई को मुंह में लेने की कोशिश करती, जिससे उसकी गले से हल्की सी गड़गड़ाहट की आवाज आती। एक समय ऐसा लगा कि मैं झड़ने वाला हूँ। मेरी साँसें रुकने लगीं, कमर में एक तेज कंपन हुआ। मैंने फट से लंड को बाहर निकाला और कोमल को बेड पर लेटा कर उसके पैंटी को उतार दिया। उसकी बिना बाल वाली चिकनी चूत को देखकर मैं बेकाबू हो गया। उसकी दोनों बड़ी-बड़ी होंठें हल्के से खुली हुई थीं, बीच में गुलाबी रंग की नरम त्वचा चमक रही थी और उसकी चूत पर पहले से ही हल्की नमी चमक रही थी। मैंने उसकी बूर पर हाथ फेरते हुए एक ऊँगली धीरे से बूर में डाल दी।
अंदर की गर्माहट और कसाव ने मुझे पागल कर दिया। उसकी सिसकारियाँ निकल पड़ीं, “आह्ह… उफ्फ…” धीरे-धीरे उसकी बूर से पानी रिसना शुरू हो गया, मेरी उंगली पूरी तरह गीली हो गई। मैंने अपना मुँह उसकी बूर पर रखकर चाटने लगा। पहले मैंने जीभ से दोनों होंठों को अलग-अलग चाटा, फिर क्लिटोरिस को जीभ की नोक से हल्के-हल्के छुआ। जब मैंने क्लिटोरिस को होंठों के बीच लिया और चूसा तो वह पूरी तरह से कमर उठाकर चीख पड़ी। कभी-कभी मैं अपनी जीभ उसके बूर में भी डाल देता, अंदर तक जितना हो सके, घुमाता, जिससे वह और तेजी से सिसकारने लगती, उसकी जांघें कांपने लगतीं।
तभी एकदम से भाभी आ गई …
उन्होंने हमें देखा और डाँटने लगी। हम दोनों ने फटाफट कपड़े पहने। भाभी ने कोमल को घर जाने को कहा। कोमल डर के मारे घर चली गई।
भाभी मुझे समझाने लगी।
वो बोली- ऐसे काम किसी भी समय करने के नहीं होते ! यह तो मैं थी ! अगर कोई और आ जाता तो क्या करते तुम दोनों?
तो मैंने पूछा- तो कब करते हैं?
भाभी बोली- रात को ! मैंने सोचा कि भाभी को हमें मिलाने में कोई आपत्ति नहीं है,
मैंने तब जान कर पूछा- भाभी, रात को कहाँ?
वो बोली- यहीं पर ! जब तेरे भईया न हो ! वो हफ्ते में एक दिन दिल्ली जाते हैं कम्पनी के काम के लिए ! तब रात को कोमल ही मेरे पास सोती है, तब कर लेना तुम दोनों। मैंने कहा- ठीक है ! फिर मैं घर चला गया।
अगले दिन जब मैं भाभी के घर गया तो वो बोली- तुम्हारा काम आज रात को हो जाएगा ! तेरे भैया आज ही दिल्ली जा रहे हैं।
तो मैंने कहा- मैं कितने बजे आऊँ?
भाभी ने कहा- दस बजे !
मैंने कहा- ठीक है। मैंने घर में दोस्त की पार्टी का बहाना बनाया और पूरे दस बजे भाभी के घर आ गया। भाभी ने मेरे आते ही अन्दर से कुंडा लगा लिया।
मैंने पूछा- भाभी ! कोमल नहीं आई?
वो बोली- उसने कहा था, पर आई नहीं अभी तक !
वो बोली- आ जाएगी ! इतना तड़पता क्यों है?
मैंने कहा- नहीं ! ऐसी कोई बात नहीं ! मैं इन्तज़ार कर लेता हूँ। मैं और भाभी बातें करने लगे।
फिर 11 बजे मैंने भाभी से कहा- भाभी, वो अभी तक नहीं आई?
भाभी बोली- पता नहीं !
तब फ़िर भाभी बोली- लगता है कि वो आज नहीं आयेगी।
तो मैंने कहा- भाभी, मैंने घर में पार्टी का बहाना बनाया है ! कम से कम एक बजे तक मुझे यहाँ रुकना पड़ेगा !
वो बोली- कोई बात नहीं ! तू यही रह जा ! हम दोनों बातें करते हैं !
फिर मैं और भाभी बातें करने लगे।
भाभी ने मुझसे दिन वाली बात पूछते हुए कहा- मैं तो तुम्हें भोला समझती थी ! तुम तो बहुत तेज निकले?
मैंने जानबूझ कर भाभी से कहा- भाभी ! मैंने क्या किया?
तो भाभी मुझे छेड़ते हुए बोली- पन्द्रह-बीस मिनट में तूने उसे बिलकुल नंगी कर दिया और उसकी चूत पर आ गया ? वाह ! तू कमाल है।
तो मैंने शर्म से मुँह नीचे कर लिया।
तो वो बोली- मुझसे क्यों शर्माता है? मैं तेरी भाभी हूँ।
फिर वो बोली- तेरा औजार बहुत बड़ा है ! इतना तो तेरे भाई का भी नहीं।
मैं समझ गया भाभी की बातें ! कि उन्हें मेरा लौड़ा चाहिए !
तो मैं भी शरारती स्वर में बोला- भाभी ! आपको कैसा लगा?
तो भाभी बोली- मेरा दिल तो उसी समय उस पर आ गया था ! मैं चाहती थी कि कोमल को हटा कर वहाँ मैं लेट जाऊँ !
तो मैंने भाभी से कहा- तो रोका क्यों ? आप भी आ जाती !
तो उन्होंने कहा- कोमल के सामने नहीं कर सकती थी ! इसीलिए तुम्हें रात को बुलाया और कोमल को नहीं।
मैंने कहा- तो यह आपकी कारस्तानी थी?
वो बोली- हाँ ! अगर मैं ऐसा न करती तो तू मुझे कैसे मिलता?
फिर मैंने कहा- अब मैं कोमल को कैसे चोदूँगा?
तो वो बोली- तू मुझे खुश कर दे ! मैं कोमल को मना दिया करुँगी और बदले में तुम्हें मेरे से भी करते रहना होगा !
मैंने तुरंत कहा- ठीक है भाभी जी ! जैसा आप कहें !
उसके बाद हम दोनों ने शुरु कर दिया। मुझसे बिल्कुल भी रूका ना गया, मैंने उन्हें जल्दी से दोनों हाथों से पकड़ा और बिस्तर पर लिटा दिया और अधीर होकर भाभी के होंठों को चूमने लगा। उन्होंने कुछ भी नहीं कहा और मैं गर्म हो गया। फ़िर तो मैंने प्रगाढ़ चुम्बन भी किया। मेरा लण्ड तो पूरा सख्त हो गया।
उन्होंने भी मेरे मुँह पर बहुत सारे चुम्बन लिए। उनके होंठ मेरे होंठों पर बार-बार दब रहे थे, कभी हल्के से छूकर, कभी गहराई से चूसते हुए। उनकी साँसें गर्म और तेज़ हो रही थीं, और हर चुम्बन के साथ उनकी जीभ मेरे मुँह में प्रवेश कर मेरी जीभ से खेल रही थी। उनके मम्मे कमीज़ के पतले कपड़े के ऊपर से भी साफ़ नज़र आ रहे थे; निप्पल्स सख्त होकर कपड़े को अंदर से दबा रहे थे, दोनों गोलाईयाँ स्पष्ट रूप से उभरी हुई दिख रही थीं। वो भी पूरी तरह गरम हो चुकी थीं। मेरी चूमा-चाटी उन्हें और अधिक उत्तेजित कर रही थी। उन्होंने गद्दे को दोनों हाथों से सख्ती से पकड़ लिया, अपनी उँगलियाँ कपड़े में धँसा दीं, और मुझे पूरी आज़ादी दे दी कि मैं उनके साथ जो चाहूँ कर लूँ।
मैंने धीरे-धीरे उनकी कमीज़ की बटनें खोलीं, एक-एक करके, हर बटन खुलने पर उनकी गर्म त्वचा की और अधिक झलक मिल रही थी। आख़िर में पूरी कमीज़ उतारकर मैंने फेंक दी। अपनी टी-शर्ट भी मैंने जल्दी से उतार फेंकी। उनका चेहरा अब पूरी तरह लाल हो चुका था, गालों पर गुलाबी आभा फैल गई थी, आँखें कामुकता से नम और भरी हुई थीं। उनकी साँसें तेज़ और भारी हो रही थीं।
फिर मैंने उनकी सलवार की नाड़ी खोली और धीरे-धीरे नीचे सरका दिया। उनकी सलवार घुटनों तक आते ही मैंने उसे पूरी तरह उतार फेंका। उनके बड़े-बड़े, गोल और मुलायम चूतड़ मेरे सामने थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें दबाया, अपनी हथेलियों में भरकर मसलने लगा। उनकी त्वचा बिल्कुल चिकनी थी, एक भी बाल नहीं था; साफ़-सुथरी, मुलायम वैक्सिंग की हुई त्वचा मेरी उँगलियों के नीचे रेशमी लग रही थी। शायद उन्होंने मेरे लिए ही यह सब किया था।
उन्होंने अंदर एक चटकी हुई लाल रंग की पैंटी पहनी हुई थी, जो उनकी चूत की आकृति को और अधिक उभार रही थी। पैंटी का कपड़ा पहले से ही गीला हो चुका था। मैंने अपनी उँगलियाँ पैंटी की किनारों में डालकर उसे धीरे-धीरे नीचे खींचा। जैसे ही पैंटी घुटनों तक आई, मैंने उसे पूरी तरह उतार दिया। उनकी चूत मेरे सामने पूरी नंगी हो गई।
क्या अद्भुत दृश्य था! उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, पूरी तरह साफ़ और चमकदार। दोनों होंठ गुलाबी और मोटे थे, बीच में हल्की सी दरार से उनकी उत्तेजना की चमक साफ़ दिख रही थी। क्लिटोरिस छोटा और सख्त होकर बाहर निकला हुआ था। उनकी चूत को देखते ही मेरा लंड पूरी तरह खड़ा और सख्त हो गया, नसें उभर आईं और सुपारा लाल हो गया।
मैंने जैसे ही अपनी उँगली से उनकी चूत के होंठों को छुआ, वो एकदम से जोर से कराह उठीं। “आह्ह्ह…” उनकी आवाज़ कमरे में गूंज गई। मैंने धीरे से अपनी मध्यमा उँगली उनकी चूत के अंदर डाली। अंदर की गर्माहट और कसाव मुझे महसूस हुआ; उनकी चूत बहुत तंग और गीली थी। मैंने उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया और दूसरे हाथ से उनके क्लिटोरिस को हल्के-हल्के रगड़ने लगा। उनकी चूत के होंठ मेरी उँगली के इर्द-गिर्द सिकुड़ रहे थे।
फिर मैंने अपना मुँह उनकी चूत के पास ले जाकर पहले होंठों को चूमा। मेरी जीभ ने उनके क्लिटोरिस को छुआ और फिर मैं पूरी चूत को चूसने लगा। मैंने जीभ को अंदर डालकर उनकी चूत की दीवारों को चाटा, क्लिटोरिस को चूसा और हल्के से दाँतों से काटा। वो पागलों की तरह कराहने लगीं। पूरा कमरा उनकी सेक्सी आवाज़ों से भर गया: “ऊऊऊह्ह्ह्ह्… आआह्ह्ह… ऊऊफ़्फ़्फ़्… म्म्म्म्स्स्स… प्ल्ज्ज… धिरेईईईए!”
तभी मुझे अपने लंड पर उनकी उँगलियाँ महसूस हुईं। उनका हाथ मेरे लंड को टटोल रहा था, उसे सहला रहा था, सुपारे को हल्के से दबा रहा था। मैंने अपनी जींस और अंडरवियर उतार दी और अपना सख्त लंड उनके हाथ में थमा दिया। उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और नीचे झुककर पहले मेरे लंड को चूमा। फिर उन्होंने जीभ से सुपारे को चारों ओर घुमाया और धीरे-धीरे पूरा लंड मुँह में ले लिया। वो मेरे लंड को ऐसे चूस रही थीं जैसे कोई बच्चा लॉलीपॉप को बड़े चाव से चूसता है — कभी गहराई तक ले जाकर गले तक, कभी बाहर निकालकर सुपारे को चाटती हुईं, कभी अंडकोष को भी जीभ से सहलाती हुईं। मुझे इतना मजा आ रहा था कि मेरी साँसें रुक-रुक कर चल रही थीं। उन्होंने काफी देर तक मेरा लंड चूसा, मुँह से निकालकर हाथ से भी सहलाया और फिर दोबारा मुँह में लिया।
फिर हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। मैं नीचे लेटा था और वो मेरे ऊपर। उनकी चूत मेरे मुँह के ठीक सामने थी और मेरा लंड उनके मुँह में। हम दोनों एक-दूसरे को एक साथ चूसने लगे। मैं उनकी चूत को फिर से जीभ से चाट रहा था, क्लिटोरिस को चूस रहा था, उँगली अंदर डालकर उनकी जी-स्पॉट को रगड़ रहा था। वो मेरे लंड को मुँह में लेकर जोर-जोर से चूस रही थीं। कुछ ही देर में वो पहली बार झड़ गईं; उनकी चूत सिकुड़ने लगी, गर्म रस मेरे मुँह में बहने लगा और वो तेज़-तेज़ कराहने लगीं। फिर थोड़ी देर बाद दूसरी बार भी वो झड़ीं, इस बार और जोर से।
फिर उसने मेरे लंड को मुँह से निकाला और भारी साँसों के साथ कहा, “प्लीज़… अब बर्दाश्त नहीं होता… फक्क मी वैरी हार्ड! अपना लंड मेरी प्यासी चूत में घुसा दो।”
मैंने कहा, “भाभी! उल्टी हो जाइए।”
उन्होंने पूछा, “पीछे से चोदोगे मुझे?”
मैंने कहा, “अब कण्ट्रोल नहीं होता।”
वो उल्टी हो गईं। उनके बड़े मम्मे सोफे पर दब गए, निप्पल्स सोफे के कपड़े से रगड़ रहे थे। मैंने उनकी कमर पर चूमना शुरू किया, जीभ से उनकी कमर की गड्ढी को चाटा। मेरे हाथ उनकी कमर पर फिसल रहे थे, चूतड़ों को दबा रहे थे। फिर मैं उनकी कमर पर लेट गया। मेरा सख्त लंड उनकी गीली चूत से छू गया। मैंने अपना लंड हाथ में पकड़ा, सुपारे को उनकी चूत के होंठों पर रगड़ा, फिर धीरे से आगे बढ़ाया। उनकी तंग योनि में प्रवेश करते ही मुझे कसाव महसूस हुआ। मैंने धीरे-धीरे अंदर डाला। वो “आह्ह… ओह्ह…” कह रही थीं। फिर मैंने और जोर लगाया और पूरा लंड एक झटके में अंदर डाल दिया। वो तेज़ चीखीं लेकिन मुझे नहीं रोका।
अब मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्के के साथ उनकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई। वो लगातार कराह रही थीं: “औरऽऽ… औरऽऽ…” मैंने उन्हें पीछे से 20-25 मिनट तक जोर-जोर से चोदा। आख़िर में मेरा वीर्य उनके अंदर छूट गया और उसी समय भाभी भी एक बार फिर जोर से झड़ गईं। उफ्फ्फ़… क्या दिन था। मैंने सोचा भी नहीं था।
भाभी ने मुझे कहा, “अब तुम चूचों के बीच में डालो!”
मैंने अपना अभी भी सख्त लंड उनके मम्मों के बीच में रखा और आगे-पीछे करने लगा। उनके मम्मों की मुलायम गर्माहट और दबाव से मुझे बहुत मजा आया। मैंने उनके पूरे जिस्म पर फिर से चूमा-चाटी की और फिर हम दोनों ने कपड़े पहन लिए।
फिर जब भी भैया जाते हैं तो हम दोनों खूब मस्ती करते! मैंने उनको बहुत बार चोदा! उसके बाद मैंने कोमल की कुँवारी चूत भी मारी! वो मैं अपनी नई कहानी में बताऊंगा।
टेलीग्राम चैनल जॉइन करें - रोज़ाना नई कहानी अपडेट के लिए
Related Posts