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बस के ड्राइवर और कंडक्टर से चुद गई। Hot Sex In Group Kahani

यह Hot Sex In Group Kahani है जो रात की बस से घर जा रही है।. रास्ते में वह अपना पर्स खो गया।. तो बस का किराया उसने कैसे भुगतान किया?

प्रिय दोस्तों यह अन्तर्वासना – FreeSexKahani.in पर लिखी गई पहली कहानी है।

मेरी यह कहानी सब पाठकों को बहुत पसंद आएगी। मैं आशा करता हूँ कि यह आपको पूरी तरह से बांधे रखेगी और आप इसमें खो जाएंगे।

मैंने इस कहानी में बहुत अधिक मिर्ची मसाला नहीं डाला है। मैंने इसे सरल और वास्तविक रखने की कोशिश की है ताकि यह आपके मन में उतर जाए।

मैंने कहानी लिखने की कोशिश की है जैसे मैंने इसे सुना है। हर घटना को उसी तरह से जीवंत बनाने का प्रयास किया है जैसा वह वास्तव में हुई थी।

यह हॉट सेक्स इन ग्रुप कहानी मेरे साथ मेरे कॉलेज में पढ़ने वाली गांव की एक सुंदर लड़की की है जो हमारे हॉस्टल कैंपस की गर्ल्स हॉस्टल में रहती है। उसकी आकर्षक मुस्कान और नजरें देखकर मन अंदर ही अंदर घुलने लगता था।

वह पूजा पटेल है और बीस साल की है। उसकी उम्र युवानी की शुरुआत वाली थी जहां हर अंग फूल की तरह खिल रहा था।

उसका बदन खूबसूरती का एक खजाना है। चिकनी त्वचा, घुमावदार आकृतियां और वह नाजुक लेकिन आकर्षक ढंग से भरा हुआ जिस्म जो देखने वाले को अपनी ओर खींच लेता था।

उसके नितंब और वक्षस्थल को देखते ही चूसने और दबाने की इच्छा होती है। वे इतने आकर्षक और नरम लगते थे कि आंखें वहीं अटक जाती थीं और कल्पना में हाथ खुद बढ़ने लगते थे।

हम फाइव सेमेस्टर में थे पूजा ने मुझे यह कहानी बताई।

यह उस समय की कहानी है जब वह चौथा सेमेस्टर पूरा करके अपने घर चली गई।

अब हम उसी से कहानी सुनेंगे।

मैं आज बहुत खुश थी क्योंकि गर्मियों की छुट्टी शुरू होने वाली थी और मेरा सेमेस्टर एग्जाम भी समाप्त हो गया था। मेरे मन में हल्कापन था। शरीर थका हुआ था लेकिन दिल उछल रहा था। लंबे समय बाद घर जाने का विचार ही मुझे रोमांचित कर रहा था।

इसलिए मैं घर जाना चाहती थी। हॉस्टल की दिनचर्या से दूर जाकर परिवार के साथ समय बिताने का सपना देख रही थी।

मैं हॉस्टल से आठ घंटे की दूरी पर रहती हूँ इसलिए मैंने रात का सफर तय करने का फैसला किया। रात की बस में सफर आरामदायक रहता है और दिन बच जाता है।

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वैसे भी मैं छह बजे तक फ्री नहीं हो रही थी क्योंकि मेरे पास दो एग्जाम थे और पैकिंग भी करनी थी। समय की कमी थी। मैंने जल्दी-जल्दी बाकी काम निपटाए।

मैंने सोचा कि मैं रात को दस बजे की बस पकड़कर अपने घर जाऊंगी। बस स्टैंड पर समय पर पहुंचने का प्लान बनाया।

मैंने शाम को हॉस्टल में खाना खाया और अपने बैग को पैक कर लिया। गरमा गरम खाने की खुशबू अभी भी मेरे मुंह में थी।

नौ बजे मैं हॉस्टल से परमिशन लेकर घर चली गई। वार्डन से छुट्टी ली और बाहर निकल आई।

मेरे सामान में एक हैंड पर्स एक छोटा साइड बैग और एक बड़ा सूटकेस था। सूटकेस काफी भारी था लेकिन मैंने उसे संभाल लिया।

मैं यह सारा सामान लेकर हॉस्टल से तुरंत रिक्शा लेकर बस स्टैंड पहुंची और बस का इंतजार करने लगी। रिक्शे की सीट पर सामान रखकर मैं थोड़ी राहत महसूस कर रही थी।

मेज पर बैठे बैठे व्हाट्सएप चला रही थी। बस स्टैंड की बेंच पर आराम से बैठ गई थी।

हमारे कॉलेज की लड़कियों के ग्रुप में किसी ने एक सेक्सी वीडियो पोस्ट किया था। वीडियो में जोड़े गहरी कामुकता से एक दूसरे को छू रहे थे।

मैं उसे देखकर गर्म हो गई। मेरे गाल लाल हो गए। शरीर में एक अजीब सी गर्माहट फैलने लगी।

एक बार रात हो गई और ठंडी हवा चल रही थी। हवा मेरे हाथ-पैरों को छू रही थी लेकिन अंदर से आग सी जल रही थी।

उसमें वीडियो देखते ही मेरा मन विचलित हो गया। स्क्रीन पर चलते दृश्य मेरी कल्पना को उत्तेजित कर रहे थे।

मैं वीडियो देखते हुए आसपास खड़े लोगों को छुप छुप कर देख रही थी। कोई देख तो नहीं रहा है ना।

मैं उंगली करने की इच्छा कर रही थी। मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। अंदर से खुजली सी हो रही थी।

पर क्या करूं हाय रे किस्मत मैं चूत में उंगली डालने जाऊंगी। बस स्टैंड पर इतने लोग थे कि मैं कुछ नहीं कर पा रही थी। मेरी सांसें तेज हो रही थीं।

थोड़ी दूरी पर भी लड़के खड़े थे जो मुझ पर बार बार लाइन मारते थे। उनकी नजरें मेरे वक्षस्थल और जांघों पर बार-बार अटक रही थीं।

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मैं मन ही मन मुस्कुराकर फिर से अपने फोन पर मैसेज देखने लगी।

मेरी बस इतनी देर में आ गई तो मैं अपने सामान लेकर बस में चढ़ गई।

बस ड्राइवर और कंडक्टर थोड़ी देर बाद बस में चढ़े।

सारे यात्री अपने स्थान पर बैठ गए। हल्की सी हलचल के साथ सब लोग अपनी सीटों पर व्यवस्थित हो गए।

इसमें बहुत अधिक रिजर्वेशन नहीं था क्योंकि यह सिर्फ स्थानीय थी। बस आधी खाली थी।

मैं भी बिना किसी रिजर्वेशन के चढ़ गई। मैंने अपना सूटकेस ऊपर रखा और हैंडबैग पास में रख लिया।

मैं एक सीट पर बैठ गई। खिड़की वाली सीट मिल गई थी जिससे ठंडी हवा अंदर आ रही थी।

बस में बहुत ज्यादा लोग नहीं थे। रात का सफर था इसलिए बहुत लोग नहीं थे लगभग बीस पच्चीस लोग थे।

साथ ही चालक और कंडक्टरों की संख्या बीस होगी। बस में शांति थी। सिर्फ इंजन की हल्की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही थी।

मैं थोड़ा गर्म थी इसलिए मैंने सोचा कि कोई सुंदर अकेला लड़का देखकर उसके बगल में बैठ जाऊंगी। मेरी चूत अभी भी वीडियो के असर से नम थी और शरीर में गर्माहट बनी हुई थी।

पर मैं ऐसा कोई नहीं पाया। आसपास ज्यादातर परिवार और बुजुर्ग यात्री थे।

जब मैंने कंडक्टर को देखा मेरी वासना और भड़क उठी। उसकी आकृति देखते ही मेरे निप्पल सख्त हो गए।

कंडक्टर बहुत गरम था उम्र अधिकतम अट्ठाईस से तीस वर्ष होगी। उसकी मजबूत बांहें और चौड़ी छाती आकर्षक लग रही थी।

उसका जिम वाला शरीर उसके कपड़ों में फिट नहीं बैठता था और वह एक बहुत ही हॉट और सेक्सी लड़का था जो थोड़ा सा काला था। उसकी त्वचा पसीने से चमक रही थी। उसकी पैंट में उभरी हुई लकीर देखकर मेरी नजरें बार-बार वहां जा रही थीं।

जैसे ही उसने बस की घंटी बजाई वह बस स्टॉप से रवाना हो गई और रवाना होने से पहले पूरे शहर में घूमी। बस हल्के झटके के साथ आगे बढ़ी।

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दस मिनट बाद उसने सबके टिकट इकट्ठा करना शुरू कर दिया। वह सीटों के बीच से गुजरते हुए हर यात्री से टिकट ले रहा था।

धीरे धीरे मेरे पास आते ही उसने सभी को टिकटें दे दीं।

उसने कहा टिकट कहां जाना है आपको। उसकी गहरी और मर्दाना आवाज मेरे कानों में गूंजी।

उसने अपने गांव का नाम बताते ही तुरंत टिकट निकाली। उसकी उंगलियां टिकट की किताब पर फिसल रही थीं।

पर जैसे ही मैं अपने पैसे लेने के लिए अपना हाथ पर्स ढूंढने लगा मुझे पता चला कि हाथ पर्स बस स्टैंड पर छूट गया था। मेरे दिल की धड़कन अचानक तेज हो गई।

मैंने कहा कि मुझे पर्स नहीं मिल रहा है शायद वह बस स्टैंड पर छूट गया है। मेरी आवाज थोड़ी कांप रही थी।

उसमें मेरे कुछ पैसे और मेरा आई कार्ड हैं क्या आप बस वापस ले सकते हैं। मैंने उम्मीद भरी नजरों से उसकी ओर देखा।

कंडक्टर ने कहा कि बस को वापस लेने का कोई कारण नहीं है क्योंकि हम बस स्टैंड से पैंतालीस मिनट दूर निकल चुके हैं तो पर्स भूल जाओ। उसका स्वर दृढ़ था लेकिन नरम भी।

तो मैंने उससे कहा कि मैं आपके टिकट के पैसे नहीं दे पाऊंगी अगर हम बस नहीं लेंगे। मेरे गाल शर्म से लाल हो रहे थे।

उसने कहा कोई बात नहीं मैं आपके टिकट के पैसे का कुछ करता हूं आप निश्चिंत होकर बैठे रहें। उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक थी।

उसकी सांत्वना के शब्दों ने मुझे पर्स भूलने की चिंता से कुछ राहत दी। फिर भी मन में घबराहट बनी रही।

फिर मैं पर्स में क्या था सोचने लगी। मेरे हाथ अनजाने में अपनी जांघों पर फिसल गए।

तो शायद उसमें दो हजार रुपये थे और मेरे आई कार्ड थे जो मैं व्हाट्सएप पर चेक करने के दौरान बस स्टैंड पर भूल गई थी। अब क्या होगा यह सोचकर मैं परेशान हो रही थी।

बस कुछ समय चलने के बाद कंडक्टर खड़ा हुआ और चालक के पास गया और उसके कान में कुछ कहने लगा। दोनों की बातचीत फुसफुसाहट में हो रही थी।

धीरे धीरे मुस्कुराकर ड्राइवर ने कंडक्टर को देखा। उनकी मुस्कान में कुछ राज था।

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फिर वह मेरे बगल में फिर से बैठ गया।

मुझे बताया कि अगर टिकट के पैसे नहीं हैं तो आपको दो दिन की जेल हो सकती है फिर आपको टिकट के मूल्य से पांच गुना अधिक पैसा घर जाकर हमें देना होगा। उसकी आवाज कम थी लेकिन साफ सुनाई दे रही थी।

यहां हमारी सरकारी बस का नियम लागू होता है तो आपको मंजूर कौन सी सजा मिली। उसने मेरी आंखों में देखते हुए पूछा।

उसकी बात सुनकर मेरा दर्द बढ़ गया और मेरी आंखें बहने वाली थीं। दिल जोरों से धड़क रहा था। गला सूख गया था।

तुम डरो मत इनमें से कोई भी सजा नहीं मिलेगी उसने कहा और मेरे कंधे पर हाथ रख दिया। उसकी हथेली गर्म और भारी थी।

अगर मैं कहूं तो तुम ऐसा करो। उसकी उंगलियां मेरे कंधे को हल्के से दबा रही थीं।

मुझे क्या करना चाहिए मैंने पूछा। मेरी आवाज कांप रही थी।

मुझे लगता था कि उसकी हवस भरी निगाहें मेरे शरीर को ताड़ रही हैं। उसकी नजरें मेरे वक्षस्थल पर बार-बार रुक रही थीं।

आगे एक घंटे बाद स्टॉप आएगा उसने धीरे से कहा। उसकी सांस मेरे गालों को छू रही थी।

तीस मिनट का हॉल्ट होगा रेस्तरां के ऊपर छोटा सा होटल है।

उस गेस्ट हाउस के कमरे में तुम्हें हमारे और ड्राइवर चाचा के साथ कुछ करना होगा। उसने स्पष्ट शब्दों में कहा।

मैंने पहले उसे मना किया लेकिन मेरा शरीर भी गर्म हो गया इसलिए मैंने कहा कि मैं तैयार हूं। मेरी चूत पहले से ही भीग चुकी थी।

मेरे बूब्स को दबाते हुए वह वहीं पर बैठा रहा।

फिर मेरी चूत में उंगली डालने लगा जींस की चैन खोलकर। उसकी मोटी उंगली ने मेरी जींस की चैन खोलते ही अंदर घुसने की कोशिश की। मेरी पैंटी पहले से ही भीगी हुई थी। उसने पैंटी को एक तरफ सरकाया और अपनी दो उंगलियां सीधे मेरी गीली चूत में डाल दीं।

उस बस में अंधेरा था इसलिए कोई कुछ नहीं देख रहा था। बस की हल्की गड़गड़ाहट के बीच मेरी सांसें तेज हो रही थीं।

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मैं धीरे धीरे सिसकारियां ले रही थी और बाहर से आवाजें आ रही थीं। “आह… उम्म…” मेरे मुंह से अनियंत्रित आवाजें निकल रही थीं।

स्टॉप आ गया। बस के ब्रेक लगने से झटका लगा।

मुझे पीछे आने को परिचालक ने कहा। उसकी आंखों में वासना साफ दिख रही थी।

उसके पीछे मैं चलने लगी। मेरी जांघें भीगने के कारण चिपक रही थीं।

हम गेस्ट हाउस के रिसेप्शन पर रेस्तरां के ऊपर पहुंचे। हवा में खाने की महक और पुरानी दीवारों की गंध मिल रही थी।

रिसेप्शन पर कुछ बात करते हुए उसने मुझे देखा और हमें एक कमरे में जाने को कहा। कमरे की चाबी लेते समय उसकी नजरें मेरे शरीर पर घूम रही थीं।

मैं उस कमरे में कंडक्टर के साथ गई। कमरे में एक डबल बेड और हल्की रोशनी थी।

मैं जानती थी कि अब मेरे साथ क्या होगा। मेरा शरीर पूरी तरह तैयार था।

मैं भी बहुत गर्म थी इसलिए कमरे में आते ही बेड पर लेट गई। मेरी सांसें भारी हो रही थीं।

ड्राइवर ने कंडक्टर के पीछे पीछे कमरे में प्रवेश किया। दरवाजा बंद होते ही कमरे में तनाव भरी चुप्पी छा गई।

ड्राइवर कंडक्टर से लगभग दशक बड़ा था।

कंडक्टर तीस वर्ष का था और ड्राइवर चालीस वर्ष का था। दोनों के शरीर मजबूत और कामुक लग रहे थे।

कंडक्टर बहुत विनम्र था।

बस चालक भी कम नहीं था। उसकी मूंछें और चौड़ी छाती देखकर मन और गर्म हो रहा था।

चलो अब तैयार हो जाओ दोनों ने कहा। उनकी आवाजों में उत्सुकता थी।

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और कंडक्टर ने खिड़की बंद कर दी। कमरे में हवा रुक गई।

वे दोनों सो गए और मुझे सहलाने लगे।

धीरे धीरे दोनों ने मुझ पर किया हमला कंडक्टर ने मेरी पैंटी नीचे खींच दी और मेरी चूत चाटने लगा और ड्राइवर मेरे होंठों का रस पीने लगा। कंडक्टर ने घुटनों के बल बैठकर मेरी जांघें फैलाईं। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत की फांकों को चाट रही थी। वह ऊपर नीचे अपनी जीभ घुमा रहा था। मेरी क्लिटोरिस को चूसते समय वह हल्के से काट भी रहा था। ड्राइवर ने मेरे बाल पकड़कर मेरे होंठों को जोर से चूमा। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुसकर मेरी जीभ को लपेट रही थी।

मुझे मजा आ रहा था तो मैं चिल्लाने लगी और शोर मचाने लगी। “आह… हां… और जोर से… उम्म…” मेरी सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं।

जब कंडक्टर ने मेरी ब्रा खोली तो मेरे स्तन आजाद हो गए। मेरे भरे हुए स्तन हिल रहे थे।

उन्होंने मेरे स्तन पकड़ लिए और दूध पीने लगे। कंडक्टर एक स्तन को जोर से मसल रहा था जबकि ड्राइवर दूसरे स्तन के निप्पल को मुंह में लेकर चूस रहा था। उनके दांत हल्के से काट रहे थे जिससे मीठा दर्द हो रहा था।

इसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर ने अपने कपड़े उतार दिए। उनके शरीर पसीने से चमक रहे थे।

हे भगवान जब मैंने उनके लिंग देखे तो मेरी आंखों में आंसू आ गए। दोनों के लिंग खड़े और नसों से भरे हुए थे।

ड्राइवर का लिंग कंडक्टर के लिंग से बड़ा और मोटा था। उसका सिर गुलाबी और चमकदार था।

जब मैंने यह देखा तो मुझे बहुत खुशी हुई। मेरी चूत से और ज्यादा रस निकलने लगा।

कंडक्टर धीरे धीरे मेरे ऊपर आया मेरी चूत चाटने लगा और मेरी जांघें फैलाने लगा फिर उसने अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा तो पूरा लंड अंदर चला गया। उसका मोटा लंड मेरी तंग चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुसा। मैंने जोर से चीख मारी।

मुझे कुछ दर्द महसूस हुआ लेकिन मैं बहुत खुश भी थी। अंदर पूरी तरह भर जाने से मेरी चूत सिकुड़ रही थी।

और ड्राइवर ने अपना लिंग मेरे मुंह में डाल दिया। उसका मोटा लंड मेरे गले तक पहुंच रहा था। मैं उसे चूसने लगी।

पांच मिनट तक ऐसे ही चुदाई चलती रही। कमरे में चुदाई की आवाजें और हमारी सांसों की तेज आवाजें गूंज रही थीं।

बाद में उन्होंने मुझे घोड़ी जैसा बना दिया। मैं चारों हाथ-पैरों पर थी। मेरे स्तन लटक रहे थे।

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तभी ड्राइवर मेरे पीछे आया तो कंडक्टर ने मेरा मुंह चोदना शुरू कर दिया। ड्राइवर ने मेरी कमर पकड़कर अपनी पूरी ताकत से झटके मारने शुरू कर दिए।

मैं चिल्ला रही थी और शोर मचा रही थी। “आह… हां… फाड़ दो मेरी चूत… और तेज… उम्म्म… आह!”

उसकी गति धीरे धीरे बढ़ती गई। हर झटके से मेरी चूत से रस छूट रहा था।

कंडक्टर ने अपना लिंग मेरे मुंह से बाहर निकाल लिया।

साथ ही ड्राइवर ने अपनी गांड को तेज तेज़ आगे पीछे करके मेरी चुत चुदाई की स्पीड तेज़ कर दिया। वह मेरी कमर को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़े हुए था। हर झटके में उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर तक धंस रहा था। मेरी चूत की दीवारें उसके लंड को जकड़ रही थीं। हर बार अंदर घुसते समय ‘पच पच’ की आवाज गूंज रही थी।

इसके बाद वह मेरी योनि में स्खलित हो गया और फिर एक तरफ बैठ गया। उसने जोर से कराहते हुए अपना गर्म वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़ा। गर्म तरल मेरी चूत को भर रहा था और कुछ बाहर भी निकल रहा था।

इसके बाद कंडक्टर मेरे ऊपर चढ़ गया और मेरी चूत चोदने लगा। उसने अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ा और फिर एक झटके में अंदर डाल दिया।

धीरे धीरे वह तेज हो गया और पूरा अपना वीर्य मेरे गुप्तांग में डाल दिया। “आह… ले ले मेरी जान… उफ्फ…” वह कराह रहा था। उसके झटके तेज और गहरे थे। अंत में उसने अपनी कमर को मेरे नितंबों से चिपकाते हुए सारा वीर्य मेरी चूत में उंडेल दिया।

पूरी प्रक्रिया में संभवतः बीस से पच्चीस मिनट का समय लगा। हम सब पसीने से तर थे। कमरे में सेक्स की महक फैली हुई थी।

तब ड्राइवर ने कहा आओ भाई हमारा समय आ गया है।

उन्होंने मुझसे यह भी कहा कि तुम्हें भी अपने कपड़े पहनने चाहिए अब आप खतरे में नहीं हैं क्योंकि आपके टिकट के पैसे वसूल हो गए हैं आप आराम से अपने घर पहुंच जाएंगी।

मैंने अपने कपड़े पहन लिए। मेरे हाथ अभी भी कांप रहे थे।

ड्राइवर और कंडक्टर ने भी अपने कपड़े पहने।

तब तक ड्राइवर जा चुका था।

कमरे में रुके थे कंडक्टर ।

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उसने फिर मुझे गले लगाया और चूमा। उसकी गर्म सांस मेरे गालों पर पड़ रही थी।

तब उसने मुझसे कहा उठो तुरंत चलो।

मैंने कहा कि ठीक है।

बाद में हम आए और बस में बैठे।

रेस्टोरेंट मालिक ने बस में बहुत सारा खाने का सामान रखा था।

मैंने कंडक्टर के साथ दोपहर का खाना खाया।

अब जब मैं बैठ गई तो मैं तरोताजा और तनाव मुक्त महसूस कर रही थी।

बस सेवा शुरू हो गई।

जब मैं अपने गांव पहुंची तो उतरते ही बस ड्राइवर ने मुझे अपना फोन नंबर दिया।

मुझे अभी भी उस रात का वो उत्तेजक ग्रुप सेक्स याद है।

आपको मेरी हॉट सेक्स इन ग्रुप कहानी कैसी लगी।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।