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भाभी ने दीवार फांदकर अंदर बुलाया

देसी औरत की चूत की कहानी में मैंने ऐसे ही बाजार में मिल गयी एक भाभी को सेट करके उसी के घर चोद दिया। मैं अपने दोस्त की दूकान पर बैठा था कि दो ग्राहक आईं।

हाय फ्रेंड्स, मैं कबीर अग्रवाल सूरत गुजरात से आपके लिए अपनी नयी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ।

यह देसी औरत की चूत की कहानी पिछले महीने की ही है।

मैं अपने एक दोस्त से मिलने उसकी शॉप पर गया था। उसकी शॉप कटलरी आइटम्स की थी। वहां ज़्यादातर महिला ग्राहक ही आती थीं। मैं उसे मिलने दोपहर के वक्त गया था। उस टाइम ज़्यादा भीड़ नहीं होती है। दूकान में हल्की सी धूप की किरणें आ रही थीं और एयर कंडीशनर की ठंडी हवा का एहसास हो रहा था।

मेरा दोस्त काउंटर के अन्दर की साइड बैठा था और मैं काउंटर की दूसरी साइड था, जहां कस्टमर खड़े होते हैं। मैं वहां बैठा दोस्त से बात कर रहा था। हम दोनों पुरानी यादों को ताजा कर रहे थे और बीच-बीच में हंस रहे थे। थोड़ी देर में वहां दो महिलाएं आईं। दोनों शादीशुदा भाभियां थीं।

उनमें एक की हाइट कम थी जबकि दूसरी कुछ ज़्यादा ही लंबी थी। उन दोनों की बातों से मालूम हुआ कि ज़्यादा हाइट वाली का नाम उषा था। जब उषा अन्दर को आई, तो मैं थोड़ा सरक कर बैठ गया। उषा मेरी तरफ ही खड़ी थी।

मैंने उषा को ध्यान से देखा। वह लंबी और गोरी तो थी, साथ में भरे हुए बदन की थी। उसकी त्वचा चिकनी और दूध जैसी सफेद थी जो दुपट्टे के नीचे से भी झलक रही थी। उसकी गांड पीछे से उभरी हुई थी और आगे से उसके बूब्स भी एकदम गोल व तने हुए थे। वे ब्लाउज को अच्छी तरह से भर रहे थे और हर सांस के साथ हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे। वह टोटल पटाखा माल थी।

मैं उसकी गांड और बूब्स को घूर घूर कर देख रहा था।

तभी उषा की नज़र मुझ पर पड़ी। उसने भांप लिया कि मैं क्या देख रहा हूँ। लेकिन उसने कोई रिएक्ट नहीं किया और वापिस अपनी सहेली की खरीददारी में मदद करने लगी। अब मैं भी उन दोनों की बातों के बीच में बोल रहा था कि यह ले लीजिए … अच्छा रहेगा।

इस पर मैंने ध्यान दिया कि उषा भी मेरे साथ मुस्कुरा कर बात कर रही थी। उसकी मुस्कान में कुछ मस्त सा लगा तो मैंने अपने एक पैर को थोड़ा आगे करके उसके पैर पर रख दिया। उसने मेरी तरफ देखा और वापस स्माइल की। अब वह भी धीरे से मेरे कुछ और पास को सरक आयी।

उसके पास आ जाने से मैं उसके पैर को सहलाने लगा। मेरे पैर की उंगलियां धीरे-धीरे उसके नरम पैरों पर फिसल रही थीं। तभी दो और कस्टमर आ गए तो उषा और उसकी सहेली मेरी तरफ कुछ ज्यादा ही सरक आईं। अब उषा बिल्कुल मेरे पास खड़ी थी।

मैंने सबकी नज़रों से खुद को बचाते हुए उषा की गांड को सहला दिया। मेरी हथेली उसके भरे हुए, गोल नितंबों पर पड़ी। कपड़े के ऊपर से भी उसकी नरम और गरम त्वचा का एहसास हो रहा था। उषा ने मेरी तरफ देखा और स्माइल करके थोड़ा मुड़ कर खड़ी हो गयी … ताकि मैं क्या कर रहा हूँ किसी को पता ना चले।

यह समझते ही मैं बिंदास हो गया और उसकी गांड से खेलने लगा। मेरी उंगलियां उसके नितंबों को हल्के-हल्के दबा रही थीं और गोलाई को महसूस कर रही थीं। वह भी मजा ले रही थी। उसके शरीर में हल्की सी सिहरन महसूस हो रही थी और सांसें थोड़ी तेज हो गई थीं।

उतने में वे दोनों कस्टमर चली गईं और उषा की सहेली की भी शॉपिंग हो गयी। मैंने उषा को नंबर के लिए इशारा किया। उषा ने अपने फोन में अपना ही नंबर डायल करके मेरी तरफ फोन कर दिया। मैंने उसका नंबर अपने फोन में डायल करके उसे मिस कॉल कर दिया। वह भी मुस्कुरा दी।

थोड़ी देर में वे दोनों भाभियां चली गईं। मेरे दोस्त को अब तक पता नहीं चला था कि उसकी कस्टमर को पटा कर मैंने उसका फोन नंबर भी ले लिया है।

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मैंने बाहर जाकर उषा को कॉल किया।

उषा ने कहा- अभी मैं बिज़ी हूँ, बाद में मैं खुद फोन करूँगी। उसने मुझे फोन करने से मना कर दिया। ऐसे ही 3 दिन बीत गए, उषा का कॉल नहीं आया। मैं इंतजार कर रहा था। हर घंटा फोन चेक करता और उम्मीद लगाए बैठा रहता।

तीन दिन बाद सुबह सुबह उषा कॉल आया। हम दोनों ने बहुत सारी बातें की। उसकी आवाज़ में मिठास थी जो मेरे कान में मीठी लग रही थी। उसने मुझसे पूछा कि मुझसे नंबर क्यों मांगा था!

मैंने साफ साफ कह दिया कि तुम मुझे बहुत हॉट लगीं तो मेरा मन तुम्हारे साथ सेक्स करने के लिए होने लगा था। वह मेरी सीधी बात सुन कर हंसने लगी और मुझसे प्रभावित हो गयी। उसकी हंसी में शरारत भरी थी जो मेरे शरीर में गर्मी पैदा कर रही थी।

अब हम दोनों रोजाना ऐसे ही सेक्सी बातें करने लगे थे। फोन पर हमारी बातें गर्म होती जातीं। मैं उसे अपनी कल्पनाएं बताता कि कैसे मैं उसके भरे बूब्स को दबाना चाहता हूँ और उसकी गांड को सहलाना चाहता हूँ। वह भी मेरी बातों पर सांसें लेती हुई जवाब देती।

एक दिन मैंने उससे पूछा कि कब मिलना है? उसने कहा- जगह की व्यवस्था करो तो मिल लेते हैं। साथ ही उसने होटल या किसी पब्लिक प्लेस में मिलने से मना कर दिया। मैंने कहा- चलो बताता हूँ।

वह बोली- आज रात को 12 बजे के आस पास मेरे घर आ जाना. मैं 2 दिन के लिए अकेली रहने वाली हूँ।

मैं भी रात को तैयार होकर उसके घर के पास आ गया। उसका घर सिटी से बाहर था और एक सोसाइटी में था। उसने घर के पीछे से दीवार कूद कर अन्दर आने को कहा ताकि सोसायटी के गेट पर एंट्री न करना पड़े। मैं भी थोड़ी हिम्मत करके उसके घर में पहुंच गया।

उस दिन उसने नीले रंग की वन पीस वाली नाइटी पहनी थी। नाइटी के अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी, यह साफ साफ उसके उभारों से दिख रहा था। उसके निप्पल नाइटी के कपड़े को ऊपर की तरफ उभार रहे थे।

मुझे अन्दर ले जाकर उसने घर को अन्दर से लॉक कर दिया। अन्दर लाकर उसने मुझे अपने गले से लगाया और मुझे सीधे अपने बेडरूम में ले गयी। उसकी गरम सांसें मेरे गाल पर पड़ रही थीं।

उधर पहले से रखा हुआ उसने बादाम वाला दूध का गिलास उठा कर मेरे होंठों से लगा दिया। मैंने उस दूध को ऐसे पिया मानो मैं सुहागरात पर उसका पति बन कर आया हूँ। मीठा और गाढ़ा दूध मेरे गले से नीचे उतर रहा था।

दूध पीकर मैंने गिलास एक तरफ रखा और उसे अपनी बांहों में समेट लिया। मैं उसके होंठों को किस करने लगा। उसके नरम, गुलाबी होंठ मेरे होंठों में फंस गए। वह भी मेरे होंठों को बेताबी से चूमने लगी। हमारी जीभें एक दूसरे से लड़ रही थीं और लार का आदान-प्रदान हो रहा था।

लगभग 15 मिनट की किसिंग के बाद हम दोनों अलग हुए। अब उसने मेरी शर्ट के बटन खोलने शुरू किए, तो मैंने अपने कपड़े खुद ही उतारने चालू कर दिए। एक-एक करके सब कपड़े फर्श पर गिर गए।

सब कपड़े उतार कर उसने मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। मुझे अद्भुत आनन्द आ रहा था। मेरा लंड उसके गुलाबी नर्म होंठों के बीच आगे पीछे होता हुआ उसके मुँह की गर्मी और तरलता का अनुभव कर रहा था। उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे को चाट रही थी।

वह भी मेरे लौड़े को लॉलीपॉप की तरह चूस रही थी। मैं मस्ती में अपनी आंखें बंद करके खड़ा था और अपनी कमर हिलाता हुआ अपने लंड से उसके मुँह को चोद रहा था। उसके मुँह से चूच-चूच की आवाजें निकल रही थीं। उस वक्त मेरा हाथ उसके सिर पर था।

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वह लगातार मेरे लंड को चूसे जा रही थी। उसकी गर्म जीभ हर तरफ घूम रही थी और गले तक ले जा रही थी। कुछ मिनट की चुसाई के बाद मेरा पानी उसके मुँह में ही निकल गया। गाढ़ा वीर्य उसके गले में उतर रहा था।

उसने मेरे लंड का पूरा पानी पी लिया और लंड को चूस चूस कर व जीभ से चाट चाट कर साफ कर दिया। वह वीर्य चाटने के बाद नशीली आंखों से मेरी तरफ देख रही थी और मैं निचुड़े हुए लंड को लटकाए हुए शिथिल सा होकर उसकी चूचियों को दबा कर वापस उत्तेजित होने का प्रयास कर रहा था।

उसने कुछ पल बाद एक पेय बनाया और मेरे होंठों से लगा दिया।

वह शराब मिला हुआ कुछ नशीला पेय था। मीठा और थोड़ा कड़वा स्वाद गले से नीचे उतरते ही शरीर में गर्मी फैलाने लगा। मैंने आधा गिलास उसे पिलाया और आधा खुद पी लिया।

सच में उस पेय में गजब का जादू था। कुछ ही पलों बाद मेरे लंड में तनाव आने लगा था। वह सिगरेट सुलगाने लगी थी। मैंने भी उसी सिगरेट से कश लगाया तो यह भी मुझे कुछ औषधि वाली सिगरेट लगी।

उसमें से जड़ी बूटी जैसी मस्त सुगंध आ रही थी और एक तेज नशा भी हो रहा था। धुंआ फेफड़ों में भरते ही सिर हल्का होने लगा। उसने भी कुछ लंबे लंबे कश लिए और हम दोनों नशे में थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे।

फिर मैंने उसके एक दूध को सहलाते हुए पूछा- लंड चूसने में मजा आया? मेरी उंगलियां उसके निप्पल को हल्के से नोच रही थीं।

उसने कहा- हां लंड चूस कर मुझे बहुत मजा आया. मेरा हज़्बेंड मुझे कभी भी लंड चूसने नहीं देता है. आज मुझे लंड चूस कर बहुत अच्छा लगा। उसकी आवाज़ में संतोष और कामुकता दोनों थी।

थोड़ी देर तक हम दोनों ऐसे ही लेटे बातें करते रहे। अब मैंने उसकी नाइटी उतार दी। वह पूरी तरह नंगी हो गई थी।

क्या बताऊं दोस्तो, उसका जिस्म बहुत सेक्सी था। उसके दोनों बूब्स बिल्कुल गोल शेप में थे और एकदम कसे हुए थे। निप्पल गुलाबी और सख्त हो चुके थे।

जबकि वह दो बच्चों की मां थी। फिर भी उसकी चूत एकदम कसी हुई थी और चिकनी बिना बालों की थी। उसकी योनि की पलकें थोड़ी सी सूजी हुई और चमकदार लग रही थीं।

पूछने पर उसने बताया कि उसके दोनों बच्चे ऑपरेशन से हुए थे जिस वजह से चूत एकदम कसी हुई है। झांट के बाल उसने आज शाम को ही साफ किए थे।

वह अब अपनी चूत पर हाथ फेरने लगी थी तो मैं समझ गया कि यह चूत चटवाना चाहती है।

मैंने उठ कर उसकी दोनों टांगों को खोला और चूत पर जीभ लगा कर चाटने लगा। मेरी गर्म जीभ उसकी चिकनी, नम योनि की ऊपरी पलकों पर घूमने लगी। वह सिहरने लगी और मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगी।

मैं भी उसकी रस छोड़ती चूत पर टूट पड़ा। मैं अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा घुसा कर उसकी चूत का रस चाटने लगा। उसके गर्म, खट्टे-मीठे रस का स्वाद मेरी जीभ पर फैल रहा था। आह … क्या मजा आ रहा था।

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ऐसा लग रहा था जैसे किसी नमकीन गर्म मलाई को चूस रहा हूँ। मैंने उसकी छोटी-छोटी पलकों को चूसा और जीभ से उसके क्लिटोरिस को हल्के-हल्के दबाया। वह भी चूत चुसाई से तड़प रही थी।

अपने दोनों हाथों से मुझे पकड़ कर अपनी चूत पर पूरी तरह से भींच रही थी। उसके कूल्हे ऊपर-नीचे हिल रहे थे। उसके मुँह से आह आह निकल रहा था- आह मेरी जान … चाट लो मेरी चूत को … आह आह … मेरे पति ने कभी चूत चाटी ही नहीं … बहन के लौड़े को चुदाई का चु भी नहीं आता है … आह चाट लो मेरे सनम!

कुछ देर चूत चुसाई के बाद अब मैं उसके दोनों मम्मों पर टूट पड़ा।

मैं उसके दोनों मम्मों को बारी बारी से चूस रहा था और खींच रहा था। मेरे मुंह में एक-एक निप्पल ले कर जोर से चूसता और दांतों से हल्का काटता। क्या मस्त बूब्स थे … बड़े और भरे हुए. पिंक निप्पलों को चूस चूस कर मैंने लाल कर दिया था।

अब मेरा लंड एकदम कड़क हो गया था। उसकी पूरी लंबाई और मोटाई वापस आ चुकी थी। उषा ने कहा- अब डाल दो चूत में।

मैंने भी देर ना करते हुए अपना लंड उसकी गीली चूत के दरवाजे पर रख दिया और एक ज़ोर का धक्का लगा दिया। मेरा पूरा लंड एक बार में ही अन्दर घुस गया। उसकी गर्म और भीगी चूत की दीवारें मेरे लंड को कस कर जकड़ रही थीं। उषा की हल्की चीख निकल गयी।

उसकी चूत की फांकों ने मेरे लंड को मानो किसी शिकंजे की तरह से जकड़ लिया था। मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर उसकी चूत से चप-चप की आवाजें निकल रही थीं। उषा भी ‘आह श आह’ जैसी आवाज़ निकाल रही थी।

उसकी आंखें बंद थीं और वह पूरी तरह मदहोश हो गयी थी। उसके चेहरे पर आनंद की लाली छा गई थी। मुझे आज उषा को चोदने में बहुत आनन्द आ रहा था।

उसकी चूत किसी कुंवारी लौंडिया की कसी हुई चूत जैसी थी। मैं उसको हचक कर चोद रहा था, तब ऐसा लग रहा था कि मैं किसी कॉलेज गर्ल को चोद रहा हूँ। मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी।

उषा भी नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ दे रही थी। हर धक्के पर उसके बूब्स ऊपर-नीचे लहरा रहे थे। लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद मेरा पानी निकलने वाला हो गया था।

मेरे पूछने पर उषा ने कहा- चूत में ही डाल दो. मैंने ऑपरेशन करवा लिया है। मैंने भी उषा की चूत को अपने पानी से भर दिया। मेरे लंड के अंदर से गाढ़ा गर्म वीर्य की धार फूट पड़ी और उसकी चूत की गहराई में भरने लगी। उषा की चूत मेरे लंड को और भी कस कर दबा रही थी।

उषा की चुदाई में एक अलग ही आनन्द आया। उसके शरीर में कंपन आ गया था और वह जोर से कराह रही थी।

उसने बताया कि उसके हज़्बेंड का लंड पतला है और दोनों बच्चे न केवल सिजेरियन हुए हैं बल्कि वीर्य धारण करने से हुए हैं. उसका मतलब था कि उसके पति की चुदाई से नहीं हुए हैं. इसलिए उसकी चूत टाइट भी है और प्यासी भी है. उसने मेरे अलावा अब तक किसी और से चुदाई नहीं की है।

यह जान कर मैं बहुत खुश हुआ। मैं दो दिन उसके घर ही रहा और दो दिन तक चुदाई को खूब एंजाय किया।

उसके बाद अब भी कभी कभी उषा मुझसे चुदवाती है। वह मुझसे अपनी उसी सहेली ही चुदाई की बात भी कह रही है। उस सेक्स कहानी को चुदाई के बाद लिखूँगा।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।