Rajasthani Sex Story: मेरा नाम उदित है। मैं हरियाणा के एक जीवंत और हलचल भरे शहर में रहता हूँ, जहां सुबह की ताजी धूप गलियों को नहलाती है, चाय की दुकानों से अदरक वाली महक उठती है और ट्रैफिक की लगातार गूंजती आवाजें हर तरफ फैली रहती हैं। मेरी उम्र 26 साल है और मैं एक हट्टा-कट्टा, मांसल शरीर वाला जवान लड़का हूँ, जिसकी चौड़ी छाती, मोटी बाहें, मजबूत कंधे और फिट कमर जिम की मेहनत और रोजमर्रा की सक्रिय जिंदगी की वजह से बनी हुई है। मेरी त्वचा सुनहरी और चमकदार है, आंखें गहरी और आकर्षक हैं, जिसे देखकर आसपास की लड़कियां अक्सर मुस्कुराकर नजरें मिलाती हैं। यह मेरी पहली कहानी है। मुझे उम्मीद है कि यह कहानी आप सबको पसंद आएगी।
वैसे तो मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों के साथ सेक्स किया है, जहां हर मुलाकात में उनके नरम शरीर की गर्माहट, उनकी सांसों की तेज होती रफ्तार और उनके होंठों की नमी मुझे हमेशा याद रहती है, लेकिन मैं एक इंजीनियर हूँ तो मैंने बहुत से राज्यों में नौकरी की है। हर नई जगह पर नई चुनौतियां, नई रातें और नई यादें जुड़ती गईं। मैं हरियाणा से नौकरी छोड़ कर राजस्थान के एक शहर में नौकरी करने के लिए गया, जहां की सूखी हवा, रेगिस्तानी माहौल और सुनहरी धूप ने मुझे तुरंत अपनी ओर खींच लिया।
वहाँ मेरे कुछ दोस्त भी मेरे साथ रहते थे। हम सब एक पुरानी लेकिन साफ-सुथरी इमारत में रहते थे, जहां सीढ़ियां चढ़ते वक्त लकड़ी की हल्की चरमराहट सुनाई देती थी। मेरा कमरा दूसरी मंजिल पर था, जिसकी खिड़की से सामने का पूरा नजारा साफ दिखता था। मेरे कमरे के सामने एक परिवार रहता था लेकिन मैं उनसे बात नहीं करता था, बस कभी-कभी बालकनी में खड़े होकर चुपचाप देखता रहता था।
मुझे नहीं पता था कि सामने वाले घर में रहने वाली औरत मुझे पसंद करती थी। धीरे-धीरे मैं भी उसे पसंद करने लगा था। पसंद क्या, मैं तो वासना का पुजारी हूँ तो मैं उसे देखता रहता था। उसकी साड़ी में लिपटी नाजुक कमर, उसके कंधों पर बिखरे बाल, उसकी चाल में छिपी मादकता और उसकी आंखों में झलकती अनकही इच्छा मुझे रात-रात भर सोने नहीं देती थी। उसका पति भी एक कंपनी में काम करता था, जहां वह सुबह जल्दी निकल जाता और शाम को थका-हारा लौटता था।
उसका रवैया देख कर एक दिन मैंने उसे पत्र लिख कर दिया और अपने प्यार यानि वासना को जाहिर किया तो उसने भी अपने प्यार को जाहिर किया और अपनी इच्छा को जाहिर किया और अपना नंबर भी बता दिया। उस पत्र को लिखते वक्त मेरे हाथों में हल्की सी कंपकंपी थी, लेकिन दिल में एक अजीब सी उत्तेजना थी।
मैंने उसे अगले दिन फोन किया तो उसने कहा- मुझे आपसे प्यार तो है लेकिन मुझे डर लगता है। उसकी आवाज फोन पर थोड़ी कांप रही थी, जैसे कोई डर और चाहत का मिश्रण हो।
तो मैंने उसे विश्वास दिलाया और कहा- इसके बारे में किसी को पता भी नहीं चलेगा। मेरी आवाज में नरमी और भरोसा था, ताकि वह पूरी तरह शांत हो जाए।
अगले दिन उसने मिलने के लिए समय बताया।
ठीक समय पर उसका फोन आया और मैं उससे मिलने के लिए पहुँच गया। मैंने देखा कि वो घर पर अपने 7-8 महीने के लड़के के साथ थी लेकिन उसका बेटा सोया हुआ था। शायद वो भी मिलने के लिए बेचैन थी।
वो मेरे बारे में पूछने लगी। मैंने अपने बारे में बताया।
मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा तो वो कहने लगी- मुझे कुछ होता है। उसकी उंगलियां मेरी हथेली में थोड़ी सी कांप रही थीं, जैसे कोई बिजली की लहर उसके शरीर में दौड़ गई हो। उसकी सांसें तेज हो चुकी थीं और गालों पर हल्की लाली छा गई थी।
तो मैंने कहा- कुछ करने के लिए ही तो आया हूँ। मेरी आवाज में गहरी इच्छा थी, जो उसके कानों तक पहुंचकर उसे और भी बेचैन कर रही थी।
वो अपना हाथ छुड़ाने लगी लेकिन मैंने उसे पकड़ा और चूमने लगा। मेरे होंठ उसके नरम, गर्म गालों से टकराए, फिर धीरे-धीरे उसके होंठों पर आ गए। मैंने पहले हल्के से चुंबन लिया, फिर गहरे में घुसकर उसकी जीभ को अपनी जीभ से लपेट लिया। उसकी सांसें मेरे मुंह में घुल रही थीं, मीठी और गर्म।
उसे चूमते ही वो गर्म होने लगी और धीरे-धीरे मैंने उसकी साड़ी खोल दी। मेरी उंगलियां उसके पेट की नरम त्वचा पर फिसल रही थीं, साड़ी का पल्लू गिरते ही उसकी ब्लाउज की गांठें खोल दीं। उसकी सांसें अब और तेज हो चुकी थीं, छाती ऊपर-नीचे हिल रही थी।
वो कहने लगी- पहली बार में ही सब कुछ करोगे। उसकी आवाज में शर्म और उत्सुकता दोनों थीं, आंखें बंद करके मेरे सीने से चिपक गई थी।
मैंने कहा- यह मौका तो ऊपर वाले की देन है। इस समय को गंवाना नहीं चाहिए। मेरे शब्दों के साथ ही मैंने उसकी ब्लाउज पूरी तरह उतार दी, ब्रा की हुक खोली और उसके भारी, नरम स्तन बाहर आ गए।
उसने कहा- मैं भी तो तुम्हारे प्यार की प्यासी हूँ। उसकी आंखों में अब शर्म नहीं, सिर्फ भूख थी।
मैंने कहा- मैं तुम्हें बिना कपड़ों के देखना चाहता हूँ।
और बात करते हुए मैंने उसे नग्न अवस्था में कर दिया। उसकी साड़ी, पेटीकोट, ब्रा और पैंटी एक-एक करके फर्श पर गिर गईं। उसका गोरा, मांसल शरीर अब पूरी तरह नंगा था। उसके स्तन गोल और भारी थे, निप्पल गुलाबी और खड़े हो चुके थे। कमर पतली, नितंब मोटे और चिकने थे। उसकी चूत पर हल्के बाल थे, जो पहले से ही नम हो चुके थे।
दोस्तो, मैं दावा करता हूँ कि अगर उसे बूढ़े भी देख लें तो सबका खड़ा हो जाए और सब मुठ मारने लगेंगे। उसकी नंगी देह इतनी आकर्षक और कामुक थी कि देखते ही किसी का भी लंड तन जाए।
मैं उसे चूमता रहा और वो गर्म होने लगी। मेरे होंठ उसके गले, छाती, पेट और जांघों पर घूम रहे थे। हर चुंबन के साथ वो सिहर रही थी, उसकी त्वचा गर्म और पसीने से चिपचिपी हो रही थी।
उसने कहा- तुमने मेरे तो सारे कपड़े उतार दिए और खुद ऐसे ही खड़े हो। उसकी आवाज में हल्की शिकायत थी लेकिन आंखों में मुस्कान।
फिर उसने मेरे कपड़े भी उतार दिए और मेरे लंड से खेलने लगी। उसकी नरम, गर्म उंगलियां मेरे मोटे, खड़े लंड को पकड़कर ऊपर-नीचे करने लगीं। वह उसे धीरे-धीरे सहला रही थी, अंगूठे से टिप को घुमा रही थी। लंड की नसें फूल गई थीं और उसकी हथेली में गर्मी फैल रही थी।
मैंने उसे लंड चूसने के लिए कहा तो वो पहले तो मना करने लगी लेकिन दबाव देने पर मान गई और लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। उसने घुटनों के बल बैठकर मुंह खोला, जीभ बाहर निकाली और लंड की टिप को चाटा। फिर धीरे-धीरे पूरा मुंह में ले लिया। उसके गर्म, गीले मुंह ने लंड को पूरी तरह घेर लिया।
चूसते हुए वो ऐसे लग रही थी जैसे कोई परी मेरा लंड चूस रही हो। उसकी आंखें बंद थीं, गाल अंदर की ओर धंस रहे थे। वह ऊपर-नीचे सिर हिला रही थी, कभी तेज तो कभी धीरे। जीभ लंड की नसों पर घूम रही थी।
मेरे मुंह से सी सी सी सी सी की आवाजें निकल रही थीं। हर चूसने पर मेरी कमर अपने आप उठ रही थी, लंड उसके गले तक पहुंच रहा था।
पांच मिनट बाद मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है। मेरी सांसें फूल गई थीं, शरीर तन गया था।
तो वो कुछ नहीं बोली और लंड को चूसती ही रही। लंड को तो ऐसे चूस रही थी मानो वो जन्म-जन्म से प्यासी हो। उसकी जीभ तेजी से घूम रही थी, मुंह पूरी ताकत से चूस रहा था।
मेरा माल उसके मुंह में ही निकल गया और वो उसे अंदर ही पी गई। गाढ़ा, गर्म वीर्य उसके गले से नीचे उतर गया। वह एक बूंद भी बाहर नहीं गिरने दी।
फिर मेरा ढीला पड़ गया और उसने कहा- मेरी चूत में आग लगी है। उसकी आवाज में बेचैनी थी, जांघें आपस में रगड़ रही थीं।
फिर हम 69 की अवस्था में आ गए और वो मेरे लंड को फिर से तैयार करने लगी। मैं उसके नीचे लेट गया, वो मेरे ऊपर उल्टी लेट गई। उसकी चूत मेरे मुंह के ठीक ऊपर थी। उसने फिर से मेरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
मैं उसकी चूत को चाट रहा था। मेरी जीभ उसके गीले, गुलाबी होंठों को अलग करके अंदर घुस गई। उसका स्वाद मीठा-नमकीन था, चूत से रस बह रहा था। मैं जोर-जोर से चाट रहा था, क्लिटोरिस को जीभ से दबा रहा था।
धीरे-धीरे उसका शरीर अकड़ने लगा तो मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली थी। उसकी जांघें मेरे सिर को दबा रही थीं, कमर हिल रही थी।
मैं जोर-जोर से उसकी बुर के दाने को चाट रहा था। तभी एकदम से उसका माल निकला और मैं सारा चाट गया। गर्म, मीठा रस मेरे मुंह में भर गया, मैंने उसे चूस-चूसकर पी लिया। उसकी चूत सिकुड़-सिकुड़कर झड़ रही थी।
उसने कहा- मेरी चूत में अभी भी पूरी आग लगी है। उसकी सांसें अभी भी तेज थीं, शरीर पसीने से तर।
मैंने उसे ऊपर आने के लिए कहा।
वो मेरे ऊपर आकर मेरे लंड पर बैठ गई और जल्दी जल्दी करने लगी। उसने लंड को अपनी चूत के मुंहाने पर रखा, धीरे से नीचे बैठ गई। पूरा मोटा लंड उसकी तंग, गर्म चूत में घुस गया। वो ऊपर-नीचे उछल रही थी, स्तन हिल रहे थे। हर बार लंड पूरी गहराई तक चला जाता था।
लगभग पांच मिनट करने के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और वो मेरे ऊपर लेट गई। उसकी चूत लंड को भींच रही थी, वो जोर-जोर से कांप रही थी।
फिर मैंने उसे नीचे आने के लिए कहा तो वो मेरे नीचे आ गई। मैंने लंड उसकी चूत में डाल दिया और उसे चोदने लगा। मैंने उसके पैर अपने कंधों पर रखे, कमर जोर-जोर से हिलाने लगा। हर धक्के पर चूत से चिकचिक की आवाज आ रही थी।
दस मिनट बाद मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने उससे पूछा- माल कहाँ निकालूँ।
तो उसने कहा- अंदर ही डाल दो। मैं बहुत दिनों से बहुत प्यासी हूँ।
तो मैंने कहा- तुम्हारे पति है तो क्या वो तुम्हारे साथ सेक्स नहीं करते।
तो उसने बताया- करते तो हैं लेकिन जैसे ही अंदर लंड डालते हैं वैसे ही झड़ जाते हैं। वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पाते। तुमने मुझे जो मजा दिया है मैं हमेशा के लिए तुम्हारी हो गई हूँ। सही तो तुमने मुझे आज औरत बनाया है। आज से मैं तुम्हारी हूँ। तुम्हारा जब दिल चाहे तब मेरे साथ समय बिता लेना और मुझे भी मजा देना।
दोस्तो, उस दिन के बाद मैंने बहुत दिनों तक उसके साथ सेक्स किया।
लेकिन कुछ महीनों बाद मैंने वहाँ से नौकरी छोड़ दी और मुझे मेरे घर के नजदीक नौकरी मिल गई। फिर कुछ दिनों तक बात हुई और उसके बाद मेरी उससे कोई बात नहीं हुई क्योंकि मेरी एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में अच्छी पोस्ट पर नौकरी लग गई।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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