Test drive chudai sex story: मेरा नाम पूनम है। मैं चौबीस साल की हूँ और लखनऊ में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर के पद पर काम करती हूँ। परिवार से दूर अकेले रहती हूँ एक छोटे लेकिन आरामदायक अपार्टमेंट में।
मेरी शादी अमित के साथ तय हो चुकी है। अमित सत्ताईस साल का है, लंबा मजबूत कद-काठी वाला, जो व्यापार करता है। हम दोनों की मुलाकात सिर्फ कुछ बार हुई थी लेकिन हर बार उसकी नजरों में छिपी भूख मुझे अंदर तक हिला जाती थी। आज वो लखनऊ आया है सिर्फ मुझसे मिलने। शादी से पहले आखिरी मुलाकात ऐसा कहकर।
सुबह से ही मेरा मन अजीब सा था। मैंने अपना सबसे अच्छा सूट चुना, एक हल्का पीला सलवार सूट जो मेरी गोरी त्वचा पर बेहद फबता था। मेरी ३४डी वाली चूचियां सूट के अंदर हल्के से उभरी हुई थीं, हर सांस के साथ नरम कपड़े को हल्का सा दबाती हुईं। बाल खुले छोड़ दिए, काजल लगाया और हल्का सा लिपस्टिक लगाई। दिल में एक अजीब सी घबराहट और उत्सुकता थी। क्या पता आज क्या होने वाला है। मेरी हथेलियाँ थोड़ी सी पसीने से गीली हो रही थीं और पेट में हल्की सी मचलन महसूस हो रही थी।
दोपहर ढाई बजे अमित होटल से आया। मैंने उसे नीचे गेट पर ही देख लिया। सफेद शर्ट में वो और भी आकर्षक लग रहा था। उसकी मांसल बाहें शर्ट के अंदर फूली हुईं, हर कदम के साथ मांसपेशियाँ हल्की सी सिकुड़ती हुईं। वो मुस्कुराया और सीधे मेरे पास आया।
“पूनम कितनी खूबसूरत लग रही हो आज।” उसकी आवाज में गर्माहट थी, जो मेरे कानों तक गूँज गई।
मैं शरमाई और बस मुस्कुरा दी। हम दोनों एक अच्छे रेस्टोरेंट में लंच के लिए गए। टेबल पर बैठते ही उसकी नजर बार-बार मेरी चूचियों पर जा रही थी। मैंने महसूस किया कि मेरी चूचियां सांस लेते-लेते हिल रही हैं, निप्पल हल्के से सूट के कपड़े से रगड़ खा रहे थे। उसने अपना पैर टेबल के नीचे मेरे पैर से हल्का सा छुआ। एक झनझनाहट सी मेरी रीढ़ में दौड़ गई, जो मेरी कमर तक उतर गई और वहाँ एक गर्म लहर छोड़ गई।
“तुम्हें पता है शादी के बाद हम रोज ऐसे साथ होंगे।” उसने कहा और मेरी आँखों में गहरी नजर डाली। उसकी आँखों में वही भूख थी जो मुझे पहले भी पागल कर देती थी।
मैंने सिर झुका लिया लेकिन अंदर से मेरी चूत में हल्की सी गर्मी महसूस होने लगी। खाना खाते समय उसने कई बार मेरे हाथ को छुआ, उंगलियों को सहलाया। हर स्पर्श से मेरा बदन सिहर रहा था। उसकी उँगलियाँ मेरी नरम हथेली पर फिसलती हुईं, हल्का दबाव डालती हुईं, जिससे मेरी सांसें थोड़ी तेज हो गईं। मैं वर्जिन थी, कभी किसी लड़के के साथ इतना करीब नहीं आई थी। लेकिन अमित की मौजूदगी में मेरे अंदर की औरत जाग रही थी।
लंच खत्म होने के बाद उसने कहा “चलो तुम्हारा अपार्टमेंट देखते हैं। इतनी दूर से आया हूँ घर भी तो दिखाओ।”
मेरा दिल जोरों से धड़का। मैं जानती थी कि अकेले अपार्टमेंट में जाने का मतलब क्या हो सकता है। फिर भी मैंने हाँ कह दी। कार में जाते हुए उसका हाथ बार-बार मेरी जांघ पर आ रहा था। उसकी उँगलियाँ मेरी सलवार के पतले कपड़े पर हल्का दबाव डाल रही थीं, जिससे मेरी त्वचा पर गर्मी फैल रही थी। मैं चुपचाप बैठी रही लेकिन मेरी सांसें तेज हो रही थीं। सीट पर मेरी जांघें थोड़ी सी काँप रही थीं और पेट के नीचे एक अजीब सी गुदगुदी महसूस हो रही थी।
अपार्टमेंट पहुँचकर मैंने दरवाजा खोला। अंदर घुसते ही अमित ने दरवाजा बंद किया और मुझे दीवार से लगा दिया। उसका मुँह मेरे मुँह के बहुत करीब था। उसकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं, जो मेरी त्वचा को सिहरा रही थीं। उसकी चौड़ी छाती मेरी चूचियों से हल्का सा टकरा रही थी।
“पूनम… तुम्हें कितना चाहता हूँ मैं।” उसने धीमी आवाज में कहा। उसकी आवाज भारी और भूखी लग रही थी।
उसके होंठ मेरे होंठों से टकराए। पहली बार किसी पुरुष का किस। उसके मोटे, गर्म होंठ मेरे नरम होंठों को चूसने लगे। पहले तो हल्का सा दबाव, फिर धीरे-धीरे गहरा चूसना शुरू कर दिया। मैं काँप गई। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई और मेरी जीभ से खेलने लगी। वह मेरी जीभ को अपनी जीभ से लपेट रहा था, चूस रहा था, हल्का काट रहा था। मैंने आँखें बंद कर लीं। उसके हाथ मेरी कमर पर थे, धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहे थे। उसकी मजबूत उँगलियाँ मेरी पीठ पर घूम रही थीं, सलवार के कपड़े को सहला रही थीं।
किस बहुत लंबा चला। मेरी चूचियां उसके सीने से दब रही थीं। हर बार सांस लेते समय मेरी ३४डी वाली चूचियाँ उसके कठोर सीने से रगड़ खा रही थीं, जिससे मेरे निप्पल सख्त होकर सूट के कपड़े को चुभ रहे थे। मैंने महसूस किया कि मेरी चूत गीली होने लगी है। अंदर की नरम दीवारें सिकुड़ रही थीं और गर्म, चिपचिपा रस धीरे-धीरे बहने लगा था। मेरी जांघें आपस में दब गईं। जब वो अलग हुआ तो मेरे होंठ सूज गए थे, लाल हो गए थे और थोड़ा सा लार का निशान था।
“चलो अंदर बैठते हैं।” मैंने हाँफते हुए कहा।
हम सोफे पर बैठे।
अमित ने मुझे अपनी गोद में खींच लिया। उसके मजबूत हाथों ने मेरी कमर को पकड़कर एक झटके में मुझे अपनी जांघों पर बिठा लिया। उसकी गोद में बैठते ही मुझे उसके लंड की hardness महसूस हुई। उसका मोटा, सख्त लंड मेरी नितंबों के नीचे दब रहा था, पतले कपड़ों के बीच से भी उसकी गर्मी और नसों की उभरी हुई आकृति साफ महसूस हो रही थी। मेरा बदन गर्म हो रहा था। मेरी सांसें तेज हो गईं और मेरी चूत में फिर से ताजा गर्म रस रिसने लगा।
उसने फिर से किस किया, इस बार और गहरा। उसके मोटे होंठ मेरे होंठों को पूरी तरह निगलते हुए चूसने लगे। उसकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुसकर मेरी जीभ को लपेट रही थी, चूस रही थी और हल्का-हल्का काट रही थी। उसके मुंह से निकली गर्म सांस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी। उसके हाथ मेरी चूचियों पर आए। सूट के ऊपर से ही उन्हें दबाने लगा। उसकी मजबूत उंगलियां मेरी ३४डी वाली नरम चूचियों को मसल रही थीं, उन्हें दबा रही थीं और हल्का-हल्का निचोड़ रही थीं।
“आह… अमित…” मैं फुसफुसाई। मेरी आवाज कांप रही थी।
उसने मेरे सूट का दुपट्टा हटाया और ब्लाउज के हुक खोलने लगा। एक-एक करके हुक खुलते गए और मेरी गोरी चूचियां ब्रा में कैद थीं। उसने ब्रा का हुक भी खोला। ब्रा के कपड़े अलग होते ही मेरी दोनों भरी-भरी चूचियां बाहर आ गईं। निप्पल सख्त हो चुके थे, गुलाबी और उभरे हुए। हवा के स्पर्श से वे और भी सख्त हो गए। अमित ने एक चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा।
“उम्म्म… कितनी स्वादिष्ट हैं तुम्हारी चूचियां।” उसने कहा। उसकी आवाज भारी और कामुक थी।
मैं कराह रही थी। “आह्ह… अमित… उममम…” मेरी आवाज अपने आप निकल रही थी। उसकी गर्म, नम जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी। कभी वह निप्पल को जोर से चूसता, तो कभी हल्का काटता और फिर अपनी जीभ से तेजी से चाटता। दूसरी चूची पर उसका हाथ था, उसे मसल रहा था। उसकी उंगलियां मेरी नरम गोश्त को दबा रही थीं, खींच रही थीं और निप्पल को पिंच कर रही थीं। मेरी चूत से पानी निकल रहा था। गर्म, चिपचिपा रस मेरी पैंटी को पूरी तरह भीगो रहा था और मेरी जांघों के बीच फिसलने लगा था। मैंने अपनी जांघें कस लीं।
धीरे-धीरे उसने मुझे सोफे पर लिटा दिया।
अमित ने अपनी मजबूत बाहों से मेरी कमर को सहारा देकर मुझे आराम से सोफे पर लिटाया। मेरी पीठ नरम कुशन पर टिकी और मेरे खुले बाल चारों तरफ बिखर गए। उसने मेरे सलवार का नाड़ा खोलकर धीरे-धीरे नीचे सरका दिया। सलवार मेरी जांघों से फिसलती हुई पैरों तक चली गई। मेरी सफेद पैंटी पूरी तरह गीली हो चुकी थी। चूत के रस ने कपड़े को पारदर्शी बना दिया था और मेरी गुलाबी चूत की आकृति साफ दिख रही थी। अमित ने उसे देखा और मुस्कुराया।
“वाह पूनम… तुम तो पूरी गीली हो चुकी हो।” उसकी आवाज में कामुकता झलक रही थी।
उसने पैंटी उतारी। मेरी शेव की हुई चूत पहली बार किसी के सामने थी। गुलाबी, छोटी, स्वेल्ड और अब पूरी तरह तर। मेरी चूत की पत्तियाँ चमक रही थीं और क्लिटोरिस थोड़ा उभरा हुआ था। अमित ने अपनी उंगलियाँ मेरी चूत पर फेरीं। उसकी गर्म उंगलियाँ मेरी नरम, गीली चूत की दरार पर ऊपर-नीचे घूम रही थीं।
“आह्ह्ह…” मैंने जोर से कराह मारी। मेरी कमर अपने आप ऊपर उठ गई।
उसकी उंगली मेरी चूत की दरार में ऊपर-नीचे घूम रही थी। क्लिटोरिस पर दबाव डालते ही मेरे शरीर में झटके लगने लगे। मेरी जांघें काँप उठीं और चूत से और ज्यादा गर्म रस निकलने लगा। वो धीरे से उंगली अंदर डालने लगा। उसकी मोटी उंगली मेरी तंग चूत में धीरे-धीरे घुस रही थी।
“दर्द तो नहीं हो रहा?” उसने पूछा। उसकी आँखों में चिंता और भूख दोनों थीं।
“थोड़ा… लेकिन अच्छा लग रहा है।” मैंने शर्माते हुए कहा। मेरी आवाज काँप रही थी।
उसने उंगली अंदर-बाहर करने लगा। मेरी चूत से चूच… चूच… की आवाजें आने लगीं। गीले रस की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी। मैं कराह रही थी। “आह… अमित… उममम…” सांसें फूल रही थीं। उसने दूसरी उंगली भी डाल दी। अब वो तेजी से उंगलियाँ चला रहा था। दोनों उंगलियाँ मेरी चूत की दीवारों को रगड़ती हुई अंदर-बाहर हो रही थीं।
मैंने उसका सिर पकड़कर अपनी चूत पर दबाया। अमित समझ गया। उसने अपना मुँह मेरी चूत पर रख दिया। उसकी गर्म, नम जीभ मेरी चूत चाटने लगी। पहले वह पूरी दरार चाटी, फिर क्लिटोरिस को चूसने लगा। “अमित… आह… क्या कर रहे हो… उफ्फ… आह्ह्ह!” मैं पागल हो रही थी।
उसकी जीभ अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी। वह मेरी चूत की अंदरूनी दीवारों को चाट रहा था। मेरी जांघें काँप रही थीं। पूरा शरीर पसीने से तर था। उसकी नाक मेरी चूत से टकरा रही थी और हर सांस के साथ गर्म हवा मेरी संवेदनशील जगह पर पड़ रही थी। मैंने अपने निप्पल मसलने शुरू कर दिए। अपनी उंगलियों से उन्हें जोर से दबा रही थी।
अचानक मेरे शरीर में एक तेज लहर उठी। पहली बार कोई मुझे चूत चाट रहा था और मैं ऑर्गेज्म के कगार पर थी। मेरी कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी।
“अमित… मैं… आ रही हूँ… आह्ह्ह!”
मेरा पूरा शरीर सख्त हो गया। चूत से पानी का फव्वारा सा निकला। गर्म, मीठा रस अमित के मुंह पर छूटा। अमित ने पूरा रस चाट लिया। मैं हाँफ रही थी आँखें बंद किए।
जब मैंने आँखें खोलीं तो देखा अमित अपना पैंट उतार रहा था।
उसने बेल्ट खोलकर पैंट और अंडरवियर दोनों एक साथ नीचे सरका दिए। उसका मोटा लंबा लंड बाहर आ गया। गाढ़ा, नसों से भरा, लंबाई में करीब सात इंच का और मोटाई में मेरी कलाई जितना। उसका सिर चमकदार और गुलाबी था, पहले से ही रस से तर। नसें उभरी हुईं और पूरी लम्बाई में तना हुआ। मैं डर गई। मेरी आँखें फैल गईं और सांस अटक गई।
“ये… इतना बड़ा…” मैं फुसफुसाई। मेरी आवाज काँप रही थी।
अमित मुस्कुराया। “डरो मत जान। आज मैं तुम्हें औरत बना दूँगा।”
वो मेरे ऊपर आ गया। उसका भारी शरीर मेरे नाजुक बदन पर छा गया। उसका लंड मेरी चूत के मुंह पर रगड़ रहा था। गर्म, सख्त और मोटा। उसका गर्म सिर मेरी गीली चूत की पत्तियों को अलग करता हुआ ऊपर-नीचे घिस रहा था। मैंने आँखें बंद कर लीं। मेरी जांघें अनजाने में काँप रही थीं।
उसने धीरे से दबाव डाला। लंड का सिर मेरी चूत में घुसने लगा। तंग, वर्जिन दीवारें खिंचने लगीं। तेज दर्द हुआ।
“आह… धीरे…” मैं कराह उठी।
वो रुका, फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ा। मेरी वर्जिन चूत फट रही थी। हर इंच के साथ जलन और खिंचाव महसूस हो रहा था, लेकिन साथ में अजीब सा गहरा सुख भी उभरने लगा था। आधा लंड अंदर चला गया। अमित ने मुझे किस किया और जोर का झटका दिया।
“आआआह्ह्ह!” मैं चीख पड़ी। पूरा मोटा लंड मेरी चूत में समा गया था। मेरी अंदरूनी दीवारें उसके लंड को कसकर जकड़ रही थीं। खून की हल्की सी धार निकली, जो मेरी जांघों पर फिसल गई।
अमित रुका हुआ था, मुझे समय दे रहा था। उसकी सांसें भारी थीं। फिर धीरे-धीरे हिलने लगा। दर्द कम होने लगा और उसकी जगह लेने लगा भारी, गहरा सुख। हर झटके के साथ उसका लंड मेरी चूत को पूरी तरह भर रहा था।
“पूनम… तुम्हारी चूत कितनी टाइट है… मज़ा आ रहा है…” उसने भारी आवाज में कहा।
उसके झटके तेज होते गए। चूत में चप… चप… चप… की आवाजें भर गईं। गीला रस और खून का मिश्रण हर बार बाहर निकल रहा था। मेरी चूचियां हिल रही थीं। अमित उन्हें चूस रहा था।
मैंने अपनी टांगें उसके कमर पर लपेट लीं।
मेरी नरम जांघें उसके मजबूत कमर को कसकर जकड़ गईं। मेरी एड़ियाँ उसकी पीठ पर दब रही थीं, जिससे उसका लंड और भी गहराई तक मेरी चूत में धंस गया। वो जोर-जोर से ठोक रहा था। उसके भारी, मांसल शरीर के हर झटके से सोफा हिल रहा था। पसीना हम दोनों के शरीरों पर बह रहा था। उसका पसीना मेरी चूचियों पर टपक रहा था और हमारी त्वचाओं के बीच फिसलन पैदा कर रहा था। कमरे में सिर्फ हमारी तेज सांसें, कराहें और चुदाई की चप-चप की गीली आवाजें गूंज रही थीं।
“चोदो मुझे… और जोर से… आह्ह्ह!” मैंने पहली बार इतना बोल दिया। मेरी आवाज भारी होकर निकली, कामुकता से भरी हुई।
अमित पागल हो गया। उसने मेरी टांगें खोलकर मुझे कुत्ते की तरह घुटनों पर मोड़ दिया। मेरी गांड़ ऊपर उठ गई और चेहरा सोफे के कुशन में दब गया। वो पीछे से चोदने लगा। उसका मोटा लंड पूरी गहराई तक जा रहा था। हर जोरदार झटके में उसका लंड मेरी चूत की सबसे अंदरूनी दीवार तक टकरा रहा था। गांड़ पर थप्पड़ मार रहा था। उसके हाथ मेरी कमर को मजबूती से पकड़े हुए थे।
“ले… ले मेरी रानी… तेरी चूत आज मेरी है… उममम…!” उसने गरजते हुए कहा।
मैं कराह रही थी, चीख रही थी। “आह्ह… अमित… उफ्फ… और तेज… आआह्ह!” दूसरा ऑर्गेज्म आने वाला था। मेरी चूत उसके लंड को कसकर जकड़ रही थी।
उसने और तेज झटके मारे। मेरी चूत सिकुड़ रही थी। फिर एक बार फिर मैं झड़ गई। “अमित… मैं… आ रही हूँ… आह्ह्ह्ह!” मेरा पूरा शरीर थरथरा उठा। गर्म रस की धार निकली और उसके लंड को और भी चिकना बना दिया। लेकिन अमित नहीं रुका। उसने मुझे फिर से मिशनरी में लिटाया और लगातार चोदता रहा।
तीसरा राउंड शुरू हो चुका था। उसका लंड अब भी पूरी तरह सख्त और मोटा था। मेरी चूत पूरी तरह उसकी हो चुकी थी। हर झटके के साथ चूत की दीवारें उसके लंड को रगड़ रही थीं। मेरी चूचियां जोर-जोर से हिल रही थीं।
अचानक उसकी सांसें बहुत तेज हो गईं। उसका चेहरा तन गया और आँखें बंद हो गईं।
“पूनम… मैं आने वाला हूँ… अंदर ही डालूँ?” उसने हाँफते हुए पूछा।
मैंने बस सिर हिला दिया।
उसने आखिरी जोरदार झटके मारे। “आह्ह… पूनम… ले…!” फिर गरम-गरम वीर्य मेरी चूत के अंदर फूट पड़ा। एक… दो… तीन… लंबी-लंबी धारें। मैं महसूस कर रही थी कि उसका मोटा लंड अंदर दौड़ रहा है और हर धार के साथ मेरी चूत भर रही है। गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरी अंदरूनी दीवारों से टकरा रहा था।
दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए।
हम दोनों पसीने से तर-बतर शरीरों को एक-दूसरे में समेटे हुए लेटे थे। मेरी नरम चूचियां उसकी चौड़ी छाती से दब रही थीं। उसका लंड अभी भी मेरी चूत में था। पूरी तरह गीला और धीरे-धीरे ढीला पड़ता हुआ भी मेरी अंदरूनी दीवारों को भर रहा था। गर्म वीर्य बाहर रिस रहा था। मेरी चूत से सफेद, चिपचिपा वीर्य की धार मेरी जांघों पर फिसलती हुई नीचे बह रही थी। कमरे में हमारी भारी सांसें और हल्की कराहें ही गूंज रही थीं।
लेकिन अमित के चेहरे पर अभी भी भूख थी। उसने मेरे कान में फुसफुसाया। उसकी गर्म सांस मेरे कान की लोब पर पड़ रही थी, जिससे मेरी त्वचा फिर से सिहर उठी।
“मैंने सोचा की तुमको शादी के पहले टेस्ट ड्राइव देदू, तुम्हे पता होना चाहिए की मैं कितना खुश कर सकता हु शारीरिक तरीके से, कैसा लगा मेरी जान को मेरी टेस्ट ड्राइव?” उसकी आवाज अभी भी भारी और संतुष्ट थी।
मैं: “बहुत अच्छा लगा, तुम्हे कैसा लगा मेरा टेस्ट ड्राइव मेरे राजा जी ?” मेरी आवाज शर्म और संतोष से भरी हुई थी।
विक्रम: “बहुत मजेदार मेरी जान, तुम्हरी सवारी करने में बहुत मजा आया मेरी गदराई हुई घोड़ी।” उसने मुस्कुराते हुए कहा और अपनी मजबूत उंगलियों से मेरी पीठ सहलाने लगा।
मैं शर्मा कर अपने चेहरा उसकी छाती में छिपा ली। मेरी गालें लाल हो गईं और मैं उसकी गर्म छाती से और चिपक गई। उसकी धड़कन मेरे कान से साफ सुनाई दे रही थी।
कैसी लगी दोस्तों मेरी कहानी, और क्या अपने टेस्ट ड्राइव लेकर शादी किया था या फिर शादी के बाद ही सब किया?
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