Didi ne behan ko jiju se chudwaya sex story: ये कहानी दो साल पहले की है जब मेरी उम्र अठारह साल की थी।
मैं बिलकुल सीधी सादी किसी सेक्स के लफड़े में नहीं पड़ी थी।
मैं अपनी पढ़ाई में ही ध्यान लगाती थी और कभी भी फालतू बात मेरे दिमाग में नहीं आती थी।
मेरे पापा मम्मी फॉरेन घूमने गए हुए थे।
और मैं घर पर अकेली न रहूं इसलिए मेरी बड़ी बहन और जीजू हमारे घर पर रहने के लिए आ गए थे।
मैं कभी भी जीजू के बारे में गलत नहीं सोचती थी।
लेकिन मुझे नहीं मालूम था कि मेरी दीदी ही मेरी दुश्मन थी।
पहली रात को मुझे अपने कमरे में दीदी की आह ऊह जैसी आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं।
वे आवाजें धीमी लेकिन गहरी थीं, जैसे कोई भारी सांसें छोड़ रहा हो और बीच-बीच में कराह उठ रही हो।
कभी-कभी तेज़ आह निकलती तो कमरे की दीवारें भी गूंज जातीं।
मुझे बड़ा अजीब सा लगा।
मैं समझी दीदी को शायद कहीं दर्द हो रहा है।
मैं चिंता से भरकर बिस्तर से उठी और दीदी के कमरे की तरफ चली गई।
दरवाजा पूरी तरह खुला हुआ था।
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दीदी ने दरवाजा खुला रखकर ही सोने की व्यवस्था कर रखी थी।
सोचा दीदी को कोई दवाई की जरूरत होगी तो मैं तुरंत दे दूंगी।
लेकिन अंदर कमरे में तो मुझे कुछ और ही दिखाई दिया।
कमरे की हल्की पीली रोशनी में दीदी और जीजू दोनों एकदम नंगे थे।
दीदी की गोरी त्वचा पसीने से चमक रही थी और उनके नंगे शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
और जीजू का लंड दीदी के मुंह में था।
मुझे नहीं मालूम था कि अंदर क्या हो रहा है।
न ही मैंने आज तक कभी इस बारे में सोचा था।
जैसे ही मैं दरवाजे के पास पहुंची मुझे दीदी और जीजू की आवाजें सुनाई देने लगीं।
मैं दरवाजे के बाहर ही रुक गई।
अंदर से बड़ी गंदी गंदी आवाजें आ रही थीं।
जीजू बोल रहे थे भोसड़ी की मेरा लंड पूरा मुंह में लेकर चूस।
क्या जरा सा लंड का सुपाड़ा मुंह में ले रखा है।
उनकी आवाज में उत्तेजना और गुस्सा दोनों साफ महसूस हो रहा था।
दीदी बोली ले तो रही हूं।
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मैं क्या करूं तुम्हारा लंड है भी तो कितना मोटा और लंबा।
जीजू बोले तो फिर अन्नू को बुला ले वो चूस लेगी मेरा लंड।
दीदी बोली अन्नू को पहले मैं तैयार कर लूं फिर चोद लेना।
अभी तो यहां चौदह दिन रहना है।
इस बार तुमसे अन्नू को जरूर चुदवा दूंगी पक्का वादा।
लेकिन आज तो मुझे जी भर के चोद दो।
मेरी चूत को फाड़ के भोसड़ा बना दो।
दीदी की बातें सुनकर मुझे बड़ा डर लगने लगा।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और सांसें तेज हो गई थीं।
मैंने तो कभी सपने में भी नहीं सोचा था ये क्या हो रहा है।
ये पहला मौका था जब मैं किसी को नंगा देख रही थी।
वहां खड़े रहने में डर भी लग रहा था और कुछ उत्सुकता भी थी कि दोनों क्या कर रहे हैं।
मेरे पैर कांप रहे थे लेकिन मैं वहां से हिल भी नहीं पा रही थी।
जीजू बोले मादरचोद मुझे तेरी भोसड़ी तो पहले से ही चूदी चुदाई मिली थी।
मुझे भी तो सिल पैक चूत चाहिए थी।
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और उसने जोर से एक थप्पड़ दीदी को मारा।
दीदी बोली हां तो मैं अपनी छोटी बहन की सिल पैक चूत तुझे दिलवाऊंगी ना।
थोड़ा इंतजार तो करो उसको मैं मना तो लूं।
जीजू बोले अगर वो भी तेरी तरह खूब चुदी चुदाई हुई तो।
दीदी बोली नहीं वो सिल पैक ही होगी वो सिर्फ अपनी पढ़ाई में ही ध्यान लगाती है वो हर साल पहले नंबर से पास होती है।
जरूर उसे चूत लंड चुदाई का जरा भी नहीं पता होगा।
उसको चोद कर अपनी मन की तमन्ना पूरी कर लेना।
जीजू ने अपना लंड दीदी के मुंह से निकाल दिया और सड़सठ की पोजिशन में लेट गए और दीदी के मुंह में फिर से लंड दे दिया और खुद दीदी की चूत लिकने लगे।
वो दीदी की चूत को दांतों से काट रहे थे और दीदी दर्द से कराह रही थी धीरे धीरे काटो डार्लिंग दर्द हो रहा है।
जीजू बोले चुप हरामजादी तू खूब चुदी हुई है पता नहीं कितनों ने तुझे चोद चोद कर तेरी चूत को इंडिया गेट बना दिया है।
आज तुझे लहू लुहान कर दूंगा।
अगर तू अपनी बहन नहीं चुदवाएगी तो तेरा सारा खून पी जाऊंगा।
और जीजू जोर जोर से दीदी की चूत काटते रहे।
दीदी चिल्लाती रही।
फिर जीजू ने दीदी को घोड़ी बनने को कहा और अपना लंड दीदी की गांड में घुसेड़ने लगे।
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दीदी बोली अरे आगे चूत में डालो ना गांड में मत डालो ना।
जीजू बोले तेरी चूत नहीं भोसड़ा है उसमें डाल के मजा नहीं आता है तेरी गांड टाइट है गांड ही मारूंगा।
चुप चाप गांड में डालने दे।
और जीजू ने नौ इंच लंबा मोटा लंड दीदी की गांड में डालने लगे।
उन्होंने लंड का मोटा सुपाड़ा दीदी की गांड की टाइट रिंग पर सेट किया और धीरे-धीरे लेकिन मजबूती से दबाव बढ़ाने लगे।
दीदी की गांड की संकरी मांसपेशियां पहले तो लंड को रोकने की कोशिश कर रही थीं लेकिन जीजू ने कमर को जोर से आगे की ओर धकेला।
लंड का गोल सिरा धीरे-धीरे अंदर घुसने लगा, दीदी की गांड की दीवारें खिंचकर फैलने लगीं।
दीदी को तेज दर्द हो रहा था, उनका पूरा शरीर कांप उठा, पसीने की बूंदें उनकी पीठ पर बहने लगीं।
वे दर्द से कराह रही थीं, “ओह आह मैं मर गई रे जालिम।”
उनकी आंखें बंद हो गईं, चेहरा पीड़ा से सिकुड़ गया और होंठ कांप रहे थे।
फिर जीजू ने लंड बाहर निकाल कर उस पर थोड़ी क्रीम लगाई।
वे क्रीम को लंड के पूरे शाफ्ट पर अच्छी तरह फैलाते रहे, फिर से गांड के मुंह पर लगा दिया।
इस बार जब उन्होंने जोर से एक लंबा धक्का मारा तो पूरा लंड गांड के अंदर घुस गया।
दीदी की गांड की अंदरूनी दीवारें लंड को कसकर जकड़ रही थीं, हर इंच के साथ खिंचाव और भराव का एहसास हो रहा था।
जीजू ने गांड में लंड डाल कर धक्के देना शुरू किया।
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हर धक्के के साथ लंड पूरी लंबाई तक अंदर चला जाता और फिर बाहर निकलता, तेज़ चप्पाक-चप्पाक की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
आगे से वे दीदी की भरी-भरी चुचियों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ कर दबाते रहे, उंगलियों से निप्पल्स को नोचते और मरोड़ते रहे।
अब दीदी को भी मजा आ रहा था।
उनकी कराहें दर्द से बदलकर खुशी की आहों में बदल गई थीं, उनका शरीर अब धक्कों के साथ-साथ हिलने लगा था।
दीदी बोली और जोर से फटाफट धक्के दो फाड़ दो मेरी गांड को।
मेरी गांड को बड़ा चौराहा बना दो।
जीजू बोले क्यों गांडू अब मजा आ रहा है ना।
अब बोल अन्नू को कब चुदवा रही है नहीं तो मैं तेरी गांड में से लंड बाहर निकालता हूं।
दीदी बोली ना ना लंड मत निकालना वरना मैं तड़पती रह जाऊंगी।
तुम्हें अन्नू चोदनी है ना मैं कल ही उसको पटाकर तुमसे चुदवा दूंगी लेकिन अभी गांड से लंड मत निकालना मेरे राजा।
मार मेरी गांड और तोड़ दे मेरे बदन की सारी हड्डियों का सुरमा बना दे।
आह मजा आ रहा है और धक्के दे।
मैं सब देख सुन रही थी मुझे बड़ा डर लग रहा था फिर भी खड़ी इसलिए थी कि ये दोनों मेरे बारे में क्या प्लान बना रहे हैं।
मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था, हथेलियां पसीने से भीग गई थीं और सांसें रुक-रुककर चल रही थीं।
जीजू बोले मेरा रस निकलने वाला है और जीजू ने अपना लंड बाहर निकाल कर दीदी के मुंह में दे दिया और बोले पी जा मेरे लंड का सारा रस और दीदी लंड मुंह में लेकर चूसने लगी और ऐसा लगा जैसे गले में कुछ निगल रही हो।
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फिर दोनों शांत हो गए और मैं अपने कमरे में चली गई।
मुझे डर लग रहा था और मुझे पूरी रात नींद नहीं आई।
अगले दिन सुबह जब जीजू काम से बाहर चले गए दीदी मेरे पास आई और बड़ा प्यार जताने लगी।
दीदी मुझसे बोली अन्नू आज तुझे तेरे जीजाजी के साथ सोना है।
मैं बोली क्यों।
दीदी बोली देख अगर तू अपने जीजा के साथ नहीं सोएगी तो तेरा जीजा मुझे मार मार के मेरा बुरा हाल कर देगा।
मैं शादी से पहले अपने दोस्त के साथ सेक्स कर चुकी थी और तेरे जीजाजी मुझसे इसी बात को लेकर झगड़ा करते हैं।
वो कहते हैं कि तू तो मुझे सिल पैक नहीं मिली लेकिन अन्नू की सिल तू मुझसे तुड़वा दे तो मैं फिर तुझे कुछ नहीं बोलूंगा।
मैं बोली नहीं दीदी मुझे बड़ा डर लगता है।
कल रात को मैंने थोड़ी देर आपके कमरे में जो हुआ देखा था।
मैं कुछ नहीं करने वाली हूं।
दीदी जो गलती आपने की है वो आप भुगतो।
मुझे मत घसीटो।
दीदी बोली तूने रात को क्या देखा था।
मैं बोली आपको रोते हुए देखा था।
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जीजू आपको काट रहे थे मार रहे थे और आप चिल्ला रही थीं दर्द के मारे आपका बुरा हाल था।
दीदी बोली पगली वो तो मेरा स्टाइल है जब तक कोई मुझे जानवर की तरह नहीं चोदता मुझे मारता नहीं है मुझे मजा ही नहीं आता है।
वो मुझे कोई गुस्से से थोड़े ही मार रहे थे।
मुझे कोई दर्द थोड़े ही हो रहा था वो तो मुझे मजे दे रहे थे।
लेकिन दीदी अगर मैं भी शादी से पहले सेक्स करूंगी तो मेरे पति भी तो मुझको बोलेंगे कि उनको सिल पैक नहीं मिली तब मैं क्या करूंगी।
दीदी बोली तेरी शादी मैं अपने देवर के साथ करवा दूंगी।
मैं बोली वो भी बोलेंगे कि सिल पैक नहीं मिली।
फिर मेरा क्या होगा।
दीदी बोली वो ऐसा नहीं बोलेगा।
मैंने पूछा वो क्यों नहीं बोलेगा।
तब दीदी ने ठंडी सांस भरी और बोली अच्छा मैं आज तुम्हें अपनी सारी बात खुल के बताती हूं।
दीदी बोली एक बार तेरे जीजू काम से शहर से बाहर गए हुए थे और मैं घर में अकेली थी।
मेरे देवर ने उस दिन मेरे साथ बलात्कार करके मुंह काला किया था।
जब मैंने जीजू को बताया तो उन्होंने देवर को बुलाया।
मैं समझी वो उसकी खबर लेंगे।
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लेकिन वहां तो मामला उल्टा ही था।
तेरे जीजू बोले क्यों भाई कल रात भाभी को कैसे चोदा जरा बता तो सही और देवर ने उनके सामने ही मुझे फिर चोदा।
ये दोनों की मिली भगत थी।
तेरे जीजू बोले शादी से पहले भी तू पता नहीं कितने कुत्तों से चुदवा चुकी है तो देवर ने भी चोद लिया तो क्या आफत आ गई।
ये तो वही मिसाल हो गई कुत्तों से फड़वानी मंजूर लेकिन देवरों को नहीं देनी।
मेरे देवर ने मुझे कई बार चोदा है और तो और दोनों भाई मिलकर मेरी चुदाई करते हैं।
सच तो ये है अन्नू कि अब एक लंड से मेरा मन भी नहीं भरता मुझे दो तीन लंड जब तक नहीं चोदे मुझे तसल्ली नहीं होती।
अगर मेरा देवर बोला कि सिल पैक नहीं मिली तो मैं कह दूंगी तू कौन सा सिल पैक है।
शादी से पहले कितनी बार तो मुझे चोदा है और पता नहीं कितनी लड़कियों को और भी चोदा होगा।
उसकी हिम्मत ही नहीं होगी कुछ बोलने की।
तू उस बात की चिंता छोड़ दे।
मैं हूं ना सब संभाल लूंगी।
बस तू आज की रात जीजू के साथ सो जाना।
और चिंता मत कर मैं भी साथ में रहूंगी कोई डर की बात नहीं है मेरी प्यारी बहन अन्नू।
दीदी इस तरह मुझे फुसलाती रही।
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दीदी बाजार गई और मेरे लिए एकदम पारदर्शी नेगलीजी और काले रंग की ब्रा और चड्डी लेकर आई।
शाम के समय दीदी बोली जा कर नहा लो और नहा के ये कपड़े पहन लो।
मैं नहाने गई तो दीदी भी बाथरूम के पास आकर खड़ी हो गई।
और बोली दरवाजा खुला रख के नहाओ।
दीदी के सामने नंगी होकर नहाने में मुझे बड़ी शर्म आ रही थी बोली शर्म मत करो मैं तुम्हारी दीदी हूं अभी से थोड़ी शर्म खुल जाएगी तो अच्छा है रात को इतनी शर्म नहीं आएगी।
बाथरूम में गर्म पानी की भाप छाई हुई थी, शीशा धुंधला हो गया था और पानी की टप-टप की आवाजें दीवारों से टकरा रही थीं।
मैं पूरी तरह नंगी खड़ी थी, मेरी गोरी त्वचा पर पानी की बूंदें चमक रही थीं।
मैंने एक हाथ से अपनी भरी-भरी चुचियों को ढकने की कोशिश की और दूसरे हाथ से अपनी चूत को छुपाने की, लेकिन मेरी उंगलियां कांप रही थीं।
मेरा चेहरा लाल हो गया था, सांसें तेज चल रही थीं और घुटनों में कमजोरी महसूस हो रही थी।
दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा कि शर्म मत करो, मैं तुम्हारी दीदी हूं।
और दीदी ने जबरदस्ती मेरे सूट के बटन खोलकर सूट और सलवार निकाल दी।
उनकी उंगलियां तेजी से बटनों पर घूम रही थीं, हर बटन खुलते ही सूट का कपड़ा मेरे कंधों से फिसलकर नीचे गिरने लगा।
सलवार की नाड़ी खींचकर उन्होंने उसे मेरी टांगों से उतार दिया, ठंडी हवा मेरी नंगी जांघों पर लगी।
और फिर मेरी ब्रा चड्डी भी निकाल दी।
ब्रा का हुक खोलते ही मेरी कड़क चुचियां उछलकर बाहर आ गईं, निप्पल्स ठंड से सिकुड़ गए और हवा में खड़े हो गए।
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चड्डी को नीचे खींचते समय दीदी ने मेरी जांघों को छू लिया, मेरी चूत के घने बालों पर उनकी नजर पड़ी।
मेरी चुची देखकर दीदी बोली हाय कितनी प्यारी कड़क चुचियां हैं तेरी और ये क्या तूने अपनी चूत के बाल कभी काटे नहीं हैं क्या।
देख तो जरा बाल कितने बड़े बड़े हो गए हैं।
तेरी चूत तो दिखती ही नहीं है।
पूरा जंगल बना रखा है तूने।
दीदी क्या बाल भी काटे जाते हैं।
मुझे नहीं मालूम था।
दीदी बोली तू बड़ी भोली है रे।
दीदी ने अपने कपड़े निकाले और अपना चिकना भोसड़ा दिखाया।
उन्होंने अपना सूट ऊपर उठाया, ब्रा उतारी और चड्डी नीचे सरका दी।
उनकी भरी-भरी चुचियां लहराईं, निप्पल्स गुलाबी और सख्त थे।
फिर उन्होंने अपनी टांगें थोड़ी फैलाईं और उंगलियों से अपनी चूत के दोनों पाट खोलकर दिखाए।
बोली देख मेरा भोसड़ा।
मैं बोली दीदी इसको चूत बोलते हैं या भोसड़ा।
दीदी बोली देख तू चुदी नहीं है और तेरी चूत एकदम टाइट सिल पैक है इसलिए इसे चूत कहते हैं और मैं खूब चुदवा चुकी हूं और मेरी चूत काफी चौड़ी हो गई है इसलिए इसे भोसड़ा बोलते हैं।
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चूत को हमेशा बाल काटकर चिकनी बनाकर रखा कर जैसे मैं रखती हूं।
अच्छा रहने दे इन बालों को तेरे जीजाजी को भी विश्वास आ जाएगा कि तू एकदम फ्रेश सिल पैक ही है।
मैं अच्छी तरह नहाई।
गर्म पानी मेरी नंगी त्वचा पर बह रहा था, साबुन की फेन मेरी चुचियों पर फिसल रही थी, मेरी चूत के बालों में पानी रिस रहा था।
दीदी पास खड़ी मुझे निहार रही थीं, उनकी नजर हर हिस्से पर घूम रही थी।
दीदी ने नेगलीजी चड्डी ब्रा जो लेकर आई थी पहनने को दी।
पारदर्शी नेगलीजी का कपड़ा मेरी त्वचा से चिपक गया, काले रंग की ब्रा मेरी चुचियों को ऊपर उठाकर और भी उभारा रही थी।
उस ड्रेस को पहनकर मुझे बड़ी शर्म लग रही थी।
कपड़ा इतना पतला था कि मेरी निप्पल्स और चूत की आउटलाइन साफ दिख रही थी।
लेकिन दीदी बोली अरे वाह मेरी बन्नो रानी इस ड्रेस में बड़ी खूबसूरत माल लग रही है।
तेरा जीजा का लंड तुझे इस ड्रेस में देखकर तो और भी फूलकर लंबा मोटा हो जाएगा।
तेरा जीजा बहुत मस्त चोदता है।
मैं बोली प्लीज दीदी रहने दो मुझे छोड़ दो।
दीदी बोली आज तेरे जीजा के साथ तेरी सुहाग रात मनवाती हूं तू क्या चाहती है तेरा जीजा मेरी जान ले ले।
अपनी दीदी के लिए इतना भी नहीं कर सकती क्या।
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और फिर चुदवाने में तो बड़ा मजा आता है।
तुझे कोई सजा थोड़े ही दे रही हूं।
मैं तो तुझे भी लंड का मजा चखा रही हूं।
एक बार चुदवाने के बाद तू खुद चुदवाने के लिए मरी जाएगी।
मैं चुप हो गई।
करीब आठ बजे जीजू आए।
मेरा दिल धक धक कर रहा था।
मैं अपने कमरे में बैठी थी।
जीजू ने दीदी से पूछा अन्नू मानी या नहीं।
दीदी बोली हां मैंने मना लिया है लेकिन जरा प्यार से धीरे से चोदना बेचारी बड़ी डर रही है।
दीदी ने मुझे आवाज देकर बुलाया।
मैं ड्राइंग रूम में आई।
जीजू मुझे इस ड्रेस में देखकर एकदम खुशी से चिल्ला पड़े।
अरे वाह मेरी साली इतनी खूबसूरत सेक्सी है।
देख तो मेरी साली की चुचियां कितनी तनी हुई हैं एकदम कड़क चाहे इस पर बादाम रखकर अपने लंड से बादाम फोड़ लो।
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और हंसने लगे हा हा हा हा।
मजा आ गया साली को देखकर आज तो पूरी रात चोद चोद के इसकी सुहागरात मनाऊंगा।
आजा मेरी अन्नू रानी अपने कपड़े उतारकर मेरे पास नंगी होकर आजा।
हम भी तो देखें तेरी चूत सिल पैक है या चुदा हुआ भोसड़ा।
ये बातें सुनकर मेरा मन कर रहा था कि धरती फट जाए और मैं उसमें समा जाऊं।
जीजू ने दारू की बोतल निकाली और दीदी के साथ दारू पीने लगे।
दीदी ने मुझे अपने पास बुलाया और बोली थोड़ी सी तू भी पी ले बड़ी कमाल की चीज है ये दारू थोड़ी सी अंदर जाते ही पूरी हिम्मत आ जाएगी सारी शर्म और डर खत्म हो जाएगा और फिर खूब मजा करेगी।
मैंने साफ मना कर दिया।
और मैं अपने कमरे में भाग गई और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
जीजू ने जोर से दरवाजे पर लात मारी लेकिन दरवाजा नहीं टूटा फिर थोड़ी दूर जाकर भागकर आए दरवाजे को जोर से अपने शरीर से टक्कर मारी दरवाजा टूट गया।
जीजू को दारू के साथ मेरे शरीर का पूरा नशा हो रहा था वो मेरे कमरे में घुस आए।
मैंने कहा जीजाजी प्लीज आप कमरे से चले जाइए।
लेकिन वो तो और आगे बढ़े और मुझे पकड़ने की कोशिश करने लगे।
मैं भागी।
जीजू मेरे पीछे।
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मैं भागकर ड्राइंग रूम में आ गई और ऊपर वाले कमरे में जाने के लिए सीढ़ी की तरफ भागी।
जीजू ने दीदी को बोला पकड़ इस हरामजादी कुतिया को साली भाग रही है।
उनकी आवाज़ में गुस्सा और उत्तेजना दोनों भरी हुई थी, जैसे कोई शिकारी अपनी शिकार को पकड़ने का हुक्म दे रहा हो।
दीदी भी भागकर मुझे पकड़ने आई दीदी ने मेरा हाथ पकड़ा मेरी नेगलीजी फट गई और मैंने बचने के लिए कसके एक लात दीदी की टांगों पर दे मारी।
दीदी की मजबूत उंगलियां मेरी कलाई को लोहे की तरह जकड़ रही थीं, नेगलीजी का पतला कपड़ा उनके खींचने से चीर-चीरकर फट गया और मेरी नंगी त्वचा हवा में उजागर हो गई।
मेरी लात दीदी की जांघ पर जोर से लगी, लेकिन वे हिली भी नहीं, बल्कि और कसकर पकड़ लिया।
लेकिन दीदी की पकड़ मजबूत थी और इतने में ही जीजू भी आ गए और मैं दोनों के बीच में बकरी की तरह फसी हुई थी और निकलकर भाग जाने के लिए फड़फड़ा रही थी।
मेरा पूरा शरीर पसीने से भीग गया था, सांसें फूल रही थीं और दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।
जीजू ने मुझे कसके दो थप्पड़ मारे आज इसको नहीं छोड़ना है।
उनके बड़े-बड़े हाथ मेरे गाल पर पड़े, तेज़ चटाक की आवाज़ हुई और मेरे चेहरे पर जलन फैल गई।
दीदी बोली भाग क्यों रही है।
तुझे प्यार ही तो करेंगे कोई जान से मार तो नहीं देंगे।
ऐसे भागेगी तो अच्छा नहीं होगा।
जीजू ने मुझे जोर से पकड़के दबाया और मेरे मुंह पर जबरदस्ती किस किया और मेरे होंठों को काटने लगे।
उनके गर्म और भारी होंठ मेरे होंठों पर दब गए, जीभ जबरदस्ती मेरे मुंह में घुसने लगी, दांतों से निचला होंठ काटा गया।
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मेरे होंठ कट गए और थोड़ा खून भी निकला।
खून की गर्म और नमकीन बूंद मेरे मुंह में फैल गई, जीजू को और भी करंट आया वो दीदी से बोले ले चाट ले अपनी बहन का खून।
जीजू ने मुझे कसके पकड़ रखा था और दीदी मेरे होंठ पर लगा खून चाटने लगी जीजू मेरी चुचियां मसल रहे थे।
दीदी की गर्म जीभ मेरे कटे होंठों पर फिर रही थी, खून चूसती हुई वे आह भर रही थीं।
जीजू के मोटे हाथ मेरी चुचियों को कसकर मसल रहे थे, उंगलियां निप्पल्स को नोच रही थीं, दर्द और उत्तेजना का मिश्रण मेरे बदन में दौड़ रहा था।
मैं जोर जोर से चिल्ला रही थी मुझे छोड़ दो।
मेरे ऊपर रहम करो।
और किसी तरह उनकी पकड़ से निकलकर भागने की कोशिश कर रही थी।
मेरी आवाज़ कांप रही थी, आंसू आंखों से बह रहे थे, लेकिन उनकी पकड़ और मजबूत हो गई।
जीजू बोले पहले इसको नंगी कर दो जिससे ये घर से बाहर भागकर नहीं जा सके।
जीजू ने मेरी नेगलीजी पूरी फाड़कर मेरे शरीर से अलग कर दी और भूखे भेड़िये की तरह मेरी पूरी बॉडी को देखने लगे जैसे मुझे कच्चा खा जाएंगे।
कपड़े के टुकड़े हवा में उड़ते हुए गिरे, मेरी गोरी नंगी त्वचा उनकी नजरों के सामने पूरी तरह खुल गई।
जीजू ने मुझे पकड़ रखा था मैं बेबस थी जीजू ने मेरी ब्रा खिंचके फाड़कर उतार दी और मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया।
ब्रा का कपड़ा चीरते ही मेरी कड़क चुचियां उछलकर बाहर आ गईं, ठंडी हवा से निप्पल्स सख्त हो गए।
दीदी से बोले चल जल्दी से इसकी चड्डी भी निकाल दे मैं इसको पकड़के रखता हूं।
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दीदी ने मेरी चड्डी निकाल दी।
उनकी उंगलियां मेरी जांघों पर फिसलती हुई चड्डी को नीचे सरका रही थीं, मेरी चूत के घने बाल हवा में हिल गए।
मैं पूरी नंगी जीजू की बांहों में थी।
मैंने बहुत कोशिश की कि किसी तरह उनके चंगुल से निकल जाऊं लेकिन जीजू ने मुझे कसके पकड़ रखा था।
मैं चिल्ला रही थी।
दीदी बोली चिल्ला ले तेरी आज यहां कोई नहीं सुनने वाला।
ज्यादा नखरे चोदेगी तो मेरे देवर को भी यहीं बुला लूंगी।
फिर दोनों मिलके तेरी चूत का हलवा बना देंगे।
जीजू दीदी से बोले चल तू भी नंगी हो और फिर मेरे भी सारे कपड़े निकालके नंगा कर।
मैं अन्नू रानी को पकड़के रखता हूं।
दीदी ने अपने सारे कपड़े निकालकर नंगी हो गई फिर जीजू के पास आई और उनकी पैंट और चड्डी निकाल दी।
जैसे ही दीदी ने जीजू की चड्डी निकाली जीजू का मोटा लंबा डंडा मेरी चूत से टकराया ऐसा लगा कोई मोटा गर्म लोहे का रॉड मेरी चूत पर दबाव डाल रहा है।
उसका गर्म और सख्त सुपाड़ा मेरी चूत की टाइट फांकों पर दबा, पसीने और उत्तेजना की गंध हवा में फैल गई।
जैसे ही टीशर्ट निकालने के लिए जीजू ने अपने हाथ ऊपर किए जीजू की पकड़ ढीली हो गई और मैं बचने के लिए कमरे की तरफ भागी।
दीदी और जीजू को बड़ा गुस्सा आया दोनों ने भागकर मुझे पकड़ा और कसके दो थप्पड़ मारे।
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मैं रोने लगी।
दीदी बोली देख अन्नू आज तो तेरी चुदाई होनी ही है राजी या बिना राजी।
राजी से चुदवाएगी तो हमें और तुझे सबको मजा आएगा।
मैं बोली दीदी मैं नहीं करने दूंगी।
मुझे छोड़ दो।
मेरी जान निकल जाएगी।
जीजू बोले अगर इसी तरह से नखरे करेगी और भागम भाग करेगी तो जरूर मरेगी।
चुपचाप चुदवा ले हमें भी मजा लेने दे।
नहीं तो मार मारके तेरा बुरा हाल कर दूंगा और चुदेगी तो तू तब भी।
लेकिन मैं किसी भी कीमत पर अपनी इज्जत बचाना चाहती थी।
जीजू और दीदी मुझे घसीटकर कमरे में ले गए।
और मुझे पलंग पर पटक दिया।
जीजू मेरी छाती पर बैठ गए और जोर जोर से मेरी चुचियों को मसलने लगे मुझे बड़ा दर्द हो रहा था जीजू ने अपने डंडे से मेरे मुंह पर पिटाई करनी चालू कर दी।
वो कोशिश कर रहे थे कि मेरे मुंह में अपना डंडा डाल दें।
दीदी ने मेरा मुंह पकड़कर खोला और जीजू ने अपना डंडा मुंह में घुसेड़ना चाहा लेकिन डंडा मेरे मुंह में गया नहीं।
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दीदी ने फिर मुझे जोर से मुक्का मारा और जैसे ही मेरा मुंह थोड़ा खुला जीजू का डंडा थोड़ा मेरे मुंह में अंदर घुस गया।
फिर पता नहीं दीदी को कहां से आईडिया आया उसने मेरी चूत के बालों को जोर से खींचा।
मैं दर्द से तड़प उठी और मेरा मुंह काफी खुल गया।
जीजू ने अपना डंडा पूरा मेरे मुंह में घुसेड़ दिया।
अब जीजू का डंडा मेरे गले तक फंस गया मुझे लगा जैसे मेरा दम घुट रहा है।
मुझे सांस लेने में परेशानी हो रही थी और ना ही कुछ बोल पाने की स्थिति में थी।
दीदी ने नीचे मेरी चूत पर वार किया अपने दांतों से चूत को चाटने लगी।
लेकिन मैं ना तो बोल सकती थी ना चिल्ला सकती थी।
सिर्फ मेरी आंख से आंसू निकल रहे थे।
दोनों में से किसी को भी मेरे ऊपर रहम नहीं आया।
दीदी ने मेरी चूत के दोनों पाट को कसके पकड़ा और खींचा फिर मुंह में लेकर पहले प्यार किया और फिर लगी दांतों से काटने।
मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा था।
जीजू अपने डंडे को मेरे मुंह में आगे पीछे करके मेरे मुंह को चोद रहे थे।
इतने में बाहर से दरवाजे की घंटी बजी।
मैंने सोचा चलो लगता है भगवान ने मुझे बचाने के लिए किसी अवतार को अचानक बिना किसी उम्मीद के भेज दिया है।
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मैं भगवान को याद करने लगी।
लेकिन मैं देखकर चौंक गई दीदी नंगी ही दरवाजा खोलने गई।
मुझे बड़ा अजीब सा लगा कि क्या चक्कर है।
दीदी एकदम से पूरी नंगी दरवाजा कैसे खोलेंगी।
लेकिन हे भगवान जब वो अंदर आया तो मेरी जान और भी सूख गई।
आने वाला कोई देवता नहीं बल्कि शैतान था मेरी दीदी का देवर।
शायद दीदी ने ही इसको बुलाया होगा इसलिए नंगी ही जाकर दरवाजा खोलने चली गई।
कहो भाभी कैसा चल रहा है।
बकरी दूध पी गई या नहीं।
दीदी बोली कहां अभी तो मान ही नहीं रही है सती सावित्री कमीनी कहीं की।
अब तू आ गया है तो उसको दूध और तेरे लंड की दही सब पिलाएंगे।
देवर ने मुझे नंगी देखकर बोला हाय भाभी ये तुम्हारी बहन कितनी गोरी है पूरी बॉडी संगमरमर की तरह चिकनी है अभी तक ये कैसे बची रह गई थी।
उसकी नजर मेरी नंगी बॉडी पर घूम रही थी, मेरी गोरी त्वचा पर कमरे की पीली रोशनी पड़ रही थी जिससे मेरी चुचियां और चूत की फांके चमक रही थीं।
दीदी की भरी-भरी चुचियां हिल रही थीं, उसकी चूत से अभी भी देवर के लंड का रस टपक रहा था।
भाभी बोली तो मैं क्या काली कलूटी हूं सालों चूतियों नया माल देखकर पुराना माल क्या बासी सड़ा हुआ लगने लग गया।
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दीदी की आवाज़ में हल्का गुस्सा और शरारत दोनों थी, वह देवर के पास और करीब आ गई और अपनी चुचियां उसके सीने से रगड़ने लगी।
देवर बोला अरे भाभी तुम तो बस तुम ही हो मैं तो अन्नू की तारीफ कर रहा था इसका मतलब ये तो नहीं कि तुम काली हो।
अपनी झांटे क्यों सुलगाती हो।
देवर बोला क्यों अन्नू जान मादरचोद कहीं की क्यों अपना बुरा हाल करवा रही हो चुप चाप मान जाओ और मजे से चुदवा लो हमें भी मजा आएगा।
नहीं तो तेरी गांड भी आज ही मारेंगे।
एक तेरी चूत में और एक तेरी गांड में एक साथ लंड घुसेड़के चोदेंगे जैसे तेरी बहन को चोदते हैं।
वैसे मुझे तो जबरदस्ती चोदने में भी खूब मजा आता है।
तेरी बहन को भी पहली बार मैंने जबरदस्ती बलात्कार करके ही चोदा था।
अब देख तेरी बहन को कैसे चोदता हूं फिर चुदवा लेना।
आओ भाभी मेरी कुतिया रानी मेरे पुराने बासी माल मेरे पास आओ जरा अपनी चुची से दूध पिला कर मेरा लंड मोटा ताजा कर दो।
फिर अन्नू जान को चोदूंगा।
दीदी देवर के पास गई उसके सारे कपड़े निकाल दिए और वो दीदी की चुचियां मुंह में लेकर चूसने लगा फिर दीदी उसका लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।
दीदी ने देवर की पैंट का बटन खोला, चड्डी नीचे सरकाई और उसका मोटा, गाढ़ा लंड बाहर निकल आया जो पहले से ही आधा खड़ा हो चुका था।
देवर ने दीदी की एक चुची को मुंह में भर लिया, दांतों से निप्पल को हल्का-हल्का काटते हुए जोर-जोर से चूसने लगा, दूसरी चुची को हाथ से मसल रहा था।
दीदी घुटनों के बल बैठ गई, देवर के लंड को दोनों हाथों में पकड़कर उसकी पूरी लंबाई चाटने लगी, फिर मुंह में लेकर गहरी चूसाई शुरू कर दी।
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दीदी ने उसके लंड के नीचे लटक रही दोनों गोलियों को भी चूसा देवर दीदी की चुचियां मसलता रहा।
उसकी गर्म जीभ लंड की नसों पर फिर रही थी, गोलियों को मुंह में लेकर हल्का-हल्का दबा रही थी, देवर की सांसें भारी हो गई थीं।
दीदी बोली रंडी की औलाद क्या तेरे हाथ में दम नहीं है जोर से मसल मेरी चुचियों को।
जीजू बोले देख अन्नू रानी हरामजादी तेरी दीदी बहन की लोड़ी कैसे देवर का लंड चूस रही है कितना मजा आ रहा है उन दोनों को।
तू भी ऐसे ही प्यार से चूसेगी तो क्या तेरी गांड फट जाएगी भेंचोद कहीं की।
मैं बोल तो सकती थी ही नहीं सिर्फ सुन ही सकती थी।
और मजबूर थी।
मेरे सामने देवर ने दीदी को खड़े खड़े ही चोदा फिर दोनों ने आकर मुझे पकड़ा।
देवर ने दीदी को दीवार से सटाकर खड़ा किया, अपनी टांगें फैलाईं, लंड को दीदी की चूत पर रगड़ा और एक जोरदार धक्का देकर पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
दीदी की चूत से चप्पाक की आवाज आई, रस बाहर निकलने लगा, देवर तेज़-तेज़ धक्के देने लगा।
दीदी ने मेरे हाथों को और देवर ने मेरी दोनों टांगों को कसके पकड़ लिया।
जीजू अब अपना लंड मेरे मुंह से निकालकर मेरी चूत पर हमला करने वाले थे।
जीजू मेरे ऊपर चढ़े और लंड से मेरी चूत पर पांच छह बार पिटाई की।
उसका गर्म, मोटा सुपाड़ा मेरी टाइट चूत की फांकों पर बार-बार गिर रहा था, हर बार एक तेज़ चुटकी जैसा दर्द हो रहा था।
बोले बड़ी करारी चूत है।
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देवर बोला हां भैया बड़ी कड़क चूत है इसको चोदने में बड़ा मजा आएगा।
जीजू बोले तू पहले चोदेगा या मैं पहले चोदूं।
देवर बोला भैया आप बड़े हैं आपके होते हुए मैं कैसे पहले करूंगा।
पहले भोग तो आप ही लगाओ।
आप राम हैं मैं लक्ष्मण हूं।
दीदी बोली वाह रे राम लक्ष्मण बड़ा प्यार है भाईयों में अपनी सीता का भी तो ध्यान रखो।
देवर हंसके बोला सीता को चोदने के लिए अभी रावण आने वाला है।
भाभी चिंता मत करो नई चूत देखकर पुरानी को भूल थोड़े ही जाएंगे।
नया नौ दिन पुराना सौ दिन।
आपके सहारे ही तो दाल रोटी चलेगी।
और जीजू ने मेरी चूत पर अपना लंड लगाया धीरे से अंदर घुसेड़ने लगे लेकिन अंदर नहीं गया।
फिर जीजू ने मेरी चूत खोलके चूत के दरवाजे पर लंड को सेट किया और जोर से धक्का मारा मैं चिल्लाई मर गई रे।
मेरी चूत की झिल्ली फट गई और चूत से काफी खून निकलने लगा।
देवर बोला भैया खून निकल रहा है मैं चाट लूं क्या।
जीजू बोले चाट ले कमीने मादरचोद तुझे खून चाटने का बड़ा शौक है।
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छोड़ दे टांगें अब ये कहां बचके भागेगी।
चाट इसका खून चाट इसको भी थोड़ी राहत मिलेगी।
उसने मेरी टांगें छोड़ दी और मेरी चूत के पास आ गया और चूत से निकले खून को चाटने लगा।
उसकी गर्म जीभ मेरी फटी चूत पर फिर रही थी, खून और रस को चूस-चूसकर पी रहा था, ठंडक का अहसास हो रहा था।
फिर जीजू ने अपने लंड को और अंदर घुसेड़ा और फिर जोर जोर से धक्के देने लगा।
मेरा बुरा हाल था।
लेकिन किसी को भी मुझ पर तरस नहीं आ रहा था।
देवर मेरी चूत चाट रहा था और दीदी ने भी मेरे हाथ छोड़ दिए और देवर का लंड चूसने लगी।
पंद्रह मिनट बाद जीजू ने मेरी चूत में अपना रस छोड़ दिया।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गर्म गर्म दूध डाल दिया हो।
मैं थककर चूर हो गई थी।
फिर जीजू नीचे लेट गए और मुझे अपने ऊपर लिटाया और अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया।
इस बार मुझे पहले जितना दर्द नहीं हुआ।
वो देवर से बोले तू ऊपर आके अन्नू रानी की गांड में अपना लंड डालके इसकी गांड मार।
वो बोला जो हुक्म भैया।
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उसने मेरी गांड देखी और मेरी गांड में एक उंगली डाली बड़ी मुश्किल से थोड़ी सी अंदर गई।
वो बोला भैया इसकी गांड को आज रहने दो बड़ी टाइट है।
बेचारी मर जाएगी।
जीजू बोले अच्छा अब ये बेचारी हो गई।
तेरी भाभी की गांड मारी थी तो क्या वो मर गई थी।
अरे पगले पहली बार तो जोर लगाना ही पड़ेगा ना।
दीदी बोली इसकी आज चूत की सिल तोड़ी है कल गांड भी मार लेना देखो क्या बुरा हाल हो गया है इसका।
जीजू बोले चुप भोसड़ी की वरना तेरी गांड में दोनों लंड डालके मारेंगे।
उनकी आवाज़ में गुस्सा और उत्तेजना दोनों साफ झलक रही थी, जैसे कोई जानवर अपनी मादा को चेतावनी दे रहा हो।
दीदी बोली आजा चोदू कहीं के मार मेरी गांड मार।
उसकी आंखों में शरारत और भूख दोनों चमक रही थी, वह घुटनों के बल पलंग पर चढ़ गई और अपनी गांड ऊपर उठाकर घोड़ी बन गई।
देवर ने तुरंत दीदी को घोड़ी बनाया और दीदी की गांड में लंड घुसेड़ दिया।
उसने दीदी की कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा, लंड का मोटा सुपाड़ा दीदी की टाइट गांड की रिंग पर सेट किया और एक जोरदार धक्का मारा।
लंड आधा अंदर घुस गया, दीदी की गांड की दीवारें खिंचकर फैल गईं, दीदी के मुंह से एक लंबी आह निकली।
देवर ने कमर को पीछे खींचा और फिर पूरा लंड एक झटके में अंदर ठेल दिया, चप्पाक की तेज़ आवाज़ कमरे में गूंज गई।
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जीजू बोले देख अन्नू रानी अपनी दीदी को कैसे गांड मरवा रही है अपने देवर से।
साली पूरी रंडी है मादरचोद चार पांच लंडों से एक साथ चुदवा सकती है।
डर मत तू भी दो चार बार चुदवा कर इसके जैसी ही बन जाएगी तब तुझे भी रोज लंड की जरूरत पड़ेगी।
जीजू ने दूसरी बार अपना रस मेरी चूत में छोड़ दिया।
उसका गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरी चूत की अंदरूनी दीवारों पर फुहार की तरह छूटा, हर फुहार के साथ मेरी चूत में गर्मी फैल गई, जैसे कोई उबलता दूध अंदर डाला जा रहा हो।
अब देवर बोला भैया एक बार मैं भी अन्नू रानी को चोद लूं।
जीजू बोले क्यों नहीं।
और इसको चोदके बता इसको अपनी बीबी बनाएगा या नहीं।
वो बोला भैया ये तो आपको सोचना है।
जीजू बोले मुझे तो इसको चोदके खूब मजा आया है मेरी तरफ से तो हां है बस तू भी हां कह दे तो तेरी शादी अन्नू के साथ करवा देंगे।
दीदी बोली शादी तो करनी ही पड़ेगी।
तुमने इसकी सिल भी तोड़ डाली अब क्या शादी नहीं करोगे।
जीजू बोले तू चुप रह भेंचोद।
सिल तोड़ी है तो कौन सी आफत आ गई।
वो तो तेरा बदला लिया है।
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चल डाल अपना लंड इसकी चूत में।
देवर ने अपना लंड मेरी चूत में डाला और दीदी से बोला भाभी लाओ अपनी चूत मेरे मुंह में दे दो।
देवर मेरी चूत चोद रहा था और साथ में दीदी की चूत को काट रहा था।
उसका मोटा लंड मेरी फटी हुई चूत में धीरे-धीरे घुसा, फिर तेज़ धक्के शुरू हो गए, हर धक्के के साथ मेरी चूत से खून और रस का मिश्रण बाहर निकल रहा था।
दीदी देवर के मुंह पर बैठ गई, अपनी चूत को उसके मुंह पर रगड़ रही थी, देवर दांतों से उसके क्लिटोरिस को हल्का-हल्का काट रहा था और जीभ अंदर घुसा रहा था।
जीजू दीदी की चुचियां भींच रहे थे वो तीनों मजा कर रहे थे और मैं दर्द से मरी जा रही थी।
जब देवर का रस निकला तो वो मेरे ऊपर से उतरा और बोला अन्नू रानी थोड़ा आराम कर लो।
थोड़ी सी दारू पी लो सारी थकान दूर हो जाएगी।
और जबरदस्ती मेरे मुंह में दारू डाल दी।
मेरा गला जलने लगा।
और धीरे धीरे उन्होंने दारू का पूरा ग्लास मेरे मुंह में डाल दिया।
मुझे थोड़ी ही देर में नींद आ गई।
थोड़ी देर बाद उठी तो देखा जीजू दीदी की चूत में और देवर गांड में लंड डालकर चोद रहा था।
तीनों खूब हंस रहे थे और गालियां बक रहे थे।
मुझे दारू का नशा हो गया था कुछ भी होश नहीं था।
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मैं उठी और जीजू का लंड दीदी की चूत में से बाहर निकालकर चूसने लगी।
मुझे मालूम ही नहीं था कि मैं क्या कर रही हूं।
जीजू बड़े खुश हुए और मुझे किस करने लगे बोले ये हुई न बात।
अब तू भी अपनी दीदी की तरह पूरी रंडी बन गई है।
आजा अब तुझे प्यार से चोदेंगे।
मैं खुद जीजू से चिपट गई उनको किस करने लगी और शर्म छोड़कर उनका लंड अपनी चूत पर रगड़ने लगी।
ये सब मैं नशे में कर रही थी।
नशे में मुझे लग रहा था कि कोई मुझे कसके प्यार करे और मुझे खूब चोदे।
मैं अपनी चूत का दर्द भी भूल गई।
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