Kunwari behen ki chudai sex story: मेरा नाम प्रिया है। मैं उन्नीस साल की हूं और अभी कॉलेज में पहला साल चल रहा है। मेरी दीदी का नाम रीना है। उनकी शादी को दो साल हो चुके हैं। दीदी के पति यानी मेरे जीजाजी अक्सर बिजनेस टूर पर रहते हैं।
दीदी के देवर यानी जीजाजी के छोटे भाई का नाम विक्रम है। विक्रम इक्कीस साल का है। वह लंबा चौड़ा है। जिम करता है। बदन पर मसल्स हैं और चेहरा इतना आकर्षक है कि देखते ही दिल धड़कने लगता है। वह अभी पढ़ाई कर रहा है और अक्सर दीदी के घर आता रहता है।
मैं दीदी के घर अक्सर वीकेंड पर जाती हूं क्योंकि मेरा घर थोड़ा दूर है। दीदी मुझे बहुत प्यार करती है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से मेरी नजरें विक्रम पर अटकने लगी थीं। जब वह शर्ट उतारकर जिम करता दिखता तो उसकी छाती और पेट की लकीरें देखकर मेरा मन अजीब हो जाता।
लेकिन सबसे बड़ी बात थी उसका मोटा लंड। हां मैंने एक बार अनजाने में देख लिया था। वह दिन था जब दीदी बाजार गई थीं। घर में सिर्फ मैं और विक्रम थे। मैं बाथरूम के पास से गुजर रही थी कि दरवाजा थोड़ा खुला था। विक्रम नहा रहा था।
उसने तौलिया कमर पर लपेट रखा था लेकिन जब वह मुड़ा तो तौलिया सरक गया। उसका लंड लटका हुआ था। बहुत मोटा लंबा काला सिर और नसें फूली हुईं। मैं रुक गई। आंखें फटी रह गईं। वह इतना मोटा था कि मेरी कुँवारी चूत में घुसने की कल्पना करते ही मेरे पैर कांप गए।
मैं चुपके से वहां से भाग गई लेकिन रात भर वह दृश्य मेरी आंखों के सामने घूमता रहा। मेरी चूत गीली हो जाती। मैं उंगली डालकर खुद को सहलाती लेकिन वह मोटा लंड याद आते ही और प्यास बढ़ जाती।
उसके बाद से मैं विक्रम को अलग नजरों से देखने लगी। वह भी शायद महसूस करता था। जब दीदी नहीं होती तो वह मेरे पास बैठकर बातें करता। नजरें मेरी चूचियों पर टिक जातीं। मेरी चूचियां चौंतीस साइज की हैं। गोरी और निप्पल्स गुलाबी।
मैं शर्माती लेकिन अंदर से रोमांच होता। एक वीकेंड पर दीदी अचानक अपनी सास के घर चली गईं। जीजाजी टूर पर थे। घर में सिर्फ मैं और विक्रम रह गए।
रात को बारिश हो रही थी। बिजली चली गई। हम दोनों लिविंग रूम में बैठे थे। लालटेन जल रही थी। विक्रम ने कहा प्रिया तुम आज बहुत सुंदर लग रही हो। मैं शरमा गई। देवर जी ऐसा मत कहो।
लेकिन उसकी आंखें मेरे बदन पर घूम रही थीं। बातें चलती रहीं। विक्रम ने पूछा प्रिया तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है। मैंने सिर हिलाया। नहीं मैं अभी तक कुँवारी हूं। वह मुस्कुराया।
सच इतनी खूबसूरत लड़की और कोई नहीं। मैंने नजरें झुका लीं। वह करीब सरका। उसकी सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। प्रिया मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं।
उसने मेरे हाथ पकड़ लिए। मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था। देवर जी यह गलत है दीदी। लेकिन वह नहीं रुका। उसने मुझे अपनी तरफ खींचा और होंठों पर किस कर दिया।
पहला किस। उसके होंठ गर्म थे। मैंने विरोध किया लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस गई। मैं भी जवाब देने लगी। उसके हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे फिर कमर पर।
वह मुझे गोद में बिठा लिया। मेरी चूत उसके लंड से सट गई। मैंने महसूस किया वह सख्त हो रहा है। विक्रम तुम्हारा बहुत बड़ा है। मैं फुसफुसाई। वह हंसा।
तुमने देख लिया था ना बाथरूम में। मैं शरमा गई। वह मुझे उठाकर बेडरूम में ले गया। दीदी का बेड था। उसने मेरी टीशर्ट उतारी। मेरी चूचियां बाहर आईं।
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वह उन्हें देखकर बोला वाह प्रिया कितनी सुंदर चूचियां हैं। उसने एक चूची मुंह में ले ली। चूसा काटा। मैं सिसकारी। आह विक्रम धीरे। मेरी चूत गीली हो चुकी थी।
उसने मेरी शॉर्ट्स और पैंटी उतारी। मेरी कुँवारी चूत पहली बार किसी के सामने नंगी थी। गुलाबी साफ हल्के बाल। विक्रम घुटनों पर बैठ गया।
प्रिया तुम्हारी चूत कितनी प्यारी है। उसने जीभ से चाटना शुरू किया। मैं कमर उठा रही थी। आह देवर जी वहां क्लिट पर आह। उसकी जीभ जादू कर रही थी।
वह उंगली भी डालने लगा। तुम्हारी चूत बहुत तंग है। मेरे मोटे लंड के लिए तैयार हो जाओ। मैं डर गई लेकिन प्यास भी बढ़ गई।
उसने अपना पैंट उतारा। उसका लंड बाहर आया। पूरी तरह खड़ा आठ इंच लंबा बहुत मोटा सिर चमक रहा था। मैंने हाथ बढ़ाया। मुश्किल से मुट्ठी बंद हुई।
कितना मोटा है विक्रम मेरी चूत फट जाएगी। वह बोला पहली बार थोड़ा दर्द होगा लेकिन फिर मजा आएगा। वह मेरे ऊपर आया।
लंड की नोक मेरी चूत पर रखी। धीरे से दबाया। सिर अंदर गया। आह दर्द हो रहा है। मैं चीखी। वह रुका मुझे किस किया चूचियां सहलाई।
फिर और धक्का। आधा लंड अंदर चला गया। मेरी आंखों में आंसू आ गए लेकिन आग भी लग रही थी। विक्रम पूरा डाल दो अपनी कुँवारी चूत फाड़ दो।
उसने एक जोरदार धक्का मारा। पूरा मोटा लंड मेरी चूत में घुस गया। आआआह मर गई फट गई मेरी चूत। मैं चिल्लाई।
लेकिन वह रुका नहीं। धीरे धीरे धक्के मारने लगा। दर्द धीरे धीरे मजा में बदल गया। हां और जोर से चोदो मुझे तुम्हारा मोटा लंड मेरी चूत में आह कितना भर गया है।
वह तेज हो गया। कमरे में फच फच की आवाज गूंज रही थी। मेरी चूत अब उसके लंड के आकार की हो गई थी। वह मेरी चूचियां दबाता गांड पकड़कर धक्के मारता।
प्रिया तुम्हारी चूत बहुत गरम और तंग है। मेरे लंड को निचोड़ रही है। मैं कराह रही थी। हां देवर जी चोदो मेरी कुँवारी चूत को अपनी बना लो और तेज।
हमने पोजिशन बदली। मैं ऊपर आई उसकी गोद में बैठकर उछली। उसका मोटा लंड पूरी तरह अंदर बाहर हो रहा था। मेरी चूचियां उछल रही थीं। वह उन्हें चूसता।
फिर डॉगी स्टाइल में। पीछे से उसने गांड पकड़ी और जोर जोर से चोदा। तुम्हारी गांड भी बहुत सॉफ्ट है। एक दिन इसमें भी डालूंगा।
रात भर हम चोदते रहे। विक्रम ने तीन बार पानी छोड़ा। पहली बार मेरी चूत में दूसरी बार मुंह में तीसरी बार चूचियों पर। मैं कई बार झड़ चुकी थी।
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सुबह होने से पहले हम थककर लेटे। विक्रम मुझे चूम रहा था। प्रिया अब तुम मेरी हो। दीदी को कभी मत बताना। जब भी मन करे मैं तुम्हारी चूत के मजे लूंगा।
मैंने शरमाते हुए कहा हां तुम्हारा मोटा लंड अब मेरी चूत का दीवाना है। उसके बाद हर वीकेंड मैं दीदी के घर जाने लगी।
दीदी सोचती कि मैं उनसे मिलने आती हूं लेकिन असल में विक्रम के मोटे लंड और मेरी कुँवारी चूत का खेल चलता। वह रिश्ता गुप्त रहा लेकिन हमारी चाहत हर बार और गहरी होती गई।
वह पहली रात वह दर्द और वह मजा आज भी याद आते ही मेरी चूत गीली हो जाती है।