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भाभी की चुदाई हनीमून वाले होटल में

Bhabhi ke sath Honeymoon: मेरा नाम करण है। मैं चौबीस साल का हूँ। मेरे भाई पंकज भाईया की शादी को पाँच साल हो चुके थे। उनकी पत्नी यामिनी भाभी से मेरी पहली मुलाकात शादी में हुई थी। तब से ही वो मेरे मन में एक अलग ही जगह बना चुकी थीं।

भाभी की उम्र अट्ठाईस साल थी। उनकी गोरी चमड़ी इतनी नरम और चमकदार थी कि देखते ही मन मोह लेती थी। उनके लंबे काले बाल इतने घने और रेशमी थे कि वे उनकी पीठ पर लहराते हुए एक अलग ही सुंदरता बिखेरते थे। उनकी भारी-भारी चूचियाँ इतनी बड़ी और भरी हुई थीं कि वे उनकी छाती पर भारी बोझ की तरह लगतीं। उनकी गोल-गोल मोटी गांड़ इतनी आकर्षक और भारी थी कि चलते समय उनके कूल्हे लहराते हुए नजर आते थे।

हर बार जब वो घर आतीं तो मेरी नजरें अनजाने में ही उनकी छाती और कमर पर अटक जातीं। मैं कोशिश करता कि ऐसा न हो लेकिन मेरा मन नहीं मानता था।

भाईया हमेशा बिजी रहते थे। उनकी कंपनी का काम इतना ज्यादा था कि भाभी अक्सर अकेली ही रह जातीं।

एक दिन भाईया ने मुझे फोन किया। करण, यामिनी का एग्जाम है कल। मैं मीटिंग में फँसा हूँ। तू उसे एग्जाम दिलाने ले जा। रुकने के लिए वही एग्जाम सेंटर के पास ही कोई होटल बुक कर लेना।

मैं तैयार हो गया। अगली सुबह भाभी मेरे साथ ट्रेन से निकल पड़ीं।

सफर के दौरान भाभी मेरे बगल में बैठी थीं। उनकी खुशबू मेरे नथुनों में समा रही थी। यह खुशबू बहुत ही मीठी और आकर्षक थी। उनके शरीर की गर्माहट पास से महसूस हो रही थी।

हर बार जब ट्रेन झटका खाती तो उनकी भारी चूचियाँ मेरी बाँह से टकरातीं। उन चूचियों का कोमल और भारी स्पर्श मेरी बाँह पर पड़ता तो मेरे शरीर में एक अजीब सी सनसनी दौड़ जाती। वे इतनी मुलायम थीं कि दबाव पड़ने पर थोड़ा सा फैल जातीं। उनकी गर्माहट मेरी त्वचा तक पहुंच जाती।

मैं कोशिश करता कि नजरें न लगाऊँ। लेकिन बार-बार वो मेरी तरफ देखतीं और मुस्कुरा देतीं। उनकी मुस्कान में एक खास तरह की मासूमियत थी जो मुझे और आकर्षित करती। ट्रेन के इस छोटे से सफर ने मेरे मन में कई तरह के विचार पैदा कर दिए थे।

हम एग्जाम सेंटर के पास पहुँचे तो पहले होटल में रूम माँगा लेकिन एग्जाम के समय इतनी भीड़ थी कि कोई रूम उपलब्ध नहीं था। हमने तीन होटल ट्राई किए लेकिन सब जगह रूम फुल थे।

आखिरकार एक होटल में हमें रूम मिला और वो हनीमून सूट ही था। रिसेप्शनिस्ट ने मुस्कुराते हुए कहा, सर, हनीमून सूट ही उपलब्ध है। नवविवाहित जोड़े के लिए स्पेशल अरेंजमेंट किया गया है।

भाभी शर्मा गईं। मैंने भी कुछ नहीं कहा। बस हाँ कर दी।

कमरा खोलते ही अंदर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं। लाल लाल पंखुड़ियाँ फर्श पर बिखरी हुई थीं और एक मीठी खुशबू पूरे कमरे में फैली हुई थी। बेड पर भी गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी हुई थीं।

बेड के बीच में हार्ट शेप का लाल तकिया रखा हुआ था। डिम लाइट्स कमरे को एक नरम और अंतरंग रोशनी दे रही थीं। पूरा कमरा रोमांटिक माहौल से भरा हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे यह कमरा किसी प्यार करने वाले जोड़े के लिए सजाया गया हो।

स्टाफ हमें बार-बार नवविवाहित दंपति बोल रहा था। भाभी की शर्म और मेरी बेचैनी दोनों बढ़ रही थीं।

रात को भाभी नहाने चली गईं। मैं बेड पर लेटा टीवी देख रहा था।

थोड़ी देर बाद भाभी बाहर आईं तो उनकी नाइट ड्रेस में पानी की बूँदें चमक रही थीं। नाइट ड्रेस उनके ताजा नहाए शरीर पर गीली होकर चिपक गई थी। इससे उनकी भारी-भारी चूचियाँ और गोल-गोल मोटी गांड़ की पूरी आकृति साफ नजर आ रही थी। पानी की बूँदें उनके लंबे काले बालों से टपक कर नाइट ड्रेस पर गिर रही थीं और चमक रही थीं। उन्होंने वॉशरूम का दरवाजा खुला छोड़ दिया था। मैं उनकी ताजा नहाई हुई खुशबू महसूस कर सकता था।

मैं उठा और वॉशरूम में गया। फर्श पर एक हल्की गीली पैंटी पड़ी हुई थी। काला रंग, फीता वाली। भाभी की पैंटी।

मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने पैंटी उठाई। उसमें भाभी की चूत की महक अभी भी ताजा थी। गीली जगह पर उँगली फिराई तो चिपचिपाहट लगी।

पैंटी को हाथ में लेकर मैंने उसे ध्यान से देखा। काला फीता वाला कपड़ा बहुत नाजुक और नरम था। बीच की जगह पर हल्का सा गीला धब्बा था। मैंने उसे अपनी नाक के पास लाया और गहरी सांस ली। भाभी की चूत की महक ताजा और मादक थी। जैसे उन्होंने अभी अभी नहाया हो लेकिन चूत की खुशबू अभी भी बनी हुई थी।

गीली जगह पर उँगली फिराई तो चिपचिपाहट लगी। उँगली पर भाभी की चूत का रस चिपक गया था। मैंने उँगली को सूँघा। महक और भी तेज हो गई। मेरा लंड अब पैंट के अंदर और भी सख्त हो गया था। वह फड़फड़ा रहा था और दर्द करने लगा था।

मैंने पैंटी के गीले हिस्से को अपनी जीभ से चाटा। भाभी की चूत का रस मेरी जीभ पर लगा। स्वाद नमकीन-मीठा और बहुत मादक था। जीभ घुमाकर मैंने पूरे गीले धब्बे को चाट लिया। इससे मेरा लंड और भी सख्त हो गया।

भाभी कमरे में थीं इसलिए मैं कमरे में हस्तमैथुन नहीं कर सकता था। मैं वॉशरूम में ही रुका। पैंटी को चेहरे पर रखकर सूँघने लगा। आँखें बंद कीं और कल्पना करने लगा कि भाभी की नंगी चूत मेरे सामने है।

आँखें बंद करते ही मेरे मन में भाभी की नंगी तस्वीर उभर आई। जैसे वे अभी शावर से बाहर आई हों। उनके गोरे शरीर पर पानी की बूंदें चमक रही हों। उनकी भारी चूचियाँ पानी से भीग कर थोड़ी लटक रही हों। उनके निप्पल सख्त हो चुके हों। उनके पेट पर पानी बह रहा हो और जांघों के बीच उनकी गीली चूत चमक रही हो।

एक हाथ से लंड पकड़कर जोर-जोर से झटके मारने लगा। मेरा मोटा लंड हाथ में फड़फड़ा रहा था। मैंने उसे तेजी से ऊपर नीचे करना शुरू किया। आह्ह्ह… यामिनी भाभी… मेरे मुँह से निकल गया।

मैंने पैंटी को अपने लंड पर रगड़ना शुरू किया। फीता वाला कपड़ा मेरे लंड की उभरी नसों पर घिस रहा था। गीली जगह को लंड के लाल सिरे पर दबाया और रगड़ा। इससे बहुत तेज मज़ा आ रहा था। मैंने पैंटी को लंड के चारों ओर लपेटकर ऊपर-नीचे करना शुरू किया।

मैंने अपनी मुट्ठी को और भी तेजी से चलाया। लंड का सिरा लाल हो गया था। उसमें से थोड़ा सा चिपचिपा पानी निकल रहा था जो मेरी मुट्ठी को गीला कर रहा था। मेरे अंडकोष सिकुड़ रहे थे। मैं कल्पना कर रहा था कि भाभी की चूत मेरे लंड को निगल रही है।

आह्ह्ह… भाभी… तुम्हारी चूत की महक… आह्ह्ह… जोर से… मेरे मुँह से बार-बार निकल रहा था। मेरा शरीर गर्म हो गया था। पसीना निकल रहा था। लंड अब पूरी तरह फूल गया था। नसें उभर आई थीं।

कुछ ही मिनटों में गरम-गरम पानी की तरह वीर्य निकल पड़ा। सीधे भाभी की पैंटी पर। मेरा शरीर काँप उठा। लंड से मोटा मोटा गर्म वीर्य निकल कर पैंटी पर फैल गया। मैंने और भी जोर से झटके मारे। पहला झटका बहुत तेज था। दूसरा और तीसरा भी उतना ही जोरदार। पूरा पैंटी का कपड़ा वीर्य से भीग गया।

मैंने पैंटी को मोड़कर रख दिया, वॉशरूम से बाहर आया और बेड पर लेट गया। साँसें संभालीं। रात भर नींद नहीं आई।

मेरे मन में बार-बार वही दृश्य घूम रहा था। भाभी की पैंटी की ताजा महक, मैंने उसके गीले हिस्से को जीभ से चाटा था, उसका नमकीन-मीठा रस मेरी जीभ पर लगा था। फिर मैंने पैंटी को अपने मोटे लंड पर रगड़ा था, फीता उसके नसों पर घिस रहा था, गीली जगह को लंड के सिरे पर दबाया था। आखिर में गरम-गरम वीर्य की मोटी धारें सीधे पैंटी पर निकली थीं। हर बार याद आते ही मेरा लंड फिर से सख्त हो जाता। मैं करवट बदलता लेकिन नींद नहीं आ रही थी।

सुबह एग्जाम था। भाभी तैयार होकर निकलीं। एग्जाम सेंटर के बाहर मैं इंतजार करता रहा। जब भाभी बाहर आईं तो चेहरा चमक रहा था। एग्जाम अच्छा हो गया करण! उन्होंने कहा और हल्के से मेरी बाँह पकड़ ली।

उनकी उँगलियाँ मेरी बाँह पर हल्का दबाव डाल रही थीं। उनकी खुशबू अभी भी ताजा नहाई हुई जैसी थी। मैं उनकी चमकती आँखों में देख रहा था। वे बहुत खुश लग रही थीं।

चलो, फिल्म देख लेते हैं। चाँद मेरा दिल चल रही है, भाभी ने कहा।

थिएटर में अंधेरा था। हम दोनों पास-पास बैठे। फिल्म शुरू हुई। रोमांटिक सीन आते ही भाभी थोड़ी बेचैन होने लगीं। एक हॉट सीन में हीरोइन के कपड़े उतरते दिखे तो भाभी की साँसें तेज हो गईं।

अचानक ट्रेन का झटका… भाभी का शरीर मेरी तरफ झुक गया और उनकी भारी चूची मेरी बाँह से दब गई। मैंने हिलने की कोशिश नहीं की। भाभी भी वैसे ही रुकी रहीं।

उनकी भारी चूची मेरी बाँह पर पूरी तरह दब गई थी। वह मुलायम, गर्म और भारी थी। कपड़े के ऊपर से भी उसका कोमल स्पर्श साफ महसूस हो रहा था। जैसे उसका वजन मेरी बाँह पर फैल रहा हो। मैंने साँस रोक ली। भाभी की साँसें मेरे कान के पास आ रही थीं। गर्म-गर्म साँस मेरे कान को छू रही थी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। वह पैंट के अंदर फड़फड़ा रहा था।

फिल्म खत्म होने तक हम दोनों चुप थे, लेकिन हवा में कुछ अलग सा वोल्टेज था। भाभी ने अपनी चूची को हटाया नहीं था। मैं भी हिला नहीं। हम दोनों उस दबाव को महसूस कर रहे थे। मेरा लंड अब और भी सख्त हो चुका था।

होटल लौटे। भाभी ने कहा, मैं चेंज करके आती हूँ। जब वो बाथरूम से निकलीं तो मेरा दम घुटने लगा। उन्होंने एक काला ट्रांसपैरेंट मैक्सी पहन रखा था। अंदर ब्रा नहीं थी। चूचियों के गहरे गुलाबी निप्पल साफ दिख रहे थे।

मैक्सी इतनी पतली और पारदर्शी थी कि कमर से नीचे की हर चीज की आउटलाइन नजर आ रही थी। उनकी मोटी गांड़ की गोलाई, जांघों के बीच की हल्की उभार, सब कुछ साफ दिख रहा था। नाइट लैंप की हल्की रोशनी में उनका पूरा शरीर चमक रहा था। गुलाबी निप्पल मैक्सी के पार दिख रहे थे। वे थोड़े सख्त लग रहे थे।

हम दोनों एक ही बड़े बेड पर लेटे। मैं दीवार की तरफ मुंह करके लेटा था। कोशिश कर रहा था कि सो जाऊँ, लेकिन मेरा लंड तना हुआ था। भाभी की पैंटी की याद, फिल्म का सीन, और अब ये ट्रांसपैरेंट मैक्सी। सब मिलकर मुझे पागल कर रहा था।

अचानक… एक नरम, गर्म हाथ मेरी नंगी छाती पर आ गया। मैं साँस रोककर लेटा रहा। भाभी का हाथ धीरे-धीरे मेरी छाती पर घूमने लगा। उनकी साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं।

उनकी हथेली मेरी छाती पर हल्का दबाव डाल रही थी। उँगलियाँ धीरे-धीरे घूम रही थीं जैसे वे मेरी त्वचा को महसूस कर रही हों। मेरी छाती पर उनकी गर्माहट फैल रही थी। मेरा दिल जोर से धड़क रहा था। नीचे मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया और पैंट के अंदर फड़फड़ाने लगा। भाभी की गर्म साँसें मेरी गर्दन पर बार-बार पड़ रही थीं। हर साँस से मेरी त्वचा पर हल्की सी गुदगुदी हो रही थी।

मैंने धीरे से करवट ली। अंधेरे में हमारी आँखें मिल गईं। भाभी कुछ बोलीं नहीं। बस मेरे करीब आ गईं। उनकी भारी चूचियाँ मेरी छाती से सट गईं।

उनकी आँखें अंधेरे में चमक रही थीं। वे मेरी ओर देख रही थीं। मैंने भी उनकी आँखों में देखा। भाभी धीरे से मेरे और करीब खिसक आईं। उनकी भारी चूचियाँ मेरी छाती से पूरी तरह सट गईं। वे मुलायम, गर्म और भारी थीं। कपड़े के ऊपर से भी उनका वजन और कोमलता साफ महसूस हो रही थी। मेरा लंड अब और भी सख्त हो चुका था।

करण… उनकी आवाज काँप रही थी। मैंने उनका चेहरा अपने हाथों में लिया और होंठों पर अपना मुँह रख दिया। पहले धीरे-धीरे, फिर भूखे की तरह। भाभी भी मेरे होंठ चूसने लगीं। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई। हम दोनों साँस लेना भूल गए।

मैंने उनके होंठों को पहले धीरे से चूमा। फिर अपना मुँह जोर से दबाया। भाभी के होंठ नरम और गर्म थे। वे भी मेरे होंठ चूसने लगीं। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुसकर मेरी जीभ से मिल गई। हम दोनों की जीभें एक-दूसरे को चाट रही थीं। गीली और गर्म। हमारी साँसें रुक गई थीं। भाभी के मुँह से हल्की सी कराह निकल रही थी। मेरा एक हाथ उनकी कमर पर गया और धीरे से ऊपर खिसकता हुआ उनकी एक भारी चूची को पकड़ लिया।

मैक्सी के ऊपर से ही निप्पल को अँगूठे से रगड़ने लगा। भाभी आह्ह्ह… करके मेरे मुँह में कराह गईं।

मैंने उनकी भारी चूची को हाथ में लिया। वह मेरी मुट्ठी में पूरी तरह नहीं समा रही थी। मैक्सी के पतले कपड़े के ऊपर से भी उसकी कोमलता महसूस हो रही थी। मैंने अँगूठे से उनके निप्पल को धीरे-धीरे घुमाया। निप्पल सख्त हो चुका था। भाभी मेरे मुँह में आह्ह्ह… करके कराह गईं। उनकी कराह मेरे मुँह में गूँज रही थी। मेरा लंड अब दर्द करने लगा था।

मैंने मैक्सी ऊपर खींची। उनकी नंगी चूचियाँ बाहर आ गईं। चाँदनी जैसी गोरी, भारी और लटकती हुई। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। दूसरा हाथ उनकी दूसरी चूची को मसल रहा था। भाभी मेरे बालों में हाथ फेर रही थीं और मेरे सिर को अपनी छाती से दबा रही थीं।

मैक्सी ऊपर खींचते ही उनकी दोनों चूचियाँ बाहर आ गईं। वे गोरी, भारी और थोड़ी लटकती हुई थीं। निप्पल गहरे गुलाबी रंग के थे। मैंने एक निप्पल अपने मुँह में लिया और जोर से चूसने लगा। जीभ से उसे घुमाया। भाभी के शरीर में हल्का सा झटका लगा। दूसरा हाथ मैंने उनकी दूसरी चूची पर रखा और उसे मसलने लगा। उँगलियाँ उसके मुलायम मांस में धँस रही थीं। भाभी मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थीं। वे मेरे सिर को जोर से अपनी छाती से दबा रही थीं।

मैंने निप्पल को मुँह में लेकर जोर से चूसा। जीभ से उसे घुमाया और कभी-कभी हल्के दाँतों से दबाया। भाभी के शरीर में हल्का सा झटका लगा। उनकी चूची मेरे मुँह में और भी सख्त हो गई। दूसरा हाथ मैंने उनकी दूसरी चूची पर रखा। उँगलियाँ उसके मुलायम और भारी मांस में गहराई तक धँस रही थीं। मैं उसे मसल रहा था। भाभी मेरे बालों में उँगलियाँ फेर रही थीं। वे मेरे सिर को जोर से अपनी छाती से दबा रही थीं।

देवर जी… धीरे… आह्ह्ह… मैं और जोर से चूसने लगा। भाभी की चूचियाँ मेरे मुँह में फूल रही थीं। नीचे उनका शरीर काँप रहा था। मैंने हाथ नीचे सरकाया। मैक्सी के नीचे उनकी जांघों के बीच हाथ डाला। भाभी की चूत पूरी गीली हो चुकी थी। पैंटी नहीं पहनी थीं। मेरी उँगलियाँ सीधे उनके गीले, फूले हुए चूत के होठों पर पहुँच गईं।

उफ्फ… करण… वहाँ मत छुओ… भाभी बोलीं, लेकिन पैर थोड़े खोल दिए। मैंने उनकी चूत के होठों को उँगलियों से अलग किया और बीच की गीली दरार में उँगली घुसा दी। भाभी का शरीर झटका खा गया। आह्ह्ह… देवर जी… मैं उँगली अंदर-बाहर करने लगा। चूत से चिपचिपाहट की आवाजें आने लगीं। भाभी मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ चुकी थीं और जोर से दबा रही थीं।

उनके गीले चूत के होठ फूले हुए थे। मैंने उन्हें धीरे से अलग किया। बीच में से गर्म और चिपचिपी दरार दिख रही थी। मैंने एक उँगली वहाँ रखी और धीरे से अंदर घुसा दी। भाभी का शरीर झटका खा गया। आह्ह्ह… देवर जी… उनकी आवाज काँप रही थी। मैंने उँगली अंदर-बाहर करना शुरू किया। चूत से गीली चिपचिपाहट की आवाजें साफ आ रही थीं। भाभी मेरे लंड को पैंट के ऊपर से पकड़ चुकी थीं। वे उसे जोर से दबा रही थीं।

निकालो… अपना लंड निकालो… भाभी ने फुसफुसाया। मैंने अपनी पैंट नीचे खिसकाई। मेरा मोटा, लंबा लंड बाहर आ गया। भाभी ने उसे हाथ में लिया। उनकी उँगलियाँ मेरे लंड को नापने लगीं। इतना… इतना मोटा… उनकी आवाज में हैरानी थी।

भाभी ने मेरे मोटे लंड को दोनों हाथों में पकड़ लिया। उनकी उँगलियाँ उसके चारों ओर लिपट रही थीं लेकिन पूरी तरह नहीं मिल रही थीं। वे उसे ऊपर-नीचे हिला रही थीं। लंड की नसें उभरी हुई थीं और सिरा लाल हो रहा था। भाभी की आँखें चौड़ी थीं।

भाभी नीचे झुकीं और मेरे लंड को मुँह में ले लिया। गर्म, गीला मुँह… उनकी जीभ मेरे लंड के नीचे की नस पर घूमने लगी। मैं सिर पीछे झुकाकर कराह उठा। भाभी जोर-जोर से चूस रही थीं। उनका मुँह पूरा भर रहा था। मैंने उनके बाल पकड़कर सिर आगे-पीछे करने लगा।

उनके गर्म और गीले होंठ मेरे लंड को कसकर पकड़ रहे थे। जीभ नीचे की मोटी नस पर घूम रही थी। भाभी जोर-जोर से चूस रही थीं। उनके गाल अंदर की ओर खिंच रहे थे। मेरा लंड उनका मुँह भर रहा था। मैंने उनके बाल पकड़ लिए और उनका सिर आगे-पीछे करना शुरू किया। आह्ह्ह भाभी… चूसो… और जोर से…

भाभी ने मेरे लंड को और गहराई तक मुँह में लिया। गले तक। आँखों से आँसू आ गए लेकिन वो रुकीं नहीं।

फिर मैंने भाभी को ऊपर खींचा और उन्हें पीठ के बल लिटा दिया। मैक्सी पूरी तरह उतार दी। भाभी पूरी तरह नंगी मेरे सामने लेटी थीं। मैंने उनकी टाँगें फैलाईं और अपना चेहरा उनकी चूत पर रख दिया। चूत की गंध ने मुझे और पागल कर दिया। मैंने जीभ बाहर निकाली और उनके चूत के होठों पर चाटने लगा। भाभी का शरीर उछल गया। आह्ह्ह… देवर जी… क्या कर रहे हो… उफ्फ…

भाभी की टाँगें मेरे कंधों पर रखी थीं। मैंने उनके फूले हुए चूत के होठों को जीभ से चाटा। फिर उन्हें मुँह में लेकर चूसने लगा। भाभी का शरीर उछल गया। आह्ह्ह… देवर जी… क्या कर रहे हो… उफ्फ… उनकी चूत से गर्म पानी निकल रहा था। मैंने जीभ अंदर घुसा दी।

मैंने उनकी चूत के फूले हुए होठों को चूसना शुरू किया और जीभ अंदर घुसा दी। भाभी की चूत का पानी मेरे मुँह में भर रहा था। मैं जोर-जोर से चाट रहा था। भाभी मेरे सिर को दोनों हाथों से दबा रही थीं। उनकी टाँगें काँप रही थीं।

करण… अब और नहीं… अंदर डालो… अपना मोटा लंड मेरी चूत में डालो… मैं उठा। भाभी की टाँगें फैलाईं और अपना मोटा लंड उनकी गीली चूत पर रखा। सिर को होठों पर रगड़ने लगा। भाभी अधीर हो रही थीं। डालो… जोर से डालो देवर जी…

मैंने एक जोरदार झटका मारा। मेरा आधा लंड उनकी तंग चूत में घुस गया। भाभी चीख पड़ीं। आह्ह्ह… मर गई… इतना मोटा… मैं रुका नहीं। दूसरा झटका… पूरा लंड उनकी चूत में समा गया। भाभी की चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी। मैंने झटके मारने शुरू कर दिए। हर झटके के साथ भाभी की चूचियाँ उछल रही थीं। कमरा उनकी चीखों और चूत की चपचपाहट की आवाजों से गूँज रहा था।

मेरा मोटा लंड उनकी तंग चूत में आधा घुसते ही भाभी चीख पड़ीं। आह्ह्ह… मर गई… इतना मोटा… उनकी चूत मेरे लंड को इतनी जोर से कस रही थी कि हिलना मुश्किल हो रहा था। लेकिन मैं रुका नहीं। दूसरे जोरदार झटके के साथ मेरा पूरा लंड उनकी गीली चूत में समा गया। भाभी का शरीर काँप उठा। उनकी चूत अब मेरे मोटे लंड को पूरी तरह निगल चुकी थी।

मैंने झटके मारना शुरू कर दिया। हर जोरदार ठोकर के साथ भाभी की भारी चूचियाँ ऊपर-नीचे उछल रही थीं। कमरा उनकी चीखों और चूत की चपचपाहट की तेज आवाजों से गूँज रहा था। भाभी की चूत से सफेद चिपचिपा पानी निकल रहा था और मेरे लंड पर फैल रहा था।

देवर जी… जोर से… और जोर से चोदो मुझे… भाभी चिल्ला रही थीं। मैं और तेज हो गया। भाभी की कमर पकड़कर उन्हें नीचे से ऊपर की तरफ ठोकने लगा। उनकी चूत से सफेद पानी निकल रहा था और मेरे लंड पर फैल रहा था।

भाभी की चूत अब पूरी तरह गीली और फिसलन भरी हो चुकी थी। सफेद चिपचिपा पानी उनके अंदर से निकलकर मेरे लंड पर फैल रहा था। मैंने उनकी कमर दोनों हाथों से पकड़ लिया और उन्हें नीचे से ऊपर की तरफ जोर-जोर से ठोकने लगा। हर ठोकर पर भाभी की भारी चूचियाँ हिल रही थीं।

अचानक भाभी ने मुझे रोका। आँखों में आँसू थे। करण… पंकज… पंकज भाईया का लंड बहुत छोटा है… वो दो मिनट भी नहीं चला पाते… मैं कभी संतुष्ट नहीं हुई… आज पहली बार… आह्ह्ह…

भाभी की आँखों में आँसू थे। उनकी आवाज काँप रही थी। करण… पंकज भाईया का लंड बहुत छोटा है… वो दो मिनट भी नहीं चला पाते… मैं कभी संतुष्ट नहीं हुई… आज पहली बार… आह्ह्ह… उनकी बात सुनकर मेरा खून खौल उठा।

मैंने भाभी को पलट दिया। अब डॉगी स्टाइल में। भाभी घुटनों के बल खड़ी हुईं। मैंने पीछे से उनका मोटा लंड उनकी चूत में घुसा दिया और जोर-जोर से ठोकने लगा। उनकी गांड़ मेरे पेट से टकरा रही थी। हर ठोकर पर भाभी उफ्फ… आह्ह्ह… देवर जी… और गहरा… चिल्ला रही थीं।

मैंने भाभी को तेजी से पलट दिया। अब वे घुटनों के बल खड़ी थीं। उनकी मोटी गांड़ मेरी तरफ थी। मैंने पीछे से अपना मोटा लंड उनकी गीली चूत में घुसा दिया। पूरा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। भाभी चीख पड़ीं। उफ्फ… आह्ह्ह… देवर जी… और गहरा…

मैंने उनकी मोटी गांड़ पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू कर दिया। हर ठोकर पर उनकी गांड़ मेरे पेट से टकरा रही थी। भाभी की चूचियाँ नीचे लटककर हिल रही थीं। कमरा अब उनकी तेज चीखों और चूत की जोरदार चपचपाहट की आवाजों से गूँज रहा था।

हर ठोकर पर भाभी उफ्फ… आह्ह्ह… देवर जी… और गहरा… चिल्ला रही थीं।

मैंने उनकी गांड़ के दोनों तरफ हाथ मारा और और तेजी से चोदने लगा। भाभी का सिर तकिये में दबा हुआ था। उनकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी।

उनकी मोटी गांड़ लाल हो रही थी। मैंने दोनों हाथों से जोर से थप्पड़ मारे। भाभी चीख पड़ीं। उफ्फ… आह्ह्ह… देवर जी… और गहरा… चिल्ला रही थीं। मैं और भी तेज हो गया। हर जोरदार ठोकर के साथ मेरा मोटा लंड उनकी चूत में पूरी गहराई तक घुस रहा था। भाभी का सिर तकिये में दबा हुआ था। उनकी चूत बार-बार सिकुड़कर मेरे लंड को कस रही थी।

मैं झड़ने वाली हूँ देवर जी… आह्ह्ह… चोदो मुझे… चोदो… भाभी का शरीर काँप उठा। उनकी चूत ने मेरे लंड को और कस लिया। गर्म पानी की तरह निकल पड़ा। मैं भी रुक न सका। आखिरी जोरदार झटकों के साथ अपना सारा वीर्य भाभी की चूत में भर दिया।

भाभी का शरीर अचानक काँप उठा। आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ देवर जी… चोदो मुझे… चोदो… उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से कस लिया कि हिलना मुश्किल हो गया। फिर गर्म पानी की तरह चिपचिपा रस उनके अंदर से निकल पड़ा। वह मेरे लंड पर बह रहा था। भाभी का पूरा शरीर झटके खा रहा था।

मैं भी रुक न सका। मेरे शरीर पर अब कोई काबू नहीं था और मैंने अपनी कमर को आखिरी बार जोर से आगे बढ़ाया। मेरा मोटा लंड भाभी की गीली चूत में पूरी तरह समा गया और उसका सिरा उनकी गर्भाशय की नरम दीवार से टकरा गया। अचानक मेरे अंदर से गर्म वीर्य की पहली मोटी धार निकली और भाभी की चूत के अंदर फैल गई। मेरा लंड फड़फड़ा रहा था और हर फड़फड़ाहट के साथ और अधिक वीर्य बाहर निकल रहा था। मोटी-मोटी धारें एक के बाद एक उनकी कसी चूत में भरती जा रही थीं। भाभी की चूत अभी भी मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी और उसकी मांसपेशियां मेरे लंड को निचोड़ रही थीं।

मुझे अपनी गेंदों में तेज दबाव महसूस हो रहा था जो हर पल्स के साथ कम हो रहा था। भाभी की सांसें भारी हो गई थीं और उन्होंने मेरी पीठ को अपनी उंगलियों से कस लिया था। उनकी चूत के अंदर का गर्म वातावरण मेरे वीर्य को और भी तेजी से बाहर निकाल रहा था। कुछ वीर्य उनके बाहर बहकर मेरे लंड के आधार पर इकट्ठा हो रहा था और वहां से नीचे टपक रहा था। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली थीं और सिर्फ इस तीव्र संवेदना का मजा ले रहा था। भाभी के शरीर में भी ऑर्गेज्म के झटके आ रहे थे और उनकी चूत बार-बार सिकुड़ रही थी।

हम दोनों पसीने से तर होकर गिर पड़े। भाभी मेरी छाती पर सिर रखकर लेट गईं। उनके पूरे शरीर से पसीने की बूंदें टपक रही थीं और मेरी त्वचा उनके संपर्क में फिसलन भरी हो गई थी। मेरे लंड से अभी भी उनका चूत का पानी और मेरा वीर्य मिलकर बह रहा था। वो गाढ़ा और चिपचिपा तरल हमारी जांघों के बीच से बहता हुआ बिस्तर की चादर पर फैल रहा था। भाभी की सांसें मेरी छाती पर पड़ रही थीं और मैं उनके दिल की धड़कन महसूस कर सकता था। उनके स्तन मेरी छाती से दबकर चपटे हो रहे थे और उनके निप्पल सख्त होकर मुझे छू रहे थे।

भाभी की उंगलियां मेरी पीठ पर हल्के से घूम रही थीं और वो मेरी त्वचा को सहला रही थीं। मैंने अपनी बाहें उनके शरीर के चारों ओर लपेट ली थीं और उन्हें अपनी छाती से चिपका लिया था। उनके बाल मेरे चेहरे को छू रहे थे और उनकी खुशबू पसीने की गंध के साथ मिल रही थी। मेरे लंड से निकलने वाला वीर्य अब भी रिस रहा था और भाभी की चूत से बाहर आकर मेरे लंड को और फिसलन भरा बना रहा था। दोनों के शरीर एक दूसरे से चिपके हुए थे और गर्मी से भरे हुए थे।

भाभी ने धीरे से अपना सिर उठाया और मेरे कान के पास अपना मुंह ले आईं। उनकी गर्म सांस मेरे कान में पड़ रही थी और उनके होंठ मेरे कान की लोब को छू रहे थे। उन्होंने धीरे से और कांपती हुई आवाज में कहा, “आह्ह… करण… अभी खत्म नहीं हुआ… म्म्म… अभी और चुदाई चाहिए असली मर्द के लंड से… उफ्फ… कोई बहाना बना कर एक-दो दिन यहीं रुकते हैं और अच्छे से हनीमून बनाते हैं…”

और उन्होंने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया जो फिर से खड़ा होने लगा था।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।