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दीदी 2 लण्ड से खेल रही थी, मैंने भी चोद डाला

Threesome sex story, Bade lund se gand chudai sex story: हेलो फ्रेंड्स, मेरा नाम राकेश है। मेरी उम्र २१ साल है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ।

मेरे घर में मेरे पेरेंट्स और दो बहनें हैं। बड़ी वाली की शादी हो रखी है। दोनों ही बहनें मुझसे बड़ी हैं और बहुत मस्त सेक्सी हैं। बड़ी बहन, जिसकी शादी हो रखी है, उसका नाम कृतिका है। उसकी हाइट ५’४″ है और फिगर ३६-२८-३८ है। छोटी का नाम शीतल है। उसकी हाइट ५’५″ है और फिगर ३४-२७-३६ है। उसकी गांड बिलकुल मस्त गोल-गोल है, इतनी परफेक्ट कि देखते ही हाथ खुद-ब-खुद बढ़ जाता है।

कृतिका दीदी अपने हसबैंड के साथ जयपुर में रहती है। ये स्टोरी मेरी और मेरी बहन शीतल की है। शीतल कॉलेज जाती है। वो एमबीए कर रही है। मैंने नया कॉलेज जॉइन किया था और नए फ्रेंड्स भी बन गए थे। वो सब सेक्स की बातें करते रहते थे, तो मैं भी बहुत एक्साइटेड हो जाता था, लंड तुरंत खड़ा होने लगता था।

मेरे घर में सिर्फ दो बेडरूम हैं। एक में मम्मी-पापा सोते हैं और दूसरा हम दोनों भाई-बहन का है। मेरी फैमिली काफी मॉडर्न टाइप की है। इसलिए मेरी बहन की ड्रेस भी बहुत मॉडर्न होती है। वो जब टाइट टॉप और लेगिंग्स या शॉर्ट्स पहनती है तो उसकी गांड और चूचियां एकदम उभरकर सामने आ जाती हैं। चूचियां इतनी भरी-भरी और गोल दिखती हैं कि जी करता है अभी दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से मसल दूं, निप्पल्स को चूस लूं। लेकिन वो मेरी बहन है, इसलिए मैं ऐसा नहीं कर सकता था। फिर भी मन में हजारों गंदे ख्याल आते रहते थे।

हम दोनों भाई-बहन काफी ओपन थे और एक ही रूम में सोते थे। रात को जब वो सोने के लिए तैयार होती, लाइट्स कम करके लेटती, तो मेरी नजर बार-बार उसकी गांड और चूचियों पर अटक जाती। कभी वो करवट लेकर सोती तो गांड की गोलाई और ज्यादा साफ दिखती। कभी टाइट नाइट-सूट में चूचियां ऊपर-नीचे होतीं तो सांस रुक जाती थी। कॉलेज में भी पूरा दिन मेरे दिमाग में शीतल दीदी की सेक्सी बॉडी घूमती रहती थी।

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एक बार पापा का ट्रांसफर २ महीने के लिए बिहार हो गया। उसी दौरान नानी जी की डेथ हो गई। मम्मी को भी १३ दिन के लिए मामा जी के घर जाना पड़ गया। मम्मी ने हमें बहुत समझाया, घर संभालने को कहा और चली गईं। अब घर में सिर्फ मैं और मेरी बहन शीतल ही थे।

मैंने सोचा कि ये मौका बहुत अच्छा है दीदी को चोदने का। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने तुरंत प्लान बनाने शुरू कर दिए। नेक्स्ट डे कॉलेज में बिलकुल मन नहीं लगा। मैं १०:०० बजे ही घर वापस आ गया। जैसे ही गली में पहुंचा, मैंने देखा कि एक कार हमारे घर के बाहर खड़ी है। मैंने सोचा कि इस टाइम कौन आया होगा। मैंने बाइक साइड में लगा दी और चुपचाप अपनी चाबी से मुख्य दरवाजा खोलकर अंदर चला गया।

अंदर कोई नहीं दिखाई दिया। पूरा घर शांत था। तभी मुझे किसी आदमी की भारी आवाज सुनाई दी। वो आवाज मम्मी के बेडरूम की तरफ से आ रही थी। मैं धीरे-धीरे उस तरफ बढ़ा और बेडरूम की खुली हुई विंडो से अंदर झांका। बेड पर दो आदमी बैठे हुए थे और कोल्ड ड्रिंक के गिलास हाथ में लिए पी रहे थे। शीतल दीदी उनके सामने खड़ी थी। वो दोनों आदमी मिश्रा और सलीम थे — प्रॉपर्टी डीलर, हमारी ही कॉलोनी में रहते हैं।

ऐसा लग रहा था कि वो दोनों अभी-अभी आए हैं और दीदी ने उन्हें कोल्ड ड्रिंक सर्व की है। मैं चुपचाप खिड़की के पास खड़ा होकर उनकी बातें सुनने लगा। उनमें से एक आदमी, शायद मिश्रा, दीदी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला, “तुम आज बहुत सेक्सी लग रही हो। जी भरके चोदूंगा साली तुझे।”

उसकी ये बात सुनकर मुझे बहुत गुस्सा आया लेकिन फिर मैंने सोचा पूरा सीन ही क्यों न देखा जाए। मेरी समझ में ये नहीं आ रहा था कि दीदी इन दोनों सांड जैसे लोगों से कैसे पट गई। वो दोनों तो दीदी की चूत का भोसड़ा बना देंगे, इतनी बेरहमी से चोदेंगे कि दीदी की चूत फट जाएगी।

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तभी उस मिश्रा ने दीदी का हाथ जोर से पकड़ लिया और अपनी ओर तेजी से खींचा। दीदी हल्के से लड़खड़ाई और सीधे उसकी गोद में जा बैठी। मिश्रा की मोटी-मोटी जांघों पर दीदी की नंगी जांघें टिकी हुई थीं। दीदी ने थोड़ा घबराते हुए मिश्रा से पूछा, “ये दूसरा कौन है?” मिश्रा ने हंसते हुए कहा, “मेरा फ्रेंड है यार, अच्छा आदमी है।” और उसी पल उसने दीदी की दोनों चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। दीदी की चूचियां ब्रा में दबकर ऊपर उठ गईं और मिश्रा की उंगलियां गहरे दबाव से उन्हें रगड़ रही थीं।

दीदी बोली, “क्या कर रहे हो यार, पहले इसे तो बाहर भेजो ना।” लेकिन मिश्रा ने अपनी भारी आवाज में कहा, “साली रंडी, आज हम दोनों ही तेरी चुदाई करेंगे। तुझे दो-दो लंड एक साथ मिलेंगे, मजा आएगा।” दीदी की आंखें थोड़ी फैल गईं और वो बोली, “नहीं यार, उस दिन का दर्द तो अभी भी ठीक नहीं हुआ है और आज दो-दो… मैं नहीं कर पाऊंगी।” ये सुनकर मेरा माथा ठनका। मतलब दीदी पहले भी मिश्रा से चुद चुकी है, कई बार चुदाई हो चुकी है इनके साथ।

फिर मिश्रा ने जेब से एक छोटी सी गोली निकाली और दीदी के मुंह के पास ले जाकर बोला, “ये खा लो, दर्द बिल्कुल भी नहीं होगा। बस थोड़ा मजा आएगा।” दीदी ने थोड़ा हिचकिचाते हुए भी वो टैबलेट मुंह में डाल ली और पानी के साथ निगल गई। उसके बाद दीदी मिश्रा से विनती करने लगी, “प्लीज यार, मान जाओ ना… फिर कभी कर लेना। आज नहीं।” लेकिन मिश्रा ने सख्ती से कहा, “चल साली, चुप कर। बोला ना अब दर्द नहीं होगा।” और अगले ही पल उसने दीदी को जोर से बेड पर पटक दिया।

दीदी पीठ के बल गिर गई और मिश्रा ने तुरंत उसकी दोनों चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही बेरहमी से मसलना शुरू कर दिया। उंगलियां इतनी जोर से दबा रहा था कि दीदी की चूचियां ब्रा में फंसकर लाल हो गईं। तभी सलीम भी बेड पर खड़ा हो गया और पीछे से दीदी की गांड को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से मसलने लगा। दीदी की गांड की गोलाई दबने से फैल रही थी और उसके मुंह से “उह… उह…” की दबी हुई आवाजें निकल रही थीं।

सलीम ने कहा, “नंगी तो कर साली को जल्दी।” मिश्रा ने दीदी को फिर से खड़ा किया। पहले उसने दीदी का टाइट टॉप ऊपर से उतारा, फिर जीन्स की बटन खोलकर नीचे सरका दिया। जीन्स घुटनों तक आ गई और दीदी अब सिर्फ काली लेस वाली ब्रा और पेंटी में थी। वाउ, दीदी को पहली बार इस तरह ब्रा-पेंटी में देखा था मैंने। क्या मस्त लग रही थी। उसकी बॉडी बिल्कुल साफेद, चिकनी और चमकदार थी। चूचियां ब्रा में भरी हुई, निप्पल्स ब्रा की सतह पर उभरे हुए। गांड इतनी गोल और भरी हुई कि पेंटी उसमें आधी धंसी हुई लग रही थी।

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सलीम ने पीछे से आकर दीदी की गांड को फिर से दबाया, उंगलियां पेंटी के किनारे में डालकर उसे धीरे-धीरे नीचे सरकाया और पूरी तरह उतार दिया। अब दीदी की चिकनी, गुलाबी गांड पूरी नंगी हो गई। मिश्रा ने आगे से ब्रा की हुक खोल दी और ब्रा भी फेंक दी। दीदी की बड़ी-बड़ी चूचियां आजाद होकर लटक गईं, निप्पल्स गुलाबी और सख्त। मिश्रा ने तुरंत एक चूची मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया, जीभ से निप्पल को घुमाता हुआ, दूसरी चूची को हाथ से मसलता हुआ। सलीम पीछे से गांड को चाट रहा था, उंगलियां गांड के चीर में फेर रहा था। दोनों दीदी के जिस्म से खेल रहे थे और दीदी अब हल्के-हल्के सिसकारियां ले रही थी, मजा लेने लगी थी।

फिर मिश्रा और सलीम ने भी अपने कपड़े उतार दिए। दोनों ने शर्ट-पैंट निकालकर सिर्फ अंडरवियर में आ गए। उनके लंड अंडरवियर में से उभरे हुए थे, मोटे और सख्त। दीदी उन दोनों बड़े-बड़े नंगे सांडों के बीच में बच्ची सी लग रही थी। मिश्रा ने दीदी को पकड़कर अपने ऊपर लिटाया, दीदी की पीठ उसकी छाती से सटी हुई। मिश्रा बोला, “साली अब नाटक मत कर, एंजॉय करने दे और खुद भी मजा ले।” दीदी ने धीमी आवाज में कहा, “कौन सी टैबलेट दे दी तुमने… मेरा सर घूम रहा है, सब कुछ हल्का लग रहा है।”

तभी सलीम बोला, “साली अभी पूरा असर होने दे, देख फिर तू कैसे चुदवाती है।” और उसने दीदी की दोनों टांगें चौड़ी करके खोल दीं। दीदी की चूत पूरी नंगी हो गई, गुलाबी और थोड़ी गीली। सलीम ने जीभ निकालकर दीदी की चूत को चाटना शुरू कर दिया, क्लिटोरिस पर जीभ घुमाता हुआ, चूत के होंठों को चूसता हुआ। मिश्रा ने दीदी के बूब्स को दोनों हाथों से पकड़ा, निप्पल्स को उंगलियों से मसलता हुआ और दीदी के होंठों पर वाइल्डली किस करने लगा। जीभ अंदर डालकर चूस रहा था। दीदी अब उनका साथ दे रही थी, होंठों से जवाब दे रही थी, शरीर हल्के-हल्के कांप रहा था। शायद टैबलेट का असर हो गया था उस पर।

दीदी ने मिश्रा का अंडरवियर नीचे किया और उसका लंड हाथ में लेकर सहलाने लगी। उसका लंड बहुत बड़ा था ७ इंच का होगा कम से कम। मैं सोच रहा था कि ये दीदी की छोटी सी चूत में कैसे जाएगा।

फिर मिश्रा ने दीदी से बोला चल साली कुटिया अब चूस मेरा लंड। और दीदी का सिर पकड़कर अपने लंड पर ले गया और लंड दीदी के मुंह में घुसा दिया। दीदी उसके लंड को चूसने लगी। दीदी बहुत ही मजा से मिश्रा का लंड ऊपर-नीचे करके चूस रही थी। सलीम दीदी की चूत पूरी खोलके चाट रहा था।

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दीदी की चूत एकदम गुलाबी थी पूरी तरह सेव की हुई। दीदी की चूत से पानी आ रहा था जो उसकी गांड के होल के ऊपर होते हुए बेड पर टपक रहा था। सलीम दीदी की पूरी चूत को मुंह में लेकर चूसने लगा। दीदी की बॉडी अकड़ने लगी और वो मिश्रा का पूरा लंड मुंह में लेने की कोशिश करने लगी। दीदी अब पूरा मजा ले रही थी। वो लंड को किसी पॉर्न स्टार की तरह चूस रही थी।

फिर सलीम ने बोला चल साली कुतीया जरा मेरे लंड को भी तो स्वाद चख ले। और बेड पर लेट गया। मिश्रा खड़ा होके बेड पर पीछे आ गया और दीदी को उल्टा किया और उसकी गांड के होल पर अपना अंगूठा रगड़ने लगा। दीदी एकदम से पीछे मुड़ी और मिश्रा की ओर देखा और एक स्माइल दी।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि जिस दीदी को छूने के बारे में इतना सोचता था वो तो एकदम चुदक्कड़ रंडी निकली जो अपने से दुगनी उम्र के दो आदमियों से चुद रही है।

मैंने मोबाइल निकाला और वीडियो बनाने लगा। सलीम बेड पर सरककर दीदी के आगे आया और बोला चल साली रंडी दिखा अपने मुंह का कमाल। दीदी ने सलीम का अंडरवियर नीचे किया और उसका लंड देखकर एकदम चौंक गई। उसका लंड कम से कम १० इंच का था मोटा सुपड़ा एकदम चिकना।

सलीम बोला क्यों साली रंडी नहीं देखा है ना ऐसा लंड कभी। दीदी ने उसका लंड हाथ में लिया और बोली देखा तो है लेकिन सिर्फ ब्लू मूवीज में असली तो आज ही देखा है। पूरा लंड दीदी के हाथ में भी नहीं आ रहा था। मैंने सोचा कि दीदी इतना बड़ा लंड कैसे चूसेगी और ये लंड जब दीदी की चूत में जाएगा तब उसकी क्या हालत होगी।

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दीदी ने सलीम के लंड का सुपड़ा मुंह में लिया और उसे गीला किया। फिर दीदी उसके लंड के ऊपर थूक-थूक करके गीला किया और अपनी उंगलियों से ऊपर-नीचे करते हुए मुंह में लेने लगी। दीदी सलीम के लंड के सुपड़े को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

मिश्रा ने दीदी को डॉगी स्टाइल में किया और उसकी चूत और गांड को चाटने लगा। दीदी भी पूरे जोश में सलीम का लंड पी रही थी। दीदी डॉगी स्टाइल में थी। अपने दोनों हाथ बेड पर रखकर सलीम का आधा लंड मुंह में लेकर ऊपर-नीचे कर रही थी। और मिश्रा दीदी की चूत और गांड पर अपनी जीभ घुमा रहा था।

वो नजारा किसी ब्लू फिल्म से कम नहीं था बस फर्क इतना था कि पॉर्न एक्ट्रेस की जगह दीदी दो-दो लंडों से मजा ले रही थी।

फिर मिश्रा ने दीदी की लेग्स को थोड़ा खोला और अपना लंड दीदी की चूत पर रखकर ऊपर-नीचे रगड़ने लगा। उसने दीदी की नरम गुलाबी और मोटी लेग्स को अपनी मजबूत उंगलियों से धीरे से अलग किया जिससे दीदी की चूत की फुली हुई गीली लिप्स पूरी तरह से खुलकर सामने आ गईं। दीदी की चूत पहले ही बहुत ज्यादा भीगी हुई थी और उसमें से पारदर्शी रस की छोटी छोटी बूंदें लगातार निकल रही थीं जो चादर पर फैल रही थीं। मिश्रा ने अपना मोटा नसों वाला और पूरी तरह खड़ा लंड दीदी की चूत की गर्म लिप्स पर सेट किया और धीरे धीरे ऊपर से नीचे तक रगड़ने लगा। लंड का गर्म सिरा हर बार दीदी की क्लिटोरिस को दबाते हुए गुजर रहा था जिससे दीदी के पूरे शरीर में तेज सिहरन दौड़ रही थी। हर रगड़ के साथ चूत और लंड के बीच से चिकनी चपचप की आवाजें निकल रही थीं जो कमरे में गूंज रही थीं। दीदी की जांघें अनियंत्रित रूप से कांपने लगीं और उसकी कमर थोड़ी थोड़ी ऊपर उठने लगी जैसे वो और गहरा दबाव महसूस करना चाहती हो। मिश्रा का लंड अब दीदी के रस से पूरी तरह चिकना और चमकदार हो चुका था। दीदी की सांसें भारी हो गई थीं और उसके होंठ हल्के से खुले हुए थे।

दीदी ने सलीम का लंड मुंह से निकाला। उसके मुंह से लार टपक रही थी। वो प्यार से बोली साले कुत्ते क्यों तड़पा रहा है घुसा दे ना अब। दीदी ने सलीम के मोटे और लंबे लंड को अपने गीले मुंह से बाहर खींचा तो एक जोरदार चपाक की आवाज हुई। उसके लाल होठों से मोटी मोटी लार की लंबी डोरियां लंड के साथ जुड़ी हुई थीं जो धीरे धीरे उसके ठोड़ी पर टपक रही थीं और फिर उसके बड़े स्तनों पर गिर रही थीं। सलीम का लंड अब लार से पूरी तरह भीगा और चमकता हुआ था। दीदी की आंखें वासना से भरी हुई थीं और उसके गाल लाल हो रहे थे। वो प्यार से बोली साले कुत्ते क्यों तड़पा रहा है घुसा दे ना अब।

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तभी सलीम ने मिश्रा की तरफ आंखों से कुछ इशारा किया। सलीम दीदी से बोला कि क्या जल्दी साली रंडी आज तुझे बहुत तड़पना है। मिश्रा ने अपनी पैंट उठाई और उसमें से एक ट्यूब निकाली और अपने लंड पर लगाकर वापस दीदी के पीछे आ गया। और अपना लंड दीदी की चूत पर रखा और सलीम की तरफ देखा। सलीम ने दीदी की तरफ देखते हुए अपनी आंखों से मिश्रा को ल्यूब लगाने का इशारा किया। सलीम दीदी से बोला कि क्या जल्दी साली रंडी आज तुझे बहुत तड़पना है। मिश्रा ने अपनी पैंट उठाई और उसमें से ठंडी चिकनी ल्यूब की ट्यूब निकाली। उसने ल्यूब को अपने लंड पर अच्छे से लगाया जिससे लंड और भी चमकने लगा। फिर वह वापस दीदी के पीछे आ गया और अपना लंड दीदी की चूत पर रखा और सलीम की तरफ देखा।

सलीम ने दीदी का सिर पकड़कर अपने लंड दबा दिया। उसका लंड आधे से ज्यादा दीदी के मुंह में चला गया। दीदी के आंखों में पानी आने लगा। तभी मिश्रा ने एक ही झटके में अपना पूरा लंड दीदी की चूत में घुसा दिया। सलीम ने दीदी के बालों को पकड़कर अपना मोटा लंड उसके मुंह में जोर से दबा दिया। लंड का आधे से ज्यादा हिस्सा दीदी के गले तक चला गया और दीदी की गला फूल गया। दीदी के आंखों से पानी आने लगा और उसकी आंखें लाल हो गईं। तभी मिश्रा ने एक ही तेज झटके में अपना पूरा लंड दीदी की चूत में घुसा दिया। दीदी की चूत पूरी तरह फैल गई और उसका रस चारों तरफ छिटक गया।

अब मिश्रा का पूरा लंड दीदी की चूत में था। दीदी के आंखों से आंसू आ रहे थे। सलीम का लंड दीदी के मुंह में होने के कारण उसकी चीख भी नहीं निकल पाई। सलीम ने दीदी का सिर छोड़ दिया और दीदी एकदम उसका लंड मुंह से बाहर निकालकर हांफने लगी। अब मिश्रा का पूरा मोटा लंड दीदी की चूत के अंदर तक धंस चुका था और दीदी की चूत की दीवारें उसके चारों तरफ कसकर जकड़ रही थीं। दीदी के आंखों से आंसू की धार बह रही थी। सलीम का लंड दीदी के मुंह में होने के कारण उसकी चीख भी नहीं निकल पाई। सलीम ने दीदी का सिर छोड़ दिया और दीदी एकदम उसका लंड मुंह से बाहर निकालकर हांफने लगी। उसकी छाती तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी।

उधर मिश्रा ने दीदी की कमर को पकड़कर अपना लंड दीदी की चूत में गाड़ रखा था। दीदी बोली साले कमीने मार दिया आराम से भी तो कर सकते हो ना। मैंने नोट किया कि दीदी की चूत में मिश्रा के लंड का कोई खास असर नहीं हो रहा था। वो रिलैक्स लग रही थी जैसे कुछ अंदर गया ही नहीं। इसका मतलब था कि दीदी बहुत ही चुदक्कड़ है और अपनी चूत खूब मरवा चुकी है। उधर मिश्रा ने दीदी की पतली कमर को कसकर पकड़कर अपना लंड दीदी की चूत में गाड़ रखा था। दीदी बोली साले कमीने मार दिया आराम से भी तो कर सकते हो ना। मैंने नोट किया कि दीदी की चूत में मिश्रा के लंड का कोई खास असर नहीं हो रहा था। वो रिलैक्स लग रही थी जैसे कुछ अंदर गया ही नहीं। इसका मतलब था कि दीदी बहुत ही चुदक्कड़ है और अपनी चूत खूब मरवा चुकी है।

मिश्रा भी दीदी की कमर को पकड़कर उसकी चूत को चोद रहा था। बीच-बीच में अपना पूरा लंड दीदी की चूत से निकालता और फिर एक ही झटके में पूरा दीदी की चूत में घुसा देता। दीदी भी उसके हर झटके का जवाब अपने झटके से दे रही थी। दीदी उन दोनों के लंडों का पूरा मजा ले रही थी। मिश्रा भी दीदी की कमर को मजबूती से पकड़कर उसकी चूत को तेजी से चोद रहा था। बीच-बीच में वह अपना पूरा लंड दीदी की चूत से बाहर निकालता और फिर एक ही तेज झटके में पूरा लंड दीदी की चूत में घुसा देता। दीदी भी उसके हर झटके का जवाब अपने झटके से दे रही थी। दीदी उन दोनों के लंडों का पूरा मजा ले रही थी।

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फिर उन दोनों ने एक-दूसरे को देखा और अपनी-अपनी जगह बदल ली। अब दीदी मिश्रा का लंड चूस रही थी और सलीम दीदी के पीछे जाकर अपना लंड दीदी की चूत पर सेट करने लगा। फिर उन दोनों ने एक-दूसरे को देखा और अपनी-अपनी जगह बदल ली। अब दीदी मिश्रा का लंड चूस रही थी और सलीम दीदी के पीछे जाकर अपना लंड दीदी की चूत पर सेट करने लगा।

दीदी पीछे मुड़ी और सलीम से बोलने लगी कि प्लीज यार आराम से करना तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है। सलीम ने दीदी को एक क्रुएल स्माइल दी और मिश्रा की तरफ देखने लगा। मिश्रा उसका इशारा समझ गया और दीदी का सिर पकड़कर अपने लंड उसके मुंह में ठूंसने लगा। उसने अपना पूरा लंड दीदी के मुंह में डाल दिया। दीदी सांस भी ले पा रही थी। दीदी पीछे मुड़ी और सलीम से बोलने लगी कि प्लीज यार आराम से करना तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है। सलीम ने दीदी को एक क्रुएल स्माइल दी और मिश्रा की तरफ देखने लगा। मिश्रा उसका इशारा समझ गया और दीदी का सिर पकड़कर अपने लंड उसके मुंह में ठूंसने लगा। उसने अपना पूरा लंड दीदी के मुंह में डाल दिया। दीदी सांस भी ले पा रही थी।

सलीम ने दीदी की कमर को कसकर पकड़ा और अपना लंड दीदी की गांड के होल पर रखा। और जब तक दीदी कुछ समझ पाती सलीम एक जोर का झटका दिया। उसका आधा लंड दीदी की गांड में घुस गया। सलीम ने दीदी की कमर को कसकर पकड़ा और अपना लंड दीदी की गांड के होल पर रखा। और जब तक दीदी कुछ समझ पाती सलीम एक जोर का झटका दिया। उसका आधा लंड दीदी की गांड में घुस गया।

मेरी भी सांस रुक गई। मार दिया कमीने ने मेरी बहन को। साले सांड की तरह मेरी दीदी की चुदाई कर रहे थे। दीदी छटपटाने लगी और अपना सिर मिश्रा से छुड़ाकर बोली मार गए प्लीज निकालो इसे मेरी गांड से आए मां मार गए। मेरी भी सांस रुक गई। मार दिया कमीने ने मेरी बहन को। साले सांड की तरह मेरी दीदी की चुदाई कर रहे थे। दीदी छटपटाने लगी और अपना सिर मिश्रा से छुड़ाकर बोली मार गए प्लीज निकालो इसे मेरी गांड से आए मां मार गए।

सलीम हंसते हुए बोला कुतीया अभी तो आधा ही गया है पूरा जाना तो अभी बाकी है साली रंडी आज तुझे एक असली मर्द मिला है देख कितना मजा आएगा और मजा के साथ थोड़ा दर्द तो चलता है। सलीम हंसते हुए बोला कुतीया अभी तो आधा ही गया है पूरा जाना तो अभी बाकी है साली रंडी आज तुझे एक असली मर्द मिला है देख कितना मजा आएगा और मजा के साथ थोड़ा दर्द तो चलता है।

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फिर मिश्रा ने अपना लंड दीदी के मुंह में दे दिया और उसका मुंह छोड़ने लगा। सलीम ने अपना लंड दीदी की गांड से थोड़ा बाहर निकाला और एक झटके से और अंदर तक ठोक दिया। दीदी के मुंह से चीख निकल गई। वो रोते हुए बोली प्लीज यार गांड मत करो चूत में घुसा लो प्लीज। पर सलीम ने दीदी की एक भी नहीं सुनी और अपना पूरा लंड दीदी की गांड में बैठा दिया। फिर मिश्रा ने अपना लंड दीदी के मुंह में दे दिया और उसका मुंह छोड़ने लगा। सलीम ने अपना लंड दीदी की गांड से थोड़ा बाहर निकाला और एक झटके से और अंदर तक ठोक दिया। दीदी के मुंह से चीख निकल गई। वो रोते हुए बोली प्लीज यार गांड मत करो चूत में घुसा लो प्लीज। पर सलीम ने दीदी की एक भी नहीं सुनी और अपना पूरा लंड दीदी की गांड में बैठा दिया।

दीदी भी अपने हाथों से बेड पकड़कर अपनी गांड को आगे करने लगी पर सलीम की पकड़ के सामने दीदी कुछ नहीं कर पाई। वो स्लोली-स्लोली अपना लंड दीदी की गांड में आगे-पीछे करने लगा। दीदी भी अपने हाथों से बेड पकड़कर अपनी गांड को आगे करने लगी पर सलीम की पकड़ के सामने दीदी कुछ नहीं कर पाई। वो स्लोली-स्लोली अपना लंड दीदी की गांड में आगे-पीछे करने लगा।

सलीम का लंड दीदी की गांड में अपनी जगह बना चुका था। दीदी का भी दर्द कम हो गया था। वो फिर से मिश्रा का लंड चूसने लगी। वो मिश्रा का पूरा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी बिल्कुल रंडी की तरह। वो अपनी चूत को हाथ से रगड़ रही थी।

अपने मुंह से दीदी ने मिश्रा का लंड निकाला और बोली क्या कर दिया तुमने मेरी चूत को बहुत खुजली हो रही है इसमें। दीदी ने मिश्रा के मोटे और अभी भी चमकते लंड को अपने गीले होंठों से धीरे से बाहर खींचा। लंड के सिरे से लार और प्रीकम की मोटी डोरियां उसके होंठों से जुड़ी हुईं और फिर टूटकर उसके ठोड़ी पर गिर गईं। दीदी की सांसें तेज चल रही थीं और उसकी आंखें वासना से लाल हो चुकी थीं। वो बोली क्या कर दिया तुमने मेरी चूत को बहुत खुजली हो रही है इसमें। उसकी आवाज में बेचैनी और गहरी चाहत साफ झलक रही थी। दीदी की चूत अब इतनी ज्यादा गीली और सूजी हुई थी कि उसकी लिप्स अलग-अलग होकर हल्के से कांप रही थीं और क्लिटोरिस बाहर निकलकर लाल और संवेदनशील हो गई थी। वो सलीम से रिक्वेस्ट करने लगी कि अपना लंड मेरी चूत में डाल दे। उसकी आवाज कांप रही थी और वो बार-बार अपनी जांघें रगड़ रही थी जैसे खुजली को किसी तरह कम करना चाहती हो।

सलीम और मिश्रा ने एक-दूसरे की ओर देखा और हंसने लगे। दोनों की हंसी में शरारत और क्रूरता भरी हुई थी। सलीम बोला कि मैंने बोला था ना कि आज तुझे बहुत तड़पना है अभी तो शुरुआत है। और दीदी की गांड को जोर-जोर से चोदने लगा। सलीम ने दीदी की कमर को मजबूती से पकड़ा और अपना मोटा लंड दीदी की गांड में तेज-तेज धकेलने लगा। हर धक्के के साथ दीदी की गांड की दीवारें फैल रही थीं और एक चिपचिपी आवाज कमरे में गूंज रही थी। दीदी की गांड अब पूरी तरह ढीली और लुब्रिकेटेड हो चुकी थी जिससे सलीम का लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। दीदी मिश्रा से बोली प्लीज तुम ही डाल दो अपना लंड मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही है। उसकी आवाज अब लगभग रोने वाली हो गई थी और वो मिश्रा के लंड को देखते हुए अपनी चूत पर हाथ फेर रही थी।

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मिश्रा बोला चूत तो अब तेरी रात को ही चुदेगी अभी तो बस गांड मरवा। मिश्रा ने मुस्कुराते हुए कहा और दीदी की गांड को देखते हुए सलीम को इशारा किया। सलीम ने दीदी की गांड से अपना लंड निकाला और आगे आ गया। सलीम का लंड दीदी की गांड से निकालने के बाद भी उसकी गांड का होल खुला हुआ था। क्या मस्त लग रही थी दीदी की गांड। गांड का गुलाबी होल अब पूरी तरह फैला हुआ था और अंदर की गुलाबी दीवारें हल्के से बाहर झांक रही थीं। उसमें से ल्यूब और दीदी के रस की चमकदार परत लगी हुई थी जो धीरे-धीरे बह रही थी। होल धीरे-धीरे सिकुड़ने की कोशिश कर रहा था लेकिन अभी भी खुला हुआ था।

अब मिश्रा पीछे आया और दीदी को सीधा किया और उसकी दोनों लेग्स को अपने कंधे पर रखकर दीदी की गांड में अपना लंड घुसा दिया। मिश्रा ने दीदी को पलटकर सीधा लिटाया और उसकी नरम जांघों को उठाकर अपने मजबूत कंधों पर टिका दिया। दीदी की गांड अब पूरी तरह उठी हुई थी और उसका होल मिश्रा के सामने खुला हुआ था। मिश्रा ने अपना लंड सेट किया और धीरे से लेकिन मजबूती से अंदर धकेला। दीदी की गांड ने आराम से मिश्रा का पूरा लंड निगल लिया क्योंकि पहले से ही सलीम ने उसे ढीला कर दिया था। दीदी अपने हाथ से चूत को रगड़ने लगी। वो बोली क्या कर दिया मेरी चूत को प्लीज बीतीये दो ना। उसकी उंगलियां तेजी से अपनी क्लिटोरिस पर घूम रही थीं और चूत से रस की बूंदें निकलकर चादर पर गिर रही थीं।

सलीम बोला साली आज तेरी खुजली दो लंडों से नहीं मिटने वाली आज क्रीम लगाई है। रात को बुला लेना फिर मिटता देंगे तेरी खुजली को। दीदी बोली रात को मेरा भाई होगा घर में नहीं बुला सकती प्लीज एक बार डाल दो चूत में। सलीम बोला चल साली रंडी एक बार डालते हैं पर एक शर्त है। वो बोली ठीक है डाल दो। सलीम बोला बिना सुने ही हां कर दी साली सुन तो लेती। अब मिश्रा बेड पर सीधा लेट गया और सलीम ने दीदी को उसके लंड पर बैठने को कहा।

दीदी मिश्रा के लंड को अपनी गांड में डालकर उसके ऊपर बैठ गई। दीदी ने मिश्रा के लंड को अपनी गांड के होल पर सेट किया और धीरे-धीरे नीचे बैठ गई। लंड पूरा अंदर चला गया और दीदी की गांड फिर से मिश्रा की जांघों पर टिक गई। फिर सलीम ने दीदी की लेग्स को चौड़ा किया और उसे मिश्रा के ऊपर ही सीधा लेटा दिया। अब दीदी मिश्रा का लंड अपनी गांड में लेकर सीधी उसके ऊपर लेटी हुई थी और सलीम ने दीदी के ऊपर आकर अपना लंड दीदी की चूत में घुसा दिया। सलीम ने दीदी की जांघों को और चौड़ा किया और अपना मोटा लंड दीदी की चूत की गीली लिप्स पर रखकर एक झटके में अंदर धकेल दिया।

दीदी आह-आह करने लगी और दो-तीन झटकों के बाद वो दोनों लंडों को अपनी चूत और गांड में निगल गई। अब वो दोनों दीदी के दोनों होल्स को फाड़ रहे थे। दीदी की चूत और गांड दोनों एक साथ भरी हुई थीं और हर धक्के के साथ उसके शरीर में कंपन दौड़ रहा था। दोनों लंड एक-दूसरे के साथ महसूस हो रहे थे और दीदी की दीवारें दोनों तरफ से दब रही थीं।

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करीब ३० मिनट की तबाही तोड़ चुदाई के बाद सलीम अपना लंड दीदी के मुंह के पास लाया और अपना पानी दीदी के मुंह में छोड़ दिया। दीदी उसका पूरा पानी पी गई और उसका लंड चाट-चाटकर साफ कर दिया। सलीम ने तेज-तेज झटके दिए और फिर अपना लंड बाहर निकालकर दीदी के मुंह के पास रख दिया। गरम-गरम वीर्य की मोटी धारें दीदी के मुंह में गिरने लगीं। दीदी ने मुंह खोलकर सब पी लिया और जीभ से लंड को चाट-चाटकर हर बूंद साफ कर दी।

अब मिश्रा ने भी अपना पानी दीदी के मुंह में छोड़ा और अपने कपड़े पहनने लगे। मिश्रा ने भी कुछ देर बाद दीदी के मुंह में अपना पूरा वीर्य छोड़ दिया और दीदी ने उसे भी उत्सुकता से पी लिया। फिर दोनों ने अपने कपड़े पहनने शुरू कर दिए। मैं तभी कैमरा बंद किया और घर से बाहर आया और अपनी बाइक लेकर थोड़ी दूर जा खड़ा हुआ। ५ मिनट बाद सलीम और मिश्रा उसी गाड़ी में आते हुए दिखाई दिए। मैंने बाइक स्टार्ट की और घर की तरफ चल पड़ा।

घर जाकर मैंने बेल बजाई। दीदी ने दरवाजा खोला। अब दीदी ने बॉक्सर और टी-शर्ट पहनी हुई थी। चुदाई के कारण उसकी चाल भी बदली हुई थी। दीदी ने मुझसे खाने के बारे में पूछा मैंने मना कर दिया। मेरे दिमाग में दीदी की चुदाई के सीन चल रहे थे।

मैंने भी कपड़े चेंज किए और दीदी के साथ रूम में टीवी देखने लगा। मैंने जल्दी से अपनी गंदी टी-शर्ट और पैंट उतारी, एक फ्रेश बॉक्सर और टी-शर्ट पहनी और दीदी के बगल में बेड पर बैठ गया। टीवी पर कोई पुरानी फिल्म चल रही थी लेकिन दोनों का ध्यान कहीं और था। दीदी अभी भी थकी हुई और चुदाई के बाद की सुस्ती में थी, उसकी आंखें थोड़ी लाल थीं और चेहरा हल्का लालिमा लिए हुए था। उसकी सांसें अभी भी सामान्य से थोड़ी तेज चल रही थीं और बॉक्सर में उसकी जांघें हल्के से कांप रही थीं। मैंने उसे देखते हुए धीरे से पूछा दिन कैसा रहा। वो बोली अच्छा रहा। उसकी आवाज में हल्की कंपकंपी थी और वो टीवी की तरफ देख रही थी जैसे मेरी नजरों से बचना चाहती हो।

मैंने उसे बोला कि पूरा मजा लिया है आज तो दो का। मेरी आवाज में शरारत और दबाव दोनों थे। वो बोली कैसा मजा और कौन दो। उसने चौंककर मेरी तरफ देखा, उसकी आंखें फैल गईं और चेहरा एकदम सफेद पड़ गया। मैंने जेब से अपना फोन निकाला और उसे रिकॉर्ड की हुई वीडियो प्ले कर दी। स्क्रीन पर सलीम और मिश्रा के साथ दीदी की पूरी चुदाई के सीन चलने लगे। दीदी की चीखें, आहें, लंड अंदर-बाहर होने की चपचप आवाजें और दोनों के क्रूर हंसने की आवाज कमरे में गूंजने लगी। वीडियो में दीदी की गांड और चूत दोनों भरी हुई दिख रही थीं, उसका मुंह वीर्य से भरा हुआ था और वो रंडी की तरह चूस रही थी।

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वो रोने लगी और बोली प्लीज पापा-मम्मी को कुछ मत बताना। दीदी के आंसू झरने लगे, वो दोनों हाथों से अपना मुंह ढककर सिसकने लगी। उसके कंधे कांप रहे थे और आंसू उसके गालों पर बहकर टी-शर्ट पर गिर रहे थे। उसकी आवाज कांपती हुई थी और वो बार-बार मेरी तरफ देख रही थी जैसे मेरी दया की भीख मांग रही हो। मैंने कहा कि नहीं बोलूंगा लेकिन तुम्हें वो सब मेरे साथ भी करना पड़ेगा। मेरी आवाज ठंडी और सख्त थी। वो बोली भाई हो आप मेरे ये नहीं हो सकता। उसने सिर हिलाया और रोते हुए कहा कि मैं तुम्हारी दीदी हूं, ये गलत है।

मैंने बोला ठीक है तो मैं मम्मी-पापा को सब बता दूंगा। मेरी आवाज में ठंडक और धमकी दोनों थी। मैंने फोन उठाकर पापा का नंबर डायल करने का नाटक किया। स्क्रीन पर पापा का नाम आते ही दीदी का चेहरा पूरी तरह सफेद पड़ गया। वो बोली नहीं मैं कर लूंगी। उसकी आवाज टूट गई, वो फूट-फूटकर रोने लगी लेकिन फिर धीरे से हां में सिर हिलाया। उसके होंठ कांप रहे थे, आंसू उसकी पलकों से लगातार बह रहे थे और गालों पर लंबी लकीरें बनाते हुए नीचे गिर रहे थे। उसकी सिसकियां कमरे में गूंज रही थीं और वो दोनों हाथों से अपना मुंह ढकने की कोशिश कर रही थी लेकिन आंसू रुक नहीं रहे थे। वो मेरी तरफ देखते हुए कांप रही थी, उसकी आंखें डर और हार से भरी हुई थीं।

मैंने दीदी को बाहों में ले लिया और उसे पागलों की तरह किस करने लगा। मैंने अपनी मजबूत बाहों से उसकी पतली कमर को इतनी कसकर जकड़ लिया कि उसकी सांसें एक पल के लिए रुक सी गईं। उसकी नरम, गर्म देह मेरे सीने से पूरी तरह सट गई, उसके बड़े भरे हुए स्तन मेरे शरीर पर दब रहे थे और टी-शर्ट के पतले कपड़े के नीचे से उनकी नरमी और गर्मी साफ महसूस हो रही थी। दीदी अभी भी रो रही थी लेकिन विरोध नहीं कर रही थी। मैंने उसके गालों पर बहते आंसुओं को अपनी जीभ से चाटा और फिर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैंने जोर से उसके नरम गीले होंठ चूसे, जीभ उसके मुंह में डालकर अंदर तक घुमाई। दीदी के होंठ अभी भी नम थे और वीर्य की हल्की सी खुशबू आ रही थी। मैंने उसके होंठ काटे, जीभ से उसके मुंह के अंदर हर कोने को छुआ और उसकी सांसें तेज होने लगीं। मेरे हाथ उसकी पीठ पर फिरने लगे, टी-शर्ट के नीचे उसकी गर्म त्वचा को सहलाने लगे। दीदी की सिसकियां धीरे-धीरे आहों में बदलने लगीं।

धीरे-धीरे दीदी का शरीर पूरी तरह उत्तेजित हो गया। मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर करके उसके बड़े गोल स्तनों को बाहर निकाला और एक-एक करके जोर-जोर से चूसने लगा। दीदी ने मेरे सिर को पकड़कर और गहरा दबाया और आहें भरने लगी। मैंने उसकी बॉक्सर भी खींचकर उतार दी। उसकी चूत पहले से ही भारी मात्रा में गीली और सूजी हुई थी। मैंने अपना मोटा खड़ा लंड उसकी चूत की लिप्स पर रगड़ा और एक जोरदार झटके में पूरा का पूरा अंदर घुसा दिया। दीदी जोर से चीखी लेकिन तुरंत उसके मुंह से “हां भाई… और गहरा… फाड़ दो मेरी चूत…” निकल गया।

मैं तेज-तेज धक्के मारने लगा। दीदी भी अपनी कमर को ऊपर उठाकर हर झटके का पूरा जवाब दे रही थी। वो अब पूरी तरह से मजा ले रही थी। कुछ देर बाद दीदी ने मुझे पीछे धकेला, मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे लंड को अपनी चूत में डालकर जोर-जोर से ऊपर-नीचे उछलने लगी। उसके बड़े स्तन तेजी से उछल रहे थे, वो चिल्ला रही थी “जोर से… और जोर से चोदो मुझे… हां… तुम्हारा लंड बहुत मोटा है… मुझे चोदते रहो…” वो इतनी तेजी से चुदवा रही थी कि बेड हिल रहा था। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थी और रस चारों तरफ छिटक रहा था।

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लगभग २५ मिनट तक वो इस तरह मुझे राइड करती रही, पूरी ताकत से मेरे लंड पर उछलती रही। आखिरकार वो कांपने लगी, उसकी चूत सिकुड़ने लगी और वो जोर से चीखकर झड़ गई। मैं भी उसके अंदर ही अपना पूरा वीर्य छोड़ दिया। दीदी मेरे सीने पर थककर लेट गई, पसीने से तर शरीर के साथ। उसने मेरी आंखों में गहरी नजर डालते हुए धीरे से कहा, अब से बाहर नहीं करवाउंगी, अब अपने प्यारे भाई से करवाउंगी।

2013
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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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