निशा मेरे छोटे भाई रुपम की पत्नी है। निशा काफी सुंदर महिला है। उसका बदन ऊपर वाले ने काफी तसल्ली से तराश कर बनाया है।
मैं शिवम उसका जेठ हूं। मेरी शादी को 10 साल हो चुके हैं।
निशा शुरू से ही मुझे काफी अच्छी लगती थी। मुझसे वो काफी खुली हुई थी।
रुपम ब्रिटेन की एक कंपनी में नौकरी करता था।
हां बताना तो भूल ही गया निशा का मायका नागपुर में है और हम जालंधर में रहते हैं।
आज से कोई 5 साल पहले की बात है।
हुआ यूं कि शादी के 1 साल बाद ही निशा गर्भवती हो गई। प्रसव के लिए वो अपने मायके गई हुई थी। 7 महीने में समय से पहले प्रसव हो गया। बच्चा शुरू से ही काफी कमजोर था। 2 हफ्ते बाद ही बच्चे की मौत हो गई।
रुपम तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया। कुछ दिन वहां रह कर वापस आया। वापस अकेला ही आया था। ये तय हुआ था कि निशा की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आएगी।
1 महीने के बाद जब निशा को वापस लाने की बात आई तो रुपम को छुट्टी नहीं मिली।
निशा को लेने जाने के लिए रुपम ने मुझे कहा।
तो मैं निशा को लेने ट्रेन से निकला। निशा को वैसे मैंने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस यात्रा में हम दोनों में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में घूमने वाली निशा बेपर्दा हो गई।
हमारी टिकट प्रथम श्रेणी में बुक थी। चार सीट वाले डिब्बे में 2 सीट पर कोई नहीं आया। हम ट्रेन में चढ़ गए।
गर्मी के दिन थे। जब तक ट्रेन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी थी।
मगर दूसरों की आंखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा अब आप चाहे कुछ भी समझें मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूंगी। मुझे आप अच्छे लगते हो आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूंगी।
मैं उसकी बात पर हंस पड़ा। मैं भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।
मैंने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया।
अचानक मेरे मुंह से निकला अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुस्न छिपा है उसका पता कैसे लगता।
उसने मेरी ओर देखा फिर शर्म से लाल हो गई।
निशा ने बोतल हरे रंग की एक शिफॉन की साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज भी मिलता जुलता पहना था।
गर्मी के कारण बात करते हुए साड़ी का आंचल ब्लाउज के ऊपर से सरक गया।
तब मैंने जाना कि उसने ब्लाउज के अंदर छाती बांधने वाला वस्त्र नहीं पहना हुआ है।
उसके स्तन दूध से भरे हुए थे इसलिए काफी बड़े बड़े हो गए थे।
ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिए उसकी आधी छातियां साफ दिख रही थीं।
पतले ब्लाउज में से अंदर कुछ न होने के कारण चुचुक और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ नजर आ रहा था।
मेरी नजर उसकी छाती से चिपक गई।
उसने बात करते करते मेरी ओर देखा। मेरी निगाहों का अपनी निगाहों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए स्तन को देखता पाकर शरमा गई और जल्दी से उसे आंचल से ढक लिया। उसका चेहरा हल्का गुलाबी हो गया था। आंचल खिसकने से एक गोल नरम स्तन बाहर निकल आया था। उसके ऊपर दूध की एक पतली धार चमक रही थी। मैंने वह दृश्य देखा तो मेरी साँस एक पल के लिए रुक सी गई। उसने जल्दी से कपड़ा खींचकर ढक लिया लेकिन उस एक झलक ने मेरे मन में हलचल पैदा कर दी।
हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे। हवा में हल्की नमी थी। उसके शरीर से हल्की सी मीठी गंध आ रही थी। बातचीत सामान्य लग रही थी लेकिन उसके कदमों में थोड़ी बेचैनी थी। वह बार बार अपनी साड़ी के आंचल को संभाल रही थी।
कुछ देर बाद वो उठकर स्नानघर चली गई। कुछ देर बाद लौट कर आई तो उसका चेहरा थोड़ा गंभीर था। माथे पर हल्की शिकन थी। आँखें थोड़ी नम लग रही थीं। उसने चुपचाप बैठकर बात जारी रखी लेकिन आवाज में पहले जैसी सहजता नहीं थी।
हम वापस बात करने लगे। कमरे में पंखा धीरे धीरे घूम रहा था। उसकी साँसें थोड़ी तेज चल रही थीं।
कुछ देर बाद वो वापस उठी और कुछ देर बाद लौट कर आ गई। मैंने देखा वो बात करते करते कसमसा रही है। अपने हाथों से अपनी छाती को हल्के से दबा रही है। उसकी उंगलियाँ साड़ी के ऊपर से गोलियों को सहला रही थीं। चेहरा तन गया था। दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
कोई समस्या है क्या मैंने पूछा।
ना नहीं। उसकी आवाज काँप गई। उसने सिर झुका लिया।
मैंने उसे असमंजस में देखा। उसकी साँसें उखड़ रही थीं। छाती ऊपर नीचे हो रही थी। वह बार बार होंठ काट रही थी।
कुछ देर बाद वो फिर उठी तो मैंने कहा मुझे बताओ न क्या समस्या है। मेरी आवाज में चिंता थी।
वो झिझकती हुई सी खड़ी रही फिर बिना कुछ बोले बाहर चली गई। कुछ देर बाद वापस आकर वो सामने बैठ गई। उसकी आँखें लाल थीं। पलकें गीली थीं।
मेरी छातियों में दर्द हो रहा है। उसने चेहरा ऊपर उठाया तो मैंने देखा उसकी आंखें आंसुओं से छलक रही हैं। एक आँसू गाल पर बह निकला। उसने जल्दी से पोंछ लिया लेकिन आवाज भारी हो गई थी।
क्यों क्या हुआ। मर्द वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं। मैं उसके करीब बैठा था। उसकी तकलीफ देखकर मन व्याकुल हो रहा था।
मेरी भी समझ में नहीं आया अचानक उसे क्या हो गया। वह अपनी दोनों हथेलियों से छाती को सहला रही थी। दर्द से माथा सिकुड़ रहा था।
जी वो क्या है मम वो मेरी छातियां भारी हो रही हैं। वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाए आखिर मैं उसका जेठ था। उसकी आवाज में शर्म और बेबसी दोनों थी। वह निगाहें फर्श पर गड़ाए बैठी थी।
ममम मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है। उसने निगाहें नीची करते हुए कहा। उसकी आवाज काँप रही थी। गला भर आया था। छाती भारी और तनी हुई लग रही थी। साड़ी के ऊपर से भी उभार साफ दिख रहा था।
स्नानघर जाना है मैंने पूछा।
गई थी लेकिन धोने की जगह बहुत गंदी है इसलिए मैं वापस चली आई। उसने कहा और बाहर की धोने की जगह पर मुझे शर्म आती है कोई देख ले तो क्या सोचेगा। उसकी आवाज में डर और शर्म दोनों मिल गए थे। वह अपने आँचल को और कसकर पकड़े हुए थी।
फिर क्या किया जाए मैं सोचने लगा। कमरे में कोई बर्तन नहीं था। फर्श पर गिराना संभव नहीं लगता था। उसकी तकलीफ बढ़ती जा रही थी। वह बार बार छाती दबा रही थी। दर्द से आँखें बंद हो जाती थीं।
कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर सको। लेकिन किसमें खाली करोगी। नीचे फर्श पर गिरा नहीं सकती और यहां कोई बर्तन भी नहीं है जिसमें दूध निकाल सको। मैं सोच में डूबा हुआ था। उसकी हालत देखकर कुछ करना जरूरी लग रहा था।
उसने झिझकते हुए फिर मेरी तरफ एक नजर डाल कर अपनी निगाहें झुका लीं। वो अपने पैर के नाखूनों को कुरेदती हुई बोली अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूं। उसकी आवाज बहुत धीमी थी। गाल लाल हो गए थे।
बोलो। मैंने धीरे से कहा। मेरी निगाहें उसके चेहरे पर टिकी थीं।
आप इन्हें खाली कर दीजिए न। उसने फुसफुसाहट में कहा। आवाज में विनती थी। वह अपनी छाती की ओर इशारा कर रही थी लेकिन आँखें नीचे थीं।
मैं मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूं। मैंने उसकी छातियों को निगाह भर कर देखा। साड़ी के नीचे दोनों स्तन भारी और भरे हुए दिख रहे थे। निप्पल की जगह थोड़ी गीली लग रही थी। मेरा गला सूख गया।
आप अगर इस दूध को पी लो उसने आगे कुछ नहीं कहा। उसकी आवाज रुक गई। वह और ज्यादा शर्मा गई। आँसू फिर निकल आए।
मैं उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे छोटे भाई की पत्नी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुंह कैसे लगा सकता हूं। मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। दिमाग में कई बातें घूम रही थीं। संबंध का बंधन और उसकी तकलीफ दोनों साथ साथ चल रहे थे।
जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं इसमें गलत क्या है। क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है। उसने मुझसे कहा मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के बारे में सोच रहे हो। विनती है। उसकी आवाज टूट रही थी। वह हाथ जोड़कर बैठी थी। आँखों में आँसू थे। छाती दर्द से काँप रही थी।
मैं चुपचाप बैठा रहा। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। अपने छोटे भाई की पत्नी के चुचुक मुंह में लेकर दूध पीना एक बड़ी बात थी।
निशा ने अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए। विनती है। उसके हाथ काँप रहे थे। बटन एक एक करके खुलते गए। ब्लाउज के अंदर से उसके भारी स्तन और ज्यादा उभर आए। आंचल अभी भी उन पर पड़ा था लेकिन ढीला पड़ चुका था।
उसने फिर कहा लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला। मेरी साँसें तेज चल रही थीं। मन में संघर्ष चल रहा था। शरीर अंदर से गर्म हो रहा था।
जाइए आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आप अपने रूढ़िवादी विचारों से घिरे बैठे रहिए चाहे मैं दर्द से मर ही जाऊं। कह कर उसने वापस अपने स्तनों को आंचल से ढक लिया और अपने हाथ आंचल के अंदर करके ब्लाउज के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से उसके मुंह से चीख निकल गई आआहह। उसकी उंगलियाँ बटन पर फिसल गईं। छाती में तेज दर्द उठा। आँखें बंद हो गईं। माथा सिकुड़ गया।
मैंने उसके हाथ थाम कर ब्लाउज से बाहर निकाल दिए। उसकी हथेलियाँ गर्म और काँप रही थीं। मैंने उन्हें धीरे से अपनी हथेलियों में दबाया।
फिर एक झटके में उसके आंचल को सीने से हटा दिया। आंचल सरकते ही उसके दोनों स्तन पूरी तरह सामने आ गए। गोल भारी और दूध से तने हुए। निप्पल थोड़े गीले और गुलाबी थे। एक पतली धार दूध की अभी भी नीचे की ओर रिस रही थी।
उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में शर्म और राहत दोनों थे। होंठ काँप रहे थे। साँसें उखड़ी हुई थीं।
मैं अपनी सीट से उठ कर डिब्बे के दरवाजे को बंद किया और उसके बगल में आ गया। दरवाजे की कुंडी बैठ गई। कमरे में अब सिर्फ हम दोनों थे। पंखे की हवा उसके नंगे स्तनों पर पड़ रही थी। निप्पल और सख्त हो गए थे।
उसने अपने ब्लाउज को उतार दिया। ब्लाउज कंधों से नीचे खिसक गया। उसके नंगे स्तन जो कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थे मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिए बेताब थे। दोनों स्तन वजन से थोड़े नीचे लटके हुए थे। त्वचा मुलायम और चमकदार थी। नसों की हल्की रेखाएँ दिख रही थीं।
मैंने अपनी एक उंगली को उसके एक स्तन पर ऊपर से फेरते हुए चुचुक के ऊपर लाया। उंगली गर्म त्वचा पर फिसली। निप्पल के पास पहुँचते ही वह और सख्त हो गया।
मेरी उंगली की छुअन पा कर उसके चुचुक अंगूर की साइज के हो गए। गोल कड़ा और थोड़ा बाहर निकला हुआ। मैंने हल्के से उस पर गोला बनाया। उसके शरीर में एक कंपकंपी दौड़ गई।
मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। उसके बड़े बड़े दूध से भरे हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे। उनका वजन मेरे माथे और गालों पर महसूस हो रहा था। गर्म और मुलायम। दूध की हल्की मीठी गंध नाक में भर गई।
उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपने स्तन को नीचे झुकाया। उसकी उंगलियाँ मेरे बालों में घूम रही थीं। स्तन और करीब आ गया।
उसका चुचुक अब मेरे होंठों को छू रहा था। गर्म और थोड़ा गीला। मैंने होंठ खोले। उसकी साँसें तेज हो गईं।
मैंने जीभ निकाल कर उसके चुचुक को छुआ। जीभ की नोक से हल्की चाट की। नमकीन मीठा स्वाद आया। निप्पल और कड़ा हो गया। उसके पेट में हरकत हुई।
ऊओफफ फफ जेठजी अब मत सताओ विनती है इनका रस चूस लो कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया। उसका स्तन मेरे मुंह और नाक पर दब गया। नरम मांस मेरे चेहरे को ढक रहा था। दूध की गंध और गर्मी चारों ओर फैल गई।
मैंने अपने होंठ खोल कर सिर्फ उसके चुचुक को अपने होंठों में लेकर चूसा। होंठ निप्पल के चारों ओर बंद हो गए। मैंने धीरे से खींचा।
मीठे दूध की एक तेज धार से मेरा मुंह भर गया। गर्म गाढ़ा और मीठा रस जीभ पर फैल गया। मुंह पूरा भर गया। कुछ बूँदें कोने से निकलकर गाल पर बह गईं।
मैंने उसकी आंखों में देखा। वह नीचे देख रही थी। पलकें झुकी हुई थीं।
उसकी आंखों में शर्म की परछाई तैर रही थी। गाल लाल थे। होंठ भींचे हुए थे लेकिन साँसें तेज चल रही थीं।
मैंने मुंह में भरे दूध को एक घूंट में अपने गले के नीचे उतार दिया। गले में गर्म धारा उतरती गई। पेट तक पहुँची। स्वाद अभी भी जीभ पर बना हुआ था।
आआ अहह उसने अपने सिर को एक झटका दिया। गर्दन पीछे गई। आँखें बंद हो गईं। मुंह से लंबी साँस निकली। छाती मेरे चेहरे पर और दब गई।
मैंने फिर उसके चुचुक को जोर से चूसा और एक घूंट दूध पिया। इस बार धार और तेज निकली। मुंह फिर भर गया। मैंने चूसते हुए निप्पल को जीभ से दबाया। दूध लगातार आ रहा था। उसकी उंगलियाँ मेरे बालों में और कस गईं।
मैं उसके दूसरे चुचुक को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा। उंगली की नोक से गोला बनाते हुए निप्पल को हल्का दबाया। वह तुरंत सख्त हो गया। गर्म त्वचा के नीचे दूध का दबाव महसूस हो रहा था।
ऊओह हहाआन्न हाआन्नन जोर से चूसो और जोर से विनती है मेरे चुचुक को दांतों से दबाओ काफी खुजली हो रही है। उसने कहा। वो मेरे बालों में अपनी उंगलियां फेर रही थी। आवाज में कराह और विनती दोनों थे। गर्दन पीछे झुक गई थी। साँसें तेज चल रही थीं।
मैंने दांतों से उसके चुचुक को जोर से दबाया। दाँत धीरे से निप्पल के चारों ओर बंद हुए फिर हल्का काटा। गर्म मांस दब गया। दूध की एक और धार मुंह में फूटी।
वो ऊउईईइ कर उठी। वो अपने स्तन को मेरे चेहरे पर दबा रही थी। स्तन का नरम वजन मेरे नाक और गालों पर आ गया। दूध की मीठी गंध और गर्मी चारों ओर फैल गई। उसकी कमर में हरकत हुई।
उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़ कर मेरे कुर्ते के अंदर घुस गए। उंगलियाँ गर्माहट के साथ त्वचा पर फिसलीं। छाती के बालों में उलझ गईं।
वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फेरने लगी। हथेलियाँ गोला बनाती हुई ऊपर नीचे चल रही थीं। मेरे निप्पल के पास पहुँचकर रुक गईं।
फिर उसने मेरे चुचुक को अपनी उंगलियों से कुरेदा। नाखून की नोक से हल्की खुजली दी। मेरे शरीर में एक झटका सा लगा। साँस रुक गई।
क्या कर रही हो मैंने उससे पूछा। आवाज भारी हो गई थी। मुंह अभी भी उसके स्तन से लगा हुआ था।
वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ उसने कहा। उसकी आवाज में हल्की मुस्कान और कराह मिली हुई थी। उंगलियाँ मेरे निप्पल को और दबा रही थीं।
क्या कर रहा हूं मैं तुम्हारे साथ मैंने उसे छेड़ा। मैंने चूसना नहीं रोका। जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी।
दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की पत्नी के स्तनों से। उसने धीरे से कहा। आवाज में शर्म बाकी थी लेकिन शरीर ढीला पड़ रहा था।
काफी मीठा है। मैंने मुंह से स्तन थोड़ा सा हटाकर कहा। दूध की बूँदें होंठों पर चमक रही थीं।
धत्त कहकर उसने अपने हाथ मेरे कुर्ते से निकाल लिए और मेरे चेहरे पर झुक गई। उसका चेहरा मेरे करीब आ गया। साँसें मिल गईं।
इससे उसका चुचुक मेरे मुंह से निकल गया। ठंडी हवा निप्पल पर लगी। वह गीला और लाल हो चुका था। दूध की दो तीन बूँदें टपक रही थीं।
उसने झुक कर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मेरे होंठों के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ किया। जीभ गर्म और गीली थी। धीरे धीरे कोने से बीच तक चाटा। मीठा स्वाद उसके मुंह में भी चला गया। होंठ कुछ देर जुड़े रहे।
फिर वो अपने हाथों से वापस अपने चुचुक को मेरे होंठों पर रख दी। निप्पल मेरे होंठों के बीच आ गया। गर्म और गीला। दूध की हल्की चमक उस पर बाकी थी।
मैंने मुंह को काफी खोल कर चुचुक के साथ उसके स्तन का एक हिस्सा भी मुंह में भर लिया। नरम गर्म मांस होंठों के अंदर समा गया। निप्पल जीभ के नीचे दबा। स्तन का वजन मेरे मुंह को भर रहा था।
वापस उसके दूध को चूसने लगा। गाल अंदर की ओर खिंचे। जीभ निप्पल के चारों ओर घूमती रही। गर्म मीठा रस फिर मुंह में भरने लगा। धार पहले से धीमी थी लेकिन लगातार आ रही थी।
कुछ देर बाद उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तन को दबा दबा कर जितना हो सकता था दूध निचोड़ कर मेरे मुंह में डाल दिया। उसकी हथेलियाँ स्तन के दोनों तरफ दबीं। उंगलियाँ मांस को भींच रही थीं। बची हुई गाढ़ी धार सीधे मेरे गले की ओर बह निकली। मैंने सब निगल लिया। स्वाद और गाढ़ा हो गया था।
अब दूसरा वो बोली। आवाज में हल्की कराह थी। उसने अपना दूसरा स्तन मेरे चेहरे की ओर बढ़ाया। निप्पल पहले से सख्त और थोड़ा बाहर निकला हुआ था।
मैंने उसके स्तन को मुंह से निकाल दिया फिर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे जमाया और उस स्तन को पीने लगा। सिर उसकी गोद में टिका। स्तन मेरे मुंह पर आ गया। मैंने होंठ फैलाकर निप्पल और आसपास का हिस्सा अंदर लिया। पहली ही चूस में दूध की तेज धार निकली। मुंह भर गया।
उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फिर रहे थे। उंगलियाँ गर्दन से कंधों पर गईं। फिर छाती के बालों में उलझीं। कुर्ते के अंदर घुसकर पीठ तक पहुँचीं। हथेलियाँ गर्म थीं और धीरे धीरे दब रही थीं।
हम दोनों ही उत्तेजित हो गए थे। मेरी साँसें तेज चल रही थीं। उसके शरीर में भी कंपन थी। स्तन मेरे मुंह में और दब गया। निप्पल जीभ के नीचे फड़क रहा था।
उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे पैंट के फाटे पर रख दिया। हथेली गर्म कपड़े के ऊपर टिकी। मेरे लिंग पर कुछ देर हाथ यूं ही रखे रही। गर्मी और धड़कन उसके हाथ तक पहुँच रही थी। फिर उसे अपने हाथों से दबा कर उसके आकार का जायजा लिया। उंगलियाँ लंबाई और मोटाई नापती हुई चलीं। कपड़े के अंदर वह पूरी तरह तना हुआ था।
काफी तन रहा है उसने शर्माते हुए कहा। आवाज धीमी और काँपती हुई थी। गाल और लाल हो गए। निगाहें नीचे थीं लेकिन हाथ हटाया नहीं।
तुम्हारी जैसी हूर पास इस अंदाज में बैठी हो तो एक बार तो विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाए। मैंने मुंह स्तन से थोड़ा हटाकर कहा। आवाज भारी थी। दूध की बूँदें होंठों पर लगी हुई थीं।
ममम अच्छा। और आप आपके क्या हाल हैं उसने मेरे फाटे की चेन को खोलते हुए पूछा। उंगलियाँ चेन पर फिसलीं। धीरे धीरे नीचे खींचने लगी। धातु की आवाज आई। पैंट का फाटा खुलने लगा। अंदर का तनाव और साफ महसूस होने लगा।
तुम इतने कातिल मूड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है। मेरी आवाज भारी थी। लिंग पैंट के अंदर और तन गया था। गर्मी बढ़ रही थी।
उसने अपना हाथ मेरे फाटे से अंदर कर जांघिया को हटाया और मेरे तने हुए लिंग को निकालते हुए कहा देखूं तो सही कैसा लगता है दिखने में। उंगलियाँ गर्म मांस के चारों ओर लिपट गईं। जांघिया नीचे खिसकी। लिंग बाहर आ गया। सीधा तना हुआ। नसों की रेखाएँ साफ दिख रही थीं। सिर चमक रहा था।
मेरे मोटे लिंग को देख कर खूब खुश हुई अरे बाप रे कितना बड़ा लिंग है आपका। दीदी कैसे लेती हैं इसे। उसकी आँखें बड़ी हो गईं। हाथ लिंग की मोटाई नाप रहा था। उंगलियाँ नीचे से ऊपर तक फेर रही थीं। आवाज में हैरानी और शरमाना दोनों थे।
आ जाओ तुम्हें भी दिखा देता हूं कि इसे कैसे लिया जाता है। मैंने धीरे से कहा। हाथ उसके सिर की ओर बढ़ा।
धत्त मुझे नहीं देखना कुछ आप बड़े वो हो उसने शरमा कर कहा लेकिन उससे हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की। गाल लाल थे। निगाहें लिंग पर टिकी रहीं। उंगलियाँ अभी भी उसके चारों ओर थीं। हल्के से दबा रही थीं।
इसे एक बार चूमो तो करो मैंने उसके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर झुकाते हुए कहा। हथेली उसके बालों में फंस गई। धीरे से नीचे की ओर दबाव दिया।
उसने झिझकते हुए मेरे लिंग पर अपने होंठ टिका दिए। होंठ गर्म और नरम थे। सिर्फ सिर के ऊपर टिके। साँस उसकी गरमाहट पर पड़ी। लिंग और सख्त हो गया।
अब तक उसका दूसरा स्तन भी खाली हो गया था। निप्पल ढीला पड़ चुका था। दूध की धार बंद हो गई थी। त्वचा पर हल्की गीली चमक बाकी थी।
उसके झुकने के कारण मेरे मुंह से चुचुक छूट गया। ठंडी हवा निप्पल पर लगी। वह लाल और गीला रह गया।
मैंने उसके सिर को हल्के से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोल कर मेरे लिंग को जगह दे दी। होंठ फैल गए। गर्म मुंह अंदर समा गया। जीभ नीचे की ओर दबी। लिंग का अगला हिस्सा उसके मुंह में चला गया। गरमी और नमी चारों ओर लिपट गई।
मेरा लिंग उसके मुंह में चला गया। धीरे धीरे और अंदर गया। उसके गाल अंदर की ओर खिंचे। लार लिंग के चारों ओर फैल गई। गर्म और गीला अहसास पूरे शरीर में दौड़ गया।
उसने 2 3 बार मेरे लिंग को अंदर बाहर किया फिर उसे अपने मुंह से निकाल लिया। होंठ लिंग के सिर तक आए फिर नीचे गए। जीभ नीचे से ऊपर फिसली। लार की चमक लिंग पर रह गई। आवाज में हल्की घुरघुराहट निकली।
ऐसे नहीं ऐसे मजा नहीं आ रहा है। उसने कहा। आवाज में अधूरी इच्छा थी। होंठ अभी भी लिंग के पास थे। साँसें तेज चल रही थीं।
हां अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा देना चाहिए मैंने अपने कपड़ों की तरफ इशारा किया। कुर्ता और पैंट अभी आधे उतरे हुए थे। शरीर गर्म था।
मैंने उठकर अपने कपड़े उतार दिए फिर उसे बाहों से पकड़ कर उठाया। उसकी साड़ी और साया को उसके बदन से अलग कर दिया। कपड़े एक एक करके खिसकते गए। साड़ी पैरों के पास गिर गई। साया नीचे उतर गया। उसका पूरा शरीर सामने आ गया। चिकनी त्वचा। भारी स्तन अभी भी थोड़े तने हुए। जांघें मुलायम और गोल।
अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। कमरे की हवा नंगी त्वचा पर लग रही थी। उसके शरीर से हल्की पसीने और दूध की गंध आ रही थी। मेरा लिंग अभी भी तना खड़ा था।
तभी किसी ने दरवाजे पर दस्तक दी। तीन तेज ठक ठक की आवाज आई। दोनों के शरीर एक साथ सिकुड़ गए।
कौन हो सकता है हम दोनों हड़बड़ी में अपने अपने कपड़े एक थैली में भर लिए और निशा बर्थ पर सो गई। कपड़े जल्दी जल्दी थैली में धंसे। हाथ काँप रहे थे। उसने बर्थ पर पीठ के बल लेट गई। साँसें तेज चल रही थीं।
मैंने उसके नंगे शरीर पर एक चादर डाल दी। चादर उसके स्तनों और जांघों तक पहुँची। सिर्फ चेहरा बाहर रहा। आँखें बड़ी बड़ी थीं।
इस बीच 2 बार दस्तक और हुई। ठक ठक फिर ठक ठक। आवाज और करीब लग रही थी।
मैंने दरवाजा खोला बाहर टिकट चेकर खड़ा था। उसने अंदर आकर टिकट जांची और कहा ये दोनों सीट खाली रहेंगी इसलिए आप चाहें तो अंदर से बंद करके सो सकते हैं। उसने टिकट देखी। निगाहें बर्थ की ओर गईं लेकिन कुछ नहीं कहा। फिर मुड़ा।
और बाहर चला गया। कदमों की आवाज गलियारे में दूर होती गई।
मैंने दरवाजा बंद किया और निशा के बदन से चादर को हटा दिया। चादर सरकते ही उसका नंगा शरीर फिर सामने आ गया। स्तन हल्के से काँप रहे थे। जांघें मिली हुई थीं।
निशा शर्म से अपनी जांघों के जोड़ को और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी। हथेलियाँ स्तनों पर दबी थीं। जांघें एक दूसरे से सट गई थीं। गाल लाल थे। आँखें झुकी हुई थीं।
मैंने उसके हाथों को पकड़ कर हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा विनती है मुझे शर्म आ रही है। हाथ उसके हाथों से अलग हुए। शरीर थोड़ा सिकुड़ गया। आवाज काँप रही थी। लेकिन उसने प्रतिरोध नहीं किया।
मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा। शरीर उसके ऊपर आ गया। मेरा चेहरा उसकी जांघों के बीच पहुँचा। गर्म और नम योनि मेरे होंठों से सट गई। हल्की खट्टी मीठी गंध आई।
इससे मेरा लिंग उसके मुंह के ऊपर था। तना हुआ लिंग उसके चेहरे के करीब लटक रहा था। सिर उसके होंठों को छू रहा था।
उसने अपने मुंह और पैरों को खोला। होंठ फैल गए। जांघें अलग हुईं। एक साथ उसके मुंह में मेरा लिंग चला गया और उसकी योनि पर मेरे होंठ सट गए। गर्म मुंह लिंग के चारों ओर बंद हो गया। जीभ नीचे दबी। मेरी जीभ उसकी फांक पर लगी।
आह शिवम जी क्या कर रहे हो मेरा बदन जलने लगा है। रुपम ने कभी इस तरह मेरी योनि पर अपनी जीभ नहीं डाली उसके पैर छटपटा रहे थे। आवाज में कराह थी। कमर उठी। पैर हवा में हिलने लगे। योनि और गीली हो गई।
उसने अपनी टांगों को हवा में उठा दिया और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी योनि पर दबाने लगी। एड़ियाँ मेरी पीठ पर टिक गईं। उंगलियाँ मेरे बालों में फंस गईं। सिर उसकी योनि पर और दब गया। जीभ अंदर तक पहुँची।
मैं उसके मुंह में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा। कमर हिल रही थी। लिंग उसके गले तक जा रहा था फिर बाहर निकल रहा था। लार लिंग पर चमक रही थी। गहरी घुरघुराहट उसके गले से निकल रही थी।
मेरे हाथों ने उसकी योनि की फांकों को अलग अलग कर रखा था और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी। अंगूठे फांक खोल रहे थे। जीभ अंदर गोला बना रही थी। ऊपर की गाँठ को चाट रही थी। उसके शरीर में तेज कंपन दौड़ रही थी। योनि और ज्यादा गीली हो गई। रस मेरे होंठों और ठुड्डी पर लग रहा था।
वो पूरी तन्मयता से अपने मुंह में मेरे लिंग को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी। गाल अंदर खिंच रहे थे। गला लिंग को निगलने की कोशिश कर रहा था। आँखें बंद थीं। नाक से तेज साँसें निकल रही थीं।
काफी देर तक इसी तरह उनहत्तर वाली मुद्रा में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद लगभग दोनों एक साथ खल्लास हो गए। उसका मुंह मेरे रस से पूरा भर गया था। मेरे शरीर में जोर का झटका लगा। लिंग उसके मुंह में धड़का। गर्म गाढ़ा रस निकल पड़ा। उसी समय उसकी योनि मेरे मुंह पर और दब गई। उसके शरीर में लहर दौड़ी। रस और ज्यादा बह निकला।
उसके मुंह से चू कर मेरा रस एक पतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके बालों में जाकर खो रहा था। सफेद गाढ़ी धार कोने से निकली। गाल पर बहती हुई बालों में समा गई। वह निगलने की कोशिश कर रही थी लेकिन कुछ बाहर निकल गया।
मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठ कर बैठ गई। शरीर कांप रहे थे। साँसें उखड़ी हुई थीं। चेहरे पर पसीना चमक रहा था।
हम दोनों एकदम नंगे थे और दोनों के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनों एक दूसरे से लिपट गए और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गए मानो अब कभी भी न अलग होने की कसम खा ली हो। होंठ गर्म और गीले थे। जीभें मिल रही थीं। हाथ पीठ और कमर पर फिर रहे थे।
कुछ मिनट तक यूं ही एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे फिर हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे। उसके होंठ मेरे गले पर गए। मेरे होंठ उसके कंधे और स्तन के ऊपर घूमे। त्वचा नमकीन और गर्म थी।
अब आ जाओ मैंने निशा को कहा। आवाज भारी थी। लिंग फिर तन चुका था। उसके पेट से सट रहा था।
जेठजी थोड़ा संभाल कर अभी अंदर नाजुक है आपका बहुत मोटा है कहीं कोई जख्म न हो जाए। उसने धीरे से कहा। आवाज में डर और इच्छा दोनों थे। जांघें हल्की काँप रही थीं।
ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है। मैंने कहा। हाथ उसकी कमर पर था।
निशा उठकर बर्थ पर चौपाया हो गई। हाथ और घुटने बर्थ पर टिके। कमर नीचे झुकी। गांड थोड़ी ऊपर उठी। योनि पीछे से साफ दिख रही थी। गीली और गुलाबी। फांक हल्की खुली हुई थी।
मैं पीछे से उसकी योनि पर अपना लंड सटा कर हल्का सा धक्का मारा। मेरे भाई की पत्नी की योनि गीली तो पहले ही हो रही थी। धक्के से मेरे लंड के आगे का सिरा अंदर धंस गया। गर्म और तंग दीवारें सिर को दबोच गईं। सिरा अंदर समा गया। बाकी बाहर रहा।
एक बच्चा होने के बाद भी उसकी योनि काफी कसी हुई थी। मांस चारों ओर से कस रहा था। गर्मी और नमी लिंग को लपेट रही थी। आगे बढ़ना मुश्किल लग रहा था।
वो दर्द से आआह्हह कर उठी। गर्दन ऊपर उठी। उंगलियाँ चादर भींच लीं। कमर सिकुड़ गई। आवाज में दर्द साफ था।
मैं कुछ देर के लिए उसी मुद्रा में शांत खड़ा रहा। लिंग आधा अंदर था। हिलाया नहीं। उसके शरीर की कंपन को महसूस करता रहा। साँसें दोनों की तेज चल रही थीं।
कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो निशा ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड पूरा अंदर चला जाए। कमर पीछे आई। तंग योनि लिंग को पूरा निगल गई। जड़ तक समा गया। दोनों के शरीर सट गए।
डालो न रुक क्यों गए। उसने कराहते हुए कहा। आवाज में अधीरता थी। गांड हल्की हिल रही थी।
मैंने सोचा तुम्हें दर्द हो रहा है इसलिए। मैंने पीछे से कहा। हाथ उसकी कमर पर थे।
इस दर्द का मजा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है दर्द तो करेगा ही। उसने कहा। आवाज में कराह मिली हुई थी। उसने फिर पीछे धक्का दिया।
फिर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी। कमर लय में हिल रही थी। योनि लिंग को अंदर बाहर कर रही थी। गीली आवाज आने लगी। त्वचा की टकराहट की आवाज गूंज रही थी।
मैं पीछे से शुरू शुरू में संभल कर धक्का मार रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा। कमर तेज हिल रही थी। हर धक्के में लिंग पूरा अंदर जा रहा था। योनि और कस रही थी।
हर धक्के से उसके दूध भरे स्तन उछल उछल जाते थे। स्तन आगे पीछे झूल रहे थे। निप्पल हवा में कांप रहे थे। वजन से नीचे लटक रहे थे।
मैंने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके स्तनों को अपने हाथों से थाम लिया लेकिन मसला नहीं नहीं तो सारी बर्थ उसके दूध की धार से भीग जाती। हथेलियाँ गोल मांस को थामे हुए थीं। उंगलियाँ निप्पल से दूर रहीं। सिर्फ सहारा दिया। स्तन हाथों में कांप रहे थे।
काफी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने अपने सिर को जोर जोर से झटकना चालू किया। बाल बिखर गए। गर्दन इधर उधर हिल रही थी। कमर और तेज हिलने लगी। योनि लिंग को जोर से दबोच रही थी।
आआह शीईव्व अम्मम आआअह तउम्म इतनए दिन कहा थीए ऊऊ ओह्हह माआ ईईइ माअर्र र्रर जाऊऊं गीइ मुझए माअर्रर डालओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लओ और उसकी योनि में रस की बौछार होने लगी। आवाज टूट टूट कर निकल रही थी। शरीर में तेज लहर दौड़ी। योनि जोर से सिकुड़ी। गर्म रस लिंग के चारों ओर फूट पड़ा। जांघें कांपने लगीं। कमर अकड़ गई।
कुछ धक्के मारने के बाद मैंने उसे चित लिटा दिया और ऊपर से अब धक्के मारने लगा। पीठ बर्थ पर टिकी। पैर फैले। मैं उसके घुटनों के बीच आ गया। लिंग फिर योनि में धंसा। ऊपर से धक्के शुरू हुए। स्तन हर धक्के पर उछल रहे थे।
आअह मेरा गला सूख रहा है। उसका मुंह खुला हुआ था और जीभ अंदर बाहर हो रही थी। आवाज सूखी निकल रही थी। होंठ काँप रहे थे। गर्दन पीछे थी।
मैंने हाथ बढ़ा कर पानी की बोतल उठाई और उसे 2 घूंट पानी पिलाया। बोतल उसके होंठों से लगाई। पानी धीरे धीरे गले में उतरा। उसने निगला। गला तर हुआ।
उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक चुंबन किया। होंठ गीले थे। पानी का स्वाद दोनों के मुंह में मिल गया। जीभ हल्की सी निकली।
चोदो शिवम चोदो जी भर कर चोदो मुझे। आवाज में कराह और भूख दोनों थे। कमर नीचे से उठी। योनि लिंग को और अंदर खींच रही थी।
मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा। कमर तेज हिल रही थी। हर धक्के में लिंग पूरा अंदर जा रहा था। योनि गीली आवाज कर रही थी। उसके नाखून मेरी पीठ पर चल रहे थे। स्तन मेरे सीने से सट सट कर दब रहे थे।
काफी देर तक धक्के लगाने के बाद मैंने रस में डूबे अपने लिंग को उसकी योनि से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया। लिंग चमक रहा था। गीला और तना हुआ। मैं सीट पर लेट गया। हाथ दोनों ओर फैले।
आजा मेरे ऊपर मैंने निशा को कहा। आवाज भारी थी। निगाहें उसके नंगे शरीर पर थीं।
निशा उठ कर मेरे बर्थ पर आ गई और अपने घुटने मेरी कमर के दोनों ओर रख कर अपनी योनि को मेरे लिंग पर जमा कर धीरे धीरे मेरे लिंग पर बैठ गई। घुटने मेरे कूल्हों के पास टिके। हाथ मेरे सीने पर रखे। योनि लिंग के सिर पर बैठी। धीरे धीरे नीचे उतरी। तंग मांस लिंग को फिर निगलने लगा। पूरा अंदर समा गया। वह बैठ गई। दोनों के शरीर सट गए।
अब वो मेरे लिंग की सवारी कर रही थी। कमर ऊपर नीचे हो रही थी। योनि लिंग पर चढ़ उतर रही थी। स्तन सामने झूल रहे थे। साँसें तेज थीं। चेहरा तन गया था।
मैंने उसके चुचुक को पकड़ कर अपनी ओर खींचा तो वो मेरे ऊपर झुक गई। उंगलियाँ निप्पल के चारों ओर बंद हुईं। स्तन मेरे मुंह के करीब आ गया। शरीर आगे झुका। बाल मेरे चेहरे पर गिरे।
मैंने उसके चुचुक को जमा कर के दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुंह में गिरी। निप्पल दबते ही गर्म मीठी धार फूटी। मुंह में सीधी गिरी। मैंने निगला। स्वाद फिर वही गाढ़ा और मीठा था।
अब वो मुझे चोद रही थी और मैं उसका दूध निचोड़ रहा था। कमर ऊपर नीचे चल रही थी। योनि लिंग को कस कर चढ़ा उतर रही थी। दूसरा हाथ उसके दूसरे स्तन पर था। निप्पल दबते ही छोटी छोटी धारें मुंह में गिरती रहीं। उसके शरीर में पसीना चमक रहा था। साँसें तेज थीं।
काफी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी शिवम मेरे निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो। आवाज टूट गई। कमर अकड़ गई। योनि जोर से सिकुड़ी। नाखून मेरे सीने में धंस गए। शरीर कांपने लगा।
हम दोनों साथ साथ झड़ गए। मेरे लिंग ने उसके अंदर धड़कते हुए रस छोड़ा। गर्म गाढ़ा प्रवाह योनि की दीवारों पर लगा। उसी समय उसकी योनि से रस फूटा। दोनों के शरीर एक साथ कांपे। वह मेरे ऊपर गिर गई। स्तन मेरे चेहरे पर दब गए।
काफी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लंबी लंबी सांसें लेती रही। सीना ऊपर नीचे हो रहा था। पसीना दोनों के शरीर को चिपका रहा था। लिंग अभी भी उसके अंदर था। धीरे धीरे ढीला पड़ रहा था। हाथ उसकी पीठ पर थे।
फिर जब कुछ सामान्य हुई तो उठ कर सामने वाली सीट पर लेट गई। शरीर कांपते हुए उठा। योनि से लिंग निकला। रस की चमक जांघों पर रह गई। वह दूसरी सीट पर पीठ के बल लेट गई। एक हाथ माथे पर था। साँसें धीमी पड़ रही थीं।
हम दोनों लगभग पूरे रास्ते नंगे एक दूसरे को प्यार करते रहे। हाथ शरीर पर फिरते रहे। होंठ गले और कंधों पर लगते रहे। कभी स्तनों को सहलाया। कभी जांघों के बीच हाथ रखा। ट्रेन की लय में शरीर हल्के हिलते रहे। बातें धीमी आवाज में होती रहीं।
लेकिन उसने दोबारा मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया। उसकी गर्भाशय में हल्का हल्का दर्द हो रहा था। हाथ पेट पर फेरा। चेहरा थोड़ा तन गया। आवाज में थकान थी। उसने सिर हिला दिया जब मैं करीब गया।
पर उसने मुझे आश्वासन दिया आज तो मैं आपको और नहीं दे सकूंगी लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लूंगी अपने अंदर। और हां अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनों भाइयों में से किसका बच्चा आता है। आवाज में हल्की मुस्कान थी। आँखें मेरे चेहरे पर टिकी थीं। हाथ मेरे हाथ में था।
उस यात्रा के दौरान कई बार मैंने उसके दूध की बोतल पर जरूर हाथ साफ किया।
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