Vidhwa mausi sex story: बात आज से १ साल पहले की है, जब हम सभी लोग दर्शन कर के वापस आ रहे थे। हम सभी लोग एक ट्रक में थे। नीचे गद्दे बिछाए हुए थे। रात हो चुकी थी। बरसात का मौसम होने की वजह से ट्रक पूरा ढक दिया गया था। मैं सबसे पीछे लेटा हुआ था। मेरे सामने मेरी मौसी लेटी हुई थीं। वहाँ अंधेरा था।
मेरी मौसी बहुत मोटी हैं और बेहद हॉट भी लगती हैं। वे विधवा हैं, उनके पति का देहांत दस साल पहले हो चुका था। ट्रक की हल्की-हल्की हरकत और बारिश की आवाज के बीच सभी लोग गहरी नींद में सो चुके थे। मैंने सोने के लिए जैसे ही अपने पैर आगे किए, मेरा दायाँ पैर सीधे उनकी जाँघों के बीच वाली जगह पर जा लगा। पाँव की नरम त्वचा उनके घने बालों वाली झाँटों पर छूते ही मेरे पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई। मेरे लंड में तुरंत खून का उबाल आया और सात इंच लंबा मेरा मोटा लंड फटाक से पूरी तरह खड़ा हो गया। उसकी नसें फूल गईं और सिर पर पसीना छूटने लगा।
अब मैं मन ही मन मौसी को चोदने के बारे में सोचने लगा था। हिम्मत करके मैंने अपने पैर को और आगे बढ़ाया। पाँव के अँगूठे से उनकी गर्म और नरम चूत को धीरे-धीरे महसूस किया। अँगूठे की नोक से उनकी चूत की फाँक को दबाया। मौसी अचानक जाग गईं। मैं डर गया कि कहीं वे चीखें या डाँटें न दें। तुरंत मैंने अपने पैर पीछे खींच लिए और आँखें बंद करके चुपचाप लेट रहा। कुछ देर तक दिल की तेज धड़कनों के साथ इंतजार करता रहा।
थोड़ी देर बाद जब सब शांत लगा, तो मैंने फिर से हिम्मत की। अपने दोनों पैरों को धीरे से उनकी ओर बढ़ाया और पाँव की उँगलियों को उनकी चूत पर लगा दिया। इस बार उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। मेरी हिम्मत बढ़ गई। अब मैंने पाँव के अँगूठे से उनकी चूत की फाँक को अच्छी तरह दबाया और हल्का-हल्का घुमाया। उनके मुँह से एक दबी हुई सिसकारी निकल पड़ी। “आह…” उन्होंने अपने पैर और फैला दिए ताकि मैं और अच्छे से छू सकूँ। उनकी साँसें तेज हो गईं।
अब मैं चुपके से उनके पास सरक गया और उनके बगल में लेट गया। ऊपर से ही उनकी भारी-भारी चूचियों को दोनों हाथों से दबाने लगा। उनकी नाईटी के कपड़े के ऊपर से भी उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ नरम और गर्म महसूस हो रही थीं। थोड़ी देर तक दबाने और मसलने के बाद मैंने अपनी एक उँगली उनकी नाईटी के नीचे डाल दी और सीधे उनकी चूत में घुसा दी। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी। उँगली अंदर जाते ही वे आहें भरने लगीं। उनकी चूत की दीवारें मेरी उँगली को कसकर पकड़ रही थीं।
तभी ट्रक में कुछ और हलचल की आवाज आई। शायद कोई और जाग गया था। हम दोनों तुरंत चुप हो गए। मैंने जल्दी से आँखें बंद कर लीं और सोने का नाटक करने लगा। कुछ देर बाद ट्रक घर पहुँच गया।
मैंने मन ही मन तय कर लिया था कि अब इन्हें घर पर पूरी तरह चोदना है। दूसरे दिन मौसी अपने घर जाने के लिए सामान बाँध रही थीं। वे हमारे यहाँ से पचास किलोमीटर दूर रहती थीं। उन्होंने मेरी माँ से कहा कि साहिल को भी साथ ले चलती हूँ, थोड़े दिन मेरे पास रहने दो। माँ भी राज़ी हो गईं।
मैं तो खुश हो गया था। जल्दी से अपना सामान बाँध लिया और मौसी के साथ चल पड़ा। मैं आपको बता दूँ कि मौसी की दो बेटियाँ हैं। दोनों की शादी हो चुकी है, इसलिए वे अकेली ही रहती हैं। उनका बंगला काफी बड़ा है। हम लोग उनके घर पहुँचे। मैं जाकर तरोताज़ा होकर बेडरूम में आ गया और टीवी देखने लगा। मौसी किचन में खाना बनाने लगीं। थोड़ी देर बाद मौसी की आवाज आई कि खाना खा लो।
हमने साथ में खाना खाया। खाना खत्म होने के बाद मौसी ने कहा कि तुम बेडरूम में जाओ, मैं बर्तन साफ करने के बाद आती हूँ। मौसी जब आईं तो वे काफी सुंदर लग रही थीं। उन्होंने गुलाबी रंग की नाईटी पहनी थी। आते ही मौसी ने दरवाजा बंद कर लिया और मुझे चूमने लगीं। मैं भी उन्हें जोर से चूमने लगा। चूमते-चूमते हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतार फेंके। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। मौसी मेरे लंड को देखकर हैरान थीं। “शाही, तेरा तो काफी बड़ा है! तेरे मौसा जी के दो लंडों के बराबर है।” यह कहकर उन्होंने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।
चूसते-चूसते वह कभी-कभी दाँत भी गड़ा देतीं, वह पागलों की तरह चूसे जा रहीं थीं। उनकी गर्म और नम मुंह की लार मेरे लंड पर बह रही थी। वे अपनी जीभ को लंड की पूरी लंबाई पर फिरातीं, सुपाड़े को चूसतीं और कभी-कभी हल्के से दांत गड़ा कर मुझे झुरझुरी दे देतीं। मैं उनके बालों को पकड़े हुए कराह रहा था। उनकी आंखें ऊपर उठाकर मेरी आंखों में देख रही थीं।
मैंने कहा, “मौसी, मौसाजी के मरने के बाद क्या तुमने कभी सेक्स नहीं किया है?”
“दस साल बाद आज पहली बार मर्द का लंड ले रही हूँ,” उन्होंने बताया। उनकी आवाज में लालसा और राहत दोनों थी।
“दस साल तुमने कैसे चलाया?” मैंने पूछा।
तो वे उठीं, बिस्तर के नीचे से एक लंबा और मोटा कृत्रिम लंड निकाला और कहने लगीं, “यही मेरा पति है जो हर रात मुझे शांत करता था।” उन्होंने उसे मेरे सामने हिलाया। उसकी नोक पर अभी भी उनकी पुरानी चिपचिपी चूत की गंध आ रही थी।
अब हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए। मैं उनके नीचे लेट गया और उन्होंने मेरे मुंह के ऊपर अपनी गीली चूत रख दी। उनकी चूत एकदम साफ थी, एक भी बाल नहीं था। गुलाबी और चमकदार। मैंने अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी फाँक को चाटना शुरू किया। उनकी मीठी-खट्टी चूत की गंध मेरे नथुनों में भर गई। उन्होंने भी मेरे लंड को मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगीं। करीब दस मिनट तक हम एक-दूसरे को चाटते, चूसते और कराहते रहे। उनकी चूत से रस टपक रहा था जो मेरे मुंह पर गिर रहा था।
चाटने के बाद मैंने उन्हें सीधा लिटाया और उनके ऊपर चढ़ गया। अपना सख्त और गर्म लंड उनकी चूत पर रखकर जोर-जोर से रगड़ने लगा। मौसी “शशश्स्सस्सस्सस…” सिसकारियां भरने लगीं। उनका चेहरा लाल हो गया था। वे कराहते हुए बोलीं, “शाही अब रहा नहीं जाता… जल्दी डाल दे और मेरी चूत फाड़ दे।”
मैंने अपना मोटा लंड उनकी चूत के मुंह पर रखा और एक तेज झटके के साथ पूरी लंबाई में पेल दिया। उनकी चूत तंग थी, लेकिन पूरी तरह गीली। लंड अंदर जाते ही उन्होंने जोर से आह भरी। मैं तेज-तेज धक्के देने लगा। हर धक्के पर उनकी भारी चूचियां ऊपर-नीचे हिल रही थीं। लगभग पांच मिनट तक जोरदार चुदाई के बाद उनकी चूत सिकुड़ने लगी। उन्होंने अपनी आंखें बंद कीं, शरीर अकड़ गया और वे जोर से झड़ गईं। उनकी चूत से गर्म रस मेरे लंड पर बह निकला।
फिर मैंने उन्हें कुतिया की मुद्रा में आने को कहा। वे घुटनों के बल बैठ गईं और अपनी गोल-मोटी गांड ऊपर कर दी। मैंने उनकी गांड को दोनों हाथों से दबाया और मसलने लगा। उन्होंने कहा, “चूत में ही डालो ना!”
“मौसी मैं तो गांड ही मारूंगा,” मैंने कहा।
“ऐसा तो तेरे मौसा ने भी कभी नहीं किया। बहुत दर्द होगा,” उन्होंने डरते हुए कहा।
“मौसी मैं आराम से डालूंगा,” यह कहकर मैंने अपने लंड के सुपाड़े को उनकी गांड की तंग छेद पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। मौसी जोर से चिल्ला पड़ीं, “बाहर निकाल…”
पर मैंने लंड को बाहर नहीं निकाला। दर्द की वजह से मौसी की आंखों से आंसू बहने लगे। उनका पूरा शरीर कांप रहा था। मैं थोड़ी देर रुक गया, फिर आहिस्ता-आहिस्ता छोटे-छोटे झटके देने लगा। धीरे-धीरे उनका दर्द कम हुआ और वे भी अपनी गांड हिलाने लगीं। जब वे पूरी तरह तैयार हो गईं, तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी। उनकी गांड मेरे लंड को कसकर दबा रही थी। थोड़ी ही देर बाद मैंने जोर से धक्का मारा और अपनी सारी गर्म वीर्य उनकी गांड के अंदर छोड़ दिया। फिर मैं उनके बगल में आकर लेट गया।
उस रात मैंने मौसी को पांच बार चोदा। अगले पंद्रह दिनों तक मैं वहीं रहा और उनकी जमकर चुदाई करता रहा। कई बार हम ब्लू-फिल्में देखते हुए भी चुदाई का आनंद उठाते। फिर मैं घर वापस आ गया। मगर फिर भी जब भी मौका मिलता है, मैं उनके घर जाकर जबर्दस्त चुदाई कर आता हूँ।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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