Chachu sex story: हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम गीतांजलि है और मैं हरियाणा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 26 साल है और मैं अभी तक अनमैरिड हूँ। पर कुँवारी नहीं। आप लोग समझते होंगे कुँवारी और अनमैरिड में फर्क। चलो यहाँ पर मैं पहली बार अपनी रियल लाइफ के बारे में लिख रही हूँ। आज मैं आप लोगों को अपनी चुदाई के बारे में बताऊँगी।
मेरा नाम गीतांजलि है और मैं अपनी स्टडी पूरी करने के बाद जॉब ढूँढ रही थी। फिर मैंने एक स्कूल में टीचर की जॉब शुरू की। लेकिन मैं उस जॉब से खुश नहीं थी। मैं और मेरे माता-पिता कोई अच्छी जॉब चाहते थे, जैसे बैंक की जॉब। मेरे एक चाचू हैं जो पंजाब में रहते हैं, उनका नाम रंजीत है और वो बहुत पैसे वाले हैं। इसलिए मम्मी ने उनसे मेरी जॉब के बारे में बात की। चाचू ने कहा कि ठीक है, मैं गीतांजलि को जॉब दिला दूँगा। इसी बैंक में मेरा जानकार है। मैं उससे बात करूँगा। फिर चार-पाँच दिन बाद चाचू का घर पर फोन आया कि उन्होंने अपने दोस्त से जॉब के बारे में बात की है। उस दोस्त ने मुझे दिल्ली इंटरव्यू के लिए बुलाया है।
मम्मी ने कहा कि ठीक है, यह गुरुवार को इंटरव्यू देने चली जाएगी अकेले। फिर मम्मी ने कहा कि लड़की का अकेले जाना ठीक नहीं होगा। अगर आपको टाइम हो तो आप चले जाओ साथ। चाचू ने कहा कि मुझे तो काम है, मैं नहीं जा पाऊँगा। पर अपने फ्रेंड को फोन कर दूँगा, कोई चिंता की बात नहीं है। मम्मी ने कहा जैसा आपको ठीक लगे। फिर मंगलवार को चाचू का फोन दोबारा आया कि उनकी उनके दोस्त से बात हो गई है। इंटरव्यू बुधवार को हो जाएगा और वो भी मेरे साथ दिल्ली चले जाएँगे।
ये सुनकर मम्मी ने कहा कि ठीक है, अच्छा है कि आप साथ चले जाएँगे। बात भी अच्छे ढंग से हो जाएगी। फिर चाचू ने कहा कि वो शाम तक घर आ जाएँगे और दिल्ली के लिए सुबह जल्दी निकल जाएँगे। फिर वो शाम को नौ बजे घर पहुँच गए। हवा में उनकी महक और थकी हुई साँसें साफ महसूस हो रही थीं। सुबह पाँच बजे उठकर मैं और चाचू दिल्ली के लिए निकल गए। सड़क पर सुबह की ठंडी हवा चेहरे पर लग रही थी, गाड़ी की सीट पर बैठकर मैं थोड़ी घबराई हुई थी। दिल्ली पहुँचकर चाचू ने मुझे ब्रेकफास्ट के लिए पूछा। मैंने कहा कि भूख तो लगी है। फिर हम दोनों एक रेस्टोरेंट में ब्रेकफास्ट के लिए बैठ गए।
फिर मैंने देखा कि वो तो एक बार था। मैंने चाचू से कहा कि ये तो बार है। चाचू ने कहा सॉरी, ध्यान नहीं दिया। चलो किसी और रेस्टोरेंट में चलते हैं। फिर हम दोनों दूसरे रेस्टोरेंट में चले गए और हमने ब्रेकफास्ट किया। ताज़ी पराठे की महक, गरम चाय की भाप और चाचू की बातों से माहौल हल्का हुआ। फिर उन्होंने अपने दोस्त को फोन किया। उनके दोस्त ने कहा कि बॉम्बे से उनके बॉस आने वाले हैं। उनके आने के बाद इंटरव्यू होगा। चाचू ने मुझसे कहा कि जब तक उनके दोस्त के बॉस आएँ, हम दिल्ली घूम लेते हैं। और इस तरह हम तीन बजे तक दिल्ली घूमते रहे। धूप में पसीना, ट्रैफिक की आवाज़ें, जगह-जगह की भीड़ और चाचू का साथ, सब कुछ नया-नया लग रहा था।
फिर मेरे कहने पर उन्होंने दोबारा अपने दोस्त को फोन किया। उन्होंने कहा कि उनके बॉस की फ्लाइट लेट है, वो शाम तक आएँगे। चाचू ने कहा ठीक है, हम सात बजे ऑफिस पहुँच जाएँगे। दोस्त ने कहा ठीक है। फिर जब शाम को सात बजे चाचू और मैं उनके दोस्त के ऑफिस पहुँचे तो वो वहाँ नहीं था। चाचू ने फोन करके पूछा। उनके दोस्त ने कहा कि उनके बॉस रात को यहीं रेस्ट करेंगे, तो वो एक रूम बुक करवा दें। चाचू ने एक होटल में पहुँचकर एक रूम बुक करवा दिया। होटल की लॉबी में एयरकंडीशन की ठंडक, फर्श की चमक और हल्की संगीत की आवाज़ महसूस हो रही थी। फिर मुझसे बोले अगर फ्रेश होना है तो हो लो। मैंने कहा हाँ ठीक है, मैं फ्रेश हो लेती हूँ। तो हम दोनों उस रूम में चले गए।
रूम में पहुँचकर मैं फ्रेश होने बाथरूम में चली गई। गर्म पानी की धार मेरे शरीर पर गिर रही थी, साबुन की महक हवा में फैल गई थी। मैंने अपने बालों को धोया, चेहरे और गर्दन पर पानी बहाया और कुछ देर तक शीशे में खुद को देखा। जब मैं बाहर आई तो चाचू कोल्ड ड्रिंक पी रहे थे। उनकी आँखें मेरी तरफ़ थीं और होठों पर एक अजीब सी मुस्कान थी। उन्होंने मुझसे कोल्ड ड्रिंक पूछी तो मैंने कहा हाँ, मुझे भी पीनी है। उन्होंने एक ग्लास में कोल्ड ड्रिंक डालकर मुझे दे दी।
कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद मुझे नशा सा होने लगा। सिर घूमने लगा, शरीर में एक अनजानी गर्माहट फैल गई। चाचू ने कहा कि लेट जाओ थोड़ी देर। वो मुझे पकड़कर बेड के पास ले गए, उनकी मजबूत उँगलियाँ मेरी बाँह पर दब रही थीं। उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे सिर पर हाथ घुमाने लगे। उनकी उँगलियाँ मेरे बालों में फँस रही थीं। फिर धीरे-धीरे उनका हाथ मेरे गाल पर आ गया। अचानक ही उन्होंने मुझे किस किया। उनके गर्म होठ मेरे होठों पर चिपक गए, जीभ मेरे मुँह में घुसने की कोशिश कर रही थी। मैं हैरान रह गई। मैंने कहा ये आप क्या कर रहे हैं चाचू।
तो उन्होंने कहा क्या हुआ, कुछ भी तो नहीं हुआ। आजकल ये तो आम बात है। किसी को पता नहीं चलेगा। मैंने कहा नहीं, ये सब मुझे पसंद नहीं और आप मेरे चाचू हैं। तो उन्होंने कहा इससे क्या फर्क पड़ता है। और ये कहकर वो मेरे पास लेट गए और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगे। उनकी उँगलियाँ तेज़ी से बटनों पर चल रही थीं। मैंने काफी कोशिश की उन्हें रोकने की पर वो नहीं माने। मुझ पर काफी कमज़ोरी आ गई थी। उन्होंने उसका फायदा उठाकर मेरी शर्ट उतार दी और बोले कि ये इंटरव्यू तो बहाना था। मैं तुम्हें दिल्ली इसीलिए लाया था।
काफी दिन से मेरी नज़र तुम पर थी। मैं तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहता था पर मौका नहीं लगा। जब तुम्हारी मम्मी ने मुझे तुम्हारी जॉब के लिए कहा तब मुझे लगा कि ये मौका अच्छा है। ये सुनकर मुझे अपने कान पर विश्वास नहीं हो रहा था। ये कहकर उन्होंने मेरे बोब्स को आराम-आराम से दबाने लगे। उनकी हथेलियाँ मेरी नरम छातियों पर फैल गईं, उँगलियाँ गहरी दबाव के साथ मसल रही थीं। उन्होंने बोले गीतांजलि इन्हें चूची कहते हैं। और ये कहकर उन्होंने मेरे चुचे बहुत ज़ोर से दबा दिए। दर्द और गर्माहट का मिश्रण मेरे बदन में दौड़ गया।
फिर उन्होंने मेरी ब्रा उतार दी। ठंडी हवा मेरी नंगी छातियों पर पड़ी। मेरी ब्राउन निप्पल्स सख्त होकर खड़ी हो गई थीं। उन्होंने मेरे चुचे चूसने लगे। उनका गर्म मुँह एक निप्पल को पूरी तरह निगल रहा था, जीभ उसके चारों तरफ़ घुम रही थी, दाँत हल्का-हल्का काट रहे थे। दूसरे चुचे को उन्होंने अपनी उँगलियों से मसलते रहे। फिर उन्होंने मुझे खड़ा करके मेरे सारे कपड़े उतार दिए और अपने भी उतार दिए। उनका लंड काफी बड़ा और मोटा था, नसें उभरी हुईं, सिर चमक रहा था। मैं उनके लंड को देखकर चीख पड़ी।
तो उन्होंने कहा चिंता मत कर गीतांजलि, दर्द नहीं होगा, आराम से डालूँगा। ये कहकर उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरे पूरे शरीर को चूमने लगे। उनके होठ मेरे गले से लेकर पेट तक, नाभि से लेकर जाँघों तक घूम रहे थे। उन्होंने मेरी चूची को काटा भी। अब हम दोनों पूरी तरह नंगे थे। मैं शर्मा रही थी पर चाचू ज़बरदस्ती कर रहे थे। उसने देर न करते हुए मेरे बोब्स को फिर से दबाने लगा। मेरी ब्राउन मोटी निप्पल्स टाइट हो गई थीं। वो तो चूसता ही रहा।
थोड़ी देर बाद मुझे मज़ा आने लगा तो मैंने भी अपनी टाँगों को फैलाया। फिर वो मेरी चूत चाटने लगा। उसकी गर्म जीभ मेरी फूली हुई चूत की लकीर पर ऊपर-नीचे घूम रही थी। मेरे मुँह से आवाज़ निकल गई, “सस्शह… आअहह….. चाचू ऐसा थोड़ी देर और करो ना…” तो वो समझ गया कि ये भूखी हो रही है। उसने थोड़ी देर और किया। अब की बार तो उसने अपनी पूरी ज़बान मेरी चूत के अंदर डाल दी और चाटने लगा मज़े ले-लेकर। मैं दर्द और मज़े के मारे तकिया दबा रही थी, मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी।
फिर उन्होंने अपने लंड पर ठंडा तेल लगाया। तेल की चिकनाहट उनकी उँगलियों से उनके मोटे लंड पर फैल रही थी। और मेरी गांड के पास लाकर उन्होंने मुझे किस करने लगे होठों पर ताकि मैं चिल्ला ना सकूँ।
फिर उन्होंने अपने लंड को ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारकर मेरी गांड में डाल दिया। मैं कुंवारी थी इसलिए मेरी चूत बहुत टाइट थी और उसका लंड तो पूरे सात दशमलव पाँच इंच का था, मोटा और नसों से भरा हुआ। जब मेरी गुलाबी चूत में उसने पहला धक्का मारा तो उसके लंड का टोपा अंदर चला गया। तीखा दर्द मेरी कमर तक दौड़ गया, जैसे कोई आग का गोला फट गया हो। मैं दर्द के मारे चिल्ला पड़ी, “धीरे डालो, दर्द होता है…” पर उसने मेरी सुनी नहीं। उसकी मजबूत कमर ने दूसरा ज़ोरदार धक्का मारा।
तब ऐसा लगा जैसे मेरी जान निकल गई। मैं ज़ोर से चीखी, “ऊऊओ…. चाचू तुम पागल हो क्या?” मेरी आँखें फट गईं, साँस अटक गई। उतने में मैंने एक और जटका महसूस किया तो पूरा लंड अंदर चला गया। मेरी चूत की दीवारें फटने जैसा महसूस हो रहा था। आआहह… क्या बताऊँ। मार डाला चाचू ने। मैं अब और नहीं सह सकती थी। मेरी टाँगें काँप रही थीं, पसीना मेरे माथे पर छूट रहा था।
फिर उसने कहा तुम्हारा पहली बार है इसलिए दर्द होगा, बाद में तुम्हें मज़ा आएगा। और अपना लंड अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के के साथ उसका मोटा लंड मेरी टाइट चूत को चीरता हुआ निकलता और फिर पूरी ताकत से घुसता। मैं दर्द के मारे मरी जा रही थी, “आह…… श…… नहीं… बस करो…” मेरी चूत से खून की गर्म बूँदें निकल रही थीं, चादर पर फैल रही थीं। उस दिन उसने मेरी सील तोड़ दी। मेरा खून भी बहुत निकला था।
फिर उसने मेरे ऊपर चढ़कर चुदाई की पंद्रह मिनट तक। उसकी भारी साँसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं, पसीने से भीगा उसका बदन मेरे नंगे बदन से रगड़ खा रहा था। उसके लंड के हर जोरदार धक्के से मेरी चूत और गहराई तक हिल रही थी। फिर उसने मेरी गांड पर और अपने लंड पर ठंडा तेल लगाया। तेल की चिकनाहट उनकी उँगलियों से रिस रही थी। धीरे-धीरे मेरी गांड में डालने लगा। बहुत मुश्किल से जा रहा था पर जाने लगा।
फिर एक ज़ोर का जटका देकर उसने एक ही बार में पूरा लंड घुसा दिया। तो मैं इतनी ज़ोर से चिल्लाई, “बहुत दर्द हो रहा है… चाचू मत करो यहाँ पर…” मेरी गांड की दीवारें फट रही थीं, जलन और दर्द का तूफान उठ रहा था। वो नहीं माना और मेरे और जटके मारने लगा। अब मैं समझ गई थी कि चाचू मुझे आज नहीं छोड़ने वाले। मुझे दर्द हो रहा था और मेरी आँखों से आँसू निकल गए थे और गांड में से खून भी निकल गया था।
फिर भी उसने मुझे नहीं छोड़ा और लगातार मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदता रहा। उसकी कमर हर धक्के के साथ तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उसका मोटा, गर्म लंड मेरी गांड की अंदरूनी दीवारों को बार-बार चीरता हुआ अंदर तक घुस रहा था। हर जटके के साथ मेरी कमर हिल रही थी, दर्द अभी भी था लेकिन उसमें अब एक अजीब सी गर्माहट भी घुलने लगी थी।
फिर वो सीधा लेट गया, मेरी कमर के नीचे तकिया रख दिया जिससे मेरी गांड थोड़ी ऊपर उठ गई। उसने अपना लंड मेरी चूत में डाला और एक ज़ोरदार जटका मारा। मैं दर्द से मरी जा रही थी। मेरी आँखें फट गईं, साँस अटक गई। मैं चिल्लाना चाह रही थी पर उन्होंने मेरा मुँह अपनी हथेली से कसकर बंद कर रखा था। उनकी उँगलियाँ मेरे गालों पर दब रही थीं। फिर वो धीरे-धीरे अपने लंड को मेरी गांड में अंदर-बाहर करने लगे।
धीरे-धीरे मुझे भी मज़ा आने लगा। मेरी चूत अब गीली हो चुकी थी, चिकनाहट बढ़ गई थी। मैं भी उछल-उछलकर अपनी गांड में उनका लंड लेने लगी। मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ रही थी, उनकी हर ठेली को और गहराई तक लेने के लिए। तो मेरे चाचू ने कहा कि मज़ा आ रहा है ना गीतांजलि। तो मैंने कहा हाँ… चाचू अब ठीक है।
फिर उन्होंने मुझे लगातार दो घंटे तक चोदा। पसीने से भीगा उनका बदन मेरे बदन से चिपका हुआ था। उनके लंड के हर धक्के से मेरी चूत और गांड दोनों में एक साथ गर्मी फैल रही थी। कभी वो मेरी चूत में जोरदार जटके मारते, कभी गांड में घुसकर धीरे-धीरे घुमाते। मेरी चीखें अब कराहों में बदल चुकी थीं, “आह… चाचू… और जोर से…” उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं, उनके हाथ मेरे बोब्स को मसल रहे थे, निप्पल्स को खींच रहे थे।
जब वो थक गए तो बोले थोड़ा आराम कर लो। मैं आराम करने लगी। मेरी टाँगें अभी भी काँप रही थीं, चूत और गांड दोनों से गर्म तरल पदार्थ रिस रहा था। मैंने देखा कि पंद्रह मिनट बाद ही चाचू ने मेरे पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मुझे चोदने के लिए तैयार थे। उनकी उँगलियाँ मेरी कमर पकड़कर मुझे अपनी तरफ खींच रही थीं।
उस रात उन्होंने मुझे चार बार चोदा। हर बार अलग-अलग पोजीशन में, कभी ऊपर से, कभी पीछे से, कभी मुझे घुटनों के बल बैठाकर। फिर सुबह जब मैंने अपने आप को बाथरूम में जाकर साफ किया और आकर बेड पर लेट गई तो चाचू मुझे किस करते हुए बोले, गीतांजलि अब दोबारा कब होगा। तो मैंने कहा जब घर पर कोई नहीं होगा।
मैं उस चुदाई को कभी नहीं भुला सकती। वो मेरी पहली चुदाई थी। लेकिन उसके बाद तो जैसे यह सिलसिला शुरू ही हो गया। चाचू चार-पाँच दिन में एक बार मेरे पास ज़रूर आते और जमकर मेरी चुदाई करते। अब तो मुझे भी चुदाई करने में बड़ा मज़ा आता था।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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