Virgin Girl Call Boy sex story: सभी दोस्तों को प्यार भरा नमस्कार। मेरा नाम समीर है और उम्र 22 साल है। मेरे लंड की साइज का तो सवाल ही नहीं उठता। जिन लड़कियों, आंटियों और भाभियों को मैंने अभी तक चोदा है, वो ही समझ सकती हैं मेरे लंड की महिमा को। मैं मुंबई में रहता हूं।
पहले मैं पुणे गया था पढ़ाई के लिए। वहीं से मैंने चोदने का काम शुरू किया था। पर पुणे में होते हुए भी मुंबई से बहुत सारे कॉल आते थे मेरे लिए। इसलिए मैंने सोचा कि मुंबई में कस्टमर की कमी नहीं है, तो क्यों न मुंबई जाकर यह काम किया जाए। इसीलिए मैं वापस आ गया। काम अच्छा चल रहा है। पूरे मुंबई से मुझे कॉल आते हैं। और अक्सर कई बार बहुत रोचक और सेक्सी घटनाएं मेरे साथ होती हैं, जिन्हें मैं किसी को नहीं बता सकता। पर अब मैं आप को बता सकता हूं।
मैं अपनी कहानियां अगर किसी को नहीं बता पाता तो मेरा पेट फट जाता है। चलो अब आगे की स्टोरी सुनो।
एक बार मुझे किसी लड़की का कॉल आया। वो मेरी सर्विस लेना चाहती थी। मैंने उसकी उम्र पूछी तो सुनकर हैरान रह गया। वो 18 साल की लड़की थी। मैंने उससे पूछा कि इससे पहले क्या आपने सेक्स किया है। वो बोली नहीं। इसलिए तो आपकी स्टोरी पढ़कर आपसे कॉन्टैक्ट किया है मैंने। आप पैसे की चिंता नहीं करना। आप जितना भी लोगे मैं दे दूंगी। मैं अमीर परिवार से हूं।
मैंने बोला ठीक है। मुझे कब और कहां आना है। तो उसने मुझे अपना मोबाइल नंबर दिया और उस मोहल्ले में आने को बोला जहां वो रहती थी। मैं उसके मोहल्ले में पहुंच गया। दिन के 12 बज रहे थे। मैंने उसे मोबाइल लगाया। तो उसने बोला कि आप अभी कहां हैं। मैंने बताया कि मैं यहां पर हूं। तो वो बोली कि आप वहीं रुको मैं आती हूं।
करीब 15 मिनट इंतजार के बाद मेरा मोबाइल बजा। जैसे ही मैंने जेब से मोबाइल निकालकर फोन उठाना चाहा कॉल कट हो गया। मैंने नंबर देखा तो उसका ही मिस कॉल था। तभी मेरे सामने एक बहुत ही खूबसूरत गोरी नाजुक जींस टी शर्ट पहने स्कूटी पर सवार एक 18 साल की लड़की रुकी। उसने मुझे बोला तुम समीर हो। मैंने कहा हां। उसने बोला मैं ऋतु। बैठो स्कूटी पर।
मैं उसे हैरानी से देख रहा था। वो बहुत ही कमसिन और नाजुक परी की तरह थी। उसकी चूचियां करीब 28 की होंगी। हां छोटी छोटी और गांड 30 की। मैं उसके साथ चल पड़ा। एक बहुत बड़े बंगले के अंदर हम दाखिल हो गए। घर पर कोई नहीं था। उसने दरवाजा खोला और अंदर आने को कहा। अंदर आते ही दरवाजा बंद कर दिया। घर बहुत ही आलिशान था। मैं समझ गया कि किसी अमीर की बेटी है। मैं सोफे पर बैठ गया।
मैंने पूछा कि किस क्लास में पढ़ती हो आप। तो वो बोली कि प्लीज आप मुझसे कुछ नहीं पूछना। वो किसी बहुत ही समझदार लड़की की तरह बात कर रही थी। मैंने बोला ठीक है। अब वो मुझे बहुत ही कामुक निगाह से देखने लगी। वो मेरे सामने ही खड़ी थी। वो मुझे लगातार देखे जा रही थी और उसकी सांसें जोर जोर से चल रही थीं।
फिर धीरे धीरे वो मेरे पास आई और लंबी सांस लेकर मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गई। उसने दोनों हाथ मेरी जांघों पर रखकर अपना सर मेरी गोद में रख दिया। मैंने प्यार से उसके सर पर हाथ रखा। तो फिर उसने एक लंबी सांस ली और अपना सर मेरी गोद में दबा दिया। उसकी आंखें बंद थीं और जोर जोर से सांसें चल रही थीं।
उसने अपने होठ मेरे लंड पर पैंट के ऊपर से ही लगाते हुए सर घुमा कर अपने गाल मेरे लंड से रगड़ने लगी। वो अपने दोनों हाथ मेरी कमर से लपेटे हुए थी। वो बहुत ही गर्म हो चुकी थी। लगातार अपने होंठ और गाल मेरे कमर के नीचे जांघों के पास और मेरे लंड पर रगड़ रही थी। मैं अपने हाथ उसके सर से होते हुए उसकी पीठ पर फेरता रहा।
करीब 10 मिनट तक वो ऐसे ही मुझे चूमती रही। फिर मैंने उसकी दोनों बाजू पकड़कर उसे उठाया। उसकी आंखें बंद थीं और होंठ कांप रहे थे। मुझे उसकी हालत देखकर ऐसा लग रहा था मानो वो चूत से सेक्स के लिए तड़प रही थी। उसकी सांसें तेज चलने के कारण और बहुत अधिक उत्तेजित होने के कारण उसका शरीर ढीला पड़ गया था। वो कांप रही थी।
मैंने प्यार से उसे सोफे पर बैठाकर उसका सर अपनी बाहों में लाकर सीने से लगाया। उसके सर पर हाथ फेरते हुए उसके गाल सहलाते हुए मैंने उसके होठ पर अपने होठ रख दिए। उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होठ को मैं चूसने लगा। वो भी मेरा साथ देने लगी। और उसने एक हाथ मेरे सर के पीछे डालकर अपनी तरफ खींच लिया। करीब 10 मिनट तक हम किस करते रहे।
अब वो भी मुझे चूमने लगी। उसने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और मेरे सीने को चूमने लगी। मैंने अपने दोनों हाथों में उसका सर पकड़ा और अब मैंने उसे चूमना शुरू किया। उसके होठों से होते हुए उसकी गर्दन पर अपने होठ लगा दिए। उसके कान को अपने मुंह में भर लिया। वो मछली की तरह तड़प उठी।
फिर मैं गर्दन से होते हुए उसकी चूची पर अपने होंठ लगा दिए। एक हाथ से मैं एक चूची मसलने लगा। वो बहुत उत्तेजित हो गई। वो एक दम मुझसे अलग हुई और एक ही झटके में उसने अपना टी शर्ट निकाल फेंका। अब वो गुलाबी कलर की ब्रा में थी। उसने झटके से बिना हुक खोले खींचकर ब्रा भी निकाल दी। ब्रा निकलते ही गजब के बूब्स उछलकर बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल देखकर मैं भी हैरान हो गया। वो बहुत जल्दी में थी।
ब्रा उतारते ही वो कुछ रुकी और मुझे लाचार नजरों से देखने लगी। और एक हाथ से उसने अपना बूब्स पकड़ा और एक हाथ मेरी तरफ बढ़ाकर मेरे सर पर पीछे से पकड़कर तेजी से अपनी तरफ खींचा। और दूसरा हाथ जिससे वो अपनी चूची पकड़े हुए थी मेरे मुंह के पास लाकर एकदम से अपनी चूची का निप्पल जबरदस्ती मेरे मुंह में घुसेड दिया।
निप्पल मेरे मुंह में घुसते ही उसने एक गहरी सांस ली और मेरा सर जोर से अपने सीने पर दबा दिया। मैं भी पागलों की तरह उसके निप्पल को जोर जोर से चूस रहा था। हम अभी भी सोफे पर बैठे थे। वो मेरी गोद में दोनों तरफ पैर डालकर बैठी थी। अब उसने अपने हाथ में दूसरा बूब्स लिया और मेरे मुंह में से पहली चूची निकालकर दूसरी चूची घुसेड दी। मैं दूसरी चूची चूसने लगा। उसे बहुत मजा आ रहा था।
मैंने चूची चूसते हुए उसकी जींस के बटन खोल दिए। अब मैंने अपने दोनों हाथ उसकी गांड पर बांधकर उसे मजबूती से पकड़कर निप्पल मुंह में लिए ही मैं खड़ा हो गया। उसे किसी बच्चे की तरह मैं गोद में लेकर खड़ा रहा और उसकी चूची चूस रहा था। ऐसे ही घूमा और सोफे की तरफ मुंह करके उसे सोफे पर सीधा लेटा दिया। पर मैं अभी भी अपने मुंह में उसका निप्पल लिए हुए था।
ऐसे ही चूची चूसते हुए मैंने उसकी पैंट खींचकर उतार दी। अब वो मेरे सामने सिर्फ पैंटी में थी। मैंने उसकी चूची से अपना मुंह हटाकर उसके पेट से होते हुए उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए। चूत पर होंठ रखते ही उसने अपनी गांड बहुत ऊपर तक उठा दी। दोनों पैरों के सहारे वो अपनी गांड ऊपर उठाए हुए थी। मानो कह रही हो कि खा जाओ मेरी इस चूत को।
मैं कुछ देर तक पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत चूमता रहा। जांघों को भी चूमता रहा। फिर मैंने उसकी पैंटी खींचकर निकाल दी। नंगी चूत देखकर मैं मस्त हो गया। क्या चूत थी यार। एक भी बाल नहीं था। फूली हुई बिल्कुल ब्रेड की तरह मलाई जैसी कुँवारी चूत मेरे सामने थी। मैंने उसकी चूत पर हाथ लगाया तो देखा वो झड़ चुकी थी। फिर मैंने उसकी गांड के छेद पर हाथ लगाया।
हाथ लगाते ही उसने मेरे दोनों बाजू जोर से पकड़ लिए। मैं फिर भी उसके गांड के छेद से खेलता रहा। तो उसने अपने नाखून मेरे बाजुओं में गड़ा दिए जिनसे खून निकलने लगा। मैं फिर भी नहीं रुका और उसकी गांड पर हाथ फेरता रहा। तो अब उसने मेरे सर के बाल जोर से पकड़ लिए। वो मछली की तरह मचल रही थी।
उसके मुंह से सी सी की बहुत तेज आवाज निकल रही थी और बार बार अपनी गांड ऊपर उठा रही थी। मतलब जब मैं गांड के छेद पर अपनी उंगलियां फेर रहा था तो उसे सहन तो नहीं हो रहा था मगर वो तकलीफ मीठी तकलीफ थी। क्या समझे तो उसे तकलीफ तो हो रही थी पर स्वर्ग का मजा भी आ रहा था।
अब उसने अपने दोनों हाथों से मेरी पैंट के बटन खोले और पैंट नीचे सरका दी। मैं उससे अलग हुआ और तेजी से अपनी पैंट और पैंटी निकालकर अलग कर दी। पैंटी निकालते ही मेरा 7 इंच लंबा लंड बाहर लहराने लगा। मेरा लंड देखकर वो उठकर सोफे पर घुटने मोड़कर बैठ गई और लपककर मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया।
वो कुछ देर मेरे लंड को प्यार से दुलारती रही। उसकी नरम उंगलियां धीरे-धीरे मेरे लंड की पूरी लंबाई पर फिसल रही थीं। वह उसे हल्के से दबाती, फिर सहलाती, मानो उसकी गर्माहट और सख्ती को अपने अंदर महसूस कर रही हो। उसकी सांसें गहरी और गरम हो चुकी थीं, जो मेरी जांघों पर पड़ रही थीं।
फिर धीरे-धीरे अपना मुंह मेरे लंड के पास लाई और अपने होठ लंड पर फेरने लगी। उसके नरम, गीले होंठ मेरे लंड की नोक को छूते ही एक ठंडी सिहरन मेरी रीढ़ में दौड़ गई। वह अपनी जीभ बाहर निकालकर लंड के ऊपरी हिस्से पर गोल-गोल घुमाने लगी, नोक को चाटती हुई, फिर नीचे की ओर लंबी लिक्कड़ लगाती हुई। उसकी लार मेरे लंड पर चमकदार परत बना रही थी।
फिर लपककर पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया। उसके मुंह का गर्म, नम और मुलायम अंदरूनी हिस्सा मेरे लंड को पूरी तरह घेर लेता था। वो पागलों की तरह मेरा लंड चूस रही थी। उसके गाल अंदर की ओर धंस जाते, फिर बाहर निकलते। वह तेजी से सिर ऊपर-नीचे कर रही थी, कभी गहरी चूसती, कभी जीभ से नीचे की नसों को दबाती। चूषण की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं — चुप्प… चुप्प… स्लर्प। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरी कमर अनायास ही हिलने लगी थी।
करीब 10 मिनट तक लंड चूसने के बाद उसने मेरा लंड अपने मुंह से निकाला और मेरा लंड हाथ में पकड़े हुए अपना हाथ नीचे ले गई और मेरा लंड अपनी चूत से रगड़ने लगी। उसकी चूत पहले से ही भीगी हुई थी, गर्म और फिसलन भरी। मेरे लंड का सिर उसकी सूजी हुई क्लिटोरिस पर रगड़ते ही वह कांप उठी। वह उसे ऊपर-नीचे, आगे-पीछे रगड़ रही थी, जिससे उसकी चूत के रस मेरे लंड पर लग रहे थे।
वो बोली, “इसे जल्दी से अंदर डालो। इसके लिए मैं कितने दिनों से बेचैन हूं। अब सहन नहीं होता। प्लीज जल्दी अंदर डालो।” मैंने कहा, “थोड़ा दर्द होगा। तुम सहन कर लेना।” वो बोली, “तुम मेरी चिंता मत करो। मेरी सेक्स की तड़प से ज्यादा कोई दर्द नहीं है मेरे लिए। प्लीज जल्दी डालो ना।”
मैं कुछ मुस्कुराया। फिर मेरे लंड ने अपना रास्ता तलाशा और दरवाजे पर आकर एक जोरदार धक्का दिया। वो चीख पड़ी। उसकी चीख पूरे हॉल में गूंज गई। मैं रुक गया। अभी मेरा सिर्फ 3 इंच लंड ही अंदर गया था। मुझे मालूम था कि मुझे कैसे आराम-आराम से करना है। मैंने महसूस किया उसकी चूत से खून निकल रहा था, गर्म और चिपचिपा। पर मैंने उसे नहीं बताया।
मैंने प्यार से उसे किस किया और उसके सामान्य होने का ऐसे ही इंतजार करने लगा। उसके चेहरे पर धीरे-धीरे शांति लौट रही थी, आंखें आधी बंद, होंठ थोड़े खुले। उसके श्वास धीमे हो रहे थे। जब मैंने उसे चूमते हुए धीरे-धीरे धक्के मारने लगे तो उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थीं। अब मेरे बहादुर लंड ने चूत में और अंदर जाने का रास्ता बना लिया था। अब लगभग पूरा लंड उसकी चूत के अंदर घुस चुका था। मैं धक्के मार रहा था। अब उसे मजा आने लगा।
वो भी नीचे से गांड ऊपर उछाल रही थी। वो पागल की तरह गांड को ऊपर उछालकर गांड घुमा भी रही थी। मैं समझ गया कि वो मेरे लंड का एहसास चूत की सभी दीवारों पर टच करके मजे ले रही है। ऐसी भूखी शेरनी वो भी ऐसी बहुत कम मिलती है। मुझे भी पूरा आनंद आ रहा था।
मैं जोर-जोर से धक्के मारने लगा। वो भी आंखें बंद किए हुए मेरा पूरा-पूरा साथ दे रही थी। करीब 45 मिनट चुदाई करने के बाद वो बोली, “मुझे ऊपर आना है।” मैंने उसे अपनी बाहों में जकड़कर सोफे पर पलटी मारी। अब वो मेरे ऊपर थी। कुछ देर वो रुकी और चूत के अंदर मेरे लंड को अपनी गांड हिलाकर फ्री किया और वो शुरू हो गई।
अब वो पागलों की तरह आगे-पीछे हो रही थी। उसके मुंह से सी… सी… की आवाज तेज होती गई और उसने अपनी स्पीड बढ़ा दी और मुंह से अजीब-अजीब आवाजें निकालने लगी। “सी… सी… हुम्म… आ… आया… ह… हूंम्म… सी… सीईई।” और तेजी से आगे-पीछे होते हुए शायद अब वो झड़ने वाली थी। और जोर-जोर से आगे-पीछे होते हुए “आहह… सी… आह… सी…” वो इतनी जोर से चिल्लाई कि मैं भी यहां देखने लगा।
उसकी जोरदार चुदाई हुई और उसकी सारी भड़ास उसकी चीख से निकल गई। मतलब पूरे दिल से की चुदाई में कोई कसर बाकी नहीं रही। अब वो कुछ शांत पड़ गई और उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई। वो ऐसे ही मेरा लंड उसकी चूत में डाले हुए मेरे सीने पर मादक अंदाज से मुस्कुराते हुए चिपक गई। उसके चेहरे पर वो संतुष्टि नजर आ रही थी। जैसे उसे जिंदगी की सारी खुशियां मिल गई हों।
मैं प्यार से उसके सर पर हाथ फेरने लगा। पर अभी मेरा लंड बहादुर सीना ताने खड़ा हुआ था। उसकी प्यास अभी बुझी नहीं थी। पर मैं पहले अपने कस्टमर की संतुष्टि देखता हूं। वो बहुत खुश थी। कुछ देर बाद उसने घड़ी की तरफ देखा। 4 बज रहे थे। वो बोली, “6 बजे मेरे मम्मी-पापा आ जाएंगे।” मैं समझ गया कि मुझे जल्दी निकलना होगा।
मैंने उसे अपनी बाहों में पकड़कर फिर पलटी मारी। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत में था। मैंने उसे फिर चूमना शुरू कर दिया और धक्का मारने लगा। वो फिर तैयार हो गई। उसे भी मजा आने लगा। मैंने उसे करीब 30 मिनट फिर चोदा और अपना वीर्य उसकी चूत में ना करके बाहर कर दिया। उसकी चूत के ऊपर और जांघों पर मेरा बहुत सारा वीर्य गिर गया।
मैंने उसे देखा तो वो मुस्कुराने लगी। वो बोली, “कोई बात नहीं मैं साफ कर लूंगी।” कुछ देर हम दोनों बाहों में बाहें डाले सोते रहे। फिर हम उठे और बाथरूम में जाकर साफ करके कपड़े पहने। वो बहुत खुश थी।
वो बोली कि सच जितना मजा तुमने मुझे दिया शायद जिंदगी में और कोई कभी नहीं दे सकता। मैं तुम्हें कभी नहीं भूल पाऊंगी। और उसने मेरा माथा चूमा। और उसने फिर मुझे एक लिफाफा दिया जिसमें रुपये थे। और शाम के 5:30 बज रहे थे। मैंने भी उसे किस किया और उधर से निकल गया। वो दरवाजे पर खड़ी मुझे जाते देखती रही। पर मैंने उसे मुड़कर नहीं देखा।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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