Maa beti sex story, Driver ne maa chodi sex story, Beti bhi chudi sex story: हेलो दोस्तों, मेरी मां बहुत बड़ी चुदक्कड़ है। इसलिए आज मैं आपको उनकी कहानी सुनाने जा रही हूं। और उसी कहानी में मैं भी हूं, क्योंकि जब यह सब हो रहा था, मम्मी की चुदाई हो रही थी।
उसी समय ऐसा माहौल बन गया था कि मैं भी मम्मी के साथ ही शामिल हो गई। और मैं भी अपनी चूत की गर्मी को शांत कर ली।
यह कहानी ज्यादा पुरानी नहीं है, कल की ही है। इसलिए अभी मैं साफ-साफ आपको बता रही हूं।
मेरे घर में मैं, मेरी मां और मेरे पापा रहते हैं। और एक ड्राइवर है, वह रहता है। ड्राइवर घर में कभी-कभार ही आता है। वह बाहर ही रहता है हमेशा। पर मुझे क्या पता था कि मेरी मां ड्राइवर को अपना दिल दे बैठी थी। और फिर मैं भी उसे चुद जाऊंगी।
ऐसा ही हो गया दोस्तों। मैं भी अपनी मम्मी के साथ मिलकर अपने ड्राइवर के साथ ही सेक्स संबंध बना बैठी। हम दोनों मां-बेटी को उसने खुद ठुकाई की। मेरे से पहले तो वो मम्मी को पेल रहा था। पर जब मैं आ गई तो मुझे भी पेला। पर यह सब कैसे हुआ, अब मैं सीधा बताती हूं।
कल की ही बात है दोस्तों। मेरे पापा आगरा गए हुए थे किसी काम से। मैं नोएडा में रहती हूं।
और मैं अपने दोस्त के यहां गई थी, क्योंकि अपने दोस्त से मिले तीन-चार महीने हो गए थे। तो मन कर रहा था। इसलिए मैं सुबह ही चली गई थी उसके यहां।
दोपहर का खाना-पीना नहीं खाई। मुझे शाम तक रुकना था। पर मुझे काम याद आ गया, तो मुझे जल्दी आना पड़ा। तो मैं घर दो बजे दिन में वापस आ गई।
घर पहुंची तो दरवाजा खुला हुआ था। मुझे लगा मम्मी आसपास कहीं गई होगी। पर जैसे ही मैं अंदर आई, मुझे कुछ आवाज सुनाई दे रही थी। मम्मी के बेडरूम से आवाज थी। मुझे लगा कि मम्मी गिर गई है या बीमार है। इस वजह से वह कराह रही हैं। मैं दौड़कर उनके कमरे में दौड़ी। तो वहां पहुंचते ही मैं सन्न रह गई। वहां का माहौल ही कुछ और था।
मेरी मम्मी नंगी थीं। और ड्राइवर, जिसका नाम राजू है, वह भी नंगा था। और मम्मी के ऊपर चढ़ा हुआ था। मम्मी अपने पैर राजू ड्राइवर के चारों तरफ फंसाए हुए थीं।
राजू ड्राइवर मेरी मम्मी को पेल रहा था, चोद रहा था। मम्मी आह-आह कर रही थीं। और वह जोर-जोर से धक्के दे रहा था। राजू ड्राइवर का काला गांड साफ-साफ दिखाई दे रहा था, क्योंकि वह काला है और मम्मी गोरी। ऐसा लग रहा था जैसे संगमरमर पर भालू चढ़ गया।
राजू ड्राइवर मेरी मम्मी के चूचियों को जोर-जोर से दबा रहा था। उसकी उंगलियां इतनी कसकर मम्मी के मुलायम, गोरे, भरे हुए चूचों में धंस रही थीं कि ऐसा लग रहा था जैसे वह उन्हें नोच लेगा या चीर देगा। मम्मी के गुलाबी निप्पल्स उसकी हथेलियों के बीच दबकर लाल हो गए थे और हर बार जब वह जोर से मसलता, मम्मी के मुंह से तेज आह निकलती। राजू एक साथ अपनी कमर को तेजी से आगे-पीछे हिला रहा था, उसके मोटे, काले लंड को मम्मी की गीली चूत में पूरी ताकत से घुसेड़ रहा था। हर धक्के के साथ मम्मी की चूत से चप-चप की आवाज निकल रही थी, और उनके शरीर आपस में टकराने की थप-थप की ध्वनि कमरे में गूंज रही थी। मम्मी के मुंह से लगातार आह-आह, ओह्ह-आह्ह की सेक्सी कराहें निकल रही थीं, जो कभी तेज हो जातीं, कभी धीमी, लेकिन रुकती नहीं थीं। घर का पूरा माहौल अब इतना गरम और सेक्सी हो चुका था कि हवा में भी चुदाई की महक फैल गई थी।
पहले तो मैं पूरे पांच मिनट तक चुपचाप दरवाजे के पास खड़ी उन दोनों को देखती रही। मैं देख रही थी कि कैसे राजू का काला, मोटा लंड बार-बार मम्मी की गोरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा है, कैसे मम्मी की चूत की लालिमा उस लंड पर चिपक रही है, कैसे मम्मी के पैर हवा में लहरा रहे हैं और राजू की कमर पर कसकर लिपटे हुए हैं। मैं इतनी देर तक देखती रही कि मेरी अपनी चूत में भी गर्मी बढ़ गई, मेरी पैंटी गीली हो चुकी थी और मेरे निप्पल्स सख्त होकर टी-शर्ट पर उभर आए थे।
फिर जब ऐसा लगा कि राजू अब झड़ने वाला है, क्योंकि उसकी सांसें बहुत तेज हो गई थीं और उसकी कमर के धक्के अनियमित और और तेज हो गए थे, तभी उसने मम्मी से कहा, “मैडम जी… डाल दो… मैडम जी डाल दूं…” मैं तुरंत समझ गई कि वह अपनी गर्म वीर्य मम्मी की चूत के अंदर डालने की बात कर रहा है। लेकिन मम्मी ने आंखें बंद करके, कराहते हुए मना किया, “अभी मत डालना… अब मत डालना… अभी और देर तक… पिछले बार भी तुमने जल्दी डाल दिया था…” मम्मी की आवाज में विनती थी, लेकिन साथ ही और चुदाई की चाहत भी साफ झलक रही थी।
तभी मैं धीरे से आगे बढ़कर कमरे में आ गई। जैसे ही दोनों ने मुझे देखा, वे दोनों एकदम डर गए। राजू तुरंत मम्मी के ऊपर से हटा, उसका अभी भी खड़ा और चमकता लंड हवा में लहरा रहा था। वह घबराकर कोने में खड़ा हो गया और हाथ से अपना लंड ढकने की कोशिश करने लगा। मम्मी फटाफट उठीं, दोनों हाथों से अपने बड़े-बड़े चूचों को ढकने लगीं और जल्दी-जल्दी चादर खींचकर शरीर पर लपेटने लगीं। फिर उन्होंने कपड़े इकट्ठे करके पहनने शुरू किए। कपड़े पहनते हुए मम्मी ने कांपती आवाज में कहा, “बेटा… आज मेरे से गलती हो गई… इस बात को तुम पापा के साथ मत शेयर करना… आइंदा ऐसा नहीं होगा।”
तो मैंने जवाब दिया, “मम्मी यह तो गलत बात है… और वह भी राजू के साथ… अपना कुछ तो स्टेटस देखो।” मम्मी ने फिर वादा किया, “आज के बाद ऐसा नहीं होगा…” पर दोस्तों, सच पूछो तो राजू जैसे मम्मी को चोद रहा था, उसकी ताकत, उसकी रफ्तार, उसका मोटा लंड देखकर मेरा मन तो तभी तरस गया था। मैंने सोचा कि ऐसे मौके को मैं छोड़ूंगी नहीं। इसलिए मैंने मम्मी से सीधे कहा, “मम्मी, यह बात तो पापा तक जाएगी। आप तो हमेशा मुझे डांटते रहते हो जब मैं बॉयफ्रेंड को फोन करती हूं, तो डांटते रहते हो। आप खुद सोचो ना… जब आपने इतनी आग लगी हुई है, तो मुझे भी तो आग लगती होगी। मैं कहां जाकर बुझाऊं? आप तो राजू से आग बुझा लेते हो, पर मैं कहां जाऊं?”
मम्मी ने कुछ देर चुप रहकर फिर कहा, “एक काम करो… तुम चाहो तो आज राजू के साथ सो सकती हो। मैं बाहर बैठ जाती हूं। तू भी अपनी आग बुझा ले।” मुझे लगा यह सही आईडिया है। क्योंकि राजू जैसा कोई और मुझे बाद में इतना खुश नहीं कर पाएगा। यही सोचकर मैं तैयार हो गई। मम्मी उठकर बाहर चली गईं और दरवाजा बंद कर दिया। फिर मैंने राजू की तरफ देखा और बोली, “चल, मुझे भी चोद… मुझे भी वैसे ही देना जैसे तू मम्मी को दे रहा था… जोर-जोर से। मेरी तो बड़ी-बड़ी चूचियां नहीं हैं, पर हां, तुम्हें मजा बहुत आएगा। छोटी हैं और बहुत टाइट हैं और गोल-गोल हैं।”
राजू के हाथ में अब लड्डू आ गए थे। अभी तक वह अपनी मालकिन को चोद रहा था, अब वह मालकिन की बेटी को चोदने वाला था। इससे खुशनसीब इंसान और कौन हो सकता था।
मैं दरवाजा भी नहीं लगाई और राजू को बेड पर बुला लिया। राजू मेरे पास आया और धीरे-धीरे मेरे कपड़ों को उतारने लगा। पहले उसने मेरी टी-शर्ट ऊपर की, मेरी बाजुओं से निकाली और फेंक दी। फिर उसने मेरी ब्रा के हुक खोले, ब्रा को धीरे से खींचकर उतारा और मेरे छोटे लेकिन टाइट और गोल-गोल चूचे खुलकर सामने आ गए। मेरे निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। उसके बाद राजू घुटनों पर बैठ गया, मेरी स्कर्ट या पैंट जो भी थी उसे नीचे खींचा और मेरी पैंटी को भी धीरे-धीरे सरका कर उतार दिया। मेरी चूत अब पूरी तरह नंगी थी, पहले से ही गीली और गरम। राजू ने तुरंत मेरे चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ा, उन्हें जोर से दबाया, मसला और उंगलियों से निप्पल्स को पिंच किया। फिर वह मेरे होठों पर झुक आया, मेरे होंठों को गहराई से चूमने लगा, जीभ अंदर डालकर मेरी जीभ से खेलने लगा। उसके बाद उसने मेरे गालों को चूमना शुरू किया, गर्दन पर किस करने लगा, लेकिन मुझे यह सब समय बर्बाद लग रहा था। मुझे तो डायरेक्ट चुदाई चाहिए थी, मैं इंतजार नहीं कर पा रही थी।
मैंने राजू से कहा, “यह सब तो दूसरे दिन भी कर लेना, पर आज तो मुझे खुश कर दे… जैसा कि तू मम्मी को खुश कर रहा था… जोर से, तेज़।” राजू ने तुरंत अपनी पैंट उतारी, अपना मोटा, काला और खड़ा लंड बाहर निकाला। उसने हाथ से लंड को दो-तीन बार हिलाया, फिर मेरी चूत पर रख दिया। लंड का गरम सिरा मेरी चूत की फुदकती हुई लिप्स पर टिका हुआ था। राजू ने थोड़ा झिझकते हुए कहा, “मैडम… एक बार चोदने के पहले मैं आपको… क्या बोलूं… आपको बुरा तो नहीं लगेगा?” मैंने हंसकर कहा, “बुरा क्यों लगेगा? चाट ले पहले… जितना चाटना है, अच्छे से चाट।”
फिर क्या बताऊं दोस्तों, जैसे ही राजू ने मेरी चूत पर जीभ रखी, मजा आ गया। वह जीभ को पूरी तरह अंदर डाल देता था, चूत की दीवारों को चाटता, क्लिटोरिस को चूसता, तेज-तेज जीभ घुमाता। कभी जीभ अंदर-बाहर करता, कभी उंगली डालकर साथ में चाटता। जैसे ही वह एक उंगली डालता, मेरी चूत से पानी बहने लगता, मैं पूरी तरह गीली हो जाती। उसकी उंगलियां अंदर-बाहर होने लगीं, चूत की दीवारों को रगड़तीं, और मैं कराहने लगी। राजू ने करीब पांच मिनट तक मेरी चूत को ऐसे ही चाटा, इतने में ही मुझे बहुत मजा आ गया। मैं जोर-जोर से मोअन कर रही थी, “आह्ह… ओह्ह… हां… और… चाटो…” मेरी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
तभी मम्मी भी अंदर आ गईं, क्योंकि उनसे भी रहा नहीं गया। मेरी सेक्सी और तेज आवाजें सुनकर वे वापस कमरे में आ गईं। राजू को मैंने बोला, “डाल अब… लंड मेरी चूत में… जल्दी।” राजू ने अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया, सिरे को थोड़ा अंदर दबाया। तभी मम्मी मेरे बगल में बैठ गईं और मेरी चूचियों को सहलाने लगीं, निप्पल्स को उंगलियों से दबातीं, मसलतीं। राजू ने एक जोरदार धक्का दिया और उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर पूरी तरह पेल दिया। दर्द ज्यादा नहीं हुआ था, क्योंकि मैं पहले से ही अपने दोस्त से चुद चुकी हूं, मेरी चूत अच्छी तरह खुल चुकी थी। मेरी चूत काफी गीली थी, इस वजह से लंड आसानी से अंदर-बाहर होने लगा। मैंने अपनी टांगों को राजू की कमर के चारों तरफ फंसा लिया, उसे और करीब खींचा। फिर राजू का एक हाथ अपनी चूचियों पर रख दिया, वो उन्हें जोर से मसलने लगा और दूसरी तरफ कमर को तेज-तेज हिलाकर धक्के देने लगा। मेरी चूत से सफेद रंग की क्रीम निकलने लगी, हर धक्के के साथ चप-चप की आवाज हो रही थी।
राजू हर दो मिनट में रुककर मेरी चूत को फिर से चाट जाता था, जीभ से साफ करता, फिर दोबारा लंड डाल देता। तब तक मम्मी कभी मेरी चूचियां सहलातीं, कभी राजू की पीठ पर हाथ फेरतीं, कभी मेरे होंठ चूमतीं। दोस्तों, फिर मैंने राजू को नीचे लिटाया। मैं ऊपर चढ़ गई, उसका खड़ा लंड पकड़ा, अपनी चूत की मुंह पर सेट किया और धीरे से बैठ गई। लंड पूरा अंदर चला गया। फिर मैं जोर-जोर से ऊपर-नीचे होने लगी, खुद ही राइड करने लगी। मेरी छोटी चूचियां उछल रही थीं, राजू नीचे से उन्हें पकड़कर मसल रहा था।
तभी राजू मेरी माँ के चूचियों को पीने लगा मेरी मां उससे अपनी चूचियां पीला रही थी फिर मां राजू के मुंह पर बैठ गई और राजू मां की चूत चाटने लगा। उसने मम्मी के भरे हुए गोरे चूचों को दोनों हाथों से कसकर दबाया और एक-एक करके मुंह में भरकर जोर-जोर से चूसने लगा। मैंने भी उत्तेजना में आकर मम्मी के दूसरे चूचे को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और निप्पल को मुंह में चूसने लगी। मम्मी ने खुशी से कराहते हुए एक हाथ से मेरे सिर को अपनी छाती पर दबाया और दूसरे हाथ से राजू का सिर दबाया। हम तीनों का शरीर आपस में लिपटा हुआ था। फिर मम्मी ने राजू को पीछे धकेला और अपनी गीली चूत को उसके मुंह पर बिठा दिया। राजू ने तुरंत जीभ अंदर डालकर चाटना शुरू कर दिया। मैंने मम्मी को पास खींचा और उनके होंठों पर गहरा फ्रेंच किस कर लिया। हम मां-बेटी की जीभें एक-दूसरे में घुलमिल गईं। मैं मम्मी की जीभ चूस रही थी और उन्होंने अपनी उंगली मेरी चूत में डालकर अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। मम्मी भी मेरी छोटी टाइट चूचियों को सहलाती जा रही थीं।
फिर मैं मम्मी को बोली, “अब लो मम्मी… और चुद लो… पूरी तरह मजा ले लो।” मम्मी ने मुस्कुराते हुए सहमति में सिर हिलाया और बेड पर पीठ के बल लेट गईं। उन्होंने अपनी टांगें चौड़ी फैलाईं, अपनी गीली और लाल हो चुकी चूत को पूरी तरह खोल दिया। राजू तुरंत उनके ऊपर चढ़ गया, अपना मोटा, काला और अभी भी पूरी तरह खड़ा लंड मेरी मम्मी की चूत के मुंह पर रखा और एक लंबा, जोरदार धक्का देकर पूरा अंदर पेल दिया। मम्मी के मुंह से तेज आह निकली, “आह्ह… हां… ऐसे ही… जोर से…” राजू ने अपनी कमर को तेज-तेज हिलाना शुरू कर दिया, हर धक्के में उसका लंड मम्मी की चूत की गहराई तक जाता और बाहर निकलता, चप-चप और थप-थप की आवाजें कमरे में भर गईं। तब तक मैं राजू के पीछे खड़ी हो गई और अपनी छोटी लेकिन बहुत टाइट और गोल चूचियां उसकी काली, मजबूत गांड पर रगड़ने लगी। मैं अपनी चूचियों को उसके गांड के गालों पर दबा रही थी, निप्पल्स से रगड़ रही थी, अपनी छाती को उसके पीठ से सटा रही थी, जिससे राजू को और ज्यादा उत्तेजना मिल रही थी और उसके धक्के और भी तेज हो गए।
राजू का मोटा लंड मम्मी की चूत में तेज धक्कों से घुस रहा था, हर बार अंदर जाते ही मम्मी की चूत की दीवारें सिकुड़ रही थीं और बाहर निकलते ही क्रीम जैसा सफेद रस निकल रहा था। मैं मम्मी के बगल में लेट गई और उनके होंठों पर झुककर बार-बार गहराई से चूमने लगी। हमारी जीभें एक-दूसरे में घुलमिल गईं, मैं मम्मी की जीभ को चूस रही थी, वे मेरी जीभ को काट-काटकर चूस रही थीं। मम्मी ने अपना एक हाथ मेरी चूत पर रखा, दो उंगलियां सीधे अंदर डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगीं। उनकी उंगलियां मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रही थीं, क्लिटोरिस पर दबाव डाल रही थीं, जिससे मेरी चूत और ज्यादा गीली हो गई और पानी बहने लगा। हम दोनों मां-बेटी किस करते हुए एक-दूसरे की चूचियों को दबा रहे थे, चूस रहे थे। मैं मम्मी के निप्पल को मुंह में लेकर चूस रही थी, वे मेरे निप्पल को पिंच कर रही थीं और दबा रही थीं। राजू के जोरदार धक्कों के साथ हमारी कराहें एक साथ मिल रही थीं, कमरा पूरी तरह से आहों, मोअनिंग और चुदाई की आवाजों से भर गया था।
फिर राजू ने मुझे पलटा, मुझे बेड पर लिटाया और मुझे चोदना शुरू कर दिया। उसका लंड मेरी चूत में बार-बार पूरी ताकत से घुस रहा था, मेरी टाइट चूत उसे कसकर पकड़ रही थी। मैंने अपनी टांगें उसकी कमर पर लपेट लीं और उसे और गहराई तक खींचा। राजू काफी थक गया था, उसकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं, पूरा शरीर पसीने से तर था, लेकिन वह रुक नहीं रहा था। आखिरकार वह झड़ने लगा। उसने लंड बाहर निकाला, हम दोनों मां-बेटी के मुंह के ठीक सामने आ गया और अपना सारा गाढ़ा, गरम वीर्य हमारे मुंह पर छोड़ दिया। सफेद-गाढ़ा वीर्य मेरे होंठों पर, जीभ पर, मम्मी के गालों और मुंह पर गिरा। हम दोनों ने जीभ निकालकर उस वीर्य को चाट लिया, एक-दूसरे के मुंह से चाटा, होंठों से चूसा, पूरी तरह से साफ कर लिया। वीर्य का नमकीन, गरम स्वाद मुंह में फैल गया। फिर मेरी चूत की सारी आग शांत हो गई, शरीर में सुकून छा गया और मैं थककर लेट गई।
मैं दूसरी सेक्स कहानी भी आपको जल्द ही सुनाने जा रही हूं।
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