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पति के दोस्त ने मेरी हवस को पहचान लिया

Punjabi wife cheating sex story: मैं नीरू बाजवा, मैं एकदम गोरी चिट्टी पंजाबी औरत हूं और मेरी फिगर ३६-३०-३८ है। मेरी गांड पीछे से उभरी हुई है और मेरी सोसाइटी के सारे मर्द मेरे दीवाने हैं।

ये बात है उस समय की है, जब गौरव ने अपने दोस्तों को घर पर डिनर के लिए बुलाया था। गौरव का एक दोस्त था साहिल। साहिल हरियाणा से आया हुआ लंबा चौड़ा गबरू जवान था। उसकी शादी होकर टूट चुकी थी। गौरव ने बताया था कि उसकी बीवी उसको शादी के कुछ ही महीनों बाद अपने घर चली गई थी। गौरव कह रहे थे कि कुछ सेक्स प्रॉब्लम है।

साहिल को देखकर मुझे ऐसा कुछ नहीं लगा। जब वो घर आया तो मैं तो बस देखती ही रह गई। उसकी चौड़ी छाती, मोटी भुजाएं और ऊंची कदकाठी ने मुझे तुरंत आकर्षित कर लिया। गौरव तो अच्छी कदकाठी वाले हैं और उनकी हाइट छह फीट से ऊपर है। लेकिन साहिल उनसे भी ज्यादा फिट थे और लंबे चौड़े भी। उनकी आंखों में एक खास तरह की गहराई थी जो मुझे अंदर तक छू गई।

मेरा साहिल को इस तरह से देखना शायद उनको अजीब लगा। लेकिन मेरी तरफ देखकर गौरव मुस्कुरा रहे थे। गौरव मेरे पास आए और बोले, “इसका नंबर भी लगाने का इरादा है क्या?” मैंने गौरव की तरफ देखा तो प्यार से एक थप्पड़ मारा और बोली, “अभी तो नहीं, बाद में पता नहीं।”

लेकिन सच में मेरा दिल साहिल की पर्सनालिटी पर फिसल चुका था। मैं पूरी पार्टी में उसे ही घूर रही थी। मेरी नजरें बार-बार उसकी मजबूत गर्दन, चौड़े कंधों और उसकी टाइट शर्ट के नीचे उभरती मांसपेशियों पर अटक जाती थीं। शायद वो भी मेरी हवस को समझ गया था। उसकी आंखों में एक चमक आ गई थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

गौरव अपने दोस्तों के साथ बिजी थे और दारू भी काफी ज्यादा पी चुके थे। कमरे में शोरगुल बढ़ता जा रहा था। मैं अब बोर होने लगी थी और फिर ऊपर अपने कमरे की तरफ जाने लगी। मेरी साड़ी की सरसराहट और मेरी उभरी हुई गांड का हिलना हर किसी की नजर खींच रहा था।

साहिल सब को छोड़कर और उनकी नजरें बचाकर मेरे पीछे पीछे रूम में आ गया। वह चुपके से मेरे कमरे में घुस गया। मैंने कमरे का दरवाजा बंद नहीं किया हुआ था। मैं कपड़े बदल रही थी। मैंने साड़ी उतारकर पलंग पर डाली हुई थी और उस समय मैं सिर्फ ब्लाउज में थी और पेटीकोट में थी।

मुझे बहुत गर्मी लग रही थी तो मैंने अपनी ब्लाउज के बटन खोल रखे थे। मेरी गोरी चिट्टी त्वचा हवा में सांस ले रही थी। मेरी भारी छाती का ऊपरी हिस्सा बाहर झांक रहा था। साहिल बहुत आराम से कमरे में घुसा। उसकी सांसें भारी हो चुकी थीं। बिना किसी आवाज के उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। फिर वो मेरे पीछे आया और मेरी कमर में हाथ डालकर मुझे पकड़ लिया।

उसके बड़े-बड़े, गर्म हाथ मेरी पतली कमर पर कस गए। मैं हल्का सा कांप उठी। उसने मुझे अपने से चिपटा लिया।

मैंने उसको बिना देखे ही कहा, “आप यहां क्यों आ गए? आपके दोस्त क्या बोलेंगे? उनको बुलाकर आप अपनी बीवी के साथ कमरे में मस्ती कर रहे हो।”

वो चुप रहे। मैं उनके खड़े लंड का पूरा तनाव अपनी उभरी हुई गांड पर महसूस कर रही थी। उसकी गर्मी और सख्ती मेरे पेटीकोट के पतले कपड़े के पार भी साफ झलक रही थी। उन्होंने अपने गर्म, नम होंठों को मेरी गोरी गर्दन पर रख दिया। धीरे-धीरे चूमने लगे। उनकी सांसें मेरी त्वचा पर गर्म हवा की तरह महसूस हो रही थीं।

मुझे कुछ अलग अहसास हुआ तो मैंने बोला, “आज कुछ अलग है। तुम्हारा लंड पहले से कुछ मोटा हो गया है।” फिर उनके चूसने से मैं गरम होने लगी थी। मेरी सांसें तेज हो गईं। शरीर में एक सिहरन दौड़ने लगी। अचानक कुछ दिमाग में आया और मैं एकदम से पलटी। तो मैं चौंक गई।

मैं गौरव की नहीं, साहिल की बाहों में थी। साहिल केवल अंडरवियर में थे। उनके लंड का उभार बहुत ज्यादा बड़ा था। अंडरवियर का कपड़ा उसकी मोटाई और लंबाई को छुपा नहीं पा रहा था। उनकी छाती के घने बाल उनकी मर्दानगी बयान कर रहे थे। मैं तो उनको देखकर मदहोश सी हो गई थी। मेरी आंखें उनकी चौड़ी छाती और उस उभरे हुए लंड पर अटक गईं।

लेकिन फिर एकदम से होश में आई। अब तक साहिल मेरी आंखों में उनको लेकर हवस को पढ़ चुके थे। उनकी नजरें मेरे खुली ब्लाउज और उभरी छाती पर गड़ी हुई थीं।

और उन्होंने मुझे अपनी मजबूत बाहों में लेकर एकदम से दबा दिया। मेरी गोरी छाती उनकी छाती से रगड़ खा रही थी। उन्होंने मेरे ब्लाउज को तेजी से निकाल दिया। ब्रा का हुक भी एक झटके में खोल दिया। मेरे ३६ इंच के भरे-पूरे चुचे एकदम से बाहर आ गए। उनकी सफेदी और गुलाबी निप्पल हवा में सिहर उठे।

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मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। साहिल ने सब कुछ एकदम से किया था। उन्होंने मेरे दोनों चुचों को बड़े हाथों में लेकर जोर से दबाया। उनकी उंगलियां मेरी नरम चमड़ी में धंस गईं। फिर उन्होंने अपनी उंगलियों से मेरी निप्पल को निचोड़ना शुरू कर दिया। मेरी निप्पल सख्त हो गई थी। उनमें एक तीखी सी खुजली और सुखद दर्द का मिश्रण महसूस हो रहा था।

फिर उन्होंने मुंह से एक चुचा मुंह में लेकर अच्छी तरह चूसना शुरू कर दिया। उनकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी। कभी जोर से चूसते तो कभी हल्का काटते। दूसरे चुचे पर उंगली से खेलते रहे। कभी निचोड़ते, कभी मसलते। मैं उनके इस काम से और भी गरम हो गई।

मेरे कुछ सोचने से पहले ही साहिल ने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया और मस्ती में चूमने लगे। उनके चूमने का अंदाज बहुत ही कामुक था और मैं एकदम से गरम हो गई।

उनके मोटे, गर्म होंठ मेरे नरम होंठों को पूरी तरह से अपने में समेट रहे थे। उन्होंने पहले तो हल्का-हल्का चूमा, फिर धीरे-धीरे अपनी जीभ मेरे होंठों के बीच सरका दी। मैंने अनायास ही मुंह खोल दिया। उनकी जीभ मेरी जीभ से लिपट गई। गीला, गर्म और जोरदार चुंबन था। हम दोनों की सांसें एक-दूसरे के मुंह में मिल रही थीं। मेरी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी।

उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़ा और अंडरवियर के ऊपर से ही अपने लंड पर रख दिया। बाप रे क्या गरम लंड था। बहुत ही बड़ा और एकदम कड़क। अब मुझे समझ आ गया कि उनकी बीवी उनको क्यों छोड़ गई। वो सेक्स की दीवानी नहीं होगी और साहिल की जबरदस्ती नहीं सह पाई होगी। लेकिन उसमें उसकी कोई गलती नहीं थी।

साहिल थे ही इतने हॉट एंड सेक्सी। उनका लंड मेरी हथेली में धड़क रहा था। उसकी गर्मी मेरी उंगलियों तक पहुंच रही थी। मोटाई इतनी कि मेरी उंगलियां पूरी तरह से नहीं घेर पा रही थीं। वह इतना मोटा, लंबा और खड़ा था कि देखते ही मेरी चूत में सिहरन दौड़ गई। नौ इंच से भी ज्यादा लंबा, तीन-चार इंच मोटा, सीधा और किसी मोटे बैट की तरह मजबूत। उसकी टोपी चमकदार और गुलाबी थी, नसें उभरी हुईं जो उसकी ताकत बता रही थीं।

अब साहिल ने एकदम से मुझे बिस्तर पर धक्का दे दिया। मेरी पीठ गद्देदार बिस्तर से टकराई। उन्होंने मेरी पेटीकोट को पकड़कर खींच लिया। कपड़ा सरकते ही मेरी गोरी जांघें और पैंटी बाहर आ गईं। उन्होंने अपने अंडरवियर को उतार दिया और उनका लंड मेरी आंखों के सामने झूलने लगा। बाप रे कम से कम नौ इंच का होगा और तीन चार इंच चौड़ा भी होगा।

एकदम सीधा और किसी बैट की तरह। उसकी टोपी चमक रही थी। नसें उभरी हुई थीं। फिर उन्होंने मेरी टांगों को खींचा और मेरी टांगों को फैला लिया। मेरी जांघें पूरी तरह खुल गईं। उनकी मजबूत उंगलियां मेरी नरम त्वचा पर दब रही थीं।

और अपनी जीभ पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर रख दी। बार रे क्या मस्त चूम रहे थे वो और फिर एकदम से एक उंगली पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत में डाल दी।

आआआआ मेरे मुंह से जोरदार चीख निकली। आआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह् मर गई। आआआआआआ ईईईईईईस्सस्सस्स। मेरी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ गई। साहिल की गर्म जीभ पैंटी के पतले कपड़े पर जोर-जोर से घूम रही थी। मेरी चूत की नमी पैंटी को भीगो चुकी थी। उनकी उंगली ऊपर-नीचे दबाव डाल रही थी।

फिर उन्होंने एकदम से मेरी पैंटी को खींच लिया और मुझे नंगा कर दिया। मेरी साफ और चिकनी गुलाबी चूत को देखकर उनके चेहरे की लालिमा मुझे नजर आ गई। उनकी आंखों में भूख साफ दिख रही थी। उन्होंने एकदम से मेरी चूत पर अपनी जीभ लगा दी।

उन्होंने अपने दोनों हाथों से मेरी चूत को खोला। उनकी मजबूत उंगलियां मेरी मुलायम जांघों को फैलाए हुए थीं। अपनी लंबी, गर्म और गीली जीभ को एकदम से अंदर घुसा दिया। मैं तो एकदम से तड़प उठी। मेरी चूत की दीवारें उनकी जीभ को कसकर पकड़ रही थीं।

साहिल ने पहले तो मेरी चूत की बाहर वाली पलकों को चाटा। फिर अपनी जीभ से मेरी छोटी-सी क्लिटोरिस को घेर लिया। जोर-जोर से चूसने लगे। उनकी जीभ ऊपर-नीचे, गोल-गोल घूम रही थी। कभी हल्का काटते तो कभी पूरा मुंह लगाकर चूसते। मेरी चूत से लगातार रस निकल रहा था। वो उसे चाट-चाटकर पी रहे थे। फिर उन्होंने अपनी जीभ को पूरी तरह अंदर डाल दिया। अंदर घुमाते हुए मेरी चूत की दीवारों को चाट रहे थे। उनकी नाक मेरी क्लिटोरिस से रगड़ खा रही थी।

मेरे मुंह से तेज स्स्स्सस्स्स्स आआआआ निकल पड़ा। मैंने अपने हाथों से उसके बालों को पकड़कर खींच लिया। मेरी टांगें कांप रही थीं। शरीर में झुरझुरी दौड़ रही थी।

मैं तो जैसे मरने ही वाली थी। मैं साहिल को कहा, “आआह्ह्ह्… और मत करो। डाल दो अब। और नहीं सहा जा रहा।”

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साहिल ने मेरी कमर को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा और मुझे अपने ऊपर लिटा लिया। मेरी गोरी, भारी गांड उनके चेहरे के ठीक ऊपर थी। उनकी गर्म सांसें मेरी चूत और गांड के बीच की जगह पर पड़ रही थीं। हम दोनों ६९ की मुद्रा में आ गए। उन्होंने पहले अपनी जीभ से मेरी चूत की पूरी लंबाई चाटी। फिर मेरी गांड की दोनों गोलियों को अलग करके अपनी जीभ मेरी गांड के छेद पर भी घुमाने लगे। गोल-गोल चक्कर काटते हुए चाट रहे थे।

मैंने उनके मोटे लंड को दोनों हाथों से पकड़ लिया। उसकी नसें मेरी हथेली में धड़क रही थीं। मैंने मुंह खोलकर पहले उसकी गुलाबी टोपी को चूमा। फिर अपनी गीली जीभ से चारों तरफ लपेटते हुए चाटा। धीरे-धीरे मैंने पूरा मुंह खोलकर उसका मोटा सिरा अंदर लिया। मेरे होंठ खिंच गए। मैं सिर ऊपर-नीचे करके उसे गले तक लेने की कोशिश कर रही थी। कभी-कभी रुककर उसकी लंड की पूरी लंबाई अपनी जीभ से चाटती।

साहिल की जीभ मेरी चूत में तेजी से अंदर-बाहर हो रही थी। वे मेरी क्लिटोरिस को होंठों से पकड़कर जोर से चूस रहे थे। उनकी उंगलियां मेरी गांड की गोलियों को मसल रही थीं। एक उंगली मेरी गांड के छेद पर दबाव डाल रही थी। उनकी जीभ कभी चूत के अंदर गहराई तक पहुंच जाती तो कभी बाहर निकलकर गांड को चाटने लगती। मेरी चूत का रस उनके मुंह में भर रहा था। वे उसे चूस-चूसकर पी रहे थे।

मैं उनके लंड को चूसते हुए और तेज हो गई। मेरी लार उनके लंड और अंडकोष पर बह रही थी। मैंने एक हाथ से उनके भारी अंडकोष को सहलाया और मुंह में लंड को गहराई तक ले लिया। गला भर गया था। फिर भी मैं चूसती रही।

हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से चाट और चूस रहे थे।

साहिल उठे और अपने लंड को लेकर मेरी चूत पर घिसने लगे। उन्होंने अपने मोटे लंड की टोपी को मेरी भीगी चूत की पलकों पर ऊपर-नीचे रगड़ना शुरू कर दिया। घिसते-घिसते मेरी क्लिटोरिस को दबाते और मेरी चूत के रस को अपने लंड पर फैलाते रहे। फिर एकदम से उन्होंने अपने लंड को धक्का दे दिया।

बाप रे उनका लंड एकदम से तेजी से मेरी चूत को चीरकर मेरी बच्चेदानी से जा टकराया। मेरे मुंह से आआआआआआआ आआआआआआआआअ मर गई निकला। लेकिन मैंने अपने हाथों से अपने मुंह को बंद कर दिया। साहिल मुझे देखकर मुस्कुरा रहे थे और तेजी से धक्के मार रहे थे।

उनका मोटा, लंबा लंड मेरी तंग चूत को पूरी तरह फैलाए हुए था। हर धक्के पर मेरी चूत की दीवारें उनके लंड को कसकर पकड़ रही थीं। साहिल की कमर तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उनके भारी अंडकोष मेरी गांड से टकरा रहे थे। हर थप्पड़ की आवाज कमरे में गूंज रही थी। मेरी छाती हिल रही थी। मेरी निप्पल सख्त होकर खड़ी थीं।

मुझे तो पता नहीं क्या होने लगा था। मैं कई बार झड़ चुकी थी। हर झड़ने पर मेरी चूत उनके लंड को और भी कस रही थी। मेरी टांगें कांप रही थीं। शरीर पसीने से तर था। अब उनके धक्के नहीं सह पा रही थी। फिर साहिल के धक्कों की स्पीड तेज हो गई। उन्होंने अपनी कमर को और जोर से हिलाया। उनकी सांसें भारी और तेज हो गई थीं।

उन्होंने अपना सारा माल मेरी चूत में ही उतार दिया। उनका माल इतना सारा था जैसे उन्होंने सालों से चूत का स्वाद नहीं लिया था। गर्म, गाढ़ा वीर्य मेरी चूत के अंदर भर गया। कुछ बाहर भी निकलकर मेरी जांघों पर बह गया।

बहुत गरम था और फिर उन्होंने एकदम से अपना लंड बाहर खींच लिया और मुझे बिस्तर में नंगा ही छोड़कर बाथरूम में चले गए। फिर वो लंड को साफ करके बाहर आए और कपड़े पहनकर नीचे चले गए। मैं थोड़ी देर में उठी। लेकिन मुझे दर्द काफी होने लगा था।

मैंने अपने कपड़े लिए और बाथरूम में नहाने के लिए चली गई। मैं थोड़ी देर में कपड़े चेंज करके नीचे गई और देखा गौरव के सारे दोस्त जा चुके थे और वो सोफे पर सोए हुए थे। मैं उनको वहीं छोड़कर वापस रूम में आ गई और सो गई। मैं सुबह उठी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उस रात मेरी गौरव से भी अच्छी चुदाई हुई थी। साहिल से सेक्स का मौका मुझे फिर नहीं मिला। लेकिन आज भी मुझे जब साहिल का लंड याद आता है तो मैं एकदम से गीली हो जाती हूं।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।