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होटल में आंटी की गांड चाटकर चोदा

चलो शुरू करते हैं मैं संजय। शरीर से तबीयत बिल्कुल ठीक-ठाक है।

मेरी यह कहानी उस समय की है जब मैं एक बड़ी कंपनी में नौकरी करता था। मेरी शुरुआत थी। रोज घर से दफ्तर और दफ्तर से घर ठीक-ठाक था लेकिन देखते-देखते सोच बदल गई।

अंदर से तनाव बढ़ने लगा था। जब मैं ऑफिस की कुर्सी पर बैठता तो मेरे मन में बार-बार यह ख्याल आता कि क्यों न मैं भी किसी को चोदूं।

दूसरे लड़के अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मस्ती करते। आंटियां ऑफिस में आतीं तो मेरी नजर उनकी छातियों पर जाती।

मेरी सांसें तेज हो जातीं। मेरे लंड में हल्का सा खिंचाव महसूस होता।

मैं सोचता कि उसकी चूत कैसी होगी। गीली और तंग। मेरे मोटे लंड के लिए बिल्कुल सही।

तनाव हो गया कि यार यह लड़की के साथ है तो मैं क्यों नहीं। यह लड़कियां और आंटियां चोद सकता हूं तो मैं क्यों नहीं।

क्योंकि मेरी फटी हुई थी लड़की से बात करने में। तो करना तो दूर की बात थी। खैर ऐसा ही चलता रहा।

फिर एक दिन दिल्ली वाले लड़के के पास गुरुग्राम वाले लड़के का फोन आया कि यार एक महिला का फोन आ रहा है बार-बार गंदी-गंदी बातें कर रही है। कहीं मैं फंस न जाऊं।

तो दिल्ली वाले लड़के ने कहा कि नंबर दे। उसने दे दिया। फिर दिल्ली वाले लड़के ने उस महिला को फोन किया।

उस महिला से उसने तीस मिनट बात की कोने में जाकर। मैं हैरान था कि यार यह तो फोन पर चूत-चपत की बातें कर रहा है फोन से।

मैं उसकी बातें सुनने की कोशिश करता रहता। कुछ गंदे शब्द मेरे कानों में आते। जैसे चूत चूसने की बात या लंड चोदने की।

मेरे शरीर में गर्मी फैल जाती। मेरे लंड ने जवाब देना शुरू कर दिया। वह धीरे-धीरे कड़ा होने लगा।

मैंने अपनी जांघों को सटाकर उसे छुपाया।

खैर लंच का समय हो गया तो जिस छोटे फोन से बात कर रहा था वह फोन अपनी मेज पर रख गया जो मेरे बिल्कुल बराबर में थी। फिर क्या, मैंने नंबर ले लिया।

मैंने चारों तरफ देखा कि कोई मुझे देख तो नहीं रहा। मेरे हाथों में पसीना आ गया था।

मैंने फोन को उठाया। कॉल हिस्ट्री खोली। नंबर को ध्यान से देखा।

फिर उसे अपने फोन में टाइप कर लिया। यह काम करते हुए मेरा दिल जोर से धड़क रहा था। जैसे मैं कोई बड़ा अपराध कर रहा हूं।

लेकिन यह अपराध मुझे बहुत रोमांचित कर रहा था। मेरे लंड में भी हल्की सी सनसनी हो रही थी।

लेकिन फोन कैसे करूं। मेरी गांड फट रही थी भाई। कैसे हम किसी को ऐसे ही फोन कर लें जबकि हमारा मकसद उसे चोदने का हो।

उसने लड़की पर पता नहीं क्या ट्रिक अपनाई थी। मेरे तो हाथ-पैर फूल रहे थे। दिल की धड़कन तेज थी।

मैंने नंबर को देखते हुए सोचा कि अगर मैं फोन करूंगा तो क्या कहूंगा। कैसे शुरू करूंगा।

मेरे मन में उस आंटी की नंगी तस्वीर बन रही थी। वह शायद चालीस साल की होगी। उसकी छातियां भारी होंगी। उसकी गांड मोटी होगी।

उसकी चूत मेरे लंड को निगल लेगी। यह सोचकर मेरे लंड ने और जोर से खिंचाव किया। मैंने उसे दबा दिया।

खैर मैंने भी मौका देखकर फोन मिला दिया। उसने उठाया।

आंटी बोली – हेलो।

उसकी आवाज सुनकर मेरे शरीर में एक तूफान सा आ गया। यह आवाज परिपक्व थी। थोड़ी सी भारी। जैसे वह जानती हो कि कैसे बात करनी है।

मेरे लंड ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। वह और कड़ा हो गया। मेरे अंदर की गर्मी बढ़ गई।

मैं – हेलो।

आंटी – कौन।

मैंने अपनी आवाज को संभालते हुए कहा – बात करनी है आपसे।

आंटी – मुझे नहीं करनी।

मैंने सोचा कि अगर वह फोन काट देगी तो मेरा सारा प्लान बिगड़ जाएगा। लेकिन मैं रुक नहीं सकता था। मेरी हिम्मत बांध ली।

मैं – बस थोड़ी देर बात करनी है आपसे। आपको कुछ बुरा लगे तो बिना बताए फोन काट देना।

आंटी – बोलो।

मैंने राहत महसूस की। मेरे हाथ का पसीना थोड़ा सूखा।

मैं – आप कहां रहते हो।

आंटी – जंगल में। कहकर हंसने लगी।

उसका हंसी बहुत ही आकर्षक था। वह हंसी सुनकर मेरे लंड ने फिर से झटका मारा। जैसे वह मुझे आमंत्रित कर रही हो।

मैं समझ गया। पागल है। कुछ तो बन ही जाएगा अपना।

मैं – आपका नाम क्या है।

आंटी – संगीता।

मैं – देखिए संगीता जी, मुझे आपकी गांड मारनी है। कहकर फोन काट दिया।

मेरे मुंह से ये शब्द निकलते ही मेरा पूरा शरीर कांप उठा। मैंने इतनी हिम्मत जुटाई थी। मेरे लंड पूरी तरह तना हुआ था। अंदर से गर्मी फैल रही थी। फोन काटते ही मैंने गहरी सांस ली। दिल की धड़कन तेज थी।

मैंने अपनी जांघ पर हाथ रखा। लंड को दबाया। वह और कड़ा हो गया। गर्माहट महसूस हुई। कमरे में सन्नाटा छा गया। मेरी सांसें भारी थीं।

फिर यारों उसका फोन आया। पहली घंटी बजी तो मैं चौंक गया। फिर मिनट-मिनट पर फोन बजने लगा। रात साढ़े ग्यारह बजे तक आता रहा।

हर बार जब घंटी बजती तो मेरे अंदर की आग बढ़ जाती। मैं उठा नहीं रहा था। सिर्फ सुन रहा था। मेरे मन में ख्याल आ रहा था कि वह कितनी बेचैन हो गई होगी। शायद वह अपनी चूत में उंगली डाल रही होगी मेरे ख्याल में।

मेरे लंड ने फिर से खिंचाव किया। मैंने उसे बाहर निकाला। हाथ से सहलाने लगा। प्री कुम की नमी फैल गई।

फिर मैंने उसे सुबह फोन किया।

उसकी आवाज में थोड़ी नाराजगी थी। कहने लगी मैं इतना फोन कर रही थी, उठाया क्यों नहीं था।

मैंने बोला कि मैं डर गया था कि कहीं किसी और वजह से फोन तो नहीं कर रही है, शायद बुरा लगा हो तभी।

खैर हमारी ऐसे ही बातें चलती रहीं। सुबह, दोपहर, शाम खूब बातें होती थीं। प्रीपेड से पोस्टपेड ऐसा बिल आता था।

बातें धीरे-धीरे गंदी होती गईं। मैं उसे बताता कि मैं उसकी गांड कैसे मारूंगा। वह फोन पर सांसें लेती हुई बोलती “हां संजय जी… आह्ह… मेरी गांड मारो”।

मैं अपने लंड को हाथ से मसलता। प्री कुम निकलता। गर्माहट फैलती। कई बार तो बात करते-करते मैं झड़ जाता। मेरे शरीर में झटके आते।

फिर मैंने एक बार रात को बात करने के बाद सोचा कि बिल आ रहा है बे मतलब, मैं ऐसा कैसे चलेगा। मैंने उससे बोला कि मिलना है, तैयारी के साथ समझ जाओ।

कहने लगी बच्चे अकेले हैं दोनों।

मैंने बोला वो तुम देखो।

फिर मैंने दो दिन तक बात नहीं की। बाद में बात की तो वो तैयार हो गई।

दो दिन का इंतजार बहुत मुश्किल था। मैं हर रात उसकी गांड की कल्पना करता। लंड खड़ा हो जाता। मैं खुद को रोकता।

बाद में बात की तो वो तैयार हो गई। उसकी आवाज में उत्साह था।

मैंने बोला कि ऑटो वाले से बात करा देना मेरी। जब निकलना।

और इधर मैं पहले से ही तैयार था। मैंने दफ्तर के एक स्टाफ को कुछ पैसे दिए कि इसके लिए होटल चाहिए, जरा ढूंढ दे यार। उसने ढूंढ लिया।

मैंने स्टाफ को बुलाया। उसे एक तरफ ले गया जहां कोई न देख सके। उसकी हथेली में पांच सौ रुपये रख दिए। बोला यार एक आंटी के लिए होटल चाहिए। दो तीन घंटे के लिए। कोई सस्ता सा जगह ढूंढ दे। वह समझ गया। मुस्कुराया। बोला ठीक है भाई। बाद में उसने मुझे एक छोटे से लॉज का नाम और पता बताया।

खैर वो निकली तो मेरी बात कराई। मैंने ऑटो वाले से बोला कि भाई यहां आ जा। वो आ गया। मैं वहीं था। मैं जब गया ऑटो के पास तो वो घूर रही थी बड़ी तेज। खैर मैं ऑटो में अंदर चला गया। बोला कि भाई थोड़ा और आगे चल जा। और मैं ऑटो में बैठा।

मैंने एक बार देखने के बाद उसे नहीं देखा जबकि वो देखे जा रही थी। क्योंकि मेरी तो गांड फट रही थी कि यार अब क्या। खैर यह भी सोच रहा था कि अब तो आ गई है। कुछ न कुछ तो होगा ही। ऑटो वाले ने उतारा। मैंने एक और ऑटो किया नोएडा के लिए।

नोएडा जाते वक्त मैं उससे बात करने लगा। वाह!! खुशबू आ रही थी परफ्यूम और फेयर एंड लवली। इतनी गोरी से देखा कि गालों की शाइनिंग। बस यारों ऐसा समझ लो कि हmmmm।

खैर मैंने उससे बोला कि आप यह मंगल सूत्र तो प्लीज घर रखकर आ जाते तो ऑटो वाला देखने लगा हमें। खैर हम होटल पहुंचे। प्रोसेस पूरा किया और वेलकम टू द रूम।

यहां बहू में जो भी है वो आके सोफे पर बैठ गई। मैं बेड पर था। मेरा लंड टाइट इतना हो गया था कि दर्द हो रहा था। वो थी कि कुछ अब बोल ही नहीं रही थी। मैंने बहुत हाथ पकड़ने के बाद भी नहीं आई।

थोड़ी देर बाद बोली कि आप बड़े अच्छे हो लेकिन छोटे हो। मैंने बोला अगर बुरा भी होता या बड़ा भी होता। वही होता ना जो अब होगा यारों।

वो आंटी थी लेकिन क्या फिगर था उसका। सूट सलवार में माल लग रही थी। मैंने भी खींच के बाहों में भर लिया उसे और चूमने लगा उसे। उसकी सांसें तेज हो गईं और उसने आंखें बंद कर लीं।

मैं खूब दबा के चाट रहा था उसे कि जैसे प्यासे को पानी मिला हो। फिर मैंने उसका सूट उतारा। हाय!! दो दूध। मैंने धीरे-धीरे उसे पूरा नंगा कर दिया और मैं भी हो गया।

जब मैंने उसकी ब्रा खोली तो यारों ऐसा लगा कि जैसे इससे भी अच्छा कुछ होगा। हम लोग जब गुब्बारा फुलाते हैं फुलाने के बाद उसे दबाओ तो वो बिल्कुल नहीं दबता। ऐसा दूध थे उसके। ब्रा से आजाद होने के बाद भी बस हिले थे। झूल नहीं रहे थे।

मैंने ज्यादा कुछ नहीं। तीस मिनट उसके दूधों पर ही निकाल दिए। मैंने एक दूध मुंह में लिया। निप्पल को जीभ से चाटा। वह कड़ा हो गया। मैंने चूसा। जोर से चूसा। उसकी सांसें भारी हो गईं।

“आह्ह्ह संजय जी… धीरे से…” वो बोली। मैंने दूसरा दूध भी मुंह में लिया। दोनों हाथों से दबाया। वह फर्म थे। जैसे गुब्बारा। दबाने पर भी वापस आकार में आ जाते। मैंने निप्पल को दांतों से हल्का काटा। उसने कमर हिलाई।

फिर मैंने उसकी चूत मारी जिसमें मुझे बिल्कुल मजा नहीं आया। मैंने उसकी टांगें फैलाईं। अपना लंड उसकी चूत पर रखा। धीरे से अंदर डाला। उसकी चूत गीली थी लेकिन तंग नहीं लगी। मैंने जोर से धक्का मारा।

वह “उम्म्म्म” करके सिसकारी ले ली। लेकिन मुझे मजा नहीं आ रहा था। मैंने और जोर से मारा। पोजीशन बदली। उसकी टांगें कंधों पर रखीं। फिर भी कुछ खास फील नहीं हुआ।

फिर मैंने चूत मारी। फिर मजा नहीं आया। फिर मारी लेकिन बेहेनचोद कुछ मजा ही नहीं आ रहा था। मैं थक गया। पसीना आ गया। लंड अभी भी कड़ा था लेकिन अंदर का मजा गायब था।

थोड़ा आराम करने के बाद बारी आई उसकी जिसने हमें मिलाया था। गांड भाई। कंडोम लगाने के बाद मैं जा नहीं रहा था। धीरे-धीरे गया तो उसका मुंह!! बन गया कि मुझे तो हंसी आई।

कम ऑन यार जरा आप सोचो अगर आपकी गांड में पहली बार लंड जाए तो कैसा फेस होगा। सोचो या सोचना प्लीज। मैंने कंडोम लगाया। उसकी गांड पर थूक लगाया। धीरे से सिर अंदर डाला।

उसका मुंह खुल गया। आंखें फटी की फटी रह गईं। “आह्ह्ह्ह… धीरे संजय जी… दर्द हो रहा है…” वो कराह उठी। मैंने रुका। फिर थोड़ा और अंदर धकेला। उसकी गांड ने मेरे लंड को कस लिया जैसे कोई चिमटा।

गर्माहट और टाइटनेस ने मुझे पागल कर दिया। मैंने पूरा अंदर घुसा दिया। वह चीखी सी “उम्म्म्म आह्ह्ह”। मैंने धीरे से निकाला और फिर घुसाया। उसकी सांसें फट रही थीं। मैंने रफ्तार बढ़ाई।

उसकी गांड के चप्पड़ की आवाज आ रही थी। मैंने तीन बार चूत और तीन बार गांड मारी जैसे तैसे करके। हर बार जब गांड में जाता तो वह कराहती “आह्ह्ह… और… मारो… मेरी गांड…”

और वो कह रही थी और कंडोम लेकर आ जाओ। मैंने मना किया कि अब मुझमें और हिम्मत नहीं है।

फिर हम बात करने लगे। मैंने तुम्हारे पति क्या करते हैं तो वो अपने पति को गाली दे रही थी कि पुजारी है साला। सुबह पांच बजे निकलता है और रात ग्यारह बजे आता है। कभी-कभी खड़ा होता है उसका लंड कब करके सो गया पता ही नहीं चलता।

और साला मंगलवार को तो आता भी नहीं था। मैं भी क्या करती एक औरत हूं। मेरे भी जिंदगी है कुछ जरूरत है इसलिए पागल रहती हूं। किसी के भी पास चली जाती हूं।

मैं कहने लगा कि आपके ये दूध इतने टाइट कैसे। कहने लगी पति तो नोचता नहीं था। बाकियों को मैंने ज्यादा करने नहीं दिया।

फिर मैंने पूछा मुझे क्यों अपने दूध से इतना खेलने दिया। कहने लगी तू एक लड़का है तुम्हें इसकी जरूरत थी और कसम से गांड तो तुमने ही मारी है पहली बार।

फिर मैंने उसे ऑटो में बैठाया। भेज दिया।

प्रिय दर्शकों क्षमा करें अगर आपको कुछ गलत या कुछ कहानी में अच्छा बुरा लगा हो क्योंकि मुझे ना फिगर नापना आता है ना उम्र। और ज्यादा से चूत की बात मैंने इसमें की नहीं है क्योंकि वो तो आप अच्छे से जानते हो। मेरा मकसद था बस बिस्तर तक लाना। इस बीच मुझे इस कहानी से दो बार चूत मिली लेकिन वो महिला की बात ही अलग थी। आज भी उसके दूध याद आते हैं तो सोच में हो जाता हूं।

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।