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माँ की चूत में चौकीदार का मोटा लंड

Chowkidar lund sex story: मैं आपको मेरी माँ की अन्तर्वासना सच्ची कहानी बता रहा हूँ। वो स्कूल टीचर हैं। एक दिन मैं स्कूल गया तो मैंने चौकीदार और माँ की चुदाई का नजारा देखा। तो मैंने क्या किया?

दोस्तों आज मैं आपको अपने परिवार की मेरी माँ की अन्तर्वासना सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ। मेरा नाम विनोद है और मेरी उम्र उन्नीस साल है। मेरे परिवार में मेरी मम्मी के अलावा और कोई नहीं है। मेरे पापा का एक साल पहले देहांत हो चुका है जिसके बाद हम दोनों का साथ और भी मजबूत हो गया था। मम्मी गांव के एक छोटे से स्कूल में टीचर हैं। मैंने इसी साल कॉलेज में एडमिशन लिया है और अब रोजाना सुबह कॉलेज की बस पकड़ता हूं।

हम दोनों की ज़िंदगी बड़ी खुशनुमा है। मम्मी रोज सुबह स्कूल जाती हैं और मैं अपने कॉलेज जाता हूं। सुबह हम साथ नाश्ता करते हैं चाय की चुस्कियां लेते हुए एक दूसरे की दिन भर की योजनाएं सुनते हैं। शाम को घर लौटकर हम छोटी छोटी बातें करते हैं और एक दूसरे का साथ देकर दिन काटते हैं। पापा के जाने के बाद मम्मी ने खुद को बहुत संभाला था लेकिन उनके चेहरे पर कभी कभी उदासी छा जाती थी।

मेरी मम्मी की उम्र केवल चालीस साल है। उनका नाम नीतू है। उनके शरीर की बनावट किसी को भी पागल बनाने के लिए काफी है। गोरी चमकदार त्वचा नाजुक लेकिन भरी हुई छाती पतली कमर और गोल मटोल नितंब उन्हें बेहद आकर्षक बनाते हैं। वह साड़ी पहनकर स्कूल जाती हैं तो उनकी काया इतनी आकर्षक लगती है कि कोई भी एक नजर जरूर डाल लेता है। वह मुझसे अपनी सारी बात शेयर करती हैं और मैं उनके हर भाव को अच्छी तरह समझता हूं।

उन्होंने अपने स्कूल के बारे में विस्तार से बताया कि वहां स्टाफ के नाम पर केवल तीन ही लोग हैं। एक हैडमास्टर एक चौकीदार और तीसरी मेरी मम्मी। स्कूल गांव के बाहर थोड़ी दूर पर स्थित एक पुरानी इमारत है जहां चारों तरफ खेत और पेड़ हैं। दोपहर में वहां सन्नाटा छा जाता है और हवा में धूल की हल्की सी गंध आती है।

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हैडमास्टर की उम्र अट्ठावन साल के करीब है और वह जल्दी ही सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनकी चाल धीमी और थकी हुई होती है। चौकीदार की उम्र करीब बत्तीस साल है और उसकी अभी तक शादी नहीं हुई है। उसके बहुत प्रयास करने पर भी उसकी शादी नहीं हो रही है। इसलिए वह हमेशा परेशान और उदास रहता है। मम्मी अक्सर उसका जिक्र मुझसे करती हैं और उसके बारे में छोटी छोटी बातें बताती रहती हैं।

उस चौकीदार का नाम कल्लू है। जैसा नाम है वो वैसा ही दिखता भी है। एकदम काले रंग का मजबूत और मोटा शरीर वाला छह फीट से भी ज्यादा लंबा कद का आदमी है। उसकी बाहें मोटी और मांसल हैं तथा चेहरा हमेशा पसीने से चमकता रहता है। मैंने उसे कई बार देखा है। वो अक्सर हमारे घर आता रहता है। कल्लू मम्मी का बहुत मुंह लगा है। वह मम्मी से खुलकर मजाक करता है और मम्मी भी कभी उसकी बात का बुरा नहीं मानती हैं।

मम्मी कभी कभी मुझसे कहती हैं कि वह देर से घर आएंगी क्योंकि स्कूल में ज्यादा काम है। मैं उनकी इस बात पर पूरा विश्वास कर लेता था। लेकिन कुछ समय से मुझे उनके बर्ताव पर शक होने लगा है। क्योंकि जब कभी वह देर से आती हैं तो उनके चेहरे पर थकान की जगह एक अजीब सी चमक और संतुष्टि भरी मुस्कान होती है। उनके कदम हल्के लगते हैं और आंखों में एक अनजानी चमक रहती है। उनका यह व्यवहार मेरी समझ में नहीं आता था और धीरे धीरे मेरे मन में कई सवाल उठने लगे थे।

एक दिन फिर उन्होंने लेट आने की बात की। मैंने मन ही मन तय कर लिया कि आज कुछ भी हो जाए लेकिन यह पता करना ही है कि उन्हें देर कहां हो जाती है। दिल में एक अजीब सी बेचैनी और जिज्ञासा भर गई थी। हाथ थोड़े कांप रहे थे लेकिन मैंने खुद को संभाला।

उस दिन मैं कॉलेज से सीधे माँ के स्कूल चला गया। स्कूल की छुट्टी होने में पंद्रह मिनट बाकी थे। मैं स्कूल से थोड़ी दूर एक पुराने पीपल के पेड़ की छांव में बैठ गया और इंतजार करने लगा। दोपहर की धूप तेज थी और हवा में गर्मी भरी हुई थी।

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फिर पंद्रह मिनट बाद स्कूल की छुट्टी हो गई। धीरे धीरे सारे बच्चे स्कूल से निकलकर अपने अपने घरों की ओर जाने लगे। उनकी चहल पहल की आवाजें स्कूल के आंगन में गूंज रही थीं। यूनिफॉर्म पहने बच्चे दौड़ते हुए हंसते हुए और एक दूसरे से बातें करते हुए बाहर निकल रहे थे। मैं दूर से बैठा बैठा यह सब ध्यान से देख रहा था।

उसके दस मिनट बाद हैडमास्टर साहब भी स्कूल से चले गए लेकिन मम्मी का दूर दूर तक कोई पता नहीं लग रहा था। फिर मैंने देखा कि कल्लू चौकीदार सब कमरों में ताले लगा रहा था। ताले लगाने के बाद वह एक कमरे में चला गया और उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

मैं बहुत धीरे-धीरे स्कूल के अंदर आ गया। मैं उस कमरे की तरफ गया जहां कल्लू गया था। वो कमरा अंदर से बंद था।

मेरे दिल की धड़कन इतनी तेज थी कि मुझे लग रहा था पूरा स्कूल उसे सुन लेगा। हर कदम मैं बेहद सावधानी से रख रहा था ताकि जूते की आवाज ना हो। पुरानी इमारत की ठंडी फर्श पर मेरी हथेलियां पसीने से चिपक रही थीं और गले में सूखापन महसूस हो रहा था। हवा में धूल की हल्की गंध और पुरानी लकड़ी की महक मिली हुई थी जो मेरी नाक में भर रही थी। कमरे के पास पहुंचकर मैं दीवार से सटकर खड़ा हो गया और कान लगाकर अंदर सुनने की कोशिश करने लगा।

मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि अंदर क्या हो रहा है। मैं बहुत परेशान हो गया था। मैंने कैसे भी करके उस कमरे में अंदर की आवाजों को सुनने का प्रयास किया। अंदर से फुसफुसाहट की आवाज आ रही थी जिसमें से एक आवाज मेरी मम्मी की थी। मैं समझ गया कि अंदर कुछ तो गड़बड़ चल रहा है।

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मैंने अंदर की ओर से झांकने की कोशिश की। अंदर का नजारा गजब का था। मेरी मम्मी एक साइड में खड़ी हुई थीं और कल्लू बिस्तर बिछा रहा था। मम्मी धीरे-धीरे अपनी साड़ी उतार रही थीं। मम्मी ने साड़ी को पास में रखी कुर्सी पर रख दिया। अब उनके शरीर पर केवल ब्लाउज और पेटीकोट था। उनका भरा-भरा जिस्म किसी को भी पागल बना सकता था।

मैं यह सोचकर हैरान हो रहा था कि माँ ने चौकीदार में ऐसा क्या देखा कि उसको अपने जिस्म का रसपान करा रही थीं। कल्लू अपनी कमीज उतार चुका था और अब अपनी पैंट उतार रहा था। उसके काले मजबूत शरीर पर पसीने की चमकदार परत चमक रही थी। उसकी मोटी बाहें और चौड़ी छाती देखकर मेरी सांस अटक गई।

वह मम्मी से कह रहा था, “नीतू रानी आज कौन से स्टाइल से चुदवाओगी?”

मम्मी कहने लगीं, “जिस भी स्टाइल में चोद सको चोद दो … बस मेरी चूत की गर्मी शांत कर दो।”

मैं मम्मी के मुंह से ऐसी भाषा सुनकर हैरान था। मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि यह मेरी मम्मी हैं। लेकिन माँ की अन्तर्वासना का सच सामने था।

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फिर मम्मी ने अपना ब्लाउज भी उतार दिया। कल्लू केवल अंडरवियर में खड़ा होकर अपना लंड ऊपर से ही सहला रहा था।

मम्मी बोलीं, “इसको सहलाते ही रहोगे या यह लंड कुछ काम भी करेगा?”

कल्लू बोला, “रानी, यह लंड ही तेरी चूत की आग को शांत करेगा।”

मैंने देखा मम्मी केवल पेंटी में खड़ी थीं। वो ऊपर से पूरी नंगी थीं। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियां बिल्कुल मक्खन की तरह मुलायम लग रही थीं। चूचियों का साइज का अंदाजा तो मुझे आज लग पा रहा था।

मम्मी की चूचियां ऐसे लग रही थीं जैसे किसी ने मम्मी के सीने पर दो खरबूजे चिपका दिए हों। मम्मी की दोनों चूचियों का शेप देखते ही बन रहा था। मम्मी इतने गजब की फिगर की मालकिन थीं कि कोई भी उनसे शादी करने के लिए तड़प जाता। उनका जिस्म ऐसा जैसे पत्थर को तराश दिया हो।

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मेरे लिए अब वह मम्मी नहीं बल्कि एक ऐसी औरत थीं जो सेक्स समागम के लिए प्यासी थीं।

यह विचार दिमाग में आते ही मेरा मम्मी के प्रति दृष्टिकोण बदल गया। अब मुझे लग रहा था कि वह जो कर रही थीं ठीक कर रही थीं। उन्हें अपनी अन्तर्वासना और शारीरिक भूख मिटाने का पूरा अधिकार है।

अब चौकीदार में मुझे मेरी मम्मी का पति मालूम होने लगा जो उनकी शारीरिक जरूरतों को पूरा कर रहा था। वह दोनों जो सेक्स कर रहे थे उसका हक सबको होना चाहिए।

फिर मैंने अपने सोच से ध्यान हटाया और मम्मी की रासलीला देखने लगा।

कल्लू मम्मी के पास आ गया था और उसने अपने होंठ माँ के होंठों से जोड़ दिए थे। वे दोनों एक दूसरे को डीप किस कर रहे थे। मम्मी की जीभ कल्लू के मुंह में थी और कल्लू मम्मी की जीभ को चूस रहा था। कल्लू के हाथ मेरी मम्मी की गोलाईयां नाप रहे थे। बीच-बीच में कल्लू मम्मी की चूचियों को जोर से दबा देता था तो मम्मी चिहुंक पड़ती थीं।

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कभी-कभी कल्लू अपनी दो उंगलियों से मम्मी की चूचियों की घुंडियों को मसल देता था। मम्मी मस्ती से सिसिया कर रह जाती थीं।

उसकी मोटी और खुरदुरी उंगलियां मम्मी की नुकीली घुंडियों को धीरे-धीरे दबातीं फिर जोर से मसलतीं। घुंडियां पहले से ही सख्त हो चुकी थीं और अब और भी फूलकर गहरे गुलाबी रंग की हो गई थीं। हर मसलने पर मम्मी का पूरा शरीर एक झटके से कांप उठता और उनकी सिसकारियां कमरे की दीवारों से टकराकर गूंजने लगतीं। कल्लू कभी अपनी अंगुली से घुंडी को घुमाता तो कभी हल्का सा खींचकर छोड़ देता जिससे मम्मी की आंखें बंद हो जातीं और उनके होंठों से लगातार आहें निकलने लगतीं। उनकी चूचियां अब पूरी तरह उभरी हुई थीं और हर स्पर्श के साथ मम्मी की सांसें तेज और भारी हो रही थीं। पसीने की छोटी-छोटी बूंदें उनकी गर्दन से नीचे उतर रही थीं और कमरे में हल्की सी पसीने की गंध फैलने लगी थी।

फिर कल्लू ने मम्मी की पेंटी उतारकर अलग फेंक दी। मम्मी की चिकनी जांघें केले के तने को मात दे रही थीं। मैंने ध्यान से देखा कि मम्मी की चूत बिल्कुल साफ थी। वहां एक भी बाल नहीं था। मम्मी की चूत बिल्कुल शीशे की तरह चिकनी और टाइट दिख रही थी। मम्मी की चूत का गुलाबी रंग दूर से दिखाई दे रहा था।

कल्लू ने पेंटी की रबड़ को दोनों अंगुलियों से पकड़कर धीरे-धीरे नीचे खींचा। जैसे-जैसे पेंटी उतरती गई मम्मी की मोटी और चिकनी जांघें पूरी तरह नंगी हो गईं जो इतनी मुलायम और चमकदार थीं कि केले के तने की तरह लग रही थीं। जब पेंटी पूरी तरह उतर गई तो मम्मी की चूत सामने आ गई जो बिल्कुल साफ शेव की हुई थी। एक भी बाल नहीं था और चूत की दोनों पत्तियां थोड़ी सी खुली हुई थीं जिनके बीच से हल्का गुलाबी रंग चमक रहा था। चूत पर पसीने और उत्तेजना के रस की पतली सी परत चमक रही थी जो हल्की सी मीठी और मादक गंध फैला रही थी। मैं दूर से ही देख रहा था कि चूत कितनी टाइट और छोटी लग रही थी जैसे किसी ने शीशे पर गुलाबी रंग पोत दिया हो।

अब कल्लू मम्मी की चूचियों को मुंह में भरकर चूसने लगा। वह मम्मी की पूरी चूची को मुंह में भरने की असफल कोशिश कर रहा था लेकिन मम्मी की चूचियां उसके मुंह से बड़ी थीं।

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मम्मी आहें भर रही थीं।

फिर कल्लू ने अपना अंडरवियर उतार दिया और उसके अंडरवियर उतारते ही माँ उसके काले और विकराल लंड को सहलाने लगीं। उसका लंड कम से कम नौ इंच लंबा और ढाई इंच मोटा रहा होगा। उसने मम्मी को गोदी में उठा लिया और बिस्तर पर लिटा दिया।

कल्लू माँ के ऊपर आकर 69 की पोजिशन बनाकर उनकी चूत को चाटने लगा। कभी-कभी वह अपनी जीभ से मम्मी की चूत के दाने को छेड़ देता तो मम्मी कसमसा जाती थीं।

चौकीदार का लंड मम्मी के मुंह के ऊपर आ रहा था। अब मम्मी ने मुंह खोलकर उसके लंड को मुंह में ले लिया और उसके लंड को चूसने लगीं। मम्मी कोशिश कर रही थीं कि वह अपने मुंह में ज्यादा से ज्यादा लंड ले लें। लेकिन मम्मी केवल पांच इंच तक ही लंड को मुंह में ले पा रही थीं।

थोड़ी देर बाद कल्लू ने मम्मी की दोनों टांगें फैलाकर ऊपर कर दीं। उसने अपना लंड मम्मी की चूत पर लगाकर एक जोर का झटका दे मारा।

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मम्मी की चूत में आधे से ज्यादा लंड प्रविष्ट हो गया। मम्मी के चेहरे पर हल्की सी परेशानी का भाव आया। लेकिन थोड़ी देर बाद वह खुद नीचे से अपने चूतड़ों को उठाने लगीं।

कल्लू को इशारा मिल चुका था। उसने धीरे-धीरे पूरा लंड मम्मी की चूत में घुसेड़ दिया। उसका पूरा लंड मम्मी की चूत में समा गया। फिर उसने तेज-तेज झटके मारने शुरू कर दिए। मम्मी सिसिया-सिसिया कर नीचे से चूतड़ों को उठा-उठाकर उसका साथ दे रही थीं।

दस मिनट की धकापेल मेरी माँ की चुदाई के बाद उसने अपना लंड मम्मी की चूत से निकाल लिया। उसने मम्मी को खड़े होने को कहा।

मम्मी के खड़े होते ही उसने मम्मी की दोनों टांगों के बीच अपने हाथ डालकर उन्हें एक फीट उठाकर दीवार के सहारे टिका दिया और उनको अपने हाथों से हवा में लटका कर अपना लंड फिर से मम्मी की चूत में घुसेड़ दिया। इस समय मम्मी एक मासूम गुड़िया सी लग रही थीं जिसे कल्लू जैसा पहलवान धमा-धम चोद रहा था।

कल्लू मम्मी की चूत पर दस मिनट तक प्रहार करता रहा। मम्मी अचानक कल्लू से बेल की तरह चिपक गईं। मम्मी की चूत अपना रस छोड़ चुकी थी लेकिन कल्लू ने दस-बारह धक्कों के बाद अपना रस मम्मी की चूत में ही निकाल दिया।

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फिर मम्मी की चूत से निकलते हुए रस को कल्लू ने मम्मी की पेंटी से पोंछ दिया।

अब दोनों ने उठकर अपने-अपने कपड़े पहन लिए। मम्मी ने अपनी पेंटी को एक थैली में रखकर उसे अपने पर्स में रख लिया।

जैसे ही कल्लू ने दरवाजा खोला मुझे देखकर वे दोनों चौंक गए। मैंने मम्मी से अपने साथ चलने को कहा तो वह चुपचाप मेरी मोटरसाइकल पर बैठ गईं।

घर आकर मम्मी बिल्कुल चुप थीं। वह समझ चुकी थीं कि अब मुझे सब पता है।

मैं मम्मी के पास गया और उनसे कहा कि मुझे आप दोनों के इस रिश्ते से कोई परेशानी नहीं है। बल्कि मैं चाहता हूँ कि आप जो स्कूल में कर रहे थे वह घर पर करें। वहां कोई और देखेगा तो बदनामी होगी।

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माँ मेरी बात सुनकर खुश हो गईं।

अगले ही दिन चौकीदार शाम को घर आया और मुझसे बोला, “तुम्हारी मम्मी से कुछ काम है।”

मैं समझ गया कि यह मेरी माँ की चुदाई करने आया है। मैंने अपनी माँ की अन्तर्वासना की पूर्ति के लिए उसे मम्मी के कमरे में भेज दिया और कहा, “काम अच्छे तरीके से करना … बिल्कुल कल की तरह।”

वह मुस्कुरा दिया।

मैंने बाहर से कमरा बंद कर दिया। एक घंटे बाद कल्लू दरवाजा खोलकर बाहर आया तो उसे पसीना आ रहा था।

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मैंने उससे कहा, “रात को मम्मी के पास ही रुक जाओ।”

वह अगले दिन रुकने का वादा करके चला गया।

मैं माँ के कमरे में गया तो वह बेड पर चादर ओढ़कर लेटी हुई थीं। उनका पेटीकोट पेंटी बगल में रखी थी। मैं समझ गया कि यह अभी अंदर नंगी ही लेटी हुई हैं।

मैंने पूछा, “अब कैसा लग रहा है?”

तो मम्मी ने कहा, “तूने मुझको मेरी ज़िन्दगी का बहुत बड़ा उपहार दिया है।”

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कुछ दिन के बाद मैंने मम्मी और कल्लू की शादी करवा दी। शुरू-शुरू में तो मम्मी और कल्लू मेरे सामने सेक्स नहीं करते थे। लेकिन अब कल्लू जब चाहे मेरे सामने ही मम्मी की चुदाई कर देता है और मम्मी का कमरा भी खुला रहता है।

जब भी मैं उनके कमरे में जाता हूँ तो कभी मम्मी उसके ऊपर होती हैं तो कभी कल्लू माँ के ऊपर चढ़ा हुआ होता है।

अब हमारा परिवार सुखी है। मेरी माँ की अन्तर्वासना को उनका हमसफ़र मिल चुका है। आपको यह मेरी माँ की चुदाई की कहानी कैसी लगी कृपा करके कमेंट जरूर करें।

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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