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पेंटिंग क्लास में स्कूल गर्ल को नंगा करके चोदा

Painting class sex story: यह एक सच्ची कहानी है। मैं पेंटिंग की क्लास अपने घर पर लेता था। मेरी क्लास में ज्यादातर लड़कियाँ ही सीखने आती थीं जो अपनी स्कूल यूनिफॉर्म में आकर मेरे घर के स्टूडियो जैसे कमरे में बैठती थीं और रंगों की दुनिया में खो जाती थीं।

एक दिन एक नई लड़की प्रवेश लेने आई। वह इतनी सुंदर थी कि मैं देखता रह गया। उसका छरहरा बदन, औसत ऊंचाई, गोरी-चिट्टी रंगत और बेहद सेक्सी नाक-नक्शा देखकर मेरी सांसें थम सी गईं। उसकी बड़ी-बड़ी आंखें, भोली-भाली मुस्कान और युवा शरीर की मादकता ने तुरंत मेरे बदन में गर्म सनसनाहट भर दी। पहली नजर में मेरे बदन में सनसनाहट पैदा हो गई। मेरी नजर बार-बार उसके टाइट ब्लाउज पर जाती जहां उसकी नरम और उभरी हुई चूचियां हल्के से हिल रही थीं। उसने अपना नाम रिंकी बताया। वह क्लास 12 की विद्यार्थी थी और उसकी उम्र 18-19 साल रही होगी।

वह रोज क्लास में आने लगी। कुछ दिन बाद वह अपनी ही क्लास की एक सहेली को लेकर आई। मैं जानबूझकर उसे अपने सामने बैठाता था और उसके रूप को निहारता रहता था। वह झुककर जब पेंटिंग बनाती थी तब उसकी आधी चूचियां ब्लाउज के गले से झांकने लगती थीं। उनकी नरम सफेद चमक, गहरी खाई और हल्के-हल्के हिलते उभार को देखकर मेरा मन पागल हो जाता था। मेरा लंड धीरे-धीरे फूलने लगता, सख्त होता जाता और पैंट के कपड़े को तानने लगता। जब भी उससे नजर मिलती, मैं पैंट के ऊपर से ही अपने खड़े लंड को अपने हाथ से दबाकर उसे दिखाते हुए मसलता था। मैं महसूस कर सकता था कि मेरा लंड कितना गर्म, कितना मोटा और कितना तना हुआ है। उसकी नजर कई बार मेरे उस उभार पर रुक जाती थी।

वह धीरे-धीरे मेरी नियत समझ गई। अब वह भी बार-बार मुझे देखने लगी। मैं समझ गया कि उसे भी मजा आने लगा था।

कुछ दिन के बाद मैं उसे अपने बगल में बैठाने लगा। अब उसे ड्राइंग सिखाने के बहाने उसके बदन को छूने लगा। मेरी उंगलियां उसके कंधों, बाजुओं और कमर पर हल्के-हल्के फिसलतीं। ऐसा करने से उसके बदन में उत्तेजना होने लगती थी और वह कसमसा जाती थी। उसकी सांसें भारी हो जातीं, उसकी गर्दन लाल पड़ जाती और उसका शरीर हल्का सा कांपने लगता। मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियों को कपड़ों के ऊपर से ही छूने लगा। उनकी पूरी नरमाई, गोलाई और गरमाहट मेरी हथेली में समा जाती। जब मेरी अंगुलियां उसके निप्पल वाले हिस्से को छूती तो मैं महसूस करता कि वे सख्त होकर उभर आए हैं। ऐसा करने से वह चिहुंक जाती थी।

अब वह जानबूझकर मुझसे ज्यादा सटकर बैठने लगी। मैं समझ गया कि उसे भी वही चाहिए जो मुझे चाहिए था।

एक दिन मैंने उसके दुपट्टे के अंदर हाथ डालकर उसकी चूची को जोर से दबा दिया तो वह कांप उठी। मेरी हथेली उसके दुपट्टे के नीचे घुसते ही उसकी नरम, गर्म और भरी हुई चूची को पूरी तरह से लपेट लेने पर उसका पूरा बदन एक झटके से कांप उठा। मैंने अपनी उंगलियों को उसके नरम मांस में गहराई तक धंसाते हुए जोर से मसलना शुरू कर दिया। उसकी चूची की मुलायम लचक, गरमाहट और निप्पल की सख्ती मेरी हथेली में साफ महसूस हो रही थी। रिंकी की सांसें अचानक तेज और भारी हो गईं। उसकी आंखें आधे बंद हो गईं, उसके गाल लाल पड़ गए और उसके होंठों से एक हल्की-सी आह निकल गई। उसका पूरा शरीर सिहरने लगा और उसकी जांघें आपस में सिकुड़ गईं। वह कांप उठी।

अब वह बिना ब्रा पहने आने लगी। जब झुकती थी तो उसकी चूचियों के निप्पल भी दिख जाते थे। अब सबकी नजर बचाकर उसके कुरते के गले में हाथ डालकर उसकी चूचियों को मसल देता था। वह मस्त हो जाती थी। अब वह क्लास में समय से पहले आने लगी और आकर मेरे बगल में चिपककर बैठकर मुझसे चूचियों को मसलवाने का मजा लेने लगी।

एक दिन अकेले में मैं उसे अपने हाथों से जकड़कर अपने बदन में समाकर उसके होंठों को अपने मुंह में भरकर चूसने लगा तो उसने भी कसकर मुझे अपने हाथों से बांध लिया। अब मैं उसके टॉप में हाथ डालकर उसकी चूचियों को मसलने लगा। मेरी पैंट से मेरा लंड खड़ा होकर उसके बदन से टकराने लगा। वह मेरे चूतड़ पकड़कर खींचने लगी जिससे मेरा लंड उसकी बुर से ऊपर से चिपकने लगा।

मैं उसकी चूचियों से हाथ हटाने लगा तो वह मेरा हाथ पकड़कर बोली, “सर, और मसलिये! खूब जोर-जोर से मसलिये सर! कुछ कीजिये सर!”

मैंने उससे कहा, “अभी इतना ही! क्योंकि बाकी लड़कियां अब आने वाली हैं। कल स्कूल न जाकर चुपचाप मेरे पास आ जाना! मैं सुबह तुम्हारा इंतजार करूंगा।”

उसने कहा, “कैसे आऊंगी सर! रूमा भी मेरे साथ स्कूल जाती है।”

रूमा भी मेरी क्लास में ड्राइंग सीखने आती थी। मैंने उससे कहा, “वह तो तुम्हारी पक्की दोस्त है। उसे तो कुछ-कुछ पता ही होगा तुम्हारे और मेरे संबंध के बारे में!”

रिंकी ने कहा, “सर, वह सब जानती है और मुझसे पूछती है कि कैसा लगता है जब सर तुम्हारी चूची मसलते हैं। मैं उसे कहती हूं कि मसलवाओगी तब पता चलेगा कि कितना मजा आता है।”

तब मैं रिंकी से बोला, “आज थोड़ा मजा उसे भी दे देंगे। उसे आज मेरे दूसरे बगल में बैठने को कहना। मैं उसे भी उत्तेजित कर दूंगा। कल उसे भी अपने साथ ले आना। वह आ भी जाएगी और किसी को बोलेगी भी नहीं!”

जब सभी लड़कियां आईं तो रिंकी ने रूमा को मेरे दाएं बगल में बैठा दिया और खुद बाएं बगल बैठ गई। क्लास के कमरे में लड़कियों की हल्की फुसफुसाहट और पेंसिल की खड़खड़ाहट के बीच रिंकी ने चालाकी से सीटिंग अरेंज कर दी ताकि रूमा मेरे ठीक दाएं तरफ बैठ जाए जहां उसकी स्कर्ट वाली जांघ मेरी टांग से हल्का-हल्का छू रही थी और उसकी युवा छाती मेरी पहुंच में आसानी से आ जाए। रिंकी खुद मेरे बाएं तरफ सटकर बैठ गई जिससे उसका गर्म बदन मेरे शरीर से लगातार दबाव बना रहा था। मैं मौका देखकर चारों तरफ नजर घुमाकर यह पक्का कर लिया कि कोई लड़की हमें ध्यान से नहीं देख रही है फिर मैंने अपना दायां हाथ धीरे से नीचे सरकाया और कपड़ों के ऊपर से ही रूमा की चूचियों को पूरी हथेली से दबा दिया। उनकी नरम गोलाई मेरी उंगलियों के बीच दब गई उनकी गरमाहट और लचकदारपन साफ महसूस हो रहा था। रूमा का पूरा बदन एक झटके से सिहर उठा उसकी सांसें अचानक भारी और तेज हो गईं उसके गाल लाल पड़ गए और वह कसमसा जाती हुई अपने होंठ काटने लगी। वह मुझसे और ज्यादा सटने लगी जैसे मेरे हाथ की गर्मी उसे और खींच रही हो। रिंकी तिरछी नजरों से सब कुछ देख रही थी उसकी आंखों में उत्तेजना और जलन का मिश्रण साफ झलक रहा था।

जब क्लास खत्म हो गई तो मैंने रिंकी और रूमा को किनारे बुलाकर कहा “कल तुम दोनों स्कूल जाने के बहाने मेरे पास चली आना। बहुत अच्छा पेंटिंग सिखाऊंगा।”

रिंकी तो पहले से तैयार थी। बोली “मैं आ जाऊंगी पर रूमा आएगी तब न!”

मैंने रूमा से पूछा “क्या तुम मेरा कहना नहीं मानोगी?”

रूमा ने कहा “ठीक है सर! आ जाऊंगी।”

मैंने दोनों को अपनी बांहों में भरते हुए कहा “ठीक है! मैं इंतजार करूंगा।”

दूसरे दिन सही समय पर दोनों आकर मुझे अभिवादन कर मेरे दोनों बगल बैठ गईं। मैं दोनों की चूचियों को दबाने लगा। दोनों बिना ब्रा पहने ही आई थीं। रिंकी तो कहने लगी “सर अंदर हाथ डालकर खूब जोर से दबाइए।”

मैं दोनों के टॉप में हाथ डालकर मसलने लगा। उन्हें मजा आने लगा।

मेरा लंड एकदम टाइट होकर खड़ा हो गया। रिंकी से नहीं रहा गया। वह अपनी हथेली को मेरे लंड के उभार पर रखकर दबाने लगी।

कुछ देर के बाद मैं रिंकी के टॉप के बटन खोलकर उसकी एक-एक कर दोनों चूचियों को निकालकर अपने मुंह में भरकर चूसने लगा। रिंकी सी-सी करने लगी।

फिर मैंने उसके टॉप को अलग करके उसके निप्पल को मसलने लगा। मैंने रिंकी के टॉप के बाकी बटन भी तेजी से खोल दिए जिससे पूरा टॉप उसके कंधों से फिसलकर नीचे गिर गया और उसकी दोनों नंगी चूचियां पूरी तरह से मेरी नजर के सामने आ गईं। उनकी गोलाई, सफेदी और बीच में खड़े गुलाबी निप्पल देखकर मेरा मुंह सूख गया। मैंने अपनी अंगुलियों को उसके बाएं निप्पल पर रखा और धीरे-धीरे उसे घुमाने लगा फिर जोर से मसलने लगा। निप्पल मेरी उंगलियों के बीच सख्त होकर और भी उभर आया उसकी नरम चूची की गरमाहट मेरी हथेली में फैल गई। रिंकी के मुंह से हल्की-सी कराह निकली उसकी आंखें आधे बंद हो गईं और उसका बदन मेरे छूने से बार-बार सिहर उठा।

साथ-साथ दूसरे हाथ से उसके बदन के सभी भाग को सहलाते हुए स्कर्ट के ऊपर से ही उसकी बुर को दबाने लगा। मेरी बाईं हथेली उसके पेट पर फिसली फिर कमर पर घूमी और धीरे से स्कर्ट के कपड़े के ऊपर से उसकी बुर पर दबाव डालने लगी। मैं महसूस कर रहा था कि उसकी बुर पहले से ही गीली और गरम हो चुकी थी कपड़े के ऊपर से भी उसकी नमी हल्की-हल्की महसूस हो रही थी। मैंने अपनी उंगलियों को स्कर्ट के ऊपर से ही उसके बुर के छेद पर दबाकर हल्का-हल्का रगड़ना शुरू किया। रिंकी का पूरा शरीर अब तड़पने लगा उसकी जांघें आपस में सिकुड़-फैल रही थीं और उसकी सांसें पूरी तरह से अनियंत्रित हो चुकी थीं। रिंकी चिहुंककर मुझसे जोर से चिपक गई और एक हाथ बढ़ाकर मेरे लंड को ऊपर से ही दबाने लगी। बोलने लगी, “सर प्लीज कुछ कीजिए, अब नहीं रहा जा रहा है।”

मैंने कहा, “ठीक है! जरा रुको! रूमा को भी कुछ मजा दे दूं!”

कहकर मैंने रूमा को आगोश में भर लिया। उसके एक-एक अंग से खेलने लगा। फिर उसके कान में कहा, “रिंकी बहुत गर्म हो गई है। उसे अब चुदवाने का मन कर रहा है। तुम यहीं रुको। पहले उसे पहली चुदाई का मजा दे दूं। जब मैं उसको चोदूंगा तो तुम दरवाजे पर आकर सब कुछ अपनी आंखों से देखना। देखना कैसे उसकी पहली सील टूटती है।”

फिर मैंने रूमा को छोड़ रिंकी को बांहों में भरकर उसके होंठों को कसकर चूमा। मैंने अपनी मजबूत बांहों को रिंकी की पतली कमर के चारों ओर लपेट लिया और उसे एक झटके से अपने सीने से चिपका लिया। उसकी नरम और भरी हुई चूचियां मेरी छाती से जोर से दब गईं। मैंने अपना मुंह उसके होंठों पर रखकर पहले हल्का-हल्का चूमा फिर धीरे-धीरे जोर बढ़ाते हुए उसके निचले होंठ को अपने होंठों में भरकर चूसने लगा। मेरी जीभ उसके होंठों के बीच घुस गई और उसकी गर्म और मीठी जीभ को लपेटकर जोर-जोर से चाटने लगी। हम दोनों के मुंह से चूच-चूच और सिसकारियों जैसी आवाजें निकल रही थीं। रिंकी की सांसें तेज हो गईं उसके बदन में हल्का कंपन महसूस हो रहा था और उसके हाथ मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगे।

फिर उससे कहा, “देखो रानी, अब तुम चुदवाने के लिए तैयार हो। लेकिन एक बात बता देता हूं कि पहली बार मेरे लंबे और मोटे लंड को तुम्हारी छोटी सी अनचुदी बुर में घुसाने में शुरू में बहुत तकलीफ होगी। तुमको शुरू में तकलीफ बर्दाश्त करनी होगी। लेकिन धीरे-धीरे तुमको जन्नत का मजा आने लगेगा।”

मैं यह बात उसके कान के बिल्कुल पास फुसफुसाते हुए कह रहा था। मेरी भारी और गहरी आवाज उसके कान में गूंज रही थी जबकि मेरी गर्म सांसें उसके गालों और गर्दन पर लगातार पड़ रही थीं। मेरी एक बांह उसकी पतली कमर को कसकर जकड़े हुए थी और दूसरा हाथ अभी भी उसकी नंगी चूची को धीरे-धीरे दबा और सहला रहा था। मेरी सख्त लंड उसकी नाभि के पास दबाव बना रहा था और उसकी गरमाहट रिंकी के पेट तक महसूस हो रही थी। मेरे शब्द सुनते ही रिंकी का पूरा शरीर एक झटके से सिहर उठा। उसकी आंखें मेरी आंखों में गहराई तक डूब गईं, उसके गाल और गर्दन गहरे लाल हो गए, उसके होंठ हल्के से खुले रह गए और उसकी सांसें पूरी तरह से अनियंत्रित और तेज हो गईं।

उसने कहा, “बाप रे! इतना लंबा लंड मेरी बुर में कैसे घुसेगा? जाने दीजिए, फट जाने दीजिए मेरी बुर को। इसने मुझे बहुत तड़पाया है। चलिए मैं तैयार हूं! जल्दी चोदिए मुझे!”

उसकी आवाज में शर्म, डर और तीव्र कामवासना का अनोखा मिश्रण साफ सुनाई दे रहा था। वह बोलते हुए मेरी छाती से और भी कसकर सट गई थी। उसके निप्पल मेरी छाती से रगड़ रहे थे, उसकी जांघें बेचैनी से आपस में रगड़ रही थीं और उसकी आंखों में पूरी बेताबी और भूख झलक रही थी। उसके हाथ मेरी पीठ पर नाखून गड़ाने लगे थे जैसे वह खुद को रोक नहीं पा रही हो।

कहकर वह मेरी पैंट की जिप खोलकर मेरे लंड को बाहर निकालकर हाथ से रगड़ने लगी। फिर उचककर स्कर्ट उठाकर अपनी बुर के ऊपर मेरे सख्त लंड को रगड़ने लगी।

मैंने रूमा को देखा कि वह अपने स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर अपनी बुर से खेल कर रही थी।

अब मैं रिंकी के पैंटी के अंदर हथेली डालकर उसकी बुर में उंगली घुसा दिया तो वह आह-आह करने लगी। मेरी हथेली उसके स्कर्ट के नीचे से सरककर पैंटी के अंदर घुसी तो पहले तो गर्म और नम कपड़े की परत महसूस हुई फिर मेरी उंगलियां सीधे उसकी बुर की मुलायम और पूरी तरह गीली फांकों पर पहुंच गईं। उसकी बुर पहले से ही इतनी गीली थी कि मेरी उंगली बिना किसी रुकावट के उसके गर्म और सिकुड़े हुए छेद में फिसल गई। मैंने अपनी मोटी मध्यमा उंगली को पूरी लंबाई तक अंदर धकेल दिया और अंदर ही अंदर घुमाने लगा। उसकी बुर की दीवारें मेरी उंगली को कसकर जकड़ रही थीं उनकी गर्मी और नमी मेरी हथेली तक पहुंच रही थी। रिंकी का पूरा बदन एक झटके से कांप उठा उसकी जांघें मेरी कलाई को दबाने लगीं और उसके मुंह से लगातार आह-आह की सिसकारियां निकलने लगीं। उसकी आंखें आधे बंद हो गईं उसके गाल गहरे लाल हो गए और उसकी सांसें पूरी तरह से अनियंत्रित हो चुकी थीं।

कहने लगी, “और अंदर घुसाइए सर, एक नहीं दो-तीन उंगली डालिए प्लीज! आह सर, बहुत अच्छा लग रहा है। और, और अंदर डालिए। आह सर, अब मुझे जल्दी चोदिए! मुझे असली मजा दीजिए सर! मेरी बुर में पेल दीजिए इस लंड को। हाय, अब नहीं रुक सकती!”

उसकी आवाज में बेताबी और वासना का ऐसा तूफान था कि हर शब्द उसके होंठों से कांपते हुए निकल रहा था। वह बोलते हुए अपनी कमर को मेरी उंगली की तरफ और आगे झुका रही थी ताकि मेरी उंगली और गहराई तक चली जाए। उसकी बुर की नमी अब मेरी पूरी हथेली पर फैल चुकी थी और हर बार उंगली अंदर-बाहर करने पर चप-चप की आवाज निकल रही थी।

कहकर मेरे लंड को मुंह में भरकर होंठों और जीभ से चूसने लगी। मैं पलटकर रूमा को देखा तो वह अपनी बुर में उंगली डाल रही थी। मुझे देखकर वह शर्म से अपना मुंह छिपाने लगी।

मैंने अब रिंकी को अपने गोद में उठाकर दूसरे कमरे में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया और उसके सारे कपड़े एक-एक कर उतार दिए। मैंने अपनी एक बांह उसके घुटनों के नीचे और दूसरी बांह उसकी पीठ के पीछे डालकर उसे आसानी से गोद में उठा लिया। उसका हल्का-फुल्का बदन मेरी मजबूत बांहों में पूरी तरह समा गया। उसकी नंगी चूचियां मेरी छाती से जोर-जोर से दब रही थीं और उनकी नरम गरमाहट मेरी त्वचा तक पहुंच रही थी। उसकी गर्म और तेज सांसें मेरी गर्दन पर लगातार पड़ रही थीं। मैं उसे उठाकर दूसरे कमरे में ले गया जहां एक बड़ा साफ-सुथरा बिस्तर बिछा हुआ था। धीरे से उसे बिस्तर पर लिटा दिया। फिर मैंने उसके बचे हुए कपड़ों को एक-एक करके उतारना शुरू किया। पहले उसके टॉप को कंधों से नीचे सरकाकर पूरी तरह निकाल दिया। फिर स्कर्ट की जिप खोलकर उसे उसके गोल और नरम नितंबों से नीचे खींच दिया। अब वह सिर्फ पैंटी में थी। उसकी सफेद पैंटी पहले से ही उसके बुर के रस से पूरी तरह भीगी हुई थी और उसकी नमी कपड़े पर साफ-साफ दिख रही थी।

मैं उस पर चढ़कर उसकी चूचियों को मसलते हुए उसके होंठों को चूसने लगा। फिर उसकी बुर में उंगली डालकर आगे-पीछे करता रहा।

अब रिंकी मेरा लंड पकड़कर रगड़ने लगी। मैंने उठकर 69 के पोजीशन में आकर अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और मैं अपनी जीभ से रिंकी की बुर को चाटने लगा। वह उम्म-उम्म कर मजा लेने लगी।

कुछ देर बाद वह बोल उठी, “सर, अब अपना लंड मेरी बुर में डालिए! सर जल्दी डालिए, आहा अब चोदो सर, चोदो न प्लीज!”

अब मैं उठकर बैठ गया तो वह अपनी टांगों को फैलाकर बोली, “लीजिए डाल दीजिए इसमें अपना लंड!”

मैंने अपने लंड की सुपारी उसकी बुर के मुंह पर रख दी तो वह शी-शी करने लगी। मेरी लंड की गोल और मोटी सुपारी रिंकी की बुर के गर्म, गीले और सिकुड़े हुए मुंह पर ठीक से टिक गई। उसकी बुर की नरम फांके मेरे लंड की गरम नोक को कसकर चिपक गईं और उसकी नमी मेरी सुपारी को तुरंत भीगने लगी। रिंकी का पूरा बदन एक झटके से कांप उठा उसकी जांघें मेरी कमर के दोनों तरफ सिकुड़ गईं और उसके मुंह से लगातार शी-शी शी-शी की तीखी सिसकारियां निकलने लगीं। उसकी आंखें आधे बंद हो गईं उसके गाल और गर्दन गहरे लाल पड़ गए और उसकी सांसें पूरी तरह से तेज और अनियंत्रित हो चुकी थीं। वह महसूस कर रही थी कि मेरा मोटा लंड उसकी छोटी और टाइट बुर को अभी-अभी छू रहा है जिससे उसके बदन में दर्द और मजा दोनों एक साथ उभर रहे थे।

मेरा लंड पकड़कर अपनी बुर के छेद पर ले आई और कहने लगी, “जल्दी घुसाओ सर!”

उसकी उंगलियां मेरे लंड की मोटी डंडी को कसकर पकड़ रही थीं और वह खुद अपनी कमर को ऊपर उठाकर मेरी सुपारी को अपने बुर के छेद के बिल्कुल बीच में ले आई। उसकी बुर की गर्मी और नमी अब मेरे लंड की पूरी सुपारी पर फैल चुकी थी और हर छोटी हरकत से चप-चप जैसी आवाज निकल रही थी। रिंकी की आवाज में बेताबी और भूख साफ सुनाई दे रही थी उसके होंठ कांप रहे थे और उसकी आंखें मेरी आंखों में गहराई तक डूब गई थीं।

मैंने उसकी कमर पकड़कर हल्का सा धक्का दिया तो मेरा लंड उसकी बुर में नहीं घुसा। उसका बुर इतना टाइट था कि लंड घुस नहीं पा रहा था। मैं उठकर खड़ा हो गया तो वह मेरा हाथ पकड़कर खींचते हुए बोली, “क्या हुआ? चोदो न सर!”

मैं बोला, “तुम्हारी बुर बहुत कसी हुई है। ऐसे नहीं घुसेगा! थोड़ा तेल लगाना पड़ेगा। मैं तेल लेकर आ रहा हूं।”

मैं कमरे से निकलने लगा तो देखा कि रूमा दरवाजे में खड़ी होकर सब देख रही थी। मैं रूमा की चूची पकड़कर खींचते हुए किचन में ले गया और उसकी बुर में उंगली डालकर रगड़ने लगा। फिर उससे कहा, “तुम रिंकी की पूरी चुदाई दरवाजे से देखती रहना!”

मैंने तेल की शीशी उठाकर रूमा की बुर पर हाथ रखते हुए उसे दरवाजे पर खड़ा कर दिया और कमरे में घुसा। मैंने किचन की अलमारी से तेल की शीशी निकाली और उसे हाथ में थाम लिया। तेल की शीशी ठंडी और चिकनी थी। फिर मैंने अपना दायां हाथ रूमा की स्कर्ट के अंदर सरकाया और उसकी बुर पर पूरी हथेली से जोर से दबा दिया। उसकी बुर पहले से ही गर्म और भीगी हुई थी। मेरी उंगलियां उसके बुर के गीले फांकों को छू रही थीं और उसकी नमी मेरी हथेली पर फैल गई थी। मैंने उसे कसकर पकड़कर दरवाजे की चौखट पर खड़ा कर दिया। उसकी टांगें थोड़ी फैली हुई थीं और उसका बदन मेरे हाथ की वजह से हल्का-हल्का कांप रहा था। रूमा की सांसें तेज हो गईं उसके गाल लाल पड़ गए और वह शर्म से मेरी आंखों से नजर चुराने लगी। मैं उसे वहीं खड़ा छोड़कर कमरे में घुसा।

तो देखा कि रिंकी आंख बंद कर अपनी बुर में उंगली कर रही थी। रिंकी बिस्तर पर लेटी हुई थी। उसकी आंखें पूरी तरह बंद थीं। उसकी एक हाथ अपनी पैंटी के अंदर था और वह अपनी बुर में उंगली डालकर धीरे-धीरे आगे-पीछे कर रही थी। उसकी सांसें भारी और तेज थीं। उसके निप्पल सख्त होकर खड़े थे और उसकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। उसकी जांघें हल्की-हल्की फैली हुई थीं और उसके होंठों से हल्की-हल्की आहें निकल रही थीं। वह पूरी तरह से अपनी उंगली के मजा में खोई हुई थी।

मैं फिर उसकी टांगें फैलाकर बीच में बैठ गया और तेल निकालकर उसकी बुर के छेद में डाला और उंगली से तेल उसकी बुर के अंदर करने लगा। दो उंगली डालकर उसकी बुर को तेल से चुपड़ दिया। मैंने रिंकी की दोनों टांगों को धीरे से फैलाकर उसके बीच में घुटनों के बल बैठ गया। उसकी टांगें अब पूरी तरह से खुली हुई थीं और उसकी भीगी पैंटी मेरे सामने थी। मैंने तेल की शीशी का ढक्कन खोला और ठंडा चिकना तेल सीधे उसके बुर के छेद पर डाल दिया। तेल की ठंडी धार उसके गर्म बुर पर पड़ते ही रिंकी का बदन एक झटके से कांप उठा। मैंने अपनी मोटी उंगली से तेल को उसके बुर के छेद में धीरे-धीरे अंदर धकेला। उंगली अंदर-बाहर करते हुए तेल को पूरी तरह फैलाने लगा। फिर मैंने दो उंगलियां एक साथ उसके बुर में डाल दीं। दोनों उंगलियां अंदर तक घुसाईं और उन्हें घुमाकर उसके बुर की दीवारों को तेल से पूरी तरह चुपड़ दिया। तेल की चिकनाहट और उसकी बुर की गर्म नमी मिलकर चप-चप की आवाजें निकाल रही थीं।

रिंकी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ कर छटपटाने लगी। फिर मैंने थोड़ा तेल अपने लंड पर लगाकर मालिश कर दिया। मैंने रूमा की ओर देखा तो वह अपनी बुर में उंगली कर रही थी और सबकुछ गौर से देख रही थी। रिंकी को कुछ पता नहीं था कि रूमा देख रही है।

अब मैं अपने लंड को रिंकी की बुर के छेद पर रखकर कमर से एक धक्का दिया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी बुर में फंस चुका था। मेरी लंड की मोटी और गोल सुपारी तेल से चिकनी और गरम होकर रिंकी की बुर के सिकुड़े हुए छेद पर ठीक से टिकी हुई थी। मैंने अपनी कमर को धीरे से आगे झुकाया और हल्का सा धक्का दिया। तुरंत मेरी सुपारी उसके टाइट बुर के मुंह में आधी तक फंस गई। उसकी बुर की नरम लेकिन बहुत कसी हुई दीवारें मेरे लंड के सिरे को कसकर जकड़ रही थीं। तेल की चिकनाहट के बावजूद उसकी अनचुदी बुर इतनी तंग थी कि पूरा सुपाड़ा अंदर जाने के लिए जोर-जोर से दबाव डाल रहा था। रिंकी की बुर की गर्म नमी और तेल मिलकर चप-चप जैसी हल्की आवाज निकाल रहे थे। मेरी सुपारी के अंदर घुसते ही रिंकी का पूरा निचला हिस्सा सिकुड़ गया और उसकी जांघों की मांसपेशियां कांपने लगीं।

रिंकी चिल्लाई, “नहीं सर, मत डालिए! बहुत दर्द हो रहा है! छोड़ दीजिए प्लीज! अभी नहीं बाद में! हाय मैं मर गई! निकालिए!”

उसकी चीख तेज और भरी हुई थी। उसका पूरा बदन एक झटके से ऊपर की तरफ उठ गया। उसकी आंखें चौड़ी हो गईं और मुंह से लगातार दर्द भरी चीखें निकल रही थीं। उसकी जांघें मेरी कमर के दोनों तरफ सिकुड़-फैल रही थीं और उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरे गड़ गए थे। उसकी बुर की दीवारें मेरी सुपारी को बाहर निकालने की कोशिश में जोर-जोर से सिकुड़ रही थीं जिससे दर्द और भी तेज हो गया था। उसके गालों पर आंसू बहने लगे थे और उसकी सांसें पूरी तरह से रुक-रुककर चल रही थीं। वह बार-बार अपना सिर बिस्तर पर इधर-उधर हिला रही थी और हाथों से मेरी छाती को धक्का देने की कोशिश कर रही थी।

मैंने उसी हालत में रहते हुए उसे समझाया, “थोड़ा दर्द बर्दाश्त करो! बस थोड़ा दर्द सह लो। आखिर कभी तो चुदवाओगी ही! और तब भी दर्द करेगा! तो आज ही बर्दाश्त कर लो!”

मैं अभी भी उसके ऊपर झुका हुआ था और मेरा लंड का सुपाड़ा आधा उसके बुर में फंसा हुआ था। मैंने एक हाथ से उसके गाल को प्यार से सहलाया और दूसरे हाथ से उसकी कमर को कसकर पकड़ रखा था ताकि वह हिल न सके। मेरी आवाज नरम लेकिन दृढ़ थी। मैं उसके कान के पास फुसफुसाकर उसे समझा रहा था जबकि मेरी सांसें उसके चेहरे पर गर्म-गर्म पड़ रही थीं। मैंने उसके होंठों को हल्का-हल्का चूमा और उसकी गर्दन पर प्यार भरे किस किए ताकि दर्द के साथ थोड़ी राहत भी मिले।

कहकर उसे खूब प्यार से पुचकारने लगा तो वह मान गई और बोली, “ठीक कीजिए जो करना है, पर जरा धीरे-धीरे! नहीं तो मैं मर जाऊंगी। फिर आप किसको चोदेंगे!”

उसकी आवाज अब थोड़ी कमजोर और कांपती हुई थी। वह मेरी छाती से चिपककर रो रही थी लेकिन धीरे-धीरे उसका बदन मेरे नीचे ढीला पड़ने लगा। उसकी जांघें अब मेरी कमर को हल्का-हल्का घेर रही थीं और उसकी सांसें अभी भी तेज थीं लेकिन चीखें कम हो गई थीं। उसके आंसू अभी भी बह रहे थे लेकिन उसकी आंखों में अब एक अजीब सी बेताबी भी झलकने लगी थी।

मैंने साहस कर इस बार उसके मुंह पर हाथ रखकर एक करारा झटका दिया तो मेरा आधा लंड घुस चुका था। रिंकी छटपटाने लगी। उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। पर मैं उसे दबोचे रहा और धीरे आधे लंड को आगे-पीछे करने लगा।

धीरे-धीरे उसका छटपटाना बंद हुआ। रिंकी का पूरा बदन अब धीरे-धीरे ढीला पड़ने लगा। उसकी जांघें जो पहले मेरी कमर को जोर से दबा रही थीं अब हल्के-हल्के फैलने लगीं। उसकी बुर की दीवारें मेरे लंड के आधे हिस्से को अब इतनी कसकर नहीं जकड़ रही थीं। उसकी सांसें जो पहले रुक-रुककर चल रही थीं अब थोड़ी लंबी और गहरी होने लगीं। उसके आंसू अभी भी गालों पर थे लेकिन चीखें पूरी तरह बंद हो चुकी थीं। उसकी आंखें जो दर्द से बंद थीं अब धीरे-धीरे खुलने लगीं और उनमें एक नई चमक आने लगी थी।

अब मौका देखकर मैंने एक और जोर का धक्का लगा दिया और पूरा लंड उसकी बुर में घुस चुका था। मैंने अपनी कमर को पूरा जोर लगाकर एक तेज और गहरा धक्का दिया। मेरा पूरा मोटा और लंबा लंड एक ही झटके में उसके टाइट बुर के अंदर जड़ तक चला गया। तेल की चिकनाहट और उसकी बुर की गर्म नमी ने मदद की लेकिन फिर भी उसकी अनचुदी बुर को पूरी तरह फैलने में जोर लगाना पड़ा। मेरी लंड की जड़ उसके बुर के मुंह से बिल्कुल सटी हुई थी। उसकी बुर की दीवारें मेरे लंड को चारों तरफ से कसकर लपेट रही थीं। हर नस-नस महसूस हो रही थी। रिंकी की बुर के अंदर की गर्मी और नमी मेरे लंड की पूरी लंबाई पर फैल गई थी।

रिंकी मुझे धक्का देकर अलग करना चाहती थी पर मैं उसे उसी पोजीशन में जकड़े रहा और कहा, “बस रानी! अब दर्द नहीं करेगा! अब तुम जन्नत का मजा लोगी! बस मेरा साथ देती रहो!”

मैंने उसे अपनी मजबूत बांहों में पूरी तरह जकड़ रखा था। मेरी छाती उसकी नंगी चूचियों से जोर से दब रही थी। मेरी एक हाथ उसकी कमर के नीचे था और दूसरा उसके बालों में। मैंने उसके कान के पास मुंह लगाकर नरम और प्यार भरी आवाज में कहा। मेरी गर्म सांसें उसके गाल पर पड़ रही थीं। मैंने उसके होंठों को हल्का-हल्का चूमा और उसकी गर्दन पर किस किए। उसकी बुर अभी भी मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थी लेकिन धीरे-धीरे उसका दबाव कम होने लगा।

और मैंने धीरे से थोड़ा सा अपने लंड को पीछे खींचा और फिर उसी तरह जड़ तक घुसा दिया। तीन-चार बार ऐसा किया तो वह आह-आह करने लगी। मैं समझ गया कि अब उसे मजा आने लगा है। अब मैं स्पीड बढ़ाने लगा। कुछ देर बाद मैंने महसूस किया कि रिंकी भी नीचे से धक्का देने लगी है।

फिर क्या था, मैं सटासट जोर से आगे-पीछे धक्का देने लगा।

अब वह बोलने लगी, “हां सर, इसी तरह। हाय मेरे राजा कितना अच्छा। हाय घुसाओ जोर-जोर से। चोदो सर, खूब चोदो सर। फाड़ दो राजा, भरता बना दो मेरी बुर का! हां, ऐसे ही चोदो। चोदो, खूब चोदो। आह चोदते रहो सर। मैं आपकी हो गई सर। खूब मजा दे रहे हो। हाय आह-आह आह! मेरे सोना सर कितना अच्छा है। सर अब मैं तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई। मेरी बुर का चिथड़ा निकाल दो। हाय जोर से, और जोर से करो। करो हाय। चोदो जोर से चोदो। मारो धक्का। लो मैं भी धक्का देती हूं। चोदो, और जोर से और…जोर से चोदो। हाय मैं गई! मैं गई राजा! हाय गई!”

उसकी आवाज पूरी तरह से वासना से भरी हुई थी और हर शब्द उसके मुंह से कांपते और चीखते हुए निकल रहा था। मेरे हर जोरदार धक्के के साथ उसकी बुर मेरे लंड को अंदर तक निचोड़ रही थी। उसकी गर्म और तेल से चिकनी दीवारें मेरे मोटे लंड को चारों तरफ से कसकर जकड़ लेतीं और फिर छोड़ देतीं। रिंकी की कमर ऊपर-नीचे हिल रही थी। वह खुद नीचे से मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी। उसकी जांघें मेरी कमर को घेरकर कस रही थीं और हर बार जब मेरा लंड जड़ तक घुसता तो उसकी बुर से चप-चप चिकनी और गीली आवाजें निकल रही थीं। उसकी नंगी चूचियां जोर-जोर से हिल रही थीं। उनके निप्पल सख्त होकर खड़े थे। उसके गाल लाल थे। उसकी आंखें आधे बंद होकर उलट गई थीं। पसीने की बूंदें उसकी गर्दन और छाती पर बह रही थीं। उसकी सांसें पूरी तरह से रुक-रुककर और तेज हो चुकी थीं। उसके नाखून मेरी पीठ पर गहरे गड़ गए थे। उसकी बुर की अंदरूनी मांसपेशियां मेरे लंड को बार-बार सिकोड़ रही थीं जैसे वह उसे और गहराई तक खींचना चाहती हो।

उसके बोलते हुए ही उसका पूरा बदन अचानक तन गया। उसकी बुर मेरे लंड को इतनी जोर से निचोड़ने लगी कि मुझे लगा जैसे वह मेरा लंड अंदर ही अंदर दबाकर निचोड़ लेगी। उसकी जांघें कांपने लगीं। उसकी कमर ऊपर उठकर मेरे धक्कों से टकराने लगी। उसके मुंह से लगातार आह-आह और हाय की सिसकारियां निकल रही थीं। उसकी बुर के अंदर गर्म रस की लहरें मेरे लंड पर बहने लगीं। वह पूरी तरह से झड़ने वाली थी। उसकी आंखें पूरी तरह बंद हो गईं। उसके होंठ कांप रहे थे। उसका सारा शरीर एक लंबे और तीव्र आर्गेज्म में सिहर उठा।

और वह झड़ गई।

मैं फिर भी उसे जोर-जोर से धक्का लगाकर चोदता रहा। मेरे कूल्हे अब पूरी ताकत से ऊपर-नीचे हिल रहे थे। हर धक्के के साथ मेरा मोटा और लंबा लंड रिंकी की बुर के अंदर जड़ तक घुस जाता और फिर तेजी से बाहर निकलता। तेल और उसके बुर के रस की मिली-जुली चिकनाहट के कारण हर बार चप-चप चिकनी और गीली आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरी लंड की नसें फूलकर सख्त हो गई थीं और रिंकी की बुर की दीवारें उसे हर धक्के पर कसकर निचोड़ रही थीं। रिंकी की जांघें मेरी कमर को घेरकर और भी कस गई थीं। उसकी नंगी चूचियां जोर-जोर से हिल रही थीं और पसीने की बूंदें उसकी गर्दन से छाती तक बह रही थीं। मेरी सांसें भारी और गर्म हो चुकी थीं।

और मैं बोलने लगा, “रिंकी रानी कैसा लगा? हाय मजा आया न? मैं बोला था न, जन्नत का सैर करा दूंगा। लो अब मैं भी गया, रानी हाय आ..अ..आ।”

उसके बोलते ही मेरे अंडकोष सिकुड़ गए और मेरे लंड की जड़ से एक गर्म लहर उठी। मेरा सारा वीर्य रिंकी की बुर में झड़ गया। पहला झटका इतना जोरदार था कि गर्म और गाढ़ा वीर्य की पहली धार सीधे उसके बुर की गहराई में फूट पड़ी। फिर एक के बाद एक झटके के साथ मेरा वीर्य लगातार उसके अंदर उछलता रहा। हर फुहार उसके बुर की दीवारों को गर्म और चिपचिपा बना रहा था। कुछ वीर्य की बूंदें उसके बुर के छेद से बाहर निकलकर उसके नितंबों पर बहने लगीं। मैं पांच मिनट तक रिंकी की बुर में लंड डाले रहा और उस पर लेटे रहा। मेरा पूरा बदन उसके नरम और गर्म बदन पर दबा हुआ था। मेरी छाती उसकी चूचियों से सटी हुई थी। उसकी बुर अभी भी मेरे लंड को हल्के-हल्के सिकोड़ रही थी। हम दोनों की सांसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।

फिर उठकर लंड बाहर कर लिया। मैंने देखा कि रिंकी आंखें बंद कर सुध-बुध खोकर एक नशे में डूबी हुई है।

मैं उसे उसी अवस्था में छोड़कर रूमा, जो दरवाजे पर खड़ी थी, के पास जाकर उसे कसकर चूम लिया और कहा, “कैसा लगा चुदाई का खेल?”

तो वह शर्म से लाल हो गई।

मैं उसकी चूची पकड़कर क्लास वाले कमरे में ले गया और उसकी बुर में उंगली डालकर तैयार करने लगा। मैंने रूमा की एक नंगी चूची को पूरी हथेली से कसकर पकड़ लिया। उसकी नरम और गरम चूची की लचक मेरी उंगलियों के बीच दब गई और उसका सख्त निप्पल मेरी हथेली की बीच में दब रहा था।

मैं उसे खींचते हुए क्लास वाले कमरे की तरफ ले गया जहां अभी भी पेंटिंग की महक और लड़कियों की हल्की खुशबू हवा में बसी हुई थी। मेरी दूसरी हाथ उसकी स्कर्ट के अंदर सरक गया और मैंने अपनी मोटी उंगली सीधे उसके बुर के गीले और गर्म छेद में धकेल दी। उसकी बुर पहले से ही बहुत गीली थी। मेरी उंगली अंदर-बाहर करने लगी और हर बार चप-चप की चिकनी आवाज निकल रही थी। रूमा की सांसें तेज हो गईं। उसकी जांघें कांपने लगीं और वह मेरे हाथ का साथ देने लगी।

वह भी मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी। उसकी नरम और गर्म हथेली मेरे अभी-अभी झड़े हुए लेकिन फिर से फूल रहे लंड को पकड़कर ऊपर-नीचे रगड़ रही थी। मेरी लंड की नसें फिर से फूलने लगीं और वह सख्त और मोटा होकर खड़ा होने लगा।

मैंने अपना लंड उसके मुंह में डाल दिया और वह उसे लॉलीपॉप जैसा चूसने लगी। मैंने रूमा के सिर को हल्का सा दबाकर अपना पूरा लंड उसके गर्म और नम मुंह में ठेल दिया। उसकी जीभ मेरी लंड की सुपारी के चारों तरफ लिपट गई और वह जोर-जोर से चूसने लगी। उसके होंठ मेरी लंड की डंडी को कसकर दबा रहे थे और उसके मुंह से चूच-चूच की आवाजें निकल रही थीं। उसकी लार मेरे लंड पर बह रही थी और वह उसे लॉलीपॉप की तरह चाट-चूस रही थी।

इतने में रिंकी उस कमरे में आ गई। रूमा के साथ यह सब करते देख वह गुस्से में लाल हो गई और रूमा को एक चपत लगाकर धकेल दिया और बोली, “रूमा तुमको सर के साथ इतना करने की इजाजत मैं नहीं दूंगी। सर सिर्फ मुझे चोदेंगे। सिर्फ मुझे। बस मैं तुम्हें सर से सिर्फ ऊपर तक की ही इजाजत दे सकती हूं। खबरदार, जो इससे आगे बढ़ी। सर सिर्फ मेरे हैं! अब बोलो रूमा, कोई सर पसंद है क्या? कोई और टीचर या कोई और सर जिसे तुम देखकर गीली हो जाती हो? जल्दी बोलो न, शर्माने का समय नहीं है। सर उसको तुम्हारे लिए फंसाएंगे। मैं खुद सर से कह दूंगी कि वो उस सर को किसी बहाने क्लास में बुलाएं, फिर तुम दोनों को अकेला छोड़ दें। सर बहुत चालाक हैं, वो आसानी से किसी को भी फंसा सकते हैं। तुम बस नाम बता दो, बाकी मैं और सर संभाल लेंगे। लेकिन याद रखना, सर का लंड और सर का बदन सिर्फ मेरे लिए है। तुम किसी और को चोद सकती हो पर सर सिर्फ मुझे चोदेंगे। मैं तुम्हें सिर्फ ऊपर तक की इजाजत दे रही हूं, ज्यादा मत सोचना। अगर तुमने सर को छूने की कोशिश भी की तो मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूंगी। अब बोलो, कौन सा सर पसंद है? जल्दी बताओ ताकि मैं सर से बात कर लूं।”

फिर दोनों ने ठीक से अपना-अपना स्कूल ड्रेस पहना और आइने की मदद से बाल वगैरह ठीक किए। रिंकी ने मुझसे जोर से चिपककर मुझे जबरदस्त चुम्बन दिया और बोली, “सर, मैं तो डर गई थी, पर अब पता चला कि आपके लंड को लेकर मैं जन्नत पहुंच गई। मैं अभी भी उसी में खोई हुई हूं। सर अब जब चाहें मुझे चोद सकते हैं। मैं तो दिन-रात आपसे चुदवाती रहती! पर मजबूरी है। जाना तो पड़ेगा ही। फिर मिलेंगे, फिर चुदाई का खेल खेलेंगे। मुझे तो लग रहा है कि मैं आपके लंड को अपनी बुर में रखकर ले जा रही हूं। हाय सर, है आपका लंड!”

कहकर जाते हुए मेरे लंड पर किस कर ली और “बाई सर, बाई आपका लंड!” कहते हुए मेरे लंड को मसलकर मुझे फिर किस देकर चली गई।

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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