Didi Jija and Sali sex story: हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम पूजा है और इस साल मेरी शादी होने वाली है। मैं छोटे से एक मोहल्ले की सीधी साधी लड़की हूं जहां संकरी गलियां, पड़ोसियों की हंसी और रोजमर्रा की छोटी छोटी बातें ही जीवन की धड़कन हैं। मैं सुंदर और भरे बदन की मालिक हूं जिसमें हर अंग आकर्षण और कोमलता से भरा हुआ है। मेरी कद काठी पांच फुट के करीब है, मेरा रंग बेहद गोरा और चमकदार है जो सुबह की धूप में मोती की तरह निखर उठता है। मेरी त्वचा इतनी मुलायम है कि हवा का हल्का स्पर्श भी रोएं खड़े कर देता है। मेरे स्तन भरे हुए, ऊपर उठे हुए और नाजुक हैं जो चलते समय हल्के से लहराते हैं। मेरी कमर पतली है, कूल्हे चौड़े और गोल मटोल हैं जिनकी वजह से मेरी चाल में एक अनोखा आकर्षण आ जाता है। मेरी बड़ी बड़ी भावपूर्ण आंखें, गुलाबी भरे हुए होंठ और रेशमी काले लंबे बाल जो मेरी कमर तक लहराते हैं, जो भी मुझे देखता है वह बस टकटकी लगाकर देखता ही रह जाता है। काफी मनचलों ने मुझे फंसाने के लिए तरह तरह के डोरे डालने की कोशिश की मगर मैं हमेशा सतर्क और संभली रहकर अपना दामन बचाकर चलती थी। मैंने मन में ठान रखा था कि अपना यह कोमल, अनछुआ और सुंदर बदन सबसे पहले अपने पति को ही सौंपूंगी ताकि हमारी पहली रात यादगार और खास बन सके। मगर किस्मत में तो कुछ और ही था।
मेरी एक बड़ी बहन भी है नेहा। नेहा दीदी की शादी को चार साल हो गए थे। मेरा जीजा नितिन बहुत ही हैंडसम और आकर्षक आदमी है। उनकी लंबी कद काठी, चौड़ी मजबूत छाती, तेजस्वी चेहरा और गहरी आंखें किसी भी लड़की का दिल आसानी से मोह लेते हैं। वे बातें इतनी मधुर और सम्मोहक तरीके से करते हैं कि सुनने वाला बस उनके शब्दों के जादू में बंधा रह जाता है, समय का एहसास तक नहीं होता। उनकी आवाज में एक गहराई है जो मन में उतर जाती है और दिल की धड़कन बढ़ा देती है। दीदी के मुंह से मैंने उनके बहुत सारे किस्से सुन रखे थे। उनकी शादी से पहले कई लड़कियों से उनके घनिष्ठ संबंध रह चुके थे। कई लड़कियों के साथ वे पूर्ण संभोग तक कर चुके थे। मैं शुरू शुरू में उन पर बहुत ज्यादा फिदा थी, उनके बारे में सोचते ही मेरे मन में एक मीठी सी बेचैनी और उत्तेजना सी होने लगती थी। आखिर साली जो ठहरी। मगर उनके कारनामे सुनने के बाद मैं उनसे संभलकर रहने लगी थी। मैंने कई बार देखा था कि वो मुझसे हमेशा चिपकने और पास आने की कोशिश करते थे।
मौका ढूंढकर कई बार उन्होंने मुझे अपनी मजबूत बाहों में भर लिया था। उनके गर्म शरीर का स्पर्श मेरे नाजुक बदन से टकराता तो मेरी त्वचा पर सिहरन दौड़ जाती थी और सांसें तेज हो जाती थीं। एक दो बार तो उन्होंने अपनी कोहनी से मेरी नरम और भरी हुई चुचियों को जानबूझकर हल्के से दबाया भी था जिससे मेरे निप्पल तुरंत सख्त हो जाते थे, पूरे बदन में गर्मी की लहर दौड़ जाती थी और मन में शर्म के साथ एक अनजानी खुजली सी महसूस होती थी। मैं उनसे दूरी रखने लगी थी। मगर शिकारी जब देखता है कि उसका शिकार चौकन्ना हो गया है तो उसे पकड़ने के लिए तरह तरह की चाल चलता है। और निरीह शिकार उसके जाल में फंस जाता है।
मेरे संबंध की बातें चल रही थीं। मम्मी पापा को किसी लड़के को देखने दूर जाना था। दो दिन का पूरा प्रोग्राम था। घर पर मैं अकेली रह जाती इसलिए उन्होंने दीदी और जीजा को रहने के लिए बुलाया। वैसे मैंने उनसे कहा कि मैं अकेली रह जाऊंगी लेकिन अकेली जवान लड़की को कोई भी माता पिता अकेले नहीं छोड़ते। दीदी और जीजा के आने के बाद मेरे मम्मी पापा निकल पड़े। जैसा मैंने सोचा था उनके जाते ही नितिन जी मेरे पीछे लग गए। द्विअर्थी बातें बोल बोलकर मुझे इशारा करते। दीदी उनकी बातें सुनकर हंस देती। मैं दीदी से कुछ शिकायत करती तो वो कहती कि जीजा साली के संबंधों में ऐसा चलता ही रहता है।
नितिन जी पर किसी बात का कोई असर नहीं होता था। मैं उनकी हरकतों से झुंझला उठी थी।
उस दिन मैं नहाकर निकली थी। मेरे बाल अभी भी नम थे और उनमें शैम्पू की ताज़ी महक फैली हुई थी। मेरी त्वचा नहाने के बाद नरम और चमकदार हो गई थी। पानी की छोटी छोटी बूंदें मेरी गर्दन से नीचे सरक रही थीं जिससे मेरी पूरी देह ताज़गी से भर गई थी। जैसे ही मैं कमरे में कदम रखा नितिन जी ने बिना एक पल भी सोचे मुझे अपनी मजबूत बाहों में कसकर भर लिया। उनकी मोटी बाहें मेरी पतली कमर के चारों ओर लिपट गईं और उन्होंने मेरे नरम बदन को अपनी चौड़ी छाती से पूरी तरह चिपका दिया।
उन्होंने अपना चेहरा मेरे लंबे सिल्की बालों में गहराई से घुसा दिया। उनकी नाक मेरे बालों की जड़ों से सट गई और वे गहरी गहरी सांसें लेकर मेरी बालों की सुगंध को अंदर खींचने लगे। उनकी गर्म सांसें मेरी खोपड़ी की त्वचा पर पड़ रही थीं जिससे मेरे रोएं खड़े हो गए। बालों की नमी उनकी ठोड़ी और गालों पर लग रही थी और शैम्पू की फूलों जैसी खुशबू उनके मुंह में घुल रही थी। मैं गुस्से से तिलमिला उठी। मेरा पूरा शरीर क्रोध से कांपने लगा। मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था और गालों पर गर्मी छा गई थी।
मैंने उन्हें दोनों हाथों से जोर से धकेला। अपनी हथेलियों से उनकी छाती पर दबाव डालते हुए उन्हें पीछे हटाने की पूरी ताकत लगाई। “आप अपनी हदों में रहिए नहीं तो मैं मम्मी पापा से शिकायत कर दूंगी।” मेरी आवाज़ गुस्से से कांप रही थी। “मैंने ऐसा क्या किया है। बस तुम्हारे बालों की महक ही तो ले रहा था।” कहकर नितिन जी ने वापस मुझे पकड़ने की कोशिश की। उनकी आंखों में शरारती चमक थी और होंठों पर मुस्कान खेल रही थी।
“खबरदार अपने हाथ दूर रखिए। मुझे छूने की भी कोशिश मत करना।” मैंने चेतावनी दी लेकिन वो बिना मेरी किसी बात की परवाह किए अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिए। उनकी उंगलियां मेरी बाहों की ओर बढ़ रही थीं। मैं अपने शरीर को सिकोड़ते हुए पीछे हटी और जोर से चीखी “दीदी।” दीदी किचन से तेजी से निकलकर आईं। उनकी आंखों में हैरानी और चिंता दोनों थीं। “क्या हुआ क्यों शोर मचा रही है।” उन्होंने पूछा।
“दीदी जीजाजी को समझा लो। वो मेरे साथ गलत हरकतें कर रहे हैं।” मैंने रुआंसी आवाज में कहा। मेरी आंखें नम हो गई थीं। दीदी ने उनकी ओर देखते हुए कहा “क्यों पूजा को परेशान कर रहे हो।” “मैं क्या परेशान कर रहा हूं? पूछो इससे मैंने ऐसी कौन सी हरकत की है जो ये इतना चिढ़ उठी।” नितिन जी ने बेपरवाही से जवाब दिया। उनकी आवाज़ में मासूमियत झलक रही थी।
“दीदी ये मुझे अपनी बाहों में लेकर मेरे बदन को चूमने की कोशिश कर रहे थे।” मैंने आरोप लगाया। मेरा चेहरा गुस्से से लाल हो गया था। “गलत बिल्कुल गलत। मैं तो अपनी इस खूबसूरत साली के बालों पर न्योछावर हो गया था। मैं तो बस उसके सुंदर सिल्की बालों को चूम रहा था। पूछो पूजा से अगर मैंने इसके बालों के अलावा कहीं होंठ लगाए हों तो।” नितिन जी ने सफाई दी। उनकी मुस्कान अभी भी बरकरार थी।
इससे पहले कि दीदी कुछ बोलती मैं बोल उठी “नहीं दीदी ये आपके सामने झूठ बोल रहे हैं। इनकी कोशिश तो मेरे बदन से खेलने की थी।” मेरे शब्दों में गुस्सा और शर्म दोनों थे। दीदी ने जीजा जी की तरफ देखा तो वो कह उठे “तुम्हारी कसम नेहा मैं पूजा के सिर्फ बालों को छू रहा था। देखो कितने सुंदर बाल हैं।” ये कहकर वो मेरे पास आ गए और वापस मेरे बालों पर अपना हाथ फेरने लगे। उनकी उंगलियां मेरे नम घने बालों में धीरे धीरे घुस रही थीं। वे बालों को जड़ से लेकर सिरे तक सहला रहे थे। बालों की नरमी और नमी उनके हाथों की हथेलियों पर महसूस हो रही थी।
मैं गुस्से से तिलमिला कर उनको जोर से धकेलते हुए उनसे दूर चली गई। “रहने दो रहने दो मुझे आपकी सारी हरकतें मालूम हैं। आप बस मुझसे दूर ही रहिए।” मैं रुआंसी हो उठी। मेरी आवाज़ लड़खड़ा रही थी और आंखों में आंसू आ गए थे। “अरे पूजा क्यों इनकी हरकतों को इतना सीरियस लेती हो। अगर ये तुम्हारे बालों को चूमना चाहते हैं तो चूम लेने दो। इससे तुम्हारा क्या नुकसान हो जाएगा।” दीदी ने समझाते हुए कहा। उनकी आवाज़ नरम और शांत थी।
“अरे दीदी ये जितने भोले बन रहे हैं ना उतने हैं नहीं।” मैंने विरोध किया। “पूजा अब मान भी जा।” दीदी ने फिर कहा। “ठीक है। लेकिन ये वादा करें कि सिर्फ मेरे बालों के अलावा कुछ भी नहीं छुएंगे।” मैंने हिचकते हुए कहा। जीजा जी ने कहा “ठीक है मैं तुम्हारी दीदी की कसम लेकर कहता हूं कि सिर्फ तुम्हारे बालों को ही चूमूंगा उसके अलावा मैं और किसी अंग को नहीं छूंगा। लेकिन अगर तुम खुद ही मुझे अपने बदन को छूने के लिए कह दो फिर?” उन्होंने मुझे छेड़ा। उनकी आंखों में मस्ती की चमक थी।
“फिर आपकी जो मर्जी कर लेना मैं कुछ भी नहीं कहूंगी। मैं भी कसम खाती हूं कि आप अगर सिर्फ बालों को चूमे तो मैं कुछ भी नहीं कहूंगी।” मैंने जवाब दिया। “देख लो बाद में पीछे मत हटना।” नितिन जी ने कहा। “जी मैं आप जैसी नहीं हूं। जो कहती हूं करके रहती हूं।”
“ठीक है जब तुम राजी हो ही गई हो तो ये काम आराम से किया जाए। चलो बेड रूम में। वहां बिस्तर पर लिटाकर आराम से चूमूंगा तुम्हारे बालों को।” उन्होंने चहकते हुए कहा।
मैंने और ज्यादा बहस नहीं की और चुपचाप उनके साथ हो ली।
हम बेडरूम में आ गए। मैं बिस्तर पर लेट गई। और अपने बदन को ढीला छोड़ दिया। मेरी पीठ नरम गद्देदार बिस्तर से पूरी तरह सट गई थी। मेरे हाथ पैर बिल्कुल शिथिल पड़ गए थे। मेरी सांसें अभी भी थोड़ी तेज चल रही थीं और दिल की धड़कन गले तक महसूस हो रही थी। दीदी ने मेरे लंबे नम बालों को दोनों हाथों से उठाकर बिस्तर पर अच्छी तरह फैला दिया। बाल तकिए पर और चारों तरफ बिखर गए। उनकी ताज़ी शैम्पू की महक पूरे कमरे में फैल रही थी।
जीजाजी बिस्तर पर मेरे ठीक बगल में बैठ गए। उनकी जांघ मेरी बांह को हल्का सा छू रही थी। उन्होंने अपने बड़े मजबूत हाथों में मेरे बालों की मोटी लट पकड़ ली। वे उन्हें अपनी नाक के पास ले जाकर गहरी गहरी सांसों से सूंघने लगे। फिर उन्होंने अपने गर्म नरम होंठों से बालों को चूमना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उनके होंठ मेरे सिर की ओर बढ़ने लगे। हर चुंबन के साथ उनकी गर्मी मेरी खोपड़ी तक पहुंच रही थी। उन्होंने मेरे सिर के बालों को तरह तरह के कोणों से चूमा। कभी हल्के हल्के चुंबन तो कभी होंठों को दबाकर लंबे समय तक चूसते हुए।
फिर उन्होंने मुझे धीरे से पीछे घूमने को कहा। मैंने लेटे लेटे ही करवट ले ली। जीजाजी ने मेरी गर्दन के बाल हटाए और अपने गर्म होंठ मेरी नाजुक गर्दन पर छुआ दिए। गर्दन पर पहली बार किसी मर्द की गर्म सांसों के पड़ने से मेरे मन में एक अजीब सी बेचैनी और सिहरन दौड़ गई। मेरे पूरे शरीर पर रोएं खड़े हो गए। उनकी सांसें मेरी संवेदनशील त्वचा पर गर्म हवा की लहर की तरह बह रही थीं। उनकी जीभ हल्के से गर्दन पर फिसली और वे धीरे धीरे चूमने लगे। मेरी सांसें भारी हो गईं। एक हल्की सी कराह मेरे होंठों से निकल गई।
फिर उन्होंने मुझे वापस सीधा कर दिया। मेरे बालों से उनके होंठ हटकर अब मेरे माथे पर आ गए। उन्होंने मेरे माथे को धीरे से चूम लिया। मैं इस अचानक स्पर्श को महसूस करते ही चौंक उठी। “ये क्या कर रहे हो। आपने वादा किया था कि मेरे बालों के अलावा किसी अंग को नहीं छुएंगे।” मैंने उठने की कोशिश की। मेरा बदन तन गया था। “मैं वही कर रहा हूं जो मैंने वादा किया था। मैं तुम्हारे बालों को ही चूम रहा हूं। मैंने ये कहां कहा था कि सिर्फ सिर के बालों को चूमना चाहता हूं। हां अगर ये साबित कर दो कि तुम्हारे बदन पर सिर के अलावा कहीं और बाल नहीं हैं तो छोड़ दूंगा।” उनकी आवाज़ में शरारत और कामुकता दोनों झलक रही थी।
मुझे सारा कमरा घूमता हुआ सा लगा। मैं अपने ही जाल में फंस चुकी थी। सिर, बगल, चूत पर ही क्या रोएं तो पूरे शरीर पर ही होते हैं। उफ्फ ये मैं क्या कसम ले बैठी। लेकिन अब तो देर हो चुकी थी। उनके होंठ मेरे भौंहों से सरकते हुए मेरी आंखों की पलकों पर आ गए। उनकी होंठों का हल्का हल्का स्पर्श मुझे मदहोश कर दे रहा था। मेरी पलकें फड़फड़ा रही थीं। उनकी होंठों की नमी मेरी पलकों को छू रही थी। मेरी पलकों पर से घूमते हुए वापस माथे पर आकर ठहरे। फिर नाक के ऊपर से धीरे धीरे नीचे सरकने लगे। स्पर्श इतना हल्का था मानो कोई मेरे बदन पर मोर पंख फेर रहा हो। मेरे रोएं उसके स्पर्श से खड़े हो जा रहे थे।
अब उनके होंठ मेरे होंठों के ऊपर आकर ठहर गए। उनके और मेरे होंठों में सिर्फ कुछ मिलीमीटर की दूरी थी। मैं सख्ती से आंखें भींचकर उनके होंठों के स्पर्श का इंतजार कर रही थी। मेरा दिल जोर जोर से धड़क रहा था। मेरे स्तन ऊपर नीचे हो रहे थे। मैं मन ही मन चाह रही थी कि अब वे मुझे चूम लें। कुछ देर उसी जगह ठहरने के बाद उन्होंने अपने होंठ वापस खींच लिए। मैं उनकी इस हरकत से झुंझला कर आंखें खोल दी। पता नहीं क्यों आज वो इतने निष्ठुर हो गए थे। रोज तो मुझे स्पर्श करने का बहाना ढूंढते थे। मगर आज जब मैं मन ही मन चाह रही थी कि वो मुझे स्पर्श करें तो वो दूरी मेंटेन कर रहे थे।
वो उठकर बैठ गए। “इसके कपड़े उतार दो। कपड़ों के ऊपर से मैं कैसे पूरे बदन के बालों को चूम सकूंगा।” उन्होंने कहा। दीदी ने मेरी तरफ देखा। मैंने बैठते हुए अपने हाथ ऊपर करके अपनी राजामंदी जता दी। दीदी ने मेरी कमीज़ उतार दी। टाइट ब्रा में कसे मेरे गोल भरे स्तनों को देखकर नितिन जी की आंखें बड़ी बड़ी हो गईं। उनकी नजर मेरे उभरे हुए cleavage पर अटक गई। फिर दीदी ने मेरी ब्रा के हुक खोल दिए। ब्रा ढीली होकर कंधे पर झूल गई। मैंने खुद अपने हाथों से उसे उतारकर तकिए के पास रख दी। मैंने अपने स्तनों को अपने हाथों से ढक लिया और शरमाते हुए नितिन जी की तरफ देखा। वो मुस्कुराते हुए अपनी भूखी आंखें मेरे बदन पर फिरा रहे थे।
फिर दीदी बोली कि देखा ना ऐसा ही करते हैं। दीदी नीचे झुककर मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया। साथ ही दीदी ने अपनी ब्लाउज को थोड़ा सा ऊपर कर लिया। एकदम साफ दीदी के भारी बूब्स लटकते हुए नजर आ रहे थे। उनके बड़े स्तन हिल रहे थे और भूरी निप्पल्स साफ दिख रही थीं। उन्होंने जीजाजी की शर्ट को भी उतार दिया। जीजाजी का चौड़ा सीना और मजबूत मसल्स नंगी हो गए। फिर दीदी उनकी बेल्ट निकालने लगी। वो बड़ी मुश्किल से हिला हिलाकर निकली। फिर पैंट के हुक खोले और उसे उतारने की कोशिश कर रही थी। दीदी ने मुझे बोला कि पूजा मेरी थोड़ी मदद कर इनकी पैंट मुझसे नहीं उतर रही है। तो मैंने उनकी मदद की और उनकी पैंट उतर गई। अब जीजाजी सिर्फ अंडरवियर में थे।
जिसे मैं बहुत ध्यान से देखे जा रही थी। मेरी आंखें जीजाजी के बदन से हट ही नहीं रही थीं। क्या मस्त बॉडी थी उनकी। चौड़ा सीना, मजबूत बाहें और अंडरवियर के अंदर एक बहुत बड़ी सी उभरी हुई चीज जो बाहर आने के लिए बेताब हो रही थी। वो कपड़े को तान रही थी और हल्का हल्का थरथरा रही थी। मैं उसे घूरती जा रही थी।
तो अचानक से दीदी ने मुझे देख लिया कि मैं जीजाजी के लंड की तरफ देख रही हूं और उन्होंने मुझसे कहा कि यह वही सांप है जो रोज मुझे डसता है। क्या तुझे देखना है तो बता?
तो मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी और मेरे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या जवाब दूं।
मेरा मन पूरी तरह खाली हो गया था। दिल जोर जोर से धड़क रहा था और गला सूख गया था। मैं बस जीजाजी के उस उभरे हुए लंड को घूरती जा रही थी। मेरी आंखें हिल भी नहीं पा रही थीं। इतने में देखते ही देखते दीदी ने अंडरवियर को एक झटका देकर खींच दिया। लंड बाहर निकल आया और सीधा खड़ा हो गया। दीदी ने उसे अपनी नरम हथेली में पकड़कर सहलाने लगी। उनकी उंगलियां लंड की मोटी नसों पर ऊपर नीचे घिस रही थीं। लंड की टोपी से थोड़ी सी पारदर्शी चिपचिपी तरल पदार्थ निकल रही थी जो दीदी की उंगलियों पर लग रही थी।
जीजा जी भी मुस्कुराने लगे और कहने लगे कि तुम बाजी हार गए हो। अब मुझे जो चाहिए तुम्हें देना पड़ेगा। मेरा चूत तो पहले से ही गीला हो गया था। मेरी चूत की अंदरूनी दीवारें सिकुड़ सिकुड़कर गीली चिपचिपी हो चुकी थीं। क्या करूं मुझे समझ में नहीं आ रहा था। मेरे पैरों के बीच गर्मी फैल रही थी और मेरी सांसें भारी हो गई थीं।
दीदी बोली देख इन्हें कितना मजा आ रहा है। मैं तो बस देखे ही जा रही थी। उनका इतना बड़ा और मोटा था कि बस पूरी चूत गीली हो रही थी। लंड की मोटाई मेरी हथेली जितनी थी और लंबाई कम से कम आठ इंच थी। फिर दीदी बोली कि तू भी एक बार इस सांप को पकड़कर देख कितना मजा आता है। उन्होंने मेरा हाथ खींचकर लंड पर रख दिया। बोली कि ऊपर नीचे करके देख कितना मजा आएगा।
फिर मैंने जैसे ही हाथ रखा वो इतना गरम था और इतना मोटा सख्त लंबा कि मेरे पूरे बदन में सनसनी सी दौड़ रही थी। लंड की नसें मेरी हथेली पर उभरी हुई महसूस हो रही थीं। वो थरथरा रहा था और उसकी गर्मी मेरी उंगलियों तक पहुंच रही थी। मैंने धीरे धीरे ऊपर नीचे करना शुरू किया। लंड की टोपी पर से चिपचिपा रस मेरी हथेली पर फैल गया।
फिर दीदी ने कहा कि साली तू शरमाती बहुत है आज यह तेरी शर्म उतारनी पड़ेगी। वो जीजाजी से बोली कि आप ही समझाओ इसे। उन्होंने मेरी ब्रा उतार फेंकी। मेरे दोनों कपड़ों को जल्दी से खींचकर फाड़ दिया। जीजाजी ने मुझे पीछे से पकड़ लिया। उनकी मजबूत बाहें मेरी कमर को जकड़ लिया। मैं छटपटा रही थी चिल्ला रही थी लेकिन मुझे बचाने वाला वहां पर कोई नहीं था।
फिर दीदी ने मेरे दोनों हाथ आगे से पकड़ लिए। जीजाजी पूरे नंगे हो गए थे और उनका लंड मेरी गांड को छू रहा था। लंड की गर्म टोपी मेरी गांड की दरार पर रगड़ खा रही थी। वो मेरे बूब्स को दबाए जा रहे थे। उनकी उंगलियां मेरे निप्पल को नोच रही थीं। मेरे स्तन उनकी हथेलियों में दबकर फूल रहे थे।
तो जीजाजी मेरे पूरे बदन को सहला रहे थे। मानो मेरे जिस्म में हजारों बिजलियां दौड़ रही थीं। उनकी उंगलियां मेरी गर्दन से लेकर जांघों तक घूम रही थीं। लेकिन मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। अब तक दीदी मेरी पैंटी को नीचे गिरा चुकी थी। उनकी एक उंगली मेरी चूत पर बार बार रगड़ रही थी। मेरी चूत की लिप्स सूज गई थीं और गीले रस से चमक रही थीं।
फिर कुछ देर बाद वो बहुत तेजी से अंदर बाहर अपनी उंगली करने लगी। उंगली मेरी चूत की अंदरूनी दीवारों को खुरच रही थी। जीजाजी ने मुझे इतने जोर से पकड़ा हुआ था कि मैं छटपटा रही थी। दीदी से कह रही थी और करो अह्ह ह्म्म्मा ओहूऊऊऊः करे जा रही थी। मेरी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरी चूत से चिपचिपी आवाजें निकल रही थीं।
फिर जीजाजी मेरे सामने आए। उन्होंने मुझे जोर से गले लगाया। मेरे बूब्स को जोर जोर से दबाए जा रहे थे। निप्पल को चूसे जा रहे थे। उनकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी और हल्के हल्के काट रहे थे। वो एक हाथ से अपनी उंगली को मेरी चूत के अंदर बाहर कर रहे थे। उंगली तेजी से अंदर बाहर हो रही थी।
तो मैंने उनका लंड देखा और बोला कि जीजाजी यह कितना बड़ा हो गया है। उस सख्त लंड की नसें भी दिखाई दे रही थीं। लंड की टोपी चमक रही थी और पूरी तरह सूज गई थी।
फिर दीदी ने कहा कि नीचे बैठ जा। मैं नीचे बैठी। तो वो बोली कि दोनों पैर को फैला। मैंने वैसा ही किया। मेरी जांघें पूरी तरह खुल गईं। चूत पूरी तरह खुलकर दिख रही थी। फिर दीदी ने अपनी एक उंगली मेरी गांड में और एक चूत में डालना शुरू किया। उंगलियां एक साथ अंदर बाहर हो रही थीं। मैं जीजाजी का लंड पकड़कर सहला रही थी।
और फिर उन्होंने मुझसे कहा कि चूसो इसे। फिर मैं जोर जोर से लंड की टोपी मुंह में अंदर बाहर कर रही थी। मेरे होंठ लंड को कसकर पकड़े हुए थे। जीभ टोपी के नीचे घिस रही थी। दीदी उतनी ही तेजी से मेरी चूत गांड में उंगली कर रही थी। जीजाजी जोर जोर के झटके से मुंह में लंड दबा दबाकर अंदर बाहर कर रहे थे। लंड मेरे गले तक पहुंच रहा था। मैं आहह उह्ह्ह कर रही थी। मेरे मुंह से लार टपक रही थी।
फिर उन्होंने मुझे नीचे लेटा दिया। मैंने बोला कि जीजाजी यह बहुत मोटा है। लेकिन दीदी ने ऊपर से मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए थे। वो बोली कि नितिन इस साली की चूत में लंड एक बार में अंदर जाना चाहिए। तो जीजाजी ने जोश ही जोश में मेरी चूत के अंदर लंड को इतनी जोर से डाला कि मेरी बहुत जोर से चीख निकल गई। आंखों से आंसू बाहर आ गए। लंड पूरी तरह एक झटके में अंदर चला गया। मेरी चूत की दीवारें फटने जैसा महसूस हो रहा था।
मैं जोर से चीखी फट गई मेरी चूत प्लीज बाहर निकालो अह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह बचाओ मां। मेरी चूत फट गई। दर्द की लहर पूरे बदन में दौड़ गई। लेकिन जीजाजी रुके नहीं। दीदी मेरे बूब्स और निप्पल को नोचे जा रही थी। जीजाजी अंदर बाहर लगातार करते रहे। लंड हर झटके पर पूरी लंबाई तक अंदर बाहर हो रहा था। मेरी चूत से सफेद गाढ़ा रस निकल रहा था।
और मैं चिल्लाती रही। फिर उसने मेरे पैर और फैला दिए। वो जोर जोर से झटके देकर लंड को अंदर डाले जा रहे थे। हर झटके पर लंड की टोपी मेरी चूत की गहराई को छू रही थी। मैं उईई मां उईईइइममाआ आवाज किए जा रही थी। जोर से सिसकियां ले रही थी। लेकिन वो फिर भी कुछ नहीं सुन रहे थे। मेरी चूत पूरी तरह लाल हो गई थी।
तो दीदी ने कुछ इशारा किया। जीजाजी ने मुझे पीछे पलटा। तो दीदी ने कंडोम उनके लंड पर लगा दिया। कंडोम लंड को चमकाते हुए कस गया।
तो मैं बोली कि दीदी पीछे नहीं जाएगा। जितना करना है आगे ही कर लो प्लीज। मैं आपका लंड और चूस देती हूं। लेकिन जीजाजी ने मेरी एक नहीं सुनी। बोले कि उठ कुछ नहीं होगा। मैं बस धीरे धीरे धक्के दूंगा। कहने के बाद दीदी ने मुझे झुकाया। जीजाजी को आंख मारी। जीजाजी ने ऐसा झटका मारा कि लंड मेरी गांड में घुसता चला गया। गांड की टाइट दीवारें लंड को कसकर पकड़ रही थीं।
मैं बहुत जोर जोर से चिल्ला रही थी। दर्द असहनीय था। लेकिन मेरी कोई नहीं सुन रहा था। दीदी हंसे जा रही थी। वो झटके पर झटके मारते चले गए। हर झटके पर लंड गांड की गहराई तक धंस रहा था। 10-15 झटके के बाद मैं मरे जा रही थी। मैं अधमरी सी हो गई थी।
और फिर जीजाजी जब झड़ गए तो उनका पूरा वीर्य मेरी गांड के अंदर चला गया। कंडोम भर गया लेकिन गर्मी अभी भी महसूस हो रही थी। मुझे मेरी गांड में इतनी जलन हो रही थी कि मैं क्या बताऊं। जलन और दर्द के साथ एक अजीब सी थकान पूरे बदन में फैल गई।
फिर पूरी चुदाई होने के बाद दीदी ने मुझे नहलाया और बेड पर लेटा दिया। मैं चल भी नहीं पा रही थी।
मुझे बहुत दर्द हो रहा था।
फिर अचानक से मेरी आंख लग गई और मैं करीब चार घंटे बाद सोकर उठी तो मेरा दर्द खत्म हो चुका था।
मेरी आंखें धीरे धीरे खुलीं। कमरे में हल्की रोशनी फैली हुई थी। मेरा पूरा बदन अब पूरी तरह आराम से भर गया था। पहले वाला तेज दर्द अब कहीं नहीं था। मेरी चूत और गांड में अब सिर्फ हल्की सी गुनगुनाहट और थकान बाकी रह गई थी। मैंने धीरे से करवट ली। बिस्तर की चादर मेरी नंगी त्वचा पर मुलायम लग रही थी। मेरे बाल बिखरे हुए तकिए पर फैले पड़े थे। शरीर पर हल्का पसीना सूख चुका था और अब ठंडी हवा मेरी त्वचा को सहला रही थी।
दीदी मेरे पास आईं। उनकी नरम उंगलियां मेरे माथे पर घूम गईं। उन्होंने प्यार से पूछा कि मजा आया। उनकी आवाज में मिठास और संतोष दोनों था। तो मैंने भी जवाब में एक स्माइल दे दी। मेरे होंठों पर हल्की मुस्कान खिल गई। गालों पर हल्की लाली छा गई। मैंने शरमाते हुए सिर हिलाया। मेरी आंखें अभी भी नींद से भरी हुई थीं लेकिन मन में एक नई ताजगी महसूस हो रही थी।
दीदी ने खुश होकर मुझे गले से लगा लिया। उनकी भरी हुई छाती मेरी छाती से सट गई। उनकी गर्म सांसें मेरे गाल पर पड़ रही थीं। उन्होंने मेरे बालों में हाथ फेरते हुए बोली कि अब तो तेरी शर्म उतर चुकी है। अब तू भी हमारे साथ चुदाई के मजे ले। लेकिन ध्यान रखना कि यह बात किसी को पता नहीं लगनी चाहिए। उनकी आवाज नरम थी लेकिन उसमें चेतावनी भी थी।
मैं दीदी से बोली कि आप चिंता मत करो। मैं किसी से कुछ भी नहीं कहूंगी। मेरी आवाज में विश्वास था। मैंने उनकी पीठ पर हाथ फेर दिया। हम दोनों एक दूसरे को कसकर जकड़े रहे। मेरे मन में अब कोई डर नहीं बचा था। सिर्फ एक गर्म तृप्ति फैली हुई थी।
दोस्तों फिर उसके बाद तो मैं जीजाजी की दूसरी बीवी बन गई थी। दीदी और जीजाजी भी बहुत खुश थे। अब हम तीनों चुदाई के फुल मजे लेने लगे थे। हर शाम बेडरूम में हमारी गर्म सांसों की आवाजें गूंजने लगतीं। सेक्स में ऐसा कोई काम नहीं था जो हमने नहीं किया हो। हम तीनों नंगे होकर बिस्तर पर लिपट जाते। दीदी जीजाजी के लंड को पकड़कर मेरी चूत पर रखती। उनका मोटा सख्त लंड मेरी गीली चूत की लिप्स को छूता। मैं अपनी चूत खोलकर उसे पूरी मस्ती के साथ स्वीकार करती थी। मेरी जांघें फैल जातीं। चूत से गर्म रस बहने लगता। लंड एक झटके में अंदर घुस जाता और मैं जोर से कराह उठती।
इसी तरीके से मेरी शादी होने के पहले ही जीजाजी और दीदी दोनों मिलकर मेरी सील तोड़ी। उन्होंने मुझे पूरी तरह औरत बना दिया। दीदी मुझे समझाई कि अगर मर्द को सही तरीके से अपनी पल्लू में बांधकर रखना है तो उसका खाना गरम करने के साथ साथ उसका बिस्तर भी गरम करना आना चाहिए। अब मैं पूरी तरीके से शादी के लिए तैयार थी।
धन्यवाद।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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