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कली से फूल बनने की कहानी

Kali se phool bani sex story: मेरा नाम सावी है और मेरी उम्र 21 वर्ष है। मैं काफी लम्बे समय से कामुक कहानियाँ पढ़ती आ रही हूँ और मैं अपनी एक सच्ची कहानी सुनाना चाहती हूँ। मेरी कहानी उस समय की है जब मेरी उम्र सिर्फ अठारह साल की थी। उस उम्र में ज्यादातर लड़कियां अभी खिलना शुरू ही करती हैं लेकिन मैं पहले ही बेहद आकर्षक और ज़बरदस्त सुंदर बन चुकी थी। मेरी छाती 36 इंच की थी कमर 26 इंच की पतली और कूल्हे 34 इंच के थे जिससे मेरी पूरी बॉडी घंटी की तरह आकर्षक लगती थी।

उस वक्त मेरा रोहित नाम के एक सहपाठी के साथ चक्कर चल रहा था। कई दिनों से वह मुझे किसी अच्छे होटल के कमरे में ले जाने की जिद कर रहा था। वह बार बार कहता था कि वह मेरे साथ अकेले में ज्यादा घनिष्ठ समय बिताना चाहता है। मैं भी अंदर ही अंदर जाना चाहती थी पर डर और शर्म के मारे हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। हमारे बीच किसिंग और चुम्मा चाटी तो रोज़ होने लगी थी लेकिन उससे आगे कभी कुछ नहीं हो पाया था। रोहित धीरे धीरे मुझे होटल चलने के लिए मनाने की कोशिश में लगा रहता था।

आखिरकार एक दिन मेरे अंदर की इच्छा ने हिम्मत जुटा ली और मैं तैयार हो गई। हम दोनों एक अच्छे होटल के कमरे में पहुंच गए। कमरे का माहौल रोमांचक था। हल्की रोशनी साफ सुथरा बेड और ठंडी एसी की हवा से पूरा वातावरण रोमांच से भर गया था। कमरे में घुसते ही रोहित ने थोड़ी बहुत कोल्ड ड्रिंक मंगवाई और कुछ नाश्ता भी ऑर्डर किया। हम दोनों ने खा पी लिया। खाने के बाद हम बेड पर आराम से बैठकर टीवी देखने लगे।

मैंने उस दिन खास तौर पर एक टाइट टॉप और जीन्स पहनी थी। अंदर काले रंग का सेक्सी ब्रा और पैंटी थी जो मेरी गोरी त्वचा पर बहुत आकर्षक लग रही थी। टीवी देखते देखते अचानक रोहित ने मुझे अपनी मजबूत बाहों में कसकर जकड़ लिया। उसकी गर्म सांस मेरे गालों पर पड़ रही थी। उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। उसके होंठ नरम लेकिन भूखे थे। वह मेरे निचले होंठ को चूसता फिर ऊपरी को बीच बीच में अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुसा कर मेरी जीभ से खेलने लगा। मेरा सांस तेज हो गया और दिल जोर जोर से धड़कने लगा।

होंठों की इस गहरी चुम्बन के दौरान उसके हाथ मेरी बड़ी बड़ी चूचियों की ओर बढ़ गए। वह उन्हें हल्के हल्के दबाने लगा। शुरू शुरू में मुझे हल्का सा दर्द महसूस हुआ क्योंकि वह पहली बार इतनी जोर से छू रहा था लेकिन कुछ ही पलों में वह दर्द मजे में बदलने लगा। मेरी चूचियां उसके हाथों में दब रही थीं और मेरी निप्पल्स सख्त होकर खड़े हो गए थे। मैं हल्के हल्के सिसकारियां भरने लगी।

फिर रोहित ने मेरे टॉप को ऊपर की ओर खींच कर उतार दिया। उसने अपनी टी शर्ट भी तुरंत निकाल फेंकी। अब उसका ऊपरी शरीर नंगा था। उसकी छाती चौड़ी और मजबूत दिख रही थी। उसने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों को धीरे धीरे दबाना जारी रखा। उसके अंगूठे मेरी निप्पल्स को ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही घुमाते हुए दबा रहे थे। मैं मना नहीं कर रही थी बल्कि आंखें बंद करके पूरे मजे ले रही थी। इससे उसे हौसला मिला और वह धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा।

अब वह मेरे ऊपर चढ़ आया। उसका भारी शरीर मेरे नाजुक शरीर पर लेट गया। उसने धीरे धीरे मेरे गले की तरफ बढ़ना शुरू किया। उसके गर्म होंठ मेरी गर्दन पर फिर रहे थे। वह गर्दन के हर हिस्से को चूम रहा था कभी हल्का सा काट भी रहा था। इससे मेरे शरीर में सनसनी दौड़ गई। मेरी सांसें और तेज हो गई थीं। वह नीचे की ओर बढ़ता गया। उसने ब्रा के कपड़े के ऊपर से ही मेरी चूचियों को चूमा। उसके मुंह की गर्मी ब्रा के कपड़े से भी महसूस हो रही थी। फिर वह और नीचे आया और मेरे चिकने सपाट पेट को बार बार चूमने लगा। मेरी नाभि के आस पास उसने चुम्बनों की बौछार कर दी। हर चुम्बन के साथ मेरी कमर उठ रही थी और मैं कराह रही थी।

मैं उसकी हर हरकत का पूरा पूरा मजा ले रही थी। उसका मुंह और नीचे सरकता गया। अब वह मेरी जीन्स के ऊपर से ही मेरी चूत को चूमने लगा। उसके गर्म सांस और होंठों का दबाव जीन्स के कपड़े के ऊपर से भी मेरी संवेदनशील जगह पर महसूस हो रहा था। मुझे हद से ज्यादा मजा आ रहा था। मेरी पैंटी पहले ही थोड़ी गीली होने लगी थी।

उसने अब मेरी जीन्स का बटन खोल दिया। फिर उसने धीरे से ज़िप नीचे खींची और बहुत धीरे धीरे मेरी जीन्स को मेरी जांघों से उतारना शुरू कर दिया। कपड़ा मेरी नरम त्वचा पर रगड़ खाता हुआ नीचे सरक रहा था। ठंडी हवा मेरी जांघों पर पड़ रही थी जिससे रोमांच बढ़ गया था।

अब मैं सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी मैं ज़बरदस्त ख़ूबसूरत लग रही थी।

उसने अपनी पैंट और अंडरवियर भी उतार दी। उसका लंड देखते ही मेरे तो होश उड़ गए क्योंकि उसका लंड कम से कम 8 इंच लम्बा और 6 इंच मोटा रहा होगा।

रोहित की पैंट और अंडरवियर जमीन पर गिरते ही उसका पूरा निचला शरीर नंगा हो गया। मैंने पहली बार इतने करीब से किसी लड़के का लंड देखा था। वह सीधा खड़ा था और मेरी आंखों के सामने फड़क रहा था। उसकी लंबाई कम से कम आठ इंच थी और मोटाई छह इंच के आसपास थी। उसकी छाल चमकदार थी और नीचे से ऊपर तक मोटी नसें उभरी हुई थीं। सिरा गोल और चमकता हुआ था जिसमें पहले से ही थोड़ा सा पारदर्शी रस टपक रहा था। उसकी गंध तेज और मादक थी जो मेरी नाक तक पहुंच रही थी। मेरे होश उड़ गए। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा। मुंह सूख गया और मेरी चूत में अचानक सनसनी दौड़ गई। मैं सोच भी नहीं सकती थी कि यह इतना बड़ा और मोटा होगा।

उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और जी भरकर चूमने लगा। मैंने भी उसको अपनी बाँहों में जकड़ लिया और फिर उसने मुझसे कहा “सावी तुम सचमुच बहुत ख़ूबसूरत हो मैं कब से तुम्हें पाना चाहता था।”

रोहित ने मुझे अपनी मजबूत बाहों में कसकर जकड़ लिया। उसका नंगा शरीर मेरे लगभग नंगे शरीर से चिपक गया। उसकी छाती मेरी चूचियों से रगड़ खा रही थी। उसका गर्म और सख्त लंड मेरी जांघों के बीच दब गया और उसकी नब्ज महसूस हो रही थी। उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में भर लिया और गहरी चुम्बन शुरू कर दी। उसके होंठ गर्म थे और जीभ मेरे मुंह के अंदर घुसकर मेरी जीभ से उलझने लगी। वह बार बार चूसता और काटता भी था। मैंने भी अपनी बाहों को उसके कंधों पर कस दिया और उसे जकड़ लिया। हम दोनों एक दूसरे को पूरी ताकत से चिपके हुए थे। फिर उसने थोड़ा सा मुंह हटाकर कहा “सावी तुम सचमुच बहुत ख़ूबसूरत हो मैं कब से तुम्हें पाना चाहता था।” उसकी आवाज में भूख और प्यार दोनों थे।

वह मेरी चूचियाँ दबाते हुए मेरे होंठों को चूस रहा था “आज मैं तुम्हें पूरा पाना चाहता हूँ।”

वह मेरी चूचियों को दोनों हाथों से जोर जोर से दबाते हुए फिर से मेरे होंठों को चूसने लगा। “आज मैं तुम्हें पूरा पाना चाहता हूँ।” उसकी सांसें तेज थीं और उसका लंड मेरी जांघ पर और भी सख्त होकर दब रहा था। मैं उन्मत्त हो चुकी थी।

“मैं पूरी की पूरी तुम्हारी ही हूँ रोहित। आज जो चाहे कर लो।” मैंने भी उन्मत्त स्वर में कहा।

मैंने भी उन्मत्त स्वर में जवाब दिया “मैं पूरी की पूरी तुम्हारी ही हूँ रोहित। आज जो चाहे कर लो।” मेरी आवाज कांप रही थी। मेरी सांसें फूल गई थीं और पूरा शरीर गर्मी से तप रहा था।

उसने मेरी ब्रा के हुक खोल दिए और मेरी बड़ी-बड़ी चूचियों को आजाद कर दिया। मेरी ख़ूबसूरत चूचियों को देखते ही उसका लंड और सख्त हो गया और उसने मेरी चूचियों को चूम लिया।

रोहित ने मेरी ब्रा के हुक पीछे से खोल दिए। ब्रा दोनों तरफ खुल गई और मेरी बड़ी बड़ी चूचियां आजाद होकर उछल पड़ीं। मेरी गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त होकर खड़ी थीं। उसने मेरी ख़ूबसूरत चूचियों को देखा और उसका लंड और भी सख्त होकर फड़कने लगा। फिर उसने झुककर मेरी चूचियों को चूम लिया। उसके गर्म होंठ मेरी नरम चूचियों पर लगे और मैं सिहर उठी।

आहहहह… उउऊहह्ह… मैं उसकी इस हरकत का भरपूर मज़ा ले रही थी। उसने मेरी दाहिनी चूची की घुण्डी को चूमा और फिर मुँह में लेकर चूसने लगा साथ ही दूसरी घुण्डी को हौले-हौले दबाने लगा।

आहहहह… उउऊहह्ह… मैं उसकी इस हरकत का भरपूर मज़ा ले रही थी। उसने मेरी दाहिनी चूची की घुण्डी को पहले चूमा फिर पूरे मुंह में लेकर जोर जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ घुण्डी के चारों ओर घूम रही थी और कभी हल्का सा काट भी रही थी। साथ ही उसका दूसरा हाथ मेरी बाईं चूची की घुण्डी को हौले हौले दबा रहा था और अंगूठे से घुमा रहा था। मेरी चूचियां उसके मुंह और हाथों में दब रही थीं। मैं कराह रही थी और मेरी कमर बार बार ऊपर उठ रही थी।

आआहहह्ह उऊओओओहहह… मैं बहुत मज़े ले रही थी। रोहित मेरी ताज़ी जवानी का भरपूर मज़ा ले रहा था। करीब 15 मिनट तक मेरी चूचियों को चूसने के बाद वह धीरे-धीरे नीचे आने लगा और मेरे चिकने पेट को चूमा… उउम्म्म… मैं उसकी इस हरकत से पागल हुई जा रही थी वह भी मेरी जवानी का भरपूर मज़ा ले रहा था।

आआहहह्ह उऊओओओहहह… मैं बहुत मज़े ले रही थी। रोहित मेरी ताज़ी जवानी का भरपूर मज़ा ले रहा था। करीब पंद्रह मिनट तक वह मेरी चूचियों को चूसता रहा। हर चूसने के साथ चूचन की आवाज गूंज रही थी। मेरी निप्पल्स लाल और सूजी हुई हो गई थीं। फिर वह धीरे धीरे नीचे सरकता गया और मेरे चिकने सपाट पेट को बार बार चूमने लगा। उसकी जीभ मेरी नाभि में घुसकर घूम रही थी। उउम्म्म… मैं उसकी इस हरकत से पागल हुई जा रही थी। वह भी मेरी जवानी का भरपूर मज़ा ले रहा था।

इतनी देर में मैं दो बार स्खलित हो चुकी थी और मेरी पैंटी ऊपर तक पूरी गीली हो चुकी थी। वह और भी नीचे आया और मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत पर चुम्बन लिया। ओओहह्हह… मुझे ऐसा लगा जैसे मैं जन्नत में ही हूँ।

इतनी देर में मैं दो बार स्खलित हो चुकी थी। पहला ऑर्गेज्म मेरी चूचियों चूसते समय ही आ गया था। मेरी चूत ने अंदर से जोर जोर से सिकुड़कर रस उगल दिया था। दूसरा थोड़ी देर बाद और तेज था। मेरी पैंटी ऊपर तक पूरी गीली हो चुकी थी और उसका गीला धब्बा साफ दिख रहा था। वह और भी नीचे आया और मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत पर गहरा चुम्बन ले लिया। ओओहह्हह… मुझे ऐसा लगा जैसे मैं जन्नत में ही हूँ। उसकी गर्म सांस और होंठों का दबाव पैंटी के कपड़े के ऊपर से मेरी संवेदनशील चूत पर पड़ रहा था।

उसने मेरी पैंटी में अपनी उँगली डाली और धीरे-धीरे मेरी पैंटी को नीचे करने लगा। पैंटी उतारने के बाद उसने मेरी पैंटी को अच्छी तरह से चूमा और धीरे से उसे मेरी ओर उछाल दिया।

मैं अब उसके सामने पूरी की पूरी नंगी लेटी हुई थी। जैसे ही उसकी नज़र मेरी कुँवारी गुलाबी चूत पर पड़ी उसका लंड साँप की भाँति फुफकारने लगा।

मैं बिस्तर पर पूरी तरह नंगी लेटी हुई थी। मेरी गोरी त्वचा हल्की रोशनी में चमक रही थी। मेरी बड़ी चूचियां थोड़ी थोड़ी हिल रही थीं और मेरी पतली कमर के नीचे मेरी चिकनी जांघें थोड़ी खुली हुई थीं। रोहित के सामने मैं बिल्कुल बेनकाब थी। उसकी नजर जैसे ही मेरी कुँवारी गुलाबी चूत पर पड़ी उसका लंड सांप की तरह फुफकारने लगा। वह मोटा और लंबा लंड पहले से ही पूरी तरह खड़ा था लेकिन अब वह और भी सख्त होकर ऊपर की तरफ उछलने लगा। उसकी नसें फड़क रही थीं और सिरे से पारदर्शी रस की एक बूंद टपक रही थी। उसकी गर्मी और भूख भरी नजर देखकर मेरे शरीर में सनसनी दौड़ गई।

फिर उसने मेरी गोरी-गोरी जांघों को चूमा और धीरे-धीरे मेरी चिकनी चूत के आसपास भी चूमना शुरू किया।

रोहित झुककर सबसे पहले मेरी गोरी गोरी जांघों को चूमने लगा। उसके गर्म होंठ मेरी नरम त्वचा पर लगते ही मेरी जांघें हल्की सी कांप गईं। वह धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ता गया। हर चुम्बन के साथ वह हल्का सा चूस भी लेता था। फिर उसने मेरी चिकनी चूत के आस पास भी चूमना शुरू कर दिया। उसके होंठ मेरी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर फिर रहे थे। कभी हल्का सा काटता तो कभी जीभ से चाटता। मेरी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी और उसकी गर्म सांस सीधे मेरी संवेदनशील जगह पर पड़ रही थी।

जैसे ही उसने मेरी शेव की हुई चिकनी चूत को चूमा… आआहहहह… मैं एकदम से लगभग उछल कर उठ बैठी। उसने अपने दोनों हाथों से मेरी गुलाबी चूत फैलाई और अपनी जीभ अंदर डालकर अंदर ही अंदर मेरी चूत में घुमा-घुमा कर चूसने लगा और साथ ही अपने हाथों से मेरी दोनों भारी-भरकम चूचियों को दबाने लगा…

जैसे ही उसने मेरी शेव की हुई चिकनी चूत को सीधे चूमा आआहहहह… मैं एकदम से लगभग उछल कर उठ बैठी। मेरी कमर जोर से ऊपर उठ गई और मेरे मुंह से अनियंत्रित सी चीख निकल गई। रोहित ने तुरंत अपने दोनों हाथों से मेरी गुलाबी चूत के दोनों होंठों को फैला दिया। उसकी उंगलियां मेरी नरम और गीली त्वचा को अलग कर रही थीं। फिर उसने अपनी गर्म और नम जीभ को पूरी तरह अंदर डाल दिया। वह अंदर ही अंदर अपनी जीभ को घुमा घुमा कर चूसने लगा। कभी तेजी से चाटता तो कभी गहरे तक घुसा कर चूसता। साथ ही उसके दोनों हाथ ऊपर पहुंचकर मेरी भारी भरकम चूचियों को जोर जोर से दबाने लगे। उसकी उंगलियां मेरी चूचियों को मसल रही थीं और निप्पल्स को पिंच कर रही थीं।

ओओहहहह माँआआँ… मैं बता नहीं सकती कि कितना मज़ा आ रहा था और वह जी भर कर अपनी जीभ से मेरी गुलाबी चूत को चाटे-चूसे जा रहा था। मैं एक-दो बार उसके मुँह में स्खलित भी हो चुकी थी। और वह मेरी चूत का रस पी रहा था।

ओओहहहह माँआआँ… मैं बता नहीं सकती कि कितना मज़ा आ रहा था। रोहित जी भर कर अपनी जीभ से मेरी गुलाबी चूत को चाटे चूसे जा रहा था। उसकी जीभ हर कोने को छू रही थी। कभी बाहर निकालकर मेरी क्लिटोरिस को चूसता तो कभी अंदर घुसकर दीवारों को चाटता। मेरी चूत से लगातार रस निकल रहा था जो वह बिना किसी हिचक के पी जाता था। उसका मुंह पूरी तरह मेरी चूत से चिपका हुआ था। मैं एक दो बार उसके मुंह में स्खलित भी हो चुकी थी। पहला ऑर्गेज्म इतना तेज था कि मेरी पूरी चूत सिकुड़ गई और रस की धार उसके मुंह में चली गई। दूसरा और भी मजबूत था। मेरी जांघें कांप रही थीं और मैं चीख चीख कर कराह रही थी। वह मेरी चूत का सारा रस पी रहा था और फिर भी चूसता जा रहा था।

करीब 15-20 मिनट तक मेरी चूत चूसने के बाद वह धीरे-धीरे मुझे किस करते हुए ऊपर आने लगा और मेरी चूचियों को चूसने के बाद वह मेरे होंठों को चूसने लगा। फिर उसने मुझसे कहा “सावी मेरा लंड तुम्हारे मुँह में जाने के लिए बेचैन है। तुम अपने होंठों से मुझे खुश कर दो ताकि वह अपना काम अच्छी तरह कर पाए।”

करीब पंद्रह से बीस मिनट तक मेरी चूत चूसने के बाद वह धीरे धीरे मुझे किस करते हुए ऊपर आने लगा। उसके होंठ मेरी जांघों पर फिर मेरे पेट पर और फिर मेरी चूचियों पर रुक गए। उसने मेरी चूचियों को फिर से जोर जोर से चूसा और निप्पल्स को मुंह में लेकर चबाया। उसके बाद वह मेरे होंठों को चूसने लगा। फिर उसने मुझसे कहा “सावी मेरा लंड तुम्हारे मुंह में जाने के लिए बेचैन है। तुम अपने होंठों से मुझे खुश कर दो ताकि वह अपना काम अच्छी तरह कर पाए।” उसकी आवाज भूख से भरी हुई थी।

मैंने भी कोई नखरा न करते हुए नीचे गई और उसके लंड को चूमते हुए उसे अपने होंठों से अंदर लेते हुए अपने मुँह में लेकर उसे अच्छे से चूसने लगी।

मैंने भी कोई नखरा नहीं किया। मैं सीधे नीचे सरक गई और उसके लंड को चूमते हुए उसे अपने गर्म होंठों से अंदर ले लिया। पहले मैंने उसके सिरे को चूमा फिर धीरे धीरे पूरे लंड को अपने मुंह में लेते हुए चूसने लगी। मेरे होंठ उसके मोटे लंड के चारों ओर कस गए थे। मैं ऊपर नीचे सिर हिला रही थी और जीभ से उसकी नसों को चाट रही थी।

अब रोहित को बहुत मज़ा आ रहा था और मैं जी भर कर उसका मोटा-लम्बा लंड जोरों से चूस रही थी। उसके लंड से कसैला-कसैला रस मेरे मुँह में आ रहा था जिसे मैं निगल रही थी।

अब रोहित को बहुत मजा आ रहा था। वह कराह रहा था और मेरे बालों में उंगलियां फेर रहा था। मैं जी भर कर उसका मोटा लंबा लंड जोरों से चूस रही थी। मेरे मुंह में उसके लंड से कसैला कसैला रस लगातार आ रहा था जिसे मैं बिना रुके निगल रही थी। उसका स्वाद नमकीन और थोड़ा मीठा था।

करीब 15 मिनट तक मैंने उसका लंड चूसा और अब मैं ऊपर आकर अपने होंठ रोहित के होंठों पर रख दिए। फिर थोड़ी देर तक रोहित मुझे अपनी बाँहों में लेकर चूमता रहा और मेरे कामोत्तेजक शरीर से खेलता रहा और मज़े लेता रहा।

करीब पंद्रह मिनट तक मैंने उसका लंड चूसा। मेरे जबड़े थोड़े दर्द कर रहे थे लेकिन मैं रुकी नहीं। फिर मैं ऊपर आकर अपने होंठ रोहित के होंठों पर रख दिए। फिर थोड़ी देर तक रोहित ने मुझे अपनी बाहों में लेकर चूमता रहा। उसके हाथ मेरे कामोत्तेजक शरीर पर घूम रहे थे। वह मेरी चूचियों को दबा रहा था मेरी कमर सहला रहा था और मेरी गांड को निचोड़ रहा था। वह पूरा मजा ले रहा था।

फिर उसने नीचे आकर मेरी चूत फैलाई और मेरी गुलाबी चूत का मुँह थोड़ा खोलकर उसमें उसने अपना मुँह डाल दिया। हम 69 की स्थिति में आ गए उसका लंड मेरे मुँह के सम्मुख आ गया था और मैंने भी उसका लंड अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया था। थोड़ी देर हम एक-दूसरे का चूस कर एक-दूसरे को खुश करते रहे।

फिर उसने नीचे आकर मेरी चूत को दोनों हाथों से फैला दिया। उसने मेरी गुलाबी चूत का मुंह थोड़ा खोलकर उसमें अपना पूरा मुंह डाल दिया। हम दोनों 69 की स्थिति में आ गए। उसका लंड मेरे मुंह के ठीक सामने था। मैंने भी तुरंत उसका लंड अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तक हम एक दूसरे का चूस कर एक दूसरे को खुश करते रहे। उसके मुंह की गर्मी मेरी चूत में और मेरे मुंह की नमी उसके लंड पर थी।

अब समय आ गया था कि मैं कली से फूल बनूँ जिसका मैंने सालों से इंतज़ार किया था। रोहित मेरे ऊपर आ गया और अपनी दोनों टाँगें मेरे पैरों से फँसाईं और अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया। उस वक्त मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने जलता हुआ लोहे का सरिया मेरी चूत पर रख दिया हो। उसका लंड पूरी तरह से सख्त था और मेरी चूत को फाड़ने को बेकरार था।

अब समय आ गया था कि मैं कली से फूल बनूं जिसका मैंने सालों से इंतजार किया था। रोहित मेरे ऊपर आ गया। उसने अपनी दोनों टांगें मेरे पैरों से फंसा लीं। उसने अपना मोटा सख्त लंड मेरी चूत पर रख दिया। उस वक्त मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने जलता हुआ लोहे का सरिया मेरी चूत पर रख दिया हो। उसका लंड पूरी तरह से सख्त था और मेरी चूत को फाड़ने को बेकरार था। उसकी गर्मी मेरी ठंडी चूत की त्वचा पर महसूस हो रही थी।

उसने हल्के से अपना लंड मेरी चूत में अंदर धकेला तो मेरी हल्की सी चीख निकल गई मैंने कहा “रोहित यह तुम क्या कर रहे हो मुझे दर्द हो रहा है।”

“मैं अपना लंड तुम्हारी चूत में डालने की कोशिश कर रहा हूँ। अभी तुम्हारी चूत कुँवारी है और एकदम संकरी है इसलिए पहली बार थोड़ा दर्द होगा। पर अंदर डालने के बाद बहुत मज़ा आएगा।” रोहित ने मुझे समझाया।

वह धीरे-धीरे अपना लंड मेरी चूत के अंदर डालने लगा। करीब 4 इंच तक अंदर जाने के बाद मेरी हालत खराब हो गई थी और मैं दर्द के मारे चिल्ला रही थी।

रोहित से मेरा दर्द देखा नहीं गया तो वह मेरे होंठों को चूसने लगा और साथ ही मेरी चूचियों को हल्के-हल्के मसलने लगा।

रोहित को मेरे चेहरे पर फैले दर्द को देखकर रहा नहीं गया। उसने तुरंत झुककर मेरे होंठों को अपने गर्म और नम होंठों में भर लिया। उसकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुस गई और मेरी जीभ से उलझने लगी। वह धीरे धीरे चूस रहा था जिससे मेरी सांसें थोड़ी स्थिर होने लगीं। साथ ही उसके दोनों हाथ मेरी भारी चूचियों पर थे। वह उन्हें हल्के हल्के मसल रहा था। उसकी उंगलियां नरम मांस को दबा रही थीं और निप्पल्स को हौले से घुमा रही थीं। इससे दर्द के साथ साथ एक हल्की सी तृप्ति भी महसूस होने लगी। मेरी चूचियां उसके हाथों में निचुड़ रही थीं और मेरी निप्पल्स सख्त होकर खड़ी हो गई थीं।

थोड़ी देर तक ऐसा ही चलता रहा फिर रोहित ने देखा कि मेरा दर्द अब कम हो गया है तो उसने अपना लंड थोड़ा पीछे खींचा और फिर धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा।

थोड़ी देर तक रोहित इसी तरह मेरे होंठ चूसता रहा और चूचियां मसलता रहा। फिर उसने देखा कि मेरा चेहरा अब थोड़ा शांत हो गया है और दर्द कम होने लगा है। तब उसने अपना मोटा लंड थोड़ा सा पीछे खींच लिया। सिर्फ दो तीन इंच बाहर निकाला। फिर बहुत धीरे धीरे उसे आगे बढ़ाकर वापस अंदर धकेलने लगा। उसकी हर हरकत बेहद सावधानी भरी थी। लंड की मोटी नसें मेरी चूत की दीवारों से रगड़ खा रही थीं। हर छोटे छोटे आगे पीछे के झटके से मेरी चूत में एक नई सनसनी फैल रही थी।

थोड़ी देर ऐसा करते रहने के बाद मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा था और मैं आआहहह ऊऊऊऊ ऊहह्हमम्म करने लगी।

थोड़ी देर ऐसा करते रहने के बाद मुझे भी बहुत मजा आने लगा था। दर्द अब धीरे धीरे पिघलकर खुशी में बदल रहा था। मेरी चूत अब लंड को थोड़ा थोड़ा स्वीकार करने लगी थी। मैं अनियंत्रित होकर आआहहह ऊऊऊऊ ऊहह्हमम्म करने लगी। मेरी आवाज कमरे में गूंज रही थी। मेरी कमर हल्की हल्की ऊपर उठ रही थी और मेरी जांघें उसके कूल्हों को कसकर जकड़ रही थीं।

रोहित ने पूछा “कैसा लग रहा है जान?”

रोहित ने मेरे बालों को सहलाते हुए धीरे से पूछा “कैसा लग रहा है जान?” उसकी आवाज प्यार और चिंता से भरी थी। उसका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर आधा ही था लेकिन उसकी नब्ज मेरी दीवारों पर साफ महसूस हो रही थी।

“मज़ा आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है।” मैंने उसे बताया।

मैंने सांस लेते हुए जवाब दिया “मजा आ रहा है पर दर्द भी हो रहा है।” मेरी आवाज कांप रही थी। आंखों में आंसू थे लेकिन होंठों पर हल्की सी मुस्कान भी थी।

“मेरा लंड तुम्हारी चूत में अभी आधा ही घुसा है इसलिए दर्द हो रहा है। जब मैं पूरा लंड तुम्हारी चूत में धकेल दूँगा तब काफी मज़ा आएगा।”

रोहित ने मुझे चूमते हुए समझाया “मेरा लंड तुम्हारी चूत में अभी आधा ही घुसा है इसलिए दर्द हो रहा है। जब मैं पूरा लंड तुम्हारी चूत में धकेल दूंगा तब काफी मजा आएगा।” उसकी सांसें तेज थीं और उसका लंड मेरी चूत के अंदर हल्का हल्का फड़क रहा था।

“तो फिर घुसाते क्यों नहीं पूरा लंड मुझे पूरा मज़ा लेना है।”

मैंने अधीर होकर कहा “तो फिर घुसाते क्यों नहीं पूरा लंड मुझे पूरा मजा लेना है।” मेरी चूत अब और भी गीली हो चुकी थी और मैं पूरी तरह तैयार महसूस कर रही थी।

“अगर मैं तुरंत जल्दबाजी में पूरा घुसा दूँगा तो दर्द से तुम्हारी जान निकल जाएगी।”

रोहित ने मेरे गाल को चूमते हुए कहा “अगर मैं तुरंत जल्दबाजी में पूरा घुसा दूंगा तो दर्द से तुम्हारी जान निकल जाएगी।” उसकी आंखों में मेरे लिए चिंता साफ दिख रही थी।

“अब चाहे जितना भी दर्द हो रोहित तुम मेरे दर्द की परवाह मत करो और ज़ोर लगाकर पूरा-का-पूरा लंड अंदर घुसेड़ दो।”

मैंने आंखों में आंसू भरकर कहा “अब चाहे जितना भी दर्द हो रोहित तुम मेरे दर्द की परवाह मत करो और जोर लगाकर पूरा का पूरा लंड अंदर घुसेड़ दो।” मेरी आवाज में अब बेचैनी और इच्छा दोनों थी।

इतना सुनते ही रोहित ने मुझे और ज़ोर से अपनी बाँहों में जकड़ लिया और पूरी ताकत से अपना लंड मेरी चूत में डालने लगा। मैं ज़ोरों से चिल्लाई “आआहहहह रोहिततत मररीईईई… मेरी जान निकल जाएगी…”

इतना सुनते ही रोहित ने मुझे और जोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया। उसकी मजबूत बाहें मेरी पीठ और कमर को कसकर पकड़ लीं। फिर उसने पूरी ताकत से अपना लंड मेरी चूत में धकेलना शुरू कर दिया। मैं जोरों से चिल्लाई “आआहहहह रोहिततत मररीईईई… मेरी जान निकल जाएगी…” मेरी चीख पूरे कमरे में गूंज गई।

रोहित का 8 इंच लम्बा और 6 इंच चौड़ा लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ मेरी चूत के गरमा-गरम सिरे से जा टकराया और मेरी कुँवारी चूत परपरा कर फट गई और मेरी कुँवारी चूत से लबलबाकर खून निकलने लगा।

रोहित का आठ इंच लंबा और छह इंच चौड़ा लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ मेरी चूत के सबसे गर्म और गहरे सिरे से जा टकराया। मेरी कुँवारी चूत परपरा कर फट गई। एक तेज झटके के साथ मेरी हाइमन पूरी तरह टूट गई। मेरी कुँवारी चूत से लबलबाकर गर्म खून निकलने लगा। खून उसके लंड के साथ मेरी जांघों पर बहने लगा। दर्द इतना तेज था कि मेरी पूरी बॉडी कांप उठी।

खून देख कर मैं रोने लगी तो रोहित ने समझाया “जानू पहली बार जब चूत में लंड जाता है तो हल्का सा खून निकलता ही है। अब तुम्हें दर्द नहीं होगा और बहुत ही मज़ा आएगा।”

खून देखकर मैं रोने लगी। मेरी आंखों से आंसू बहने लगे। रोहित ने मेरे माथे को चूमते हुए धीरे से समझाया “जानू पहली बार जब चूत में लंड जाता है तो हल्का सा खून निकलता ही है। अब तुम्हें दर्द नहीं होगा और बहुत ही मजा आएगा।” उसकी आवाज प्यार से भरी थी।

फिर थोड़ी देर बाद जैसे-जैसे मेरा दर्द कम हुआ तो रोहित ने अपना लंड मेरी चूत में आगे-पीछे करना शुरू कर दिया। मेरी चूत बहुत संकरी थी इसलिए उसका लंड बहुत मुश्किल से आगे-पीछे हो रहा था। मैं उसके हर शॉट पर हल्के-हल्के चिल्ला रही थी।

रोहित ने धीरे-धीरे अपनी गति बढ़ाई और फिर खूब ज़ोर-ज़ोर से मेरी चुदाई शुरू कर दी।

रोहित ने अपनी कमर की गति धीरे धीरे तेज कर दी। हर झटका अब पहले से ज्यादा गहरा और तेज था। उसका मोटा आठ इंच लंबा लंड मेरी चूत को पूरी ताकत से फाड़ता हुआ अंदर बाहर होने लगा। फच्च फच्च की तेज आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी। मेरी चूत पहले से ही बहुत गीली थी लेकिन अब उसका रस उसके लंड के साथ मिलकर मेरी जांघों पर बहने लगा। हर थ्रस्ट के साथ मेरी चूत की दीवारें उसके लंड को कसकर जकड़ रही थीं। आआआहहहहह उउऊ ऊहहह ओओओ। मैं भी अपनी गांड उछाल उछाल कर उसका पूरा साथ देने लगी। मेरी कमर ऊपर नीचे हो रही थी और मैं अपनी जांघों से उसकी कमर को कसकर पकड़ रही थी। पूरा कमरा मेरी कुँवारी जवानी की चीखों और ध्वनियों से गुंजायमान हो उठा।

मैं चिल्लाने लगी “रोहित और ज़ोर से… आआहहह…” रोहित पूरी शक्ति और गति से मेरी चुदाई करने लगा। मेरा प्रेमी जी खोलकर मेहनत कर रहा था उसके चेहरे पर आए पसीने यह साफ-साफ बता रहे थे।

मैं चिल्लाने लगी “रोहित और ज़ोर से… आआहहह…” मेरी आवाज कंपकंपा रही थी और मेरी आंखें आनंद से बंद हो गई थीं। रोहित पूरी शक्ति और गति से मेरी चुदाई करने लगा। उसकी कमर अब मशीन की तरह तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी। मेरा प्रेमी जी खोलकर मेहनत कर रहा था। उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और वे उसके माथे से गालों तक बह रही थीं। उसकी सांसें फूल गई थीं लेकिन वह रुकने का नाम नहीं ले रहा था।

उसने पूछा “सावी कैसा लग रहा है?”

रोहित ने थोड़ा सा रुककर मेरे बालों को सहलाते हुए पूछा “सावी कैसा लग रहा है?” उसकी आंखों में प्यार और भूख दोनों थे।

“ऐसा लग रहा है जैसे मैं स्वर्ग में उड़ रही हूँ… आआहह रोहिततत।”

मैंने आह भरते हुए जवाब दिया “ऐसा लग रहा है जैसे मैं स्वर्ग में उड़ रही हूँ… आआहह रोहिततत।” मेरी चूत उसके हर जोरदार थ्रस्ट पर सिकुड़ रही थी और हर बार एक नया ऑर्गेज्म मेरे शरीर में लहरें पैदा कर रहा था।

“सावी मैं कब से तुम्हें पाना चाहता था।”

रोहित ने मेरे होंठों को चूमते हुए कहा “सावी मैं कब से तुम्हें पाना चाहता था।” उसका लंड मेरी चूत के सबसे गहरे हिस्से को छू रहा था।

“हाँ रोहित मैं पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ।”

मैंने उन्मत्त होकर कहा “हाँ रोहित मैं पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ।” मेरी चूचियां उसके सीने से रगड़ खा रही थीं और मेरी निप्पल्स सख्त होकर चुभ रही थीं।

“हाँ सावी आज मैं जी भरकर तुम्हें चोदूँगा… आआआहहह…”

रोहित ने जोर से कहा “हाँ सावी आज मैं जी भरकर तुम्हें चोदूँगा… आआआहहह…” उसकी गति और भी तेज हो गई।

रोहित का पूरी गति के साथ मेरी चूत को फाड़ कर अंदर-बाहर हो रहा था और मैं भी जी खोल कर उसका साथ दे रही थी।

रोहित का पूरा लंड पूरी गति के साथ मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर बाहर हो रहा था। हर बार जब वह अंदर घुसता तो मेरी चूत की दीवारें उसे कसकर पकड़ लेतीं और जब बाहर निकलता तो चूत से रस की फुहार निकलती। मैं भी जी खोल कर उसका साथ दे रही थी। मेरी गांड ऊपर उठकर उसके हर झटके का जवाब दे रही थी।

रोहित मेरी चूचियों को मुँह में भर कर उन्हें भी चूस रहा था और मुझे खूब ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था।

रोहित ने झुककर मेरी एक चूची को पूरा मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ निप्पल के चारों ओर घूम रही थी और दांत हल्का सा काट रहे थे। दूसरी चूची को वह हाथ से मसल रहा था। साथ ही वह मुझे खूब ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था।

पूरा कमरा फच्च-फच्च की आवाज़ से गूंज रहा था।

पूरा कमरा फच्च फच्च की तेज आवाज से गूंज रहा था। मेरी चूत का रस और उसका पसीना मिलकर बेडशीट को गीला कर चुका था।

इतना मज़ा मुझे अपनी ज़िंदगी के किसी भी खेल में नहीं आया था।

इतना मजा मुझे अपनी ज़िंदगी के किसी भी खेल में नहीं आया था। मेरी पूरी बॉडी आनंद से झूम रही थी।

फिर करीब आधे घंटे तक मेरा प्रेमी मेरी असीम चुदाई करता रहा। पहले उसने मुझे आग से चोदा फिर अपनी गोद में बिठा कर। और अंत में आगे से चोदते हुए उसने अपना वीर्य मेरी कुँवारी चूत में उड़ेल दिया।

फिर करीब आधे घंटे तक मेरा प्रेमी मेरी असीम चुदाई करता रहा। पहले उसने मुझे आग से चोदा। उसकी गति इतनी तेज थी कि बेड हिल रहा था और मेरी चीखें कमरे की दीवारों से टकरा रही थीं। फिर उसने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। मैं उसके ऊपर सवार हो गई। उसने मेरी कमर पकड़कर मुझे ऊपर नीचे करने लगा। मेरी चूत अब उसके लंड को पूरी तरह निगल रही थी। मेरी चूचियां उसके मुंह के सामने उछल रही थीं और वह उन्हें चूस रहा था। और अंत में आगे से चोदते हुए उसने अपना गर्म गाढ़ा वीर्य मेरी कुँवारी चूत में उड़ेल दिया। उसके लंड के फड़कने के साथ साथ गर्म वीर्य की धार मेरी चूत की गहराई में छूटने लगी।

मेरी कुँवारी चूत उसके वीर्य से भर गई थी हम दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे। फिर तौलिए से हमने अपने-अपने अंग पोंछे और फिर एक-दूसरे की बाँहों में सिमट गए। रोहित ने अपने लंड फिर से मेरे हाथ में दे दिया और मैं उसका लंड धीरे-धीरे सहलाने लगी। थोड़ी ही देर में वह तमतमा कर फनफनाने लगा था।

मेरी कुँवारी चूत उसके वीर्य से पूरी भर गई थी। कुछ वीर्य बाहर निकलकर मेरी जांघों पर बह रहा था और उसमें खून भी मिला हुआ था। हम दोनों पसीने से तर बतर हो चुके थे। फिर तौलिए से हमने अपने अपने अंग पोंछे। रोहित ने मुझे प्यार से पोंछा और मैंने भी उसे। फिर हम एक दूसरे की बाहों में सिमट गए। रोहित ने अपने लंड फिर से मेरे हाथ में दे दिया। मैंने उसे धीरे धीरे सहलाना शुरू कर दिया। मेरी उंगलियां उसके मोटे लंड पर ऊपर नीचे घूम रही थीं। थोड़ी ही देर में वह तमतमा कर फनफनाने लगा था।

अब उसने उसपर एक डॉटेड कंडोम लगाई और फिर से मेरे ऊपर आकर मेरी चूत में घुसेड़ दिया। इस बार थोड़ी कम तकलीफ के साथ उसका लंड अंदर चला गया। वह फिर से मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। इस बार तो मुझे और भी अधिक मज़ा आ रहा था। आआआहहह उउऊऊऊऊ… फिर रोहित ने करीब 5 बार और मेरी ज़ोरदार तरीके से चुदाई की।

अब उसने उसपर एक डॉटेड कंडोम लगाया। उसने कंडोम को अपने लंड पर चढ़ाया और फिर से मेरे ऊपर आकर मेरी चूत में घुसेड़ दिया। इस बार थोड़ी कम तकलीफ के साथ उसका लंड आसानी से अंदर चला गया। वह फिर से मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। इस बार तो मुझे और भी अधिक मजा आ रहा था। आआआहहह उउऊऊऊऊ… मेरी चूत अब पूरी तरह तैयार थी और हर थ्रस्ट पर नया आनंद दे रही थी। फिर रोहित ने करीब पांच बार और मेरी ज़ोरदार तरीके से चुदाई की। हर बार मेरी चूत सिकुड़कर ऑर्गेज्म दे रही थी और मैं चीख चीख कर उसका नाम ले रही थी।

अंत में हम तैयार होने लगे। मुझसे उठा भी नहीं जा रहा था तो रोहित ने मुझे उठा लिया और बाथरूम में ले गया। हम दोनों ने स्नान किया और फिर तैयार हो गए। रोहित ने मुझे घर तक छोड़ दिया।

दोस्तों आपको मेरी कहानी कैसी लगी कृपया मेल द्वारा बताएं। मैं जल्द ही अगली कहानी लेकर फिर से हाजिर होऊंगी। आज के लिए विदा दोस्तों।

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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