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अपनी अम्मा, सासु माँ और उनकी बेटी

Maa, Sasu Maa aur Patni ki chudai sex story: हाय, मेरा नाम समीर है। अभी मेरी उम्र 24 साल की है। ये कहानी मेरी और मेरी अम्मा की चुदाई की कहानी है। इस कहानी की शुरुआत चार साल पहले हुई थी।

अम्मा का नाम प्रतिभा है। मेरे पिताजी तो काफी साल पहले गुजर गए थे और तब से हम दोनों मां-बेटे अकेले ही रह रहे थे। हम लोग काफी रईस हैं और हमारी अलग-अलग जगहों पर कई बहुमूल्य प्रॉपर्टी हैं जिनसे हमारा जीवन आरामदायक था।

हम जिस पुराने घर में रहते थे वहां अब नई बहुमंजिला बिल्डिंग बनने वाली थी। इसलिए ठेकेदार ने हमें कुछ महीनों के लिए रहने हेतु पास की एक अलग जगह पर एक छोटा सा मकान उपलब्ध करा दिया। बिल्डिंग का काम पूरा होने के बाद हम लोग फिर से अपने उसी पुराने बड़े घर में वापस लौटने वाले थे।

यह जो नया घर ठेकेदार ने दिलाया था वह रहने के लिहाज से काफी छोटा और संकीर्ण था। इसमें सिर्फ एक ही मुख्य कमरा था और उसके साथ जुड़ी हुई एक छोटी सी रसोई थी। कोई अलग बेडरूम नहीं था इसलिए हम दोनों को एक ही कमरे में रहना पड़ता था। लेकिन ठीक था क्योंकि हम दोनों ही तो थे, मैं और मेरी अम्मा।

उस समय मेरी उम्र बीस साल की थी और अम्मा की बयालीस साल की थी। मेरी अम्मा वैसे तो दिखने में कुछ खास आकर्षक नहीं थीं लेकिन बुरी भी नहीं लगती थीं। वे थोड़ी मोटी थीं जिससे उनकी देह और भी आकर्षक और मांसल हो गई थी। उनकी गांड कुछ ज्यादा ही बड़ी, गोल, मोटी और भारी थी जो हर कदम पर लहराती, हिलती और ऊपर-नीचे करती रहती थी।

उनके मम्मे भी बहुत बड़े, भरे हुए, भारी और लटकते हुए थे जो साड़ी के ब्लाउज को पूरी तरह से तानकर रखते थे। वे हमेशा साड़ी ही पहनती थीं, यहां तक कि रात को सोते समय भी वे साड़ी पहनकर ही लेट जाती थीं जिससे उनकी देह की गर्मी और महक कमरे में भर जाती थी।

अम्मा अपनी साड़ी हमेशा पल्लू से अच्छी तरह ढककर रखती थीं ताकि उनका गहरा ब्लाउज कटाव और मम्मों की उभार छिपा रहे। जब वे बाहर किसी काम से जातीं तो पल्लू हमेशा सामने की ओर सावधानी से रखती थीं। उनकी चाल में एक खास लचक होती थी जो उनकी बड़ी गांड को और ज्यादा उभार देती थी।

कुछ दिन ऐसे ही बीत गए। जब अम्मा घर के कामकाज करतीं तो मैं चुपचाप उनकी हर एक हलचल को ध्यान से देखता रहता। उनके झुकने पर ब्लाउज से मम्मों की गहरी खाई साफ दिखती। मम्मों का निचला हिस्सा बाहर झांकता।

जब वे पीठ मुड़ाकर काम करतीं तो उनकी मोटी और भारी गांड बाहर की ओर उभर आती और साड़ी के कपड़े से उसकी आकृति स्पष्ट हो जाती। जब वे नहाकर बाहर आतीं तो उनकी गीली देह पर साड़ी चिपकी रहती। पानी की बूंदें उनके गले से नीचे मम्मों की खाई में जातीं और वे रसोई के कोने में ही साड़ी बदलती थीं।

एक दिन दोपहर के समय ऐसा हुआ कि मैं चादर ओढ़े आराम से लेटा सो रहा था। कमरे में दोपहर की तेज गर्मी फैली हुई थी, हवा बिल्कुल नहीं चल रही थी और पसीना शरीर पर चिपक रहा था।

अम्मा ने कहा, बेटे मैं थोड़ी देर के लिए शीला चाची के पास जा रही हूं, तू सो जा, मैं अभी आती हूं।

मैंने नींद का बहाना करते हुए चादर के अंदर से ही हां कह दिया।

मैंने चादर अपने मुंह तक पूरी तरह ओढ़ रखी थी। तभी मुझे अपनी कलाई की चूड़ियों के खनकने की मीठी और उत्तेजना भरी आवाज सुनाई दी। मेरी चादर में एक छोटा सा छेद था जिससे बाहर झांकना आसान था।

मैंने उस छेद से अपनी आंख लगाई और देखा तो अम्मा मेरे ठीक सामने ही खड़ी साड़ी बदल रही थीं। पहले उन्होंने अपना पल्लू कंधे से धीरे से हटाया। साड़ी का हल्का कपड़ा सरकते हुए उनकी बड़ी भारी मम्मों पर से गुजरा और ब्लाउज के तंग कपड़े में कैद उनके उभरे हुए स्तन पूरी तरह उजागर होने लगे।

फिर उन्होंने कमर पर बंधी साड़ी की गांठ खोली। साड़ी की सिलवटें एक के बाद एक नीचे गिरने लगीं। उनकी मोटी जांघें और पेटीकोट अब साफ दिखने लगे। वे थोड़ा सा मुड़ीं तो उनकी बड़ी गांड का आधा हिस्सा दिख गया जो गोल और चिकना था।

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फिर उन्होंने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोलने शुरू किए। जैसे ही पहला हुक खुला उनके मम्मों का ऊपरी हिस्सा बाहर झांकने लगा। दूसरे और तीसरे हुक के साथ मम्मे और भी आजाद होते गए।

आखिरी हुक खुलते ही उनके दोनों भारी मम्मे छूटकर लहराते हुए बाहर आ गए। वे बड़े-बड़े थे, थोड़े लटके हुए लेकिन बहुत आकर्षक, उनकी काली और मोटी चूचियां सख्त होकर खड़ी दिख रही थीं।

फिर उन्होंने पेटीकोट की नाड़ी खींची और वह नीचे सरक गई। अब वे पूरी तरह नंगी खड़ी थीं। उनकी मोटी गांड के दोनों फंदे साफ दिख रहे थे, जांघों के बीच उनकी योनि पर काले बालों का झाड़ साफ था।

मेरे शरीर में गर्मी दौड़ गई, मेरा लिंग पैंट के अंदर सख्त होकर तन गया, उसमें थोड़ा सा पसीना और पूर्व स्राव निकलने लगा। मैं सांस रोके हुए चादर के छेद से लगातार उन्हें देखता रहा।

मैंने सोने की एक्टिंग की और मैं चादर के छेद से ही देखता रहा।

अम्मा को लगा होगा कि ये सो रहा है। उन्होंने अपना पल्लू निकाला, साड़ी नीचे गिरा दी। जैसे ही अम्मा ने अपना पल्लू हटाया, उनके बड़े बड़े मम्मे मुझे दिखाई दिए, जो ब्लाउज के आधे बाहर थे।

मैं चादर के छेद से पूरी तरह सांस रोके हुए देख रहा था। अम्मा ने पल्लू को कंधे से धीरे-धीरे सरकाकर पूरी तरह हटा दिया। उनके भारी-भरे, मोटे और लटकते हुए मम्मे ब्लाउज के तंग कपड़े से दबे हुए थे, लेकिन आधे से ज्यादा हिस्सा बाहर झांक रहा था। उनकी गहरी खाई में पसीने की छोटी-छोटी बूंदें चमक रही थीं और हल्की-सी महक कमरे में फैल रही थी। ब्लाउज का कपड़ा उनके उभरे हुए स्तनों पर इतना खिंचा हुआ था कि हर सांस के साथ मम्मे हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे।

मैंने देखा कि उनके मम्मे असल में बहुत बड़े थे, जिसके कारण ब्लाउज का एक बटन नहीं लगा था। ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा खुला रह गया था और उनके दोनों मम्मों का निचला गोला भाग पूरी तरह बाहर निकला हुआ दिख रहा था। उनकी काली, मोटी चूचियां ब्लाउज के किनारे से दबकर सख्त हो गई थीं।

अब धीरे धीरे करके अम्मा ने साड़ी उतार दी। उनकी फैली हुई गांड, तो उनके मम्मों से बहुत बड़ी थी। साड़ी की सिलवटें एक-एक करके नीचे सरकती गईं और उनकी मोटी, गोल, चिकनी जांघें पूरी तरह उजागर हो गईं। गांड के दोनों भारी फंदे साड़ी के बिना अब पूरी तरह हिल रहे थे। उनकी गांड की दरार साफ दिख रही थी और वहां से हल्की पसीने की महक आ रही थी।

वो देख कर मेरा लंड उठ गया। मेरे पैंट के अंदर मेरा लंड तेजी से सख्त होकर तन गया, उसकी नसें फड़कने लगीं और टिप पर थोड़ा-सा पूर्व स्राव निकलने लगा। फिर उन्होंने ब्लाउज खोला, तो देखा कि उनकी ब्रा भी बड़ी छोटी सी थी। जिसमें से उनके मम्मे तो ऐसे बाहर निकल रहे थे, जैसे कि वो कभी भी उछल कर बाहर आ सकते हों। ऐसा लग रहा था।

मैं सब चादर के छेद से देख रहा था। मेरी आंखें उनके नंगे शरीर की हर हरकत पर टिकी हुई थीं।

फिर उन्होंने दूसरी साड़ी पहनी, दूसरा ब्लाउज पहना। उस ब्लाउज को पहनते वक्त उन्होंने नीचे से बटन लगाए और ऊपर का बटन नहीं लगाया। दरअसल वो लग भी नहीं सकता था। ब्लाउज बड़ा टाईट था। उनके मम्मे फिर से ब्लाउज के कपड़े को तान रहे थे और ऊपरी हिस्सा खुला ही रह गया था।

अम्मा ने अपना पल्लू आगे लिया और दरवाजा खोल कर चली गईं। उनके जाने के बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अम्मा के नाम से मुठ मारी।

थोड़े दिन ऐसे ही गुजर गए। मैं हमेशा चादर से नींद के बहाने उन्हें चादर के छेद से साड़ी बदलते देखने लगा।

बाकी मुझे जब भी मौका मिलता, मैं उन्हें देखता रहता। रात को वो जमीन पर सोती थीं और मैं बेड पर।

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हम बाथरूम की लाइट को ऑन रखते थे, तो हल्का सा उजाला आता था।

एक दिन रात मैं बेड पर सोया था, मेरी अचानक नींद खुली। मैंने देखा तो अम्मा सोयी हुई तो थीं, लेकिन उन्होंने अपनी साड़ी ऊपर ली हुई थी और उनका हाथ उनकी चुत पर था। वो अपनी एक उंगली चुत में डाल कर सोयी थीं। यह देख कर मेरा लंड फिर जाग उठा और मैंने फिर चादर में ही मुठ मारी।

अब ये हमेशा होने लगा। उनका साड़ी बदलना और रात को उंगली चुत में डाल कर सोना … ये मैं हमेशा सोने की एक्टिंग करके देखने लगा।

एक रात मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं करवटें ले रहा था।

तभी अम्मा की आवाज आयी- क्या हुआ बेटे, नींद नहीं आ रही? आ जा आज तू मेरे बाजू में सो जा।

मैं तुरंत ही अम्मा के बाजू में जाकर सो गया। उन्होंने मेरे ऊपर हाथ रखा। हम उस रात एक दूसरे से चिपक कर सो गए।

फिर रोज ऐसा ही होने लगा। रात को हम चिपक कर सोने लगे। मैं तो मेरा मुँह अम्मा के मम्मों के बीच में ही रख कर सोता था। कई बार तो अम्मा का हाथ मेरे लंड को भी लगता और तो कई बार मेरा लंड अम्मा की गांड में भी लग जाता था। ये तब होता था, जब वो मेरी तरफ पीठ करके सोती थीं।

अम्मा बातें करने में वैसे फ्री थीं, खुल कर बातें करती थीं।

एक दिन ऐसा हुआ, सोते वक्त मैंने मेरा हाथ अम्मा के पेट पर रखा और अपनी एक उंगली अम्मा की नाभि में घुसा दी।

अम्मा थोड़ी मोटी थीं। उनका पेट थोड़ा बड़ा और नरम था। इसलिए उन्होंने नाभि खोल ली थी। मेरी उंगली उनकी गहरी, गर्म और थोड़ी पसीने से नम नाभि में आसानी से घुस गई। उनकी नाभि की दीवारें मुलायम और गुदगुदाती हुई थीं। मैंने उंगली को अंदर-बाहर हिलाना शुरू किया। हर बार उंगली घुसते ही उनकी पेट की चर्बी हल्के से कांप जाती थी। अम्मा की सांसें थोड़ी तेज हो गईं लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा।

मुझे उनकी नाभि में उंगली करने में मजा आ रहा था। उनकी नाभि से हल्की-सी पसीने और देह की महक आ रही थी जो मेरे लंड को और ज्यादा सख्त कर रही थी। उनका भी कोई विरोध नहीं था। अब ये रोज होने लगा। मैं अम्मा की नाभि में उंगली डाल कर सोता। हर रात मैं उनकी नाभि को अपनी उंगली से चोदता हुआ महसूस करता और वे चुपचाप लेटी रहतीं।

ऐसे ही तीन चार दिन बीत गए।

फिर एक दिन मुझे रहा नहीं गया।

मैंने अम्मा के कान में धीरे से कहा- अम्मा, मैं नंगा हो जाता हूँ।

वो कुछ नहीं बोलीं।

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मुझे लगा कि वो सोयी होंगी। मैंने एक बार फिर से बोला- अम्मा, मैं नंगा होता हू। मुझे नंगा सोना है।

अचानक अम्मा के मुँह से आवाज आयी- हम्म … बाथरूम की लाईट बंद कर ले।

मैंने तुरंत ही बाथरूम का लाईट को बंद किया और नंगा होकर अम्मा के बाजू में सो गया। अब पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया था लेकिन बाथरूम की हल्की रोशनी अभी भी उनकी देह की आकृति दिखा रही थी। थोड़ी देर के बाद मैंने मेरी उंगली फिर अम्मा की नाभि में घुसायी। उनकी नाभि अब और भी गर्म और गीली लग रही थी।

उसी वक्त अम्मा ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी साड़ी और पेंटी के अन्दर घुसा कर मेरी उंगली अपनी चुत में घुसा दी। उनकी चुत पहले से ही गीली और गरम थी। मेरी उंगली उनकी चूत की मुलायम, गीली दीवारों में फिसल गई। अंदर बहुत गर्मी थी और उनके रस की चिपचिपाहट मेरी उंगली को पूरी तरह भिगो रही थी। उनकी चूत की मांसपेशियां मेरी उंगली को हल्के से दबा रही थीं।

फिर क्या था, मैंने भी उनका हाथ लिया और मेरा लंड उनके हाथ में दे दिया। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा और नसों से फड़क रहा था। अम्मा ने अपने मोटे, नरम हाथ से उसे जकड़ लिया। उनकी हथेली गर्म थी और उन्होंने धीरे-धीरे उसे सहलाना शुरू किया।

अब मैं अम्मा की चुत में उंगली डाल कर सोया था और अम्मा मेरा लंड को पकड़ कर सोयी थीं। उनकी उंगलियां मेरे लंड की नसों पर दबाव डाल रही थीं और हर बार हिलने पर मेरे लंड से थोड़ा-थोड़ा पूर्व स्राव निकल रहा था जो उनकी हथेली को चिकना बना रहा था।

थोड़ी देर में मैंने धीरे से अम्मा के कान में धीमे से कहा- मेरी नल्ली भर गयी है। पाइप फुल हो गया है।

अम्मा ने भी हल्के से कहा- हां मेरी भी बावड़ी भर कर तुंब हो गयी है। अपना पाइप वाला पंप डाल के, उसका पानी निकाल दे।

बस फिर क्या था। मैं अम्मा के ऊपर चढ़ गया। उन्होंने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चुत पर रख लिया। उनकी चुत की बाहर वाली लबें पहले से ही सूजी हुई और गीली थीं। मैंने तुरंत ही ठोकर देना शुरू कर दिया।

अम्मा को मानो चैन आ गया था, वो बोल रही थीं- ओह आह … घुसा अपने पाइप को और अन्दर घुसा, मेरी बावड़ी के अंत तक घुसा दे। चैम्बर में और घुसा डाल तेरा लंड … घुसा बेटे तेरा मोटा पाइप।

मैंने कहा- हां अम्मा मैं आज आप का बोर बेल का काम पूरा करके ही रहूँगा।

वो मुझसे चुदवाने लगीं। उनकी कमर ऊपर-नीचे हिल रही थी और हर ठोके पर उनकी चूत मेरे लंड को पूरी ताकत से चूस रही थी। उनके रस मेरे लंड पर बह रहे थे और हर बार अंदर-बाहर होने पर चुटकने की आवाज आ रही थी।

मैंने कहा- क्या मैं अभी आपको नाम से बोल सकता हूँ?

अम्मा ने कहा- हां … क्यों नहीं … लेकिन मैं अम्मा ही सुनना पसंद करूंगी, तू ऐसा समझ मेरा नाम अम्मा ही है, तुम मुझे अम्मा ही बोला करो।

मैं और जोर जोर से ठोकने लगा पूरा लंड घुसेड़ने लगा।

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मैं बोला- हाय अम्मा … तेरे मम्मे तो एकदम खरबूजे जैसे बड़े हैं … इनको तो मैं पूरा निचोड़ दूँगा. तेरे ये मोटे चूतड़ वाली गांड वाली बड़ी बावड़ी में भी मैं मेरा पाइप पेलूंगा. तुझे एकदम चुदक्कड़ बना कर रखूंगा।

मेरे मुंह से ये गंदी बातें निकलते ही अम्मा की चूत मेरे लंड को और जोर से कस कर दबाने लगी। मैं उनके ऊपर झुका हुआ था। मेरा पसीने से तर शरीर उनकी मोटी देह से पूरी तरह चिपका हुआ था। उनके भारी मम्मे मेरी छाती पर दब रहे थे और हर धक्के के साथ लहरा रहे थे। उनकी काली मोटी चूचियां मेरी छाती को रगड़ रही थीं और हर बार दबने पर वे और सख्त हो जाती थीं।

अम्मा ने कहा- हां मेरे मोटे फल खूब चूसना काटना … उनको पूरा निचोड़ देना. मेरी गांड मारके उसे पूरी ढीली कर देना … आह और तू क्या मुझे चुदक्कड़ बनाएगा, मैं ही तुझे पूरा चुदक्कड़ बना दूंगी … बेटे तुझे क्या लगता है, एक बार चोद कर तू मेरी प्यास बुझा पाएगा. अभी तो ये शुरूआत है … हां बेटा चोद और चोद पूरा घुसा अपना पाइप मेरी चुत में … आज तू मादरचोद बन जा पूरा … आह ओओ आ कुछ शरम मत कर … चोद दे अपनी अम्मा को … चोद और जोर से चोद बेटे।

अम्मा की ये बातें सुनकर मेरे लंड में और ताकत आ गई। मैंने उनके दोनों मोटे मम्मों को अपने हाथों में भर लिया और जोर-जोर से निचोड़ना शुरू कर दिया। उनकी नरम गर्म और भारी चूचियां मेरी उंगलियों के बीच से फिसल रही थीं। मैंने उनकी काली मोटी चूचियों को मुंह में लिया चूसा काटा और जोर से दबाया। हर बार दबाने पर उनके मम्मों से हल्का दूध जैसा स्वाद निकल रहा था और अम्मा की सांसें तेज हो गई थीं।

मैंने और जोर जोर से चोदना चालू रखा. उनके मुँह से आवाजें आने लगीं. मुझे मजा आ रहा था. मैंने और स्पीड बढ़ा दी।

हर ठोके पर मेरा मोटा लंड उनकी चूत के अंदर तक पूरी तरह घुस रहा था। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को चूस रही थीं और हर बार बाहर निकालते समय चुटकने की चिपचिपाती आवाज गूंज रही थी। अम्मा की चूत से सफेद रस बहकर मेरे लंड और अंडकोषों को भिगो रहा था। कमरे में चूत के रस की मीठी और गर्म महक फैल गई थी।

मैं बोला- अम्मा मैं तुझे अपनी चुत में उंगली डाल के सोते हुए देखता था।

अम्मा ने कहा- अच्छा और तू चादर में ही मुठ मारता था ना. मुझे देख कर लंड हिलाता था न, जब मैं अपनी साड़ी बदलती थी. तब भी तू मुझे चादर के छेद से देखता था।

मैंने कहा- ओह तो ये तुझे मालूम था अम्मा?

अम्मा ने कहा- हां नहीं तो क्या? मैं पहले ही समझ गयी थी, जब पहली बार देखा था. मैं चुत में उंगली डाल कर तो हमेशा ही सोती हूँ. लेकिन तुझे देखने को मिले, इसलिए मैं अब चादर नहीं लेती थी. तुझे ये सीन देखने को मिले, इसलिए बाथरूम का लाईट चालू रखती थी. वो तो तेरे लिए एक इशारा था कि अब तो चोद दे मुझे।

मैंने अपने धक्के और बढ़ा दिए। अब मैं पूरी ताकत से उनके ऊपर चढ़कर उनकी चूत को चोद रहा था। उनके मोटे चूतड़ मेरे हर धक्के पर उछल रहे थे और कमरे में चमड़े की ताली बजने जैसी आवाज गूंज रही थी। मेरे पसीने की बूंदें उनकी गर्दन पर गिर रही थीं और उनकी चूत से निकलता रस मेरी जांघों को चिपचिपा बना रहा था।

अम्मा भी अपनी गांड नीचे से उछालने लगीं. अब मैंने आखिरी ठोका दे दिया।

अम्मा भी चिल्ला दीं- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई …

मेरा पूरा पानी अम्मा की चुत में घुसने लगा. अम्मा की भी चुत पूरी भर गयी और वीर्य बाहर बहने लगा। मेरा गर्म वीर्य उनकी चूत की दीवारों पर छींटे मार रहा था और कुछ बाहर निकलकर उनकी जांघों पर बह गया था। उनकी चूत की मांसपेशियां मेरे लंड को अंत तक दबा रही थीं।

फिर हम दोनों शांत होकर एक दूसरे से चिपक कर लेटे रहे।

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मैंने अम्मा के होंठों को चूमा। उनके होंठों को लिपलॉक किस भी किया।

मेरे होंठ अम्मा के गर्म, नरम और थोड़े पसीने से नम होंठों पर टिक गए। मैंने धीरे से उनके निचले होंठ को चूसा, फिर ऊपरी होंठ को अपने मुंह में ले लिया। अम्मा ने भी मेरे होंठों को जोर से चूमा और अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुसा दी। हमारी जीभें एक दूसरे से लिपटकर घूमने लगीं। उनके मुंह से हल्की-सी लार की मीठी महक आ रही थी जो मेरे मुंह को भर रही थी। हम दोनों के मुंह से चूमने की चपचपाती आवाजें निकल रही थीं। मेरा लंड फिर से सख्त होकर उनके पेट से सट गया था।

हम दोनों ने काफी वक्त तक खुल कर बातें भी की। मैं एकदम ब्वॉयफ्रेंड की तरह बात कर रहा था। अम्मा भी मेरे साथ मस्त हो गयी थीं।

हम नंगे ही लेटे हुए थे। मैंने अम्मा को अपनी बाहों में भर लिया। उनकी भारी मम्मे मेरी छाती पर दब रहे थे। मैंने उनकी गर्दन को चूमते हुए कहा कि तुम कितनी खूबसूरत हो अम्मा। अम्मा हंस पड़ीं और मेरे बालों में उंगलियां फिराने लगीं। हम दोनों एक दूसरे की आंखों में देखकर हंसी-मजाक कर रहे थे। कमरे में हमारी सांसों की आवाज और देह की गर्मी का माहौल बन गया था।

फिर अम्मा उठ कर बाथरूम में गईं और चुत साफ करके आईं। मैं भी बाथरूम में जाकर लंड साफ करके फिर से बेड पर आ गया। हम फिर से बेड पर लेटे रहे और प्यार भरी बात करने लगे।

अम्मा ने कहा- एक बात बताऊं बेटे … क्या तू वो करेगा?

मैंने कहा- हां अम्मा … तेरे लिए कुछ भी करूंगा।

अम्मा ने कहा- बेटे मैं वो अनुभव लेना चाहती हूँ, जिसमें औरत आदमी का लंड और आदमी औरत की चुत चाटता है। वो करना चाहती हूँ।

मैंने कहा- बस इतनी सी बात … उसको 69 की पोजीशन बोलते हैं।

फिर मैं अम्मा पर चढ़ गया। मैंने मेरा लंड अम्मा के मुँह में डाला और मैं अम्मा की चुत चाटने लगा। मैंने अपने घुटनों को अम्मा के सिर के दोनों तरफ रखा। मेरा मोटा, सख्त लंड उनके मुंह के ठीक सामने था। अम्मा ने अपना मुंह खोला और मेरे लंड को पूरी तरह अंदर ले लिया। उनकी गर्म, गीली जीभ मेरे लंड की नसों पर लपेट गई। वे जोर-जोर से चूसने लगीं। उनके मुंह से चूसने की आवाज निकल रही थी।

वैसा काफी वक्त चला, मैं फिर से झड़ गया। अम्मा मेरा पूरा लंड रस चाट, चूस कर पी गईं। मैं उनकी चुत का पानी चाट चूस कर पी गया।

मैंने अपना मुंह उनकी चूत पर रख दिया। मेरी जीभ उनकी सूजी हुई लबों को चाटने लगी। मैंने उनकी चूत के अंदर अपनी जीभ घुसा दी और उनके रस को चूस-चूसकर पीने लगा। उनकी चूत से गर्म, चिपचिपा रस मेरी जीभ पर बह रहा था। स्वाद नमकीन और मीठा था। अम्मा की जांघें कांप रही थीं और वे मेरे सिर को अपनी जांघों से दबा रही थीं।

फिर हम दोनों वैसे ही नंगे पड़े रहे, प्यार भरी बातें करते रहे।

अब वैसे भी सुबह के 4 बजने वाले थे, अम्मा ने कहा- चल अब सुबह का मीठा वाला सेक्स करते हैं, चल बाथरूम में करेंगे।

हमारे इस घर का बाथरूम छोटा था। घर की सब लाईट ऑफ थीं, बाथरूम की भी बंद थी … पूरा अंधेरा था।

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अम्मा ने कहा- अब मैं तुझे सेक्स का असली मजा देती हूँ।

मैंने कहा- वो कैसे?

अम्मा- मैं घुटनों पर बैठ कर कुतिया बन जाती हूँ … तू भी कुत्ते जैसे मेरे ऊपर चढ़ जा और मेरी गांड में अपना लंड पेल दे।

मैंने भी वैसे ही किया। पहले शॉवर ऑन किया और लंड में साबुन लगा कर अम्मा की गांड में लंड पेल दिया।

शॉवर का ठंडा पानी तेजी से बहने लगा। बाथरूम का छोटा सा फर्श तुरंत गीला और फिसलन भरा हो गया। मैंने अपने मोटे, सख्त लंड पर साबुन लगाया। साबुन की सफेद झाग मेरे लंड की पूरी लंबाई पर फैल गई और वह चिकना, गर्म और फिसलता हुआ हो गया। अम्मा घुटनों पर बैठी हुई कुतिया बनकर आगे झुकी थीं। उनकी मोटी, भारी गांड मेरे सामने पूरी तरह फैली हुई थी। दोनों गोल चूतड़ ऊपर उठे हुए थे और गांड की गहरी दरार साफ दिख रही थी। मैंने लंड की टिप को उनकी गांड के छेद पर रखा। साबुन की वजह से वह छेद पहले ही थोड़ा नरम और चिकना हो चुका था। फिर मैंने धीरे से दबाव डाला।

अम्मा पहले तो चिल्लाईं और बोलने लगीं- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मर गई रे … आ … और जोर से … मजा आ रहा है … और जोर से घुसा अपना लंड मेरी गांड में … मार बेटा आज अपनी अम्मा की गांड मार … मजा आ रहा है मुझे … आह और जोर घुसा दे बेटा … और जोर से मार दे मेरी गांड … पूरी कर दे मेरी गांड ढीली बेटा … और जोर से चोद।

जैसे ही मेरा मोटा लंड उनके गांड के टाइट छेद में घुसा, अम्मा का पूरा शरीर एक झटके से कांप गया। उनकी गांड की मांसपेशियां मेरे लंड को जोर से दबा रही थीं। अंदर बहुत गर्मी और दबाव था। साबुन की झाग और पानी की वजह से लंड थोड़ा-थोड़ा और अंदर फिसलता जा रहा था। हर इंच घुसने पर अम्मा की सांसें तेज हो रही थीं और उनकी गांड हल्के-हल्के कांप रही थी। उनके मोटे चूतड़ मेरे पेट से टकरा रहे थे और हर धक्के पर चमड़े की ताली की आवाज गूंज रही थी। पानी शॉवर से उनके पीठ पर गिर रहा था और उनकी देह की गर्मी से भाप उठ रही थी।

मैं बोला- हां अम्मा आज मैं पूरा लंड तेरी गांड में घुसा कर ही रहूँगा।

मैं जोर जोर से ठोके दे रहा था। अम्मा की गांड में लंड घुसाए जा रहा था। हर ठोके पर मेरा पूरा लंड उनकी गांड के अंदर तक चला जा रहा था। अंदर की गर्म, टाइट दीवारें मेरे लंड को चूस रही थीं। साबुन की झाग और उनके शरीर का प्राकृतिक रस मिलकर चिपचिपाती आवाजें पैदा कर रहा था। अम्मा की गांड अब धीरे-धीरे ढीली पड़ने लगी थी और लंड बिना रुके अंदर-बाहर हो रहा था। उनके मोटे चूतड़ हर बार उछल रहे थे और पानी की बूंदें चारों तरफ उड़ रही थीं।

फिर मैंने कहा- एक सवाल करूं अम्मा?

अम्मा ने कहा- हां कहो बेटा।

मैंने कहा- अम्मा तूने इतने सालों से सेक्स नहीं किया? सच बता और किसी से भी चुदवाया है?

अम्मा ने कहा- नहीं बेटे मैंने किसी से चुदाई नहीं की … तेरे मोटे जवान लंड और मेरी प्यासी चुत की कसम खाकर कहती हूँ … मैंने कभी किसी से नहीं चुदवाया।

मैंने कहा- फिर तू अपनी सेक्स की प्यास कैसे बुझाती थी?

अम्मा ने कहा- जब मैं घर अकेली होती थी, तब अपनी चुत में उंगली डाल कर या गाजर मूली खीरा वगैरह डाल कर घंटों हस्तमैथुन करती थी। प्लीज़ अब तू बात मत कर, लंड को रोक मत। मेरी गांड मार … आह और जोर से मार।

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मैंने ठोके और जोर जोर से मारे और कहा- अम्मा मुझे देखना है कि तू हस्तमैथुन कैसे करती हो।

अम्मा ने कहा- हां बेटा सब दिखाऊंगी … लेकिन कल … अब तू रुकना मत और मेरी जम के गांड मार … मैं काफी टाईम से सेक्स की प्यासी हूँ। मेरी प्यासी चुत और गांड काफी सालों से लंड की भूखी है। आज से तू मेरी चुत और गांड की भूख मिटा। मैं कल तुझे हस्तमैथुन का अच्छा शो दिखाऊंगी। प्लीज़ तू अब कुछ मत बोल और अपनी अम्मा की गांड मार।

मैं और जोर से लंड अम्मा की गांड में पेलने लगा।

मेरे कूल्हे तेजी से आगे-पीछे हिल रहे थे। हर जोरदार धक्के पर मेरा पूरा मोटा लंड अम्मा की गांड के अंदर तक घुस जाता था। अम्मा की गांड बड़ी थी लेकिन बड़ी टाईट थी। उसकी अंदर वाली गर्म और मांसल दीवारें मेरे लंड को जकड़े हुए थीं जैसे कि वह कभी छोड़ना ही नहीं चाहतीं। मुझे मस्त लग रहा था। हर बार लंड अंदर घुसते ही साबुन की झाग और उनके शरीर के रस की चिपचिपाती आवाज निकल रही थी। अम्मा की गांड ने मेरा लंड जकड़ कर रखा था। उनके मोटे चूतड़ मेरे पेट से हर ठोके पर टकरा रहे थे और लहरा रहे थे। शॉवर का पानी उनके पीठ पर गिर रहा था जिससे उनकी देह चमक रही थी और पसीने की महक हवा में फैल रही थी।

फिर मैंने आखिरी ठोका दिया। मेरा लंड पूरा घुस गया। अम्मा भी जोर से चिल्लाईं। मेरे लंड ने अम्मा की गांड में पानी छोड़ना शुरू कर दिया।

मेरा गर्म वीर्य उनके गांड के अंदर फूट-फूटकर छींटे मार रहा था। अम्मा की गांड की दीवारें मेरे लंड को अंत तक दबा रही थीं और हर स्पर्म की धार के साथ उनकी गांड हल्के से कांप उठती थी। अम्मा की सांसें तेज हो गई थीं और उनके मुंह से हल्की-हल्की कराहटें निकल रही थीं। उनका पूरा शरीर एक झटके से सख्त हो गया था फिर धीरे-धीरे ढीला पड़ गया।

अम्मा की गांड मेरे रस से पूरी भर गयी।

कुछ वीर्य उनके गांड के छेद से बाहर निकलकर उनकी जांघों पर बह गया और शॉवर के पानी के साथ मिलकर नीचे बहने लगा।

फिर हम दोनों खड़े हो गए, शॉवर लिया और बेड पर आकर नंगे ही एक दूसरे से चिपक कर सो गए।

दूसरे दिन सब नॉर्मल था। मैं अम्मा को किस करता, बीच बीच में उनके मम्मे दबाता।

दूसरे दिन मैं बेड पर था। एक गद्दा जमीन पर बिछा था। अम्मा ने घर की सब खिड़कियां बंद की और परदे लगा दिए। अम्मा जमीन पर बिछायी हुई गद्दी पर आ गईं। मैं अभी भी बेड पर ही था। मैंने देखा कि आज अम्मा ने साड़ी नहीं पहनी थी। उन्होंने एक टी-शर्ट पहनी थी। ये लंबी टी-शर्ट थी। टी-शर्ट कसी हुई थी। उसमें से भी उनके मम्मे उभर कर दिख रहे थे। उनके मम्मे बहुत बड़े थे। वो टी-शर्ट में थे, ब्लाउज जैसी दरार नहीं दिख रही थी, फिर भी मस्त लग रहे थे।

फिर उन्होंने कहा- आज कुछ म्यूजिक लगा।

मैंने एक सेक्सी सा म्यूजिक लगा दिया। जिसमें एक औरत सिसिया रही थी। फिर मैंने देखा कि अम्मा भी मेरे सामने लेटे लेटे अपने मम्मे हिलाने लगीं … कमर हिलाने लगीं। अपने मम्मों को शेक करने लगीं। अपने हाथों से अपने ही मम्मे दबाने लगीं। उनकी टी-शर्ट बड़ी थी, उनकी जाँघों तक थी। फिर उन्होंने अपने पैर फैलाये। मैंने देखा और समझ गया कि उन्होंने नीचे चड्डी या निक्कर नहीं पहनी थी।

फिर उन्होंने हल्के से टी-शर्ट को ऊपर करके अपनी चुत दिखायी और टी-शर्ट को अपने मम्मों के ऊपर कर लिया। वो अपने मम्मों को दबाने लगीं और चुत में उंगली डालने लगीं। वो अपनी गांड नीचे से उछाल उछाल कर अपनी उंगली अपनी चुत में डाल कर … और मम्मे दबाने लगीं।

ये करते वक्त वो मुझे कामुक नजर से देखने लगीं।

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फिर उन्होंने टी-शर्ट को और ऊपर कर लिया। अपनी उंगली अपनी चुत में डाल कर … गांड को आगे पीछे करके जोर जोर से हस्तमैथुन करने लगीं।

वो देख कर मेरे लंड में भी जोश आ गया। मैं भी नंगा होकर अपना लंड हिलाने लगा।

थोड़ी देर में अम्मा ने एक गाजर को निकाला और अपनी चुत में डालना शुरू कर दिया।

मैं भी अपना लंड जोर जोर से हिलाने लगा। ये करते वक्त हम एक दूसरे को कामुक नजरों से देख रहे थे।

फिर उन्होंने मूली अपनी चुत में डाली और अन्दर बाहर करने लगीं। मैं भी अपना लंड और जोर जोर से हिला कर उन्हें कामुक निगाहों से देखने लगा और वो भी कामुकता से मुझे देखने लगीं।

अब तो उन्होंने और भी बड़ा खीरा निकाला और उसे अपनी चुत में डालना शुरू कर दिया।

अम्मा ने गद्दे पर लेटे-लेटे ही अपना दाहिना हाथ बगल में रखे छोटे से टिफिन बॉक्स की ओर बढ़ाया। उन्होंने उसमें से एक बहुत मोटा और लंबा ताजा खीरा निकाला। वह खीरा करीब दस इंच लंबा और तीन इंच मोटा था। उसकी सतह चिकनी और हल्की नम थी। अम्मा ने उसे अपनी दोनों हथेलियों में पकड़कर थोड़ा सा मोड़ा। फिर उन्होंने अपनी जांघें और चौड़ी करके खीरे की नोक को अपनी सूजी हुई चूत की लबों पर रख दिया। उनकी चूत पहले से ही हस्तमैथुन के कारण गीली और चमक रही थी। खीरे की ठंडी नोक छूते ही अम्मा का पूरा शरीर एक हल्के झटके से कांप गया।

ये खीरा बहुत बड़ा था, वो उस खीरे को बड़ी नजाकत से चूत के अन्दर डाल रही थीं। अम्मा ने धीरे-धीरे दबाव डालना शुरू किया। खीरे की मोटी नोक उनकी चूत की बाहर वाली लबों को अलग करते हुए अंदर घुसने लगी। उनकी चूत की मांसपेशियां पहले तो थोड़ा सिकुड़ीं फिर धीरे-धीरे फैलने लगीं। खीरा अंदर जाता ही उनकी चूत से एक चिपचिपाती आवाज निकली। अम्मा की सांसें तेज हो गईं और उनके मुंह से हल्की-हल्की कराहटें निकलने लगीं। कुछ ही देर में इतना लंबा और मोटा खीरा अब उनकी चुत में पूरा घुस गया था।

अम्मा ने फिर से खीरा बाहर निकाला और फिर से पूरा अन्दर अपने चुत में डाला … साथ में मुझे कामुक नजर से देखने लगीं।

हर बार खीरा बाहर निकलते समय उनकी चूत की लाल-लाल लबें खीरे के साथ थोड़ी बाहर खिंच जाती थीं। फिर वे खीरे को जोर से अंदर धकेलतीं तो उनकी चूत पूरी तरह भर जाती और सफेद रस की मोटी धार खीरे के साथ बाहर बहने लगती। अम्मा की आंखें आधी बंद थीं लेकिन वे लगातार मेरी ओर कामुक नजरों से देख रही थीं। उनकी जीभ होंठों पर घूम रही थी। काफी देर तक ऐसा ही होता रहा। अम्मा पूरा खीरा अपनी चूत में अन्दर बाहर डाल रही थीं। मैं भी वो देख कर हैरान था कि इतना बड़ा खीरा अम्मा की चूत में कैसे अन्दर जा रहा है।

मैंने और जोर से अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया। मुझे अब अपनी उत्तेजना सहन नहीं हो रही थी, तो मैं झट से बेड से उतर कर जमीन में बिछायी हुई गद्दी पर आ गया।

मैं उनके ठीक बगल में घुटनों के बल बैठ गया। मेरी जांघें फैली हुई थीं और मेरा कड़क लंड मेरे हाथ में पूरी ताकत से फड़क रहा था। एक दूसरे को कामुक नजर से देखते हुए मैं अपना कड़क लंड हिला रहा था और अम्मा जोर जोर से खीरा चुत में डाल रही थीं। हम दोनों में अब हस्तमैथुन की मानो प्रतियोगिता सी हो रही थी।

मैं जितनी जोर से लंड हिलाता, वो उतनी ही तेजो खीरा को अपनी चुत में घुसा रही थीं। अम्मा की कमर ऊपर-नीचे उछल रही थी। हर बार खीरा अंदर घुसते ही उनकी चूत से फच-फच की तेज आवाज निकल रही थी। उनके मोटे मम्मे टी-शर्ट के अंदर हिल रहे थे और उनकी काली चूचियां कपड़े को तान रही थीं। अब हम एक दूसरे को उत्तेजित कामुक नजरों से देखते हुए हस्तमैथुन करने लगे थे।

फिर उन्होंने खीरा जोर से बाहर निकाला, इसके साथ ही उनकी चुत से पानी निकलना शुरू हो गया। तभी मेरे लंड ने भी वीर्य फेंकना शुरू कर दिया। उनकी चुत से पानी और मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छूट पड़ी।

अम्मा की चूत से एक जोरदार फव्वारा-सा छूटा। गर्म, चिपचिपा पानी उनके जांघों पर, गद्दे पर और मेरी जांघों पर भी छींटे मार रहा था। मेरे लंड से सफेद मोटी धारें फूट-फूटकर ऊपर उछल रही थीं और अम्मा के पेट, मम्मों और टी-शर्ट पर गिर रही थीं। दोनों की सांसें हांफ रही थीं। कमरे में चूत के रस और वीर्य की तीखी महक फैल गई थी।

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फिर हमने एक दूसरे को उत्तेजित कामुक नजरों से देखते हुए किस किया और लिपट कर एक दूसरे को गले लगा कर लेट गए।

अम्मा ने कहा- बेटे, आज से एक महीने तक हम खूब चुदाई करेंगे. तुम मुझे खूब चोदना. हमारा ये एक महीने यूं समझो कि अपना हनीमून है. मैं चाहती हूँ तू ये पूरा महीना मेरे लिए चुदाई के लिए रखे।

उनकी आंखों में गहरी प्यास और शरारत की चमक थी। अम्मा मेरे नंगे सीने से पूरी तरह चिपकी हुई थीं। उनकी भारी, गर्म मम्मे मेरी छाती पर दब रहे थे और हर सांस के साथ हल्के से ऊपर-नीचे हो रहे थे। उन्होंने मेरे कान के पास मुंह लगाकर गर्म, नम सांसें छोड़ते हुए ये बात कही। उनकी उंगलियां मेरी पीठ पर घूम रही थीं और उनकी मोटी जांघें मेरी जांघों के बीच फंस गई थीं। कमरे में हमारी देह की गर्मी और चूत-लंड के रस की महक फैली हुई थी।

मैंने भी कहा- हां अम्मा, हम इस महीने में खूब चुदाई करेंगे।

मेरे शब्द सुनकर अम्मा की चूत मेरी जांघ पर हल्के से सिकुड़ गई। उन्होंने मुस्कुराते हुए मेरे होंठों को जोर से चूमा और अपनी जीभ मेरे मुंह में घुसा दी।

उस महीने में अम्मा ने दुल्हन जैसी साड़ी भी पहनी और मैं शादी के हार भी लाया। पति पत्नी की नई शादी में जैसे उनकी सुहागरात होती है, हमने वैसे भी चुदाई की. उस महीने में मैंने अम्मा की खूब गांड मारी।

अम्मा ने लाल-लाल दुल्हन वाली साड़ी पहनी थी। उनका ब्लाउज बहुत गहरा कटा हुआ था जिससे उनके भारी मम्मे आधे बाहर झांक रहे थे। मैंने उनके गले में शादी का हार डाला। फिर हमने एक दूसरे को पति-पत्नी की तरह पूजा की। सुहागरात की रात हमने घंटों चुदाई की। मैंने पहले उनकी चूत को जीभ से चाटा, फिर अपनी उंगलियां अंदर डालीं। अम्मा कराह रही थीं और अपनी गांड ऊपर उठा-उठाकर मेरे मुंह से चिपका रही थीं। फिर मैंने उन्हें चारों तरफ से चोदा। उनके मम्मों को निचोड़ा, चूसा और काटा। उनकी गांड में लंड घुसाने से पहले मैंने साबुन और तेल लगाया। उनकी टाइट गांड धीरे-धीरे ढीली होती गई। मैंने पूरी रात उनकी गांड मारी। हर बार लंड अंदर घुसते ही अम्मा चिल्लातीं और मुझे और जोर से चोदने को कहतीं। महीने भर हम दिन में तीन-चार बार चुदाई करते। कभी बेड पर, कभी फर्श पर, कभी बाथरूम में खड़े-खड़े। मैंने उनकी गांड को इतना मारा कि वह पूरी तरह ढीली और लचीली हो गई। हर बार चुदाई के बाद उनकी चूत और गांड से मेरा वीर्य बहता रहता और अम्मा उसे अपनी उंगलियों से चाट-चाटकर पी जातीं।

फिर एक महीने के बाद हमारा सेक्स थोड़ा कम हुआ. अब हम हफ्ते में 3 बार चुदाई करते, लेकिन शनिवार की रात में पूरी रात सेक्स चलता।

शनिवार की रात हम नंगे ही बेड पर लेट जाते। पूरा कमरा अंधेरा होता लेकिन बाथरूम की हल्की लाइट जलती रहती। मैं अम्मा के मम्मों को चूसता, उनकी चूत को उंगलियों से चोदता और फिर लंड डालकर घंटों ठोकता। अम्मा मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसतीं और अपनी गांड मेरे मुंह पर रखकर रगड़तीं। पूरी रात हमारी कराहटें और चुटकने की आवाजें कमरे में गूंजती रहतीं।

अम्मा मुझे हफ्ते में 2 बार अपनी गांड मारने देतीं. हम एकदम पति पत्नी और गर्लफ्रेंड ब्वॉयफ्रेंड के जैसे रहने लगे।

थोड़े दिन के बाद मैंने सुना अम्मा किसी के साथ फोन पर बात कर रही थीं।

मैं बेड पर लेटा हुआ था। कमरे में दोपहर की हल्की उमस भरी थी। अचानक अम्मा की आवाज मेरे कान में पड़ी। वे रसोई के कोने में खड़ी फोन पर बात कर रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया था। उनके बड़े भारी मम्मे ब्लाउज के तंग कपड़े को तान रहे थे और हर सांस के साथ हल्के से लहरा रहे थे। उनकी आवाज में एक खास उत्साह और गुप्त योजना वाली मीठी-सी धुन थी जो मुझे तुरंत चौका गई।

अम्मा किसी से बोल रही थीं- अरे कोई बात नहीं … आप आओ एक हफ्ते के लिए … मैं सब सैट कर देती हूँ. आप चिंता मत करो, मैं जैसा बोलती हूँ, वैसा करो. मैं सब सैट कर देती हूँ।

अम्मा फोन पर धीमी लेकिन बहुत आत्मविश्वास भरी आवाज में बोल रही थीं। उनके होंठ मुस्कुराते हुए थोड़े-थोड़े खुल रहे थे। एक हाथ से वे अपनी साड़ी का पल्लू बार-बार ठीक कर रही थीं और दूसरे हाथ से फोन को कान से सटाए हुए थीं। उनकी आंखों में शरारत और उत्तेजना की चमक साफ दिख रही थी। वे बीच-बीच में अपनी जांघें हल्के से रगड़ रही थीं जैसे कि बात करते-करते ही उनके शरीर में गर्मी दौड़ रही हो।

वो किसी को बुला रही थीं, वो भी एक हफ्ते के लिए. ये जानकर मैं थोड़ा निराश हो गया था।

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मेरा दिल अचानक बैठ गया। हम दोनों का ये नया गुप्त रिश्ता अभी तरोताजा और बेहद गहरा था। हर रात हम एक-दूसरे से चिपककर चुदाई करते थे। अब किसी तीसरे व्यक्ति के आने की खबर सुनकर मेरे मन में जलन, निराशा और थोड़ी-सी जिज्ञासा का मिश्रण हो गया। मैं चुपचाप लेटा रहा। मेरे लंड में हल्का सा खिंचाव महसूस हुआ लेकिन मन भारी था।

फिर अम्मा थोड़ी देर के बाद फोन रख कर मेरे पास आके बैठ गईं।

उन्होंने कहा- बेटे एक बात करनी है. थोड़ी अजीब सी है … लेकिन तू ना मत बोलना।

मैंने कहा- कहो अम्मा क्या बात है?

अम्मा ने कहा- अपनी बड़ी बीजी चाची थोड़े दिनों के लिए एक हफ्ते के लिए हमारे घर रहने आने वाली हैं।

मैंने बोला- क्या अम्मा बुढ़िया को क्यों बुला रही हो?

अम्मा बोलीं- एक बात बताऊं, उसे भी सेक्स चाहिए, काफी सालों से उसके पति बीमार हैं, वो भी लंड की प्यासी हैं।

मैंने कहा- वो बड़ी हैं ना!

अम्मा ने कहा- हां वो 59 साल की हैं, लेकिन वो भी चुदक्कड़ हैं।

मैंने बोला- अच्छा वो कैसे?

अम्मा ने कहा- वो जब हमारे ससुर जी थे, तब उनसे सेक्स करती थीं. एक दो बार तो तेरे पापा ने भी … और उनके एक भाई ने भी उनको चोदा है. वो एक नंबर की चुदक्कड़ हैं, तुम्हें भी मजा आएगा. एक बात सुन, वो तुझे बराबर उत्तेजित करेंगी, तू नॉर्मल ही रहना. दूसरी बात उन्हें ऐसा सेक्स देना कि वो रो पड़ें. उन्होंने मुझे बहुत परेशान किया है. वो उस वक्त घर की बड़ी बहू थीं ना. एकदम सेठानी जैसी रहती थीं और मुझसे बहुत घर का काम करवाती थीं।

अम्मा के मुख से रिश्तों में चुदाई की बातें सुन कर मैंने भी कहा- ठीक है।

थोड़े ही दिनों में बड़ी बीजी घर आ गईं. अब तक तो सब नार्मल था।

फिर ऐसा हुआ कि एक दिन अम्मा ने कहा- मैं थोड़ी देर के लिए बाहर जा रही हूँ … मार्किट में होकर आती हूँ.

अम्मा ने ये कहते हुए अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया और दरवाजे की ओर बढ़ती हुई बीजी की ओर एक गुप्त अर्थपूर्ण इशारा किया। उनकी आंखों में शरारत और योजना की चमक साफ झलक रही थी। जाते-जाते उन्होंने बीजी को देखकर हल्के से मुस्कुराया और फिर मेरी ओर घूमकर आंख मारी। उनकी भारी गांड हर कदम पर लहराते हुए दरवाजे से बाहर निकल गई।

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जाते जाते उन्होंने बीजी से इशारा किया और कहा- इसका नहाना बाकी है … तुम दोनों नहा कर नाश्ता कर लेना.

अम्मा जाते जाते मुझे भी इशारा करके गईं.

फिर बीजी ने कहा- तुम नहा लो.

मैंने कहा- ठीक है.

मैं बाथरूम में गया, नहाते वक्त मैंने जानबूझ कर दरवाजा थोड़ा खुला रखा और मुठ मारने लगा. मुझे मालूम था बीजी देख रही हैं.

मैंने जानबूझकर दरवाजा आधा खुला छोड़ दिया। पानी की तेज धार मेरे नंगे शरीर पर गिर रही थी। मैंने अपना मोटा, सख्त लंड हाथ में पकड़ लिया और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगा। मेरी उंगलियां लंड की नसों पर दबाव डाल रही थीं। लंड की टिप पर पहले से ही पूर्व स्राव निकल रहा था जो पानी के साथ बह रहा था। मैं जानता था कि बीजी रसोई से या दरवाजे के पास खड़ी मुझे देख रही हैं। मेरी सांसें तेज हो गईं और मैं जानबूझकर जोर-जोर से हिलाने लगा ताकि वे साफ देख सकें।

तभी वो और एक बाल्टी लाईं- अरे ये थोड़ा पानी और ले ले.

मैं उठ कर उनके सामने नंगा खड़ा हो गया. मुझे नंगा मेरा लंड देख कर वो पागल हो गईं. वो वैसे ही खड़ी खड़ी मेरा लंड देख रही थीं.

बीजी बाल्टी लेकर अंदर आईं तो उनका मुंह खुला रह गया। मैं पूरी तरह नंगा, पानी से तर, लंड पूरी तरह खड़ा और फड़कता हुआ उनके सामने खड़ा था। उनकी आंखें मेरे लंड पर टिकी रह गईं। उन्होंने बाल्टी नीचे रखी और एक पल के लिए सांस रोक ली। उनकी साड़ी का पल्लू हल्का सा सरक गया था और उनके बड़े-बड़े मम्मे ब्लाउज से उभर रहे थे।

फिर मैंने उनका हाथ पकड़ा और बाथरूम में अन्दर कर लिया. उनका पल्लू निकाला और उनके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.

मैंने झट से उनका हाथ पकड़ा और उन्हें बाथरूम के अंदर खींच लिया। दरवाजा बंद करते ही मैंने उनका पल्लू खींचकर हटा दिया। उनके भारी, लटकते मम्मे ब्लाउज के कपड़े से बाहर झांक रहे थे। मैंने ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले और दोनों मम्मों को हाथों में भर लिया। वे बड़े, नरम और गर्म थे। मैंने जोर-जोर से दबाए, निचोड़े और उनकी काली मोटी चूचियों को मुंह में लेकर चूसा। बीजी की सांसें तेज हो गईं और वे हल्के से कराहने लगीं।

उनकी साड़ी ऊपर करके मैंने उनकी निक्कर निकाली और सीधा अपना लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया.

मैंने उनकी साड़ी कमर तक ऊपर उठाई और निक्कर को एक झटके में नीचे सरका दिया। उनकी चूत पहले से ही गीली और सूजी हुई थी। काले बालों वाला झाड़ साफ दिख रहा था। मैंने अपना मोटा लंड उनकी चूत की लबों पर रखा और एक जोरदार धक्का दिया। लंड पूरी तरह अंदर घुस गया। बीजी की चूत टाइट थी लेकिन गर्म और चिपचिपी थी। मैंने तेजी से ठोकना शुरू कर दिया। हर ठोके पर पानी की छप-छप की आवाज गूंज रही थी। उनकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी।

काफी वक्त तक हमारा सेक्स चला. बीजी ने कहा- मजा आ गया बेटे …

हम घंटों तक बाथरूम में चुदाई करते रहे। मैंने उन्हें दीवार से सटाकर, घुटनों पर बैठाकर और खड़े-खड़े चोदा। उनके मम्मों को निचोड़ते हुए मैंने उनकी गांड भी मारी। आखिर में जब मैंने उनका वीर्य उनके अंदर छोड़ा तो बीजी पूरी तरह कांप उठीं और चिल्लाईं- मजा आ गया बेटे …

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इसके बाद एक हफ्ता तक हम दोनों ने लगातार सेक्स किया. मैंने उनकी जम कर गांड मारी. फिर वो अपने गांव चली गईं.

उस पूरे हफ्ते हम दिन-रात चुदाई करते रहे। मैंने उनकी चूत, मुंह और गांड तीनों जगह लंड घुसाया। उनकी गांड को तेल लगाकर इतना मारा कि वह पूरी ढीली हो गई। हर रात वे मेरे लंड को चूसतीं और मैं उनकी चूत चाटता। फिर वो अपने गांव चली गईं।

थोड़े ही दिनों में उनका फिर फ़ोन आया. उन्होंने इस बार अपनी बेटी को भेजा. फिर मैंने उनके बेटी को पटा कर उसके साथ भी सेक्स किया. अब उनकी बेटी मेरी बीवी है.

आज मैं अपनी अम्मा, मेरी सासु माँ और मेरी उनकी बेटी, जो मेरी पत्नी है, उसे खूब चोदता हूँ.

जब भी सासु मां मतलब बीजी आती हैं, मेरे से जरूर चुदवाती हैं, लेकिन ये बात मेरी बीवी को आज भी पता नहीं है.

ऐसा हमारा फ़ैमिली सेक्स चल रहा है. रिश्तों में चुदाई की मेरी गर्म कहानी कैसे लगी?

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⚠️ महत्वपूर्ण अस्वीकरण

ये सभी कहानियाँ केवल काल्पनिक हैं।
इनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं है।

सेक्स हमेशा सहमति पर आधारित होना चाहिए।
बिना सहमति के कोई भी कार्य गलत और दंडनीय है।

इन कहानियों से प्रेरित न हों।
बस पढ़ें, आनंद लें और भूल जाएं।