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दो पीढ़ी की चूत एक साथ चुदाई

Maa Beti ki ek sath chudai sex story: हाई दोस्तों मेरा नाम शेखर हैं और मैं आज आप को एक ऐसी कहानी बताने जा रहा हूँ जिसमे मैंने अपनी गर्लफ्रेंड और उसकी माँ को एक साथ चोदा था।

मेरी गर्लफ्रेंड का नाम रुतुजा हैं और वो 19 साल की हैं। यह बात 6 महीने पहले की हैं। मैं मलेशिया घुमने गया था और उसके लिए गिफ्ट ले के आया था।

मैं रुतुजा के लिए मस्त लिंगरी ले के आया था। वैसे मैं दो सेट ले के आया था, एक रुतुजा के लिए और एक आरती के लिए जो मेरी दूसरी गर्लफ्रेंड हैं। लेकिन आरती तब बाहर गई थी इसलिए मैंने उसे संभाल के रख दिया।

रुतुजा की मॉम एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हैं और उसके डैड आईसीआईसीआई बैंक में काम करते हैं। दोनों सुबह 9 बजे घर से निकल जाते हैं। और फिर वो शाम को 7 बजे से पहले वापस नहीं आते हैं।

इस समय के अंदर मैं रुतुजा को हफ्ते में कम से कम 3 बार चोदता हूँ।

मलेशिया से वापस आकर मैं दूसरे दिन 10 बजे उसके घर गया। घंटी बजाते ही उसने दरवाजा खोला।

मैंने उसे वहीं दरवाजे पर पकड़ के स्मूच कर लिया। उसके हाथ मेरी कमर में थे और मैं उसकी गाँड दबाते हुए उसे गहरा किस करता रहा।

किस करते हुए ही मैं अंदर घुसा और दरवाजे को लात मारकर बंद कर दिया। उसे मैं सीधा उसके बेडरूम में ले गया और बेड पर फेंक दिया।

उसकी जींस और टॉप को खींचकर फेंक दिया। अंदर उसने कुछ भी नहीं पहना हुआ था। उसकी नंगी चूत पहले से ही हल्की गीली दिख रही थी।

मैंने अपनी बैग से उसकी लिंगरी निकालकर दी और पहनने को कहा। वो उस मस्त नई लिंगरी को देखकर बहुत खुश हो गई।

उसने मेरे सामने ही ब्रा और पैंटी पहन ली। काली लेस वाली ब्रा उसके गोल स्तनों को अच्छे से सहारा दे रही थी। पैंटी उसकी चूत की लाइन को साफ उभार रही थी।

मैंने अपने आईफोन से उसकी कुछ फोटो लीं। फ्लैश की रोशनी में उसकी त्वचा चमक रही थी। फिर मैंने उसे नंगा कर दिया।

उसने भी मेरे सारे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड एक अरसे के बाद देखकर वो बहुत खुश लग रही थी। उसकी आँखें चौड़ी हो गईं और होंठों पर मुस्कान खिल गई।

रुतुजा मेरा लंड चूसने लगी। उसने पहले लंड के सिरे को अपनी गर्म जीभ से चाटा। फिर धीरे-धीरे पूरा मुँह में ले लिया।

उसके नम और गर्म मुँह की सनसनी मेरे पूरे शरीर में फैल गई। मैंने 69 पोजीशन बनाकर उसकी चूत को चाटना शुरू किया।

मेरी जीभ उसकी क्लिटोरिस पर घूम रही थी। उसके मीठे-खारे रस का स्वाद मेरी जीभ पर फैल रहा था। वो जोर-जोर से कराह रही थी।

मेरा लंड और गहराई तक मुंह में ले रही थी। उसकी गाँड मेरे चेहरे पर दब रही थी। सब मस्त चल रहा था कि धम से दरवाजा खुला।

बाप रे! रुतुजा की मॉम वहाँ खड़ी थी। रुतुजा उसे देखकर काँपने लगी और चादर खींचकर अपने बदन को ढकने लगी।

आंटी: यह क्या अनर्थ कर रहे हो तुम लोग मेरे घर में, यह उम्र है तुम्हारी यह सब करने की।

रुतुजा: सोरी मोम, प्लीज प्लीज प्लीज्ज्ज…!

मैं: सोरी आंटी, आगे से नहीं होगा ऐसा कुछ भी।

आंटी: रुक मैं अभी तेरे डैड को बुलाती हूँ।

रुतुजा रोने लगी और मेरी भी गांड फटकर हाथ में आ गई।

हम दोनों ही नंगे उठे और आंटी के हाथ पकड़ लिए।

रुतुजा: मोम नहीं करेंगे कुछ भी प्लीज माफ कर दो। सोरी।

आंटी: तुम लोग कब से कर रहे हो यह सब।

मैं: आंटी नहीं करेंगे ऐसा कुछ भी आगे से प्लीज जाने दो मुझे।

आंटी: मैं जो कहा उसका जवाब दो पहले, कब से चल रहा है यह सब।

मैं: आंटी 6 महीने से!

आंटी: और कितनी बार कर चुके हो?

मैं: हफ्ते में 3 बार।

आंटी: तुम्हारे घर में पता है यह सब?

मैं: नहीं, वो इतना जानते हैं कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड है।

आंटी: तुम्हारे घर वाले कुछ नहीं कहते?

मैं: नहीं।

और इतना कहते ही आंटी ने अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया। मैंने चौंककर रुतुजा के सामने देखा। वो जोर-जोर से हंसने लगी।

क्यूँ शेखर डर गए ना। मोम तुम्हे लाइक करती हैं और उसे कब से पता है कि हम फिजिकल रिलेशन में हैं। वो कब से तुम्हे मिलना चाहती थी और मैंने ऐसे ही मिलवाने का प्लान बनाया था।

आंटी: सच में अच्छी पसंद है मेरी बेटी की, शेखर मैं तुम्हे पहले दिन से ही पसंद करती हूँ।

यह कहते हुए आंटी मेरा लौड़ा सहला रही थी। उनकी गर्म उँगलियाँ मेरे लंड की पूरी लंबाई पर ऊपर-नीचे घूम रही थीं। मुझे भी मस्त लग रहा था कि माँ वो लंड सहला रही थी जो अभी बेटी के थूक से चिकना और गीला हुआ था। आंटी ने झुककर पूरा लंड मुँह में भर लिया। उनके गर्म, नम होंठ मेरे लंड के सिरे को कसकर दबा रहे थे। वो जोर-जोर से चूसने लगीं। उनकी जीभ लंड के नीचे की नसों पर घूम रही थी।

रुतुजा को मैंने उठाकर अपने पास खींच लिया। हम दोनों गहरे किस करने लगे। रुतुजा बड़े ही सेक्सी तरीके से मुझे चूम रही थी। उसकी गर्म जीभ मेरे मुँह में घुस रही थी। मैं उसे जोर से स्मूच कर रहा था। हमारे मुँह से चप-चप की आवाजें निकल रही थीं।

नीचे आंटी मेरे लंड और अंडकोषों को बड़े प्यार से चूस रही थीं। उनकी जीभ मेरे बॉल्स को अलग-अलग चाट रही थी। मेरा लंड पूरा तना हुआ और सख्त हो चुका था। उसे किसी भी चूत की गुफा में घुसने का बड़ा मन कर रहा था।

मैंने रुतुजा को बेड पर लिटा दिया। आंटी के मुँह से लंड निकालकर मैं रुतुजा की टांगों के बीच जा बैठा। आंटी अब खड़ी हो गईं। उन्होंने अपनी कुर्ती और जींस निकाल दी। वो लाल ब्रा और सफेद पैंटी में बेहद आकर्षक लग रही थीं। उनकी मोटी जांघें और भारी स्तन देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया।

मैंने हाथ आगे बढ़ाकर आंटी के बूब्स पकड़ लिए। वे नरम और भारी थे। आंटी ने ब्रा की हुक खोली और फिर पैंटी भी उतार दी। उनकी चूत पर घने काले बाल थे। इधर रुतुजा ने मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के ऊपर घिसना शुरू कर दिया। उसकी छोटी, चिकनी और गीली चूत पर लंड रगड़ते ही मुझे बेहद मजा आने लगा।

आंटी की खुली चूत और घने बाल देखकर मैं खुद को रोक नहीं पाया। मेरा हाथ सीधा उनकी चूत पर गया। मैंने उनकी गीली फाँकों को रगड़ना शुरू किया। आंटी ने मेरे हाथ को अपने हाथ से दबाया। मैंने एक उँगली उनकी चूत में डाल दी। अंदर बहुत गर्मी और नमी थी।

रुतुजा ने लंड का सिरा अपने चूत के छेद पर रखा। मुझे अपने लंड के मुंह पर गर्माहट महसूस हुई। मैंने हल्का झटका दिया। लंड उसकी चूत में आधा घुस गया। रुतुजा के मुँह से आह निकल पड़ी। उसकी आँखें बंद हो गईं।

मैंने आंटी की चूत को छोड़कर रुतुजा को बाहों में उठा लिया। उसे उठाते ही मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुस गया। रुतुजा की जवान, टाइट चूत मेरे मोटे लंड को कसकर दबा रही थी। मैं उसे चोदते हुए वापस आंटी की ओर मुड़ा।

आंटी अपनी चूत सहला रही थीं। मैंने उनका हाथ हटाकर खुद अपनी उँगलियाँ उनकी चूत में डाल दीं। आंटी दोनों हाथों से अपने बूब्स मसलने लगीं। वो अपनी निप्पल्स को जोर से दबा रही थीं। जैसे उनमें से दूध निकालना चाह रही हों। आंटी जोर-जोर से कराह रही थीं।

वे मुझे और रुतुजा को चुदाई करते हुए देख रही थीं। रुतुजा की गाँड मेरी जांघों पर थी। वो उछल-उछलकर मुझसे चुदवा रही थी। मेरा लंड उसकी छोटी चूत को मस्त पेल रहा था।

तभी आंटी बेड पर चढ़ गईं और उन्होंने अपनी बालों वाली चूत को मेरे मुँह के ठीक सामने रख दिया।

मैंने अपनी जीभ बाहर निकालकर उस गर्म और घनी चूत को चाटना शुरू किया। आंटी ने अपने कूल्हों को आगे करके मेरे माथे को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया। उनकी गीली फाँकें मेरे होंठों और नाक पर रगड़ रही थीं। मैं अपनी जीभ को उनकी क्लिटोरिस पर तेजी से घुमा रहा था। आंटी पूरा मजा लेते हुए जोर-जोर से कराह रही थीं।

रुतुजा अब और भी जोर-जोर से मेरे लंड के ऊपर उछलने लगी। वो अपनी छोटी चूत को मेरे मोटे लंड पर तेजी से ऊपर-नीचे कर रही थी। उसने जोर से कहा, “और जोर से चोदो मुझे शेखर!” मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है।

मैंने उसे कसकर अपनी बाहों में भर लिया और जोर-जोर से अपना लंड उसकी चूत में ठोकने लगा। रुतुजा के मुँह से लगातार “आह आह आह आह” की आवाजें निकल पड़ीं। उसकी पूरी बॉडी काँप उठी और वो मेरे लंड के ऊपर ही झड़ गई। उसका गर्म पानी मेरे लंड पर बह निकला।

रुतुजा अब शांत होकर लेट गई थी और हिलना बंद कर चुकी थी। मैंने आंटी की गाँड पर हाथ रखकर उन्हें अपनी ओर खींच लिया। आंटी ने यह देखा तो रुतुजा को कंधे से पकड़कर उठा दिया। मेरा लंड अभी भी पूरी तरह खड़ा छत की ओर ताक रहा था।

आंटी ने अपनी चूत को हाथों से फैलाया और मेरे खड़े लंड के ऊपर बैठ गईं। उनकी चूत में मेरा लंड ऐसे घुसा जैसे मक्खन में छुरी। बहुत गर्म, बहुत गीली और ढीली-ढीली थी उनकी चूत। आंटी अपनी गोल-मटोल गाँड को ऊपर-नीचे करके मेरे लंड का पूरा मजा लेने लगीं।

मैंने इससे पहले कभी इतनी उम्र की औरत को नहीं चोदा था, इसलिए मुझे भी अलग ही मजा आ रहा था। आंटी के हाथ मेरी छाती पर थे। वो पीछे झुककर अपने कूल्हों को तेजी से उठा-उठाकर मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर मसल रही थीं।

तभी रुतुजा की चूत फिर से मस्ती में आ गई। वो मेरे मुँह के ऊपर आकर बैठ गई। मैं उसकी चूत को चाटने लगा। बड़ा मस्त सीन था वो – माँ चूत चुदवा रही थी और बेटी अपनी चूत चुसवा रही थी।

मैंने रुतुजा की चूत और गाँड के छेद को जोर-जोर से अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। गाँड चाटते ही वो जैसे मदमस्त हो गई। उसके मुँह से लगातार “आह आह” निकलने लगे।

उधर उसकी माँ अभी भी जोर-जोर से अपनी गाँड उठाकर चुदाई का मजा ले रही थीं। मेरा लंड फच-फच की आवाज के साथ आंटी की चूत में घुस-घुसकर बाहर आ रहा था।

रुतुजा की चूत फिर से गीली हो चुकी थी। वो भी चुदने के लिए बेताब हो गई। मैंने आंटी की चूत से अपना लंड निकाला। आंटी उठकर खड़ी हो गईं।

मैं: एक काम करो आप दोनों ही उलटी हो जाओ बेड में, मैं दोनों को बारी-बारी चोदूंगा।

आंटी हंस पड़ीं और बोलीं, “रुतुजा तेरा बॉयफ्रेंड तो सच में बड़ा चोदू है।”

रुतुजा हँसते हुए बेड पर उलटी लेट गई। आंटी भी उसे देखकर उलटी हो गईं।

मैंने अब अपना लंड रुतुजा की चूत में डाला और आंटी की गाँड को सहलाने लगा। आंटी अपनी चूत में उँगली डालकर अपनी बेटी की चुदाई देख रही थीं।

रुतुजा अपनी गाँड हिलाकर मुझे धक्के देने लगी। मैंने धीरे से अपनी उँगली आंटी की गाँड में डाल दी। आंटी ने मेरी ओर देखा और आँख मारी।

मैं आंटी की गाँड में जोर-जोर से उँगली करने लगा और उतने ही जोर से रुतुजा की चूत को चोदने लगा। रुतुजा के मुँह से “आह आह आह” निकल रहा था। वो अपनी गाँड हिला-हिलाकर चुदवा रही थी।

आंटी के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगीं क्योंकि उसके दोनों छेद में लुत्फ आ रहा था। तभी रुतुजा फिर से झड़ गई। उसका गर्म पानी मेरे लंड पर छूटा और मैंने फट से अपना लंड निकाल लिया।

अब मैं आंटी के पीछे गया और उसकी चूत की जगह गाँड में लंड देने का प्रयास किया। आंटी की गाँड बहुत टाइट थी।

उसने अपनी उँगली पर थूक लिया, मेरे लंड को अच्छे से गीला किया और फिर उसे गाँड के छेद पर सेट कर दिया। मैंने एक जोरदार झटका दिया। मेरा लंड उनकी गाँड में घुस गया।

आंटी अपनी चूत को हाथ से घिसती रही और मैं उछल-उछलकर उनकी गाँड को ठोकता रहा। आंटी के मुँह से “आह आह आह” निकलने लगा और वो अपनी चूत को और भी जोर से उँगली करने लगीं।

आंटी की गांड पूरी पांच मिनिट मारी और तभी मेरे लंड ने अपनी मलाई निकाल दी।

मैंने अपनी कमर को जोर से आगे धकेला। मेरा लंड आंटी की टाइट गाँड के अंदर गहराई तक धँस गया। पूरी पाँच मिनट तक मैं लगातार तेज-तेज ठोके लगाता रहा। हर धक्के पर उनकी गोल-मटोल गाँड मेरी जांघों से टकराकर फच-फच की आवाज कर रही थी। आंटी जोर-जोर से कराह रही थीं और अपनी चूत को हाथ से रगड़ रही थीं।

तभी मेरे लंड में जोर का झटका लगा। मेरा पूरा शरीर तन गया। गर्म वीर्य की पहली फुहार आंटी की गाँड के अंदर छूट गई। उसके बाद एक के बाद एक कई धारें निकलीं। सारा का सारा गाढ़ा वीर्य मैंने उनकी गाँड में ही उड़ेल दिया। आंटी की गाँड मेरे लंड को कसकर दबा रही थी।

आंटी ने धीरे से उठकर मेरा लंड अपनी गाँड से बाहर निकाला। गर्म वीर्य उनकी गाँड से बाहर रिसने लगा। दोनों माँ-बेटी तुरंत मेरे लंड के पास आ गईं। रुतुजा और आंटी दोनों ने मिलकर उसे चाटना शुरू कर दिया।

उनकी गर्म जीभ मेरे लंड की पूरी लंबाई पर ऊपर-नीचे घूम रही थी। वे दोनों मेरे लंड के सिरे को बारी-बारी चूस रही थीं। आंटी ने गाढ़ा वीर्य चाटकर निगल लिया जबकि रुतुजा मेरे अंडकोषों को चूस रही थी। दोनों ने मिलकर मेरा लंड पूरी तरह साफ कर दिया।

फिर हम सभी ने कपड़े पहन लिए। आंटी ने मुझे बताया कि वो जल्द ही मेरे माँ-बाप से मिलकर मेरी और रुतुजा की शादी की बात करेंगी।

और फिर उसने आँख मारकर कहा, “मेरे जमाई बनके मुझे मजे देते रहना।” मैंने हँसकर आंटी को किस कर लिया।

शादी के लिए तो मेरी मोम ने मना कर दिया लेकिन आंटी मुझसे चुदने से बाज नहीं आई हैं। अभी भी मैं हर हफ्ते रुतुजा को तीन बार चोदता हूँ और आंटी हर दो हफ्ते में एक बार छुट्टी लेकर मुझसे चुदने का इंतजाम कर लेती हैं….!

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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