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दो महीने की सेक्स भूख मिटाई बड़ी साली ने – 1

Jija sali chudai sex story, Badi sali ki chut sex story: सभी प्यासी चूतों और खड़े लवड़ों को मेरा नमस्कार। मेरा नाम धीरज है। मैं अजमेर का रहने वाला हूँ। मैं शादीशुदा हूँ। मेरी शादी को दस साल हो गए हैं। मेरी पत्नी तनीषा (तनु) मुझसे बहुत प्यार करती है। मैं भी उसे बहुत चाहता हूँ। मेरा एक लड़का सात साल का है और दूसरा लड़का अभी एक साल का है।

मेरी पत्नी की एक बड़ी बहन है अंजलि। क्या बताऊँ दोस्तों, वो चालीस की उम्र में भी कयामत लगती है। उसकी खूबसूरती के सामने तो बड़ी से बड़ी हीरोइन भी पानी भरें। जो भी उसे बस देख ले, मेरी गारंटी वो बस उसका दीवाना हो जाए।

उसकी शादी को पंद्रह साल हो गए हैं। उसका पति इंजीनियर की पोस्ट पर है। उसकी दो लड़कियाँ हैं।

वो कहते हैं न कि जिस चीज को कोई अगर सच्चे दिल से चाहे, तो कायनात भी उसे मिलाने की कोशिश करती है। मैं अपनी बड़ी साली को बहुत चाहता था। वो मेरे दिलो-दिमाग में उतर चुकी थी।

उसका आकर्षक चमचमाता चेहरा, कसा हुआ बदन, भूरी आँखें, लंबा कद। मुझे इतना अधिक पसंद था कि मैं अपनी पत्नी को जब भी चोदता तो अंजलि समझ कर ही चोदता था।

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मेरी पत्नी तनु और अंजलि की शक्ल लगभग मिलती-जुलती थी। पर मेरी पत्नी की हाइट उससे थोड़ी छोटी थी। मेरी पत्नी तो घर की दाल है। उसे तो जब चाहे चोद लेता हूँ। पर मुझे अंजलि की चूत चाहिए थी। मैं उसे भी चखना चाहता था।

मेरे ससुराल में मेरे सास ससुर, एक साला और साले की पत्नी रहते हैं।

बात एक साल पुरानी है। जब तनु प्रेग्नेंट थी। मेरी पारिवारिक समस्या के चलते मैंने उसे पीहर भेज दिया था। तनु को नौवां महीना लग गया था। डेलिवरी को दो-तीन दिन ही बचे थे।

तभी मैं भी ससुराल भीलवाड़ा पहुँच गया।

उन दिनों मेरी साली भी वहाँ दस दिनों से पहुँची हुई थी। साली अपनी दूसरी बच्ची जो कि दो साल की थी, उसके साथ वहीं थी।

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तभी अचानक एक घटना हुई। मेरे साले के ससुर भगवान को प्यारे हो गए। अब मेरे सास ससुर और साला और उसकी पत्नी को साले की ससुराल पुष्कर जाना पड़ा। जो मेरे शहर अजमेर के पास है।

मेरे नहीं जाने के कारण अजमेर से मेरे पापा और मम्मी उनके साथ चले गए। अब यहाँ सिर्फ मैं, मेरी प्रेग्नेंट पत्नी तनु, मेरी बड़ी साली अंजलि और उसकी छोटी लड़की नेहा ही थे। मेरा लौड़ा पिछले कई दिनों से बेचैन था, बस चूत की तलब में तड़प रहा था।

मेरी साली अंजलि जब भी मेरे आस-पास आती, मेरी नजरें खुद-ब-खुद उसके शरीर पर टिक जातीं। उसका 34-28-34 का शानदार फिगर देखकर मन में आग लग जाती। गोरा रंग, भरे हुए स्तन, पतली कमर और चौड़े नितंब… हर अंग अपनी जगह पर इतना परफेक्ट था कि नजर हटाना मुश्किल हो जाता। मेरी पत्नी तनु प्रेग्नेंट होने की वजह से पिछले दो महीनों से मेरे साथ कोई शारीरिक संबंध नहीं बना पाई थी। मैं दो महीने से पूरी तरह से भूखा था, सेक्स की भूख ने मुझे बिल्कुल बेकाबू कर रखा था। मुझे बस एक गर्म, तंग और गीली चूत चाहिए थी और वह मेरे ही घर में, मेरे इतने करीब थी।

उस दिन मेरा लौड़ा सुबह से ही फड़क रहा था। अंजलि जब भी मेरे सामने से गुजरती, बात करती या हंसती, मेरा लंड अजगर की तरह फूलकर जींस को फाड़ने की कोशिश करता। दिन भर मैं यही सोचता रहा कि इसे कैसे पटाया जाए, कैसे इसकी इच्छा जगा कर अपनी भूख मिटाई जाए। पर उसकी तरफ से कोई खास इशारा नहीं मिला। यह तो साफ था कि उसे पता है मैं उसे कितना चाहता हूं, फिर भी वह भाव नहीं दे रही थी, जैसे जानबूझकर मुझे तड़पा रही हो।

रात हो गई। कमरे में जमीन पर तीन बिस्तर बिछाए गए थे। पहले तनु का, फिर नेहा का और आखिर में अंजलि का। बिस्तरों के पास में एक सोफा पड़ा था। मैं उस पर लेट गया और मोबाइल में गेम खेलने का नाटक करने लगा। रात के करीब एक बज चुके थे। दोनों बहनें गहरी नींद में सो चुकी थीं।

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तभी मेरी नजर सामने की दीवार पर लगी फोटो फ्रेम के कांच पर पड़ी। उस कांच में अंजलि का चेहरा साफ दिख रहा था। मैंने देखा कि वह जाग रही है। वह धीरे-धीरे अपनी गर्दन घुमा कर यह देखने की कोशिश कर रही थी कि मैं मोबाइल में क्या देख रहा हूं।

उसी पल मेरे कामुक दिमाग में एक शरारती आइडिया कौंधा। मैंने तुरंत मोबाइल में एक ब्लू-फिल्म चला दी। स्क्रीन पर एक गोरा अंग्रेज किसी लड़की को जबरदस्त तरीके से चोद रहा था। जोर-जोर से धक्के मार रहा था, लड़की की चीखें और सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। मैंने धीमी आवाज में वॉल्यूम रखा ताकि तनु को पता न चले, लेकिन अंजलि जरूर सुन और देख सके।

दस मिनट तक मैंने कई सेक्सी क्लिप्स लगातार चलाईं। कभी डॉगी स्टाइल में जोरदार ठुकाई, कभी लड़की ऊपर बैठकर लंड पर उछल रही थी, कभी मुंह में लेकर चूस रही थी। मैं मोबाइल की स्क्रीन देखने के बजाय कांच में अंजलि को देख रहा था। उसे पता नहीं था कि मैं उसे देख रहा हूं।

धीरे-धीरे मुझे लगा कि अंजलि की सांसें तेज हो रही हैं। उसने चादर के नीचे अपने पैर हल्के से रगड़े। उसकी छाती तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी। वह करवट लेकर लेट गई, लेकिन उसकी आंखें बंद नहीं हुईं। कांच में साफ दिख रहा था कि वह बार-बार अपनी जीभ से होंठों को गीला कर रही है। उसने एक हाथ चादर के नीचे अपनी जांघों के बीच ले जाकर हल्के से दबाया। उसकी उंगलियां धीरे-धीरे हिल रही थीं।

मुझे अब पक्का यकीन हो गया था कि वह गर्म हो चुकी है। उसकी सांसें भारी थीं, होंठ सूख रहे थे और शरीर में कंपकंपी सी आ रही थी। मेरा लौड़ा भी पूरी तरह खड़ा होकर फटने को तैयार था। मुझे लगने लगा कि आज रात मेरे लौड़े की प्यास जरूर बुझेगी।

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फिर मैंने अपने मोबाइल में नोट ऐप खोल लिया और तेजी से टाइप करना शुरू कर दिया। मेरे हाथ कांप रहे थे, लेकिन शब्द बह रहे थे। मैंने लिखा:

“मैं जानता हूं कि तुम जाग रही हो। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं। तुम्हें बहुत चाहता हूं। मैं यह भी जानता हूं कि तुम मेरी इस चाहत से अनजान नहीं हो। मैं तुम्हारा दीवाना हो चुका हूं। मैं तुम्हें पाना चाहता हूं। मैं अभी बाहर जा रहा हूं। अगर तुम भी मुझसे प्यार चाहती हो, अगर तुम भी मेरी तरह तड़प रही हो, तो बाहर आ जाओ।”

यह नोट लिखते ही मैंने तस्वीर के कांच में देखा। अंजलि अब पूरी तरह जाग चुकी थी। उसकी आंखें मेरे मोबाइल की स्क्रीन पर टिकी हुई थीं। वह ध्यान से देख रही थी कि मैं क्या लिख रहा हूं, जैसे हर शब्द को पढ़ रही हो। उसकी सांसें तेज थीं, होंठ हल्के से कांप रहे थे।

मैंने धीरे से सोफे से उठकर मोबाइल को उसी जगह पर रख दिया, जहां वह आसानी से पहुंच सके। फिर बिना किसी आवाज के कमरे से बाहर निकल गया और बाथरूम की ओर बढ़ गया। मन ही मन मैं खुशी से झूम रहा था। लग रहा था कि आज रात जन्नत मेरे हाथ लगने वाली है। मेरा लौड़ा पहले से ही पूरी तरह कड़क हो चुका था। इंतजार की आग में वह और भी फूलकर अजगर जैसा बन गया था, पायजामा फाड़ने को तैयार।

दस मिनट बीत गए। बाथरूम के बाहर मैं खड़ा रहा, दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। लेकिन अंजलि नहीं आई। हर सेकंड मेरी उम्मीद टूटती जा रही थी। मेरा दिमाग खराब होने लगा। क्या वह सच में सो गई? क्या उसने नोट पढ़ा ही नहीं? या फिर उसने मुझे ठुकरा दिया?

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मैं बर्दाश्त नहीं कर सका। तेजी से अंदर लौटा। कमरे में अंधेरा था, लेकिन चांदनी से सब साफ दिख रहा था। अंजलि बिस्तर पर लेटी हुई थी, आंखें बंद, जैसे गहरी नींद में हो। मेरे दिल के सारे अरमान एक झटके में टूट गए। आंसू आंखों में भर आए। अब मैं क्या करूं? उसका रेप तो मैं कर ही नहीं सकता था। वह मेरी पत्नी की बहन है, मेरी साली है। जबरदस्ती करने का मतलब था घर की इज्जत की मां चुद जाए। सब कुछ बर्बाद हो जाए।

मैं धीरे से सोफे के पास आया। नजर मोबाइल पर पड़ी। जहां मैंने उसे रखा था, वहां से वह एक इंच आगे सरका हुआ था। साफ पता चल गया कि अंजलि ने उसे उठाया था। उसने मेरा लिखा नोट पढ़ा था।

तभी अचानक अंजलि बिस्तर से उठी। उसने चादर हटाई और बिना मुझे देखे, बिना एक शब्द बोले, कमरे से बाहर चली गई। मुझे लगा जैसे वह मुझे जानबूझकर अनदेखा कर रही हो।

मैंने फौरन मोबाइल उठाया। मेरे नोट के ठीक नीचे एक नया मैसेज लिखा था, सिर्फ दो अक्षर:

‘वेट..’

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यानी इंतजार करो।

इतना पढ़ते ही मेरी सारी मायूसी गायब हो गई। मेरा लौड़ा फिर से पूरी ताकत से खड़ा हो गया, अजगर की तरह फड़कने लगा। मैंने जल्दी से पायजामा में उसे सेट किया, सांस संभाली और बाहर की ओर बढ़ा।

बाहर देखा तो अंजलि कहीं नहीं थी। न बरामदे में, न बाथरूम की तरफ। मैं थोड़ा हैरान हुआ। फिर ऊपर की मंजिल की ओर नजर उठाई। सीढ़ियों के ऊपर, बालकनी में वह खड़ी थी। चांदनी में उसका चेहरा साफ दिख रहा था। उसने मुझे देखा। उसके चेहरे पर गुस्सा था, आंखों में आग थी। फिर उसने एक उंगली उठाकर मुझे इशारा किया – ऊपर आ जाओ।

मैं यह देखकर डर गया। उसके चेहरे पर जो गुस्सा था, वह साफ दिख रहा था। दिल की धड़कनें तेज हो गईं। मैं धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़कर ऊपर पहुंचा। वह बालकनी में खड़ी थी, आंखों में आग लिए। जैसे ही मैं उसके सामने पहुंचा, उसने तीखी आवाज में कहा,

“मैं आपको क्या समझती थी और आप क्या निकले? मैं तनु की बड़ी बहन हूं। मतलब आपकी भी बहन ही लगती हूं। और आप मुझ पर नियत खराब किए हुए हैं? आपने अपने मोबाइल में क्या लिखा है? कि आप मुझे चाहते हैं और मैं भी आपको चाहती हूं? ये किसने कहा आपसे कि मैं आपको पसंद करती हूं? आपको शर्म नहीं आती?”

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वह लगातार बोलती जा रही थी, एक के बाद एक शब्द तीर की तरह चुभ रहे थे। मैं कुछ बोल नहीं पा रहा था। उसकी आवाज तेज होती जा रही थी। डर था कि तनु या नेहा जाग न जाएं। मैंने फौरन उसके मुंह पर हाथ रख दिया, उसका मुंह बंद कर दिया और धीमी लेकिन सख्त आवाज में कहा,

“मेरी बात तो सुन लो!”

उसने मेरे हाथ को झटककर हटाया और गुस्से में बोली,

“कहो… क्या कहना चाहते हो?”

मैंने गहरी सांस ली, हिम्मत इकट्ठी की और सीधे उसकी आंखों में देखकर कहा,

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“मैं तुम्हें बहुत चाहता हूं। आज तुम पहली बार मेरे इतने पास में हो। जी करता है तुम्हारे इस खूबसूरत चेहरे को चूम-चूमकर खा जाऊं। इन उठे हुए, भरे हुए बोबों को हाथों में भरकर निचोड़ लूं, दबा-दबाकर दूध निकाल लूं। और फिर तुम्हें अपने लंड पर बिठाकर पूरी रात चोदूं, तुम्हें आसमान की सैर कराऊं, तुम्हारी चूत को इतना पेलूं कि तुम मेरे नाम की सिसकारियां भरती रहो।”

मेरे मुंह से इतना खुल्लम-खुल्ला सुनते ही अंजलि सकपका गई। उसकी आंखें फैल गईं, गाल लाल हो गए। वह कुछ बोल नहीं पाई। उसी पल मैंने उसे दोनों हाथों से पकड़ा, अपनी ओर खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ मेरी जीभ से टकराई। कुछ सेकंड के लिए वह स्तब्ध रह गई। फिर अचानक उसने मुझे जोर से धक्का मारा और चिल्लाई,

“अनहैंड मी! आने दो पापा को। मैं सबको बताऊंगी कि तुमने मेरे साथ क्या किया!”

मैंने उसकी बांह पकड़ ली और शांत लेकिन धमकी भरे लहजे में कहा,

“क्या कहोगी? जो कहना है कह देना। मुझसे ज्यादा तुम्हारी बदनामी होगी। इसके बाद तुम दोनों बहनें न कभी मिल पाओगी, न बात कर पाओगी। और मेरी मर्जी, मैं अपने मोबाइल में कुछ भी कर लूं। तुमने क्यों देखा मेरा नोट? और ‘वेट’ क्यों लिखा? वो भी मैं सबको बताऊंगा।”

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इतना कहते ही अंजलि का चेहरा सफेद पड़ गया। वह फटाक से मुड़ी और तेजी से नीचे चली गई। मैं वहीं खड़ा रह गया। पैर जम गए। मन में हजार सवाल घूम रहे थे। अगर इसने तनु को बता दिया तो? घर टूट जाएगा। सब कुछ बर्बाद हो जाएगा।

पंद्रह मिनट बाद जब मैं हिम्मत करके नीचे कमरे में गया, तो अंजलि अपनी जगह पर बिस्तर पर बैठी हुई थी। तनु गहरी नींद में सो रही थी। नेहा भी सोई हुई थी। मैंने राहत की सांस ली। अब तक तो कुछ नहीं हुआ। बच गए।

तभी अंजलि ने मुझे देखा। वहीं बैठे-बैठे उसने आंखों से इशारा किया – बताऊं तनु को?

मैं समझ गया। अगर बताना होता तो अब तक बता चुकी होती। यह मुझे ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रही है। मैंने भी नाटक शुरू कर दिया। हाथ जोड़ लिए, कान पकड़ लिए, उसके पैरों में गिरने का इशारा किया और चुपचाप माफी मांगने लगा।

वह हल्के से मुस्कुराई। उस मुस्कान से मुझे तसल्ली हुई। लग रहा था कि मैं बच गया।

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मैं उसके सामने हाथ जोड़कर चुपचाप बैठा रहा। कुछ देर बाद वह उठी। उठकर मुझे बाहर आने का इशारा किया।

अब मैं सोचने लगा – चलो, देखते हैं अब बाहर क्या होता है।

मैं उसके पीछे-पीछे बाहर निकला। वह फिर ऊपर चढ़ गई। मैं भी ऊपर पहुंचा। उसने साले साहब का कमरा खोला और मुझे अंदर आने का इशारा किया। कमरे में अंधेरा था, सिर्फ बाहर की चांदनी आ रही थी।

अंदर जाते ही उसने दरवाजा बंद कर दिया और मुड़ी। बोली,

“आ गए न लाइन पर? यहां तो कह रहे थे कि चाहे तो सबको बता दो। और नीचे हाथ-पैर जोड़ने लगे। उतर गया सारा जोश?”

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मैंने सिर झुकाकर कहा,

“मैं नहीं चाहता कि तुम्हारा और मेरा घर टूट जाए। ये बात यहीं खत्म हो जाए तो ठीक रहेगी। मैं तुमसे माफी मांगता हूं। मुझे माफ कर दो। पर मैं एक बात बता दूं कि मैं तुमको चाहना नहीं छोड़ सकता।”

उसने मेरी तरफ देखा, फिर ठंडी सांस लेकर बोली,

“मैं इस बात को खत्म कर दूंगी। पर तुमने मुझे जबरदस्ती किस किया था, तो मैं तुम्हें एक जोरदार चांटा मारना चाहती हूं।”

यह सुनकर मेरी तो मां चुद गई। दिल धक-धक करने लगा। पर अब क्या हो सकता था? जैसी करनी वैसी भरनी। मैंने धीरे से सिर हिलाकर ‘हां’ कर दिया। आंखें बंद कर लीं। सोचने लगा कि इज्जत का भाजी-पाला हो गया। कितनी जोर से मारेगी? पता नहीं। दांत भींच लिए, तैयार हो गया।

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मैंने आंखें खोलीं तो अंजलि मेरी तरफ ही घूर रही थी। उसकी आंखों में अब गुस्सा नहीं, बल्कि एक शरारती चमक थी। उसने धीमी, लेकिन सख्त आवाज में कहा,

“आंखें बंद करो और चांटा खाने के लिए तैयार हो जाओ।”

मैंने फौरन आंखें बंद कर लीं। दिल की धड़कनें रुक सी गई थीं। मेरा लौड़ा, जो कुछ देर पहले अजगर बना हुआ था, अब डर के मारे चूहा बनकर मेरी पिछवाड़े में सिमट गया था। पूरी तरह सिकुड़कर छिप गया था।

मैंने हल्के से कहा,

“अब सजा दे भी दो।”

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एक बार कहा, लेकिन उसने कुछ नहीं किया। कोई आवाज नहीं आई, कोई हवा का झोंका नहीं।

फिर मैंने दोबारा कहा,

“मारो चांटा।”

फिर भी कुछ नहीं। कमरे में सन्नाटा था, सिर्फ हमारी सांसों की आवाज गूंज रही थी।

तीसरी बार, चौथी बार मैंने यही कहा। हर बार उम्मीद के साथ कि अब हाथ चलेगा। लेकिन वह चुप रही।

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पांचवीं बार जब मैंने कहा, “मारो ना…” तो अचानक उसने अपना हाथ उठाया। मैंने सोचा अब तो गया काम से। लेकिन उसने मेरी गर्दन पीछे से पकड़ी, मुझे अपनी ओर खींचा और झट से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

नरम, गर्म, भीगे हुए होंठ। उसने जोर से चूसा, जीभ अंदर डालकर मेरी जीभ से खेलने लगी। मैं सुन्न सा रह गया। आंखें खुली थीं, लेकिन दिमाग काम नहीं कर रहा था।

वह होंठ हटाकर पीछे हटी और मुस्कुराते हुए बोली,

“प्यार का बदला सिर्फ प्यार से चुकाया जाता है। मार से नहीं।”

मैं अभी भी होश में नहीं आया था। मैंने हकलाते हुए कहा,

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“वो क्या था जो तुम पहले यहां कहकर गई थीं? गुस्सा, चांटा, सब कुछ…”

उसने मेरी नाक पर हल्की सी उंगली रखकर ठुमका लगाया और हंसते हुए बोली,

“बुद्धू। मैं तो तुम्हें तड़पा रही थी। कमरे में अंदर जाकर मैंने नेहा को दूध पिलाया, उसे अच्छे से सुला दिया। तनु को भी पानी पिलाकर पटका दिया। अब वो दोनों सुबह तक नहीं उठेंगी। अगर मैं पहले ही ‘हां’ भर देती, तो तुम पागल हो जाते और वहीं कमरे में शुरू हो जाते। सब बर्बाद हो जाता। इसलिए थोड़ा डराना पड़ा, थोड़ा ब्लैकमेल करना पड़ा, ताकि तुम समझो कि मैं कितनी सीरियस हूं।”

इतना सुनते ही मेरे शरीर में फिर से आग लग गई। मेरा लौड़ा, जो डर के मारे छिप गया था, अब फिर से फूलकर अजगर जुर्राट बन गया। जींस में इतना कड़क हो गया कि दर्द होने लगा। मैं उसे पकड़ने वाला ही था, हाथ बढ़ाया ही था कि उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए और रोक दिया।

उसकी आंखों में शरारत और इच्छा दोनों थीं। उसने धीरे से कहा,

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“रुको। पहले मेरे सवालों का जवाब दो। सब कुछ साफ-साफ बताओ। फिर देखते हैं आगे क्या होता है।”

मैं उसकी आंखों में देखता रहा। अब उसके क्या सवाल थे और चुदाई का क्या हुआ, यह सब अगले पार्ट में बहुत मजा आने वाला था।

कहानी का अगला भाग: दो महीने की सेक्स भूख मिटाई बड़ी साली ने – 2

1978
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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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