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दो महीने की सेक्स भूख मिटाई बड़ी साली ने – 2

Sister in law sex story: पिछले भाग में आप सभी ने जाना था कि मेरी बड़ी साली मुझसे चुदने को राजी थी। अब आगे।

कहानी का पिछला भाग: दो महीने की सेक्स भूख मिटाई बड़ी साली ने – 1

उसने कहा, “मेरे कुछ सवालों के जवाब दो।”

मैंने कहा, “बोलो?”

उसने पूछा, “तुम मुझे मोहित (अंजलि का पति) से ज्यादा कितना प्यार कर सकते हो?”

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मैंने जवाब दिया, “मेरी गारंटी है… जब तक तुम नहीं कहोगी, तब तक मैं टिका रहूंगा। मैं एक बार में सौ शॉट लगा सकता हूं।”

उसने कहा, “आज तक मोहित ऐसा नहीं कर सका। तो तुम क्या कर लोगे, जबकि मोहित तुमसे ज्यादा ताकतवर है?”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरे पास एक ट्रिक है, जिससे मैं सौ क्या, दो सौ शॉट भी लगा सकता हूं।”

उसने उत्सुक होकर पूछा, “कैसे?”

तो मैंने उसे अपनी ट्रिक के बारे में विस्तार से बताया। सुनकर वो बोली, “देखते हैं।”

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फिर मैं सोच में पड़ गया। क्या करूं, कहां से शुरू करूं? जिसे मैं सालों से चाहता था, वो आज मेरे सामने नंगी होने को तैयार है। दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं।

उसने मेरी तरफ देखकर कहा, “क्या सोच रहे हो?”

मैंने कहा, “तुम बहुत ही खूबसूरत हो। मैं तुम्हारे चेहरे को बहुत प्यार करना चाहता हूं।”

उसने हल्के से हंसते हुए कहा, “जो करना है वो जल्दी करो। मेरे पास चेहरे के अलावा भी बहुत कुछ है।”

मैंने उसे साले के बिस्तर पर धीरे से लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया। उसका गर्म बदन मेरे नीचे दब रहा था। मैं उसके हर हिस्से को महसूस कर रहा था। जो सपनों में बार-बार चोदा था, आज वो हकीकत में मेरे सामने था और मुझसे चुदने वाली थी।

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मैंने पहले अपने सारे कपड़े उतार फेंके। फिर धीरे-धीरे उसके कपड़े भी उतारे। उसकी नंगी देह देखकर सांस रुक सी गई। मैंने उसके चेहरे को दोनों हाथों में थामा और बहुत देर तक उसे निहारता रहा। फिर उसके माथे पर, आंखों पर, गालों पर और होंठों पर बार-बार किस करने लगा। मेरे होंठ उसके होंठों से चिपके रहे, जीभ से जीभ मिलाई, गहरा चुंबन किया। वो भी जवाब दे रही थी, उसके हाथ मेरी पीठ पर फिर रहे थे।

अचानक उसने मेरा एक हाथ पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया। बोली, “दस दिनों से इसकी सर्विसिंग नहीं हुई है। फटाफट इसकी सर्विस कर दो।”

मैंने अपनी एक उंगली धीरे से उसकी गीली चूत में डाली। अंदर गर्माहट और नमी महसूस हुई। उंगली को अंदर-बाहर करने लगा, धीरे-धीरे गति बढ़ाई। साथ ही दूसरे हाथ से उसके एक बोबे को दबाने लगा। निप्पल को अंगूठे और तर्जनी से मसलता रहा। वो सिसकारियां भरने लगी।

मैंने कहा, “मैं तो दो महीने से भूखा हूं जान।”

वो हंसकर बोली, “मुझे पता है। इसलिए मैंने सोचा कि बहन के पति को ज्यादा नहीं तड़पाया जाए।”

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मैं मुस्कुरा दिया।

उसने फिर कहा, “अब अपनी ट्रिक लगाओ और बताओ मुझे सौ शॉट का जादू क्या है?”

मैंने कहा, “इतनी जल्दी भी क्या है? मेरा हुनर देखने से पहले अपना 15 साल का अनुभव तो बताओ मेरी जान।”

तभी उसने फटाक से मेरे लौड़े को पकड़ लिया। मुझे हल्के से धक्का देकर नीचे किया और खुद मेरे ऊपर बैठ गई। झुककर मेरे लौड़े को मुंह में ले लिया। धीरे-धीरे चूसने लगी। जीभ से चाटती, सुपाड़े को चूसती, फिर गहराई तक ले जाती। मैं आनंद से कराह उठा।

कुछ देर बाद उसने लौड़ा मुंह से निकाला और कहा, “तुम दोनों का एक जैसे ही हो, पर तुम्हारा थोड़ा कड़क ज्यादा है।”

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फिर वो मेरे लौड़े को चूसते हुए अपनी चूत को मेरी जांघ पर रगड़ने लगी। उसकी गीली चूत की गर्माहट मेरी जांघ पर महसूस हो रही थी। रगड़ते-रगड़ते उसकी चूत से पानी निकलने लगा, मेरी जांघ गीली हो गई।

मैंने उसे रोक लिया और कहा, “इतनी जल्दी भी क्या है मेरी जान? तुम निपट जाओगी तो सौ शॉट का जादू कैसे देख पाओगी?”

उसने कहा, “देखो, तुम्हें जो करना है वो करो, पर जल्दी करो। अगर कोई जग गया तो लफड़ा हो जाएगा।”

फिर मैंने उसे धीरे से सीधा लिटाया। उसकी टांगें थोड़ी फैलाकर मैं उसके बीच में बैठ गया। मेरा लौड़ा पहले से ही पूरी तरह खड़ा और सख्त था। मैंने उसे अपनी उंगलियों से थोड़ा सहलाया, फिर सुपाड़े को उसकी चूत के मुंह पर टिकाया। धीरे-धीरे दबाव डालते हुए एक झटके में पूरा लौड़ा अंदर डाल दिया। उसकी चूत गीली थी, लेकिन इतनी तंग कि मुझे लगा जैसे पहली बार ही घुस रहा हूं। वो हल्की सी सिसकारी भरकर मेरी पीठ पर नाखून गड़ा बैठी।

मैंने गहरी सांस ली, अपनी ट्रिक पर फोकस किया। पेट की मांसपेशियों को कसकर, सांस को कंट्रोल करते हुए मैंने धक्के शुरू किए। पहले धीमे, फिर तेज। हर धक्का गहरा और जोरदार। मैंने वादा किया था सौ शॉट का, और अब उसे पूरा करने में जुट गया।

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पहले पचास शॉट तक वो चुप रही। बस उसकी सांसें तेज होती गईं, आंखें बंद हो गईं, होंठ काट रही थी। लेकिन जैसे ही पचास पार हुए, धक्के और पावरफुल होने लगे। हर धक्के में मैं पूरी ताकत से अंदर तक जाता, फिर बाहर निकालता। उसकी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी, पानी की आवाज आने लगी। वो मचलने लगी, कमर उठाकर मेरे धक्कों का जवाब देने लगी।

अचानक वो मुझे जोर से पकड़कर बोली, “वाह… वाह… ओओह… ओह… मेरी जान, मजा आ गया… शाबाश मेरे शेर… और जोर से… और जोर से लगाओ।” उसकी आवाज में आनंद और बेचैनी दोनों थी। वो कूदने लगी, अपनी कमर ऊपर-नीचे करके मेरे हर धक्के को और गहरा महसूस करने लगी।

मैंने उसके दोनों बोबे अपने हाथों में कसकर पकड़ लिए। निप्पल्स को उंगलियों से मसलते हुए जोर-जोर से दबाया। दबाव बढ़ने से उसके बोबे और सख्त हो गए। साथ ही मैंने शॉट की स्पीड और तेज कर दी। अब हर सेकंड में दो-तीन धक्के पड़ रहे थे। कमरे में सिर्फ हमारी सांसों की आवाज, चूत से आने वाली चपचप और उसके कराहने की आवाज गूंज रही थी।

सौ शॉट से ज्यादा हो चुके थे। मैंने एक गहरी सांस ली और झुककर उसके उरोजों को मुंह में ले लिया। एक बोबे को चूसने लगा, जीभ से निप्पल को घुमाता, हल्के से काटता। दूसरा बोबा हाथ से दबाता रहा। वो कराह रही थी, “आह… कितना अच्छा लग रहा है… ये बोबे तुम्हारे लिए ही हैं… चूसो जोर से।” मुझे और उसे क्या मस्त मजा आ रहा था। उसके बोबे सच में गजब के थे – बड़े, गोल, मुलायम लेकिन सख्त, 40 की उम्र में भी बिल्कुल जवां।

मैंने बीच में ही पूछ लिया, “तुम 40 की उम्र में इतना मेंटेन कैसे कर लेती हो?”

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साली साहिबा ने आंखें बंद करके, कराहते हुए कहा, “मैं पिछले दस साल से रोज आंवला और एलोवेरा का जूस पीती हूं।”

मैंने उसे उठाया और अपनी जांघों पर बैठा लिया। अब वो ऊपर थी, मैं नीचे। मैं कुछ कहता, उससे पहले ही वो खुद कूदने लगी। अपनी कमर ऊपर-नीचे करके मेरे लौड़े को पूरी तरह अंदर-बाहर करने लगी। उसके बोबे मेरे चेहरे के सामने उछल रहे थे।

मैंने कहा, “तुम तनु से ज्यादा मस्त हो। वो कहां और तुम कहां… वो तो बिल्कुल ठंडी है… उसे कुछ करने की इच्छा ही नहीं होती।”

उसने हंसते हुए पूछा, “उसे भी सौ शॉट लगाते हो?”

मैंने कहा, “हां, उसे सौ शॉट से अब मजा नहीं आता… उसे कम से कम 250 शॉट लगाने पड़ते हैं।”

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उसने हैरानी से कहा, “क्या बात है… 250 शॉट? मुझे यकीन नहीं होता।”

तो मैंने कहा, “रुको… अभी लगा कर बताता हूं।”

उसने जल्दी से कहा, “नहीं… अभी नहीं, फिर कभी लगाना… अभी मैं झड़ने वाली हूं।”

इतना कहते-कहते उसकी सांसें और तेज हो गईं। वो चीखी, “आह… आ… आई लव यू… मेरी जान…” कहती हुई मेरे होंठों को अपने होंठों से जोर से चूसने लगी। जीभ अंदर डालकर चूस रही थी। तभी उसका पूरा बदन कांप उठा, चूत सिकुड़ने लगी, वो झड़ गई। मजा इतना कि वो तकिए पर गिर पड़ी, आंखें बंद, सांसें तेज।

फिर मैंने कहा, “ये कोई बात नहीं हुई… मुझे तो अभी और करना है।”

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उसने थककर कहा, “नहीं… अब नहीं होगा मुझसे… हम एक रात में सिर्फ एक बार ही करते हैं… दूसरी बार अब नहीं होता।”

मैंने कहा, “मैं नीचे देख कर आता हूं… जब तक तुम अपने आपको तैयार करो… अभी मेरा बाकी है।”

इतना कहते ही मैंने अपना पायजामा पहना और नीचे आ गया। नीचे आकर देखा कि तनु और नेहा दोनों गहरी नींद में हैं।

मैंने मन ही मन तनु को थैंक्स कहा कि तुमसे शादी करने की वजह से आज मुझे तेरी खूबसूरत परी जैसी बहन को चोदने को मिली।

मैंने पानी पिया और अपने आप से कहा कि देख भाई, जो है सो आज है… फिर पता नहीं कब मौका मिले न मिले… काम उठा लो।

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ये सोचकर मैं फिर ऊपर गया। मन में ठान लिया था कि आज इसकी चूत का भोसड़ा करके ही रहूंगा। वो साली अपने कपड़े पहनने में लगी हुई थी।

मैंने कहा, “ये कोई बात नहीं हुई… जो है आज है… फिर पता नहीं मैं कब तक तड़फता रहूंगा।”

वो बोली, “यार अब मुझसे नहीं होगा।”

मेरे थोड़ा मनाने पर उसने कहा, “ठीक है… मुझसे कुछ नहीं होगा, तुम्हें पानी निकालना हो तो निकाल दो… तुम्हें जो करना है करो।”

मैंने उसकी चूत में उंगली करनी शुरू कर दी… पर वो गर्म होने का नाम नहीं ले रही थी।

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तब मैंने अपनी ट्रिक फिर से लगाई। सांस को गहराई से नियंत्रित किया, पेट की मांसपेशियां कसीं, और लौड़े को उसकी चूत के मुंह पर टिकाया। वो अभी भी थोड़ी ठंडी थी, लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे से सुपाड़ा अंदर घुसाया, फिर एक झटके में आधा लौड़ा डाल दिया। उसकी चूत अब पहले से ज्यादा संवेदनशील हो चुकी थी, हर स्पर्श पर वो सिहर उठी। मैंने दोनों हाथों से उसके बोबों को मजबूती से पकड़ लिया, निप्पल्स को उंगलियों के बीच दबाया, और एक लंबी सांस लेकर धक्के शुरू कर दिए।

पहला धक्का गहरा था, दूसरा और तेज। मैंने कोई रहम नहीं किया। जानता था कि शायद ऐसा मौका फिर कभी न मिले। हर धक्का पूरी ताकत से, लौड़ा जड़ तक अंदर जाता, फिर बाहर निकलता। वो तड़पने लगी, कमर उठाकर, हाथों से चादर पकड़कर, “आह… बस… दर्द हो रहा है… धीरे…” कहने लगी। लेकिन मैं रुका नहीं। स्पीड बढ़ाई, हर शॉट में जोर लगाया। उसकी चूत अब पूरी तरह गीली हो गई थी, लेकिन दर्द और मजा दोनों मिलकर वो कराह रही थी।

फिर मैंने दूसरी लंबी सांस भरी। अब अनगिनत धक्के लगाने लगा। तेज, गहरे, लगातार। कमरे में सिर्फ चपचप की आवाज और उसकी कराहें गूंज रही थीं। उसके बोबे मेरे हाथों में दब रहे थे, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। वो बार-बार मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थी, कभी मुझे और जोर से पकड़ रही थी। मैं उसके ऊपर पूरी तरह झुक गया था, उसका बदन मेरे नीचे दबा हुआ था। आखिरकार, जब मेरी सांस फूल गई, मैं उसके ऊपर ढेर हो गया। लौड़ा अभी भी अंदर था, लेकिन मैं थक चुका था।

वो बोली, “मेरी चूत बहुत दुख रही है… कोई कुंवारी होती तो कब की बेहोश हो गई होती। अब मुझे नीचे ले जाओ, मैं चल नहीं पाऊंगी। मैंने तो तुम्हें सिर्फ सर्विसिंग के लिए बोला था… मुझे क्या पता था तुम मेरी चूत को पूरी तरह तबाह कर दोगे। तनु का क्या होता होगा भगवान जाने… शायद इसलिए वो ठंडी हो गई है। भला कौन अपनी चूत को भुरता बनाना चाहेगा। गजब की ट्रिक है तुम्हारी… मान गई मैं तुम्हें।” उसकी आवाज में दर्द था, लेकिन साथ ही एक अजीब संतुष्टि भी।

फिर मैंने कहा, “मेरी जान, मैं अभी तक नहीं निपटा हूं… मेरा बाकी है अभी!”

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उसने थककर, हल्के से हंसते हुए कहा, “अब क्या गांड फाड़ोगे?”

मैंने कहा, “चलो साली जी, फटाफट लौड़ा मुंह में लेकर मेरा पानी पियो।”

उसने मना किया, “पानी तो मैं मोहित का भी नहीं पीती… तुम्हारा क्या पियूंगी।”

मैंने कहा, “चुपचाप पीलो, नहीं तो चूत में वापस डाल दूंगा और अंदर ही पानी छोड़ दूंगा।”

उसने थोड़ा सोचकर कहा, “छोड़ दो अंदर ही… वैसे भी मेरे दो लड़कियां ही हैं और मुझे तुमसे एक लड़का चाहिए।”

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मैंने कहा, “तथास्तु…”

और फिर लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया। अब धक्के कम थे, लेकिन गहरे। सिर्फ दस जोरदार शॉट लगाए। हर शॉट के साथ मैंने खुद को रोककर रखा, फिर आखिरी शॉट में पूरा पानी उसके अंदर छोड़ दिया। गर्म-गर्म पानी की धार महसूस हो रही थी। मैं उसके ऊपर ढेर हो गया, सांसें तेज, बदन पसीने से भीगा हुआ।

मैंने उससे कहा, “मुझे इस बात का हमेशा दुख रहेगा कि तुम मेरी बीवी नहीं हो… तुम अगर मुझसे आज शादी करो तो भी मैं आज भी तैयार हूं।”

उसने कहा, “पागल मत बनो… तनु कोई कम खूबसूरत नहीं है… और सुनो, मोहित हमेशा मुझसे मजाक-मजाक में कहता है कि वो तनु को चोदना चाहता है… वो उसे पसंद करता है… जिस तरह तुम मुझे पसंद करते हो… पर तुम ये बात कहीं नहीं कहोगे।”

मेरे तो होश उड़ गए। इतनी बड़ी बात अचानक सुनकर दिमाग सुन्न हो गया।

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मैंने उससे कहा, “तुम्हें चाहने वाले बहुत हैं, पर किस्मत मेरी मेहरबान है… जो मुझे आज तुम मिल गई। मेरी बरसों की चाहत आज पूरी हुई।”

फिर मैं उसे चूमता रहा। उसके होंठ, गाल, गर्दन, बोबे – सब जगह। बहुत प्यार से, धीरे-धीरे। दस मिनट बाद मैंने उसे उठाया। पहले अपने कपड़े पहने, फिर उसे उसके कपड़े पहनाए। हाथ पकड़कर धीरे-धीरे सीढ़ियां उतारा। नीचे पहुंचकर उसे उसकी जगह चुपचाप सुलाया। वो थककर लेट गई। मैं अपनी जगह लौट आया और सो गया।

थकान की वजह से नींद कब आई, पता ही नहीं चला।

सुबह मुझे अंजलि ने ही जगाया। दस बज चुके थे। तनु बाथरूम में गई हुई थी।

सुबह मुझे अंजलि ने ही जगाया। दस बज चुके थे। तनु बाथरूम में गई हुई थी।

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अंजलि मेरे पास आई, उसकी आंखों में थोड़ी शर्म और बहुत सारा दर्द था। वो धीरे से मेरे कान में फुसफुसाई, “डिलिवरी के बाद अपनी ट्रिक तनु को मत लगाना… मैं नहीं सह पाई, तो वो क्या सह पाएगी। मेरी अभी तक दर्द कर रही है।”

उसकी आवाज में दर्द की गहराई थी। रात की चुदाई का असर अभी भी उसके बदन पर था। चूत में दर्द, थकान, और शायद एक अजीब सी संतुष्टि भी। वो मेरी तरफ देख रही थी, जैसे कह रही हो कि ये राज हमारे बीच ही रहे।

मैंने उसे झट से अपनी बाहों में खींच लिया। गले लगा लिया इतनी जोर से कि उसका बदन मेरे सीने से पूरी तरह दब गया। मैंने उसके बालों में हाथ फेरा, गर्दन पर किस किया, फिर होंठों पर गहरा चुंबन। बहुत सारा प्यार किया – धीरे-धीरे, प्यार से। उसके कानों में फुसफुसाया, “तुम्हारी हर बात मानूंगा, मेरी जान।”

वो मेरी छाती पर सिर टिका कर थोड़ी देर ऐसे ही रही। फिर मैंने कहा, “मुझे भूलना मत… फोन जरूर करना।”

हम दोनों ने एक-दूसरे को देखा, आंखों में आंखें डालकर। फिर एक साथ बोले, “आई लव यू।”

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वो मुस्कुराई, हल्के से मेरे गाल पर हाथ फेरा और वहां से किचन में चली गई। उसकी चाल में थोड़ी लंगड़ाहट थी, लेकिन चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान।

कुछ देर में मेरे सास-ससुर आ गए। घर में सब सामान्य हो गया। जैसे रात की वो आग कभी लगी ही नहीं।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, जरूर बताना।

1987
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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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