Cuckold Husband: मेरा नाम शुभम है, और उस रात(कहानी का पिछला भाग : मेरी बीवी को पेला बॉस ने) के बाद से मेरा दिमाग किसी तूफान में फँसा हुआ है। मानसी को अपने बॉस तनेजा के मोटे लंड से चुदते देखना—उसकी सिसकारियाँ, वो गंदी बातें, और बॉस का 8 इंच का लौड़ा उसकी चूत में धक्के मारता हुआ—ये सब मेरे सामने बार-बार चल रहा है। पहले तो गुस्सा आया, लगा कि ये औरत मेरे भरोसे की धज्जियाँ उड़ा रही है। मैं उसे बिस्तर पर पटक कर उसकी मटकती गांड को चमड़े की बेल्ट से लाल करना चाहता था। पर फिर कुछ अजीब हुआ—मेरा लंड टाइट हो गया। उस सीन को याद करके मैंने पिछले दो दिनों में चार बार मुठ मारी, और हर बार मेरा माल मानसी की चुदाई की सोच के साथ फव्वारे की तरह छूटा।
मैं उलझन में हूँ। गुस्सा तो है, पर उससे कहीं ज्यादा एक जलन भरी हवस है। मैं चाहता हूँ कि मानसी फिर से किसी मोटे लंड से पिल जाए, और मैं चुपके से उसे देखूँ—उसकी चूत फटते हुए, उसकी गांड थरथराते हुए। मैं ये सब जानते हुए भी अनजान बनना चाहता हूँ। अगले दिन सुबह मानसी नहाकर बाहर आई। उसका गीला जिस्म तौलिये में लिपटा था, चूचियाँ बाहर उभरी हुईं, और निप्पल साफ दिख रहे थे। मैंने सोचा, “क्या माल है मेरी बीवी, और इसे मेरे बॉस ने चोद डाला।” मेरा लंड फिर टनटना गया, पर मैं चुप रहा।
“आज ऑफिस में देर होगी,” मैंने कहा, उसकी आँखों में झाँकते हुए। वो मुस्कुराई और बोली, “ठीक है, तुम जाओ, मैं घर संभाल लूँगी।” उसकी आवाज में वही शरारत थी जो उस रात बॉस के साथ थी। मुझे शक हुआ कि वो कुछ प्लान कर रही है। तभी मुझे एक आइडिया आया—क्यों न उसका फोन क्लोन कर लूँ? ऑफिस में मेरा दोस्त रवि टेक एक्सपर्ट है। मैंने उसे फोन किया और कहा, “यार, एक फोन की चैट्स ट्रैक करनी हैं, कैसे होगा?” उसने हँसकर कहा, “बस उसका फोन मुझे पाँच मिनट दे, मैं एक ऐप डाल दूँगा। तेरा लैपटॉप पर सारा डेटा आ जाएगा।” मैंने मानसी का फोन उठाया—वो किचन में थी—और रवि को दे आया। शाम तक मेरा लैपटॉप मानसी की चैट्स का खजाना बन गया।
शाम को ऑफिस से लौटते ही मैंने लैपटॉप खोला। मानसी और तनेजा की चैट्स देखकर मेरा दिमाग गरम हो गया। उसने सुबह ही बॉस को मैसेज किया था:
“हाय सर, आपका लंड आज मेरी चूत को याद कर रहा होगा ना?”
तनेजा का रिप्लाई: “हाँ मेरी रंडी, तेरी गीली चूत और मटकती गांड के बिना मेरा लौड़ा तड़प रहा है। कब चखने दोगी फिर से?”
मानसी: “सर, अब थोड़ा सावधान रहना पड़ेगा। शुभम को शक हो गया है। उसने कल रात मेरी चूत टटोली और पूछा कि इतनी ढीली क्यों है। मैंने कहा कि उसने ही चोद-चोदकर ढीली की।”
तनेजा: “हahaha, उस नमूने को क्या पता कि उसकी बीवी की चूत अब मेरे मूसल लंड की दीवानी है। अगली बार उसे बाहर भेजकर तेरी चूत और गांड दोनों को रगड़ डालूँगा।”
मानसी: “हाय सर, आपकी बातों से मेरी पैंटी गीली हो गई। पर अब घर पर रिस्की है। कहीं और मिलना होगा।”
तनेजा: “अगले हफ्ते ऑफिस में ओवरटाइम का बहाना बनाकर उसे रोक लूँगा। तू मेरे फ्लैट पर आ जाना। वहाँ बस तू, मैं, और मेरा 8 इंच का हथियार।”
मानसी: “सर, इस बार मेरी गांड भी आपके लंड की भूखी है। उसे फाड़ने का वादा करो ना।”
तनेजा: “वादा है मेरी जान, तेरी गांड का वो ठुमका देखकर मेरा लंड उसे चोदे बिना रुकने वाला नहीं।”
ये चैट्स पढ़कर मेरा लंड पैंट में फड़फड़ाने लगा। गुस्सा तो था, पर उससे ज्यादा उत्तेजना थी। मानसी अब सावधान हो गई थी—वो घर में ढीले कपड़े नहीं पहनती थी, फोन पर बात करते वक्त कोने में जाती थी, और दरवाजे बंद करके नहाती थी। पर उसकी चूत की गर्मी और बॉस के लंड की प्यास छुप नहीं रही थी। मैंने सोचा, “चलो, मैं अनजान बनता हूँ, पर इनकी हर गंदी हरकत देखूँगा—चैट्स से लेकर चुदाई तक।” मैंने बेडरूम के हिडन कैमरे के साथ-साथ मानसी के फोन को अपने लैपटॉप से लिंक रखा।
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अगले हफ्ते तनेजा ने मुझे ऑफिस में बुलाया। “शुभम, एक जरूरी प्रोजेक्ट है। आज ओवरटाइम करना पड़ेगा,” उन्होंने कहा। उनकी आँखों में वही हवस चमक रही थी जो मानसी की चूत को देखकर उस रात झलकी थी। मैंने हाँ कहा और मन ही मन हँसा। मुझे चैट्स से सब पता था। मैंने सोचा, “चलो बॉस, अपनी रंडी की चूत का मजा लो, पर इस बार मैं भी खेल का हिस्सा हूँ।”
शाम को मैंने मानसी को फोन किया। “आज देर होगी, तुम खाना खा लेना,” मैंने कहा।
“ठीक है,” उसने जवाब दिया। उसकी आवाज में जल्दबाजी थी, जैसे वो तैयार हो रही हो। मैंने ऑफिस में दोस्त रवि से कहा, “मेरा काम संभाल ले,” और चुपके से तनेजा के फ्लैट की ओर निकल गया। चैट्स से मुझे उसका पता पहले ही मिल गया था। वहाँ पहुँचकर मैंने देखा कि तनेजा की कार पार्किंग में खड़ी थी। थोड़ी देर बाद मानसी ऑटो से उतरी। उसने काली साड़ी पहनी थी—जो उसके जिस्म से चिपकी हुई थी। उसकी चूचियाँ साड़ी से बाहर उभर रही थीं, और गांड का उभार ऐसा कि मेरा लंड पैंट में ही सलामी देने लगा।
मैंने बिल्डिंग के पीछे की सीढ़ियाँ चढ़ीं और एक खिड़की से झाँकने की जगह ढूँढ ली। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। आज मानसी की चूत और बॉस का लंड फिर से एक-दूसरे के लिए तड़प रहे हैं।
मैं खिड़की के पास छुपा था, साँसें रोके, दिल धक-धक कर रहा था। अंदर तनेजा का फ्लैट खुला था, और मानसी अभी-अभी कदम रख चुकी थी। उसकी काली साड़ी उसके गदराए जिस्म से चिपकी हुई थी—चूचियाँ बाहर उभरीं, गांड का ठुमका ऐसा कि मेरा लंड पैंट में ही फुंफकारने लगा। तनेजा ने दरवाजा बंद किया और मानसी को पीछे से जकड़ लिया। उसका एक हाथ उसकी भारी चूचियों को मसल रहा था, और दूसरा उसकी गोल गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था—थप्प… थप्प…। हर चपत के साथ मानसी की गांड लाल हो रही थी, और मेरे अंदर की आग भड़क रही थी।
“क्या गर्म माल लेकर आई है, मेरी रंडी,” तनेजा ने गुर्राते हुए कहा और मानसी की साड़ी का पल्लू एक झटके में खींच लिया। उसकी गहरी नाभि चमक रही थी, और चूचियाँ ब्लाउज में कैद ऐसे तड़प रही थीं जैसे अभी फट पड़ेंगी। मानसी ने गंदी हँसी हँसी और बोली, “सर, ये जिस्म आपके लंड की भट्टी में जलने को तैयार है। मेरी चूत और गांड आपकी हवस का शिकार बनने को बेकरार हैं।” तनेजा ने उसकी साड़ी को पूरा फाड़कर फेंक दिया। अब वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी, और उसका टाइट ब्लाउज चूचियों को बाहर धकेल रहा था।
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तनेजा ने मानसी को सोफे पर पटक दिया और उसका ब्लाउज फाड़कर दो टुकड़े कर दिया। काली ब्रा में उसकी चूचियाँ बाहर उछलीं, निप्पल सख्त और तैयार। “हाय मानसी, तेरे ये रसीले चूचे मेरे लंड को जहर पीने पर मजबूर कर दें,” तनेजा ने कहा और ब्रा के ऊपर से ही उन्हें जोर-जोर से मसला। मानसी सिसकारी भरते हुए बोली, “सर, इन्हें फाड़ दो… मेरे चूचे आपके मुँह की गर्मी में पिघल जाना चाहते हैं।” तनेजा ने ब्रा को एक झटके में उतार फेंका और मानसी के नंगे चूचों पर टूट पड़ा। वो एक निप्पल को दाँतों से काट रहा था, और दूसरा उंगलियों से नोच रहा था। मानसी की सिसकारियाँ कमरे में गूँज उठीं, “आहह… सर… मेरे निप्पल चूसो… इन्हें लाल कर दो… मेरी चूत में आग लग गई है।”
मैं बाहर खड़ा ये सब देख रहा था, मेरा लंड पैंट में फटने को तैयार था। गुस्सा मेरे दिमाग को चाट रहा था, पर हवस मेरे जिस्म को जला रही थी। मैं चाहता था कि तनेजा मेरी बीवी को कुत्ते की तरह रगड़े। मानसी ने तनेजा के सिर को अपनी चूचियों में दबाया और गंदी आवाज में बोली, “सर, आपका लंड कहाँ छुपा है? मेरी चूत इसके लिए पागल हो रही है, इसे बाहर निकालो और मेरे मुँह में ठूँस दो।” तनेजा हँसा और खड़ा हो गया। उसने पैंट उतारी, और उसका 8 इंच का मोटा, काला लंड बाहर लहराया। मानसी की आँखें हवस से चमक उठीं। वो सोफे से नीचे सरकी और घुटनों पर बैठ गई। “हाय सर, ये लंड तो मेरी चूत का बादशाह है,” उसने कहा और अपनी गीली जीभ से लंड के सुपारे को चाटना शुरू कर दिया।
मानसी तनेजा के लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे कोई जंगली भूखी औरत अपने शिकार को निगल रही हो। उसकी जीभ लंड के सिरे पर नाच रही थी, और वो हर चूसने के साथ गंदी सिसकारियाँ भर रही थी। “सर, आपका लंड मेरे मुँह में आग लगा रहा है। इसे मेरी चूत में डालकर उसकी भट्टी बुझा दो।” तनेजा ने उसके बालों को मुट्ठी में जकड़ा और लंड को उसके गले तक ठूँस दिया। मानसी की आँखें लाल हो गईं, मुँह से लार टपकने लगी, पर वो रुकी नहीं। वो लंड को पूरा निगल रही थी, और उसकी गंदी आवाजें कमरे में गूँज रही थीं, “हाय सर… ये लंड मेरी चूत का हकदार है… इसे मेरे मुँह से चोदो।”
“क्या गजब की रंडी है तू, मानसी,” तनेजा ने गुर्राया। “तेरे पति को क्या पता कि उसकी बीवी मेरा लंड चाटने के लिए पैदा हुई है।” मानसी ने लंड मुँह से निकाला, उसकी लार से चमकता हुआ लंड हवा में लहराया। वो हँसकर बोली, “शुभम का छोटा सा लौड़ा तो मेरी चूत की प्यास भी नहीं बुझाता। आपके इस काले कोबरे को देखकर मेरी चूत में ज्वालामुखी फट रहा है।” ये सुनकर मेरा खून खौल गया। मैंने उसे सती-सावित्री समझा था, पर वो मेरे सामने तनेजा के लंड की पूजा कर रही थी। मेरा लंड अब पैंट में दर्द करने लगा था। मैंने उसे बाहर निकाला और खिड़की के पास ही सहलाना शुरू कर दिया।
तनेजा ने मानसी को उठाया और सोफे पर औंधे मुँह पटक दिया। उसने उसका पेटीकोट और पैंटी एक साथ फाड़कर फेंक दी। अब मानसी पूरी नंगी थी—उसकी चूत गीली, फूली हुई, और लाल, जैसे तनेजा के लंड को चिल्ला-चिल्लाकर बुला रही हो। तनेजा ने अपना मोटा लंड हाथ में पकड़ा और उसकी चूत के होंठों पर रगड़ा। मानसी तड़प उठी, “हाय सर… मत सताओ… इस लंड को मेरी चूत में डाल दो… ये आपके लिए रो रही है।” तनेजा ने एक जोरदार धक्का मारा, और उसका मूसल लंड मानसी की चूत में आधा घुस गया। मानसी चीख पड़ी, “आहह… सर… मेरी चूत फट जाएगी… ये लंड तो जान ले लेगा।”
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तनेजा ने गंदी हँसी हँसी और बोला, “अभी तो शुरूआत है, मेरी रानी। तेरी चूत को आज मेरा लंड रगड़-रगड़ कर चीर डालेगा।” मानसी सिसकारी भरते हुए बोली, “हाय सर… फाड़ दो इसे… शुभम का लौड़ा तो मेरी चूत को गुदगुदी भी नहीं करता। आपके इस हथियार से मेरी चूत की भट्टी बुझाओ।” तनेजा ने धक्के शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ मानसी की चूचियाँ हवा में उछल रही थीं, और उसकी चीखें तेज हो गईं, “हाँ सर… और जोर से… मेरी चूत को अपने लंड से कुचल दो।”
कमरे में चुदाई का तांडव मचा था—फच-फच… थप-थप… और मानसी की गंदी सिसकारियाँ, “चोदो मुझे… मेरी चूत फाड़ डालो… इसे अपने लंड का जंगल बना दो।” तनेजा ने स्पीड बढ़ा दी। मानसी की चूत से पानी रिस रहा था, और वो बार-बार झड़ रही थी। उसकी सिसकारियाँ अब चीखों में बदल गई थीं, “हाय सर… मेरी चूत जल रही है… और पेलो।” मैं बाहर खड़ा ये सब देख रहा था, मेरा लंड अब बेकाबू था। मैं उसे जोर-जोर से हिलाने लगा, और मेरी आँखें मानसी की चुदाई पर टिकी थीं।
तनेजा ने मानसी को पलटा और उसकी गांड ऊपर कर दी। “अब तेरी इस मटकती गांड को चोदने की बारी है,” उसने कहा और अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया। मानसी ने गंदी मुस्कान दी और बोली, “हाय सर… मेरी गांड आपके लंड की भूखी है… इसे फाड़ दो… पर पहले धीरे से डालो।” तनेजा ने अपना लंड उसकी गांड के टाइट छेद पर रखा और धीरे से दबाया। मानसी की सिसकारी निकली, “आहह… सर… ये मेरी गांड को चीर रहा है।” तनेजा ने धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर पेल दिया, और मानसी की आँखें हवस से लाल हो गईं। “हाँ सर… अब जोर से… मेरी गांड को अपने लंड से रगड़ डालो।”
तनेजा ने मानसी की गांड को कुत्ते की तरह पेलना शुरू कर दिया। उसकी चूचियाँ हवा में लटक रही थीं, और तनेजा उन्हें पकड़कर जोर-जोर से निचोड़ रहा था। मानसी चिल्ला रही थी, “हाय सर… मेरी गांड फाड़ दो… आपका लंड मेरे जिस्म का मालिक है।” काफी देर तक तनेजा ने उसकी गांड रगड़ी। फिर अचानक उसने लंड बाहर खींचा और बोला, “ले मेरी चुदक्कड़ रानी, अब तेरे मुँह और चूचों को अपने माल से तर कर दूँगा।” उसने लंड हिलाया, और गरम-गरम माल की पिचकारी मानसी के चेहरे और चूचों पर छूट पड़ी। मानसी ने जीभ निकालकर सारा माल चाट लिया और बोली, “हाय सर… आपका माल मेरे लिए जन्नत का रस है… इसे तो मैं पूरा पी जाऊँगी।”
उसी वक्त मेरा लंड भी फट पड़ा, और मेरा माल खिड़की के नीचे जमीन पर गिर गया। गुस्सा, जलन, और हवस मेरे जिस्म को जला रहे थे। अंदर का नजारा अभी खत्म नहीं हुआ था। तनेजा ने मानसी को अपनी गोद में खींच लिया। वो पूरी नंगी थी—उसकी चूचियाँ तनेजा के माल से चमक रही थीं, उसकी चूत और गांड से रस टपक रहा था। तनेजा ने उसे अपनी छाती से चिपकाया, उसके चूचों को फिर से मसला, और बोला, “क्या गर्म माल है तू, मानसी। तेरे इस जिस्म की आग मेरे लंड को बार-बार जगा देती है।” मानसी उसकी गोद में नंगी लेटी थी, उसकी टाँगें चौड़ी, और तनेजा का अभी-अभी ढीला हुआ लंड उसकी चूत को छू रहा था। वो सिसकारी भरते हुए बोली, “सर, आपकी गोद में नंगी लेटने का मजा ही अलग है। आपका लंड मेरी चूत को फिर से गरम कर रहा है।”
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तनेजा ने अपना फोन निकाला और बोला, “आज की चुदाई की यादगार बनानी है।” उसने मानसी को अपनी गोद में बिठाया, उसकी एक चूची को मुँह में लिया, और सेल्फी खींची। मानसी ने गंदी हँसी हँसी और कहा, “हाय सर, मेरे नंगे जिस्म की तस्वीरें ले लो… जब आपका लंड तड़पे तो इसे देखकर मुठ मार लेना।” तनेजा ने कई फोटो खींचे—एक में मानसी उसका लंड पकड़े हुए थी, दूसरी में वो उसकी गांड को सहला रहा था, और तीसरी में उसने मानसी की चूत को उंगलियों से चौड़ा करके कैमरे के सामने फैलाया। मानसी हवस से भरी आवाज में बोली, “सर, मेरी चूत की ये तस्वीर अपने बेडरूम में टाँग देना… ताकि आपकी बीवी भी देखे कि आपकी असली रानी कौन है।”
फिर मानसी ने तनेजा की गोद में नंगी बैठे हुए अपना फोन उठाया। “शुभम को फोन करूँ?” उसने शरारती लहजे में कहा। तनेजा ने उसकी चूची को जोर से दबाया और बोला, “हाँ, कर… उसे बता कि तू कितना प्यार करती है उससे, जबकि मेरे लंड की गर्मी अभी तेरी चूत में बाकी है।” मानसी ने फोन लगाया, और मैं बाहर खड़ा सुन रहा था। मेरा फोन बजा, और मैंने काँपते हाथों से कॉल उठाया।
“हाय जान,” मानसी की मादक आवाज आई। वो तनेजा की गोद में नंगी बैठी थी, उसका हाथ उसकी चूत को सहला रहा था। “मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।”
मैंने गुस्से और हवस से भरे लहजे में कहा, “हाँ, मैं भी… तुम क्या कर रही हो?”
मानसी हँसी और बोली, “बस तुम्हारी याद में बैठी हूँ… थोड़ा गर्मी लग रही है।” तनेजा ने उसकी चूत में उंगली डाली, और मानसी की सिसकारी मेरे फोन में गूँज गई, “आहह… जान… तुम जल्दी आना।” मैं समझ गया कि वो मेरे सामने नंगी होकर तनेजा की गोद में मजे ले रही है। “हाँ, आऊँगा,” मैंने कहा और फोन काट दिया।
तनेजा ने मानसी को चूमते हुए कहा, “क्या गजब की रंडी है तू… अपने पति से प्यार की बातें और मेरे लंड की सवारी।” मानसी उसकी गोद में लेटी रही और बोली, “सर, मेरी चूत और गांड आपके लंड की भूखी हैं। जब मन करे, बुलाकर पेल देना।” तनेजा ने उसकी गांड पर एक आखिरी चपत मारी और कपड़े पहन लिए। मानसी नंगी ही सोफे पर पड़ी रही, उसका जिस्म तनेजा के माल से चिपचिपा था। मैं चुपके से घर लौट आया, मेरा लंड अभी भी उस नजारे को याद करके फड़फड़ा रहा था।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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Nice story mera land bhi kharda ho gya hai