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माँ की चूत चोदकर पत्नी बना लिया बेटे ने

Mummy ko ghodi banakar choda sex story: कक्षा 12 उत्तीर्ण करने के बाद मैं अपने पापा के साथ दुकान पर बैठने लगा. कानपुर के एक मार्केट में हमारी कपड़े की दुकान थी. घर में तीन प्राणी थे, मैं, मम्मी और पापा. 22 साल का होते ही मेरी शादी तय हो गई.

हमारे परिवार पर ईश्वर की बड़ी कृपा थी, सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था. दुकान का कारोबार अच्छा था, घर में खुशहाली छाई हुई थी और हर दिन सुख-चैन से बीत रहा था. तभी एक मार्ग दुर्घटना में पापा चल बसे. वह एक सामान्य दिन था जब पापा दुकान से घर लौट रहे थे कि अचानक एक तेज रफ्तार वाली गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी. उनकी मौत की खबर सुनकर पूरा परिवार सदमे में आ गया. डेढ़ महीने बाद मेरी शादी थी. सभी रिश्तेदारों के कहने पर हमने शादी टाली नहीं और सादगी के साथ मेरा विवाह हो गया.

मेरी पत्नी अनु काफी खूबसूरत थी जिसको पाकर मैं खुद को भाग्यवान समझने लगा. उसकी गोरी चमकदार त्वचा, भरी-भरी छातियां, पतली कमर और गोल नितंब देखकर मेरे मन में गहरी चाहत जाग उठी. मेरी दुल्हन अनु ने मुझे सुहागरात को जन्नत के दीदार करा दिए. उस रात जब हम दोनों बेडरूम में अकेले थे तो अनु ने शर्माते हुए अपनी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया. उसकी ब्लाउज से उभरी हुई बड़ी-बड़ी छातियां सांस लेते ही ऊपर-नीचे हो रही थीं. मैंने उसे अपने करीब खींचा और उसके नरम गर्म होंठों पर गहरी चुम्बन ली. मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई और उसकी जीभ से खेलने लगी. वह हल्के से कराह उठी. फिर मैंने उसकी ब्लाउज के हुक खोल दिए और ब्रा उतार दी. उसकी गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुकी थीं. मैंने एक निप्पल को मुंह में ले लिया और चूसने लगा.

अनु ने मेरे बालों में उंगलियां फेरनी शुरू कर दी और आहें भरने लगी. मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिए. उसकी पैंटी पहले से ही गीली हो चुकी थी. मैंने पैंटी उतारी तो उसकी चिकनी चूत दिखाई दी जो रस से तर थी. मैंने अपनी उंगलियां उसकी चूत पर फिराईं. वह कांप उठी. फिर मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर रख दिया और जीभ से चाटने लगा. उसका स्वाद मीठा और नमकीन था. अनु जोर-जोर से कराहने लगी. जब वह पहली बार झड़ गई तो उसके शरीर में झुरझुरी दौड़ गई. फिर मैंने अपना सख्त लण्ड उसकी चूत पर रगड़ा और धीरे से अंदर घुसाने लगा. उसकी चूत बहुत टाइट थी. पूरा लण्ड अंदर डालकर मैंने तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए. हर धक्के पर उसके स्तन हिल रहे थे और कमरे में चुदाई की पक-पक की आवाजें गूंज रही थीं. हम दोनों एक साथ झड़ गए.

शादी के तीन महीने तक मैंने अनु की जमकर चुदाई की. हर रात मैं उसके नंगी शरीर को भोगता, उसके स्तनों को मसलता, निप्पल्स चूसता और उसकी गीली चूत में अपना लण्ड बार-बार ठूंसता. उसकी कराहटें और शरीर की गर्मी मुझे और उत्तेजित करती.

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तभी भाग्य ने एक बार फिर करवट ली और किसी मामूली सी बात पर मम्मी से झगड़ा करके अनु अपने मायके चली गई. मेरे समझाने पर मानना तो दूर, उसने तो तलाक की नोटिस भिजवा दी.

मेरा दिन तो दुकान पर कट जाता था लेकिन रात को बिस्तर पर जाते ही अनु की याद आने लगती और मेरा लण्ड टनटनाने लगता. लगभग रोज ही मैं मुठ मारकर अपने लण्ड को शांत करने लगा. बिस्तर पर लेटकर मैं अपनी पैंट उतार देता, लम्बे मोटे लण्ड को हाथ में पकड़कर ऊपर-नीचे करने लगता और अनु की याद में गर्म वीर्य छोड़ देता.

भाग्य ने एक बार फिर करवट ली. हुआ यूं कि इतवार का दिन था और दुकान बंद होने के कारण मैं घर पर था. सुबह के घर के काम निपटा कर लगभग 11 बजे मम्मी नहाने चली गईं और मैं टीवी देख रहा था.

तभी मम्मी के फोन की घंटी बजी. मैं फोन उठाता, उससे पहले ही घंटी बंद हो गई. मैंने देखा, रेखा आंटी का फोन था.

रेखा आंटी मम्मी की बचपन की दोस्त थीं और मुम्बई में रहती थीं. रेखा आंटी की मिस्ड कॉल के साथ व्हाट्सएप पर उनके मैसेज भी दिखाई दिए तो मैंने व्हाट्सएप खोल दिया. व्हाट्सएप खोलते ही मेरी आँखें फटी रह गईं, रेखा आंटी मम्मी को न्यूड सेक्स क्लिप्स भेजती थीं और यह सिलसिला सालों से चल रहा था. क्लिप्स में रेखा आंटी नंगी अवस्था में एक पुरुष के साथ बेड पर थीं. पुरुष का मोटा लण्ड रेखा आंटी की चूत में जोर-जोर से घुस रहा था. रेखा आंटी की छातियां उछल रही थीं और वे जोर-जोर से चीख रही थीं. चुदाई के क्लिप्स देखकर मेरा लण्ड टनटनाने लगा.

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तभी मम्मी नहाकर आ गईं. अब मम्मी मुझे मम्मी नहीं बल्कि चुदाई का सामान दिखने लगीं.

मैंने मम्मी को चुदाई की नजर से देखा तो पाया कि 5 फुट 5 इंच कद, गोरा चिट्टा रंग, भरा बदन, मस्त चूचियां, मोटे मोटे चूतड़. चुदाई के लिए और क्या चाहिए?

मम्मी की उम्र भले ही करीब बयालीस-तैंतालीस साल की रही हो लेकिन उनका बदन अभी भी पूरी तरह जवान और लुभावना था. उनकी गोरी चिट्टा त्वचा इतनी चमकदार थी कि रोशनी में दूध की तरह लगती थी. भरा हुआ बदन जिसमें हर हिस्सा नरम और गुदगुदा महसूस होता था. मस्त चूचियां भारी और उभरी हुई थीं जो हर सांस के साथ हिलती रहती थीं. मोटे मोटे गोल चूतड़ इतने आकर्षक थे कि उन्हें देखते ही किसी भी पुरुष का लण्ड तुरंत खड़ा हो जाता. उनकी कमर थोड़ी भरावदार थी जिसके नीचे नितंबों की मोटाई और भी ज्यादा उभरकर दिखती थी. मैं उन्हें अब माँ की नजर से बिल्कुल नहीं देख पा रहा था. बल्कि एक पूरी तरह से तैयार सेक्सी औरत की तरह देख रहा था जिसकी चूत में अपना लण्ड घुसाने का ख्याल मेरे दिमाग में बार बार घूमने लगा था.

मम्मी अपने कमरे में चली गईं और मैं चुदाई का तान बाना बुनने लगा. मैं मम्मी के कमरे में पहुंचा तो मम्मी पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी अपने बाल संवार रही थीं. शीशे में उनकी छाया साफ दिख रही थी. मम्मी की भारी चूचियां ब्लाउज के अंदर से इतनी उभरी हुई थीं कि कपड़ा तना हुआ लग रहा था और निप्पल्स की हल्की सी आउटलाइन भी साफ नजर आ रही थी. साक्षात सामने दिख रहे उनके मोटे मोटे चूतड़ पेटीकोट पर पूरी तरह से तने हुए थे. जब वह झुककर बालों में कंघी फेर रही थीं तो उनका चूतड़ और भी ज्यादा उभरकर बाहर निकल आया था. वह गोलाई देखकर मेरा दिमाग पूरी तरह खराब हो गया. मन में तुरंत ख्याल आया कि यहीं बेड पर उन्हें गिरा दूं. उनकी पेटीकोट ऊपर करके चूतड़ फैला दूं और अपना सख्त लण्ड उनकी गीली चूत में एक झटके में ठोक दूं. लेकिन हिम्मत नहीं पड़ी. मैं चुपचाप खड़ा उन्हें निहारता रहा.

मैं थोड़ा सब्र से काम लेना चाहता था इसलिए मैंने मम्मी को सिनेमा चलने के लिए राजी कर लिया. हम लोग दोपहर का खाना घर से खाकर निकले और रात को बाहर खाकर आयेंगे यह तय हो गया.

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अनिल कपूर व श्री देवी की फिल्म मिस्टर इंडिया दो दिन पहले ही रिलीज हुई थी. दो टिकट लिए और हॉल में जा बैठे.

शिफॉन की झीनी सी साड़ी पहने भीगी हुई ‘काटे नहीं कटते ये दिन ये रात’ गाती श्री देवी को देखकर मैंने मम्मी से कहा- मॉम, श्री देवी भी आपकी तरह हॉट है. मम्मी ने चौंकते हुए गुस्से से कहा- मेरी तरह?

मैंने हंसते हुए कहा- ओह सॉरी, आपसे कम. और हम दोनों हंस दिए.

फिल्म खत्म होने के बाद हम रेस्तराँ गए और खाना खाकर घर आ गए.

कपड़े चेंज करके मम्मी सोने लगी तो मैंने कहा- मॉम, दो कमरों में रात भर ए.सी. चलता है, क्यों न हम एक ही कमरे में सोया करें. मॉम ने कहा- सो सकते हैं, आइडिया बुरा नहीं है.

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मेरा बेडरूम बेहतर है इसलिए उसमें दोनों लोग सो गए.

मम्मी का तो मुझे पता नहीं लेकिन मुझे रात भर नींद नहीं आई. मम्मी दो बार पेशाब करने के लिए बाथरूम गईं. हर बार जब वह बाथरूम जातीं तो मैं कल्पना करता कि वह टॉयलेट पर बैठी हैं. उनकी गुलाबी चूत के होंठ थोड़े खुले हुए हैं और गर्म पेशाब की तेज धार निकल रही है. उसकी आवाज कमरे तक आ रही है. मैं बिस्तर पर लेटे लेटे अपनी पैंट उतारकर अपना लण्ड हाथ में पकड़ लेता. उंगलियों को ऊपर नीचे चलाता हुआ उनकी चूत की कल्पना करता. लण्ड पूरी तरह सख्त हो जाता और सिर से थोड़ा प्री-कम निकलने लगता. मैं धीरे धीरे रफ्तार बढ़ाता लेकिन झड़ने से पहले रुक जाता.

दो दिन ऐसे ही चला, तीसरे दिन आधी रात को मैं पेशाब करने के लिए उठा तो मम्मी गहरी नींद में सो रही थीं. कमरे में एक लाइट जलाकर सोना हम लोगों की आदत है.

मैं जब पेशाब करके लौटा तो मम्मी का बदन निहारने लगा. गुलाबी रंग के गाऊन में मम्मी का गदराया बदन मेरी आँखों में नशा भरने लगा. घुटनों तक उठे गाऊन से बाहर दिखतीं मम्मी की गोरी गोरी टांगें देखकर उनकी जांघों और चूत के बारे में सोचते सोचते मेरा लण्ड टनटना गया.

एक बार मम्मी की जांघें ही देख लूं तो बाथरूम जाकर मुठ मार लूंगा. ऐसा सोचकर घुटनों के बल बैठकर मम्मी की गाऊन उचकाकर अंदर झांका तो सन्न रह गया, मम्मी ने पैन्टी नहीं पहनी थी और उनकी चिकनी चूत देखकर अंदाजा लगा कि दो चार दिन पहले ही मम्मी ने अपनी झांटें साफ की हैं.

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मेरा दिल जोरों से धड़कने लगा और सांसें तेज हो गईं. मैं घुटनों के बल बिस्तर के किनारे बैठ गया और दोनों हाथों से मम्मी के गुलाबी गाऊन को बहुत धीरे-धीरे नीचे से उठाना शुरू किया. गाऊन का कपड़ा उनकी गोरी जांघों पर सरकते ही उनकी मोटी, नरम जांघों की चमकदार त्वचा पूरी तरह नंगी होकर मेरी आंखों के सामने आ गई. उन जांघों की गर्माहट और मांसलपन देखकर मेरा मुंह सूख गया और लार टपकने लगी. मैंने गाऊन को और ऊपर सरकाया तो उनके भारी-भारी, गोल-मटोल चूतड़ों का निचला हिस्सा दिखने लगा. फिर जब मैंने गाऊन को पूरी तरह कमर तक उठा दिया तो मेरी सांस रुक गई. मम्मी ने पैंटी बिल्कुल नहीं पहनी थी. उनकी चिकनी, बिना बालों वाली चूत साफ-साफ दिख रही थी. दोनों होंठ थोड़े मोटे, गुलाबी और थोड़े-थोड़े फूले हुए थे. ऊपरी हिस्सा बिल्कुल साफ था, सिर्फ एक पतली सी लकीर दिख रही थी जो हल्की नमी से चमक रही थी. देखकर साफ अंदाजा लगा कि दो-चार दिन पहले ही मम्मी ने अपनी झांटें साफ करवाई हैं क्योंकि वहां एक भी बाल नहीं था, त्वचा बिल्कुल चिकनी, मुलायम और दूधिया सफेद थी.

मुठ मारने से अच्छा है कि मम्मी के चूतड़ों पर लण्ड रगड़कर डिस्चार्ज कर लूं, ऐसा सोचकर मैं मम्मी के बगल में लेट गया. मम्मी अपनी बायीं ओर करवट लेकर सोई थीं और मैं उनके ठीक पीछे चिपककर लेट गया. मेरा लोअर के अंदर टनटनाता हुआ लण्ड पहले से ही लोहे की तरह सख्त हो चुका था, उसका सिरा प्री-कम से गीला था और हल्की-हल्की नब्ज की तरह धड़क रहा था. मैंने धीरे से अपना लण्ड उनके मोटे-मोटे चूतड़ों पर सटा दिया. लण्ड को उनके दोनों चूतड़ों के बीच बिल्कुल सही जगह पर सेट करके हौले-हौले से ऊपर-नीचे रगड़ने लगा. उनके गर्म, मुलायम और भारी चूतड़ मेरे लण्ड को चारों तरफ से दबा रहे थे, जैसे कोई नरम गद्दा उसे चारों ओर से घेर रहा हो. हर रगड़ के साथ लण्ड की नसें फूल रही थीं और प्री-कम निकलकर उनके गाऊन पर फैल रहा था.

मैं जैसे जैसे लण्ड रगड़ रहा था, मेरा जिस्म बेकाबू होता जा रहा था. सांसें भारी और अनियमित हो गई थीं, पूरा शरीर पसीने से तर हो रहा था और दिल की धड़कन कानों में गूंज रही थी. उनके चूतड़ों की नरमाई, गर्मी और हल्की कंपकंपी महसूस करके मेरा लण्ड और भी ज्यादा सख्त और मोटा हो गया था.

तभी मम्मी के शरीर में हलचल हुई, शायद वो जाग गई थीं. मैं तुरंत नींद का बहाना बनाते हुए आंखें बंद कर लीं, सांसें सामान्य रखीं और पूरी तरह स्थिर होकर सोने का नाटक करने लगा.

मम्मी उठीं और बाथरूम चली गईं. मुझे लगा कि वो पेशाब करने के लिए जगी होंगी. थोड़ी देर बाद मम्मी बाथरूम से निकलीं और कमरे की लाइट बंद करके बेड पर आ गईं. बाहर से स्ट्रीट लाइट की छनकर आती रोशनी में दिख रहा था कि मम्मी फिर से अपनी बायीं ओर करवट लेकर सो गई थीं.

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कुछ देर तक कोई हरकत नहीं हुई तो मुझे लगा कि मम्मी सो गई हैं. मैंने धीरे से अपना लण्ड मम्मी के चूतड़ों से सटा दिया. चूंकि लाइट ऑफ थी इसलिए मैंने अपना लण्ड लोअर से बाहर निकाल लिया था. मुझे अब पहले की अपेक्षा बेहतर लग रहा था क्योंकि पहले लण्ड और चूतड़ों के बीच मेरा लोअर और मम्मी का गाऊन था और अब सिर्फ मम्मी का गाऊन था, वो भी पतला सा.

कुछ देर तक लण्ड को चूतड़ों के बीच सटाये रखने के बाद मैंने सोचा अगर मम्मी का गाऊन ऊपर सरका दूं तो लण्ड सीधे चूतड़ों के सम्पर्क में आ जाएगा. ऐसा करने के लिए मैंने मम्मी का गाऊन धीरे धीरे उनकी कमर तक उठा दिया और अपना लण्ड मम्मी के चूतड़ों से सटा दिया.

ये मन भी कितना हरामी है, कहीं ठहरता नहीं. जब नंगे चूतड़ों पर लण्ड रगड़ने लगा तो मन में आया कि मम्मी तो सो ही रही है, अगर लण्ड और चूत की एक बार चुम्मी हो जाए तो मजा आ जाए. बस यही सोचकर मैं अपना लण्ड चूतड़ों के बीच खिसकाते हुए चूत तक पहुंचाने की कोशिश करने लगा.

तभी मेरे भाग्य ने पलटी मारी और मम्मी ने भी. करवट में सो रही मम्मी सीधी हो गईं। उन्होंने धीरे-धीरे अपनी पीठ के बल लेटते हुए शरीर को पूरी तरह सीधा किया। उनकी सांसें पहले ही भारी और अनियमित हो चुकी थीं। उन्होंने अपनी मोटी गोरी टांगों को धीरे-धीरे फैलाकर पूरी तरह चौड़ा कर दिया जिससे उनका रेशमी गाऊन ऊपर की ओर सरक गया और उनकी चिकनी गीली चूत मेरे सामने पूरी तरह खुलकर आ गई। मम्मी की चूत से हल्की चिपचिपी गंध और गर्म रस की चमक साफ दिख रही थी। फिर मम्मी ने अपना हाथ बढ़ाकर मेरे सख्त खड़े लण्ड को अपनी गर्म नरम मुठ्ठी में मजबूती से पकड़ लिया। उन्होंने उसे हल्का-हल्का दबाते हुए ऊपर-नीचे हिलाया और मेरी आंखों में देखते हुए मुझे अपने ऊपर आने का स्पष्ट इशारा किया। उनकी आंखें वासना से भरी हुई थीं और चेहरा उत्तेजना से लाल हो चुका था।

मैं खट से मम्मी के ऊपर आ गया। मेरा पूरा शरीर उत्तेजना से कांप रहा था और दिल जोरों से धड़क रहा था। मैंने घुटनों के बल खुद को संभाला और अपना मूसल सा मोटा लण्ड हाथ में लेकर मम्मी की चूत के मुंहाने पर रखा। मैंने लण्ड का सिरा उनकी फूली हुई चूत की लिप्स पर कई बार रगड़ा जिससे उनके गर्म रस मेरे लण्ड पर चिपक गए। मम्मी की चूत पहले से ही काफी गीली हो चुकी थी और उसकी नमी ने मेरे लण्ड को पूरी तरह चिकना बना दिया था। फिर मैंने कमर को आगे बढ़ाया और एक जोरदार धक्का देकर अपना पूरा मोटा लण्ड उनकी चूत में पेल दिया। जैसे ही मेरा लण्ड उनकी तंग गर्म चूत के अंदर पूरी लंबाई तक घुसा मम्मी के मुंह से एक लंबी आह निकली। उनकी चूत की दीवारें मेरे लण्ड को कसकर जकड़ ले रही थीं और अंदर की गर्मी तथा चिपचिपी नमी का अद्भुत अहसास हो रहा था।

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मैंने कमर हिलाकर धीमी गति से अंदर बाहर करना शुरू किया। हर थ्रस्ट के साथ चूत और लण्ड की टकराहट से चप-चप और पच-पच जैसी चिकचिकाती आवाजें कमरे में भर गईं। मम्मी ने अपनी टांगें मेरी कमर के चारों ओर लपेट लीं और अपनी कमर ऊपर उठाकर मेरे हर धक्के का पूरा जवाब दे रही थीं। उनके बड़े स्तन गाऊन के अंदर तेजी से ऊपर-नीचे हिल रहे थे। मैंने एक हाथ से उनके एक स्तन को दबाया और निप्पल को उंगलियों से मसलने लगा। मम्मी की सांसें तेज और फूली हुई थीं। वे हल्के-हल्के कराह रही थीं और उनके चेहरे पर आनंद की लहरें दौड़ रही थीं। धक्का-मुक्की तेज होती गई। मेरी गेंदें हर धक्के पर उनकी चूत से टकरा रही थीं। मेरी कमर में सनसनी बढ़ने लगी और लण्ड फड़कने लगा।

धक्का मुक्की में मैं भी जल्दी ही डिस्चार्ज हो गया। मेरे लण्ड से निकला गाढ़ा गर्म वीर्य मम्मी की चूत में भर गया था। कई जोरदार धाराएं फूट पड़ीं और उनकी चूत की गहराई तक पहुंच गईं। कुछ बूंदें बाहर निकलकर उनकी जांघों पर बह गईं। मेरा शरीर हर स्पर्ट के साथ सिकुड़ रहा था और आनंद की लहरें पूरे शरीर में दौड़ रही थीं। मम्मी का शरीर भी एक हल्के कंपन से कांप उठा। जब मेरा सारा वीर्य निकल चुका तब मैंने अपना लण्ड धीरे से बाहर खींचा। मैंने अपना लण्ड मम्मी के गाऊन से पोंछा और चुपचाप सो गया. सुबह देर से उठा, मम्मी रसोई में थीं. मैं नहाकर तैयार हुआ और नाश्ता करके दुकान चला गया. रात को घर लौटा, हाथ मुंह धोकर खाना खाया और चुपचाप टीवी देखने लगा. मम्मी से नजर मिलाने की हिम्मत नहीं हो रही थी और मम्मी भी नजरें चुरा रही थी. जो होना था, हो चुका था अब क्या हो सकता था.

कुछ देर तक टीवी देखने के बाद मैं बेडरूम में चला गया और सोने की कोशिश करने लगा, मम्मी रसोई समेट रही थीं. रात के सन्नाटे में मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था लेकिन नींद मुझे छू भी नहीं रही थी। मेरे मन में तरह-तरह की भावनाएं उमड़ रही थीं, उत्सुकता, घबराहट और इंतजार का मिश्रण। घड़ी की सुइयां साढ़े ग्यारह बजा चुकी थीं और वही हुआ जिसका मुझे डर था। मम्मी मेरे बेडरूम में नहीं आईं। रसोई से आती हल्की-हल्की आवाजें बता रही थीं कि वे अभी भी समेट रही हैं। मैं करवट बदलता रहा, उनके आने की उम्मीद करता रहा लेकिन दरवाजा नहीं खुला।

रात के ठीक बारह बजे मम्मी ने मेरे मोबाइल पर कॉल की और पूछा- नींद नहीं आ रही है ना? आ जाओ, मेरे बेडरूम में. तुम्हारी दुल्हन तुम्हारा इन्तजार कर रही है। उनकी आवाज में एक अनोखी मिठास और निमंत्रण था जो मेरे शरीर में सिहरन पैदा कर गया। मैं तुरंत उठ बैठा। दिल की धड़कन तेज हो गई थी। मैंने मोबाइल रखा और उनके बेडरूम की ओर बढ़ गया।

मैं उठा, मम्मी के बेडरूम में पहुंचा तो दंग रह गया. मम्मी का बेडरूम फूलों से सजा हुआ था. सुहाग की सेज पर मम्मी लाल साड़ी पहनकर बैठी थीं। कमरे में गुलाब और जूही के फूलों की महक फैली हुई थी। बिस्तर पर लाल-पीले फूलों की चादर बिछी हुई थी और चारों तरफ मोमबत्तियों की नरम रोशनी थी जो एक रोमांटिक माहौल बना रही थी। मम्मी सिर झुकाए घूंघट ओढ़े लाल साड़ी में बिल्कुल नई दुल्हन जैसी लग रही थीं। उनकी गोरी देह साड़ी के पारदर्शी कपड़े से झांक रही थी।

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मैंने मम्मी का चेहरा देखने के लिए घूंघट उठाया तो मेरी आँखें फटी रह गईं. पूरे मेकअप में मम्मी श्री देवी को मात कर रही थीं. मम्मी का हाथ अपने हाथों में लेकर उसको चूमते हुए मैं बोला- आई लव यू, रेनू. मम्मी कुछ नहीं बोलीं। उनके चेहरे पर हल्की शर्म की लाली छा गई थी। मैंने घूंघट पूरी तरह हटा दिया। उनके माथे पर कुंकुम का टीका था और आंखों में काजल की गहरी लकीरें थीं। होंठ गुलाबी लिपस्टिक से चमक रहे थे। मैंने उनका हाथ उठाया, हथेली को चूम लिया। उनकी त्वचा नर्म और गर्म थी।

मैंने मम्मी का घूंघट हटाकर उनके माथे को चूमा, और उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए. मम्मी के होंठ दहक रहे थे. मम्मी को अपने आलिंगन में लेकर उनकी चूचियां सहलाते हुए मैंने पूछा- मॉम, मैं आपको रेनू कहकर बुला सकता हूँ? “हाँ, मेरे सोनू, मेरे राजा.” इतना कहकर मम्मी मेरी बांहों में झूल गईं। जब मैंने उनके होंठों को चूमा तो वे नर्म और गर्म थे। मैंने धीरे-धीरे उनके निचले होंठ को चूसा, फिर अपनी जीभ से उन्हें छुआ। उनकी सांसें तेज हो गईं। मैंने उन्हें कसकर गले लगाया। मेरे हाथ उनकी पीठ पर फिरते हुए ऊपर चढ़े और उनकी भरी-पूरी चूचियों को साड़ी के ऊपर से सहलाने लगे। वे नाजुक तरीके से मेरे सीने से लिपट गईं।

मैंने मम्मी की साड़ी उतारी, फिर पेटीकोट और ब्लाउज उतारा. ब्लैक कलर की ब्रा और पैन्टी में मम्मी और ज्यादा गोरी लग रही थीं. अपनी टीशर्ट उतारकर बालों से भरी अपनी छाती से मम्मी को सटाकर मैंने अपना हाथ मम्मी की पैन्टी पर रख दिया और पैन्टी के ऊपर से मम्मी की चूत सहलाते हुए मम्मी के होंठ चूसने लगा. कुछ देर बाद मैंने मम्मी की ब्रा उतार दी और बीस बाईस साल के अंतराल के बाद आज फिर मम्मी की चूची मेरे मुंह में आ गई. पैन्टी पर हाथ फेरते फेरते मैंने मम्मी की पैन्टी उतार दी. मम्मी ने आज ही अपनी चूत शेव की थी. मम्मी की चूत पर हाथ फेरते फेरते मैंने अपनी ऊंगली मम्मी की चूत में डाली तो मम्मी नजाकत से चिहुंक उठी. मैंने मम्मी की चूत के होठों को खोलकर अपने होंठ उस पर रख दिए और अपनी जीभ मम्मी की चूत में फेरने लगा. जीभ की चोंच बनाकर मम्मी की चूत के अन्दर डाला तो मम्मी ने मेरा लण्ड अपनी मुठ्ठी में दबोच लिया और फुर्ती से मेरा लोअर नीचे खिसका दिया. अब मैं मम्मी की चूत चाट रहा था और मम्मी मेरा लण्ड सहला रही थी।

मैंने धीरे-धीरे मम्मी की लाल साड़ी का पल्लू हटाया और पूरी साड़ी उनके शरीर से खींच ली। फिर मैंने पेटीकोट की नाड़ी खोल दी और ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। उनके गोरे शरीर पर काला ब्रा और पैंटी बहुत आकर्षक लग रहे थे। उनकी चिकनी त्वचा काले कपड़ों के साथ और भी ज्यादा चमक रही थी। मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी और अपनी छाती के बालों से भरी, मांसल छाती को उनकी नरम छाती से सटा दिया। उनकी चूचियां मेरी छाती से दब रही थीं और मुझे उनके निप्पल्स के सख्त होने का एहसास हो रहा था। मैंने अपना हाथ उनकी पैंटी पर रखा और ऊपर से ही उनकी चूत को सहलाने लगा। कपड़े के ऊपर से भी उनकी गर्मी और नमी महसूस हो रही थी। साथ ही मैं उनके होंठों को गहरी चुम्बन में ले लिया, अपनी जीभ उनके मुंह में डाल दी।

कुछ देर बाद मैंने उनकी ब्रा का हुक खोलकर उतार दिया। बीस-बाईस साल बाद उनकी चूचियां फिर मेरे सामने थीं, भरी हुई, गोल और निप्पल्स गुलाबी। मैंने एक चूची मुंह में ले ली, जीभ से निप्पल को घुमाया, धीरे-धीरे चूसा। मम्मी की सांसें भारी हो गईं और वे हल्के-हल्के कराहने लगीं। मेरे हाथ नीचे पैंटी पर थे, मैंने उसे भी उतार दिया। मम्मी ने आज ही अपनी चूत को साफ शेव किया था, बिल्कुल चिकनी और मुलायम। मैंने उंगलियों से उसकी चूत की पलकों को सहलाया, फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाली। वे नाजुकता से चिहुंक उठीं और उनका शरीर हल्का सा कांप गया। उनकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी।

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मैंने उनकी चूत के होठों को उंगलियों से खोला और अपने मुंह को वहां लगा दिया। पहले मैंने बाहर की पलकों को चाटा, उनका मीठा-खारा स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया। फिर मैंने जीभ से उनकी क्लिटोरिस को छुआ, हल्का सा दबाया और चूसा। मम्मी के मुंह से आह निकल गई। मैंने जीभ को चोंच की शक्ल दी और उनकी चूत के अंदर डालना शुरू किया। वे अपनी कमर उठा-उठाकर मेरी जीभ का स्वागत कर रही थीं। तभी मम्मी ने मेरा लंड अपनी नरम मुठ्ठी में जकड़ लिया, उसे जोर से दबाया और मेरे लोअर को फुर्ती से नीचे सरका दिया। अब मेरा सख्त लंड उनकी हथेली में था और वे उसे ऊपर-नीचे करने लगीं जबकि मैं उनकी चूत को चाटता रहा।

जब मेरा लण्ड टनटना कर मूसल जैसा हो गया और मम्मी की चूत भी अच्छी तरह से गीली हो गई तो मैंने एक तकिया मम्मी के चूतड़ों के नीचे रखा और मम्मी की टांगों के बीच आ गया.

मम्मी की चूत के लबों को खोलकर अपने लण्ड का सुपाड़ा मम्मी के चूत के मुखद्वार पर सेट करके मैं आगे की ओर झुका और मम्मी की दाहिनी चूची अपने दोनों हाथों से पकड़कर चूसने लगा. मेरी उंगलियों ने उनकी चूत की नरम और पूरी तरह से गीली पलकों को धीरे-धीरे अलग किया जिससे अंदर का गुलाबी और चमकदार मुखद्वार पूरी तरह खुल गया। गर्म चिपचिपा रस मेरी उंगलियों पर लग गया और उसकी मीठी-खारी महक मेरे नथुनों में भर गई। मैंने अपने लण्ड का फूला हुआ सुपाड़ा जो अब लाल और चमकदार हो चुका था उनके चूत के प्रवेश द्वार पर ठीक से सेट किया। सुपाड़े की नोक पर से निकलता पारदर्शी तरल उनके रस में मिलकर और भी चिकना हो गया। मैं धीरे से आगे की ओर झुका मेरी छाती उनकी भरी हुई चूचियों से जोर से दब गई। साथ ही मैंने उनकी दाहिनी चूची को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ लिया उसकी गर्मी और नरमी मेरी हथेलियों में महसूस होती रही। मैंने निप्पल को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा अपनी जीभ से उसे घुमाते हुए कभी हल्का-हल्का काटते हुए। मम्मी के शरीर में हल्की सिहरन दौड़ गई और उनकी सांसें भारी होने लगीं।

मम्मी ने चूतड़ उचकाकर जाहिर कर दिया कि वो अब चुदवाने के लिए बेताब हैं. उनके चूतड़ ऊपर की ओर उठे कमर ने एक तेज झटका लिया और उन्होंने अपनी चूत को मेरे सुपाड़े पर और जोर से दबा दिया। इससे उनके चूत के लब मेरे लण्ड पर और भी कस गए और गर्मी का एक लहर उनके पूरे शरीर में दौड़ गई। उनकी आंखें आधी बंद हो गईं और होंठों के बीच से एक लंबी कराह निकली। उनका चेहरा वासना से लाल हो चुका था और वे बार-बार अपनी कमर हिला रही थीं मानो अब और इंतजार नहीं सहन हो रहा हो।

अपनी मम्मी की चूची चूसते चूसते मैंने अपना लण्ड मम्मी की चूत में धकेला तो धीरे धीरे पूरा लण्ड मम्मी की चूत में समा गया. मम्मी की चूत कल की अपेक्षा आज टाइट लग रही थी. या तो आज मेरा लण्ड ज्यादा टनटनाया हुआ था या चूतड़ों के नीचे तकिया रखने से मम्मी की चूत टाइट हो गई थी. मैंने धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया हर इंच के साथ उनकी चूत की तंग दीवारें मेरे मोटे लण्ड को कसकर जकड़ रही थीं। गीला चिपचिपा रस लण्ड को और आसानी से अंदर ले जा रहा था लेकिन फिर भी टाइटपन से एक अद्भुत घर्षण हो रहा था। पूरा लण्ड जब जड़ तक समा गया तो मम्मी के मुंह से एक लंबी आह निकली उनकी आंखें पूरी तरह बंद हो गईं और उनका पूरा शरीर एक झटके से कांप उठा। उनकी चूत की मांसपेशियां बार-बार सिकुड़ रही थीं मेरे लण्ड को अंदर खींच रही थीं।

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मेरा लण्ड मम्मी की चूत के अन्दर था और मम्मी की चूची मेरे मुंह के अन्दर. दोनों तरफ से गर्मी का अद्भुत एहसास हो रहा था मेरे मुंह में उनकी चूची का नरम मीठा स्वाद था जबकि मेरा लण्ड उनकी चूत की गर्म चिपचिपी गहराई में पूरी तरह डूबा हुआ था। मेरी छाती उनकी छाती से सटी हुई थी और हम दोनों की सांसें एक-दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं।

मेरे बालों में उंगलियां चलाते हुए मम्मी बोलीं- सोनू, मेरे राजा, मेरी जान मुझे रेनू कहकर बुलाओ, मैं तुम्हारी रेनू हूँ. मुझसे अश्लील भाषा में बात करो, मुझे चोदो, मेरी चूत की धज्जियां उड़ा दो, मेरी चूचियां नोचो, काटो. मेरे साथ दरिंदगी करो, मैं बरसों की प्यासी हूँ, तेरे पापा कुछ नहीं कर पाते थे, मैं बहुत तड़पी हूँ. मुझे चोदो, जमकर चोदो, गंदी गंदी बातें सुनाते हुए चोदो. उनकी उंगलियां मेरे बालों में कस गईं और उन्होंने मेरे सिर को अपनी चूची पर और जोर से दबाया। उनकी आवाज में वर्षों की प्यास साफ झलक रही थी चेहरा शर्म और वासना से लाल हो रहा था।

अपना लण्ड आधा बाहर निकालकर जोर से अन्दर ठोंकते हुए मम्मी की दोनों चूचियां अपनी मुठ्ठियों में दबोचते हुए मैंने कहा- रेनू डार्लिंग, मेरी जान, मेरी गुलो गुलजार मैं तुम्हें जमकर चोदूंगा, मेरा लण्ड जब अपनी रफ्तार पकड़ेगा तो तुम्हारी नाभि के भी परखच्चे उड़ा देगा. तुम मुझसे चुदवाने के लिए ही पैदा हुई हो और तुमने मुझे इसीलिए पैदा किया था कि मैं तुम्हारी चूत की आग बुझा सकूं. लो झेलो, अब मेरे लण्ड की ठोकरें. मैंने लण्ड को आधा बाहर खींचा जिससे उनकी चूत के होंठ मेरे लण्ड के साथ खिंचे फिर पूरे जोर से अंदर ठोंक दिया। दोनों चूचियों को मुठ्ठियों में कसकर दबाया निप्पल्स को अंगूठों से मसलने लगा। हर ठोकर पर उनके शरीर में कंपन पैदा हो रहा था।

इतना कहकर मैंने मम्मी की चूचियां छोड़ दीं, मम्मी की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और अपना लण्ड मम्मी की चूत में अन्दर बाहर करना शुरू किया. उनकी टांगें मेरे कंधों पर लद गईं जिससे उनकी चूत और भी ऊपर उठ गई और मेरे लण्ड के लिए गहरा कोण बन गया। मैंने धीरे-धीरे पिस्टन जैसा मूवमेंट शुरू किया लण्ड को पूरी लंबाई तक बाहर निकालकर फिर जोर से अंदर धकेलने लगा। हर बार चूत से चिपचिपी आवाजें निकल रही थीं और मम्मी की सांसें तेज होती जा रही थीं।

दो तीन बार धीरे धीरे करने के बाद जब दो तीन शॉट जोर से मारे तो मम्मी चिल्ला पड़ी. मैंने हंसते हुए कहा- रेनू मैडम, अब चिल्लाने से कुछ नहीं होगा, चुदाई ऐसे ही होगी और रातभर होगी. हर जोरदार धक्के पर उनके शरीर में कंपन पैदा हो रहा था उनकी चूचियां ऊपर-नीचे उछल रही थीं। मेरा पेट उनकी चूत से टकराते समय पच-पच की तेज आवाजें भर रही थीं। मम्मी की आंखें फट गईं और वे जोर से चिल्लाईं लेकिन मैं रुका नहीं।

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राजधानी एक्सप्रेस की स्पीड से पड़े धक्कों से मम्मी हाँफने लगी और हाथ जोड़कर रुकने का निवेदन किया. मैं रूका तो मम्मी ने अपनी टांगें मेरे कंधों से उतार लीं और अपनी सांस सामान्य करने लगीं. मेरे तेज धक्कों से वे बुरी तरह हांफ रही थीं सीने में जोर-जोर से सांस आ रही थी। उनके चेहरे पर पसीने की बूंदें चमक रही थीं और शरीर पूरी तरह लाल हो चुका था।

मैंने मम्मी को पलटाकर घोड़ी बना दिया और उनके पीछे आकर चूत का मुंह फैला कर अपने लण्ड का सुपारा रख दिया. दोनों हाथों से मम्मी की कमर पकड़कर जोर का झटका मारा और पूरा लण्ड पेल दिया. मैंने उन्हें घुटनों और हाथों के बल घोड़ी बनाया उनकी गोरी कमर और गोल चूतड़ मेरे सामने थे। उंगलियों से उनकी चूत को फैलाया सुपाड़ा फिर से उनके गीले छेद पर रखा और एक जोरदार झटके से पूरा मोटा लण्ड जड़ तक अंदर धकेल दिया।

पैसेंजर ट्रेन की रफ्तार से शुरू हुई चुदाई जब राजधानी एक्सप्रेस की स्पीड तक पहुंची तो मेरा लण्ड अकड़ने लगा. मम्मी की टांगें दर्द करने लगी थीं. उनके बार बार कहने पर उनको सीधा करके पीठ के बल लिटा दिया.

इस बार उनके चूतड़ों के नीचे दो तकिये रखे जिससे चूत का मुंह आसमान की तरफ हो गया. मैंने पहले एक मोटा नरम तकिया उनके भरे हुए गोल चूतड़ों के ठीक नीचे सरकाया फिर दूसरा तकिया भी उसके ऊपर जोड़ दिया। इससे मम्मी की कमर काफी ऊंची हो गई उनकी पीठ का निचला हिस्सा आराम से ऊपर उठ गया और उनकी चूत का पूरा मुंह आसमान की तरफ खुल गया। उनकी चूत अब पूरी तरह उभार पर थी गीली पलकें स्वाभाविक रूप से अलग हो गई थीं और अंदर का गुलाबी गीला हिस्सा चमक रहा था। लण्ड को मम्मी की चूत में डालकर मैं मम्मी के ऊपर लेट गया और मम्मी की चूचियां पकड़कर रेनू रेनू कहते हुए चोदने लगा. मैंने अपने टनटनाए हुए मोटे लण्ड को हाथ में पकड़ा सुपाड़े को उनकी चूत के खुले हुए गीले मुखद्वार पर कई बार ऊपर नीचे रगड़ा जिससे उनका रस मेरे सुपाड़े पर अच्छी तरह लग गया। फिर मैंने धीरे लेकिन मजबूती से दबाव बढ़ाया और पूरा लण्ड एक ही झटके में जड़ तक अंदर धकेल दिया। उनकी चूत की तंग दीवारें मेरे लण्ड को चारों तरफ से कसकर जकड़ लीं गर्मी और नमी का अद्भुत एहसास हो रहा था। मैं पूरी तरह उनके ऊपर लेट गया मेरी छाती उनकी भरी हुई चूचियों पर जोर से दब गई। दोनों हाथों से उनकी चूचियों को मुठ्ठियों में भरकर मैं रेनू रेनू कहते हुए तेजी से हिलने लगा। हर जोरदार धक्के पर उनकी चूचियां मेरी हथेलियों में दब जातीं और कमर से चूत टकराने की पच पच की चिपचिपी आवाज कमरे में गूंजने लगी।

जब डिस्चार्ज का समय नजदीक आया तो मम्मी के होंठ अपने होंठों में दबाकर मैंने लण्ड की स्पीड बढ़ा दी. मेरे अंडकोष सिकुड़ने लगे लण्ड और भी ज्यादा अकड़ गया और मैंने उनके नरम गुलाबी होंठों को अपने मुंह में भर लिया। जोर से चूसते हुए अपनी जीभ उनकी जीभ से उलझा दी। लण्ड की गति अब बहुत तेज हो गई थी छोटे छोटे लेकिन बहुत जोरदार धक्के पड़ रहे थे। मम्मी की चूत मेरे लण्ड को बार बार सिकुड़कर पकड़ रही थी उनकी सांसें हांफने लगी थीं और चेहरा वासना से लाल हो गया था। डिस्चार्ज होने के बाद भी कुछ देर तक मैं मम्मी के ऊपर ही लेटा रहा. अचानक मेरे लण्ड ने जोर जोर से स्पंदन किया और गर्म गर्म वीर्य की पहली मोटी फुहार उनकी चूत की सबसे गहरी जगह पर छूट गई। मैंने और जोर से धक्का मारा और लंबे लंबे झटकों के साथ अपना पूरा लोड उनके अंदर उंडेल दिया। वीर्य की गर्म धाराएं उनके गर्भाशय तक पहुंच रही थीं उनकी चूत मेरे लण्ड को निचोड़ रही थी। पूरा डिस्चार्ज होने के बाद भी मैं कुछ देर तक उनके ऊपर ही लेटा रहा हम दोनों की सांसें एक दूसरे के चेहरे पर पड़ रही थीं पसीने से हम दोनों भीग चुके थे और उनकी चूत से मेरा वीर्य धीरे धीरे बाहर रिसने लगा।

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जब मैं हटा तो मम्मी बोलीं- सोनू, तुम लोटा भरकर डिस्चार्ज करते हो, मेरी पूरी चूत भर दी. उस रात मैंने मम्मी को तीन बार चोदा. अब यह रोज का काम हो गया. करीब बीस दिन बाद भाग्य ने फिर करवट ली. रात को खाना खाने के बाद हम बेडरूम में आ गए, लेटते ही मैंने अपना हाथ मम्मी की चूचियों पर फेरना शुरू किया तो मम्मी ने मेरा हाथ पकड़कर चूचियों से हटा दिया और अपने पेट पर रखते हुए बोलीं- सोनू, तुम्हारा छोटा सोनू मेरे पेट में पल रहा है. मैंने मम्मी को बांहों में भरकर चूमते हुए कहा- रेनू, मेरी जान, मेरे बच्चे की मम्मी, आई लव यू. इसके बाद मैंने अनु से तलाक ले लिया. अपनी दुकान और मकान बेच दिया और हम लोग कानपुर से सैकड़ों किलोमीटर दूर भुवनेश्वर में आकर बस गए, जहां हमें कोई नहीं जानता था. अब इस घर में तीन प्राणी हैं. मैं, मेरी पत्नी रेनू और हमारा बेटा मोनू. समाप्त

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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