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नामर्द पति की बहू बूढ़े ससुर से चुद रही है

Bade ghar ki bahu sex story: जब आप बड़े घर की बहू होती हैं तो चारदीवारी के अंदर और भी बहुत से कांड होते हैं। बाहर से तो यह महल सम्मान, धन और शान का प्रतीक दिखता है लेकिन अंदर की दीवारों के बीच छुपे हुए गुप्त संबंधों और वासना के खेलों की कोई सीमा नहीं होती। रात के अंधेरे में होने वाले उन गर्म स्पर्शों और दबी हुई सिसकारियों को कोई बाहर नहीं जान पाता। हर कमरे में एक अलग कहानी छुपी होती है जो बाहर की दुनिया से पूरी तरह अलग होती है।

लोगों को लगता है कि जिंदगी बड़ी अच्छी चल रही होगी पर ऐसी बात नहीं होती है। वे सोचते हैं कि बड़ी हवेली में रहने वाली बहू को हर सुख मिलता होगा लेकिन असल में अंदरूनी खालीपन और शारीरिक भूख उसे अंदर से तोड़ती रहती है। बाहर से मुस्कुराती हुई इज्जतदार औरत की छवि सिर्फ एक मुखौटा होती है। अंदर की सच्चाई बहुत अलग और गहरी होती है।

आज मैं आपको अपनी चुदाई की कहानी बताने जा रही हूं। मैं अपने शरीर की हर सनसनी और हर उस पल की पूरी डिटेल में आपको अपनी वासना की इस गुप्त यात्रा सुनाने जा रही हूं। जिसमें मैं पूरी तरह डूब चुकी हूं और जिसे छुपाकर रखना अब मुश्किल हो गया है।

मेरे ससुर जी मुझे कैसे चोदते हैं इतने बूढ़े होकर भी मेरी चूत और गांड फाड़ देते हैं। उनकी उम्र के बावजूद उनकी मर्दानगी इतनी तीखी है कि वे अपने मोटे और कठोर लंड से मेरी चूत को पूरी तरह खोल देते हैं। हर धक्के के साथ मेरी कोमल चूत की दीवारें फैलती हैं और गर्म रस निकलने लगता है। उनकी उंगलियां मेरी गांड के छेद को फैलाती हैं जिससे मैं दर्द और लुत्फ दोनों महसूस करती हूं।

बूढ़ा शेर है मेरा ससुर जो कि एक कमसिन हिरन की तलाश में ही रहता है चाहे मेरी नौकरानी मीना हो या मैं खुद। उनकी नजर हमेशा जवानी से भरे नाजुक शरीर पर रहती है। वे मेरी उभरी चूचियों को घूरते हैं और मेरी गोल गांड को नापते हैं। मीना की तरह मुझे भी वे अपनी भूख का शिकार बनाना चाहते हैं।

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वो चाहे तो हम दोनों को एक साथ पेल दे चोद दे। उनकी भूख इतनी असीम है कि वे दोनों को एक साथ बिस्तर पर लिटा कर अपनी मोटी लिंग की ताकत से भर सकते हैं। एक के बाद दूसरे को या दोनों को एक साथ अपनी इच्छा पूरी कर सकते हैं।

आज मैं आपको अपनी इस काले कारनामे को आप लोगों के सामने लाने जा रही हूं। मैं बिना किसी झिझक के अपने इस वर्जित संबंध को आपके सामने खोल रही हूं। ताकि आप मेरे अंदर चल रहे तूफान को महसूस कर सकें।

ताकि आप लोग भी मेरी ये कहानी पढ़कर समझ सकें कि बड़े घर की बहुएं कैसे चुदती हैं अपने ही घर में। कैसे वे अपनी चूत की प्यास अपने ही परिवार के बुजुर्ग से बुझाती हैं। और कैसे ऊपरी दिखावे के पीछे उनकी असली जिंदगी छुपी रहती है।

और सबको लगता है बड़ी इज्जत वाली होती होगी।

मैं 28 साल की हूं। मेरा युवा और आकर्षक शरीर अभी भी पूरी तरह से ताजा और कोमल है जिसमें गोल चूचियां उभरी हुई हैं और निचली कमर पर गोल गांड का आकार साफ दिखता है। मेरा चेहरा गोरा और आंखें बड़ी हैं जो अक्सर शर्म से झुक जाती हैं लेकिन अंदर से वासना की आग जलती रहती है। मैंने अपनी जिंदगी में कई समझौते किए हैं और अब इस उम्र में भी मैं खुद को खुश रखने की कोशिश करती हूं।

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मेरा पति मेरे से बाईस साल बड़ा है मैं दूसरी पत्नी हूं। उनका शरीर भारी और रोबदार है लेकिन उम्र के कारण उनकी ताकत कमजोर पड़ चुकी है जो मैंने बाद में महसूस किया। मैं उनकी दूसरी पत्नी हूं और इस रिश्ते में मैंने अपनी गरीबी का बोझ भी उठाया है। वे बड़े घर के मालिक हैं लेकिन मेरे लिए सिर्फ एक नाम मात्र के पति बनकर रह गए हैं।

गरीब घर से आई हूं तो कुछ तो समझौता करना पड़ा। मेरे परिवार की हालत इतनी खराब थी कि खाने के लिए भी मुश्किल होती थी इसलिए मैंने अपनी जवानी का सौदा करने का फैसला किया। शादी के नाम पर मैंने अपनी उम्र से दोगुनी उम्र वाले व्यक्ति को स्वीकार कर लिया। मेरा दिल डर रहा था लेकिन मजबूरी ने मुझे आगे बढ़ने पर मजबूर कर दिया।

अपने से दूना उम्र की आदमी से शादी करने के लिए राजी हो गई। मैंने सोचा कि शायद इस शादी से मेरी जिंदगी संवर जाएगी और मैं बड़े घर की बहू बनकर सम्मान पा लूंगी। रातों को अकेले बैठकर मैंने कई बार कल्पना की थी कि मेरा पति मुझे प्यार से छुएगा और मेरी सारी इच्छाएं पूरी करेगा। लेकिन असलियत बहुत अलग निकली।

सौतेली मां होती ही ऐसी है उसने ही ये शादी करवा दी। उसने मुझे समझाया कि यह मेरे लिए अच्छा मौका है और मैंने विरोध नहीं किया क्योंकि परिवार की इज्जत और पैसे दोनों दांव पर थे। वह खुद इस शादी में खुश थी क्योंकि इससे उसे भी कुछ फायदा मिलने वाला था। मैं चुपचाप तैयार हो गई और मंडप में बैठ गई।

शादी के बाद अपने ससुराल आ गई। बड़ी हवेली के द्वार पर पहुंचते ही मुझे लगा कि मैं किसी राजमहल में आ गई हूं जहां हर चीज चमक रही थी। ससुराल का माहौल शानदार था लेकिन अंदर कुछ अजीब सा सन्नाटा भी था जो मुझे परेशान कर रहा था। मैंने अपना सामान रखा और नए घर को देखने लगी।

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ससुराल में मैं मेरा पति अजय सिंह जी उनका जवान बेटा शिवांश और मेरा ससुर राम प्रकाश। यह पूरा परिवार एक बड़े महल में रहता था जहां हर सदस्य अपनी अपनी जगह पर था। मेरा पति अजय सिंह जी हमेशा व्यस्त रहते थे और उनका बेटा शिवांश जवान हो चुका था। मेरा ससुर राम प्रकाश अपाहिज थे लेकिन उनकी नजरें अभी भी तेज थीं।

घर में औरत के नाम पर तीन काम वाली। ये तीनों नौकरानियां पूरे दिन महल की सफाई और काम करती थीं लेकिन उनके साथ कुछ और भी चल रहा था जिसे मैं बाद में समझी। वे सब युवा और आकर्षक थीं जिन्हें परिवार के पुरुषों की नजरें हमेशा घेरती रहती थीं। मैंने महसूस किया कि यह महल सिर्फ दिखावे का नहीं बल्कि अंदर से बहुत कुछ छुपाए हुए है।

घर नहीं महल है। चारों तरफ संगमरमर की दीवारें और ऊंची छतें थीं जहां सोने की झालरें लटक रही थीं। हर कमरे में पुरानी तस्वीरें और महंगे फर्नीचर थे जो इस परिवार की पुरानी जागीर की कहानी बताते थे। मैं इस भव्यता को देखकर चकित रह गई।

जागीर है बड़ी हवेली। यह हवेली सदियों पुरानी थी और इसमें कई पीढ़ियों का इतिहास छुपा था। बाहर से यह सम्मान का प्रतीक थी लेकिन अंदर की दीवारें कई गुप्त राज जानती थीं। मैंने सोचा कि यहां रहकर मैं भी इस परिवार का हिस्सा बन जाऊंगी।

मीना उसमें से एक ऐसी नौकरानी है जिसको मेरे पति भी पेलते थे। मीना की उम्र मेरे करीब ही थी और उसका शरीर बहुत आकर्षक था जिसे देखकर पुरुषों की नजरें रुक जाती थीं। मेरे पति उसे अक्सर अपने कमरे में बुलाते थे और मैंने बाद में सुना कि पूरा परिवार उसे इस्तेमाल करता था। यह बात मुझे हैरान करती थी लेकिन मैं चुप रहती थी।

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उनका बाप भी और बेटा भी यानी कि तीन तीन पीढ़ी एक लड़की को पेल रहे थे आप खुद ही सोचिए क्या चल रहा होगा महल में। एक ही लड़की को तीन पीढ़ियां इस्तेमाल कर रही थीं जो इस परिवार की अंदरूनी संस्कृति को दिखाता था। मैंने सोचा कि शायद यहां सब कुछ सामान्य है और मैं भी धीरे धीरे इसमें घुल मिल जाऊंगी। यह महल बाहर से शानदार था लेकिन अंदर से वासना से भरा हुआ था।

जब मैं आई तो देखा यहां का माहौल बहुत ही अलग है। हर कोई मुस्कुराता था लेकिन उनकी नजरों में कुछ छुपा हुआ था जो मुझे असहज करता था। नौकरानियां चुपचाप काम करती थीं लेकिन उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान रहती थी। मैंने महसूस किया कि यह घर सिर्फ रहने के लिए नहीं बल्कि कई गुप्त खेलों का अड्डा है।

पर मैं कर भी क्या सकती। मैं गरीब घर से आई थी और अब बड़े खानदान की बहू बन चुकी थी इसलिए मैंने सब कुछ स्वीकार कर लिया। मेरे पास कोई विकल्प नहीं था सिर्फ इस नए जीवन को अपनाना था। मैंने अपने दिल को समझाया कि सब ठीक हो जाएगा।

पर यही सोचकर खुश हो गई कि बड़े खानदान की बीवी और बहू बन गई हूं इसी का गुमान था। मुझे लगा कि अब मेरी जिंदगी में इज्जत और सुविधाएं दोनों होंगी। लोग मुझे सम्मान की नजर से देखेंगे और मैं महल की मालकिन बन जाऊंगी। यह गुमान मेरे दिल को गर्म रखता था।

इज्जत थी। चारों तरफ से लोग मुझे सलाम करते थे और मेरी हर जरूरत पूरी की जाती थी। मैंने सोचा कि यही तो वह जीवन है जिसके लिए मैंने सब कुछ छोड़ा था। यह इज्जत मुझे बहुत अच्छी लग रही थी।

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किसी चीज की कमी नहीं थी जैसी चाहती थी जिंदगी वैसी ही मिली। महल में खाना पहनावा और हर सुविधा उपलब्ध थी जो मेरे गरीब घर में कभी नहीं थी। मैंने अपने आप को बहुत भाग्यशाली समझा। जिंदगी अब स्वप्न जैसी लगने लगी थी।

व्याह कर घर आई तो घर में खुशियां आ गईं। सब लोग मेरा स्वागत करने लगे और महल में उत्सव का माहौल बन गया। हर कोई मुझे नई बहू कहकर पुकारता था। मैं खुश थी कि मेरी उपस्थिति ने घर को रोशन कर दिया।

सब लोग इज्जत करने लगे। नौकर चाकर मेरे आगे पीछे रहते थे और कोई भी काम करने से पहले मेरी अनुमति लेते थे। मुझे लगा कि मैं अब असली रानी बन गई हूं। यह इज्जत मेरे दिल को छू रही थी।

चार चार नौकरानी आगे पीछे रहने लगी। वे हर समय मेरी सेवा में तत्पर रहती थीं और मुझे हर छोटी बड़ी चीज उपलब्ध कराती थीं। मैं उनके साथ बातें करती और महसूस करती कि मेरा नया जीवन शुरू हो चुका है। यह सब मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

पर रात को जब पति मेरे साथ सोने आए और मैं दूध लाई उनके लिए। मैंने सफेद साड़ी पहनी थी और दूध का गिलास लेकर उनके बेडरूम में गई। उनकी आंखों में एक चमक थी जो मुझे प्यार भरी लग रही थी। मैंने दूध उन्हें थमा दिया और शरमाते हुए खड़ी रही।

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उन्होंने गले लगाया मुझे लगा कि पूरी दुनिया मिल गई है। उनके मजबूत बाहों ने मुझे कसकर जकड़ लिया और उनका गर्म सांस मेरा गाल छू रहा था। मुझे लगा कि अब मेरी सारी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी। मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा और मैं उनकी छाती से चिपक गई।

खुश रहूंगी और खुश रखूंगी। मैंने मन ही मन वादा किया कि मैं उन्हें हर तरह से संतुष्ट करूंगी। उनकी गोद में मैं खुद को सुरक्षित महसूस कर रही थी। यह पल मेरे लिए बहुत खास था।

पर आधे घंटे में ही सब कुछ बेकार हो गया। उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे शरीर को देखने लगे। मेरा दिल अभी भी उमंग से भरा था लेकिन उनकी हरकतें अचानक बदल गईं। मैं समझ नहीं पाई कि क्या होने वाला है।

मेरे सारे कपड़े उतारे। उन्होंने पहले मेरी साड़ी की पल्लू खींची फिर ब्लाउज के हुक खोले और सारी साड़ी उतार दी। मेरा युवा शरीर अब सिर्फ ब्रा और पेंटी में था जो ठंडी हवा से कांप रहा था। उनकी नजरें मेरी चूचियों और चूत पर घूम रही थीं।

ब्रा खोला पेंटी खोली। उन्होंने ब्रा का हुक पीछे से खोला और मेरी दोनों चूचियां बाहर आ गईं जिनके निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। फिर उन्होंने पेंटी को नीचे खिसकाया और मेरी साफ चूत पूरी तरह नंगी हो गई। मेरा पूरा जिस्म अब उनके सामने बिना किसी कपड़े के था।

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खूब चाटा मेरी चूत को खूब पीया मेरी चूचियां निप्पल भी खूब दबाया उंगलियों से। उन्होंने मुंह नीचे किया और अपनी गर्म जीभ मेरी चूत की फांकों पर फिराई जो मेरी चूत को गीला कर रही थी। वे मेरी क्लिटोरिस को चूसते और जीभ अंदर डालकर मेरे रस को पीने लगे जिसका स्वाद मीठा और गर्म था। एक हाथ से वे मेरी चूचियों को मसलते और निप्पल को उंगलियों से कसकर दबाते जिससे दर्द और मजे का मिश्रण होता था।

गांड में तीन तीन बार उंगली डाली। उन्होंने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद पर रखी और धीरे से अंदर डाली जो मेरी गांड को फैलाने लगी। तीन बार उन्होंने उंगली अंदर बाहर की और फिर दूसरी उंगली भी डाल दी जिससे मेरी गांड में जलन और सनसनी दोनों थी। मेरा शरीर झटके खाने लगा।

चूत पर खूब हाथ फेरा। उनकी उंगलियां मेरी चूत की फांकों को खोलती और क्लिटोरिस को रगड़ती थीं जिससे गर्म रस लगातार निकलने लगा। वे दो उंगलियां चूत में डालकर अंदर बाहर करने लगे जो मेरी दीवारों को छू रही थीं। मेरा शरीर पूरी तरह गीला और चिपचिपा हो गया था।

मेरी जिस्म को पानी पानी कर दिया। मेरा पूरा शरीर पसीने से तर हो गया था और मेरी चूत से रस की धार बह रही थी। उनके स्पर्श से मेरी त्वचा पर रोमांच की लहरें दौड़ रही थीं। मैं सिसकियां भर रही थी और मेरी सांसें तेज हो गई थीं।

चूत से गरम गरम पानी निकल गया। मेरी चूत की दीवारें सिकुड़ रही थीं और गर्म रस उनके मुंह और उंगलियों पर गिर रहा था। वे उस रस को चाटते और और ज्यादा उत्तेजित होते थे। मेरा शरीर अब पूरी तरह तैयार हो चुका था।

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मुंह से सिसकारियां निकलने लगी। मैं अनियंत्रित सिसकारियां भर रही थीं जैसे आह आह और उफ्फ जो कमरे में गूंज रही थीं। मेरा चेहरा लाल हो गया था और आंखें बंद थीं। वासना ने मुझे पूरी तरह जकड़ लिया था।

मेरी वासना चरम सीमा पर थी। मेरा शरीर अब और ज्यादा चोदाई की मांग कर रहा था और मैं बेचैन हो रही थी। मेरी चूत पलपल सिकुड़ रही थी और मुझे लग रहा था कि बिना लंड के मैं पागल हो जाऊंगी। हर सनसनी मुझे और भूखी बना रही थी।

मुझे लग रहा था अब मुझे लंड चाहिए। मेरा मन बार बार यही पुकार रहा था कि अब मुझे एक मोटा और कठोर लंड चाहिए जो मेरी चूत को भर दे। मैंने अपनी आंखें खोली और उनके लंड की तरफ देखा जो अभी भी सख्त था। मेरी सारी इच्छा अब चरम पर थी।

मेरी गरम गरम सांसें निकलने लगी। मेरी सांसें इतनी तेज और गर्म हो गई थीं कि वे उनके चेहरे को छू रही थीं। मेरा सीना ऊपर नीचे हो रहा था और चूचियां हिल रही थीं। मैं पूरी तरह उत्तेजित और तैयार थी।

मैं अपना पैर फैला दी चूत खोल दी। मैंने दोनों पैर चौड़े करके फैला दिए और अपनी उंगलियों से चूत की फांकें खोल दीं ताकि वे आसानी से अंदर आ सकें। मेरी चूत अब पूरी तरह खुली और गीली दिख रही थी। मैं उनकी नजरों में अपनी भूख दिखा रही थी।

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चूचियां हौले हौले से दबाने लगी और अपने दांत से खुद के होंठ को दबाने लगी। मैंने खुद अपनी चूचियों को हल्के से दबाया और निप्पल को उंगलियों से मसलने लगी। दूसरी ओर मैंने अपने होंठ को दांतों से कसकर दबाया ताकि चीख न निकले। मेरा चेहरा वासना से विकृत हो गया था।

पति रोबाब वाला आदमी मेरे ऊपर चढ़ गया। उनका भारी शरीर मेरे ऊपर आ गया और उनकी छाती मेरी चूचियों पर दब रही थी। उनका लंड मेरी जांघों को छू रहा था और मैं उनके गर्म सांस महसूस कर रही थी। मेरा दिल तेज धड़क रहा था।

और लंड पकड़ कर चूत पर लगाया। उन्होंने अपना लंड हाथ में पकड़ा और मेरी चूत के मुंह पर उसका सिर टिका दिया जो गर्म और नब्ज की तरह धड़क रहा था। मैंने महसूस किया कि अब वे अंदर आने वाले हैं। मेरा शरीर तैयार था लेकिन डर भी था।

मेरी सांसें अटक गईं कि अब क्या होगा। मेरी सांसें रुक सी गईं और मैं आंखें बंद करके इंतजार करने लगी। मुझे लगा कि अब दर्द होगा लेकिन मजा भी मिलेगा। मेरा पूरा ध्यान चूत पर केंद्रित था।

पूरा लंड अंदर गया तो क्या होगा दर्द बहुत होगा। मैं सोच रही थी कि उनका मोटा लंड पूरी तरह अंदर जाएगा तो मेरी चूत कितनी फैलेगी और दर्द कितना होगा। मेरी चूत अभी भी कुंवारी जैसी तंग थी इसलिए डर लग रहा था। फिर भी मैं तैयार थी।

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मैं तकिए को पकड़ ली ताकि दर्द को सह पाऊं। मैंने दोनों हाथों से तकिए को कसकर पकड़ लिया और अपने शरीर को सख्त कर लिया। मेरा मुंह बंद था और मैं सांस रोककर इंतजार कर रही थी। मुझे लगा कि अब पल भर में सब कुछ बदल जाएगा।

पर दोस्तों मेरे चूत पर गरम गरम लगने लगा। अचानक मेरी चूत के बाहर गर्म और चिपचिपा तरल महसूस होने लगा जो तेजी से फैल रहा था। यह उनके लंड से निकला माल था जो मेरी चूत की फांकों पर और क्लिटोरिस पर गिर रहा था। मुझे समझ में आया कि कुछ गलत हो गया है।

पति को देखा तो वो ऊपर चढ़ा हुआ था लंड पकड़ा हुआ था पर सारा माल गिर गया चूत के ऊपर ही बिना चोदे। उनका लंड अभी भी मेरी चूत पर लगा हुआ था लेकिन अंदर नहीं गया था और सारा वीर्य बाहर ही निकल चुका था। उनका चेहरा थका हुआ और लाल था और वे हांफ रहे थे। मुझे बहुत निराशा हुई लेकिन मैं चुप रही।

तुरंत ही वो निढाल हो गया और मेरे करीब ही सो गया।

मैं सांसें रोक रोक कर अपने आप को शांत कर रही थी। मेरी छाती तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी और मेरी चूत अभी भी गर्म और सिकुड़ रही थी जहां पति का गर्म चिपचिपा वीर्य बाहर की फांकों पर फैला हुआ था जो धीरे धीरे ठंडा हो रहा था। मेरा पूरा जिस्म पसीने से तर था और चूत से निकला अपना रस अभी भी जांघों पर बह रहा था जिससे बिस्तर की चादर गीली हो गई थी। मैं दोनों हाथों से अपना मुंह ढककर सांसें संभाल रही थी ताकि कोई आवाज न निकले और मेरी वासना की आग को दबा सकूं। हर सांस के साथ मेरी चूचियां हिल रही थीं और निप्पल सख्त बने हुए थे जो अभी भी स्पर्श की भूख मांग रहे थे। मैंने आंखें बंद करके खुद को समझाया कि शायद अगली बार सब ठीक हो जाएगा लेकिन अंदर से निराशा बढ़ रही थी।

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उन्होंने कहा आज नहीं हो पाएगा आज बहुत टेंशन है। उनकी आवाज थकी हुई और बिना किसी जोश के थी जैसे उन्होंने कुछ भी महसूस नहीं किया हो। वे मेरी तरफ मुड़े बिना ही लेट गए और अपनी आंखें बंद कर लीं। मैंने उनके चेहरे पर थकान और बेफिक्री देखी जो मेरी उम्मीदों को पूरी तरह तोड़ रही थी। मेरा दिल अभी भी धड़क रहा था लेकिन अब दर्द भरी खालीपन महसूस हो रहा था।

और फिर सो गए मैं भी अपने कपड़े पहन ली और सो गई। वे करवट लेकर सो गए और उनकी सांसें नियमित हो गईं जबकि मैं बिस्तर पर लेटी रही। मैंने धीरे से अपनी पेंटी और ब्रा उठाई और वापस पहन ली जिससे मेरी चूत पर चिपका वीर्य अब कपड़े में लग गया। मैं भी चुपचाप लेट गई लेकिन नींद नहीं आ रही थी क्योंकि मेरी चूत अभी भी पलपल सिकुड़ रही थी और पूरा शरीर वासना से भरा था।

मैं थोड़ी देर बाद बाहर गई तो देखा बाबूजी जो कि अपाहिज हैं वो हमेशा चार पहिये वाली गाड़ी पर ही रहते हैं जब सोते हैं तभी उतारते हैं। रात का अंधेरा था और महल की गलियारों में सिर्फ मंद रोशनी जल रही थी। मैं चुपके से पानी पीने के लिए निकली तो बाबूजी अपनी व्हीलचेयर पर बाहर बरामदे में बैठे हुए थे। उनका शरीर अपाहिज होने के बावजूद उनकी नजरें अभी भी तेज और भूखी थीं जो मुझे घूर रही थीं।

बाहर थे वो मुझे घूर रहे थे। उनकी आंखें मेरी साड़ी के ऊपर से मेरी चूचियों और कमर पर फिसल रही थीं जैसे वे मेरे नंगे शरीर को कल्पना में देख रहे हों। मैंने महसूस किया कि उनकी नजर में एक अलग तरह की चमक है जो मेरे पति में कभी नहीं थी। मेरा दिल अचानक तेज धड़का लेकिन मैंने नजरें झुका ली।

उन्होंने कहा बहू सब कुछ ठीक है या नहीं। उनकी आवाज गहरी और मोटी थी जो मेरे कानों में गूंजी और मेरे शरीर में एक अजीब सी सनसनी पैदा कर गई। वे मुस्कुराते हुए बोले जैसे वे मेरे अंदर की बेचैनी जानते हों। मैंने उनकी बात सुनी लेकिन जवाब देने की हिम्मत नहीं हुई।

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मैं कुछ नहीं बोली और पानी निकालने लगी और वही पीने लगी। मैंने गिलास में पानी भरा और जल्दी जल्दी पी लिया ताकि वहां से भाग सकूं। पानी ठंडा था लेकिन मेरी गरम सांसों से गिलास पर भाप बन रही थी। मेरा गला सूखा हुआ था और चूत अभी भी गीली थी जो मुझे असहज कर रही थी।

बाबूजी बोले कोई दिक्कत हो तो मुझे बता देना। उनकी बात में एक छुपा हुआ इशारा था जैसे वे मेरी समस्या का हल जानते हों। वे अपनी व्हीलचेयर पर सीधे बैठे रहे और उनकी नजरें मेरे पीछे तक जाती रहीं। मैंने महसूस किया कि उनकी उपस्थिति में मेरी वासना फिर से जाग रही है।

और मैं फिर अपने कमरे में आ गई। मैं तेज कदमों से कमरे में लौट आई और दरवाजा बंद कर लिया। बिस्तर पर लेटकर मैं बाबूजी की नजरों को याद कर रही थी जो मेरे शरीर को नाप रही थीं। उस रात नींद बहुत देर से आई और सपनों में भी वासना छुपी रही।

दूसरे दिन भी यही तीसरे दिन भी यही। हर रात पति के साथ वही नाकाम कोशिश होती और हर बार वे बिना चोदे ही झड़ जाते। मैं हर बार शांत होने की कोशिश करती लेकिन अंदर से मेरी भूख बढ़ती जा रही थी। तीन दिन बाद मुझे साफ समझ आ गया कि यह रोज का सिलसिला है।

यानी कि मेरा पति मुझे चोद नहीं सकता है वो नामर्द है। उनका लंड कभी भी पूरी तरह सख्त नहीं रह पाता और चोदने से पहले ही सारा माल बाहर गिर जाता। मैंने देखा कि उनकी उम्र और तनाव ने उन्हें कमजोर बना दिया है। अब मेरी चूत हर रात बिना संतुष्टि के तड़पती रहती थी।

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करती भी क्या। मैं गरीब घर से आई थी और अब इस बड़े महल में रह रही थी जहां बाहर से सब कुछ शानदार था। मेरे पास कोई रास्ता नहीं था कि मैं इस जिंदगी को छोड़ सकूं। मैंने खुद को समझाया कि सब्र रखना होगा।

मुझे इस महल में रहना था। यह हवेली मेरी नई दुनिया थी जहां इज्जत और सुविधाएं थीं लेकिन शारीरिक सुख नहीं। मैंने फैसला किया कि मैं यहां रहूंगी और धीरे धीरे सब कुछ स्वीकार कर लूंगी। रोज की दिनचर्या में मैं महल के कामों में लगी रही।

बस चुदाई का गम था। मेरी चूत हर समय खाली और भूखी रहती थी जो मुझे रातों को बेचैन कर देती। मैं अकेले में अपनी उंगलियों से खुद को छूती लेकिन वह पूरा संतोष नहीं दे पाती। यह गम मेरे दिल और शरीर दोनों को खा रहा था।

धीरे धीरे मेरी नजदीकियां ससुर जी यानी बाबूजी से हो गई। बाबूजी की व्हीलचेयर के पास बैठकर मैं उनकी बातें सुनने लगी और वे मुझे परिवार की पुरानी कहानियां सुनाते। उनकी नजरें अब मेरी चूचियों पर ज्यादा टिकती और मैं भी शरमाकर मुस्कुराती। धीरे धीरे हम दोनों के बीच एक गुप्त आकर्षण बढ़ने लगा।

बाबूजी उम्रदराज थे। उनकी उम्र साठ से ऊपर थी और शरीर अपाहिज था लेकिन उनकी मर्दानगी अभी भी जवान थी। उनके चेहरे पर अनुभव की लकीरें थीं जो उन्हें आकर्षक बनाती थीं। मैं उनके पास बैठकर महसूस करती कि वे मुझे समझते हैं।

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पर लंड खनक था। उनका लंड इतना मोटा और सख्त था कि देखकर ही मेरी चूत में सनसनी दौड़ जाती। वे कभी कभी अपनी व्हीलचेयर पर बैठे हुए ही मुझे इशारे से बताते कि उनकी ताकत अभी बाकी है। मैं उनकी इस खनक को महसूस करने के लिए बेचैन हो जाती।

शिलाजीत दूध में डालकर पीते थे और रोजाना तेल मालिश करवाते थे। वे हर सुबह दूध में शिलाजीत घोलकर पीते और फिर तेल की मालिश करवाते जिससे उनका लंड और ज्यादा ताकतवर रहता। मैं कभी कभी खुद उनकी मालिश करती तो उनके लंड को छूने का मौका मिलता जो गर्म और नब्ज वाला होता। यह तेल और शिलाजीत उनकी उम्र के बावजूद उन्हें शेर बनाए रखते थे।

लंड बहुत मोटा और लंबा था और लंड में दम भी था। उनका लंड मेरे पति से कहीं ज्यादा मोटा था जो मेरी चूत को पूरी तरह भर देता। लंबाई इतनी कि अंदर जाते ही मेरी गर्भाशय तक पहुंच जाता और दम इतना कि घंटों चोद सकता। पहली बार देखकर मेरी आंखें बड़ी हो गईं।

पहली बार तो लगा कि वो मुझे क्या चोद पाएंगे पर मैं गलत थी वो मुझे खुश कर दिए। मैंने सोचा कि अपाहिज होने के कारण वे सिर्फ देख सकते हैं लेकिन जब उन्होंने मुझे अपने ऊपर बुलाया तो सब बदल गया। उनके मोटे लंड ने मेरी चूत को इतना मजा दिया कि मैं बार बार चरम पर पहुंच गई। वे बूढ़े शेर की तरह मुझे संतुष्ट कर देते थे।

बस मुझे चुदना होता था वो हमेशा नीचे ही रहते थे और मैं ऊपर रहती थी। वे अपनी व्हीलचेयर से हटकर बिस्तर पर लेट जाते और मैं उनकी गोद में सवार हो जाती। यह पोजीशन उन्हें आराम देती और मुझे कंट्रोल देती। मैं हर बार ऊपर बैठकर ही चुदती क्योंकि वे नीचे से ही मुझे भर देते।

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मोटा लंड मेरी चूत में जाने लगा। मैंने अपनी चूत की फांके खोली और उनके मोटे लंड के सिर को अपनी चूत के मुंह पर रखा। धीरे से नीचे बैठते ही उनका गर्म और मोटा लंड मेरी तंग चूत को फैलाता हुआ अंदर घुसने लगा। हर इंच के साथ मेरी दीवारें सिकुड़ती और रस निकलता जो उनके लंड को चिकना बनाता। मैंने पूरा लंड अंदर ले लिया तो मेरी चूत पूरी तरह भरी हुई लगी और गर्माहट पूरे शरीर में फैल गई। मेरा क्लिटोरिस उनके पेट से रगड़ खा रहा था जो मुझे और उत्तेजित कर रहा था।

मेरी चूचियां मसलते और लंड मोटा करके रखते मैं चुदती रहती थी। वे अपने दोनों हाथों से मेरी चूचियों को कसकर मसलते और निप्पल को उंगलियों से खींचते जिससे दर्द और मजे का मिश्रण होता। उनका लंड मेरी चूत में पूरी तरह सख्त बना रहता और हर ऊपर नीचे होने पर मेरी दीवारों को रगड़ता। मैं तेजी से चुदती जाती और मेरी सिसकारियां कमरे में गूंजतीं। हर धक्के पर मेरी चूत से सफेद रस निकलता जो उनके लंड और जांघों पर फैल जाता। मेरा शरीर पसीने से चमक रहा था और चूचियां उनके हाथों में दबती जा रही थीं।

और खुश करती रहती थी ससुर जी को और वो मुझे खुश करते रहते। मैं उनकी चूचियों को चूसती और लंड को अपनी चूत से जकड़ती ताकि वे और ज्यादा मजा लें। वे मेरी गांड को थपथपाते और उंगलियों से छेद को सहलाते जो मुझे और दीवाना कर देता। हम दोनों एक दूसरे को पूरी तरह संतुष्ट करते और रात भर चुदाई का खेल चलता रहता।

उन्होंने एक बात बताई कि पहली बीवी जो मेरे पति की थी। बाबूजी ने धीरे से मुझे बताया कि उनकी पहली बहू भी इसी तरह तड़पती थी। वे उससे भी गुप्त संबंध रखते थे क्योंकि उनका बेटा नामर्द था। मैं सुनकर हैरान थी लेकिन मेरी चूत फिर से गीली हो गई।

उसका भी संबंध उनके साथ था मेरा पति उनको भी नहीं चोद सकता था मेरे ससुर जी ही पहली बहू को चोदते थे। पहली बहू भी हर रात बाबूजी के लंड पर सवार होती थी और वे उसे वही मोटा लंड देते थे। मेरा पति कभी भी उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाया इसलिए ससुर जी ने पूरा परिवार संभाला। यह राज सुनकर मुझे लगा कि मैं भी उसी परंपरा का हिस्सा हूं।

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उनका जो संतान है यानी पोता असल में मेरे ससुर जी का ही बेटा है। शिवांश जो मेरे पति का बेटा दिखता है असल में बाबूजी का अपना खून है। पहली बहू बाबूजी से ही गर्भवती हुई थी और पूरा परिवार यह राज छुपाए हुए है। मैंने यह सुनकर सोचा कि अब मेरा भी यही रास्ता है।

मेरे ससुर से ही वो मां बनी थी। पहली बहू ने बाबूजी के मोटे लंड से ही संतान प्राप्त की थी जो महल की जागीर को आगे बढ़ाने वाला था। यह सब सुनकर मेरी आंखों में नई उम्मीद जागी। मैंने महसूस किया कि बाबूजी ही असली मालिक हैं।

मेरे ससुर जी कह रहे थे जल्दी से एक बेटा पैदा कर दे। खुशियां ला दे घर में।

दोस्तों आज मैं तीन महीने से अपने ससुर से चुद रही हूं। इस पूरे समय में हर रात मेरी चूत बाबूजी के मोटे लंड से भरी रहती है और मैं पूरी तरह संतुष्ट होकर सोती हूं। पहले महीने में मैं शरमाती थी लेकिन अब तो मेरी आदत बन गई है कि रात के अंधेरे में मैं चुपके से उनके कमरे में जाती हूं। वे अपनी व्हीलचेयर से बिस्तर पर लेटे रहते हैं और मैं उनकी गोद में चढ़ जाती हूं। उनका गर्म और नब्ज वाला लंड मेरी चूत के मुंह पर टिकता है फिर धीरे धीरे अंदर घुसता है जो मेरी तंग दीवारों को पूरी तरह फैला देता है। हर इंच के साथ गर्म रस निकलता है और मैं सिसकारियां भरती हूं। तीन महीने में मैंने अनगिनत बार चरम सीमा पर पहुंची हूं जहां मेरा शरीर झटके खाता है और चूत से सफेद रस उनकी जांघों पर बहता है।

हर रात की चुदाई अब मेरी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन गई है। बाबूजी नीचे लेटे रहते हैं और मैं ऊपर बैठकर तेज तेज हिलती हूं जिससे उनका मोटा लंड मेरी गर्भाशय तक पहुंचता है। उनके हाथ मेरी चूचियों को कसकर मसलते हैं निप्पल को खींचते हैं और कभी कभी मेरी गांड में उंगली डालकर मुझे और उत्तेजित करते हैं। मेरी सांसें तेज हो जाती हैं चेहरा लाल पड़ जाता है और मुंह से अनियंत्रित आहें निकलती हैं। जब वे झड़ते हैं तो उनका गर्म वीर्य मेरी चूत में भर जाता है जो मेरे अंदर गर्माहट फैला देता है। मैं वहीं कुछ मिनट लेटी रहती हूं ताकि पूरा माल अंदर समा जाए और फिर उठकर अपने कमरे में लौटती हूं।

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मेरा ससुर मुझे रोज चोदता है रात में। हर रात बिना किसी बहाने के वे मुझे इशारा कर देते हैं और मैं तैयार हो जाती हूं। उनकी उम्र के बावजूद शिलाजीत और तेल की मालिश से उनका लंड इतना सख्त और दमदार रहता है कि घंटों तक चुदाई चलती है। मैं अपनी चूत को उनकी लंड पर रगड़ती हूं फिर पूरी तरह नीचे बैठ जाती हूं और ऊपर नीचे हिलने लगती हूं। हर धक्के पर मेरी चूत की फांके फैलती हैं क्लिटोरिस उनके पेट से रगड़ खाता है और मैं बार बार झड़ जाती हूं। उनकी सांसें मेरे गालों पर पड़ती हैं और वे फुसफुसाकर कहते हैं कि मैं उनकी सबसे अच्छी बहू हूं। यह रोज का सिलसिला अब मेरे लिए जरूरत बन गया है।

और मेरा पति बस चाटने का काम करता है।

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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