Namard Bhai sex story: हाय दोस्तों नमस्कार। मैं आपका दोस्त सोहन। आज की कहानी मेरी बहन गीता और मेरी पत्नी सोनल की है।
मेरी फैमिली में मेरी बहन थी। मेरे माता पिता की मृत्यु हो गई थी इसलिए हम मामा मामी के घर रहते थे। मेरी बहन १८ साल की थी मेरी उम्र २८ साल थी और मैं जब से जवानी आई तब से अपनी बहन पर नजर रखे हुए था। उसके नाजुक चेहरे की मासूमियत और विकसित होते युवा शरीर ने मुझे हमेशा आकर्षित किया था। मैं रातों को उसके बारे में सोचकर उत्तेजित हो जाता था।
एक दिन मेरे मामा मामी किसी रिश्तेदार के यहां कुछ काम से चले गए तब मैं और मेरी बहन गीता अकेले थे। घर में सन्नाटा छा गया था और हवा में उत्तेजना का माहौल बन गया था। मैं गीता के रूम में गया और उसे पीछे से पकड़ लिया। मेरी मजबूत बाहें उसकी पतली कमर को घेरकर उसे पूरी ताकत से अपनी छाती से चिपका लीं। उसका नरम गर्म शरीर मेरी छाती पर दब रहा था और मैं अपनी गर्म सांसें उसकी गर्दन पर छोड़ रहा था। वो बोली भाई यह क्या कर रहे हो। मैं बोला यार चुप रहो और मजे लो। मेरी बहन ने उस समय जिंस और टॉप पहना हुआ था। जिंस उसकी टांगों और गोल नितंबों को टाइट तरीके से लपेटे हुए थी जबकि टॉप उसके भरे हुए स्तनों को अच्छी तरह उभार रहा था।
फिर मैंने अपनी बहन को आगे घुमाया और किस करने लगा। मैंने उसके चेहरे को दोनों हाथों से थामा और उसके नरम गुलाबी होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैं जोरदार तरीके से किस करने लगा। मेरी जीभ उसके होंठों को चीरकर उसके मुंह के अंदर घुस गई और उसकी जीभ से उलझ गई। उसके मुंह की गर्म नमी और मीठा स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया। वो बोली भाई यह ठीक नहीं है। मैं बोला चुप साली मुझे मत समझाओ और किस करने लगा और जिंस के अंदर हाथ डालकर उसकी पैंटी ऊपर से चूत सहलाने लगा। मेरी उंगलियां पहले उसके पेट की नरम त्वचा पर फिसलीं फिर पैंटी के कपड़े पर पहुंच गईं। मैंने उंगलियों से उसके चूत के ऊपरी हिस्से को दबाया और गोल-गोल रगड़ने लगा। पैंटी का कपड़ा पहले से ही हल्का गीला हो चुका था और उसकी चूत की गर्मी मेरी उंगलियों तक पहुंच रही थी। उसकी सांसें भारी हो गई थीं और उसका शरीर थोड़ा थरथराने लगा था।
अब वो गर्म होने लगी और न चाहकर भी साथ देने लगी और हम किसिंग कर रहे थे। उसके स्तन मेरी छाती से दब रहे थे और उसके निप्पल सख्त होकर मेरी त्वचा को छू रहे थे। वो मेरी पीठ पर हाथ फेर रही थी और धीरे-धीरे मेरी किसिंग में जवाब दे रही थी। उसके मुंह से हल्की-हल्की कराह निकल रही थी। फिर हमने अपने अपने कपड़े उतार दिए। मैंने उसके टॉप को सिर के ऊपर से खींचकर निकाला और ब्रा का हुक खोल दिया। उसके गोल भरे स्तन बाहर आ गए जिनके गुलाबी निप्पल उत्तेजना से खड़े हो चुके थे। फिर मैंने उसकी जिंस का बटन खोला और जिपर नीचे की। जिंस और पैंटी को एक साथ उसके घुटनों तक सरका दिया। अब वो मेरे सामने पूरी तरह नंगी खड़ी थी। उसकी चूत के बाल हल्के थे और योनि की फांके गीली चमक रही थीं। मेरी बहन मेरा लंड देखकर बोली भाई यह कितना छोटा है मैं इंटरनेट पर देखी थी इतने बड़े होते हैं डरती थी कभी मेरे में जाएगा तो लेकिन तुम्हारा। उसके चेहरे पर हैरानी और थोड़ी निराशा साफ दिख रही थी।
तब मैं बोला साली वो नकली होते हैं असली नहीं तू यह चूस। और मेरी बहन घुटनों के बल बैठ गई। उसने मेरे छोटे लंड को अपनी उंगलियों से पकड़ा और मुंह के पास लाया। पहले उसने जीभ से लंड के सिरे को चाटा फिर पूरे लंड को अपने गर्म नम मुंह में ले लिया। मेरा पूरा लंड उसके मुंह में आसानी से समा गया था। वो जोर-जोर से चूसने लगी। उसकी जीभ लंड के चारों ओर घूम रही थी ऊपर नीचे मुंह चला रही थी। उसके मुंह से सलाइवा टपक रहा था और लंड पूरी तरह चमक रहा था। कभी वह तेजी से चूसती तो कभी धीरे-धीरे चबाती। मेरा सिर्फ २ इंच का ही है क्योंकि मैं बचपन से मुठ मारने की आदत हो गई थी जिससे मेरे लंड में विकास नहीं हुआ था। और जब मैं बाहर किसी रंडी पास जाता वो रंडियां भी हंसती और बोलती आज तो बड़े के पैसे में बच्चे का लंड मिला।
इसलिए मैं अब बहुत कम जाता और कोई गर्लफ्रेंड भी नहीं बनाया और बहन पर नजर रखी। अब मेरी बहन से १५ से २० मिनट चुसवाने बाद मैं ६९ हो गया बहन की चूत चाटने लगा। मैंने उसे बेड पर लिटाया और उल्टा मुंह रखकर उसकी चूत के ठीक ऊपर अपना मुंह लगा दिया। मेरी बहन ने भी मेरे लंड को मुंह में ले लिया। मैंने अपनी जीभ निकालकर उसकी चूत की बाहरी फांकों को चाटना शुरू किया। फिर मैंने फांकों को अलग करके अंदर की नरम गुलाबी त्वचा पर जीभ फेर दी। उसकी चूत से मीठा नमकीन रस निकल रहा था जिसका स्वाद मेरी जीभ पर फैल गया। मैंने क्लिटोरिस को जीभ से तेजी से चाटा और चूसा। कभी उंगली डालकर अंदर बाहर किया। उसकी चूत की गर्मी और नमी मेरे चेहरे पर लग रही थी। और १० मिनट चूत चाटने बाद मेरा पानी बहन के मुंह में छूटा और मेरी बहन भी झर गई थी एकदम नमकीन पानी। उसके शरीर में तेज झुरझुरी दौड़ गई थी और वो जोर से कराह उठी। मेरे मुंह में उसका चूत का रस भर गया था।
फिर मैंने मेरी बहन को सीधा लेटा दिया और उसकी चूत में लंड डाला। मैंने उसके दोनों पैर फैलाए और लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखकर धीरे से दबाया। लेकिन मेरी लंड की कमी वजह से पूरा अंदर तक नहीं जा रहा था आधी चूत तक जा रहा था और मैं भी बस मजे ले रहा था। मैंने धीरे-धीरे हिप्स हिलाने शुरू किए। हर छोटे धक्के पर उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबाती थीं। उसकी चूत गर्म और गीली थी जो मेरे छोटे लंड को अच्छी तरह लुब्रिकेट कर रही थी। मैं लगातार हल्के-हल्के धक्के दे रहा था। उसकी सांसें तेज हो गई थीं और वो हल्की-हल्की कराह रही थी। और १५ से ३० मिनट में मेरा पानी निकल गया और मैं सिर्फ १ राउंड ही ले पाया और सो गया।
फिर कभी मौका नहीं मिला और कुछ दिनों बाद मामा मामी ने मेरी शादी के लिए लड़की देखी। उन्होंने सोनल नाम की एक बेहद आकर्षक और सुंदर लड़की को पसंद किया था। सोनल सत्ताईस वर्ष की थी। उसका जिस्म बेहद आकर्षक था जिसमें ३४ इंच की भरी-पूरी छाती, ३२ इंच की पतली और कसी हुई कमर तथा ३६ इंच के गोल और उभरे हुए कूल्हे थे। वह देखने में इतनी खूबसूरत थी कि कोई भी उस पर फिदा हो सकता था। मैंने शादी के लिए हां कर दिया।
मैं यह शादी करना नहीं चाहता था लेकिन सबकी शादी हो रही थी समाज में और मेरे परिवार से भी लोग लगातार पूछ रहे थे कि मेरी शादी कब होगी। मैं हर किसी को यह नहीं बता सकता था कि मेरे लंड में कमी है और वह सामान्य से बहुत छोटा है। इस वजह से मैंने सोनल से शादी के लिए हां कर दिया। मेरे मन में बहुत डर और संकोच था लेकिन सामाजिक दबाव के आगे मुझे झुकना पड़ा।
अब मेरी शादी हो गई शादी से पहले मैं और सोनल कभी मिले नहीं और न ही बात हुई हमारे बीच। क्योंकि हमारे यहां जब तक शादी ना हो तब तक लड़का लड़की को मिलने नहीं दिया जाता है।
अब मेरी जिंदगी की दास्तान बदलने जा रही थी। मेरी सुहागरात की रात आ गई और मैं सुहागरात के लिए तैयार होकर रूम में गया। रूम को लाल फूलों की मालाओं से सजाया गया था। हल्की पीली रोशनी कमरे को रोमांटिक बना रही थी और अगरबत्ती की मीठी सुगंध चारों ओर फैली हुई थी। सोनल बेड पर शर्माते हुए सिर झुकाकर बैठी हुई थी। उसके शरीर की सुडौल आकृति लाल रंग के लहंगे में बहुत मोहक लग रही थी। मैं धीरे-धीरे सोनल के पास पहुंचा और उसके बगल में बैठ गया। हम दोनों कुछ देर तक घबराहट भरी बातें करते रहे। फिर मैंने साहस जुटाकर धीरे से उसका घूंघट उठाया।
घूंघट हटते ही उसके खूबसूरत चेहरे ने मेरी सांसें रोक दीं। उसकी गोरी त्वचा मेकअप से चमक रही थी, लाल-लाल होंठ और काजल वाली बड़ी आंखें देखकर मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। मैं उसके और करीब झुक गया और उसके होठों को चूमने लगा। मेरे होंठ पहले हल्के से उसके नरम गुलाबी होंठों पर टिके। फिर मैंने धीरे से उसके निचले होंठ को अपने होंठों के बीच दबाकर चूसा। उसकी सांसें भारी हो गईं और मैंने महसूस किया कि उसके शरीर का तापमान बढ़ रहा है। मैंने अपनी जीभ से उसके होंठों को गीला किया और धीरे-धीरे अपने मुंह को उसके मुंह पर दबाया।
मेरी जीभ ने उसके होंठों को अलग किया और उसके मुंह के अंदर प्रवेश की कोशिश की। उसके दांतों के बीच से मेरी जीभ अंदर घुसी और उसकी जीभ से टकराई। हम दोनों की जीभें एक दूसरे से खेलने लगीं। किस के दौरान उसके मुंह से हल्की सी आह निकली और उसकी लार मेरे मुंह में मिल गई जिसका स्वाद मीठा था। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे और मैं उसे अपने सीने से सटा कर रखा था। उसकी भरी हुई छाती मेरे शरीर से रगड़ खा रही थी जिससे मुझे और उत्तेजना हो रही थी। किस लंबा और गहरा होता जा रहा था।
अचानक सोनल ने अपना दाहिना हाथ नीचे सरकाया और मेरे लंड पर रख दिया। उसकी नरम और गरम हथेली पहले मेरी जांघ पर पड़ी फिर ऊपर की ओर बढ़ी। उसकी उंगलियों ने मेरे पैंट के कपड़े के ऊपर से मेरे छोटे लिंग को महसूस किया। वह पहले तो हल्के से दबाती रही फिर पूरी मुट्ठी में पकड़कर उसे दबाने लगी। उसकी उंगलियां मेरे छोटे और पतले लंड की लंबाई और मोटाई को नाप रही थीं। वह बार-बार दबा रही थी जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा हो। मेरे लंड का आकार बहुत छोटा था, लगभग लुल्ली जैसा।
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उसके चेहरे पर हैरानी, गुस्सा और निराशा के भाव उभर आए। उसकी आंखें चौड़ी हो गईं और मुंह से एक झटका सा निकला। उसने मुझे जोर से धक्का दिया और अपने आप को दूर कर लिया। और बोली यह क्या तेरा तो साले लुल्ली है और जब लुल्ली था शादी क्यों किया बोल।
फिर मैं बोला देख सोनल मैं मना नहीं कर पाया और पास जाने की कोशिश की।
तब सोनल बोली पास मत आ और बोली अगर शादी बचानी है मुझे अलग घर लेकर रख तेरे मामा मामी साथ नहीं नहीं तो मैं शादी तोड़ दूंगी सबको बताते रहना क्यों तोड़ दी हूं।
तब मैं बोला नहीं सोनल ऐसा मत करना मैं अलग घर ले रहा हूं। और दूसरे दिन घर में मामा और मामी से अलग घर लेने के बारे में विस्तार से बात की। मैंने उन्हें सारी परिस्थिति समझाई कि सोनल के साथ मेरा रिश्ता अब निजी स्तर पर ज्यादा मजबूत हो गया है और हमें अपनी पूरी प्राइवेसी चाहिए जहां कोई दखलअंदाजी न हो। पहले तो मामा और मामी ने पूरी तरह से मना कर दिया। उनके चेहरे पर चिंता और असमंजस साफ दिख रहा था। वे दोनों बार-बार कह रहे थे कि परिवार साथ रहना चाहिए, अकेले रहने से कई समस्याएं आ सकती हैं और वे काफी देर तक मुझे समझाते रहे। फिर आखिर में वे मान गए, शायद मेरी जिद और सोनल के साथ मेरी मजबूत इच्छा देखकर। और मैं सोनल साथ शहर से दूर नए घर चला गया।
अब सोनल ज्यादातर समय फोन में ही लगी रहती थी। वह घंटों तक स्क्रीन पर आंखें गड़ाए रहती, मैसेज करती, चैटिंग में व्यस्त रहती और कभी-कभी हंसते हुए फोन पर बातें करती। एक दिन मेरे ठीक सामने बैठकर ही उसने वीडियो कॉल शुरू कर दी। सामने से एक पुरुष की गहरी और उत्साहित आवाज आई जो बोला हाय बेबी अपना दिखाओ जो बोली हो।
सोनल ने शरारती मुस्कान के साथ अपना टॉप धीरे-धीरे ऊपर खींचा। उसने अपने दोनों बड़े, भरे हुए और निप्पल्स वाले बोब्स कैमरे के सामने पूरी तरह उजागर कर दिए। वे नरम, गोल और आकर्षक लग रहे थे, हल्की रोशनी में चमकते हुए। सोनल ने पूछा कैसे लगे।
तब वो बोला कब दे रही है।
तब सोनल बोली आ जा ले ले।
वो सामने से बोला दो दिन बाद आ रहा हूं मेरी बीबी मायके जाने वाली है और सोनल से किस मांगा सोनल किस दी और फोन रख दिया। और मैं बोला कौन था एसा मत करो।
तब सोनल बोली भोसड़ी के शादी क्यों किया अब यह सब की आदत डाल दे और हां यह नवीन है बड़ा बिजनेस है दो दिन बाद आएगा सुन तूने लिया है। जब यह आएगा तुझे नौकर बोलूंगी समझा।
और ठीक दो दिन बाद सोनल जिंस टॉप पहनकर तैयार हो गई। उसने जिंस को अपनी जांघों पर अच्छी तरह से चढ़ाया था जो उसकी कमर और नितंबों को खूबसूरती से उभार रही थी। टॉप थोड़ा टाइट था जो उसके बोब्स को अच्छे से हाइलाइट कर रहा था। और ठीक रात आठ बजे बेल बजी सोनल दरवाजा खोली एक आदमी था लगभग अड़तीस या चालीस की उम्र का और सोनल बोली आओ नवीन।
नवीन बोला घर में अकेली रहती हो। तब बोली हां लेकिन अब तुम हो और अंदर लाई और मुझे देखकर बोला यह कौन। तब सोनल बोली यह नौकर है। और बोली अच्छा सुनो वो फ्रिज से वो लेकर आओ और दो ग्लास।
तब नवीन बोला अरे एक ही ग्लास लाना रे और सोनल से बोला बेबी एक में ही पिएंगे। मैं फ्रिज से व्हिस्की की बोतल और एक ग्लास लाकर दिया और सोनल बोली अब जाओ दरवाजा बंद करके। मैं बाहर गया और नवीन दरवाजा लॉक किया।
मैं पीछे खिड़की से देखने लगा क्या बात होती है और करते क्या है। वैसे तो पता ही होगा क्या करेंगे लेकिन मैं देखना चाह रहा था। सोनल पैक बनाई और दोनों एक एक करके पीने लगे।
सोनल बोली बीबी कहां मायके गई। तब नवीन बोला अरे असली बीबी तू है रे मेरी और गाल पर किस किया और बोला क्या मस्त है जिंस में हॉट लग रही है और अब दोनों किस करने लगे उम्म्मम्मम्म…… उम्मा….. किस कर रहे थे।
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नवीन ने सोनल को अपने मजबूत हाथों में कसकर जकड़ लिया। उनके होंठ पहले हल्के से टकराए फिर धीरे-धीरे गहरे और गीले हो गए। सोनल की सांसें तेज होने लगीं और उसकी छाती ऊपर-नीचे होने लगी। नवीन की जीभ उसके मुंह में घुस गई और उसकी जीभ से लिपट गई। दोनों की जीभें एक-दूसरे को चाटती, लपेटती और चूसती रहीं। उनके मुंह से लार की छोटी-छोटी धार बह रही थी जो ठोड़ी तक पहुंच रही थी। किस की गीली और चिपचिपी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। उम्म्मम… आह… उम्मा… की धीमी सिसकारियां निकल रही थीं। नवीन के हाथ सोनल की पीठ पर घूम रहे थे और उसकी कमर को जोर से दबा रहे थे। सोनल भी उसके बालों में उंगलियां फेर रही थी।
नवीन सोनल के टॉप के ऊपर से ही बोब्स दबाना शुरू किया। उसके अंगुलियां पहले हल्के से दबा रही थीं फिर धीरे-धीरे जोर बढ़ाते हुए मसलने लगीं। सोनल के निप्पल्स टॉप के नीचे से सख्त होकर उभर आए थे। वह हल्की-हल्की कराह रही थी। थोड़ी देर में दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतारने शुरू कर दिए। नवीन ने सोनल का टॉप ऊपर करके उतारा फिर ब्रा का हुक खोल दिया। सोनल के नंगे बोब्स बाहर आ गए जो हल्के से हिल रहे थे। सोनल ने नवीन की शर्ट के सारे बटन खोले और उसकी पैंट की जिप खोलकर नीचे सरका दी। नवीन की अंडरवियर भी उतर गई। जल्द ही दोनों पूरी तरह नंगे हो गए। उनकी गर्म त्वचा एक-दूसरे से छू रही थी। पसीने की हल्की गंध हवा में फैल रही थी।
सोनल नवीन का लंड पकड़कर मसलने लगी। उसके नरम हाथ लंड को कसकर जकड़ रहे थे। वह ऊपर-नीचे धीमी गति से हाथ चला रही थी। लंड की नसें उभर आई थीं और सिर पर हल्की नमी आ गई थी। दो से तीन सेकंड में नवीन का हथियार पूरी तरह खड़ा हो गया। नवीन का लंड लगभग सात दशमलव पांच इंच लंबा और दो दशमलव पांच इंच मोटा था। वह सख्त, गर्म और लालिमा लिए हुए था।
और दोनों छियासठ पोजीशन में हुए। सोनल नवीन के ऊपर लेट गई और उसने अपना मुंह नवीन के लंड के ठीक सामने ले जाकर पहले जीभ से टिप को चाटा। फिर धीरे से मुंह खोलकर लंड का आधा हिस्सा अंदर ले लिया। पूरा लंड उसके मुंह में नहीं जा पा रहा था इसलिए वह सिर को ऊपर-नीचे हिलाते हुए चूस रही थी। उसकी लार लंड पर बह रही थी और चूसने की गीली आवाजें निकल रही थीं। नवीन ने सोनल की जांघों को फैलाकर उसकी चूत के पास अपना चेहरा लगा दिया। उसकी गर्म सांस सोनल की चूत पर पड़ रही थी। उसने जीभ निकालकर पहले बाहर की फाकों को चाटा फिर क्लिटोरिस को हल्के-हल्के चूसना शुरू किया। सोनल की चूत पहले से गीली हो चुकी थी और उसका मीठा रस नवीन की जीभ पर लग रहा था। नवीन की जीभ अब चूत के अंदर बाहर घुसने लगी। सोनल के शरीर में झुरझुरी दौड़ रही थी और वह नवीन के लंड को और जोर से चूस रही थी।
वे दोनों लगभग बीस से तीस मिनट तक इस पोजीशन में लगे रहे। उनके शरीर पसीने से तर हो चुके थे। सांसें तेज और भारी हो गई थीं। नवीन की जीभ सोनल की चूत को पूरी तरह चाट रही थी और कभी-कभी हल्का-हल्का काट भी रही थी जिससे सोनल के शरीर में कंपकंपी आ रही थी। सोनल का मुंह नवीन के लंड को पूरी ताकत से चूस रहा था। उसकी जीभ लंड के सिर को घेर रही थी और गले तक ले जाने की कोशिश कर रही थी। आखिरकार नवीन का शरीर अचानक तन गया। उसने गहरी सांस ली और अपना गाढ़ा, गर्म पानी सोनल के मुंह में छोड़ दिया। सोनल ने उसे बिना गिराए पूरा निगल लिया। और सोनल भी दो बार मुंह में झर गई थी।
फिर नवीन ने सोनल को सीधा लेटा दिया और सोनल की चूत में डाल दिया और सोनल की चूत मारने लगा सोनल चीखने लगी आआआआआई…. ओ ओ…. आआआ…. धीमे… लेकिन नवीन दे गप्पा गप्प चोदे जा रहा था लगभग ३५ से ४० मिनट चूत चुदाई किया और अपना पानी नवीन ने सोनल की चूत में छोड़ा।
नवीन ने सोनल को बिस्तर पर चित लेटा दिया था। उसने सोनल की दोनों टांगों को चौड़ा फैला लिया और अपना मोटा खड़ा लंड सोनल की गीली चूत के मुंहाने पर रगड़ने लगा। फिर एक जोरदार धक्के से पूरा लंड अंदर घुसा दिया। सोनल की चूत तुरंत फैल गई और उसकी दीवारें लंड के मोटेपन से खिंचने लगीं। सोनल ने तीखी चीख मारी। उसके चेहरे पर दर्द और आनंद की लहर दौड़ गई। आंखें बंद हो गईं और मुंह खुला रह गया। लेकिन नवीन ने रुकने की बजाय तेज गति से कमर हिलाना शुरू कर दिया। हर धक्के पर गप्पा गप्प की आवाज गूंज रही थी। उसके गोले सोनल के नितंबों से टकरा रहे थे। सोनल का पूरा शरीर हिल रहा था। उसके स्तन ऊपर नीचे उछल रहे थे। पसीने की बूंदें नवीन के छाती से सोनल के शरीर पर गिर रही थीं। लगभग पैंतीस से चालीस मिनट तक नवीन ने उसकी चूत की चुदाई जारी रखी। बीच बीच में वह रुककर उसके होंठ चूसता और स्तनों को जोर से दबाता। सोनल कई बार झड़ गई। उसकी चूत से रस बहकर बिस्तर को पूरी तरह गीला कर चुका था। आखिर में नवीन ने जोर से कराहते हुए अपना गर्म वीर्य सोनल की चूत की गहराई में छोड़ दिया।
फिर सोनल लंड साफ करने जा रही थी तब नवीन रोका और बोला इसे ही मुंह में ले। सोनल ने नवीन का वीर्य और अपनी चूत के रस से सना हुआ लंड दोनों हाथों में पकड़ा। वह घुटनों पर बैठ गई और मुंह खोलकर पूरा लंड अंदर ले लिया। उसकी गरम जीभ लंड की नोक पर घूमने लगी। वह चूसने लगी। स्वाद नमकीन और चिपचिपा था। लार उसके मुंह से बहकर लंड पर गिर रही थी। सोनल ऊपर नीचे सिर हिलाती रही। कभी गहरी लेकर गला दबाती तो कभी तेजी से चूसती। पांच से सात मिनट तक निरंतर मुंह चुदाई के बाद नवीन का लंड फिर से पूरी तरह खड़ा और सख्त हो गया। नसें उभर आईं और लंड फटने को तैयार था।
नवीन ने पीछे घुमने को कहा और सोनल को उल्टी लेटा दिया। सोनल अब पेट के बल लेट गई। उसने अपनी कमर थोड़ी ऊपर उठाई। नवीन ने उसके दोनों नितंबों को हाथों से फैलाया। अपना लंड गांड के तंग छेद पर रखा और पहले थूक लगाकर चिकना किया। फिर धीरे धीरे दबाव बढ़ाया। सोनल की गांड बहुत तंग थी। लंड का सिरा अंदर घुसते ही सोनल दर्द से चीख उठी। नवीन ने बोला बेबी तेरी चूत की सील किसने तोड़ी पति से या।
तब सोनल बोली शादी पहले कॉलेज समय मेरे एक सर से। नवीन गांड मारे जा रहा था। सोनल आआआआआ… चीख रही थी। उसके शरीर पर पसीना छूट रहा था। गांड की अंदरूनी दीवारें लंड को जकड़ रही थीं। जलन के साथ आनंद भी बढ़ने लगा। फिर नवीन ने सोनल से पूछा पति कैसा है।
तब सोनल बोली पति साला कुछ काम का नहीं पति के लंड में दम होता तेरे से नहीं चुद रही होती। नवीन और तेजी से गांड मारने लगा। उसके धक्के अब और जोरदार थे। कमर की गति बढ़ गई थी। हर थप्पड़ पर पट पट की आवाज गूंज रही थी। सोनल की गांड लाल हो गई थी। उसकी चीखें कराहनों में बदल गईं। थोड़ी देर बाद नवीन ने गहरी सांस लेकर अपना पानी सोनल की गांड में छोड़ दिया। गर्म वीर्य की धार गांड के अंदर भर गई।
फिर दोनों डिनर किए नंगे ही। और मेरे से सोनल डिनर लगवाई और नवीन बोला अरे यह नौकर पति या किसी से बोल दिया तो।
तब सोनल बोली नहीं बोलेगा और दोनों डिनर करने लगे और रात में ४ जैसे राउंड किया। नवीन और २ दिन आया दूसरे दिन सोनल बोली अब कब आओगे।
तब नवीन बोला जल्द ही और अब नवीन का आना जाना होने लगा था। फिर एक दिन मेरे मामा मामी की एक एक्सीडेंट में मौत हो गई अब मेरी बहन को यहां मेरे साथ लाना पड़ा।
एक दिन नवीन गीता को देख लिया और बोला कौन है यह।
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नवीन ने अचानक गीता को देखते ही अपनी नजरें उसकी ओर घुमा दीं। गीता की गोरी चमकदार त्वचा, लंबी काली घनी चोटी, भरी भरी छाती, पतली कमर और आकर्षक चेहरे ने नवीन को तुरंत मोहित कर लिया। उसकी आंखों में उत्सुकता और कामुकता की चमक उभर आई। वह सोनल की ओर मुड़कर उत्सुक स्वर में पूछा, “कौन है यह।”
तब सोनल बोली यह मेरे नौकर की बहन है इसके माता पिता की मौत हो गई इसलिए यहां लाया है।
सोनल ने शांत लेकिन स्पष्ट स्वर में जवाब दिया। उसकी आवाज में सहानुभूति का पुट था। वह विस्तार से बताने लगी कि गीता के माता-पिता की अचानक दुर्घटना में मौत हो गई थी और इसलिए उसे यहां लाया गया है ताकि वह सुरक्षित और देखभाल में रहे। नवीन ने ध्यान से सुना लेकिन उसकी नजरें बार-बार गीता के शरीर पर घूम रही थीं। गीता शर्म से सिर झुकाए खड़ी थी। तब नवीन बोला सोनल बेबी मेरा भाई है २६ साल का उसकी एक कार एक्सीडेंट हो गया था और तब से व्हीलचेयर में है। तेरे नौकर की बहन की शादी करा दे तो बहुत पैसे दूंगा तुझे।
नवीन की आवाज में लालच और उत्साह था। उसने सोनल को बेबी कहकर पुकारा और अपने भाई राजीव की दुर्घटना की कहानी बताई। वह व्हीलचेयर पर बैठा अपंग भाई अब कोई शारीरिक सुख नहीं दे सकता था। नवीन ने सीधे प्रस्ताव रख दिया कि गीता की शादी राजीव से करा दे तो वह सोनल को बहुत सारा पैसा देगा।
तब सोनल बोली ठीक है बात करती हूं मान गई तो ठीक। तब नवीन बोला यार मना ही ले तेरे नौकर से बोल तब सोनल बोली ठीक है। और फिर सोनल मुझसे बात की मैं मना किया अपंग है वो उससे कैसे।
सोनल ने सहमति जताई और कहा कि वह बात करेगी। नवीन ने जोर देकर कहा कि नौकर को मना ही ले। सोनल ने ठीक है कहा और फिर मेरे पास आई। मैंने साफ मना कर दिया क्योंकि राजीव अपंग था और गीता उससे कैसे खुश रह सकती थी।
तब सोनल बोली पूछ नहीं रही हूं बता रही हूं उसी से शादी होगी पैसे देख और मैं अपना मुंह खोल दी तेरी बदनामी होगी सोच ले। फिर मैं मान गया और अपनी बहन से बोला शादी कर ले पैसे वाला है।
सोनल की आवाज कठोर हो गई। वह कह रही थी कि वह पूछ नहीं रही बल्कि बता रही है। शादी होनी ही है। पैसों का लालच दिखाया और धमकी दी कि अगर मैं मुंह खोल दिया तो मेरी बदनामी हो जाएगी। मैं सोच में पड़ गया और अंत में मान गया। फिर मैंने अपनी बहन गीता से कहा कि शादी कर ले क्योंकि लड़का पैसों वाला है।
और सोनल भी गीता से बोली देख गीता शादी कर ले तेरे भाई को दहेज में पैसे मिल जाएंगे तू भी खुश रहेगी। और आखिर गीता हारकर हां कर दी। फिर नवीन और उसकी पत्नी सुनीता दोनों आए अपने भाई को चेयर पर लेकर। और बोले बात पक्की समझे और पैसे का थाल दिए और नवीन सोनल से बोला अब तो समधन हो गई और मजा आएगा पेलने में।
सोनल ने गीता को भी समझाया कि शादी कर ले तो भाई को दहेज में अच्छे पैसे मिल जाएंगे और वह खुद भी खुश रहेगी। गीता काफी सोच विचार के बाद हार मानकर हां कर दी। फिर नवीन और उसकी पत्नी सुनीता दोनों आए। नवीन अपने भाई राजीव को व्हीलचेयर पर लेकर आया था। उन्होंने कहा कि बात पक्की समझो और पैसे का बड़ा थाल सोनल के आगे रख दिया। नवीन ने सोनल से मुस्कुराते हुए कहा कि अब तो हम समधन हो गए हैं और पेलने में बहुत मजा आएगा।
शादी वाले दिन भी सोनल को पेला और हम सब नवीन घर गए शादी बाद और नवीन के भाई का नाम राजीव था। और नवीन की सास बीमार हुए हॉस्पिटल ले जाना पड़ा तब सुनीता अपनी मां पास रुकी और सोनल भी जो अब समधन जो थी।
शादी के दिन नवीन ने सोनल को फिर से पेला। शादी के बाद हम सब नवीन के घर गए। नवीन के भाई का नाम राजीव था। नवीन की सास अचानक बीमार पड़ गईं। उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। सुनीता अपनी मां के पास रुक गई और सोनल भी जो अब समधन बन चुकी थी उनके साथ रुक गई।
मैं राजीव गीता और नवीन घर आए और मैंने रात में देखा राजीव के कमरे में कि गीता राजीव की गोद में बैठी है और नवीन गीता को किस कर रहा था उम्म्मम्म्म….
मैं राजीव और गीता के साथ नवीन के घर आ गया। रात में मैंने राजीव के कमरे की ओर झांका। गीता राजीव की गोद में बैठी हुई थी। नवीन गीता को गहरी किस कर रहा था। उनके होंठ एक-दूसरे से चिपके हुए थे और चूसने की गीली आवाजें आ रही थीं। उम्म्मम्म्म….
गीता बोली जेठ जी आज पूरा मजा देना घर कोई नहीं। तब नवीन बोला हां गीता रानी और गीता बोली मैं जानती हूं तुम भाभी से करते हो। और नवीन बोला तुम्हारा भाई सुख नहीं दे पाया इसलिए। और मुझे पता है सोहन नौकर नहीं पति है सोनल का और गीता को किस करने लगा।
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गीता ने नवीन को देखकर कहा, “जेठ जी आज पूरा मजा देना। घर में कोई नहीं है।” नवीन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हां गीता रानी।” गीता ने आगे कहा कि वह जानती है नवीन अपनी भाभी सोनल के साथ भी यह सब करता है। नवीन ने कहा कि गीता का भाई राजीव उसे शारीरिक सुख नहीं दे पाया इसलिए वह यह कर रहा है। फिर नवीन ने कहा कि उसे पता है सोहन नौकर नहीं बल्कि सोनल का पति है। इतना कहकर नवीन ने गीता को फिर से गहरी किस में खींच लिया। उनके होंठ एक-दूसरे को चूस रहे थे और जीभें आपस में उलझ रही थीं।
अब गीता खड़ी हुई और राजीव और नवीन के कपड़े उतार दी और घुटनों बल बैठकर दोनों का लंड चूसने लगी। फिर २० से ३५ मिनट बाद दोनों ने अपना पानी गीता के मुंह में छोड़ा। और गीता फिर से दोनों का लंड हिलाने लगी और ५ मिनट में फिर से खड़ा हुआ।
गीता धीरे-धीरे खड़ी हो गई। उसका शरीर उत्तेजना से कांप रहा था। उसने पहले नवीन की शर्ट उतारी फिर पैंट खोलकर उसके लंड को बाहर निकाला। फिर राजीव के कपड़े उतारे। दोनों के लंड अब पूरी तरह खड़े और फड़क रहे थे। गीता घुटनों के बल बैठ गई। उसने दोनों लंड को हाथ में पकड़ा। पहले नवीन के लंड की टोपी को अपनी गर्म जीभ से चाटा। फिर राजीव के लंड को मुंह में ले लिया। उसकी होंठ लंड को घेरकर चूस रहे थे। लार की गीली आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। वह बारी-बारी दोनों को चूसती रही। कभी गहरी गले तक ले जाती तो कभी हाथ से तेजी से हिलाती। उनकी गेंदों को सहलाती। दोनों पुरुषों के मुंह से कराहने की आवाजें निकल रही थीं। बीस से पैंतीस मिनट तक यह चला। फिर नवीन का लंड फड़का और गर्म वीर्य की मोटी धार गीता के मुंह में छूट गई। नमकीन स्वाद और चिपचिपा वीर्य उसकी जीभ पर फैल गया। गीता ने सब निगल लिया। तुरंत बाद राजीव ने भी अपना वीर्य उसके मुंह में उड़ेल दिया। गीता ने दोनों की आखिरी बूंदें भी चाट लीं। फिर गीता ने दोनों लंड को फिर से हाथ से हिलाना शुरू किया। पांच मिनट में दोनों के लंड फिर से पूरी तरह खड़े और सख्त हो गए।
अब गीता राजीव के लंड गांड में डालने लगी और राजीव की गोदी में फिर से बैठ गई और नवीन गीता की दोनों टांगें पकड़कर चूत चोदने लगा।
गीता राजीव की गोद में बैठ गई। उसने राजीव के लंड को अपनी गांड पर रखा और धीरे-धीरे नीचे बैठकर उसे अंदर लेने लगी। गांड की टाइट छेद थोड़ा फैला और लंड धीरे-धीरे अंदर घुस गया। गीता के मुंह से आह निकली। राजीव की गोद में पूरी तरह बैठने के बाद उसने नवीन की ओर देखा। नवीन ने गीता की दोनों टांगें पकड़ लीं और अपनी मोटी लंड को उसकी चूत के मुंह पर रगड़ते हुए एक झटके में अंदर डाल दिया। अब गीता दोनों तरफ से भरी हुई थी। नवीन तेजी से चूत में धकेल रहा था। राजीव नीचे से गांड में हिल रहा था। दोनों लंड एक साथ अंदर-बाहर हो रहे थे। गीता की चीखें कमरे में गूंज रही थीं।
गीता आआआआआआ….. ऊऊऊऊऊऊ…. चीख रही थी और ३५ से ४० मिनट बाद नवीन ने पानी गीता की चूत में छोड़ा और राजीव ने गांड में। इस तरह २ से ४ राउंड किए और नवीन बोला मेरे भाई खड़ा हो नहीं सकता है इसलिए तेरी गांड मेरे भाई की और चूत मेरी ओर तीनों हंसने लगे।
गीता लगातार चीख रही थी “आआआआआआ….. ऊऊऊऊऊऊ….”। उसका पूरा शरीर पसीने से तर था। चूत और गांड दोनों में तेज धक्के पड़ रहे थे। चूत से रस निकलकर लंड पर चमक रहा था। गांड से थोड़ा सा तेल और लार का मिश्रण टपक रहा था। पैंतीस से चालीस मिनट बाद नवीन का लंड फड़का और उसने गर्म वीर्य की धार गीता की चूत के अंदर उड़ेल दी। उसी समय राजीव ने गांड के अंदर अपना वीर्य छोड़ दिया। दोनों तरफ से गर्म वीर्य गीता के अंदर भर गया। इस तरह उन्होंने दो से चार राउंड किए। हर राउंड में गीता की चीखें बढ़ती गईं। आखिरी राउंड के बाद नवीन हंसते हुए बोला, “मेरे भाई खड़ा हो नहीं सकता है इसलिए तेरी गांड मेरे भाई की और चूत मेरी।” तीनों जोर-जोर से हंसने लगे।
अब नवीन कभी गीता कभी सोनल दोनों के मजे लेता मैं देखता रहता।
अब नवीन कभी गीता को कभी सोनल को बारी-बारी से अपने नीचे दबाकर दोनों के मजे लेता रहा। मैं छिपकर सब देखता रहा।
तो दोस्तों मेरी ना मर्दानी की सजा मिली है और बचपन से कोई ऐसी गंदी मुठ मारने की आदत ना डाले तो यह मेरी दास्तान कैसी लगी मुझे कमेंट करके बताएं। धन्यवाद
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