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दोनों बहनों को एक साथ नंगा करके चोदा

Desi sister threesome sex story: बात तब की है जब मैं बारहवीं में था। क्योंकि मैं एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ता था, वहाँ बहुत आजादख्याल वाले बच्चे ही ज्यादा थे। हमारी कक्षा में अदिति नाम की एक लड़की थी। हम दोनों की उम्र अठारह साल के आसपास थी।

मैं मन ही मन उसे चाहता था लेकिन यह नहीं जानता था कि वह भी मुझे उतना ही चाहती है। हर दिन क्लास में उसकी मुस्कान देखकर मेरा दिल धड़कने लगता था। उसकी आँखों में एक खास चमक थी जो मुझे रातों को नींद नहीं आने देती थी। यह बात मुझे उसकी एक दोस्त से पता चली। मैंने समय न बर्बाद करते हुए उससे अपने प्यार का इजहार कर दिया। उसने भी तुरंत हाँ कर दी।

अब हम एक-दूसरे से मिलने लगे। फोन पर घंटों बातें होने लगीं। अगले छह महीनों में हम दोनों काफी करीब आ गए थे। हमारी बोर्ड परीक्षाएं खत्म होने के बाद हमारा मिलना-जुलना और बढ़ गया। हर मुलाकात में हमारी नजदीकियाँ बढ़ती जा रही थीं।

एक दिन उसने बताया कि वह दो दिन के लिए घर में अकेली है और उसने मुझे अपने घर बुलाया। जब मैं उसके घर पहुंचा तो वह नीले रंग का टॉप और काली जींस पहने हुए थी। वह इतनी सुंदर लग रही थी कि मैं क्या बताऊं। उसका टॉप उसके स्तनों पर टाइट बैठा था और जींस उसकी जांघों की आकृति साफ दिखा रही थी। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

हम दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और चूमा। फिर हम उसके कमरे में गए। उसका कमरा बहुत सुंदर सजा हुआ था। हम बिस्तर पर एक-दूसरे के बगल में बैठ गए और बातें करने लगे। अचानक वह मेरी गोद में लेट गई। वह मेरे लंड के ऊपर ही लेटी थी। मेरा लंड खड़ा होने लगा। मेरा हाथ उसकी चूचियों पर पहुंच गया।

वह बोली, “क्या कर रहे हो?” मैंने कहा, “बस कुछ मन कर रहा है।” उसने कहा, “तो रुके क्यों हो?” उसके मुंह से यह सुनकर मैं खुशी से फूल उठा। मैंने उसे लिटाया और उसके होंठ चूसने लगा। उसके होंठ कितने रसीले थे। वह गर्म होने लगी थी। मैंने अपना हाथ उसके टॉप में डाला। वाह! उसकी चूचियां कितनी मस्त थीं।

जब मैं उन्हें दबाने लगा तो उसने कहा, “खुद ही सब करोगे क्या?” इतना कहते ही उसने मुझे पलट दिया और मेरी जींस खोलकर नीचे कर दी। फिर वह मेरी चड्डी के ऊपर से ही मेरे लंड से खेलने लगी। उसकी उंगलियाँ मेरे कड़े लंड को ऊपर-नीचे रगड़ रही थीं। मैंने कहा, “तुम्हें तो बहुत पता है।” उसका जवाब सुनकर मैं दंग रह गया। उसने कहा, “तेरे से चुदने के लिए ही तो इतने दिनों से तड़प रही थी। बस मेरी प्यास बुझा दे।”

तब मुझे पता लगा कि वह कितनी बड़ी चीज है। वह मुझे प्यार नहीं बल्कि सिर्फ चुदना चाहती थी। मैंने सोचा कि ठीक है, चोदने को माल तो मिल ही रही है। मैंने उसे लिटाया और उसके सारे कपड़े उतार दिए। वह सिर्फ पैंटी में बेहद हसीन लग रही थी। मैंने उसकी चूचियां चूसनी शुरू कीं। मेरा लंड और कड़क हो गया। फिर मैंने उसकी पैंटी भी निकाल दी। उसकी चूत पर काफी बाल थे।

मैंने पूछा, “तुम काटती नहीं क्या?” उसने कहा, “बहुत दिनों से काटे नहीं।” मैंने उसकी चूत देखी। वह बहुत गीली थी। मैंने उसे चाटा। स्वाद बहुत अच्छा था। मैं अपनी जीभ से उसे चोदने लगा। वह पागल सी हो गई। उसने मेरे सिर को अपनी चूत पर जोर से दबा दिया और झड़ गई।

मैंने कहा, “मेरा लंड चूसो।” उसने कहा, “आ जा लेट मेरे राजा।” और उसने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। अदिति ने मेरे दोनों पैरों के बीच घुटनों पर बैठकर अपना सिर झुकाया। पहले तो उसने अपनी गर्म सांसों से मेरे कड़े लंड की नोक को छुआ और फिर अपनी नरम गीली जीभ बाहर निकालकर उसे धीरे-धीरे चारों तरफ घुमाने लगी। उसकी जीभ का स्पर्श इतना उत्तेजक था कि मेरी रीढ़ की हड्डी में करंट सा दौड़ गया। वह धीरे-धीरे पूरे लंड को मुंह में लेने लगी। उसके गर्म और नरम होंठ मेरे शाफ्ट को कसकर जकड़ रहे थे और हर बार गले तक ले जाते समय उसकी गर्म गला मेरे लंड को निचोड़ता जा रहा था।

उसके मुंह से निकलती सलाइवा मेरे लंड पर बह रही थी और उसकी उंगलियां मेरे अंडकोष को हल्के-हल्के मसल रही थीं। वह ऊपर-नीचे सिर हिलाते हुए तेजी से चूस रही थी। कभी-कभी वह लंड को पूरी तरह बाहर निकालकर उसकी नोक को चूमती और फिर एक झटके से गले तक ले जाती। उसकी आंखें कामवासना से भरी हुई थीं और वह मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी। थोड़ी देर बाद उसने लंड मुंह से निकाला और बोली, “अब चोद दो बस! अब नहीं रहा जाता।” मैंने कहा, “लेट जा मेरी रानी।” वह बिस्तर पर लेट गई। मैंने उसका एक पैर अपने कंधे पर रखा।

लंड को उसकी चूत के मुंह पर रखा और हल्का जोर लगाया। पूरा लंड उसकी चूत में सरक गया। उसकी चूत बहुत गीली और गरम थी। हर धक्के पर उसकी चिकनी दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थीं। मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। वह आह-आह की आवाजें निकाल रही थी। उसकी आंखें बंद थीं और चेहरा आनंद से लाल हो रहा था। उसने कहा, “और जोर से चोदो। मेरा निकलने वाला है।”

मैंने जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। मेरे हर तेज धक्के से उसकी चूचियां ऊपर-नीचे हिल रही थीं। उसकी चूत से चिकना रस बाहर निकलकर बिस्तर पर फैल रहा था और हर बार लंड बाहर-भीतर होने पर चुट-चुट की आवाजें आ रही थीं। थोड़ी ही देर में उसका पानी निकल गया। उसकी चूत मेरे लंड के चारों तरफ तेजी से सिकुड़ने लगी और उसने जोर से चीखते हुए अपना पूरा शरीर कसकर जकड़ लिया। मैंने चोदना जारी रखा। जब मेरा भी निकलने वाला था तो मैंने पूछा, “कहां निकालूं?” उसने कहा, “मुंह में! चूत में मत निकालना।”

मैंने तुरंत लंड निकाला और उसके मुंह में दे दिया। वह उसे चूसने लगी और जल्दी ही मेरा गर्म पानी उसके मुंह में भर गया। उसने आंखें बंद करके सारा पानी निगल लिया और फिर भी लंड को चूसती रही। हमारा यह चुदाई का खेल फिर चलता रहा। अब उसके घर वाले जब भी बाहर जाते, वह मुझे बुला लेती। हर बार हम बिस्तर पर घंटों नंगे होकर एक-दूसरे को चोदते, चूसते और चाटते। एक दिन मैं उसे चोद रहा था कि अचानक उसकी छोटी बहन श्रुति, जो अठारह साल की थी और कॉलेज की पहली वर्ष में पढ़ती थी, कॉलेज से जल्दी लौट आई। उसके आने से हम दोनों की हालत खराब हो गई।

दरवाजे की आवाज सुनकर हम दोनों चौंक गए और एक-दूसरे को देखने लगे। उसने अदिति से कहा, “मैं मम्मी-पापा को सब बता दूंगी।” अदिति ने कहा, “मत बताना, मैं हाथ जोड़ती हूं।” थोड़ा सोचने के बाद श्रुति बोली, “ठीक है, पर मुझे भी वो करना है जो आप कर रही थी।” उसका कहना सुनते ही मेरा लंड, जो डर के मारे ढीला हो गया था, फिर से तन गया। अदिति ने कहा, “आओ, जरा इसकी भी चुदाई कर दो।” श्रुति बेहद सुंदर थी। वह अपने कॉलेज के कपड़ों में थी – सफेद शर्ट, नीली स्कर्ट, बेल्ट और काले जूते।

मैं उसके पास गया और पूछा, “तुमने पहले कभी किया है क्या?” उसने कहा, “नहीं।” मैं मन ही मन खुश हुआ कि मुझे एक कुंवारी चूत मिल रही है। मैंने अदिति से कहा, “जरा देखना, इसे दर्द न हो।” मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया और चूमने लगा। क्योंकि वह कॉलेज से आई थी, वह पसीने से भीगी हुई थी। लेकिन उसकी पसीने की गंध भी मुझे बहुत उत्तेजित कर रही थी। मैंने अपना हाथ उसकी स्कर्ट में डाला और उसकी मुलायम जांघों को सहलाने लगा।

वाह! क्या जांघें थीं उसकी। मैंने उसकी बेल्ट और स्कर्ट उतार दी। उसने काली पैंटी पहनी थी। इतने में अदिति ने उसकी शर्ट और ब्रा भी उतार दी। उसकी चूचियां छोटी थीं लेकिन बहुत प्यारी थीं। अदिति तब तक उसके होंठ चूसकर उसे गर्म करने लगी। मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया। उसकी चूत पर काफी बाल थे।

मैंने फिर भी उसकी चूत चाटी। चाटना शुरू करते ही मानो उसे करंट लग गया। उसने जोर से आह भरी। शायद उसे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं जोर-जोर से चाटने लगा।

थोड़ी देर बाद अदिति ने उससे कहा, “लंड चूसो।” शुरुआत में उसने मना कर दिया, “क्या इसे भी कोई चूसता है?” श्रुति का चेहरा शर्म से लाल हो गया था और उसकी आंखें नीचे झुकी हुई थीं। अदिति ने मुस्कुराते हुए कहा कि इसमें कोई शर्म की बात नहीं है और फिर खुद मेरे पास आकर घुटनों पर बैठ गई। उसने अपना मुंह खोला और मेरे कड़े लंड को पूरी तरह मुंह में ले लिया। अदिति ने जोर-जोर से ऊपर-नीचे सिर हिलाते हुए लंड चूसा। उसकी गर्म जीभ लंड की नोक पर घूम रही थी और सलाइवा मेरे शाफ्ट पर बह रहा था।

थोड़ी देर बाद श्रुति ने भी मेरा लंड चूसा। वह पहले तो हिचकिचाते हुए पास आई। फिर उसने अपनी छोटी नरम जीभ बाहर निकाली और लंड की टिप को धीरे-धीरे चाटने लगी। उसके होंठ धीरे-धीरे लंड को मुंह में लेने लगे। वह अनाड़ी थी लेकिन उत्सुकता से चूस रही थी। उसकी गर्म सांसें मेरे लंड पर पड़ रही थीं और उसकी उंगलियां मेरे अंडकोष को हल्के से छू रही थीं। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास बढ़ा और वह तेजी से सिर हिलाने लगी।

फिर मैंने उसे बांहों में उठाया और बिस्तर पर ले गया। वह देखते ही बन रही थी। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया। वह आह-आह कर रही थी। मैंने अदिति को इशारा किया। उसने श्रुति का मुंह जोर से पकड़ लिया। मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। उसकी आंखें आंसुओं से भर गईं।

उसकी चूत बहुत टाइट थी। पहले तो लंड का सिरा ही अंदर गया और फिर पूरा लंड धीरे-धीरे सरकता चला गया। श्रुति की चूत की दीवारें मेरे मोटे लंड को इतनी जोर से निचोड़ रही थीं कि हर इंच अंदर जाते समय मुझे लग रहा था जैसे कोई गर्म, नरम मांस का कसा हुआ छेद मुझे चूस रहा हो। उसकी चूत से थोड़ा खून भी निकला जो मेरे लंड पर लगा हुआ था और उसकी गर्माहट मेरी त्वचा पर महसूस हो रही थी। अब मैं धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगा। हर धक्के पर उसकी चूत से चुट-चुट की चिकनी आवाजें निकल रही थीं और उसका गीला रस मेरे लंड को और चिकना बना रहा था।

धीरे-धीरे उसे भी मजा आने लगा। शुरू में उसके चेहरे पर दर्द की हल्की लकीरें थीं लेकिन अब उसकी आंखें आनंद से बंद हो रही थीं। वह अपनी निचली होंठ को काट रही थी और छोटी-छोटी आहें भर रही थी। क्योंकि वह पहली बार कर रही थी, वह थोड़ी ही देर में स्खलित हो गई। उसकी चूत मेरे लंड के चारों तरफ तेजी से सिकुड़ने लगी। उसके पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई और वह जोर से कांपते हुए चीख पड़ी। उसकी चूत से गर्म-गर्म रस की धार निकली जो मेरे लंड और जांघों पर बहने लगी।

मेरा लंड अभी भी खड़ा था। मैंने अदिति को चोदकर अपना पानी निकाला। अदिति तुरंत बिस्तर पर लेट गई और अपनी टांगें फैला दी। मैंने उसकी चूत में एक झटके में पूरा लंड डाल दिया और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। उसकी चूचियां ऊपर-नीचे उछल रही थीं और वह अपनी उंगलियों से मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। कुछ ही देर में मेरा लंड फड़कने लगा और मैंने अपना गर्म पानी उसकी चूत के अंदर छोड़ दिया। वह भी दूसरी बार झड़ गई और हम दोनों एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे।

उसके बाद कुछ दिनों तक मैं दोनों बहनों को चोदता रहा। हर शाम जब उनके घर वाले बाहर जाते तो मैं पहुंच जाता और हम तीनों नंगे होकर घंटों एक-दूसरे को चोदते, चूसते और चाटते। लेकिन उनके पापा के ट्रांसफर हो जाने के कारण वे शहर के बाहर चली गईं। आज भी दो साल बाद उनकी याद आती है। अब मेरे साथ चुदने वालियों की सूची काफी बढ़ चुकी है।

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Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।


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