Car me dost ki girlfriend ki chudai sex story: मेरा नाम विक्की है। मैं राजकोट गुजरात में रहता हूँ। यह कहानी मेरे दोस्त विशाल की प्रेमिका अवनी और मेरी है।
विशाल मेरा बहुत ही करीबी दोस्त था। हम दोनों रोज एक साथ घूमते थे और साथ साथ मस्ती करते थे। उसकी एक प्रेमिका थी अवनी। वो बहुत ही खूबसूरत थी। उसका बदन और उसके मम्मे बहुत ही सेक्सी थे। हम तीनों साथ में ही घूमते फिरते थे।
जब भी हम लोग कहीं घूमने जाते थे तब वह बार बार विशाल से चिपकती थी उसे चूमती थी और मुझे देखती रहती थी। पहले मेरे मन में उसे लेकर कोई गलत भावना नहीं थी। पर धीरे धीरे मुझे भी कुछ कुछ होने लगा था। मेरा दोस्त एकदम लल्लू था। वो अवनी की ऐसी हरकतों से झेंप कर दूर हो जाता था।
एक दिन मैंने एक पिकनिक रखी थी हम तीनों के लिए। तीनों एक साथ मेरी कार में पिकनिक गए। हम तय समय से सुबह ही वहाँ पहुँच गए। खाना और बाकी जरूरी सामान भी साथ ले गए थे।
वहाँ हम मस्ती कर रहे थे मगर अवनी का ध्यान मेरी तरफ ही था।
जब हम खेल रहे थे तब अवनी बार बार मुझसे टकराती थी। हम लोग घास के मैदान में दौड़ रहे थे और एक छोटा सा गेंद फेंककर पकड़ने का खेल खेल रहे थे। अवनी जानबूझकर मेरी तरफ झुकती और हर बार मेरे शरीर से टकरा जाती। उसके नरम भारी मम्मे मेरी छाती से रगड़ खाते हुए दब जाते। उसकी गर्म जाँघें मेरी जाँघों को छूकर गुजरतीं। उसके बाल मेरे चेहरे पर बिखर जाते और उसकी मीठी देह की खुशबू मेरी नाक में भर जाती। उसकी आँखें मेरी आँखों में गहरी नजर डालतीं और मुस्कुराती हुई फिर से पास आ जाती। मैं बहुत बार उससे दूर हट जाता पर वह हर बार फिर से मेरे करीब आ जाती थी।
हमें वहाँ खाना बनाना तो था नहीं इसलिए विशाल कुछ चीजें लाने बाजार चला गया। अब हम दोनों अकेले थे।
विशाल ने कार स्टार्ट की और कहा कि वह दस पंद्रह मिनट में लौट आएगा। उसकी कार की धूल उड़ाती आवाज दूर होती गई। चारों तरफ सन्नाटा छा गया। केवल हल्की हवा की सरसराहट और दूर पेड़ों की पत्तियों की आवाज सुनाई दे रही थी। मेरे मन में एक अजीब सा रोमांच और तनाव एक साथ उभरने लगा। अवनी मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी।
मैं भी अपना कुछ काम करने लगा और गाड़ी से सामान निकालने लगा। तभी अवनी मेरे पास आई और उसने कहा मैं आपकी मदद करती हूँ। और वह मुझे छूते हुए काम करने लगी।
मैंने गाड़ी के डिक्की से बैग और पानी की बोतलें निकालनी शुरू कीं। अवनी मेरे ठीक बगल में खड़ी हो गई। वह झुककर सामान उठाती तो उसकी कोहनी मेरी बांह से रगड़ खाती। उसकी उँगलियाँ जानबूझकर मेरी कमर को छू जातीं। उसकी साँसें मेरे कंधे के पास गर्म हवा की तरह महसूस हो रही थीं। वह हर बार सामान रखते समय मेरे शरीर से सट जाती।
मैंने उसे दूर जाने को कहा पर वो और नजदीक आ गई और उसने मेरा हाथ पकड़ लिया।
मैं थोड़ा घबरा गया था पर मेरे अंदर सेक्स की भूख जाग उठी थी। उसने धीरे से मेरे करीब आकर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर मुझे एक चुम्बन दिया।
मैंने उससे कहा यह गलत है। अगर विशाल को पता चला तो अच्छा नहीं होगा।
उसने मुझे समझाया कुछ नहीं पता चलेगा उस लल्लू को।
और वह मुझे फिर चूमने लगी। उसकी नरम गर्म होंठ मेरे होंठों पर दब गए। उसने धीरे से अपने होंठ खोले और मेरे निचले होंठ को चूस लिया। उसकी जीभ मेरे होंठों की सीमाओं को छू रही थी। उसका बदन मेरे शरीर से पूरी तरह सट गया। उसके मम्मे मेरी छाती पर दब रहे थे। मैं महसूस कर रहा था कि उसकी साँसें तेज हो रही हैं।
मुझसे रहा नहीं गया और मैं भी उसकी चुम्मियों का आनंद लेने लगा। उसने काले रंग की टीशर्ट पहनी थी। मैं उसे अपनी गाड़ी में ले गया और उसकी टीशर्ट को प्यार से निकाल दिया।
मैंने धीरे से उसकी टीशर्ट के किनारे पकड़े और उसे ऊपर की तरफ खींचा। उसकी मुलायम त्वचा धीरे धीरे नजर आने लगी। उसके पेट की नाभि तक टीशर्ट ऊपर चढ़ गई। फिर मैंने उसे उसके सिर के ऊपर से पूरी तरह उतार दिया। उसके बाल थोड़े बिखर गए और उसकी आँखों में शरारत भरी मुस्कान थी। अब वह सिर्फ ब्रा और नीचे की कपड़ों में मेरे सामने खड़ी थी।
टॉप के अंदर उसने काले ही रंग की ब्रा पहनी थी और उस ब्रा के ऊपर से उसके सफेद दूध दिखाई दे रहे थे। मैंने जोश में आकर उसकी ब्रा भी निकाल दी और उसके बड़े बड़े दूध चूसने लगा।
मैंने ब्रा का हुक पीछे से खोला। स्ट्रैप्स उसके कंधों से सरकते हुए नीचे गिर गए। उसके भारी और गोल मम्मे एक झटके से आजाद हो गए। वे सफेद और नरम थे। गुलाबी निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। मैंने दोनों हाथों से उन्हें थामा। उनकी गर्मी और नरमी मेरी हथेलियों में महसूस हो रही थी। मैंने उन्हें धीरे से दबाया। फिर जोर से मसलने लगा। उसके मुँह से हल्की सी आह निकली। मैंने एक निप्पल को अपनी उँगलियों से घुमाया और फिर मुँह से चूस लिया। मेरा जीभ उसके निप्पल के चारों ओर घूम रही थी। मैंने उसे हल्का सा काटा भी। वह कराह उठी। मैंने दूसरे मम्मे को भी वैसा ही किया। पाँच मिनट तक मैं लगातार उन्हें चूसता रहा। कभी बाएँ तो कभी दाएँ। कभी दोनों को एक साथ दबाता। उसकी साँसें तेज हो गई थीं। उसका बदन थरथरा रहा था।
करीब पांच मिनट तक उसके मम्मों के साथ खेलने के बाद उसने मेरी पैंट उतार कर मेरा लौड़ा निकाल लिया और अपने मुट्ठी में भर कर वो मेरा लौड़ा हिलाने लगी। मेरा लौड़ा एकदम लोहे की छड़ की तरह हो गया था। उसने मेरे लौड़े को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
उसने मेरी बेल्ट खोली। पैंट का बटन खोला और जिप नीचे खींच दी। उसने पैंट को मेरी जाँघों तक सरका दिया। मेरी अंडरवियर में मेरा लौड़ा पहले से ही तना हुआ था। उसने अंडरवियर भी उतार दी। मेरा सात इंच का मोटा लौड़ा बाहर आ गया। उसने अपनी नरम हथेली से उसे थामा। उसकी उँगलियाँ लौड़े के चारों ओर लिपट गईं। वह धीरे धीरे ऊपर नीचे हिलाने लगी। मेरा लौड़ा और सख्त हो गया। उसकी हथेली गर्म थी। उसने अँगूठे से टिप पर लगा प्री कम को फैलाया। फिर वह झुकी। उसके गर्म होंठ मेरे लौड़े की टिप पर लगे। वह धीरे से चूसने लगी। उसकी जीभ लौड़े के चारों ओर घूम रही थी। वह आधा लौड़ा मुँह में ले लेती और फिर पूरी तरह चूसती। मेरी सीत्कारें निकलने लगी। आह। आह। ऊउइ माँ।
मुझसे अब रह पाना मुश्किल हो रहा था।
मैंने उसकी पैंट भी निकाल फेंकी। उसकी गुलाबी रंग की पैंटी देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। मैंने पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को चूम लिया। उसकी चूत बहुत ही गरम थी।
मैंने उसकी पैंट का बटन खोला और उसे नीचे सरका दिया। उसकी जाँघें नरम और गुलाबी थीं। उसकी गुलाबी पैंटी पर एक बड़ा सा गीला धब्बा दिख रहा था। मैंने पैंटी को भी उतार दिया। उसकी चूत पूरी तरह नंगी हो गई। उसकी चूत की लिप्स सूजी हुई और गीली थीं। मैंने अपना मुँह उसकी चूत पर लगाया। पैंटी के ऊपर से चूमने के बाद अब सीधे चूत को चाटने लगा। उसकी चूत बहुत गरम और नम थी। उसका स्वाद मीठा और थोड़ा नमकीन था। मैंने जीभ से उसकी क्लिटोरिस को घुमाया। वह जोर से काँप उठी। थोड़ी ही देर में उसकी चूत से पानी निकलने लगा। वो रह नहीं पा रही थी।
मैंने भी अब देर करना ठीक नहीं समझा और उसे अपनी कार की सीट पर लिटा कर उसकी चूत से अपना लौड़ा सटा कर जैसे ही धक्का लगाया उसके मुंह से चीख निकल गई। ऊओह्ह्ह। इतना बड़ा लौड़ा। इसे जल्दी से मेरे अंदर डाल दो। प्लीज जल्दी से डालो।
उसकी चीखें सुन कर मुझमें दुगना जोश भर गया और मैंने धक्के लगाते हुए अपना सात इंच का लौड़ा पूरा उसकी चूत में डाल दिया। अब मैं अपनी कमर हिलाने लगा। वो भी अपनी कमर उचका उचका कर मजे ले रही थी और मेरे लंड को पूरा अपनी चूत में डलवा रही थी। उसे बहुत मजा आ रहा था।
मैंने पहले मिशनरी पोजीशन में उसे सीट पर लिटाया। उसकी जाँघें फैली हुई थीं। मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत की लिप्स पर रगड़ा। फिर एक जोरदार धक्का दिया। लौड़ा आधा घुस गया। उसकी चूत तंग थी। वह चीखी। मैंने और धक्का लगाया। पूरा सात इंच उसकी चूत में चला गया। उसकी चूत की दीवारें मेरे लौड़े को जकड़ रही थीं। मैंने कमर हिलानी शुरू की। धीरे धीरे फिर तेज। हर धक्के पर उसके मम्मे उछल रहे थे। वह अपनी कमर ऊपर उठा उठा कर मेरा लौड़ा और गहरा ले रही थी। उसकी आँखें बंद थीं। मुँह से लगातार आहें और चीखें निकल रही थीं।
मैंने थोड़ी देर तक ऐसे ही धक्के लगाए और फिर उसे घोड़ी बन कर खड़े होने को कहा। फिर मैं उसके पीछे खड़े हो कर अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। मुझे भी बहुत मजा आ रहा था।
वह घोड़ी बन गई। उसकी कमर झुकी हुई थी। उसका गोल गधा मेरे सामने था। मैंने उसके कूल्हों को पकड़ा। लौड़े को फिर से उसकी चूत में घुसाया। पूरा लौड़ा एक ही धक्के में अंदर चला गया। अब मैं पीछे से जोर जोर से ठोकने लगा। हर धक्के पर उसके मम्मे आगे पीछे लहरा रहे थे। उसकी चूत से चुट चुट की आवाजें आ रही थीं। वह चीख रही थी। मुझे भी बेहद मजा आ रहा था। मेरा लौड़ा उसकी चूत की गहराई तक पहुँच रहा था।
थोड़ी देर बाद वो झड़ गई और बेहोश जैसे हो गई। अभी मेरा काम खत्म नहीं हुआ था इसलिए मैं अभी भी जोर जोर से धक्के मारे जा रहा था। करीब दस मिनट के बाद मेरा लंड भी अपना पानी छोड़ कर मुरझा गया।
अब हम उठ कर अपने कपड़े ठीक कर वापस काम पर लग गए। जब तक विशाल आया उसे कुछ पता ही नहीं था।
उस दिन के बाद वो मिलती तो विशाल से थी मगर चुदती मुझसे थी। अब मैं हर तीन दिन में एक बार उसे चोद ही लेता हूँ।
Note : यहां पोस्ट की गई हर कहानी सिर्फ मनोरंजन के लिए है,कृपया वास्तव जीवन में कहानी में घटित कोई भी चित्र प्रयोग करना घातक हो सकता है और इसका जिम्मेदारी कहानी के लेखक या फिर कहानी प्रस्तुतकर्ता नहीं होंगे,तो कृपया इस सबको अपने निजी जिंदगी के साथ मत जोड़ें और अपने बुद्धि,विवेक के साथ काम लें।
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